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रायपुर एयरपोर्ट पर बार की शुरुआत संभव, साय सरकार की नई नीति से होटल-रेस्टोरेंट संचालक खुश

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व में वृद्धि और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लाभप्रद बनाया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, अब शराब की आपूर्ति से पहले ही टैक्स का भुगतान अनिवार्य होगा, जिससे सरकारी खजाने में समय पर राजस्व सुनिश्चित हो सकेगा। रायपुर एयरपोर्ट पर बार और लाइसेंस फीस में राहत पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट पर ‘विमानपत्तन रेस्टोरेंट बार’ (FL-3 घ) शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही, होटल, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस रियायत का उद्देश्य (CG New Excise Policy) राज्य में निवेश आकर्षित करना और आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को मजबूती देना है। हालांकि, बार संचालन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही संचालित होंगे। प्लास्टिक बोतलों में मिलेगी शराब पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव पैकेजिंग में किया गया है। अब छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। विभाग का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का नुकसान होता है और इससे कर्मचारियों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है। प्लास्टिक पैकेजिंग से परिवहन आसान होगा और स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। महंगी होगी शराब: नया टैक्स स्लैब लागू शराब प्रेमियों के लिए खबर थोड़ी कड़वी हो सकती है क्योंकि नई नीति में आबकारी ड्यूटी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से विदेशी और प्रीमियम ब्रांड्स (CG New Excise Policy) पर अब ‘रिटेल सेल प्राइस’ (RSP) के आधार पर टैक्स लगेगा। जितनी महंगी बोतल होगी, उस पर उतना ही अधिक ड्यूटी टैक्स देना होगा। बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों पर भी नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का मानना है कि उच्च श्रेणी के ब्रांड्स पर टैक्स बढ़ाने से राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ड्यूटी की न्यूनतम दरें बरकरार रखी गई हैं। प्रशासनिक सुधार और निगरानी नई नीति के तहत प्रशासनिक शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपोजिट लाइसेंस जारी करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त के पास होगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध शराब की तस्करी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

आज की ताजपोशी में चर्चा का केंद्र—तारिक रहमान की दौलत और पत्नी जुबैदा की अधिक संपत्ति

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

राशन कार्ड वालों की बल्ले-बल्ले! छत्तीसगढ़ में 82 लाख परिवारों के लिए एक साथ राशन वितरण

रायपुर छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विष्णु देव साय सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश के करीब 82 लाख राशन कार्डधारकों को फरवरी 2026 में ही फरवरी और मार्च दो महीने का राशन एक साथ देने का फैसला लिया है। इस फैसले से लाखों परिवारों को समय से पहले राहत मिलेगी और राशन वितरण व्यवस्था और भी सुचारू होगी। खाद्य विभाग के निर्देश पर सभी जिलों में गोदामों से चावल का उठाव तेज कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि NFSA योजना के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारकों को फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा, जबकि राज्य योजना के APL कार्डधारकों को उनकी पात्रता अनुसार चावल मिलेगा। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का भी वितरण किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सभी जरूरी सामान एक साथ मिल सके। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। दो महीने का राशन एक साथ मिलने के कारण हितग्राही को मशीन पर दो बार अंगूठा लगाना होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे।भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देशसरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। सरकार ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी दें, ताकि राशन दुकानों पर भीड़ न लगे। खाद्य विभाग के अनुसार, मिलिंग में देरी की चर्चा जरूर है, लेकिन सरकार का दावा है कि हर पात्र परिवार को समय पर पूरा राशन मिलेगा। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

8वें वेतन आयोग ने दी राहत, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में लाखों रुपये बढ़त

नई दिल्ली   केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर। सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अगर इसे जनवरी 2026 से प्रभावी मानकर 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को लाखों रुपये का एरियर एकमुश्त मिल सकता है। कब से लागू होगा नया वेतन? सरकार की ओर से संकेत हैं कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। व्यावहारिक रूप से इसे 2027 में लागू किया जा सकता है। इसके बाद कर्मचारियों को 12–20 महीने तक का एरियर एक साथ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर और संभावित बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 माना जा रहा है। इससे सैलरी में 30% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है। अनुमानित एरियर राशि लेवल    संभावित एरियर (₹) लेवल-1     3.60 लाख – 5.65 लाख   लेवल-2      3.98 लाख – 6.25 लाख लेवल-4     5.10 लाख – 8.01 लाख एरियर की गणना कैसे होगी? पुरानी और नई बेसिक सैलरी का अंतर निकाला जाएगा। अंतर को लागू होने तक के महीनों से गुणा किया जाएगा। महंगाई भत्ता (DA) भी बढ़ेगा, जिससे एरियर में अतिरिक्त लाभ जुड़ जाएगा। भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नियम कहते हैं कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुआ है या उसके बाद, उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग से क्या बदलेगा? अगर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होता है, तो इसका असर दो तरह से पड़ेगा. पहले यहा कि जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे, उनकी पेंशन की कैलकुलेशन सीधे नए बेसिक पे के आधार पर होगी. साथ ही पुराने पेंशनर्स, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर हो चुके होंगे, उनकी पेंशन को एक फिक्स फिटमेंट फैक्टर के जरिए रिवाइज किया जाएगा. सरकार के जवाब से यह साफ है कि 31 दिसंबर 2025 की तारीख कोई डेडलाइन नहीं है जो आपको बढ़ी हुई पेंशन के फायदे से बाहर कर दे. पिछले समय की तरह हर वेतन आयोग ने पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को भी रिवाइज किया है, जिससे वह महंगाई के दौर में पीछे न छूटें. किन्हें मिलेगा फायदा? केंद्रीय कर्मचारी रक्षा कर्मी ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारी पेंशनर कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

सोना जल्द 1 लाख रुपये से नीचे? रूस की चाल ने निवेशकों में मचाई चिंता

इंदौर   भारत में सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में शानदार रिटर्न दिया था. 2026 की शुरुआत में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के शिखर तक पहुंच गया. हालांकि, हाल के सत्रों में इसमें तेज करेक्शन भी देखने को मिला है. पिछले सप्ताह के अंत में MCX पर सोना लगभग ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान दिखा. COMEX पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर भू राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. दरअसल, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी को अब नई चुनौतियां मिल रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ डॉलर आधारित व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह BRICS देशों की ‘डीडॉलराइजेशन’ रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है. रूस-अमेरिका गठजोड़  अब तक BRICS देशों द्वारा व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने का भंडार बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं. इसी कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई थी. लेकिन रूस के संभावित रुख में बदलाव से यह धारणा कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. अमेरिकी आर्थिक संकेतक भी बने कारण दरअसल, सोने की कीमतें केवल भू राजनीतिक घटनाओं पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हाल में अमेरिका में महंगाई के आंकड़े मजबूत आए हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं. ऐसे में अगर फेड दरों में कटौती टालता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? मौजूदा परिस्थितियों में कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. यदि रूस-अमेरिका व्यापार में डॉलर की वापसी की खबरें पुख्ता होती हैं और फेड दरों में कटौती नहीं करता, तो सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे भी आ सकता है. हालांकि अंतिम दिशा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. लेकिन जब वैश्विक जोखिम कम होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो इसमें मुनाफावसूली बढ़ जाती है. फिलहाल, बाजार इसी दोराहे पर खड़ा है. आने वाले हफ्तों में रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, अमेरिकी आर्थिक डेटा और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि सोना फिर से चमकेगा या कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी.

जनगणना 2026: अप्रैल से हर घर दस्तक, कर्मचारियों से किसी को भी यह 1 सवाल नहीं करना

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।

Indore Metro अपडेट: बड़ा गणपति मेट्रो स्टेशन के लिए 16 मकानों की जगह, 28 फ्लैट की मांग की गई

इंदौर  बड़ा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण में बाधक पीलियाखाल क्षेत्र के 16 मकानों को अगले सप्ताह हटाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले लोगों को रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ताप्ती परिसर के फ्लैट में शिफ्ट करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया है। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले 16 परिवारों को दिए जाने वाले फ्लैट के लिए प्रशासन को 1.29 करोड़ रुपये की राशि दी है। 28 परिवारों को 28 फ्लैट की मांग हालांकि रहवासियों की मांग है कि यहां बने 16 घरों में 28 परिवार रहते है। ऐसे में 28 परिवारों को 28 फ्लैट दिए जाएं। इस पर कलेक्टर की अध्यक्षता में आगामी दिनों में होने वाली बैठक में ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। रहवासियों की मांग है कि उनके पास राजीव गांधी आश्रय मिशन के तहत मिले हुए जमीन के पट्टे है। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। रहवासियों की परेशानी मकान शिफ्ट हो जाएंगे लेकिन बच्चे के स्कूल का क्या होगा पीलियाखाल में रहने वाले लोगों की परेशानी यह है कि उन्हें रंगवासा शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में अभी यहां के परिवारों के कई बच्चे शिक्षा के अधिकार के तहत बड़ा गणपति व कालानी नगर के निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनकी पढ़ाई में मुश्किल आएगी। रंगवासा से दूरी ज्यादा होने पर बच्चों को बड़ा गणपति क्षेत्र के स्कूलों में लाना मुश्किल होगा। रहवासी भूमि यादव के मुताबिक हमारे क्षेत्र अराध्या, आरव, वंशिका पाल सहित कई बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनके लिए परेशानी होगी रंगवासा में जिस मल्टी में हमें फ्लैट दिए जा रहे है, वहां लोग नशाखोरी करते है। मेरे पापा हम्माली करते है और मैं भी इस क्षेत्र में काम करती है। ऐसे में हमें भी कामकाज के लिए ज्यादा दूर से आना पड़ेगा। रहवासी बलराम वर्मा के मुताबिक मेरे दो बच्चे कालानी नगर क्षेत्र के स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ते है। ऐसे में रंगवासा जाने पर बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी। इस वजह से हमें बड़ा गणपति क्षेत्र के पास ही आवास दिए जाना चाहिए। विस्थापन के नियमों के तहत ही रंगवास क्षेत्र में दिए जा रहे फ्लैट     मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी पीलिया खाल में रहने वाले 16 परिवारों को रंगवासा में फ्लैट देना तय किया गया है। इन्हें शिफ्ट करने की कार्रवाई जल्द की जाएगी। यहां रहने वाले लोगों जो बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। उन्हें उस क्षेत्र के निजी स्कूलों में इसी योजना के तहत पढ़ाने की व्यवस्था करेंगे। पट्टाधारकों के विस्थापन के नियमों के तहत ही उन्हें रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट दिए जा रहे है। नगर निगम व मेट्रो प्रबंधन जल्द ही लोगों के फ्लैट के नंबर तय करेंगे। निधि वर्मा, एसडीएम  

पथुम निसांका का तूफानी शतक, श्रीलंका ने ऑस्‍ट्रेलिया को घर पर दी शिकस्‍त, सुपर-8 में पहुंची

नई दिल्ली पल्लेकेले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में सोमवार को ऑस्‍ट्रेलिया का सामना श्रीलंका से हुआ। टी20 विश्‍व कप 2026 का यह 30वां मुकाबला था। श्रीलंका के कप्‍तान दासुन शनाका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। पहले बललेबाजी करने उतरी ऑस्‍ट्रेलिया ने श्रीलंका को 182 रन का टारगेट दिया। इस टारगेट को श्रीलंका ने 18 ओवर में चेज कर लिया और 8 विकेट से मैच जीता। ऑस्‍ट्रेलिया ने पहले बल्‍लेबाजी करके 20 ओवर में 181 रन बनाए।ऑस्‍ट्रेलिया ने पहले विकेट के लिए 104 रन जोड़े थे। इसके बाद श्रीलंका ने शानदार वापसी की और अगले 81 रन पर 10 विकेट गिरा दिए। श्रीलंका की तरफ से दुशान हेमंता ने तीन विकेट चटकाए। दुष्‍मंथ चमीरा को दो विकेट मिले। महीश थीक्षणा, दुनीथ वेलालागे और कामिंडु मेंड‍िस के खाते में एक-एक विकेट आया। श्रीलंका की ओर से पथुम निसांका ने 52 गेंदों पर शतक लगाया। कुसल मेंडिस ने अर्धशतक लगाया। यह टूर्नामेंट की लगातार तीसरी जीत है। इस जीत के साथ ही श्रीलंका टीम सुपर-8 में पहुंंच गई है।   सुपर-8 में पहुंची श्रीलंका पथुम निसांका ने 52 गेंदों पर शतक लगाकर श्रीलंका की जीत दिला दी। 182 रन के टारगेट को श्रीलंका ने 18 ओवर में चेज कर लिया। श्रीलंका ने 8 विकेट से यह मैच जीता। टूर्नामेंट में श्रीलंका की यह तीसरी जीत है। इस जीत के साथ ही श्रीलंका टीम सुपर-8 में पहुंच गई है।

प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को किया जाए प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व के लिए उपयुक्त वातावरण निर्मित करना आवश्यक प्रदेश में अन्य प्रदेशों के साथ आदान-प्रदान से बढ़ रही है वन्य जीवों की विविधता विद्यार्थियों को वन और वन्य जीवों से परिचित कराने वाले अनुभूति कार्यक्रम का किया जाए विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के दिशा में हो रहे बेहतर कार्य के परिणाम स्वरूप प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस स्थिति में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व को प्रोत्साहित करने के लिए जनता को जागरूक करने तथा उन्हें आवश्यक सतर्कता बरतने के उपायों की जानकारी देना आवश्यक है। इसके साथ ही वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग से समन्वय करते हुए प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूली बच्चों को वन और वन्य जीवों से परिचित कराने के लिए संचालित किऐ जा रहे अनुभूति कार्यक्रम का विस्तार करने और इस गतिविधि में अधिक से अधिक शालाओं को शामिल करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की मंत्रालय में हुई 31वीं बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में वन राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव सहित वन विभाग के अधिकारी और वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश से अन्य राज्यों को वन्य जीव उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बदले में उन राज्यों से भी वन्य जीव मध्यप्रदेश लाए जाएं। इससे प्रदेश में वन्य जीवों की विविधता बढ़ेगी। उन्होंने वन्य जीव प्रबंधन में अन्य राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और बेस्ट प्रेक्टिसेस को अपनाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थाओं को जोड़कर वन और वन्य जीव के संबंध में अध्ययन प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विद्यमान पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की श्रेष्ठ व्यवस्था हो, वन और पुरातत्व विभाग तथा इस क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं की कार्यशाला भी आयोजित की जाए। बैठक में प्रदेश में बढ़ रही हाथियों की संख्या को दृष्टिगत करते हुए हाथियों पर केंद्रित पर्यटन गतिविधियां संचालित करने के संबंध में चर्चा हुई। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने हाथी प्रबंधन पर विश्वविद्यालय द्वारा आलेख लेखन का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्पदंश की घटनाओं में प्रभावितों की जान बचाने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 2 व्यक्तियों को सांप पकड़ने तथा प्रभावित को बचाने के लिए प्रारंभिक रूप में सहायता करने संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। सांपों के संबंध में आवश्यक जागरूकता और सर्तकता बरतने के उपायों का भी प्रचार-प्रसार आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉग स्क्वाड में देशी नस्ल के डॉग शामिल करने के लिए भी पहल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन्य प्राणी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उपलब्धियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि गांधी सागर अभयारण्य, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और कूनो नेशनल पार्क में 846 कृष्ण मृग और 67 नीलगायों का सफल पुनर्स्थापन किया गया। वन विहार नेशनल पार्क भोपाल से 6 मगरमच्छों को ओंकारेश्वर क्षेत्र में उनके प्राकृतिक अवास में सफल रूप से छोड़ा गया। पेंच टाइगर रिजर्व से राम टाइगर रिजर्व राजस्थान के लिए एक मादा टाइगर भेजी गई है। इसी प्रकार असम से 50 जंगली भैंसें 3 समूह में 3 साल में गेंडे का जोड़ा और किंग कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे और मध्यप्रदेश से टाइगर, मगरमच्छ तथा गौर असम को सौंपे जाएंगे। नामीबियाई मादा चीता आशा द्वारा दूसरी बार मां बनकर एक साथ 5 स्वस्थ चीता शावकों को जन्म दिया गया है। प्रदेश में अब चीतों की कुल संख्या 35 हो गई है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली की संयुक्त कार्यवाही के परिणाम स्वरूप 10 साल से वांछित अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर यांगचेन लाचुंगपा को भारत-चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास उत्तर सिक्किम में गिरफ्ता किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बगदरा अभयारण्य, संजय टाइगर रिजर्व, सीधी के बफर जोन क्षेत्र विस्तार करने के संबंध में प्रस्ताव, पन्ना टाइगर रिजर्व, पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, श्योपुर, सतपुड़ा-पेंच टाइगर रिजर्व कॉरीडोर से संबंधित वन्य जीव अनुमतियों को अनुमोदन प्रदान किया गया।

आगामी 25 वर्ष में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 22.50 लाख रुपए करने का है लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में प्रदेश की होगी अहम भूमिका, 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य एमएसएमई औद्योगिक विकास की बैक बोन, मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में है अग्रणी मध्यप्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होने वाला पहला राज्य, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले हुआ मुक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं विद्मान हैं। औद्योगिक निवेश प्राप्त करने, सोलर एनर्जी उत्पादन, कृषि उत्पादन सहित अनेक मामलों में मध्यप्रदेश, देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हमारी सरकार ने मध्यप्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी क्षेत्रों के लिए 25 वर्षों का दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अभी 1 लाख 55 हजार रुपए है। अगले 25 साल में इसे 22 लाख 50 हजार करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम कृषि क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी है, लेकिन एमएसएमई प्रदेश के औद्योगिक विकास की रीढ़ (बैक बोन) है। राज्य सरकार एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ में एक निजी मीडिया संस्थान के संपादक प्रफुल्ल केटकर के साथ चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान प्रदेश की प्रगति, औद्योगिक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित प्रश्नों का बेबाकी से उत्तर दिया। प्रदेश में लागू की 18 नई औद्योगिक नीतियों की विशेषताओं पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों तक भी पहुंचे, इसके लिए संभागीय स्तर पर अलग-अलग सेक्टर्स पर केंद्रित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। माइनिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म सहित अनेक क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। कटनी और शहडोल में माइनिंग सेक्टर में निवेश के लिए देश के शीर्ष उद्योगपति आगे आए हैं। नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स तैयार करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है, जहां उद्योग शुरू करने के लिए तेजी से निवेशक आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का युवा रोजगार देने वाले बनें, इसलिए स्वरोजगार और युवा उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। होम-स्टे से पर्यटकों को सुविधा मिलने के साथ ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर तेजी से घट रही है। अब मध्यप्रदेश मात्र 1 से डेढ़ प्रतिशत बेरोजगारी दर वाला राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन देने के साथ ही रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर निवेशकों को विशेष अनुदान दिया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों की समृद्धि का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में हमारा संकल्प है कि प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध हों। पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजनाओं को लागू कर रहे हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश में दूध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। राज्य का सिंचाई रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ा है, इसे 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। नर्मदा का जल क्षिप्रा नदी में पहुंचने से मालवा अंचल के किसानों को भी लाभ मिला है। नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में बन रहे आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर आ चुका है। उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर मुरैना में सोलर एनर्जी का बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। दोनों राज्य 6-6 महीने इससे निर्मित बिजली का उपयोग करेंगे। किसानों को सोलर पंप देकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। ग्रीनगो कंपनी ने आंध्र प्रदेश के बाद देश में दूसरा पंप स्टोरेज मंदसौर के गांधी सागर बांध में लगाया है, जिसे 2 साल की अल्प अवधि में पूर्ण किया गया है। मध्यप्रदेश पड़ौसी राज्यों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करते हुए जल बंटवारे, नदी जोड़ो अभियान और नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है। प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगा बजट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। राज्य सरकार ने 5 साल में प्रदेश का बजट दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। आगामी 18 फरवरी को राज्य सरकार बजट पेश करेगी, जो प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए शहरीकरण और औद्योगिकरण दोनों आवश्यक हैं। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन एरिया विकसित किए जा रहे हैं। सरकार ने पहले औद्योगिकरण पर जोर दिया, क्योंकि जब उद्योग स्थापित होंगे तो शहर भी विकास करते जाएंगे।  

रक्षा क्षेत्र में तेज रफ्तार भारत: एयरो इंजन को लेकर रक्षामंत्री की बड़ी रणनीति

नई दिल्ली रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश एडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट यानी एमका के डिजाइन और डेवलपमेंट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्व में भी एयरो इंजन के क्षेत्र में महारथ हासिल करने के कई प्रयास किए हैं। अब समय आ गया है कि हमारे जो प्रयास अधूरे रह गए थें, उनको हम पूरा करें। रक्षा मंत्री सोमवार को गैस टरबाइन रिसर्च स्टेब्लिशमेंट बेंगलुरु में विशेषज्ञों के बीच बोल रहे थे। रक्षामंत्री ने विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं से कहा, “अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लग रहे हैं, तो भारत की मौजूदा स्थिति , हमारी रणनीतिक जरूरत और हमारी महत्वाकांक्षा ऐसी हैं कि आप मानकर चलिए कि आपके 20 साल पहले ही खत्म हो चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल ही आपके पास बचे हैं। यह कोई अचरज वाली बात नहीं है, यह एक चुनौती है। हमें 5 साल में वो कर दिखाना है, जो दूसरे देश 20 साल में करते हैं। इसी में हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।” उन्होंने कहा कि हमें भविष्य की तरफ भी देखना होगा। हम सिर्फ 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते। छठी पीढ़ी की एडवांस टेक्नोलॉजी का विकास भी हमें जल्द से जल्द शुरू करना होगा। उस पर रिसर्च , समय की मांग है। जैसे-जैसे दुनिया में टेक्नोलॉजी बदल रही है, आर्टिफिशियल मशीन लर्निंग और न्यू मटीरियल का प्रयोग बढ़ रहा है, हमें उनमें आगे रहना होगा। उन्होंने यहां मौजूद वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं से कहा कि आप इंग्लैंड के साथ एयरो इंजन विकसित करने के लिए संयुक्त अध्ययन कर रहे हैं। यह बहुत अच्छी पहल है। इसके अलावा, फ्रांस के साथ भी, एयरो इंजन के लिए, हम नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। फ्रांस और यूके, दोनों ही देश एयरो इंजन टेक्नोलॉजी में बहुत आगे रहे हैं। उनके साथ यह समझौता हमें न सिर्फ नई टेक्नोलॉजी सीखने का मौका देगा बल्कि उन चुनौतियों को भी समझने में सहायता करेगा, जिनका हमने पिछले दशकों में सामना किया है। रक्षामंत्री ने कहा कि जब हम सरकार में आए, तो हमने आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम बढ़ाए। रक्षा क्षेत्र में भी,आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के हमने कई प्रयास किए। उन्होंने कहा, “मैंने अपने लगभग 7 साल के कार्यकाल में, अपना पूरा प्रयास किया कि हम एयरो इंजन के डेवलपमेंट को प्राथमिकता पर रखें और ऐसा हमने किया भी। आज की वैश्विक राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, इस तरह की महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है, यह मैं समझता हूँ कि बताने की जरूरत नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने साफ देखा, कि हमारी अपनी टेक्नोलॉजी ने, हमारे देश में बने हथियारों ने, हमारी फोर्स का कितना सहयोग किया। चाहे संचार सिस्टम हो, सर्विलांस के साधन हों, या फिर अटैक करने वाले हथियार, सबमें स्वदेशी टेक्नोलॉजी की झलक साफ दिखी।” उन्होंने कहा कि इससे सेना का मनोबल और बढ़ा व देश के लोगों को भी गर्व हुआ। अब जैसे-जैसे समय बदल रहा है, चुनौतियां बदल रही हैं, हमारे लिए बहुत जरूरी हो गया है कि हम स्वदेशी तौर-तरीकों पर और ज्यादा फोकस करें, और हमारी फोर्स को विश्व स्तरीय प्रणालियां और उपकरण उपलब्ध कराएं। रक्षामंत्री ने कहा कि आज भारत के सामने बहुत सारे अवसर हैं। हमें उन अवसरों को भुनाने की जरूरत है। उन्होंने भारत और यूरोपीय यूनियन के फ्री ट्रेड समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता 18 सालों से नहीं हो पा रहा था, वह अब पूरा हो गया। यह ट्रेड एग्रीमेंट भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति की स्वीकार्यता भी है। रक्षामंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही, वह ग्रीक के रक्षामंत्री से मिले थे। उस बातचीत के दौरान, उन्हें एक बहुत सुखद सरप्राइज मिला। दरअसल इस मुलाकात में ग्रीक के रक्षामंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह भारत को एक उभरती हुई ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि एक सुपर पावर की तरह देख रहे हैं। उनकी नजर में भारत अब कोई साधारण राष्ट्र नहीं, बल्कि एक ग्लोबल लीडर है।

‘डर से भरोसे तक का सफर’: विधान परिषद में सीएम योगी का विपक्ष पर निशाना

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश ‘फियर जोन’ से ‘फेथ जोन’ में परिवर्तित हो चुका है। उन्होंने कहा, “न कर्फ्यू है, न दंगा है, बल्कि यूपी में सब चंगा है।” सीएम योगी ने सदन में राज्यपाल के प्रति कथित अभद्र व्यवहार को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताते हुए कहा कि संवैधानिक प्रमुख का सम्मान करना हम सबका दायित्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का आचरण उसकी नकारात्मक सोच को दर्शाता है।  उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन, कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव और अविश्वास से आत्मविश्वास तक की यात्रा तय की है। डबल इंजन सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और निर्णायक नेतृत्व ने शासन-प्रशासन की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद प्रदेश में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ। पहले ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ जैसी स्थिति थी, गुंडा टैक्स और अवैध वसूली आम बात थी, जबकि अब जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज ‘टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन’ के मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और एआई के क्षेत्र में नई दिशा तय कर रहा है और उत्तर प्रदेश भी उसी सोच के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस राज्य बनने की ओर अग्रसर है और निवेश, नवाचार व पारदर्शिता का केंद्र बन रहा है। सीएम योगी ने कहा, “विरासत से युक्त विकास ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक स्वार्थ में राष्ट्र प्रतीकों और आस्था स्थलों का अपमान किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी में काशी विश्वनाथ धाम का विकास और प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों का कायाकल्प नई पहचान का प्रतीक है। धर्मस्थल केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के केंद्र भी हैं। मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव के स्मारक और विश्वविद्यालय, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा स्थापना सहित सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रयागराज में महाकुंभ और माघ मेले का जिक्र करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी सुशासन और सुरक्षा पर बढ़े विश्वास का प्रमाण है। जो प्रदेश पहले दंगों के लिए जाना जाता था, वह आज दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव के लिए पहचाना जा रहा है। सीएम ने बताया कि पिछले वर्षों में 2.19 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई, जिनमें 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 44 हजार से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि सात पुलिस कमिश्नरेट, साइबर थाने, फॉरेंसिक लैब और आधुनिक पुलिसिंग मॉडल से कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है। प्रदेश में 12 अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब संचालित हैं और सभी 75 जिलों में फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था की गई है। पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्जीवित करने और तीन महिला बटालियन- वीरांगना झलकारी बाई, अवंती बाई और ऊदा देवी- के गठन का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय, अराजकता और अविश्वास की पहचान से निकलकर विकास, निवेश, आस्था और आत्मविश्वास के नए युग में प्रवेश कर चुका है।

पिछले नौ वर्षों में सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और निर्णायक नेतृत्व से बदली शासन-प्रशासन की दिशा: मुख्यमंत्री योगी

  – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान रखे विचार   राज्यपाल के प्रति अभद्र व्यवहार को लेकर विपक्ष पर किया करारा प्रहार सीएम बोले, आज प्रदेश कर्फ्यू कल्चर से कानून के राज और अविश्वास से आत्मविश्वास तक पहुंचा डबल इंजन सरकार की नीति से यूपी बना निवेश, नवाचार और पारदर्शिता का मॉडल – प्रयागराज में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी सुरक्षा और सुशासन पर बढ़े विश्वास का प्रमाण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सदन में राज्यपाल के प्रति अभद्र और अशिष्ट व्यवहार करने पर विपक्ष को जमकर लताड़ लगाई। साथ ही प्रभावी कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि न कर्फ्यू है, न दंगा है, बल्कि यूपी में सब चंगा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल प्रदेश का संवैधानिक प्रमुख होता है। इसके बावजूद राज्यपाल पर प्रतिपक्ष द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। यह न केवल लोकतंत्र को कमज़ोर करता है बल्कि संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सभी प्रमुख हस्तियों की अवमानना के भी दायरे में आता है। यह हम सबका दायित्व बनता है कि हम अपने राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें। साथ ही संविधान की व्यवस्था के तहत संवैधानिक प्रमुखों के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें। उनके प्रति कोई ऐसा आचरण न करें, जो आचरण देश की भावी पीढ़ी को गलत दिशा की ओर अग्रसर करे, लेकिन प्रतिपक्ष से इसकी अपेक्षा करना व्यर्थ है। प्रदेश की जनता को पहले ही मिलना चाहिये था कानून का राज मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राज्यपाल एक अनुभवी राजनेता होने के साथ आज प्रदेश सरकार की संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपना मार्गदर्शन और नेतृत्व सभी को प्रदान कर रही हैं। उनके प्रति अभद्र व्यवहार समाजवादी पार्टी की वास्तविक सोच और प्रतिपक्ष की नकारात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। पिछले नौ वर्ष में प्रदेश ने एक अपनी यात्रा तय की है। यह यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन, कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव की यात्रा, समस्या से समाधान और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। इस यात्रा को देश और दुनिया स्वीकार करती है। वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बदलाव आया है। यह अधिकार प्रदेश की 25 करोड़ जनता को पहले ही मिलना चाहिये था लेकिन अपने संकुचित एजेंडे को लेकर चलने वाली सरकारों ने प्रदेश के भविष्य और जनता जनार्दन के साथ खिलवाड़ किया। उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया। प्रदेश को अराजकता, अव्यवस्था, अपराध का एक गढ़ बना दिया। इस दौरान कर्फ्यू यहां की पहचान बन गई थी। उत्तर प्रदेश को भारत के शाश्वत मूल्यों की आधारभूमि माना जाता है, उसमें किस प्रकार की अव्यवस्था थी, यह हम सबने देखा है। वहीं डबल इंजन सरकार की स्पष्ट नीति, साफ़ नीयत, सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता से आज उत्तर प्रदेश ने बॉटलनेक से देश की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथॉट बनाने में सफलता प्राप्त की है। दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यूपी रेवन्यू सरप्लस और उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी यात्रा को लेकर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दुनिया के सबसे बड़े एआई इंपेक्ट समिट का उद्घाटन किया है। यह पांच दिनों तक देश और दुनिया के 18 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में चलेगा। इस समय जब दुनिया तेजी से इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, तब भारत भी इस दिशा में मजबूत और दूरदर्शी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। देश न केवल वर्तमान बल्कि भावी पीढ़ी के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन योजना के साथ कार्य कर रहा है। इसी राष्ट्रीय सोच के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने भी पिछले साढ़े आठ से पौने नौ वर्षों में खुद को परिवर्तन की आधारभूमि के रूप में स्थापित किया है। प्रदेश में आए इस व्यापक बदलाव को “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की त्रिवेणी के रूप में देखा जा रहा है। आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यह त्रिवेणी केवल एक नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली और विकास की दिशा का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश की ही धरती पर प्रयागराज स्थित है जिसकी पहचान मां गंगा, यमुना और  सरस्वती की पावन त्रिवेणी से है। उसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक को आधुनिक संदर्भ में नया रूप देते हुए उत्तर प्रदेश ने “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की नई त्रिवेणी को विकास के केंद्र में स्थापित किया है। यह नई त्रिवेणी प्रदेश की प्रगति, पारदर्शिता और जनविश्वास की आधारशिला बन चुकी है। नीतिगत उदासीनता और विकास विरोधी सोच के माहौल को हमने बदला मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में नीतिगत उदासीनता, प्रशासनिक शिथिलता और विकास विरोधी सोच का जो माहौल था, उसे बीते वर्षों में पूरी तरह बदलने का प्रयास किया गया। अनुशासन, निर्णायक नेतृत्व, स्पष्ट नीति और शुद्ध नीयत के माध्यम से शासन-प्रशासन को एक नई दिशा देने का कार्य किया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार के कार्यों का प्रभाव भी प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लेकर रोजगार सृजन के व्यापक अभियानों तक, हर क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से कार्य हुआ है। उत्तर प्रदेश को एक बेहतरीन इंवेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश का वातावरण सुदृढ़ हुआ है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के विभिन्न माध्यमों से प्रदेश को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रही है। पहले “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने प्रदेश को झकझोर रखा था मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चलाते थे। गुंडा टैक्स और अवैध वसूली प्रदेश की नियति बन चुकी थी। “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने उत्तर प्रदेश को … Read more

लंबी कतारों से छुटकारा: MP में साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ, अब रजिस्ट्रेशन आसान

भोपाल मध्य प्रदेश में सुशासन और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देते हुए एक बड़ी सुविधा शुरू की गई है। अब देश के किसी भी कोने में बैठकर मध्य प्रदेश में दस्तावेजों का पंजीयन करवा सकेंगे। इस नई व्यवस्था से नागरिकों को पंजीयन कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और समय की भी बचत होगी। राजधानी में साइबर पंजीयन कार्यालय का उद्घाटन इस महत्वपूर्ण सेवा के संचालन के लिए राजधानी भोपाल के पंजीयन भवन में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया। इस अत्याधुनिक कार्यालय के माध्यम से पूरे प्रदेश की पंजीयन प्रक्रियाओं को डिजिटल और फेसलेस बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।   फेसलेस प्रक्रिया का सफल डेमो उद्घाटन के इस विशेष अवसर पर ऑनलाइन फेसलेस पंजीयन की प्रक्रिया का डेमो भी दिखाया गया। इस डेमो के जरिए यह प्रदर्शित किया गया कि कैसे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, पारदर्शिता के साथ दस्तावेजों का पंजीयन संपन्न किया जा सकता है।

दो मंजिला अवैध मकान पर चला बुलडोजर, जयपुर में ड्रग्स माफिया पर बड़ी कार्रवाई

जयपुर. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम बगराना में अवैध रूप से बने दो मंजिला मकान को ध्वस्त कर दिया। यह निर्माण जेडीए स्वामित्व की नाले की भूमि पर किया गया था। सोमवार सुबह जेडीए की प्रवर्तन शाखा की टीम भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से अवैध ढांचे को गिरा दिया। प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मीरा सांसी, विजेंद्र उर्फ विजय सांसी, लक्की उर्फ राहुल सांसी, महेंद्र सांसी और विक्की सांसू के विरुद्ध मादक पदार्थों की तस्करी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ कानोता थाना में कुल 23 मामले दर्ज हैं। जेडीए अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में अवैध निर्माण और माफिया गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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