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केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिए भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति देने में विलंब नहीं होना चाहिए

भोपाल  मध्य प्रदेश में शासकीय सेवकों पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों में संबंधित विभाग अभियोजन की स्वीकृति को लटकाकर नहीं रख सकेंगे। उन्हें चार माह में अभियोजन स्वीकृति देनी ही होगी। केंद्र सरकार ने इसे लेकर राज्यों को निर्देश दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति देने में विलंब नहीं होना चाहिए। कहा गया है कि ऐसे मामलों में चार माह के भीतर आरोपित शासकीय सेवक के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति दी जाए। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में वैसे तो तीन माह में अभियोजन की स्वीकृति दी जानी चाहिए, पर विशेष परिस्थिति में यह अवधि अधिकतम एक माह बढ़ाई जा सकती है। अभियोजन की स्वीकृति लंबित है भारत सरकार के कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस संबंध में पत्र जारी किया है। बता दें, मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े 274 प्रकरण लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में चल रहे हैं। इनमें अधिकतर मामलों में अभियोजन स्वीकृति लंबित है। लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू में 35 कलेक्टर-एसडीएम सहित 27 विभागों के 274 आरोपित विधानसभा में दी गई जानकारी के आधार पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू में 35 कलेक्टर-एसडीएम सहित 27 विभागों के 274 शासकीय अधिकारी -कर्मचारी आरोपित बनाए गए हैं। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रमेश थेटे के विरुद्ध 25 प्रकरण दर्ज है। अधिकांश प्रकरणों में रमेश थेटे के साथ तहसीलदार आदित्य शर्मा भी आरोपित बनाए गए हैं। इनके विरुद्ध वर्ष 2013 में ही अलग-अलग दिनांक को विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वर्ष 2014 और 2015 में अभियोजन स्वीकृति मांगी गई थी। कलेक्टरों और एसडीएम के नाम शामिल अन्य आईएएस अधिकारियों में सेवानिवृत्त आईएएस अजातशत्रु श्रीवास्तव, बृजमोहन शर्मा, कवींद्र कियावत, अरुण कोचर, अखिलेश श्रीवास्तव, शिवपाल सिंह, मनोज माथुर सहित 35 कलेक्टर, एसडीएम के नाम शामिल है। वहीं छिंदवाड़ा जिले में अमरवाड़ा के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) फरतउल्ला खान बालाघाट जिले में बैहर के तत्कालीन एसडीएम प्रवीण फुलगारे और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त विवेक सिंह के विरुद्ध प्रकरण दर्ज है। इनके प्रकरणों में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू ने शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगी है, लेकिन अधिकांश प्रकरणों में स्वीकृति नहीं मिली। विभाग और आरोपित सामान्य प्रशासन विभाग- 35 राजस्व – 30 सहकारिता – 8 गृह पुलिस – 2 पीडब्ल्यूडी – 7 पंचायत एवं ग्रामीण विकास – 18 वन – 1 स्वास्थ्य – 10 नगरीय विकास एवं आवास – 36 जन जातीय कार्य (आदिम जाति कल्याण) – 3 वाणिज्यिककर – 5 वित्त – 2 महिला एवं बाल विकास – 3 स्कूल शिक्षा – 2 खाद्य नागरिक आपूर्ति – 2 संसदीय कार्य – 1 जल संसाधन – 7 पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण – 2, श्रम – 1 पीएचई – 1 उद्यानिकी – 1 उच्च शिक्षा – 2 कृषि – 3 होमगार्ड -1 विमानन विभाग – 1 राज्य के अन्य निकाय – 88 विभागवार कुल आरोपित – 274 (नोट – संबंधित प्रकरण और आंकड़े विधानसभा के जुलाई माह के सत्र में दी गई जानकारी के आधार पर है।)

बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना , संभावित नामों में शिवराज और देवेंद्र फडणवीस, डॉ सरोज पांडेय का नाम भी

नई दिल्ली  हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में शानदार जीत के बाद बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना होगा। हालांकि बीजेपी की ओर से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर कवायद तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली मुख्यालय में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ समेत कई दिग्गज नेता नजर रखे हुए हैं। इस बीच कुछ नाम सामने आए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन नामों में से ही एक नाम बीजेपी के नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकता है। ये नाम हैं- शिवराज सिंह चौहान, डॉ सरोज पांडेय और देवेंद्र फडणवीस। सूत्रों ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष का नाम तय करने के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस के नेताओं के बीच बैठक के बाद ये तीन नाम सामने आए हैं। शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस और डॉ सरोज पाण्डेय में से ही कोई अध्यक्ष बनाया जाएगा। चर्चा में क्यों हैं ये नाम? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के दिग्गज नेता हैं। पार्टी के अंदर उनकी अच्छी साख है। ऐसे में वह प्रबल दावेदार हैं। उधर देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के युवा चेहरे हैं। महाराष्ट्र जीत के बाद बीजेपी फडणवीस को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर पार्टी मंथन कर रही है। फडणवीस को पीएम मोदी और अमित शाह का भी करीबी माना जाता है। वहीं बीजेपी इस बार चौंकाने वाला फैसला करते हुए बीजेपी की कद्दावर महिला नेता डॉ सरोज पाण्डेय को भी अध्यक्ष पद पर बैठा सकती है। उधर राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा भी है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है, क्योंकि इस समय बीजेपी के अहम पदों में से किसी भी पद पर दक्षिण भारत का नेता नहीं है। लोकसभा चुनाव के लिए बढ़ाया गया था नड्डा का कार्यकाल बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जून तक बढ़ा दिया गया था। उनका कार्यकाल इस साल जनवरी में खत्म हो रहा था। बीजेपी में नए अध्यक्ष के चयन से पहले संगठन का चुनाव जरूरी होता है, जिसमें आमतौर पर 6 महीने का समय लगता है। इसलिए वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 6 महीने तक बढ़ा दिया गया था।

देश में उत्पादकता में सुधार 2023-24 में दूध उत्पादन बढ़कर 239 मिलियन टन हो गया

नईदिल्ली भारत का दूध उत्पादन 2023-24 में 4 प्रतिशत बढ़कर 239.3 मिलियन टन हो गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी 2022-23 में 459 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 2023-24 में 471 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत के दूध उत्पादन में औसत वृद्धि दुनिया के औसत 2 प्रतिशत के मुकाबले 6 प्रतिशत रही है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 के अवसर पर बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2024 जारी की, जिसे हर साल 26 नवंबर को श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन के सम्मान में मनाया जाता है, जिनका जन्म इसी दिन हुआ था। दूध उत्पादन बढ़कर लगभग 239 मिलियन टन राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि उत्पादकता में सुधार के कारण 2023-24 में दूध उत्पादन बढ़कर लगभग 239 मिलियन टन हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, “विदेशी/संकर नस्ल मवेशियों से दूध उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले वर्ष की तुलना में 2023-24 में देशी मवेशियों से दूध उत्पादन में 44.76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।” अंडा उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023-24 में कुल अंडा उत्पादन 3.17 प्रतिशत बढ़कर 142.77 बिलियन हो गया। प्रति व्यक्ति अंडे की उपलब्धता 103 अंडे प्रति वर्ष है। मांस उत्पादन में 4.95 प्रतिशत की वृद्धि इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया कि मांस उत्पादन में 4.95 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2023-24 में 10.25 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। देश में कुल ऊन उत्पादन 33.69 मिलियन किलोग्राम आंका गया है। डेयरी किसानों को संगठित क्षेत्र में लाने की आवश्यकता केंद्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों को संगठित क्षेत्र में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया क्योंकि इससे दूध उत्पादन और उनकी आय बढ़ेगी और बिचौलियों को खत्म किया जा सकेगा। उन्होंने डेयरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बात की। केन्द्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों से अपने पशुओं का टीकाकरण करने को कहा केंद्रीय मंत्री रंजन सिंह ने डेयरी किसानों से अपने पशुओं का टीकाकरण करने को कहा क्योंकि सरकार उन्हें बीमारी से बचाने में मदद करने के लिए मुफ्त टीकाकरण प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि खुरपका और मुंहपका रोग तथा ब्रुसेलोसिस को 2030 तक देश से खत्म कर दिया जाएगा और इससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार का पशुधन की नस्ल सुधार पर भी ध्यान केंद्रित केंद्रीय मंत्री ने डेयरी किसानों से सेक्स-सॉर्टेड सीमन और कृत्रिम गर्भाधान को बड़े पैमाने पर अपनाने को भी कहा। रंजन सिंह ने कहा कि सरकार पशुधन की नस्ल सुधार पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

किसानों और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया:चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी

बेंगलुरु विश्व वोक्कालिगा महासमस्तन मठ के प्रमुख कुमार चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी ने वक्फ संपत्ति विवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसा कानून लाया जाना चाहिए। जिसमें मुस्लिम समुदाय के पास वोट देने का अधिकार न हो। उन्होंने किसानों और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया। वक्फ बोर्ड पर सवाल स्वामीजी ने कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा किसी की भी जमीन पर दावा करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इसे धर्म के खिलाफ बताते हुए कहा, “किसानों की जमीन छीनना धर्म नहीं है। सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ना चाहिए कि किसानों की जमीन उनके पास ही रहे।” किसानों के समर्थन में अपील बेंगलुरु में भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित एक विरोध सभा में उन्होंने किसानों को अन्नदाता बताते हुए उनकी रक्षा की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा “किसानों की जमीन और संपत्ति सुरक्षित रहनी चाहिए। कोई भी इसे न छीन सके। यह सुनिश्चित करना जरूरी है।” वोटिंग अधिकार पर विवादित बयान स्वामीजी ने सुझाव दिया कि भारत में मुसलमानों को वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा “नेता वोटों के लिए गलत फैसले लेते हैं। अगर मुसलमानों को वोट का अधिकार न हो, तो हर कोई शांति से रह सकता है। पाकिस्तान में भी ऐसा ही किया गया है। जहां गैर-मुसलमानों को वोट देने का अधिकार नहीं है। भारत में भी ऐसा होना चाहिए।” वक्फ संपत्ति पर विवाद कर्नाटक में कुछ किसान और संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है। इस मुद्दे को लेकर किसान समूह, कुछ संगठन और विपक्षी बीजेपी इसका विरोध कर रही है।  

केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा फैसला लेगी! न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार

नई दिल्ली फरवरी में पेश होने वाले बजट 2025-26 से पहले 8वें वेतन आयोग की चर्चा तेज हो चली है।चुंकी सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है। 7वें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था, लेकिन इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई, जिसका समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म होगा, इस आधार पर अब अगले वेतन आयोग की मांग उठने लगी है। कयास लगाए जा रहे है कि केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार तक पहुंच सकती है।हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बता दे कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अलग-अलग आर्थिक मापदंडों खासतौर पर महंगाई के हिसाब से रिवाइज किया जाता है। 8th Pay Commission लागू हुआ तो बढ़ेगा फिटमेंट फैक्टर ?     मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2025-26 में अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो फिटमेंट फैक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर 2.57 से बढ़कर 2.86 फीसदी हो सकता है, जिससे न्यूनतम सैलरी में 186 फीसदी की वृद्धि होगी।     वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केन्द्रीय कर्मचारियों का फिटमेंट फैक्टर 2.57 है और बेसिक सैलरी 18000 है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में मोदी सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.86% कर सकती है।इससे सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 186 प्रतिशत बढ़कर 51,480 रुपए हो जाएगा और पेंशन में भी 186 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो मौजूदा पेंशन 9,000 रुपए से बढ़कर 25,740 रुपये हो जाएगी।हालांकि अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     इससे पहले आखिरी बार केन्द्र सरकार ने 2016 में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया था और इसी साल से 7th pay commission को भी लागू किया गया था।इससे करीब 48.62 लाख कर्मचारियों और 67.85 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। Fitment Factor वृद्धि की मांग क्यों?     फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके जरिए सैलरी (Salary) और पेंशन (Pension) में संशोधन किया जाता है।फिटमेंट फैक्टर का केन्द्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय करने में अहम रोल माना जाता है।     इस फैक्टर के कारण ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में ढाई गुना से अधिक की बढ़ोतरी होती है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही पुरानी बेसिक पे से रिवाइज्ड बेसिक पे की कैलकुलेशन की जाती है।पिछली वेतन आयोग की रिपोर्ट में फिटमेंट फैक्टर एक महत्वपूर्ण सिफारिश है, इसी आधार पर वेतन वृद्धि तय होगी।     यदि 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपए है, तो भत्तों को छोड़कर उसकी सैलरी 20,000 X 2.57= 51,400 रुपए होगी। अगर इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.86 कर दिया जाता है, तो यही सैलरी 20,000 x 2.86 = 57,200 रुपये हो जाएगी।

अब अमेठी में भी पुलिस हाई अलर्ट पर, धारा 144 लागू

अमेठी उत्तर प्रदेश के संभल स्थित मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद अब अमेठी में भी पुलिस हाई अलर्ट पर आ गई है। ड्रोन के साथ सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अमेठी में सभी संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। पूरे जिले में धारा 144 लागू की गई है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस द्वारा हर आने-जाने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि देखे जाने पर पुलिस फौरन कार्रवाई कर रही है। शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश है कि अगर कहीं भी किसी भी प्रकार की संदिग्ध स्थिति देखने को मिले, तो फौरन कार्रवाई की जाए। उल्लेखनीय है कि संभल में मस्जिद सर्वे के दौरान टीम पर कुछ युवकों ने पथराव कर दिया था। इसके बाद हालात बिगड़ गए। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे युवक पुलिस पर हमला कर रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे में दिख रहे युवकों की उम्र 20 से 30 साल के बीच बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को संभल हिंसा में संलिप्त उपद्रवियों के पोस्टर भी जारी कर दिए हैं, जिन्होंने हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था। शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश है कि उपद्रव में शामिल लोगों से सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की भरपाई की जाएगी। किसी भी दंगाई को बख्शा नहीं जाएगा। शासन द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि उपद्रव में शामिल लोगों के बारे में जानकारी देने वाले को उचित इनाम भी दिया जाएगा।

उच्च न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ अधिवक्ताओं को मिलेगा QR कोड पहचान पत्र

बिलासपुर उच्च न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया जा रहा है. इस लिहाज से कोर्ट के अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा अधिवक्ताओं, सहायकों और परिसर में कार्यरत अन्य शासकीय विभागों के कर्मियों के लिए क्यूआर कोड/बार कोड मय फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था बनाई जा रही है. रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश में शासकीय कर्मचारी-अधिकारियों के अलावा अधिवक्ताओं और सुरक्षा कर्मियों से पहचान पत्र बनवाकर, संबंधित जानकारी कोर्ट में आने-जाने के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन की जानकारी एडिशनल रजिस्ट्रार कार्यालय में 15 जनवरी, 2025 तक उपलब्ध कराने कहा गया है.

मुख्यमंत्री यादव ने प्रदेश में निवेश बढ़ाने उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लंदन के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सेक्टर केंद्रित राउंड-टेबल मीटिंग कर निवेश संबंधी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने वन-ऑन-वन बैठकों में प्रत्येक निवेशक की परियोजना और आवश्यकताओं को ध्यानपूर्वक सुना और मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बेहतर अवसर और नीतिगत समर्थन का भरोसा दिलाया। राउंड-टेबल चर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन, नवकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडोरामा ग्रुप, एसआरएएम एंड एमआरएएम ग्रुप, सायनकॉननोड, हाइब्रिड एयर व्हीकल्स लिमिटेड, क्लिनीसप्लाईज, औरोरा एनर्जी रिसर्च, एल्सेवियर, वीडिलीवर, कैपरो, वेबसाइट, द मोंटकैल्म लग्ज़री होटल्स, फाइला अर्थ, एम्पर्जिया लिमिटेड, अयाना कंसल्टिंग, पैंजिया डेटा लिमिटेड, इनवर्जी, बीईएम ग्रुप लिमिटेड, डैक्स फर्स्ट, रैनसैट ग्रुप, कोगो इकोटेक सॉल्यूशंस, एम्पैटी.एआई, मनी फॉर बिजनेस लिमिटेड, डीएएम हेल्थकेयर लिमिटेड और हेलियन जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने और संभावित सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक माहौल और निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंड-टेबल परिचर्चाओं में भाग लिया। इन परिचर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और फूड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल राज्य को एक वैश्विक निवेश स्थल बनाने और उद्योगपतियों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करने में परिणामोन्मुखी साबित होगी। साथ ही ये बैठकें औद्योगिक विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ मध्यप्रदेश के विकास के लिए नई संभावनाओं को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।  

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट के राम जन्म भूमि फैसले का हिंदी संस्करण जारी किया

नई दिल्ली कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 75वें संविधान दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के राम जन्म भूमि फैसले का हिंदी संस्करण जारी किया है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने राम जन्मभूमि पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले का हिंदी संस्करण कानून एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत विधि साहित्य प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस मौके पर सरकार ने भारतीय संविधान पर एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम की भी घोषणा की है। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित इस समारोह में कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी में अनुवाद कानूनी साहित्य को अधिक आसान, समावेशी और समझने योग्य बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारे राष्ट्र की भावना का प्रतीक है। इस मौके पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी, कानून सचिव राजीव मणि और अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोज कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और वकील उपस्थित थे। समारोह का आयोजन कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा किया किया गया था। इस अवसर पर विभाग ने भारतीय संविधान पर एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम की भी घोषणा की। यह पाठ्यक्रम लोगों को भारतीय संविधान के प्रमुख पहलुओं से परिचित होने की सुविधा देगा। मनोज कुमार ने कहा कि इस पहल को बड़े पैमाने पर जनता के बीच संविधान की समझ बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।  राम मंदिर निर्माण में मजदूर बने चुनौती अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक का आज दूसरा दिन है। राम मंदिर निर्माण में अब तक 800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। निर्माण पूरा होने में लगभग 1800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राम मंदिर निर्माण में अभी भी मजदूरों की कमी है। मजदूरों की संख्या को दोगुनी करने के लिए निर्माण समिति ने एलएंडटी से अनुरोध किया है। 22 जनवरी 2025 को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर रामलला के अलावा अतिरिक्त मंदिरों के दर्शन पर अभी संशय बना हुआ है। आज भी बनी मजदूरों की चुनौती राम मंदिर भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि शिखर को छोड़कर इसी माह के अंत तक पत्थर लगाने का कार्य पूरा हो जाएगा। राम मंदिर के शिखर  में 55000 क्यूबिक फीट पत्थर अभी और लगने हैं।  8,20,000 क्यूबिक फीट पत्थर परकोटा में लगेंगे। निर्माण कार्य में चुनौती आज भी मजदूरों की है। महापुरुषों के दर्शन पर संशय मजदूरों की संख्या जब तक दोगनी नहीं होगी, तब तक कार्य की गति धीमी रहेगी। इस समय लगभग  800 मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। जब तक 1500 के आसपास मजदूर कार्य नहीं करेंगे तब तक निर्माण में पीछे रहेंगे। 2025 को भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ पर रामलला के अलावा किसी और महापुरुषों के दर्शन पर संशय है।  

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले और धर्मगुरु चिन्मय की गिरफ्तारी के बाद ISKCON पर बैन लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट में याचिका दायर

ढाका पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है. हिंदुओं पर हमले और धर्मगुरु चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी के बाद ISKCON पर बैन लगाने की तैयारी की जा रही है. इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस बीच बांग्लादेश सरकार ने ISKCON को धार्मिक कट्टरपंथी संगठन बता दिया है. हाईकोर्ट में बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह सरकार का मुख्य एजेंडा है और इसके लिए जरूरी तैयारी शुरू कर दी गई है. इसका मतलब है कि ISKCON पर जल्द ही बैन लगेगा. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि ISKCON एक धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. इस पर कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वह इस्कॉन पर सरकार के रुख और देश की मौजूदा स्थिति का खाका पेश करे. कोर्ट ने सरकार को सचेत रहने को कहा है ताकि देश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़े. हाईकोर्ट की जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय की पीठ ने इस संबंध में कहा कि इससे पहले एक वकील ने इस्कॉन पर बैन लगाने के लिए याचिका दायर की और चटगांव में वकील सैफुल आलम की हत्या सहित पूरी स्थिति को कोर्ट के संज्ञान में लेकर आया. इस पर अब कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस्कॉन संगठन क्या है? यह कहां से आया है? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने संविधान से धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने की मांग की थी. बता दें कि बांग्लादेश की लॉ एंफोर्समेंट एजेंसी ने चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था. बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें मंगलवार को उन्हें जमानत नहीं दी और जेल भेज दिया. इसके बाद चिन्मय दास के समर्थक सड़कों पर उतर आए और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू किया. सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के दौरान पत्रकारों सहित कम से कम 10 लोग घायल हो गए. बांग्लादेश से किन अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं चिन्मय प्रभु विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज किए गए हैं. इन घटनाओं के अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्ण तरीके से वैध मांगें करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं. चिन्मय दास की गिरफ्तारी क्यों? चिन्मय दास को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वो ढाका से चटगांव आ रहे थे. उन्हें ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों ने उन्हें जबरदस्ती वैन में बैठा लिया. उन लोगों ने खुद को बांग्लादेशी पुलिस का जासूस बताया था. इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने बताया कि बिना कुछ कारण बताए ही चिन्मय दास को जबरदस्ती वैन में डाल दिया गया. बांग्लादेशी पुलिस ने चिन्मय दास पर देशद्रोह का आरोप लगाया है. उनपर अक्टूबर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी झंडे का अपमान करने का आरोप है. ऐसा दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में भगवा ध्वज को बांग्लादेशी झंडे से ज्यादा ऊंचा फहराया गया था. हालांकि, राधा रमन दास ने इन आरोपों को खारिज किया है. चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है. बांग्लादेश में जब से मोहम्मद युनूस की सरकार आई है तब से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं. ऐसी क्या मांगें कर रहे थे चिन्मय दास? 1. अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से जुड़े मामले में तुरंत सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाए जाए. पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास मिले. 2. अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक कानून बनाया जाए. 3. अल्पसंख्यकों के लिए एक मंत्रालय बनाया जाए, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दे और परेशानियों को उठाया जा सके. 4. कब्जाई गई देबोत्तर (मंदिर) की संपत्तियों को वापस किया जाए. मंदिरों और अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून बने. 5. सभी स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थल बनाए जाएं, ताकि वो भी पूजा कर सकें. 6. अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ाया जाए. साथ ही साथ पाली और संस्कृत बोर्डों का आधुनिकिकरण किया जाए. 7. दुर्गा पूजा के लिए पांच दिन का पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाए, क्योंकि ये हिंदुओं के लिए काफी अहम त्योहार है. बांग्लादेश में किस हालत में हैं अल्पसंख्यक? बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इतिहास लंबा रहा है, खासकर हिंदू समुदाय को. याद होगा कि दो साल पहले भी बांग्लादेश में हिंदू विरोधी भावनाएं भड़क गई थीं, जिसके बाद कई हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई थी. हाल ही में, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद सैकड़ों जगहों से हिंदुओं पर हमले के मामले सामने आए हैं. इस्कॉन टेम्पल और दुर्गा मंदिरों को निशाना बनाया गया है. हिंदुओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई है. दिनाजपुर में उपद्रवियों ने एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया था. अभी तो हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मामले सामने आ भी जा रहे हैं, लेकिन वहां दशकों से इनके साथ उत्पीड़न हो रहा है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का दावा है कि 1964 से 2013 के बीच एक करोड़ से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड़कर भाग गए हैं. फाउंडेशन का कहना है कि हर साल 2.30 लाख हिंदू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं. बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी तेजी से घटी है. 1951 में बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में गैर-मुस्लिम आबादी 23.2% थी. यहां आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. उसमें सामने आया था कि बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी घटकर 9.4% हो गई है.  

पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी IPL से हो रहा ‘साइड लाइन’, किसी ने नहीं खरीदा एक भी खिलाडी

 मुंबई इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 सीजन का मेगा ऑक्शन सोमवार (25 नवंबर) को सऊदी अरब के जेद्दा में खत्म हुआ. दो दिन तक चले इस मेगा ऑक्शन में 10 टीमों ने 639.15 करोड़ रुपये खर्च कर कुल 182 खिलाड़ी खरीदे. इस बार जहां ऋषभ पंत और श्रेयस अय्यर ने इतिहास रच दिया है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने 27 करोड़ में खरीदा. इस तरह वो IPL इतिहास के सबसे मंहगे क्रिकेटर बन गए हैं. दूसरे सबसे मंहगे क्रिकेटर श्रेयस बने, जिन्हें पंजाब किंग्स ने 26.75 करोड़ में खरीदा. वहीं दूसरी ओर एक देश ऐसा भी रहा है, जिसका कोई खिलाड़ी नहीं बिका. बड़ी बात तो यह रही कि इस देश के 12 प्लेयर नीलामी में उतरे थे, लेकिन 2 खिलाड़ियों को छोड़कर किसी और का नाम भी बोली के लिए नहीं लिया गया. पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी हो रहा ‘साइड लाइन’ इस तरह कह सकते हैं कि इस देश को ‘चुपचाप’ साइड लाइन कर दिया गया. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की, जहां तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर अत्याचार का मामला काफी गहराता जा रहा है. हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू पुजारी और इस्कॉन के पूर्व प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर हंगामा मचा हुआ है. इसी बीच IPL का मेगा ऑक्शन आ गया, जिसमें 12 बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को शॉर्टलिस्ट किया गया था. इनमें मुस्ताफिजुर रहमान और रिशाद हुसैन का नाम ही बोली के लिए आया था, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं खरीदा. बाकी 10 खिलाड़ियों में लिटन दास, तस्कीन अहमद, शाकिब अल हसन, मेहदी हसन मिराज, शोरिफुल इस्लाम और तंजीम हसन साकिब जैसे स्टार भी शामिल रहे. मगर इनमें से किसी का भी नाम बोली तक नहीं पहुंचा. किसी ने भी इनको नहीं खरीदा. इस तरह कह सकते हैं कि पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश भी IPL से साइड लाइन होता जा रहा है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में बांग्लादेशी क्रिकेटर्स पर भी IPL में बाहर रहने का खतरा मंडरा सकता है. इस लिस्ट के जरिए जानिए कौन सा बांग्लादेशी प्लेयर किस बेस प्राइस के साथ IPL नीलामी में उतरा था. IPL मेगा ऑक्शन में उतरने वाले बांग्लादेशी क्रिकेटर बांग्लादेशी प्लेयर बेस प्राइस (INR) मुस्ताफिजुर रहमान (अनसोल्ड) 2 करोड़ तस्कीन अहमद 1 करोड़ शाकिब अल हसन 1 करोड़ मेहदी हसन मिराज 1 करोड़ शोरिफुल इस्लाम 75 लाख तंजीम हसन साकिब 75 लाख मेहदी हसन 75 लाख नाहिद राणा 75 लाख रिशाद हुसैन (अनसोल्ड) 75 लाख लिटन दास 75 लाख तौहीद हृदोय 75 लाख हसन महमूद 75 लाख एक ही IPL सीजन खेल सके पाकिस्तानी क्रिकेटर बता दें कि IPL का पहला सीजन 2008 में खेला गया था. तब पाकिस्तान के कुल 11 खिलाड़ी आईपीएल में खेले थे. 2008 आईपीएल सीजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे और राजनीतिक तनाव के चलते पाकिस्तानी प्लेयर्स को आईपीएल में मौका नहीं दिया गया है. इस तरह पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल के पहले यानी 2008 सीजन में पहली और आखिरी बार मौका मिला था. IPL के पहले सीजन में 11 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने धमाल मचाया था. यह प्लेयर सलमान बट, शोएब अख्तर, मोहम्मद हफीज, उमर गुल, कामरान अकमल, यूनुस खान, सोहेल तनवीर, मोहम्मद आसिफ, शोएब मलिक, शाहिद आफरीदी और मिस्बाह उल हक हैं. तो क्या बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को जान-बूझकर अनदेखा किया गया है, क्योंकि ऑक्शन के बाद उनकी बोली तक नहीं लगाई गई। शाकिब अल हसन जैसे क्रिकेटर, जो पहले आईपीएल में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उन्हें इस बार खरीदार नहीं मिल पाए, जिससे निराशा और बढ़ गई। हालांकि, कई प्रशंसकों का कहना है, कि बांग्लादेशी क्रिकेटर्स ने पिछले दिनों काफी खराब खेल दिखाया है और ना बिकने की वजह उनका प्रदर्शन है, ना की बांग्लादेश की मौजूदा हालात से कोई लेना देना है। बांग्लादेश ने पिछले दिनों जब भारत के साथ तीन टी-20 मैच खेले थे, उस दौरान उनका काफी खराब प्रदर्शन रहा था और ना ही बल्लेबाज अपना कोई प्रभाव छोड़ पाए थे और ना ही गेंदबाज। बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हैं हमले विवाद को और हवा देने वाली बात यह है कि ढाका में हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की हाल ही में हुई गिरफ़्तारी ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को हमलों, उनकी संपत्ति के विनाश और व्यवस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिससे अशांति बढ़ रही है।     भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोग आईपीएल फ्रैंचाइजी से अल्पसंख्यकों पर हमलों में कथित मिलीभगत के कारण बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करने का आग्रह कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा, “अगर आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को आईपीएल से बाहर रखा जाता है, तो बांग्लादेश को हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए इसी तरह के परिणाम भुगतने चाहिए।” बांग्लादेशी खिलाड़ियों को बाहर रखने से खेल और राजनीति के बीच के संबंध की ओर ध्यान खिंचा है। आईपीएल ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बाहर रखा है, लेकिन यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है, कि किस तरह व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे खिलाड़ियों के चयन को प्रभावित कर सकते हैं।  

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा वह देश में एक करोड़ ‘कट्टर हिंदू’ चाहते हैं, ऐसा हो गया तो हजार सालों तक कोई सनातन की ओर अंगुली नहीं उठा सकता

 निवाड़ी हिंदू एकता यात्रा पर निकले बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण ने कहा है कि गजवा-ए-हिंद या भगवा-ए-हिंद जो होना है जल्दी हो जाए। बाबा बागेश्वर ने यह भी कहा कि वह आरपार के मूड में निकले हैं। हिंदुओं के बीच जाति प्रथा को खत्म करने की अपील कर रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में एक करोड़ ‘कट्टर हिंदू’ चाहते हैं और ऐसा हो गया तो हजार सालों तक कोई सनातन की ओर अंगुली नहीं उठा सकता है। धीरेंद्र शास्त्री ने मंगलवार रात मध्य प्रदेश के निवाड़ी में अपने साथ चल रहे लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले से प्रारंभ हुई बागेश्वरधाम के संत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘हिंदू सनातन पदयात्रा’ छठवें दिन निवाड़ी जिले के घुघसी ग्राम पहुंची। यहां रात्रि विश्राम से पहले शास्त्री ने मंच से संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘एक करोड़ कट्टर हिंदू बना लेंगे तो हजार वर्ष तक सनातन धर्म को कोई उंगली नहीं दिखा सकता, इतनी सी बात है समझ जाए तो ठीक है, नहीं तो तुम्हारी बहन बेटी को लव जिहाद से बचा नहीं सकता है, चाहे अधिकारी हो, नेता हो, अभिनेता हो, खास हो या आम हो। लव जिहाद, लैंड जिहाद से तुम अपनी पीढ़ी को बचा नहीं सकते।’ बाबा बागेश्वर ने कहा, ‘हिंदुओं को मंजिल तब प्राप्त होगी जब नारी नारायणी बन जाएगी, हिंदुओं को मंजिल तब प्राप्त होगी जब मंदिर में बनी हुई जितनी मस्जिदे है वहा फिर से मंदिर बन जाएंगे। हिंदुओं को मंजलि तब प्राप्त होगी जब गीता और रामायण की बातें बच्चे से लेकर वृद्ध बोलने लग जाएंगे। जब राम पर अंगुली उठाने वाले की अंगुली उसे मुंह में कर दी जाए, हिंदुओं को मंजिल तब मिलेगी कहीं से भी बहन बेटी गुजर जाएं तो धर्म विरोधी, लव जिहाद वाले टेढ़ी निगाह से ना देखें। हिंदुओं को मंजिल तब मिलेगी जब हिंदू हिन्दुस्तान में हिंदू राष्ट्र का झंडा फहरा देंगे।’ हिंदुओं से जागने की अपील करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जो होना है जल्दी हो जाए। उन्होंने कहा, ‘हिंदू जग जाए तो बढ़िया हैं ना जगे तो और बढ़िया हैं, जल्दी से इस्लामिक राष्ट्र बन जाए। हम तो आरपार के मूड में निकले हैं, गजवा ए हिंद हो जाए या भगवा ए हिंद हो जाए। कौन हिंदू मुसलमान करता रहे, यह होना चाहिए वह होना चाहिए, जो होना है जल्दी हो जाए।’

पदाधिकारियों के लिए संगठन ने तय कर दी है गाइड लाइन, 40 वर्ष तक उम्र के कार्यकर्ता ही मंडल अध्यक्ष बनेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में संगठन चुनाव के तहत दिसंबर में भाजपा के मंडल और जिला अध्यक्ष बना दिए जाएंगे। चुनाव दो चरणों में होंगे। इसकी तैयारी के लिए बुधवार शाम प्रदेश कार्यालय में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। पार्टी संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व की तय गाइडलाइन के तहत कार्ययोजना बनाई है। जिन पर आर्थिक और आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, ऐसे नेताओं को जिला और मंडल अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। ऐसे नेता संगठन चुनाव में ही हिस्सा नहीं ले सकेंगे। आयुसीमा तय वहीं, मंडल और जिला अध्यक्ष के लिए क्रमश: 40 और 60 वर्ष की आयु सीमा भी निर्धारित की गई है, यानी पार्टी युवा और वरिष्ठता दोनों ही श्रेणी के नेताओं को अवसर देगी। इसी तरह, अपने चहेतों को मंडल और जिला अध्यक्ष बनाने के लिए सांसद, विधायक या मंत्री की अनुशंसा भी नहीं चलेगी। इसको लेकर पार्टी संगठन ने पहले ही गाइड लाइन तय कर दी है। कार्यशाला में ये रहेंगे उपस्थित भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि बुधवार को होने वाली कार्यशाला को पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डा. महेंद्र सिंह एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद संबोधित करेंगे। कार्यशाला में प्रदेश कोर कमेटी, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी, लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, महापौर, नेता प्रतिपक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री, प्रदेश निर्वाचन टोली, प्रदेश सक्रिय सदस्यता टोली, जिला निर्वाचन टोली, बूथ प्रबंधन जिला प्रभारी उपस्थित रहेंगे। बूथ समितियों के गठन की सराहना वहीं, मप्र के भाजपा संगठन की बूथ समितियों के गठन की शीर्ष नेतृत्व ने सराहना की है। अब पार्टी का फोकस मंडल और जिला अध्यक्ष के संगठन चुनाव पर है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में मिली गाइडलाइन के बाद प्रदेश संगठन ने यह कार्यशाला आयोजित की है। कार्यशाला के बाद पार्टी संगठन बुधनी और विजयपुर उपचुनाव को लेकर भी चर्चा करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा हम विदेशी निवेश को मध्यप्रदेश की धरती पर आमंत्रित करने के लिए यहां आए

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि हम विदेशी निवेश को मध्यप्रदेश की धरती पर आमंत्रित करने के लिए यहां आए हैं। अनेक उद्योगपतियों ने विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए रूचि दर्शायी है। आईटी सेक्टर, शिक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी, उद्योग, माइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ और सेमी कंडक्टर के क्षेत्र में निवेश के लिए उद्योगपति आगे आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का मुख्य आधार वहां के उद्योग धंधे हैं। औद्योगिक दृष्टि से कौन कितना अधिक संपन्न है। यह उनकी इंडस्ट्रियल ग्रोथ बताती है, जितने अधिक उद्योग धंधे होंगे उतने अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने निवेशकों को प्रदेश में आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चाहे अमेरिका हो या जर्मनी हो उद्योग धंधे विकास का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लंदन में स्थानीय मीडिया से संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लंदन आकर अच्छा लगा यहां हमारे कई सारे भारतवंशी मित्रों के साथ मुलाकात हुई, जो कई साल पहले भारत से इंग्लैंड में आकर बस गए थे और यहां विभिन्न क्षेत्रों में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। उनके साथ निवेश संबंधी संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर प्रवासी भारतीय भाई अपनी जड़ों से जुड़ने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी यूके यात्रा निवेश की दृष्टि से बहुत सार्थक रही है। इसके परिणाम हमें फरवरी-2025 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सभी निवेशकों का मध्यप्रदेश में आत्मीय स्वागत है।  

शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि मैं अपने आप को कभी मुख्यमंत्री नहीं समझता हूं, मैं हमेशा अपने आपको कॉमन

मुंबई महाराष्ट्र में अगले मुख्यमंत्री को लेकर महायुति में खींचतान जारी है. इसी बीच शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि मैं अपने आप को कभी मुख्यमंत्री नहीं समझता हूं. मैं हमेशा अपने आपको कॉमन मैन समझता हूं. शिंदे ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र को फोन किया था. मैंने उनसे कहा कि हमारी तरफ से मुख्यमंत्री को लेकर कोई अड़चन नहीं आएगी. हमारा पूरा सहयोग रहेगा. शिंदे के इस बयान के बाद अब माना जा रहा है कि बीजेपी देवेंद्र फडणवीस के नाम का ऐलान कर सकती है. दरअसल, महाराष्ट्र का चुनाव एकनाथ शिंदे के चेहरे पर लड़ा गया था. लेकिन बीजेपी को महायुति में सबसे ज्यादा 132 सीटें मिलीं तो सीएम को लेकर खींचतान जारी हो गई. आखिरकार अब एकनाथ शिंदे ने खुद ये ऐलान कर दिया है कि वह बीजेपी के हर फैसले को मानने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अब सीएम के लिए चल रहा गतिरोध खत्म होता दिख रहा है.    एकनाथ शिंदे ने इस दौरान शाह और मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि बीजेपी और शाह-मोदी ने मेरा पूरा साथ दिया. वो चट्टान बनकर मेरे साथ खड़े रहे. मैंने पीएम मोदी को फोन करके कहा है कि हमारी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है. आप जिसे भी सीएम के लिए चुनेंगे उसे मेरा सपोर्ट है. मैंने राज्य की बेहतरी के लिए काम किया इस दौरान शिंदे ने कहा कि मैंने हमेशा राज्य की बेहतरी के लिए काम किया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की लाडली बहनों का मैं लाडला भाई हूं. अभी बहुत काम करना है. मैंने ढाई साल में राज्य के लिए खूब काम किया है. आगे भी हम इसी रफ्तार से काम करेंगे.महायुति मजबूत है और हम सब मिलकर काम करने को तैयार हैं. एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमने पिछले ढाई साल में लगातार काम किया है. मैं लाडली बहनो का लाडला भाई हूं. मैं हमेशा तत्पर रहता हूं. मैं आगे भी काम करने के लिए तैयार हूं. दरअसल, महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही नए मुख्यमंत्री को लेकर खींचतान जारी है. चाहे एकनाथ शिंदे हों, देवेंद्र फडणवीस हों या फिर अजित पवार… तीनों के ही समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. इसकी बानगी नतीजे वाले दिन भी देखने को मिली थी, जब तीनों नेताओं के समर्थकों ने खुलकर अपने लीडर को सीएम बनाने की मांग शुरू कर दी थी. बता दें कि एकनाथ शिंदे इस समय कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली बुलाए गए महायुति के नेता शिंदे, फडणवीस और पवार को बुलाया गया दिल्ली बता दें कि शिवसेना एनसीपी के प्रमुख नेताओं और देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाया गया है. बीजेपी के हाईकमान ने कल प्रफुल्ल पटेल, अजीत पवार, देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अहम बैठक तय की है. बता दें कि महाराष्ट्र की 288 सीटों में से महायुति को 230 सीट मिली थी. बीजेपी ने 132 सीटों पर जीत हासिल की है. शिंदे, फडणवीस और पवार को बुलाया गया दिल्ली बता दें कि शिवसेना एनसीपी के प्रमुख नेताओं और देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाया गया है. बीजेपी के हाईकमान ने कल प्रफुल्ल पटेल, अजीत पवार, देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अहम बैठक तय की है. माना जा रहा है कि इस बैठक में महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. इस मीटिंग में राज्य के मौजूदा सियासी हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है. इसके साथ ही बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के गठबंधन से जुड़े कुछ अहम मुद्दे भी उठ सकते हैं. सीएम पद को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं: म्हस्के सीएम पद को लेकर कुछ देर पहले ही एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के नेता नरेश म्हस्के का बयान आया. उन्होंने कहा कि सीएम पद को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है. सरकार दो दिनों में नहीं बनती है. प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सीएम के नाम का ऐलान हो जाएगा. महायुति के नेता फैसला कर लेंगे. हालांकि, हमने सीएम पद की मांग की है. जैसे बिहार में छोटी पार्टी को सीएम पद दिया गया है, वैसे ही हमने भी सीएम पद मांगा हैं. सभी हमारे नेता, सबका सम्मान है: केसरकर शिवसेना के एक और नेता दीपक केसरकर ने इस मुद्दे पर बयान दिया है. दीपक केसरकर ने कहा,’सभी हमारे नेता हैं. हम सभी का सम्मान करते हैं. ये महायुति गुट है. हम विधानसभा चुनाव महायुति के फॉर्मूले से जीते हैं. चेहरा पीएम मोदी का है. मोदी के नाम पर मेंडेट आया है. वहीं, देवेंद्र फडणवीस ने कहा,’तीनों पक्ष मिलकर सरकार बनाएंगे.’ जल्दबाजी के मूड में नहीं है BJP नेतृत्व कहा जा रहा है कि सत्तारूढ़ महायुति नए मुख्यमंत्री का चेहरा फाइनल नहीं कर पाई है. अलांयस के तीनों सहयोगी दलों में सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार मंथन चल रहा है. बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि अलायंस के नेता बड़ी जीत से उत्साहित हैं. इसलिए इस बार ज्यादा जल्दबाजी के मूड में नहीं हैं. बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि सरकार बनने के बाद किसी भी अलांयस में सबसे ज्यादा खींचतान हैवीवेट मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर होती है, इसलिए पहले पोर्टफोलियो फाइनल किए जाने चाहिए, उसके बाद सीएम फेस घोषित किया जाएगा. यानी एनडीए, पहले विवादों की जड़ें खत्म करना चाहता है, उसके बाद सरकार के चेहरे को उजागर करने का फैसला लिया गया है. क्या रहे चुनावी नतीजे राज्य में 20 नवंबर को हुए चुनाव में बीजेपी ने 132 सीटें, शिवसेना ने 57 और एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं हैं. परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए गए थे.    

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