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Zomato का नया फीचर, बेहद कम दाम पर मिलेगा कैंसल आर्डर! जाने क्या है प्लान

मुंबई ऑनलाइन फूड डिलीवरी जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने नए फीचर का ऐलान किया है. इस फीचर का नाम Food Rescue है. इस फीचर के तहत यदि किसी ने अपना ऑर्डर कैंसिल किया, तो जोमैटा आसपास के ग्राहकों को ऑफर देगा कि वो इस ऑर्डर को किफायती दर पर ले सकते हैं. दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘जोमैटो पर हम ऑर्डर कैंसिल करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते, क्योंकि इससे बहुत सारा खाना बर्बाद होता है.’  चार लाख से ज्यादा ऑर्डर हो रहे कैंसिल जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘सख्त नियमों और कैंसिलेशन पर नो रिफंड पॉलिसी होने के बावजूद, चार लाख से ज्यादा अच्छे-खासे ऑर्डर कस्टमर द्वारा अलग-अलग वजहों से जोमैटो में कैंसिल कर दिए जाते हैं. हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता है कि, रेस्टोरेंट इंडस्ट्री और यहां तक कि ऑर्डर कैंसिल करने वाले ग्राहकों की भी सबसे बड़ी चिंता है कि किसी तरह खाने की बर्बादी को रोका जाए.आज, हम एक नया फीचर ला रहे हैं (जिसे अभी लागू किया जा रहा है) – फूड रेस्क्यू!’ आस-पास के ग्राहकों को दिखेंगे कैंसिल किए ऑर्डर   दीपेंद्र गोयल ने पोस्ट में आगे लिखा, ‘कैंसिल किए गए ऑर्डर अब आस-पास ग्राहकों को दिखाई देंगे. ये ऑर्डर उन्हें बेहद कम दाम पर, उनकी असली पैकेजिंग और कुछ ही मिनटों में डिलीवर होंगे. कैंसिल किया गया ऑर्डर उस डिलीवरी पार्टनर के तीन किमी दायरे में कस्टमर के ऐप पर दिखाई देगा, जो ऑर्डर लेकर जा रहा है. हालांकि, खाने की ताजगी बनी रहे, इसके लिए ऑर्डर लेने का ऑप्शन केवल कुछ ही मिनटों के लिए उपलब्ध होगा. सरकारी टैक्स को छोड़कर जोमैटो इस पर कोई भी मुनाफा नहीं कमाएगा.’   इन आइटम्स में नहीं लागू होगा फीचर   दीपेंद्र गोयल ने बताया कि आइसक्रीम, शेक, स्मूदी जैसे ऑर्डर और खराब होने वाली चीजें जैसे दूरी या टेंपरेचर के प्रति संवेदनशील प्रोडक्ट्स, इस फीचर के लिए योग्य नहीं होंगे. वहीं, रेस्टोरेंट के मालिकों को मूल कैंसिल किए गए ऑर्डर का मुआवजा पहले की तरह मिलते रहेगा. इसके साथ ही यदि नए फीचर के तहत ऑर्डर लिया जाता है तो नए कस्टमर द्वारा किए गए पेमेंट का एक हिस्सा भी मिलेगा.’ डिलीवरी पार्टनर को मिलेगा पूरा भुगतान बकौल दीपेंद्र गोयल, ‘अभी तक ज्यादातर रेस्टोरेंट ने इस सुविधा को चुन लिया है. वे जब चाहें अपने कंट्रोल पैनल से इसे आसानी से बंद कर सकते हैं. डिलीवरी पार्टनर को शुरुआती पिकअप करने से लेकर नए ग्राहक के लोकेशन पर ड्रॉप ऑफ तक पूरा भुगतान कियाजाएगा. यदि आपके लिए कोई कैंसिल किया ऑर्डर उपलब्ध है, फूड रेस्क्यू आपके होम पेज पर अपने आप दिखाई देगा. बचाए जाने वाले किसी भी नए उपलब्ध ऑर्डर की जांच के लिए अपने होम पेज को रिफ्रेश करें.’

अब इस यूरोपीय ने लगाया बुर्के पर संपूर्ण बैन, पहना तो 90 हजार का देना होगा जुर्माना

ज्यूरिख़ अब स्विटजरलैंड भी उन देशों की लिस्ट में शामिल होने जा रहा है, जहां पर हिजाब या बुर्का बैन है. स्विटजरलैंड जल्द ही अपने यहां हिजाब, बुर्का या सर को ढकने वाली चीजों पर पाबंदी लगा देगा. अधिकारिक तौर पर स्विटजरलैंड में बुर्का पर बैन 1 जनवरी 2025 से शुरू होगा. कई दूसरे देशों की तरह स्विटजरलैंड ने भी सिक्योरिटी का हवाला देकर बुर्का पर बैन लगाने की बात कही है. स्विटजरलैंड ने भी बुर्का पर बैन लगाने के पीछे सामाजिक सामंजस्य का हवाला दिया है. 2021 में लागू हुआ था फैसला स्विटजरलैंड ने सबसे पहले साल 2021 में जनमत संग्रह के बाद पूरे देश में बुर्के पर बैन लगाने का फैसला किया था. हालांकि, इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार समर्थकों ने कड़ी आलोचना की थी. इसके बावजूद, जनमत संग्रह बहुत कम अंतर से पारित हो गया. यहां महज 51 फीसद लोगों ने पाबंदी का सपोर्ट किया था. लगाया जाएगा जुर्माना स्विटजरलैंड में बुर्का बैन कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ 1,000 स्विस फ़्रैंक तक का जुर्माना लगाया जाएगा. यह रकम भारतीय पैसों के हिसाब से 1 लाख रुपये के आस-पास बनती है. यहां होगी आजादी स्विटजरलैंड में बुर्का बैन होने के बाद भी कुछ स्थितियों में सर ढकने की सहूलत होगी. जैसे हवाई जहाज और राजनयिक परिसर में औरतें सर ढक सकती हैं. पूजा स्थल और दूसरी पाक जगहों पर भी सर ढका जा सकता है. मेडिकल इशू की वजह से भी सर ढका जा सकता है. इसके अलावा ज्यादा गर्मी या सर्दी की वजह से चेहरा और सर ढका जा सकता है. पारंपरिक रीति-रिवाज़ और आर्ट प्रोग्राम में भी सर और चेहरे को ढका जा सकता है. सार्वजनिक सभाओं या विरोध प्रदर्शन के दौरान सर-चेहरा ढकने की आजादी है. इन देशों में बैन है बुर्का अपने यहां बुर्का बैन करने वाला सबसे नया देश स्विटजरलैंड है. इसके अलावा 16 देशों ने अपने यहां बुर्का बैन किया हुआ है. इन देशों में यूरोप, एशिया और अफ्रीका देश शामिल हैं. ट्यूनीशिया, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम, ताजकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बुल्गारिया, कैमरून, चाड, रिपब्लिक ऑफ शिकागो, गाबोन, नीदरलैंड, चीन, मोरक्को और श्रीलंका.

उत्साहजनक : केवल एक सप्ताह में ही 2 लाख से ज्यादा बुजुर्ग आयुष्मान की नई योजना से जुड़ गए

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले ही आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए इसमें अहम बदलाव किया. योजना में 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है. इस बदलाव के महज एक हफ्ते बाद ही जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वो उत्साहजनक है. केवल एक सप्ताह में ही 2 लाख से ज्यादा बुजुर्ग इस योजना से जुड़ गए हैं. प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना के विस्तारित संस्करण को शुरू करने के पहले सप्ताह के भीतर 70 वर्ष से अधिक आयु के 2.16 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत कार्ड प्राप्त हुए हैं. केरल से सबसे अधिक पंजीकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास 7 नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विस्तारित संस्करण के तहत केरल से सबसे अधिक नए लाभार्थियों ने पंजीकरण करवाया है, जहां बुजुर्गों के लिए लगभग 89,800 कार्ड जारी किए गए हैं. संयोग से, यह राज्य उन राज्यों में से है, जहां अगले दशक में बुज़ुर्ग नागरिकों का अनुपात सबसे ज़्यादा होने का अनुमान है. 2031 तक केरल में 60 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोगों की संख्या की आबादी 20.9% होने की उम्मीद है. नए बुज़ुर्ग लाभार्थियों की सूची में केरल के बाद राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है जहां से क्रमशः 53,000 और 47,000 बुजुर्ग योजना से जुड़े हैं. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों के लोगों की संख्या कम है. पिछले एक सप्ताह में आंध्र प्रदेश के 3488, तेलंगाना के 3056 और तमिलनाडु के 3156 बुजुर्ग इस योजना से जुड़े हैं. बंगाल और दिल्ली के बुजुर्ग इस वजह से नहीं ले सकेंगे लाभ इन आंकड़ों में AAP शासित दिल्ली और TMC शासित पश्चिम बंगाल शामिल नहीं हैं, जिन्होंने इस योजना से बाहर निकलने का विकल्प चुना है.  29 अक्टूबर को विस्तारित संस्करण को लागू करने के दौरान, प्रधानमंत्री ने खेद व्यक्त किया था कि इन दोनों राज्यों में बुजुर्ग नागरिक इससे बाहर रह गए हैं. हालांकि, पंजाब की AAP शासित सरकार ने विस्तारित संस्करण को लागू किया है. यहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य ने पिछले सप्ताह बुजुर्गों को 5,697 नए कार्ड जारी किए हैं, जो टॉप टेन की सूची में शामिल है. आपको बता दें कि आयुष्मान भारत योजना को साल 2018 में पहली बार लॉन्च किया गया था जो दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम है. इस योजना के तहत, लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है. हाल ही में केंद्र सरकार ने योजना का विस्तार करते हुए 0 वर्ष और उससे ज्यादा आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया है. सरकार का मकसद केंद्र सरकार की नवीनतम पहल का उद्देश्य 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों वाले लगभग 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाना है. विस्तारित संस्करण के तहत, 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोग, चाहे उनकी आय कुछ भी हो, वह 5 लाख रुपये के कवर पाने के हकदार होंगे. जिन लोगों के पास पहले से आयुष्मान कार्ड है, उन्हें नए कार्ड के लिए फिर से आवेदन करना होगा और अपना EKYC फिर से पूरा करना होगा. AB-PMJAY के तहत पहले से ही कवर परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे ज्यादा आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अपने लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का अतिरिक्त टॉप-अप कवर मिलेगा. इसे उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों के साथ साझा नहीं करना होगा.    

सरकार ने लिया फैसला, प्रदेश में सौ से अधिक लोग इकट्ठा होते हैं, वहां सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा

भोपाल इंदौर में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार ने सार्वजनिक और व्यावसायिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता लागू की है। यह प्राविधान मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की उप विधि के अंतर्गत किया गया है। अब गृह विभाग ने लोक सुरक्षा अधिनियम लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कुल चार विधेयक प्रस्तुत करने की योजना है। इन विधेयकों का प्रारूप तैयार कर विधि एवं विधायी विभाग को भेजा गया है। प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है कि कॉलेजों, स्कूलों, मॉल, रेस्टोरेंट, अस्पतालों और उन स्थानों पर जहां सौ से अधिक लोग इकट्ठा होते हैं, वहां सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए विधायिका में प्रस्तावित विधेयक को दिसंबर के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर संभाग की समीक्षा के दौरान इस प्रस्ताव को जल्द लागू करने के निर्देश दिए थे। इंदौर में यह व्यवस्था नगर पालिक निगम अधिनियम के उप-विधि के अंतर्गत पहले ही लागू की जा चुकी है। अब गृह विभाग पूरे प्रदेश के लिए एक अलग से कानून लाने की तैयारी कर रहा है। इस नए कानून के तहत, उन संस्थानों के संचालकों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम दो महीने तक सुरक्षित रखें। इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को मजबूत करना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करना है। बदलेंगे मकान मालिक और किराएदार के अधिकार नगरीय विकास एवं आवास विभाग किराएदारी अधिनियम को लागू करने की भी तैयारी कर रहा है। इस अधिनियम का उद्देश्य मकान मालिक और किराएदार के बीच के रिश्तों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना है। इसके तहत किराए पर रहने वाले व्यक्ति को अनुबंध में निर्धारित अवधि के बाद मकान खाली करना होगा। अगर, किराएदार ऐसा नहीं करता, तो मकान मालिक शिकायत कर किराया प्राधिकारी से बेदखली की कार्रवाई करवा सकेगा। किराएदार की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को वहां रहने का अधिकार होगा, लेकिन उसे भी अनुबंध का पालन करना होगा। इसके अतिरिक्त मकान मालिक को किराएदार को तंग करने की अनुमति नहीं होगी। मकान मालिक को जल, विद्युत, पाइप गैस, मार्ग, लिफ्ट, सीढ़ियों की सफाई, पार्किंग, स्वच्छता और सुरक्षा सुविधाओं की आपूर्ति बाधित नहीं करनी होगी। किराएदार के परिसर में प्रवेश का मकान मालिक को कोई अधिकार नहीं होगा। प्रदेश का नया फायर एक्ट तैयार भारत सरकार के निर्देश पर प्रदेश में नया फायर एक्ट तैयार किया गया है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। यह एक्ट पहले ही 2016 में तैयार किया गया था, लेकिन 2019 में माडल एक्ट को कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। अब इसे नए सिरे से तैयार किया गया है। इस फायर एक्ट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स और बिल्डिंगों में फायर सेस लगाने का प्रस्ताव है। यदि कोई भवन मालिक आग की सूचना प्रशासन को नहीं देता है, तो उसे सजा दी जाएगी। इसके अलावा, राज्य स्तर पर फायर-इमरजेंसी सर्विस बनाने और नए अग्निशमन सेवा केंद्र खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों की जांच, अग्निकांड से बचाव के उपाय, और अग्निशमन की प्रक्रिया में रुकावट डालने पर अर्थदंड एवं सजा के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

मोदी ने कहा- कुछ लोग समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं, भारत को विकसित बनाने के लिए एकता महत्वपूर्ण

अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि कुछ लोग अपने निहित स्वार्थों के लिए समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें हराने की जरूरत है। उन्होंने देश को 2047 तक विकसित बनाने के लिए एकता की जरूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री श्री स्वामीनारायण मंदिर की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुजरात के खेड़ा जिले के वडताल में श्रद्धालुओं की एक सभा को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों के बीच एकता और राष्ट्र की अखंडता महत्वपूर्ण है। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग अपने निहित स्वार्थों या संकीर्ण मानसिकता के चलते हमारे समाज को जाति, धर्म, भाषा, पुरुष-महिला, गांव-शहर के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपने संबोधन में कहा, ‘‘हमें उनके इरादों को समझना होगा और उन्हें हराने के लिए एकजुट होना होगा।’’ मोदी ने स्वामीनारायण सम्प्रदाय के सभी संतों से अनुरोध किया कि वे भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने लक्ष्य को पूरा करने में देश के प्रत्येक नागरिक को जोड़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आजादी के आंदोलन में एक शताब्दी तक समाज के भिन्न-भिन्न कोने से आजादी की ललक और आजादी की चिंगारी देशवासियों को प्रेरित कर रही थी, वैसी ही ललक और वैसी ही चेतना ‘विकिसत भारत’ के लिए 140 करोड़ देशवासियों में हर पल होना जरूरी है उन्होंने कहा, ‘‘युवा, राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं और करेंगे। इसके लिए हमें सशक्त और शिक्षित युवाओं का निर्माण करना होगा। ‘विकसित भारत’ के लिए हमारे युवा सशक्त होने चाहिए। कुशल युवा हमारी सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने स्वामीनारायण मंदिर, वडताल के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक सिक्का जारी किया है। भगवान स्वामीनारायण हमारे इतिहास के कठिन समय में आए थे और हमें नई ताकत दी थी।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि 200 साल पहले जिस वडताल धाम की स्थापना भगवान श्री स्वामीनारायण ने की थी, आज भी उसकी अध्यात्मिक चेतना को जागृत रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम आज भी यहां भगवान श्री स्वामीनारायण की शिक्षाओं को, उनकी ऊर्जा को अनुभव कर सकते हैं।’’  

CM यादव ने जेसी मिल ग्वालियर का लिया जायजा, जिलों में लम्बे समय से खाली पड़ी आवंटित भूमि का करेंगे उचित निराकरण

जेसी मिल श्रमिकों की देनदारियों के भुगतान के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर की हुकुमचंद मिल की तर्ज पर करायेंगे जेसी मिल ग्वालियर के श्रमिकों का भुगतान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM यादव ने जेसी मिल ग्वालियर का लिया जायजा, जिलों में लम्बे समय से खाली पड़ी आवंटित भूमि का करेंगे उचित निराकरण मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर अभिभूत हुए जेसी मिल श्रमिक और उनके परिजन श्रमिकों ने कहा अब हमें भरोसा है कि जल्द हमारी सभी देनिदारियां मिल जायेंगीं ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मजदूरों के हित के लिये प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। इंदौर की हुकुमचंद मिल और उज्जैन की विनोद मिल की तर्ज पर जल्द ही ग्वालियर की जेसी मिल के श्रमिकों और प्रदेश की अन्य बंद मिलों की देनदारियों के भुगतान की कार्यवाही की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 30-40 साल से बंद पड़ी ग्वालियर की जेसी मिल के मजदूरों के प्रकरणों में 8 हजार से ज्यादा मजदूरों को उचित न्याय दिलाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर की जेसी मिल का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने जेसी मिल परिसर का भ्रमण किया, साथ ही नक्शे के माध्यम से जेसी मिल की जमीन और अन्य परिसम्पत्तियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर जेसी मिल श्रमिक और उनके परिजन अभिभूत हो गए। सभी ने पुष्पाहारों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया। साथ ही कहा पहली बार कोई मुख्यमंत्री हमारी दुख-तकलीफ सुनने जेसी मिल तक आया है। अब हमें पूरा भरोसा है कि जेसी मिल पर लंबित हमारी वर्षों पुरानी देनदारियों का भुगतान हो जाएगा। इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जेसी मिल श्रमिकों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार जताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेसी मिल श्रमिकों के हितों की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा सरकार मुकदमा नहीं समाधान चाहती है। इसी भावना के साथ सरकार न्यायालय में श्रमिकों के हित मे अपना पक्ष रखेगी, जिससे श्रमिकों की देनदारियों के भुगतान का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने कहा कि जेसी मिल श्रमिकों के स्वत्वों के भुगतान के सिलसिले में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मिल की जमीन और परिसम्पत्तियों के सर्वे का काम कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब, महिला, युवा और किसानों को देश के चार स्तम्भ के रूप में रेखांकित किया है। प्रदेश सरकार इन सभी के उत्थान के लिये कृतसंकल्पित होकर काम कर रही है। ग्वालियर में आईटी इकाइयों को बढ़ावा दिया जायेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) के क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। यहाँ के आईटी विशेषज्ञ युवाओं को बाहर न जाना पड़े, इसके लिये ग्वालियर में सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित इकाइयों को विशेष बढ़ावा दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिये रीजनल कॉन्क्लेव की श्रृंखला चलाई जा रही है। उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और रीवा में रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित हो चुकी हैं। इसी कड़ी में 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम संभाग एवं जनवरी माह में शहडोल में रीजनल कॉन्क्लेव का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने कहा संभाग स्तर पर रीजनल कॉन्क्लेव की श्रृंखला पूरी होने के बाद फरवरी माह में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन होगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिये विश्व भर के उद्यमियों को आमंत्रित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कड़ी में वे जल्द ही जर्मनी व ब्रिटेन के दौरे पर निवेशकों को आमंत्रित करने के लिये जायेंगे। उन्होंने कहा इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे आयोजन से प्रदेश में उद्योग फ्रेंडली माहौल बना है, जिससे वृहद स्तर पर औद्योगिक निवेश हो रहा है। इससे प्रदेश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।  

सरायकेला में अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर हेमंत सोरेन को घेरा, सरकार बनी तो हम घुसपैठ के खिलाफ कानून लेकर आएंगे

सरायकेला झारखंड में पहले फेज की वोटिंग से पहले सियासी पारा हाई है। बीजेपी ने जेएमएम के ऊपर राजनीतिक हमले तेज कर दिए हैं। सोमवार को सरायकेला की एक जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासियों की घटती आबादी का जिक्र करते हुए बड़ा एलान कर दिया। अमित शाह ने कहा, “आदिवासियों की आबादी घट रही है, जबकि घुसपैठिए बढ़ रहे हैं। अगर बीजेपी की सरकार बनी तो हम घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म कर देंगे”। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि हम एक कानून लाएंगे, जहां अगर कोई घुसपैठिया किसी आदिवासी महिला से शादी करता है, तो भी उसे महिला की जमीन ट्रांसफर नहीं की जा सकेगी। हेमंत सोरेन पर बरसे अमित शाह अमित शाह ने झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्टार प्रचारक हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधा। अमित शाह ने कहा कि जिस तरह से चंपई सोरेन (पूर्व सीएम) को अपमानित किया गया और मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, वह सही नहीं है। यह सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय का अपमान है। अमित शाह ने आगे कहा, “चंपई सोरेन इतने वर्षों से वफादार रहे हैं, हेमंत जी के साथ खड़े रहे, लेकिन जिस तरह से उन्हें अपमानित किया गया और हटाया गया, यह सिर्फ चंपई सोरेन का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय का अपमान है।” भ्रष्टाचार पर कांग्रेस को घेरा अमित शाह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, एक कांग्रेस नेता के आवास से भारी मात्रा में नकदी जब्त की गई। यहां अमित शाह पूर्व मंत्री आलमगीर आलम का जिक्र कर रहे थे। बता दें कि उनके आवास से 30 करोड़ रुपये और नोट गिनने की 27 मशीनें बरामद की गईं थी। झामुमो-कांग्रेस-राजद पर घोटालों का आरोप केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार पर आरोप लगाया कि वह नियमित रूप से घोटाले करती है। उन्होंने (झामुमो-कांग्रेस-राजद) मनरेगा में 1,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया, 300 करोड़ रुपये का भूमि घोटाला किया, 1,000 करोड़ रुपये का खनन घोटाला किया और हजारों करोड़ रुपये का शराब घोटाला किया। पेपर लीक पर बोले अमित शाह उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है तो पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमित शाह ने कहा, “हेमंत सोरेन की सरकार में भ्रष्टाचार हुआ और परीक्षा के पेपर लीक हुए। बीजेपी सरकार सत्ता में आने के बाद हम इन पेपर लीक करने वालों को सबक सिखाएंगे।

शादी सीजन में सोना-चांदी हुआ सस्ता, पढ़ें आपके शहर में क्या है गोल्ड और सिल्वर के भाव

इंदौर सोने-चांदी की कीमत में भारी गिरावट आई है। धनतेरस के बाद से लेकर अब तक सोने की कीमत में करीब 4 हजार रुपये की गिरावट आ चुकी है। वहीं चांदी भी तब से लेकर अब तक करीब 10 हजार रुपये सस्ती हुई है। इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक सोमवार को 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 77 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं चांदी करीब 91 हजार रुपये प्रति किलो पर है। फेस्टिवल सीजन में सोने और चांदी की खरीदारी के चलते इनकी कीमत काफी बढ़ गई थी। सोने की कीमत जहां 81 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी, वहीं चांदी भी एक लाख रुपये के पार पहुंच गई थी। इसके बाद इनकी कीमत में गिरावट का दौर जारी है। जानकारों के मुताबिक सोने-चांदी की कीमत में फिर से तेजी देखी जा सकती है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स के अनुसार 8 नवंबर की शाम को 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की कीमत 77382 रुपये थी। 11 नवंबर को 999 वाले 24 कैरेट सोने की कीमत 77027 रुपये हो गई है। 8 नवंबर की शाम को 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत 91130 रुपये थी। 11 नवंबर को 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत 90833 रुपये हो गई है। 11 नवंबर को 995 शुद्धता वाले सोने की कीमत 76719 रुपये हो गई है। 916 शुद्धता वाले सोने की कीमत 70557 रुपये हो गई है। 750 शुद्धता वाले सोने की कीमत 57770 रुपये हो गई है। 585 शुद्धता वाले सोने की कीमत 45061 रुपये हो गई है। कितनी गिरी सोने की कीमत? फेस्टिव सीजन के दौरान 23 अक्टूबर को 24 कैरेट गोल्ड का दाम 81,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन इसके बाद से इसमें गिरावट देखने को मिल रही है। और अब यह 77 हजार रुपये हो गई है यानी 4 हजार रुपये से ज्यादा की कमी आई है। वहीं बात अगर MCX की करें तो धनतेरस वाले दिन यानी 29 अक्टूबर को सोने की कीमत 79281 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अब यह 76660 रुपये पर है। ऐसे में इसमें 2500 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है। चांदी कितनी सस्ती हुई? धनतेरस के समय चांदी की कीमत एक लाख रुपये प्रति किलो पार हो गई थी। वहीं अब यह करीब 91 हजार रुपये पर आ गई है। ऐसे में तब से लेकर अब तक चांदी की कीमत में करीब 10 हजार रुपये की गिरावट आई है। वहीं एमसीएक्स पर भी चांदी की कीमत में गिरावट आई है। धनतेरस वाले दिन चांदी की कीमत 99332 रुपये प्रति किलो थी। अब यह 91154 रुपये पर है। ऐसे में यहां भी चांदी की कीमत में धनतेरस से लेकर अब तक 8178 रुपये की कमी आई है। क्यों आई इन धातुओं में गिरावट?     कीमतों में गिरावट की वजह फेस्टिव सीजन के बाद लगातार मांग में गिरावट को माना जा रहा है।     अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव खत्म हो चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप की जीत से निवेशक ज्यादा जोखिम वाले निवेश की ओर आकर्षित हुए हैं। यही कारण है कि सोने की मांग में कमी और क्रिप्टोकरेंसी में तेजी आई है।     अंतरराष्ट्रीय बाजार में सेंटीमेंट कमजोर होने के कारण सोने की मांग में कमी आई है। इससे भी इसकी कीमत गिरी है। कब बढ़ेगी कीमत? जानकारों के मुताबिक सोने-चांदी की कीमत जल्द ही बढ़ सकती है। कल यानी 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। कल से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में सोने और चांदी की मांग में फिर से तेजी आने की उम्मीद है, जिससे इसकी कीमत में उछाल आ सकता है। अगर आप सोने-चांदी में निवेश करना पसंद करते हैं तो इन धातुओं को खरीदने का यह सही समय हो सकता है। भारत के 7 प्रमुख महानगर शहरों में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव लखनऊ (Gold Price In Lucknow) 76860 इंदौर (Gold Rate In Indore) 76760 मुंबई (Gold Price In Mumbai) 76760 दिल्ली (Gold Price In Delhi) 76860 जयपुर (Gold Rate In Jaipur) 76900 कानपुर (Gold Rate In Kanpur) 76860 मेरठ (Gold Rate In Meerut) 76860 मिस्ड कॉल लगाकर जानें सोने-चांदी का भाव ibja केंद्र सरकार की छुट्टियों और शनिवार और रविवार को रेट जारी नहीं करता है। आपको 22 कैरेट और 18 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी का रेट जानना है, तो 8955664433 पर मिस्ड कॉल सकते हैं। मिस्ट कॉल के कुछ ही समय बाद एसएमएस के जरिए रेट्स मिल जाते हैं। गोल्ड या सिल्वर का रेट जानने के लिए www.ibja.co या ibjarates.com पर भी जा सकते हैं।

सीएम ने दक्षिण विधानसभा के मुख्य मार्ग पर रोड शो

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के लिए सोमवार को शाम पांच बजे प्रचार अभियान पर विराम लग गया।  प्रचार खत्म होने से पहले सीएम विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम अरुण साव, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, प्रत्याशी सुनील सोनी के नेतृत्व में दक्षिण विधानसभा के मुख्य मार्ग पर रोड शो किया गया। उक्त नेता एक ही वाहन मेंं सवार थे। बाद के वाहनों में भाजपाध्यक्ष किरणदेव सिंह, अन्य मंत्री, विधायक, संगठन पदाधिकारी सवार थे। जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे जहां से पुष्प वर्षा की जा रही थी। ढोल, धमाल, नर्तक दल, आतिशबाजी और गगनभेदी नारों से पूरा शहर आज भाजपामय हो गया था। मतदान 13 तारीख को होगा और रायपुर दक्षिण में 2 लाख 70 हजार से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भाजपा के रोड शो की शुरूआत जयस्तंभ चौक से हुई। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ लोगों की भारी भीड़ थी। प्रचार वाहन के आगे कार्यकर्ता चल रहे थे। विभिन्न मार्गों से होकर निकली रोड शो का नेताजी चौक कटोरातालाब में समापन हुआ। मुख्यमंत्री साय ने मतदाताओं से हाथ जोड़कर भाजपा प्रत्याशी सुनील सोनी को जिताने की अपील की। महिला कार्यकर्ता और युवाओं की टीम पूरे रोड शो के दौरान भाजपा के पक्ष में नारेबाजी करते हुए चल रहे थे। चूंकि समयाभाव था इसलिए काफिला काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था और कई जगहों पर तो कार्यकतार्ओं को दौड़ भी लगानी पड़ रही थी। आज रात और कल डोर टू डोर संपर्क करेंगे लेकिन नियम के दायरे में रहकर।

सरकार का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य अधोसंरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है: उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य अधोसंरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ये अधोसंरचनाएं जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक बने। उन्होंने निर्देश दिये कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ एचआर और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था भी करें ताकि इन सुविधाओं का लाभ आम जनता को शीघ्र प्राप्त हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य अधोसंरचनात्मक विकास परियोजनाओं और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा करने के निर्देश दिये, ताकि लागत में अनावश्यक वृद्धि पर रोक लगाई जा सके और आमजन को शीघ्रातिशीघ्र इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य प्राथमिकता से करें पूर्ण उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “स्वास्थ्य के अधिकार” के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा तैयार करने के साथ ही मानव संसाधन और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्माणाधीन 8 नए मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इनका कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि छात्रों के लिए सीटें बढ़ाई जा सकें और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से अधिक से अधिक मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी, जो राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। राजगढ़ और मऊगंज जिला अस्पताल का नवीन भवनों में शीघ्र संचालन शुरू करें राजगढ़ और मऊगंज जिला अस्पतालों के नए भवनों में जल्द से जल्द संचालन शुरू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक तैयारियों का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों की उन्नत सुविधाएं जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन अस्पतालों का शीघ्र संचालन होने से स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी और स्थानीय निवासियों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए अन्यत्र जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सतना में 650 बिस्तरों का स्टेट ऑफ़ आर्ट मेडिकल कॉलेज होगा विकसित उप मुख्यमंत्री ने सतना में 650 बिस्तरों वाले मेडिकल कॉलेज अस्पताल के निर्माण की स्थिति की भी समीक्षा की और इसे “स्टेट ऑफ आर्ट” हेल्थ केयर सुविधा के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य न केवल क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है, बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस अस्पताल में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी सुविधाएं और विशेषज्ञ विभाग शामिल किए जाएंगे, जो मरीजों को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करने में सहायक होंगे। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा का सुदृढ़ीकरण कार्य समय सीमा में करें पूर्ण उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में 321 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सुदृढ़ीकरण और उन्नयन कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कैंसर अस्पताल (200 बेड), एमसीएच ब्लॉक, नर्सिंग कॉलेज, हॉस्टल, ओपीडी ब्लॉक, मल्टी-लेवल पार्किंग और अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य शीघ्र पूर्ण हो ताकि मरीजों और मेडिकल छात्रों को इसका लाभ मिल सके। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर की क्षमता विस्तार के करें सुनियोजित प्रयास उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के जिला अस्पताल से मर्जर कर 1200 बिस्तरों तक क्षमता विस्तार कार्य की योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से मेडिकल कॉलेज की क्षमता में वृद्धि होगी और अस्पताल में मरीजों की संख्या का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। इसके साथ ही, उन्होंने यूजी और पीजी सीटों के विस्तार, नए 9 ओटी ब्लॉक, कैंसर ऑनकोलॉजी विंग, कैंसर अस्पताल और छात्रावास निर्माण जैसी अन्य परियोजनाओं की भी प्रगति की जानकारी ली और समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, रीवा में एक्सटेंशन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश रीवा के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में रीडेंसिफिकेशन के अंतर्गत चल रहे एक्सटेंशन कार्यों की धीमी प्रगति पर उप मुख्यमंत्री ने असंतोष व्यक्त किया और अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य के लोगों को विशेष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी शीघ्र पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को तत्परता से कार्य करना चाहिए। उप मुख्यमंत्री ने ज़िला चिकित्सालय मैहर, संजीवनी क्लीनिक सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिये। उन्होंने विभागीय नियुक्ति प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने समय से भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए औपचारिकताओं को पूर्ण करने के निर्देश भी दिये। बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी, अपर आयुक्त चिकित्सा शिक्षा एवं एमडी एमपीएचएससीएल डॉ. पंकज जैन, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुण श्रीवास्तव, पीआईयू, एमपी बीडीसी, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन, ब्रिज एंड रूफ के प्रतिनिधि और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रदेश में जनता को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने वाले डायल-100 वाहनों के संचालन के लिए नई एजेंसी के चयन की एक बाधा हुई दूर

 भोपाल  प्रदेश में जनता को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने वाले डायल-100 वाहनों के संचालन के लिए नई एजेंसी के चयन की एक बाधा दूर हो गई है। इसके लिए बनाए गए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली परियोजना मूल्यांकन समिति से स्वीकृति मिल गई है। अब यह प्रस्ताव इसी माह कैबिनेट में लाने की तैयारी है। यहां से स्वीकृति मिली तो दिसंबर में निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। इसमें कोई बाधा नहीं आई तो मार्च-अप्रैल, 2025 तक नई कंपनी के हाथ में संचालन की जिम्मेदारी आ जाएगी। इसके साथ ही इस सेवा में कई बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी जो अभी नहीं हैं। अभी प्रदेश में डायल-100 के एक हजार वाहन चल रहे हैं। नई कंपनी के आने पर पहले 1200 और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से दो हजार वाहन किए जाएंगे। बता दें, वर्तमान संचालन कंपनी का कार्यकाल पांच वर्ष था जो वर्ष 2020 में ही पूरा हो गया है। नई कंपनी का चयन नहीं हो पाने के कारण बीते चार वर्ष से पुरानी कंपनी को सेवा विस्तार दिया जा रहा है। वाहन पुराने होने के कारण बार-बार खराब हो रहे हैं। घटनास्थल पर पहुंचने में भी समय लग रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर रद किया गया था टेंडर इस वर्ष मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर वर्ष 2021 से चल रही टेंडर प्रक्रिया को रद कर दिया गया था। टेंडर तब रद किया गया जब एक कंपनी का चयन भी हो गया था। बस, उसे शासन से संचालन की स्वीकृति मिलनी थी। इसके बाद लोकसभा चुनाव आ गया। मई, 2024 में पुलिस मुख्यालय की ओर से नए सिरे से डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी गई थी। गृह विभाग में इसके परीक्षण में तीन से चार माह लग गए। अब परियोजना मूल्यांकन समिति की स्वीकृति मिल पाई है। नई कंपनी आने पर ये सुविधाएं बढ़ेंगी -वाहनों में सीसीटीवी कैमरे और तैनात पुलिसकर्मियों को बाडीवार्न कैमरे दिए जाएंगे, जिससे घटनास्थल की रिकार्डिंग हो सके। – जीपीएस के माध्यम से फोन करने वाले की सही लोकेशन ली जाएगी। इसके लिए निजी मैप प्रोवाइडर की मदद ली जाएगी। – काल सेंटर में फोन उठाने वालों की संख्या 80 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। – ऐसी सुविधा रहेगी, जिसमें फोन करने वाले का नंबर डायल-100 के पुलिसकर्मियों को पता नहीं चलेगा। – नए टेंडर में ऐसे वाहन रखने की तैयारी है जो और तेजी से घटनास्थल पर पहुंच सकें और इनमें अधिक लोग बैठ सकें।

40 सेकंड में डल्ला के गुर्गों ने जसवंत सिंह की कर दी थी हत्या, कनाडा के गैंगस्टर से जुड़ा कनेक्शन, आरोपी गिरफ्तार

ग्वालियर जसवंत सिंह गिल हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में प्रो-खालिस्तान समर्थक अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला का नाम सामने आया है। इसे भारत सरकार ने 2023 में आतंकवादी घोषित किया था। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि अर्श डल्ला, जो प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) से जुड़ा हुआ है और वह खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर के लिए काम करता था। जून 2023 में निज्जर की हत्या हो गई थी। हाल ही में, विदेश मंत्रालय (MEA) ने अर्श डल्ला का नाम उन ‘खालिस्तानी आतंकवादियों’ में शामिल किया था, जिनके प्रत्यर्पण का अनुरोध कनाडा से किया गया है। डल्ला के गुर्गे ने की ग्वालियर में हत्या डल्ला के दो गुर्गे – नवजोत सिंह और अमलप्रीत सिंह, दोनों पंजाब के बरनाला के रहने वाले हैं, जिन्हें पिछले महीने फरीदकोट में सिख कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या के आरोप में पंजाब में गिरफ्तार किया गया था। ग्वालियर पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, जसवंत सिंह गिल की हत्या में भी इन्हीं दोनों ने ही गोलियां चलाई थीं। 7 नवंबर को ग्वालियर में गिल की हत्या के बाद ग्वालियर पुलिस ने कई जगहों से सबूत इकट्ठा किए थे, जिनसे इन दोनों की पहचान हुई है। पुलिस मुख्य साजिशकर्ता सतपाल की तलाश कर रही है, जिसे अर्श डल्ला का करीबी बताया जा रहा है। मोहाली से दोनों शूटर गिरफ्तार दोनों शूटरों को पंजाब पुलिस ने सिख कार्यकर्ता की हत्या के सिलसिले में मोहाली के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और फरीदकोट पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए X पर कहा कि मोहाली के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और फरीदकोट पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान में कनाडा स्थित नामित आतंकवादी अर्श डल्ला के दो प्रमुख गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जो गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या में शामिल था। डल्ला के निर्देश पर जसवंत की हत्या की पूछताछ के दौरान पता चला कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी अर्श डल्ला के निर्देश पर जसवंत सिंह गिल की हत्या में भी शामिल थे। डीजीपी यादव ने कहा कि जांच से पता चला है कि आरोपियों ने 7 नवंबर, 2024 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में अर्श डल्ला के निर्देश पर जसवंत सिंह गिल की भी हत्या की थी। ग्वालियर हत्याकांड के बाद आरोपी पंजाब लौट आए थे और उन्हें मोहाली के खरड़ के पास से गिरफ्तार किया गया। पंजाब पुलिस को आरोपियों के पास से दो अत्याधुनिक हथियार मिले हैं। पंजाब पुलिस की रिमांड पर हैं दोनों हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पंजाब के डीजीपी यादव ने कहा कि दोनों पंजाब पुलिस की रिमांड पर हैं। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद हम उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लाएंगे। गिल हत्याकांड सुलझ गया है। जैसा कि संदेह था यह बदला लेने का मामला था और साजिश कनाडा से रची गई थी। नवजोत सिंह और अमलप्रीत सिंह हत्या वाले दिन सुबह ही ग्वालियर पहुंचे थे। ग्वालियर पुलिस की छह टीमें कर रही जांच ग्वालियर पुलिस ने छह विशेष टीमों का गठन किया था और जसवंत सिंह गिल की हत्या के लिए जिम्मेदार शूटरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। उनका मानना था कि यह आठ साल पहले किए गए अपराध का बदला लेने के लिए की गई हत्या है। पूरी घटना पास के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसमें दिख रहा है कि शूटरों ने सिर्फ 40 सेकंड में जसवंत सिंह की हत्या कर दी। हमलावर तुरंत भाग गए ग्वालियर एसपी ने कहा कि हमें एक ऑडियो वाला सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिससे यह पुष्टि होती है कि शूटर स्थानीय नहीं थे। बाद में, हमें और सबूत मिले जैसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज एक होटल से मिले जो उन्होंने टेहरौली क्षेत्र में चेक इन किया था। उन्होंने बताया कि शूटर अलग दिख रहे थे और उनके लहजे से लग रहा था कि वे पंजाब के हो सकते हैं। गिल की हत्या करने के बाद हमलावर तुरंत मौके से फरार हो गए थे। अपने मामा की हत्या में शामिल था जसवंत गिल 2016 में, जसवंत सिंह गिल अपने मामा सुखविंदर सिंह की हत्या में शामिल था। पारिवारिक विवाद में सुखविंदर की मौत हो गई थी और उनके माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जसवंत, जो अपने मामा के परिवार के साथ रहता था, ने सुखविंदर को उसके सोते समय गोली मार दी। बाद में अपनी मामी और मामा पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक हुआ कि केवल 13 वर्षीय हरमन कौर ही रसोई में छिपकर बच पाई। जसवंत मौके से फरार हो गया और कई सालों तक फरार रहा। आखिरकार उसे 2018 में पकड़ लिया गया और अपने मामा की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सुखविंदर का परिवार जो अब कनाडा में रहता है, जांच के घेरे में था। ढाई लाख रुपए में दी थी सुपारी जांच में जल्द ही पता चला कि सुखविंदर सिंह के भाई, सतपाल सिंह, जो कनाडा का निवासी है, ने अर्श डल्ला के माध्यम से 2.5 लाख रुपये का अनुबंध देकर हत्या की योजना बनाई थी। सतपाल के ससुराल वाले पंजाब में रहते हैं और उन्होंने वहां से शूटरों की व्यवस्था की। योजना को अंजाम देने के लिए, उन्होंने राय मस्तूरा गांव के अपने रिश्तेदार, जीते उर्फ जीते सरदार की मदद ली, जिन्होंने ग्वालियर में रेकी और व्यवस्था में सहायता की। जसवंत की रिहाई बाद मिले रुपए जसवंत की हत्या के लिए पैरोल पर रिहाई से पहले जीते के खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 1.5 लाख रुपये हत्या के तुरंत बाद भेजे गए थे। जीते सरदार नहीं हुआ है गिरफ्तार फिलहाल जीते सरदार को गिरफ्तार नहीं किया गया है, जबकि सुपारी हत्या के पैसे उसके खाते में जमा किए गए थे। शाम करीब 7:00 बजे जसवंत सिंह गिल (45) डबरा के गोपाल बाग में अपने घर के बाहर खाना खाने के बाद टहल रहे थे तभी उनकी हत्या कर दी गई।   कनाडा से बुक हुई थी टैक्सी हत्या के बाद शूटरों को भगाने के लिए कनाडा से एक … Read more

मध्य प्रदेश में एमएसपी पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति जारी

भोपल मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, ज्वार और बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है. सरकार धान 2300, ज्वार 3371 और बाजरा 2625 रुपये क्विंटल MSP की दर पर खरीदेंगी. समर्थन मूल्य पर ज्वार और बाजरा की 22 नवंबर और धान की ख़रीदी 2 दिसंबर से की जाएगी. इन अफसरों को दिए गए निर्देश खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री गोबिन्द सिंह राजपूत ने प्रदेश के कलेक्टर, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के अफ़सरों को निर्देश दिए हैं. साथ ही लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी. उपार्जन केंद्रों का निर्धारण किसानों की सुविधा के अनुसार किया जाएगा, जिनकी प्राथमिकता गोदाम और कैप परिसर में होगी. किसानों की सुविधा अनुसार होगा उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा। यह होंगी उपार्जन करने वाली संस्थाएँ उपार्जन कार्य सहकारी समितियां, बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाएँ, ब्लाक स्तरीय विपणन सहकारी संस्थाएँ, जिला थोक उपभोक्ता भण्डार, महिला स्व-सहायता समूह एवं क्लस्टर लेवल फेडरेशन, उपार्जन कार्य करने के लिए सहमति देने वाली अन्य संस्थाओं को दिया जा सकेगा। संस्थाओं की पात्रता का निर्धारण विभाग द्वारा किया जाएगा। बारदाना व्यवस्था समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा। गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा। कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा। किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा। कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये www.mpeuparjan.nic.in पर स्लॉट बुकिंग करानी होगी। उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा। पंजीकरण और बोए गए रकबे के आधार पर होगा उपार्जन केंद्रों का निर्धारण यदि जहां गोदाम या कैप उपलब्ध नहीं है वहां अन्य स्थलों पर भी उपार्जन केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उपार्जन केंद्रों की संख्या का निर्धारण किसानों के पंजीकरण और बोए गए रकबे के आधार पर किया जाए. उपार्जन कार्य के लिए सहकारी समितियां, बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाएं, महिला स्व-सहायता समूह और अन्य संस्थाएं शामिल की जाएंगी. इन संस्थाओं की पात्रता का निर्धारण विभाग द्वारा किया जाएगा. जूट बारदाने का किया जाएगा उपयोग समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए 40 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने का उपयोग किया जाएगा. धान, ज्वार और बाजरा की गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केंद्र और भंडारण स्थल पर उपार्जन एजेंसियों का होगा. वहीं ज्वार और बाजरा का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जाएगा.  

BU : सुंदरकांड पाठ में गई छात्राओं को देरी के लिए वार्डन ने लिखवाया माफीनामा, बीयू परिसर के सामने हंगामा

भोपाल सुंदरकांड पाठ में शामिल होने गई बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की छात्राओं को रात आठ बजे लौटने पर वार्डन ने छात्रावास में घुसने से रोक दिया था। छात्राओं से माफीनामा लिखवाया गया था। वार्डन की यह कारवाई उनके लिए अब मुसीबत बन गई है। अब सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसको धार्मिक कार्यक्रमों से रोकने की कोशिश बताकर हंगामा खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय परिसर के बाहर बैठकर परिषद के कार्यकर्ता रघुपति राघव राजा राम गा रहे हैं। उनके साथ विवि के छात्र और छात्राएं भी शामिल हो गई है। सुरक्षा का बहाना बनाकर धार्मिक आयोजन में जाने से रोकते हैं छात्राओं का कहना है कि हम सभी को सुरक्षा का बहाना बनाकर धार्मिक आयोजनों में जाने से नहीं रोका जा सकता है, इसके लिए उन्होंने कुल कुलगुरु से वार्डन को हटाने की मांग की है। सुंदरकांड में शामिल होने से कुछ छात्राएं देरी से पहुंची थीं हॉस्‍टल तो… यह मामला तब शुरू हुआ जब बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के अंदर बने मंदिर में पूजा करने व दर्शन करने और यहां सुंदरकांड के आयोजन में शामिल होने वाली कुछ छात्राएं देर से हॉस्‍टल पहुंची थीं. इसके बाद हॉस्‍टल वार्डन ने कहा था कि यदि तय समय से अधिक समय से लौटना हो तो फिर उसके लिए परमिशन लेनी होगी. वॉर्डन का कहना था कि शाम 7:00 से 7:30 बजे से ज्यादा देरी होने पर परमिशन लेना जरूरी होगा. वार्डन के इसी फरमान पर विवाद गहरा गया. इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरेंगे। उनका कहना है, “मोहन यादव के राज में सुंदरकांड और धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं सहन की जाएगी।” वहीं, भाजपा की छात्र इकाई ABVP ने इसको लेकर यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन किया है। ABVP से जुड़े छात्र-छात्राएँ विश्वविद्यालय के मेन गेट पर एकत्रित हुए और रामधुन का आयोजन कर प्रशासन को सदबुद्धि देने की प्रार्थना की। ABVP के एक नेता ने बताया कि छात्राओं को मंदिर जाने और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने से रोकने की यह कार्रवाई निंदनीय है और वॉर्डन के निर्देश इस तुगलकी निर्देश के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा कि यह फरमान उनकी आस्था और मान्यताओं पर सीधा प्रहार है। उन्होंने विषय की गंभीरता को ध्यान में रखकर अविलंब कार्यवाई सुनिश्चित करने की माँग की। हिंदुस्तान में इस तरह का फरमान क़तई स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद ABVP ने विरोध में पोस्टर भी जारी किया।

यूपी पीसीएस 2024 प्रारंभिक परीक्षा दो दिन में कराने और नॉर्मलाइजेशन के खिलाफप्रयागराज में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन

प्रयागराज यूपी पीसीएस 2024 प्रारंभिक परीक्षा दो दिन में कराने और नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) के खिलाफ सोमवार को प्रयागराज में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन हो रहा है। इस मुद्दे पर कई दिनों से आंदोलित छात्रों ने पहले ही इस प्रदर्शन का ऐलान किया था जिसे देखते हुए सुबह से यूपीपीएससी के आसपास पुलिस बल का भारी इंतजाम किया गया था। पुलिस, छात्रों को धरनास्‍थल पर भेजने के प्रयास में थी लेकिन हजारों की संख्‍या में छात्र आयोग के गेट नंबर दो पर पहुंच गए हैं। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि जब तक मानकीकरण निरस्त होने की नोटिस जारी नहीं होती और परीक्षा एक दिन में नहीं होती तब तक उनका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक धरना जारी रहेगा। धरने में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली और अन्य राज्यों से कई प्रतियोगी छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हैं। उत्‍तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के गेट नंबर दो पर हजारों की संख्‍या में छात्र जुटे हैं। प्रदर्शन में कुछ छात्राएं भी हैं। छात्रों की भीड़ और उनके दबाव से चौराहे पर लगी बैरिकेडिंग टूट गई। 2013 के त्रिस्तरीय आरक्षण आंदोलन के 11 साल बाद छात्रों का इतना बड़ा प्रदर्शन प्रयागराज में देखने को मिल रहा है। बता दें कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने सात और आठ दिसंबर को पीसीएस 2024 प्रारंभिक परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग के सचिव अशोक कुमार ने उन सभी 41 जिलों के डीएम को आठ नवंबर को निर्देश भेजे जहां परीक्षाएं कराई जाएंगी। लेकिन छात्र आयोग के निर्णय को किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं हैं। दो नम्बर गेट के बाहर पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान बैरीकेडिंग कर खड़े हैं। तिरंगे के साथ प्रदर्शन छात्र हाथों में तिरंगा और भगत सिंह की तस्वीर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। नारेबाजी और तालियों के बीच कुछ सुनना मुश्किल हो रहा है। यूपीपीएससी का दो नम्बर गेट पूरी तरह से पैक हो गया है। छात्रों के बीच से ‘आवाज़ दो हम एक हैं,’ छात्र एकता जिंदाबाद’, ‘आयोग की तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगातार लगाए जा रहे हैं। उनके नारों के आगे हैंडहेल्ड स्पीकर की आवाज भी दब जा रही है। कब और कहां से शुरू हुआ मामला, सिलसिलेवार समझें  बीते 1 जनवरी 2024 को UPPSC ने अपर सबऑर्डिनेट सर्विस (PCS) प्रीलिम्स एग्जाम का नोटिफिकेशन जारी किया था. इसके अनुसार 17 मार्च 2024 को परीक्षा होनी थी. लेकिन ये स्थगित हो गई. फिर 3 जून को इसी परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करते हुए घोषणा की गई कि 27 अक्टूबर को परीक्षा होनी है. एक बार फिर डेट बदली और बीती 5 नवंबर को UPPSC ने एक बार फिर नोटिफिकेशन जारी कर दिया. इस नोट‍िफिकेशन के साथ ही एक नया नियम भी सामने आया. इसी के बाद से अभ्यर्थी नाराज हैं. दरअसल इस नोटिफिकेशन में कहा गया था कि परीक्षा का आयोजन एक दिन के बदले दो दिन में किया जाएगा.  ऐसे शुरू हुआ बवाल  दरअसल 11 फरवरी 2024 को समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी यानी आरओ एआरओ का प्रीलिम्स एग्जाम हुआ था. उसी दिन शाम होते-होते सोशल मीडिया पर पेपर लीक की खबरें आने लगीं. कई लोगों ने लिखा कि परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो गया. इस बात पर छात्रों का विरोध शुरू हो गया. दोबारा परीक्षा की मांग हुई तो आयोग ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) से मामले की जांच कराने का फैसला लिया. छात्रों के भारी व‍िरोध के बाद दो मार्च को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 6 महीने में दोबारा परीक्षा होगी. उन्होंने ट्वीट पर ल‍िखा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी 2024 को आयोजित समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा, 2023 को निरस्त करने और आगामी 6 माह में इसे दोबारा कराने के आदेश दिए हैं. परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा. युवाओं के दोषियों को ऐसी सजा दिलाएंगे, जो नजीर बनेगी. अब इधर हजारों अभ्यर्थी जो पीसीएस परीक्षा का इंतजार कर रहे थे. अचानक 7 मार्च को आयोग ने नोटिस जारी किया कि 17 मार्च की PCS प्रीलिम्स परीक्षा ‘अपरिहार्य कारणों’ से स्थगित की जाती है. बताया गया कि परीक्षा जुलाई में हो सकती है. लेकिन कोई तारीख नहीं दी गई. इससे यूपी पीसीएस के अभ्यर्थी भी निराश हो गए.  कैसे बढ़ी नाराजगी  अभ्यर्थी मुख्यमंत्री योगी के ट्वीट के बाद आश्वस्त थे कि 6 महीने में RO/ARO एग्जाम दोबारा होगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ क्योंकि परीक्षा के पेपर लीक की जांच जारी रही. इसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. लेकिन पेपरलीक कैसे हुआ, इसकी कोई अपडेट नहीं आई. इस बीच 3 जून को पीसीएस एग्जाम करवाने को लेकर फिर से नोटिफिकेशन आया ज‍िसमें 27 अक्टूबर को प्रीलिम्स की परीक्षा की डेट दी गई. मगर, एग्जाम से कुछ दिन पहले फिर 16 अक्टूबर को आयोग ने फिर से परीक्षा स्थगित करने की सूचना दी. इसमें एग्जाम सेंटर बनाने में देरी की वजह बताई गई. इसी नोटिस में कहा गया कि दिसंबर के पहले पखवाड़े तक परीक्षा करवाई जा सकती है. आयोग ने 19 जून के सरकार के आदेश का हवाला दिया कि इसके अनुसार परीक्षा केंद्र मिलने पर अभ्यर्थियों को अगली डेट की जानकारी दे दी जाएगी. क्या था जून का वो आदेश आपको बता दें कि इससे पहले 19 जून को यूपी सरकार ने परीक्षा केंद्रों को लेकर कुछ गाइडलाइन जारी की थी. इसमें परीक्षा केंद्र चुनने के लिए दो कैटेगरी बनाई गई थी. कैटगरी ‘ए’ में राजकीय इंटर कॉलेज, सरकारी डिग्री कॉलेज, राज्य और केंद्र के विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग और राज्य के मेडिकल कॉलेज को रखा गया था. वहीं ‘बी’ में उन सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों को रखा गया, जिनकी ‘छवि’ अच्छी हो. प्राइवेट संस्थानों को सेंटर नहीं बनाने का आदेश आया. इसके अलावा ये भी कहा गया कि एग्जाम सेंटर्स बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन के 10 किलोमीटर के दायरे में हों. साथ ही एक पाली में अधिकतम 5 लाख अभ्यर्थियों को ही रखने का आदेश आया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग को PCS प्रीलिम्स करवाने के लिए 1758 एग्जाम सेंटर्स की जरूरत थी. लेकिन आदेश का पालन करते हुए आयोग को ऐसे 978 परीक्षा केंद्र ही मिल पाए. जबकि इस परीक्षा के लिए  5 लाख 76 हजार 154 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड हैं. … Read more

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