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बिजली बिल में मिलेगी प्रदेशवासियों को मिलेगी बड़ी राहत, 300 प्लस यूनिट के स्लैब को खत्म करने की तैयारी

भोपाल. मध्यप्रदेश में बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने वाली है। 300 से ज्यादा यूनिट के स्लैब को खत्म कर 151 यूनिट के स्लैब में जोड़ने की तैयारी है। ऐसा होने से प्रति यूनिट बिजली बिल 19 पैसे तक कम हो जाएगा जिससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा। हालांकि 19 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी का फायदा सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनके घर की बिजली की खपत हर महीने 300 यूनिट से ज्यादा हो रही है या फिर होती है। 300 प्लस यूनिट के स्लैब को खत्म करने की तैयारी मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 300 प्लस के स्लैब को खत्म करने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग को प्रस्ताव दिया है। अब 300 प्लस के स्लैब को 151 से 300 यूनिट के स्लैब में ही जोड़ा जाएगा। इस स्लैब को खत्म करने से बिजली बिल में करीब 70 रुपए तक की कमी आएगी। बता दें कि अभी प्रदेश में 0 से 15 यूनिट पर 4.27 रुपए यूनिट से बिजली बिल आता है। इसके अलावा 51 से 150 यूनिट पर 5.32 रुपए, 151 से 300 यूनिट पर 6.61 यूनिट और 300 से ज्यादा यूनिट पर 6.80 रुपए यूनिट के हिसाब से उपभोक्ताओं से बिल आता है। 19 पैसे प्रति यूनिट की आएगी कमी 300 प्लस यूनिट स्लैब खत्म होने से उपभोक्ताओं को 19 पैसे प्रति यूनिट कम बिल की राशि देनी होगी। पावर मैनेजमेंट कंपनी के चीफ जनलर मैनेजर शैलेंन्द्र सक्सेना के मुताबिक इससे उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा और बिजली बिल में 70 रूपए तक की कमी आएगी। इसके पहले भी बिजली कंपनी 500 यूनिट से ज्यादा खपत वाले स्लैब को खत्म कर चुकी है।

ट्रंप शासन में होगा भारतवंशियों का दबदबा, जानें कौन-कौन

नई दिल्ली. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के डायरेक्टर पद के लिए अपने निकट सहयोगी एवं विश्वासपात्र काश पटेल को नामित किया। यह सेलेक्शन ट्रंप के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। साथ ही ट्रंप ने अपने विरोधियों के विरुद्ध प्रतिशोध की इच्छा जताई है। ऐसे में इस पद के लिए पटेल का चयन मायने रखता है। इस तरह ट्रंप के नए प्रशासन एक और भारतवंशी को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। जानते हैं ट्रंप प्रशासन में किन भारतीय-अमेरिकी को अहम जिम्मेदारी मिल चुकी है। काश पटेल काश पटेल की नियुक्ति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही। पटेल अमेरिका में कानून व्यवस्था और नेशनल सिक्योरिटी को मजबूत करने पर फोकस करेंगे। 44 वर्षीय पटेल 2017 में तत्कालीन ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अंतिम कुछ हफ्तों में अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के रूप में भी काम कर चुके हैं। पेशे से वकील पटेल का संबंध गुजरात में वडोदरा से रहा है। पटेल भारत में अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर दिए बयान की वजह से भी चर्चा में रहे थे। विवेक रामास्वामी निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को नए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) के लिए चुना है। बिजनेसमैन रामास्वामी का काम सरकार को सलाह देना होगा। भारतवंशी रामास्वामी करोड़पति शख्स हैं और एक दवा कंपनी के फाउंडर भी हैं। विवेक रामास्वामी राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल थे लेकिन बाद में उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद उन्होंने ट्रंप का समर्थन करने का फैसला किया था। भारतीय प्रवासी के 39 वर्षीय पुत्र रामास्वामी पहले भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें ट्रंप ने अपने प्रशासन में शामिल किया है। उनके पिता वी गणपति रामास्वामी पेश से इंजीनियर हैं, जबकि उनकी माता गीता रामास्वामी मनोचिकित्सक हैं। उनके माता-पिता केरल से अमेरिका चले गए थे। सिनसिनाटी, ओहियो में जन्मे और पले-बढ़े, भारतीय मूल के बिजनेसमैन राष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी थे। उन्होंने हार्वर्ड से बायोलॉजी में ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की बायोटेक कंपनी, ‘रोइवेंट साइंसेज’ शुरू की। बायोटेक बिजनेसमैन की शादी अपूर्वा से हुई है, जो गले की सर्जन हैं। वे ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे कोलंबस, ओहियो में रहते हैं और उनके दो बेटे हैं। तुलसी गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व सदस्य तुलसी गबार्ड ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (डीएनआई) के रूप में सेवाएं देंगी। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह 2020 में वह राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार भी थीं। गबार्ड के पास पश्चिम एशिया और अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तीन बार तैनाती का अनुभव है। वह हाल ही में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़कर रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं। जय भट्टाचार्य ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक जय भट्टाचार्य को देश के टॉप हेल्थ रिसर्च एवं वित्त पोषण संस्थानों में से एक, ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (एनआईएच) के निदेशक के रूप में चुना है। इसके साथ ही भट्टाचार्य, ट्रंप द्वारा शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए नामित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। डॉ. भट्टाचार्य रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के साथ मिलकर राष्ट्र के मेडिकल रिसर्च की दिशा में मार्गदर्शन करेंगे। उषा वेंस भारतीय-अमेरिकी वकील उषा चिलुकुरी वेंस उस समय चर्चा में आईं, जब उनके पति जे डी वेंस को रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नामित किया गया। ट्रंप-वेंस की जीत के साथ, 38 साल की उषा अमेरिका की सेकंड लेडी बनने वाली हैं। इस भूमिका में उषा पहली भारतीय-अमेरिकी होंगी। उषा, ओहियो के सीनेटर जे डी वेंस (39) के साथ खड़ी थीं, जब ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद समर्थकों को संबोधित किया। भारतीय प्रवासियों की बेटी उषा सैन डिएगो उपनगर में पली-बढ़ीं। उनके माता-पिता का पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में वडलुरु है। पढ़ाई में होनहार छात्रा रहीं और किताबों से लगाव रखने वाली उषा ने आगे चलकर नेतृत्व के गुण दिखाए। उषा का जुड़ाव कैम्ब्रिज, येल यूनिवर्सिटी से भी रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न सदस्यों के लिए भी काम किया। उनकी आखिरी नौकरी मुंगर, टोल्स एंड ओल्सन एलएलपी में दीवानी मुकदमे की वकील के रूप में थी। उषा और वेंस की मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में 2014 में केंटकी में उनकी शादी हुई। वेंस के तीन बच्चे हैं। बेटे इवान और विवेक साथ ही एक बेटी जिसका नाम मिराबेल है।

महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री ने कहा-महायुति में आपसी समझ बेहतर है, आज मुख्यमंत्री पद को लेकर भी फैसला हो जाएगा

मुंबई महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पैतृक गांव पहुंचने के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चा पर शिंदे ने कहा कि मैं पहले ही अपना बिना शर्त समर्थन महायुति को दे चुका हूं, महायुति में आपसी समझ बेहतर है, आज मुख्यमंत्री पद को लेकर भी फैसला हो जाएगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंश के बीच अपने पैतृक गांव पहुंचे शिंदे ने कहा कि मैं अब स्वस्थ हूं। चुनाव के थकावट भरे कार्यक्रम के बाद मैं यहां पर आराम करने के लिए आया था। सीएम के रूप में अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान मैंने कोई छुट्टी नहीं ली। लोग अभी भी मुझसे मिलने आ रहे हैं। इसी थकावट के कारण मैं बीमार हो गया था। अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं। शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार लोगों की बात सुनेगी। मैंने पहले ही संगठन नेतृत्व को अपना बिना शर्त समर्थन दे दिया है। उनका जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में बात करते हुए शिंदे ने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 2.5 सालों में जो काम किया है उसे इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार के बेहतर प्रदर्शन के कारण ही लोगों ने हमें ऐतिहासिक जनादेश दिया है। जनता पर हमारा आशीर्वाद ऐसा रहा कि विपक्ष के पास विपक्ष का नेता चुनने की भी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि महायुति के तीनों सहयोगियों की आपसी समझ बहुत अच्छी है, जहां तक मुख्यमंत्री के पद का सवाल है तो उसका फैसला कल हो जाएगा। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जनता ने महायुति को ऐतिहासिक जनादेश दिया है। चुनावी नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ है। महायुति में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीख का ऐलान तो कर दिया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा नहीं की है। भाजपा के सूत्रों की मानें तो देवेन्द्र फडणवीस का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे है। फडणवीस पहले भी एक पंचवर्षीय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि निवर्तमान एकनाथ शिंदे सरकार में वह उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।

नारायण सिंह कुशवाह ने कहा- कल अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर पूरे प्रदेश हो आयोजन

भोपाल सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर पूरे प्रदेश के दिव्यांगों की क्षमताओं और उपलब्धियां का उत्सव मनाते हुए एक समावेशी समाज के निर्माण में प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए कार्यक्रम किये जाये। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि सुगम भारत अभियान के अंतर्गत हम सबको मिलकर सुगम वातावरण निर्माण और आईटीसी पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने का कार्य करना चाहिए इससे दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने का मार्ग प्रशस्त होगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों एवं सार्वजनिक स्थान पर दिव्यांगजनों के कार्यक्रम आयोजित किये जाएं। ऐसे आयोजनों से न केवल समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि जनता को सुगमता के महत्व के प्रति हम जागरूक भी कर सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस हमारी समाज के इस वर्ग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने वाला दिवस है। दिव्यांगजन, समाज की मुख्य धारा से जोड़कर आगे लाना और उनके लिए समान अवसर उपलब्ध कराना हम सब का दायित्व है।  

जल्द जारी होगी लाड़ली बहनों को अगली किस्त, खाते में आएंगे 1250 रु

भोपाल. मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों के लिए खुशखबरी है। दिसंबर का महीना लग गया है, जल्द ही योजना की अगली किस्त आने वाली है। संभावना जताई जा रही है कि इस बार भी बहनों के खाते में समय से पहले 5 से 10 दिसंबर के बीच 19वीं किस्त के 1250 रुपए भेजे जा सकते है, हालांकि फाइनल डेट को लेकर अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। दरअसल, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू किया गया था, पहले 1000 रुपए दिए जाते है लेकिन अब 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। जून 2023 से नवंबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 18 किश्तों का अंतरण किया गया है।अब योजना की 19वीं किस्त का इंतजार है।इधर, सीएम के राशि बढ़ाने के संकेत के बाद संभावना है कि नए साल 2025 में राशि में इजाफा किया जा सकता है। लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी। इसमें 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी। इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था। अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। लाड़ली बहनों को जून 2023 से अक्टूबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 17 किश्तों का अंतरण किया गया है। इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। किसे मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है। महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए। अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो। यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी। विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। कैसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं। वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर क्लिक करें। दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें। कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें। ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष, आज भी दफन है जहरीला कचरा

भोपाल. भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष इसी तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे हैं, पर गैस पीड़ितों को लेकर सरकारी वादों और जमीनी स्थिति में बहुत अंतर है। इतने वर्ष बाद भी जहरीला कचरा यूनियन कार्बाइड परिसर में दफन है। इस कारण भूजल प्रदूषित होने की बात सत्यापित हो चुकी है। वर्ष 2018 में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टाक्सिकोलाजी रिसर्च लखनऊ की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आ चुका है। भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास की 42 बस्तियों के भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन पाया गया था, जो कैंसर और किडनी की बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद इस क्षेत्र में नर्मदा जल की आपूर्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। आशंका है इन कालोनियों के अतिरिक्त प्रदूषित भूजल आगे पहुंच गया हो पर वर्ष 2018 के बाद जांच ही नहीं कराई गई। गैस पीड़ित संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि रैपिड किट से उन्होंने इनके अतिरिक्त कारखाने की साढ़े तीन किमी की परिधि में आने वाली 29 अन्य कालोनियों में भी जांच की तो आर्गनो क्लोरीन मिला है, पर कितना मात्रा में है इसकी जांच बड़े स्तर पर सरकार द्वारा कराने की आवश्यकता है। गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबाया गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि त्रासदी के पहले परिसर में ही गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबा दिया जाता था। इसके अतिरिक्त परिसर में बनाए गए तीन छोटे तालाबों में भी पाइप लाइन के माध्यम जहरीला अपशिष्ट पहुंचाया जाता था। इस कचरे की कोई बात ही नहीं हो रही। कारखाने में रखे कचरे को नष्ट करने के लिए 126 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे पीथमपुर में जलाया जाना है। पुनर्वास के लिए मिली राशि में 14 वर्ष बाद खर्च नहीं हो पाए 129 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2010 में 272 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें 75 प्रतिशत राशि केंद्र व 25 प्रतिशत राज्य सरकार की थी। इसमें भी 129 करोड़ रुपये आज तक खर्च नहीं हो पाए हैं। गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग आज तक इस राशि को खर्च करने की योजना ही नहीं बना पाया है। आर्थिक पुनर्वास के लिए 104 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 18 करोड़ रुपये स्वरोजगार प्रशिक्षण पर खर्च हुए बाकी राशि बची है। सामाजिक पुनर्वास के लिए 40 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें गैस पीड़ितों की विधवाओं के लिए पेंशन का भी प्रविधान है। 4399 महिलाओं को पेंशन मिल रही हैं। वर्ष 2011 से यह राशि एक हजार है जिसे बढ़ाया नहीं गया है। न ही किसी नए हितग्राही को शामिल किया गया है।

महाकुंभ: यात्रियों की सुविधा के लिए इटावा रीजन की करीब 489 बसों को भगवा रंग में रंगने की तैयारी में जुट गया

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जनवरी माह में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ के लिए रोडवेज की बसों को भगवा रंग से रंगा जाना शुरू कर दिया गया है। इटावा रीजन की स्पेशल 410 बसें कुंभ आने जाने वाले यात्रियों के लिए लगाई जायेंगी। इटावा रोडवेज परिक्षेत्र के प्रबंधक उमेश सीएस आर्य ने बताया कि इटावा रीजन में कुल 489 बसें हैं। जिसमें करीब 181 बसें पहले से ही भगवा रंग में रंगी हुई है। 50 अतिरिक्त नई बसें साधारण यात्रियों के लिए मुख्यालय से मांग की गई हैं। करीब 20 दिन चलने वाले महाकुंभ के लिए परिवहन निगम युद्ध स्तर से तैयारियों में जुटा हुआ है। इटावा रीजन से महाकुंभ में 229 बसों का किया जा रहा रंग रोगन इटावा में परिवहन निगम जनवरी से होने वाले महाकुंभ के लिए कुंभ जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए इटावा रीजन की करीब 489 बसों को भगवा रंग में रंगने की तैयारी में जुट गया है। परिवहन विभाग ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इटावा रीजन से महाकुंभ में 229 बसों का रंग रोगन किया जा रहा है। इटावा रीजन क्षेत्र में 181 बसे पहले से भगवा रंग में विभिन्न रूटों पर चलाई जा रहीं हैं। इसी के साथ 100 संविदा चालकों की भर्ती की जानी है। उन्होंने बताया कि इस महाकुंभ मेले में जिले से दूसरे चरण में 22 जनवरी से सात फरवरी तक 229 बसें सीधे प्रयागराज के लिए दौड़ेंगी। वर्तमान समय में सभी बसों पर कायाकल्प का कार्य चल रहा है। इटावा रीजन में 181 बसें पहले से भगवा रंग में विभिन्न मार्गों पर दौड रहीं आपको बता दें कि इटावा रीजन में 181 बसें पहले से भगवा रंग में विभिन्न मार्गों पर दौड रहीं हैं। जिनका कायाकल्प दो चरण में किया जा रहा है। कायाकल्प के बाद सभी बसों का भगवा कलर में रंग-रोगन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इटावा रीजन में 8 डिपो लगते हैं, इसमें इटावा समेत सैफई, मैनपुरी, बेबर, छिबरामऊ, फरुर्खाबाद, शिकोहाबाद फिरोजाबाद हैं। इन सभी डिपो से कुंभ मेले में आवश्यकता अनुसार बसें ली जाएगी। इससे अन्य रूटों पर बसों दिक्कत न हो। साथ ही कुंभ स्नान करने वाले इटावा जिले के साथ आसपास जिले के लोगों को सीधी प्रयागराज सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए 100 अतिरिक्त संविदा चालकों की भी भर्ती की जाएगी, जिसके लिए उनका साक्षात्कार करके उनको ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेजा जा रहा है।

कैलेंडर वर्ष 2024 में QIP जुटाई गई रकम ने 1 ट्रिलियन का आंकड़ा पार, तोड़ा रिकॉर्ड

नई दिल्ली कैलेंडर वर्ष 2024 (CY24) में योग्य संस्थागत प्लेसमेंट (QIP) के जरिए जुटाई गई राशि ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस साल अब तक 80 कंपनियों ने कुल 1.13 ट्रिलियन रुपये जुटाए हैं जोकि CY23 की तुलना में तीन गुना (3x) अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में केवल 35 कंपनियों ने 38,220 करोड़ रुपये जुटाए थे। इससे पहले CY20 में QIP के जरिए सबसे अधिक राशि जुटाई गई थी जब 25 कंपनियों ने 80,816 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। QIP से जुटाई गई कुल राशि 1.21 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की संभावना यदि गोदरेज प्रॉपर्टीज़ और KEI इंडस्ट्रीज के मौजूदा QIP इश्यूज़ पर विचार किया जाए जिनकी कुल राशि 8,000 करोड़ रुपये है तो CY24 में QIP के जरिए जुटाई गई कुल राशि 1.21 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच सकती है। इस साल ज्यादातर कंपनियां QIP के जरिए जुटाए गए फंड का उपयोग अपनी बैलेंस-शीट को मजबूत करने, पुनर्भुगतान (debt repayment), पूंजीगत खर्च (capital expenditure) और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करने की योजना बना रही हैं। बाजार विशेषज्ञों की राय स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा कि 2024 का साल द्वितीयक बाजारों के लिए अच्छा रहा है और इसके साथ ही कंपनियों ने अपनी बैलेंस-शीट को मजबूत करने के लिए QIP का सही इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि प्रमोटर्स ने द्वितीयक बाजारों में उछाल का फायदा उठाया और भविष्य के विकास के लिए धन जुटाया। QIP में बड़े इश्यू ज़ोमैटो का 8,500 करोड़ रुपये का QIP इस साल का एक बड़ा इश्यू रहा है। ज़ोमैटो ने इस रकम का उपयोग डार्क स्टोर और गोदामों के निर्माण और संचालन के लिए करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, ब्रांडिंग, विज्ञापन और प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढांचे में निवेश की योजना भी है। अन्य प्रमुख कंपनियां : गोदरेज प्रॉपर्टीज ने 6,000 करोड़ रुपये का QIP लॉन्च किया है, जिसे भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। : अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने अगस्त 2024 में QIP के जरिए 8,373 करोड़ रुपये जुटाए, जो कि भारतीय बिजली क्षेत्र में सबसे बड़ा फंडरेज़ है। : अदाणी एंटरप्राइजेज ने भी अक्टूबर में 4,200 करोड़ रुपये जुटाए हैं। : वेदांता और मदरसन इंटरनेशनल जैसी कंपनियों ने भी इस साल QIP के जरिए बड़े फंड जुटाए हैं। साल 2024 में QIP के इश्यू में बड़ा योगदान 2024 के जुलाई से अब तक 42 कंपनियों ने 72,293 करोड़ रुपये जुटाए हैं जो QIP से जुटाई गई कुल राशि का 69 प्रतिशत है। इस अवधि में बीएसई सेंसेक्स लगभग 79,000 के स्तर पर स्थिर रहा। 2025 में QIP के जरिए और धन जुटाने की संभावना इक्विनॉमिक्स रिसर्च के प्रमुख जी चोकालिंगम का कहना है कि 2025 में धन जुटाने के लिए QIP मार्ग की लोकप्रियता बढ़ेगी खासकर यदि द्वितीयक बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है। वहीं मनीष गोयल (इक्वेंटिस वेल्थ एडवाइजरी) का कहना है कि स्ट्रॉन्ग मार्केट और रिकॉर्ड फंड फ्लो को देखते हुए अगले कुछ महीनों में करीब 1.5 ट्रिलियन रुपये और जुटाए जाने की संभावना है। बता दें कि 2024 में QIP के माध्यम से कंपनियों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। यह वर्ष कंपनियों के लिए एक बेहतरीन मौका साबित हुआ है क्योंकि उन्होंने बाज़ार के उछाल का फायदा उठाते हुए अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया और भविष्य के लिए धन जुटाया।

रूस ने साल 2025 के सैन्य खर्चो को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया गया, सैन्य-केंद्रित बजट को दी मंजूरी

कीव रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रिकार्ड 145 अरब डालर के रक्षा बजट को मंजूरी दी है। रूस ने साल 2025 के सैन्य खर्चो को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान रूस का ये कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूक्रेन के साथ जारी युद्ध में रूस जीत हासिल करना चाहता है। रक्षा क्षेत्र में रूस का रिकॉर्ड बजट रविवार को एक सरकारी वेबसाइट के अनुसार रूस के राष्ट्रीय बजट का 32.5 प्रतिशत राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवंटित किया गया है, जो 13.5 ट्रिलियन रूबल (145 अरब से अधिक) है, जो इस वर्ष 28.3 प्रतिशत से अधिक रहा। रूसी संसद के दोनों सदनों, स्टेट ड्यूमा और फेडरेशन काउंसिल के सांसदों ने पहले ही इसे मंजूरी दे दी थी। रूस और यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा संघर्ष है और इसने दोनों पक्षों के संसाधनों को लगभग खत्म कर दिया है। बता दें कि रूसी सरकार ने माना है कि यूक्रेन में मॉस्को द्वारा चलाए जा रहे विशेष सैन्य अभियान और सेना को समर्थन की ज़रूरतें सामाजिक ज़रूरतों और तकनीकी विकास के साथ-साथ बजट की प्राथमिकता बनी रहेंगी। सरकार ने मसौदा बजट को संतुलित के रूप में पेश किया है, जिसमें इस साल के अनुमानित घाटे 1.7% के मुकाबले घाटा 0.5% तक गिर गया है और अगले तीन वर्षों के लिए राज्य का ऋण 20% के निशान से नीचे बना हुआ है। यूक्रेन को मिल रही पश्चिमी सहयोगियों से मदद वहीं, कीव को पश्चिमी सहयोगियों से अरबों डालर की मदद मिल रही है, लेकिन रूस की सेनाएं बड़ी हैं। साथ ही काफी उन्नत हथियारों से सुसज्जित हैं। यह भी देखा गया है कि जब से डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त कराने की बात कही है तब से लगातार रूसी सेना पूर्वी क्षेत्रों में यूक्रेनी सैनिकों को पीछे धकेल रही है। इस बीच, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। साथ ही उन्होंने यूक्रेन के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित की।

माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की तकनीकी समिति ने माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रदेश का आठवाँ टाइगर रिजर्व होगा। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव) श्री एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्तावित बाघ अभयारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर, बफर क्षेत्र 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा। समिति ने राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ को छोड़ने की भी मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिये प्रस्ताव भेजा गया था। श्री कृष्णमूर्ति ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गयी संरक्षण पहल माधव राष्ट्रीय उद्यान और कूनो राष्ट्रीय उद्यान में वन्य-जीव प्रबंधन को मजबूत करेगी। इससे स्थानीय समुदायों को अपेक्षित ईको-टूरिज्म का लाभ मिलेगा और क्षेत्र का विकास होगा।  

केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने म.प्र. की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सराहा

भोपाल केन्द्रीय लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में रविवार को इंदौर में विश्व एड्स दिवस का राष्ट्रीय आयोजन हुआ। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एड्स के खिलाफ भारत में एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जा रही है। इसमें आशातीत सफलता भी मिल रही है। देश में एचआईवी/एड्स नियंत्रण के लिये संकल्पबद्ध होकर तेजी से प्रयास किये जा रहे है। इसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे है। एचआईवी/एड्स प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा की जा रही है। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा 2017 से एचआईवी/एड्स नियंत्रण के लिये तेजी से प्रयास शुरू किये गये हैं। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि सतत् विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सभी का सहयोग जरूरी है। एचआईवी से प्रभावित व्यक्तियों को मौलिक अधिकारों के साथ उन्हें मानव अधिकार भी प्राप्त हो। उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। हमें उनके अधिकारों का सम्मान करते हुए उन्हें भी वहीं मान-सम्मान देना चाहिए, जो अन्य सामान्य व्यक्ति को हम देते हैं, जिससे वे सामान्य जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा एचआईवी/एड्स से प्रभावित लोगों की संख्या में कमी लाने और मृत्यु की संख्या को कम करने के लिये सतत विकास लक्ष्य निर्धारित किये है। यह लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने समाज के सभी वर्गों का आहवान किया कि वे इस दिशा में लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये पुन: संकल्प बद्ध होकर नई ऊर्जा और नई स्फूर्ति से जुट जाये। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि एचआईवी और एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम-2017 लागू किया गया। इस अधिनियम के माध्यम से एचआईवी/एड्स के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। इस अधिनियम से एचआईवी/एड्स से संक्रमित और प्रभावित व्यक्तियों के कानूनी और मानवाधिकारों को सुदृढ़ बनाया गया है। यह अधिनियम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने का भी प्रयास है। उन्होंने कहा कि एचआईवी/एड्स से प्रभावित व्यक्तियों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं, इलाज, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विश्व में नयी पहचान कायम की है। कोरोना प्रबंधन हो या अनेक संक्रामक बीमारियों के इलाज के लिये टीकों और दवाईयों की खोज हो, देश का विश्व में अग्रणी स्थान बना है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में मध्यप्रदेश की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश देश में इस क्षेत्र में अग्रणी है। मध्यप्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खोले गये है। आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं में मध्यप्रदेश देश में अव्वल केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में देश में सबसे आगे है और सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिये उन्होंने मध्यप्रदेश की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में तेजी से नये मेडिकल कॉलेज खोले गये है, आगे भी नए मेडिकल कॉलेज खोले जायेंगे। भोपाल में एम्स की स्थापना भी की गई है। मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। “टेक द राइट्स पाथ” के अनुरूप कार्य कर वर्ष 2028 तक वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व एड्स दिवस के अवसर पर इंदौर में यह कार्यक्रम आयोजित करने के लिये केन्द्रीय मंत्री नड्डा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से समुदायों, युवाओं, लाभार्थियों और विभिन्न संगठनों को एक साथ लाकर वर्ष 2030 तक एचआईवी/एड्स को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने, चुनौतियों का समाधान करने में मददगार होगा। हमारा प्रयास होगा की यूएन की थीम, “टेक द राइट्स पाथ” के अनुरूप कार्य कर वर्ष 2028 तक वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त किया जाये। ऐसे कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आयेगी। एचआईवी/एड्स की जंग में संघर्ष करने में मदद मिलेगी। समाज को साथ में लाकर एचआईवी/एड्स के खिलाफ जंग में जागरूकता लाई जायेगी। प्रदेश में तेजी से स्थापित हो रहे हैं नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस तरह भारत में सदी के सबसे भयावह दौर कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोविड से जंग लड़ी गई और सफलता हासिल की गई, उसे देखकर लगता है कि हम एचआईवी/एड्स के खिलाफ जंग में भी विजय हासिल करेंगे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरलीकृत व्यवस्था से प्रदेश में मेडिकल कॉलेज खोलने के कार्य को नयी गति मिली है। अब प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेज स्थापित हो रहे है। चिकित्सा शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। प्रदेश में एलोपेथिक के साथ ही अन्य चिकित्सा पद्धतियों से उपचार को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री इंदौर में विश्व एड्स दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए

इंदौर. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब भारत में टिटनेस की दवा को 40 साल, टीबी की दवा को 30 साल, डिप्थीरिया की दवा को 30 साल, जापानी बुखार को ठीक करने वाली दवा आने में 100 साल लग गए, लेकिन कोरोना के दो टीके नौ माह में आ गए। जिन्होंने कई लोगों की जिंदगी बचाई। हमने चालीस देशों को मुफ्त कोरोना की दवा दी। यह बदलता भारत है। कोरोना मैनेजमेंट को उठाकर देखिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि अमेरिका में स्ट्राइक हुई, यूरोप में लोगों ने लॉकडाउन लगाने से रोका, कई देश लॉकडाउन लगाने के लिए तय नहीं कर पाए। वे असमंजस में थे। लेकिन भारत में पहले जनता कर्फ्यू, फिर लॉकडाउन लगाए। भारत ने पीपीई किट बनाए, आईसीयू में जगह तैयार की, सैनेटाइजर, मास्क बनाए। तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जान भी है और जहान भी। दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज कोरोना वैक्सीन बनाने का अभियान भारत में चला। अब भारत लेने वाला नहीं, बल्कि देने वाला देश बन चुका है। कोरोना का मैनेजेमेंट देश में प्रभावी रहा। वे रविवार को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर इंदौर के खंडवा रोड स्थित देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एड्स को लेकर चर्चा करने में कई संकोच नहीं करना चाहिए। जब मैं इस पर बात कर सकता हूं तो आपको भी समाज में जाकर खुलकर चर्चा करना चाहिए। स्कूलों में कार्यक्रम होना चाहिए। 9वीं-10वीं के बच्चों को जागरूक् करना चाहिए। कैंपेन चलाना चाहिए। हेल्दी बिहेवियर को प्रमोट करना चाहिए। वर्ल्ड एड्स डे एचआईवी और उसके खिलाफ चल रही जंग को डेडिकेट और रि-डेडिकेट करने का दिन है। यह दिन अपने आप को एचआईवी से प्रोटेक्ट करने का दिन है। अभी ऐसी कोई दवा नहीं आई है जो पूरी तरह एचआईवी को ठीक कर सके। दवाएं तो पूरे समय खाना पड़ेंगी, लेकिन दवाओं से व्यक्ति पूरे जीवन स्वस्थ रह सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को समाज में जगह देना चाहिए। नई जनरेशन को एड्स के काले अध्याय की जानकारी नहीं नड्‌डा ने कार्यक्रम में मौजूद बच्चों से बात करते हुए कहा कि हमारे समाज ने देश में एड्स की लंबी लड़ाई लड़ी है। लेकिन हमारे नौजवानों ने अंधकार का वो काला दौर नहीं देखा। इसलिए आपको मालूम नहीं है कि एड्स का मतलब क्या है। आप लोगों ने 80 का दसक नहीं देखा। आपको मालूम नहीं है कि एड्स मतलब क्या होता है। उस समय अगर कोई एड्स मरीज किसी को छू जाए तो लोग डर जाते थे। लोग ऐसे परिवारों से दूर रहते थे। हेयर कटिंग सैलून वाला बार-बार अपने उस्तरे को पोछ्ता था तब डर लगता था। यह दौर शायद मुख्यमंत्री, सिलावट और राजेंद्र शुक्ला ने देखा है। 95 फीसदी एचआईवी मरीजों को समय पर इलाज नड्‌डा ने कहा कि एक समय था जब दुनिया में एड्‌स की दवा नहीं थी और जब दवा आई तो इतनी महंगी थी कि गरीब आदमी उन दवाओं को ले नहीं सकता था। हमारे देश की कंपनियों ने दुनिया में एड्स की सबसे सस्ती और इफेक्टिव दवाएं बनाईं। इनके माध्यम से हम अफ्रीका, साउथ अफ्रीका, लेटिन अमेरिका समेत कई देशों की मदद कर रहे हैं। हम देश के 95 फीसदी एचआईवी मरीजों तक समय पर दवा पहुंचा रहे हैं। देश का हेल्थ केयर सिस्टम मजबूत हुआ उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और खासकर हमारे भारत के लोग हेल्थ केयर सिस्टम को लेकर काफी सजग हो गए हैं। हमारा हेल्थ केयर सिस्टम काफी मजबूत है। वह एड्स पीड़ितों को लंबा जीवन दे सकते हैं। आप लोगों की भी जिम्मेदारी है कि पीड़ितों का ध्यान रखें। जो सर्विस प्रोवाइडर है वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं उनका मनोबल बढ़ाए। मैं इस बीमारी में लगे हेल्थ वर्कर और हेल्थ प्रोवाइडर को सलाम करता हूं। मुझे खुशी है कि जब मैं स्वास्थ्य मंत्री बना तो मुझे एचआईवी प्रोटेक्शन को लेकर एक्ट में सुधार करने का मौका मिला। लोगों को एकजुट होने की जरूरत नड्‌डा ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा कि आप लोगों की उपस्थिति बता रही है कि आप सभी एड्स के खिलाफ लड़ाई लड़ने और प्रोटक्शन को लेकर प्रतिबद्ध है। लोग एड्स पीड़ितों को सामाजिक दृष्टि से देखें और उन्हें मुख्य धारा में लाने का प्रयास करें। इन लोगों को इनका अधिकार दिलाने का दिन है। लोग उनसे घृणा नहीं करें उनकी स्थिति समझें। यह समझें कि वह फिर से ठीक होकर अच्छा जीवन जी सकते हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री तुलसी सिलावट सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एड्स रोगी को अच्छा इलाज और समाज से मदद मिले तो रोगी इस बीमारी पर जीत हासिल कर जीवन यापन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद देश का स्वास्थ्य विभाग पर विश्वास और पक्का हुआ है। भारत ने तब दूसरे देशों की भी मदद की। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नड्डा ने ‘विश्व एड्स दिवस’ पर इंदौर में आयोजित एड्स के प्रति जन-जागरूकता पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन भी किया। इससे पहले नड्डा विमान से इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उनका स्वागत किया।

पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की करैरा में शुरु हुई कथा

करैरा. मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में रविवार को सुबह से ही लाखों लोगों का जमावड़ा लग गया। यहां बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा का कार्यक्रम आयोजित किया गया है जिसके लिए आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त आए हैं। कथास्थल पर करैरा में पहली बार 5 लाख स्क्वायर फीट का विशाल पंडाल तैयार किया गया है। शनिवार देर रात तक कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। कथा शुरू होने से पूर्व रविवार सुबह 21 हजार कलशों की यात्रा निकाली गई जिसमें हजारों महिलाएं और युवतियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं। बाबा का बाग बगीचा मंदिर पर 1 दिसंबर से अनेक धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ हुए। यहां 8 दिनों तक श्रीमद भागवत कथा, 51 कुंडीय सीताराम महायज्ञ, शतचंडी अनुष्ठान, कन्या शुभ विवाह आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रीमद भागवत कथा बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र कुमार शास्त्री सुनाएंगे। भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व रविवार सुबह 10 बजे से अनाज मंडी से कलश यात्रा शुरू हुई जोकि मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल बाबा का बाग बगीचा पहुंची। कलशयात्रा में 21 हजार महिलाएं व युवतियां शामिल हुईं। 34 बीघा में बनाया पांडाल पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं। यहां 34 बीघा जमीन में 5 लाख स्क्वायर फीट का पंडाल बनाया गया है। करैरा में पहली बार इतना विशाल पंडाल बनाया गया है जिसमें विशेष मंच भी तैयार किया गया है। कथा में आने-जाने वाले लोगों के लिए दर्जन भर जगहों पर पार्किग बनाई गईं हैं। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियोें के अनुसार करैरा क्षेत्र में इससे पहले इतना बड़ा आयोजन नहीं हुआ है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में सुरक्षा को लेकर 1 हजार पुलिसकर्मी जगह-जगह तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिले के अलावा अन्य शहरों से भी पुलिस फोर्स बुलाया गया है। करैरा में कथास्थल पर जाने के लिए पार्किंग व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पुलिस ने ट्रैफिक चार्ट जारी किया है। नरवर, भितरवार एवं ग्वालियर से आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था नरवर भितरवार रोड पर ब्रजधाम मैरिज गार्डन के पास मैदान, खैराघाट तिराहा के पास रोड के दोनों ओर एसीक्रेट हार्ट स्कूल व जेल के सामने रहेगी। इस मार्ग से आने वाले भक्तों के लिए 5 पार्किंग बनाई गई हैं। सभी भक्त वाहन पार्क कर ब्रजधाम एवं खैराघाट पार्किंग के बीच से नया कच्चा मार्ग से होते हुए एवं कुम्हारपुरा होते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकेंगे। शिवपुरी, ग्वालियर, गुना से आने वाले भक्तों के लिए 3 पार्किंग बनाई गई हैं, जिसमें महुअर कोलोनी, पृथ्वी ढाबा एवं कॉलेज तिराहा शामिल हैं। इन स्थानों पर पार्किग के बाद भक्त सहायता केन्द्र से होते हुए पैदल कथास्थल पहुचेंगे। भौती व पिछोर तरफ से आने वाले वाहनों के लिए फिल्टर रोड पर पार्किंग व्यवस्था की गई है। इस मार्ग से आने वाले भक्त फिल्टर रोड पर वाहन पार्क कर फिल्टर रोड होते हुए कच्ची गली एवं सहायता केन्द्र होते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुुंच सकेंगे। टीला गाँव की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टीला रोड पर पार्किंग व्यवस्था की गई है। यहां से कालेज होते हुए पुलिस लाइन होकर सहायता केन्द्र से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकेंगे। झांसी, दतिया, दिनारा की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था करैरा मंडी के पीछे रहेगी। यहां से श्रद्धालु वाहन पार्क कर पैदल कामांछा माता मन्दिर होकर एवं न्यू तहसील के पीछे हरदौल मन्दिर से पुलिस लाईन होते हुए सहायता केन्द्र होकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकेंगे। वीआईपी पार्किंग की व्यवस्था बालक उत्कृष्ट विद्यालय करैरा में की गई है।

38160 परिक्षार्थी देंगे परीक्षा, राजस्थान-पशु परिचर भर्ती परीक्षा में कड़ी जांच के बाद एंट्री

नागौर. नागौर जिला मुख्यालय पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड जयपुर द्वारा आयोजित पशु परिचय भर्ती परीक्षा 2023 के नागौर जिला मुख्यालय पर कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा 9:00 बजे से शुरू होगी वहीं परीक्षा के 1 घंटे पहले यानी 8 बजे परीक्षा केंद्र का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया है। नागौर में आज पहले दिन कुल 6360 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। वहीं कल 3 दिनों तक कुल 38160 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। वहीं सुबह 8:00 बजे पुलिस के कड़ी सुरक्षा के बीच जिला ट्रेजरी से पेपर अतिरिक्त जिला कलेक्टर की मौजूदगी में रवाना किया गया। अतिरिक्त कलेक्टर चंपालाल जीनगर ने बताया है कि हमने यहां से पेपर रवाना कर दिया गया है। नागौर जिला मुख्यालय पर 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं और परीक्षा 9 बजे से शुरू होगी। एंट्री 8:00 बजे बंद हो जाएगी। 8:00 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं अजमेर से भर्ती बोर्ड परीक्षा से ऑब्जर्व अभी यहां पर आए हुए हैं और जिला प्रशासन यहां पूरी तरह मुस्तैद हैं।

रायगढ़ में राईस मिल में आग, बड़ी मशक्कत के बाद आग पर पाया गया काबू

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में राईस मिल में आग लगने की घटना घटित हुई। आग किन कारणों से लगी है वह स्पष्ट नहीं है, पर शाॅट सर्किट की संभावना जतायी जा रही है। घटना की सूचना पर तत्काल पुलिस व दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पा लिया गया। शहर के छातामुड़ा क्षेत्र में कृष्णा साॅल्वेंट नामक राईस मिल का संचालन किया जाता है। आज दोपहर एकाएक यहां आग लग गई। आग की लपटे व धुंआ दूर से देखा जा रहा था। इस दौरान यहां काम कर रहे कुछ वर्करों के बीच हड़कंप की स्थिति मच गई और घटना की सूचना पुलिस व दमकल विभाग को दी गई। ऐसे में तत्काल मौके पर पुलिस व फायर ब्रिगेड पहुंच गई और आग को दमकल की मदद से बुझाने का प्रयास किया गया। जहां काफी मशक्कत के बाद करीब एक से डेढ़ घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभावना जतायी जा रही है कि शाॅट सर्किट की वजह से आग लग गया। नुकसान का किया जाएगा आंकलन राईस मिल में आग फैल रही थी, लेकिन दमकल की टीम ने किसी तरह इसे बुझा लिया और इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं होना बताया जा रहा है। आग के कारण काफी कुछ यहां जल गया, जिसके नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। आवेदन अभी थाना नहीं आया इस संबंध में जूटमिल थाना प्रभारी ने बताया कि नुकसान का आंकलन अभी नहीं किया गया है। कृष्णा साॅल्वेंट के संचालक के द्वारा अभी लिखित में कोई आवेदन थाना में नहीं दिया गया है, लेकिन सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर फायर ब्रिगेड की मदद से आग को बुझा लिया गया है।  

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