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सुनेत्रा पवार ने संभाला मोर्चा, NCP के मर्जर पर गहराया सियासी संकट

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने के बाद से अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार अब फुल एक्शन में नजर आ रही हैं. सोमवार को एनसीपी के तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर सहमति बन गई है. अब सुनेत्रा पवार सरकार में भूमिका के साथ ही संगठन की कमान भी संभालेंगी. ऐसे में अजित पवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुनेत्रा पवार पूरी तरह से तैयार हैं.  एनसीपी नेताओं की बैठक में सुनेत्रा पवार को NCP की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति जताई गई है. एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अपना पूर्ण समर्थन दिया.सुनेत्रा पवार को अधिकारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर 26 फरवरी को फाइनल मुहर लगेगी. एनसीपी के दोनों गुटों के प्रस्तावित विलय पर विचार-विमर्श की मांग के बीच पार्टी नेताओं के साथ डिप्टीसीएम सुनेत्रा पवार ने मुंबई में सोमवार शाम पार्टी नेताओं के साथ बैठक की. इस दौरान विलय के मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि एनसीपी के मर्जर प्लान पर क्या पूर्ण विराम लग गया है?  एनसीपी के विलय पर क्या लग गया ग्रहण डिप्टीसीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार ने पहली बार एनसीपी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. सुनेत्रा पवार ने यह कदम कई नेताओं के उन बयानों के बाद उठाया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पार्टी नेताओं की राय को ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसके साथ ही यह बात भी उठी थी कि सभी विधायकों की एक बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाए और विलय पर सामूहिक निर्णय लिया जाए. यह बात एनसीपी नेताओं के द्वारा लगातार उठाई जा रही थी.  सुनेत्रा पवार के साथ सोमवार को पार्टी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें शरद पवार और अजित पवार गुट के एक साथ आने और एनसीपी के विलय के मुद्दे पर चर्चा भी नहीं हुई. ऐसे में एनसीपी विलय की चर्चा पर फिलहाल फैसला टाल दिया गया है. साथ ही विधायकों को सख़्त हिदायत दी गई है कि विलय के संबंध में बाहर मीडिया में कोई भी बयान न दें. डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को पार्टी में भी लीड रोल देने की बात पर चर्चा जरूर हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि एनसीपी के मर्जर प्लान पर क्या ग्रहण लग गया है क्या? एनसीपी की कमान संभालेंगी सुमेत्रा पवार महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने के बाद अब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार एनसीपी की कमान संभालेंगी. सोमवार को हुई एनसीपी नेताओं की बैठक में सुनेत्रा पवार को एनसीपी की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति जताई गई है. बताया गया कि सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर 26 फरवरी को आधिकारिक मुहर लगेगी. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अपना पूर्ण समर्थन दिया.एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 26 फरवरी को मुंबई में होने की उम्मीद है, जहां उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी. महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी किस रास्ते जा रही. अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाएंगी सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में हुई बैठक में विधायकों ने उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने और दिवंगत अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने में अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया.एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल, राज्य इकाई के प्रमुख सुनील तटकरे और वरिष्ठ पार्टी मंत्री छगन भुजबल ने बैठक को संबोधित किया और एनसीपी के विकास में अजित पवार की भूमिका और राज्य भर में इसके विस्तार की उनकी इच्छा को याद किया. डिप्टीसीए सुनेत्रा पवार ने अजित पवार के साथ अपने सियासी जुड़ाव और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया, जिनके कारण वह विधायक दल की नेता और उपमुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने एनसीपी विधायकों से कहा कि मैंने पार्टी को एकजुट रखने और उसकी स्थिति को मजबूत करने के लिए नई जिम्मेदारी स्वीकार करने का फैसला किया है.

अब और महंगी हुई सिगरेट, कंपनियों के शेयरों में भी आई तेजी से गिरावट

 नई दिल्‍ली सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ने सिगरेट के दाम में इजाफा करने का ऐलान कर दिया है. ITC लिमिटेड ने कुछ कैटेगरी में सिगरेट की कीमतों में तेज बढोतरी की है. कंपनी ने एक्‍सपाइज बढ़ोतरी के असर को कम करने के लिए सिगरेट के दाम मे इजाफा किया है. सिगरेट की कीमतों में 2 रुपये से लेकर 10 रुपये तकी की बढ़ोतरी हुई है. अलग-अलग कैटेगरी में सिगरेट के दाम में इजाफा हुआ है. Godfrey Phillips India ने Marlboro Compact की कीमत 9.5 रुपये प्रति स्टिक से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति स्टिक कर दी है. इस बीच, सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी रही.  अब कितनी महंगी हुईं सिगरेट आईटीसी के 50 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍से वाले सिगरेट में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही कंपनी 74mm कैटेगरी में कीमत बढ़ोतरी के साथ ही नए प्रोडक्‍ट्स पेश करने की भी योजना बना रही है. Dual Sensory Filter Technology के साथ 64mm से बड़ी सिगरेट के दाम प्रति स्टिक 1 से 2 रुपये का इजाफा हुआ है.  किंग साइज फिल्‍टर  टिप वाले 74mm कैटेगरी में 7 रुपये तक का इजाफा हुआ है. स्लिम्‍स  64mm कैटेगरी की सिगरेट में 6.21 रुपये एक्साइज बढ़ोतरी के मुकाबले 5 से 10 रुपये कीमतों में इजाफा हुआ है.      1 फरवरी 2026 से लागू हो चुकी है बढ़ोतरी गौरतलब है कि सरकार ने  1 फरवरी 2026 से सिगरेट समेत तंबाकू उत्‍पादों पर एक्‍स्‍ट्रा डयूटी लगा दिया है, जिसके बाद से कंपनियों पर राजस्‍व का दबाव बढ़ा रहा था, लेकिन अब इन कंपनियों ने कीमतों में इजाफा कर दिया है. कंपनियों के पोर्टफोलियो में शामिल सिगरेट के दामों में 2 रुपये लेकर 10 रुपये तक का इजाफा किया गया है .                 शेयरों में आई तेजी  आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को 3 प्रतिशत से ज्‍यादा की तेजी देखी, क्योंकि कंपनी द्वारा सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें आईं. एनएसई पर आईटीसी के शेयर ₹318.45 पर बढ़त के साथ खुले और दिन के दौरान ₹328.05 के उच्चतम स्तर तक पहुंचे, जो 3.18 फीसदी की तेजी थी. हालांकि कारोबार बंद होने तक यह शेयर 2.34% चढ़कर 325.40 रुपये था. इसी के साथ ही गॉडफ्रे फिलिप्‍स का शेयर 2.50 फीसदी चढ़कर 2,065 रुपये पर बंद हुए. 

ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस में आग लगने से मचा हंगामा, यात्री दहशत में

 नागपुर नई दिल्ली से चेन्नई जा रही ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस में उस समय हड़कंप मच गया, जब ट्रैक पर दौड़ रही ट्रेन में आग लग गई। जीटी एक्सप्रेस ( ट्रेन नंबर 12616) के स्लीपर कोच में मंगलवार दोपहर आग लग गई। यह घटना सेंट्रल रेलवे के नागपुर डिविजन में सिंधी और तुलजापुर स्टेशनों के बीच हुई। ट्रेन चल रही थी तभी SLR कोच से धुआं निकलता देखा गया. धुआं देखते ही ट्रेन को सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत रोक दिया गया। यात्रियों को सुरक्षित रखा गया और किसी को चोट नहीं आई है। रेलवे स्टाफ ने तेजी से कार्य करते हुए प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया। इसके साथ ही स्थानीय फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया। रेलवे कर्मचारियों ने शुरुआती तौर पर कोच में उपलब्ध फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करके आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। रेलवे अधिकारी मामले की आगे जांच कर रहे हैं। सेंट्रल रेलवे के प्रवक्ता संजय मुले ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ट्रेन 12616 नई दिल्ली-चेन्नई (तंबरम) ग्रांट ट्रंक एक्सप्रेस सुबह नागपुर से रवाना हुई थी। वर्धा के सिंधी रेलवे स्टेशन की ओर जाते समय सुबह 11:09 बजे ट्रेन के आखिरी गार्ड कोच में धुआं देखा गया। उन्होंने बताया कि ट्रेन को सिंधी-तुलजापुर खंड पर रोक दिया गया, प्रभावित डिब्बे को तुरंत अलग कर दिया गया और दमकल कर्मियों को बुलाया गया। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन और उस डिब्बे में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं. विस्तृत जांच के बाद आग लगने का कारण पता चलेगा। अधिकारी ने बताया कि प्रभावित डिब्बे के बिना ट्रेन कुछ समय बाद रवाना होगी।

T20 World Cup 2026: जिम्‍बाब्‍वे की किस्मत चमकी, ऑस्‍ट्र‍ेलिया बाहर; बारिश बनी IRE-ZIM मैच की विलेन

नई दिल्ली टी20 विश्‍व कप 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ऑस्‍ट्रेलिया सुपर-8 से बाहर हो गई है, वहीं जिम्‍बाब्‍वे ने अगले दौर में जगह बना ली है। मंगलवार को आयरलैंड और जिम्‍बाब्‍वे का मैच बारिश में धुल गया। ऐसे में दोनों ही टीमों को 1-1 अंक दिया है। जिम्‍बाब्‍वे पहले ही अपने 2 मैच जीत चुकी थी, ऐसे में टीम के 5 अंक हो गए। दूसरी ओर ऑस्‍ट्रेलिया को अपने पिछले 3 मैच में 1 ही जीत मिली थी। विश्‍व कप में ऑस्‍ट्रेलिया का सफर ऑस्‍ट्रेलिया ने जीत के साथ टी20 विश्‍व कप 2026 का आगाज किया था। अपने पहले मैच में कंगारू टीम ने आयरलैंड को 67 रन से मात दी। हालांकि, इसके बाद ऑस्‍ट्रेलिया को बैक टू बैक हार मिली। जिम्‍बाब्‍वे ने ऑस्‍ट्रेलिया को 23 रन से रौंद दिया। सोमवार को श्रीलंका ने ऑस्‍ट्रेलिया को 8 विकेट से धूल चटाई। इसके बाद ऑस्‍ट्रेलिया की सुपर-8 की उम्‍मीदों को झटका लगा। वह सुपर-8 में जगह बनाने के लिए अन्‍य टीम के रिजल्‍ट पर निर्भर थे। जिम्‍बाब्‍वे पर निर्भर थी ऑस्‍ट्रेलिया ऑस्‍ट्रेलिया को अगर सुपर-8 में जगह बनानी थी तो इसके लिए जरूरी था कि जिम्‍बाब्‍वे अपने दोनों मैच हार जाए। इससे टीम के 4 अंक ही रहते। वहीं कंगारू टीम अपने आखिरी ग्रुप मैच में ओमान को बड़े अंत से हराकर सुपर-8 में जा सकती थी। टी20 विश्‍व कप 2026 में जिम्‍बाब्‍वे के प्रदर्शन की बात करें तो टीम ने अब तक हार का मुंह नहीं देखा है। सबसे पहले जिम्‍बाब्‍वे को ओमान को 8 विकेट से करारी शिकस्‍त दी। इसके बाद सिकंदर रजा की कप्‍तानी वाली टीम ने ऑस्‍ट्रेलिया को हराकर सभी को चौंका दिया। सुपर-8 में इन टीमों से भिड़ेगा भारत ऑस्‍ट्रेलिया के बाहर होते ही यह भी तय हो गया कि इंडिया सुपर-8 में किस-किस टीम से टकरागी। 22 फरवरी को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्‍टेडियम में भारतीय टीम का सामना साउथ अफ्रीका से होगा। इसके बाद 26 फरवरी को सूर्या एंड कंपनी जिम्‍बाब्‍वे से भिड़ेगी। यह मैच चेन्‍नई के एमए चिदंबरम स्‍टेडियम में होगा। सुपर -8 के आखिरी मैच में मैन इन ब्‍ल्‍यू का सामना वेस्‍टइंडीज से होगा। यह भिड़ंत कोलकाता के ईडन गार्डंस में होगी।  

मध्यप्रदेश का विकास उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया संतुलनपूर्ण प्रगति

म.प्र. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 म.प्र. ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण : उप मुख्यमंत्री  देवड़ा जीडीपी में 11.14 प्रतिशत वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर हुई 1,69,050 रूपये भोपाल उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के साथ संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में प्रस्तुत आँकड़ों से जाहिर है कि मध्यप्रदेश योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।  देवडा ने कहा कि मध्यप्रदेश का विकास योजनाबद्ध, संतुलित और समावेशी रणनीति पर आधारित है। कृषि से उद्योग, सेवा से सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन से सुशासन तक प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने मध्यप्रदेश पूरी क्षमता के साथ तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आर्थिक समृद्धि के जो कदम उठाये हैं, उनके परिणाम मिलना शुरू हो गये हैं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रूपये आँका गया है, जो वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर (2011-12) भाव पर जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रूपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। उन्होने कहा कि आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38,497 रूपये रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,69,050 रूपये हो गई है। स्थिर (2011-12) भाव पर यही आय 76,971 रूपये तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि यह आय स्तर में सुधार का संकेत है, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।  देवड़ा ने वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। स्थिर भाव पर यह संरचना क्रमशः 33.54 प्रतिशत, 26.18 प्रतिशत और 40.28 प्रतिशत रही। इससे जाहिर है कि कृषि आधारित आधार को मजबूती देते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्रों में भी संतुलित विस्तार हुआ है। प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रूपये रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रूपये की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं जलीय कृषि तथा खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। उद्यानिकी क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर रहा और दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। गांवों की समृद्धि के लिए 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के बनने से ग्रामीण आधार को मजबूती मिली है। द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन- GSVA वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रूपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि सीएसआर व्यय 600.47 करोड़ रूपये दर्ज किया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल GSVA 5,85,588 करोड़ रूपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों का आना यह बताता है कि इस क्षेत्र में गति आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रूपये राजस्व आधिक्य अनुमानित कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहना यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश के वित्तीय अनुशासन में निरंतर सुधार हुआ है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि नगरीय विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण हुए तथा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को 8 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय 34,112 करोड़ रुपये (GSDP का 3 प्रतिशत) रहा। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और मातृ मृत्यु दर 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गई। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य रही और कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है।  

आयुष्मान योजना में बदलाव: BPL कार्डधारकों को भी देना होगा जेब से खर्च, मुफ्त सेवा बंद

भोपाल   एमपी के भोपाल शहर में जयप्रकाश जिला अस्पताल में नि:शुल्क एमआरआइ जांच अचानक बंद हो गई है। पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआइ केंद्र ने ओपीडी के मरीजों की मुफ्त जांच से इनकार कर दिया। आयुष्मान भारत और बीपीएल कार्डधारकों को अब इस जरूरी जांच के लिए कम से कम 1500 रुपए और जरूरत के अनुसार 3000 से 6000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। पिछले दिनों तक जेपी अस्पताल में ओपीडी के आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त एमआरआइ जांच की सुविधा मिल रही थी। लेकिन सरकार द्वारा करीब 50 लाख रुपए से अधिक का भुगतान लंबित रहने पर एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए। बीते दिनों सात-आठ मरीजों की जांच से साफ इनकार कर दिया गया। इससे इलाज की रफ्तार थम गई और मरीजों की परेशानी बढ़ गई। अन्य जिलों में भी संकट, सेवाएं ठप भुगतान अटकने के कारण इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में भी आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की एमआरआइ सेवाएं प्रभावित हुई हैं। जिन मरीजों को तत्काल जांच की जरूरत है, उन्हें निजी खर्च पर जांच करानी पड़ रही है। तीनों जिलों में निजी एजेंसियों का दो करोड़ रुपए से अधिक भुगतान बकाया बताया जा रहा है। जल्द बजट जारी नहीं हुआ, तो सेवाएं भी ठप होने की आशंका है। सेंटर संचालक एजेंसी का कहना है कि पिछले एक साल से भुगतान नहीं मिला है। मशीनों की ईएमआइ, रखरखाव और स्टाफ का वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा। कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकला। मजबूरी में मुफ्त सेवाएं बंद करनी पड़ीं। रतन सिंह, ऑपरेशन हेड, कृष्णा डायग्नॉस्टिक सेंटर प्रशासन का आश्वासन सीएमएचओ कार्यालय का कहना है कि बकाया भुगतान का मामला संज्ञान में है। भुगतान राज्य स्तर से होता है, इसलिए समय लग रहा है। संबंधित विभाग और आयुष्मान सेल से समन्वय कर जल्द बजट जारी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

12 जिलों में बढ़ेगा कनेक्टिविटी! मार्च से खुलेगा 600 किमी का एक्सप्रेसवे, टोल रेट भी सामने

लखनऊ  साल 2021 में शुरू हुए गंगा एक्‍सप्रेसवे का निर्माण अब पूरा हो चुका है. यूपी सरकार ने इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया है और अब उद्घाटन करने की तैयारी कर रही है. सरकार की मंशा है कि 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले नए वित्‍तवर्ष से इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू की जा सके, ताकि टोल वसूली से इस पर खर्च किए गए पैसों को रिकवर किया जा सके. 594 किलोमीटर के इस एक्‍सप्रेसवे से गंगा किनारे के करीब 12 जिलों में विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों के लिए भी पूर्वी यूपी से पश्चिमी यूपी तक जाना आसान हो जाएगा. एक्‍सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के वरिष्‍ठ अधिकारियों का कहना है कि यूपी सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया है, ताकि पीएम मोदी से इस एक्‍सप्रेसवे का उद्घाटन कराया जा सके. माना जा रहा है कि इसे 25 से 31 मार्च के बीच जनता को समर्पित किया जा सकता है. अथॉरिटी की मंशा है कि एक्‍सप्रेसवे पर 1 अप्रैल से टोल वसूली शुरू की जा सके, ताकि इस पर आए 36,200 करोड़ रुपये के खर्च की भरपाई जल्‍द हो सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही दिसंबर, 2021 में इसकी नींव रखी थी और 6 लेन का यह एक्‍सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार हो चुका है. गंगा नदी के किनारे से आने वाला यह एक्‍सप्रेसवे मेरठ के पास बिजौली गांव से शुरू होता है और प्रयागराज में जूड़ापुर डांडू गांव के पास खत्‍म होता है. इस तरह यह मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ता है और पूर्वी यूपी से पश्चिमी यूपी में आवाजाहाी आसान बनाता है. टोल का ट्रायल का भी पूरा उत्‍तर प्रदेश एक्‍सप्रेसवे इंडस्ट्रियल अथॉरिटी यानी यूपीडा के सीईओ श्रीहर‍ि प्रताप शाही का कहना है कि बिजौली गांव के पास यह एक्‍सप्रेसवे मेरठ-हापुड़ हाईवे से जुड़ता है, जबकि प्रयागराज के जूड़ापुर डांडू गांव के पास फाफामऊ-प्रतापगढ़ हाईवे से जुड़ता है. शाही ने बताया कि हमने समय से पहले ही इसके 1,498 ढांचे का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है. साथ टोल वूसली मैनेजमेंट का ट्रायल भी पूरा हो चुका है. फिलहाल प्रोफेशनल्‍स से इस पर वाहन चलाने के अनुभव और वाहनों की गति आदि को लेकर टेस्‍ट किए जा रहे हैं. उद्घाटन के लिए शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है और उनके निर्देश पर ही अंतिम फैसला किया जाएगा. सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा सफर मेरठ-प्रयागराज एक्‍सप्रेसवे के तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच आने-जाने में लगने वाला समय भी घटकर आधा रह जाएगा. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 12 घंटे लग जाते हैं, लेकिन एक्‍सप्रेसवे तैयार होने के बाद इस दूरी को महज 6 से 7 घंटे में ही पूरा किया जा सकेगा. यह एक्‍सप्रेसवे 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से गुजरेगा. इन जिलों के 518 गांवों को यह मुख्‍य सड़क नेटवर्क से जोड़ने का भी काम करेगा. साथ ही इन गांवों और आसपास के क्षेत्रों में विकास बेहतर होगा. इस एक्‍सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर की हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जहां विमानों की आपात लैंडिंग कराई जा सकेगी. एक तरफ का कितना टोल लगेगा यूपीडा ने अभी तक टोल टैक्‍स की आधिकारिक दरों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के तहत माना जा रहा है कि इस पर कार के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर का टोल वसूला जाएगा. इसका मतलब है कि एक तरफ से करीब 1,515 रुपये का टोल लग सकता है. छोटे कॉमर्शियल वाहनों के लिए एक तरफ का टोल किराया करीब 2,405 रुपये तो बस-ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए 4,840 रुपये का टोल सकता है. भारी निर्माण वाहनों के लिए टोल किराया एक तरफ का 7,455 रुपये तो 7 एक्‍सेल से ज्‍यादा वाले वाहनों के लिए यह 9,535 रुपये हो सकता है.

जिला सहकारी बैंकों में दो लाख से अधिक नए खाते खोले गए, 550 करोड़ की राशि खातों में जमा हुई

सहकार से समृद्धि : एम-पैक्स से 54 लाख किसान बने आत्मनिर्भर योगी सरकार ने महाअभियान चलाकर सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया फसली ऋण, उन्नत बीज और उर्वरक जिला सहकारी बैंकों में दो लाख से अधिक नए खाते खोले गए, 550 करोड़ की राशि खातों में जमा हुई ग्रामीण आबादी को औपचारिक बैंकिंग व ऋण सुविधाओं से जोड़ने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती लखनऊ  प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में योगी सरकार के एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान का व्यापक परिणाम दिख रहा है। अभियान के जरिए अब तक करीब 54 लाख किसान सहकारी ढांचे से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़े हैं। योगी सरकार का फोकस बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (एम-पैक्स) से लोगों को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती वित्तीय और कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराना है। गांवों में ऋण प्रवाह बढ़ा और छोटे किसानों को मिली सहूलियतें योगी सरकार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत किसानों को कम ब्याज दरों पर फसली ऋण, उन्नत गुणवत्ता के बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए गए। इससे खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से जिला सहकारी बैंकों में दो लाख से अधिक नए खाते खोले गए हैं। इन खातों में अब तक लगभग 550 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई जा चुकी है। वहीं, सदस्यों की भागीदारी से 110 करोड़ रुपये की अंश पूंजी जुटाई गई जिसके आधार पर कुल 660 करोड़ रुपये की धनराशि सहकारी तंत्र में प्रवाहित हुई। इससे गांवों में ऋण प्रवाह बढ़ा है और छोटे किसानों को सहूलियतें आसान हुई हैं। ग्रामीणों को घर के पास ही पंजीकरण और अन्य सेवाएं योगी सरकार ने सहकारी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए सदस्यता प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल किया है। अब एम-पैक्स से जुड़ने के लिए डिजिटल पोर्टल और मोबाइल आधारित पंजीकरण की सुविधा लागू कर दी गई है। इससे ग्रामीणों को घर के पास ही पंजीकरण और अन्य सेवाएं मिल रहीं हैं। देश में पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम-पैक्स का सदस्यता महाअभियान शुरू किया। यह सदस्यता महाअभियान दो चरणों में चलाया गया। पहले चरण की शुरुआत सितंबर 2023 में की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर नए सदस्य जुड़े। दूसरे चरण का शुभारंभ सितंबर 2025 में किया गया, जिसमें अभियान को और गति मिली। क्यूआर कोड और यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान से आई पारदर्शिता सहकारी समितियों को मजबूत करना योगी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। एम-पैक्स पर डिजिटल भुगतान प्रणाली क्यूआर कोड के जरिए शुरू की गई है। क्यूआर कोड और यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली शुरु हो जाने से कैशलेस एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू हुई है। इससे उर्वरक वितरण में पारदर्शी एवं सुविधाजनक तरीके से वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि सहकार से समृद्धि का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सके।

पाकिस्तान सीमा के पास अमेरिकी प्रतिनिधि की मौजूदगी से हंगामा, जानें पूरा मामला

  नई दिल्ली अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो ने भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड (चंडीगढ़) का दौरा किया. यह दौरा पाकिस्तान बॉर्डर के बहुत करीब था. पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी विदेशी डेलिगेशन का यह पहला ऐसा हाई-प्रोफाइल विजिट है. इसकी वजह से राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा और बवाल हो गया. वेस्टर्न कमांड इतना महत्वपूर्ण क्यों?     मुख्यालय: चंडीगढ़     क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर के अखनूर से पंजाब के फाजिल्का तक पाकिस्तान बॉर्डर.     200 से ज्यादा सैन्य बेस देखता है.     पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी कैंप और एयर बेस पर हमला करने में यह कमांड सबसे आगे था.     इसलिए इस जगह का दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बहुत संवेदनशील माना जा रहा है. क्या हुआ विजिट में? भारतीय सेना ने उन्हें वेस्टर्न फ्रंट (पाकिस्तान बॉर्डर) की पूरी तैयारियों, ऑपरेशन सिंदूर और क्षेत्रीय स्थिरता में भारतीय सेना की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी. एडमिरल पापारो ने पहले ही पत्रकारों से कहा था कि भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर बहुत सटीक और शानदार था. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने डेलिगेशन का स्वागत किया.  विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल? कांग्रेस और राजयसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत अब अपनी रणनीतिक नीतियां अमेरिका के हिसाब से बना रहा है. उन्होंने ट्रंप के ‘मैंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया’ वाले बयान का जिक्र किया. कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि सरकार पाकिस्तान के ISI को भी पठानकोट एयरबेस दिखा चुकी है, अब अमेरिका को संवेदनशील जगह दिखा रही है. लेकिन सच्चाई क्या है? ऐसे विजिट बिल्कुल नई बात नहीं हैं. भारत और अमेरिका के बीच मिलिट्री-टू-मिलिट्री एक्सचेंज का पुराना कार्यक्रम है. पहले भी विदेशी राजनयिक कमांड हेडक्वार्टर विजिट कर चुके हैं. भारतीय राजनयिक भी अमेरिका के पेंटागन और CIA हेडक्वार्टर जाते रहे हैं. असली मैसेज क्या है? यह विजिट सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं थी. इसका बड़ा संदेश है…     अमेरिका भारत के साथ रक्षा संबंध और मजबूत करना चाहता है.      चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफिक में भारत को काउंटर-बैलेंस के रूप में देखता है.     पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रहा (ट्रंप की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में पाकिस्तान का नाम तक नहीं).     भारत को रूस से हथियार खरीदने से धीरे-धीरे दूर करना चाहता है (अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है, फ्रांस के बाद).     अभी हाल ही में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद संबंधों में नया रीसेट हुआ है. एडमिरल पापारो ने कहा – भारत-अमेरिका रक्षा संबंध तेजी से ऊपर जा रहे हैं.  विजिट के पीछे राजनीतिक बवाल तो है, लेकिन रणनीतिक रूप से यह भारत-अमेरिका के बढ़ते विश्वास और साझेदारी का संकेत है. भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है, लेकिन चीन जैसे बड़े खतरे के सामने मजबूत साथी ढूंढ रहा है. 

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम, गैस कनेक्शन से लेकर ई-रिक्शा तक का वितरण

रायपुर. मुख्यमंत्री ने हितग्राहीमूलक सामग्रियों का किया वितरण मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज कोरिया प्रवास के दौरान कोरिया महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण कर लाभान्वित किया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम में 105 पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि इस योजना से अब इन परिवारों को धुएं से मुक्ति मिलने के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के अनुकूल ईंधन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। मुख्यमंत्री ने हितग्राहीमूलक सामग्रियों का किया वितरण इस अवसर पर स्व-रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 6 आजीविका दीदियों को पिंक ई-रिक्शा (ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस) प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री  साय ने जिले की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 14 स्वच्छता दीदियों को गार्बेज रिक्शा भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यवस्था नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है, और इस दिशा में महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कुम्हार के चाक पर गढ़ा दीया, पारंपरिक शिल्पकारों से किया आत्मीय संवाद:

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का एक आत्मीय और सहज रूप उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने कुम्हार के चाक पर स्वयं मिट्टी का दीया और कलश गढ़कर पारंपरिक शिल्प के प्रति सम्मान और जुड़ाव का सशक्त संदेश दिया।  अवसर था सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक का, जिसमें शामिल होने वे कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर पहुंचे थे। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक के साथ परिसर में स्व-सहायता समूहों एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसी प्रदर्शनी में सोनहत विकासखंड निवासी शिल्पकार  देवी दयाल प्रजापति इलेक्ट्रिक चाक पर मिट्टी से दीया और कलश बनाने का सजीव प्रदर्शन कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  साय उनके स्टॉल पर पहुंचे और कुछ देर तक उनकी शिल्पकला का बारीकी से अवलोकन किया। कला के प्रति उत्सुकता बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने स्वयं चाक पर हाथ आजमाने की इच्छा व्यक्त की। शिल्पकार की सहमति से उन्होंने घूमते हुए चाक पर रखी गीली मिट्टी को हाथों से साधा और देखते ही देखते उसे सुंदर दीये का आकार दे दिया। मुख्यमंत्री की सहज कुशलता देखकर स्वयं शिल्पकार भी आश्चर्यचकित रह गए, वहीं उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस क्षण का स्वागत किया। मुख्यमंत्री  साय ने इस दौरान शिल्पकार देवी दयाल प्रजापति से उनके व्यवसाय, आय और परिवार की जानकारी ली तथा उन्हें शासन की विभिन्न स्वरोजगार एवं कारीगर हितैषी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प, कारीगरों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि स्थानीय कला और हुनर को नई पहचान और बाजार मिल सके। इस अवसर पर कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष मती गोमती साय, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायक  भैयालाल राजवाड़े, कलेक्टर  चंदन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक  रविकुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा: वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति, 543 विकास कार्यों को मंजूरी

रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज कोरिया जिले के बैकुंठपुर में आयोजित सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में सरगुजा संभाग के जिलों में संचालित विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर नई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता में रखा है।प्राधिकरण के माध्यम से पिछड़े एवं वनांचल क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और क्षेत्र की समृद्धि के लिए सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सभी के सहयोग से इस क्षेत्र को प्रगति के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर 543 विकास कार्यों के लिए 4905.58 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई, जबकि वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 606 कार्यों को भी औपचारिक अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों को मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सोनहत विकासखंड में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में हाईमास्ट सोलर लाइट लगाने, किसानों की समस्याओं के समाधान, बिजली बिल त्रुटियों को दूर करने तथा गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राधिकरण की पिछली बैठक जशपुर जिले के मयाली में आयोजित हुई थी, जिसके बाद मयाली की पहचान पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ी है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में विश्व के बड़े शिवलिंग को स्थान मिला तथा स्वदेश दर्शन योजना के तहत राशि स्वीकृत हुई। उन्होंने कहा कि बैकुंठपुर में आयोजित इस बैठक से भी जिले की पहचान और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि झुमका जलाशय सहित यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इस प्रकार विभिन्न जिलों में बैठक आयोजित करने से स्थानीय विकास को गति मिलती है। बैठक में कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, प्राधिकरण की उपाध्यक्ष मती गोमती साय, खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

डिजिटल सर्विलांस से संचारी रोगों में आई कमी, डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई की रोकथाम के लिए लैब नेटवर्क को किया मजबूत

प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को किया मजबूत तो बीमारू से बना उत्तम प्रदेश  पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ व्यापक विस्तार, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी की संख्या में हुई वृद्धि पीएचसी पर 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे की मिल रही सुविधा, आधुनिक मशीनों, दवाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से बढ़ी संस्थागत प्रसव दर डिजिटल सर्विलांस से संचारी रोगों में आई कमी, डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई की रोकथाम के लिए लैब नेटवर्क को किया मजबूत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में व्यापक सुधार किए हैं। प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही इन केंद्रों को आधुनिक उपकरणों, पर्याप्त दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों से सुसज्जित किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों पर 24 घंटे मिल रही प्रसव, पैथोलॉजी, एक्स-रे की सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में कमान संभालने के बाद प्रदेश में सैकड़ों नए स्वास्थ्य उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के साथ उच्चीकृत भी किए हैं। जहां पहले कई पीएचसी में नाममात्र की सुविधाएं थीं, वहीं अब उनमें 24 घंटे प्रसव सुविधा, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए संस्थागत प्रसव दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार की प्राथमिकता “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र के साथ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत किया गया। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जा सका। साथ ही संविदा और नियमित नियुक्तियों के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए मजबूत किया डिजिटल सर्विलांस सिस्टम प्रदेश में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए डिजिटल सर्विलांस सिस्टम को मजबूत किया गया है। डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्राथमिक स्तर पर ही जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जांच प्रयोगशालाओं की संख्या में कई गुना वृद्धि की गई है, जिससे रोगों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार संभव हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले वर्षों में कई जिलों में मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से लाखों पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वास्थ्य कार्ड वितरण और लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से पारदर्शी बनाया गया है। टीकाकरण में देश में अग्रणी स्थान किया प्राप्त प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर दिया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण से विशेषज्ञ सेवाओं का दायरा बढ़ा है। इससे प्राथमिक स्तर पर मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें उच्च संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवाओं 102 और 108 को सशक्त किया गया है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सके। कोविड-19 महामारी के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। गांव-गांव में स्वास्थ्य टीमों ने स्क्रीनिंग, जांच और टीकाकरण अभियान चलाया। प्रदेश ने टीकाकरण के मामले में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। इस दौरान ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू बेड और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया, जिनका लाभ आज भी सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में मिल रहा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संचारी रोगों पर नियंत्रण जैसे संकेतक इस परिवर्तन की पुष्टि करते हैं। सरकार द्वारा स्वास्थ्य बजट में लगातार वृद्धि कर प्राथमिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन सेवाओं की शुरुआत से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध हो रहा है। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से हजारों मरीज घर बैठे चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हुई है, बल्कि ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा भी सुलभ हुई है। योगी सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया गया था, वह अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, दवा आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था और डिजिटल निगरानी प्रणाली ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली है और प्रदेश एक सशक्त, स्वस्थ और विकसित राज्य की दिशा में अग्रसर हो रहा है। विशेषज्ञ की राय पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में जो परिवर्तन हुए हैं, वे जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी को 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाओं से सुसज्जित करना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। डिजिटल सर्विलांस और लैब नेटवर्क के विस्तार से संचारी रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण संभव हुआ है। टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी जैसी पहल ने दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट और टीकाकरण कवरेज में सुधार इस बात का संकेत है कि प्राथमिक स्वास्थ्य को दी गई प्राथमिकता सकारात्मक परिणाम दे रही है। डॉ. लिली सिंह, पूर्व डीजी, स्वास्थ्य विभाग

नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है।  डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।  ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है। तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है। उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है। नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है। बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।

मध्यप्रदेश की प्रगति पर CM यादव का दावा, विकास और आर्थिक गति में तेजी

समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत वृद्धि मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है। प्रमुख बिंदु 1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। 3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। 4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत। 5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही। 6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा। 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा। 10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा। अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि एवं ग्रामीण विकास वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए। औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा। नगरीय विकास अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया। शिक्षा एवं कौशल विकास वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। क्षेत्रवार जीएसवीए … Read more

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