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खेती और पानी को प्राथमिकता: मंत्री श्री चौहान ने गिनाईं सरकार की शीर्ष योजनाएँ

भोपाल. अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य लेकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। मंत्री  चौहान आलीराजपुर जिले के ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  चौहान ने ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के का भूमिपूजन किया। परियोजना की लागत 471.03 लाख रुपये है। इस परियोजना से ग्राम मोरासा के 324 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।इस परियोजना से जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। मंत्री  चौहान ने कहा कि इस बैराज के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों के कुएं, तालाब और बोरिंग का जलस्तर बेहतर होगा। इससे सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे। उन्होंने फाटा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद अब किसान ग्रीष्म ऋतु में भी फसल ले पा रहे हैं, जबकि पूर्व में खेती केवल बरसात तक सीमित रहती थी। मंत्री  चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना रही हैं। किसानों को किसान सम्मान निधि की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में दी जा रही है। वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीब और पात्र परिवारों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। मंत्री  चौहान ने युवाओं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रोजगार प्राप्त करने का आह्वान किया। साथ ही जो युवा औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें खेती के साथ वैकल्पिक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी। मोबाइल रिपेयरिंग, मोटर मैकेनिक, वेल्डिंग, कियोस्क संचालन, कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से जिले में ही रोजगार के अवसर सृजित करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया। किसानों से खेती के साथ पशुपालन और बकरी पालन अपनाकर आय बढ़ाने की भी अपील की।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

पीयूष गोयल ने कहा- US में दवाइयां, डायमंड्स और मसाले पर 0% टैरिफ, ट्रेड डील पर किया बयान

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौता का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री ने शनिवार को विस्‍तार से उन चीजों के बारे में जानकारी दी है, जिनपर 0  टैरिफ अमेरिका ने लगाया है. उन्‍होंने कहा कि भारत ने अमेरिका को किसी भी एग्री और डेयरी प्रोडक्‍ट्स पर छूट नहीं दी है.  उन्‍होने कहा कि अमेरिका बहुत सी चीजों पर भारत के लिए ‘0 ‘ ड्यूटी लगा रहा है, जिसमें जेम्‍स एंड ज्‍वैलरी, एग्रीकल्‍चर चीजें,  दवाइंया और अन्‍य वस्‍तुएं शामिल हैं.  0  फीसदी टैरिफ वाली वस्‍तुएं     जेम्‍स एंड डायमंड, फार्मा , स्‍मार्टफोन्‍स, स्‍पाइसेज, चाय कॉफी, कोकोनट, कोकोनोट ऑयल, वेजिटेबल ऑयल, केस्‍यू नट्स, मसाले, कई फल और सब्जियां     केला, आम, चीनी , पाइनएप्‍पल, मसरूम,  वेजिटेबल के रूट्स, कोका और कोका से बने वस्‍तु,  प्रोसेस फ्यूटस जैसे अमरूद का जेम्‍स      एयरक्रॉफॅ्ट के पार्ट्स, मशीनरी पार्ट,  फार्मा की वस्‍तुएं, जेम्‍स एंड डायमंड्स,   कॉइंस प्‍लैटिनम , इसेशियल ऑयल, एल्‍युमिनियम  पार्ट , जिंक ऑक्‍साइड, मिनिरल्‍स और नेचुरल चीजें, नेचुरल रबड आदि कृषि और डेयरी पर छूट नहीं  उद्योग मंत्री ने कहा कि हमने अमेरिका को डेयरी के किसी भी प्रोडक्‍ट्स पर छूट नहीं दी है. साथ ही एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में भी छूट नहीं दी गई हैं, जो हमारे किसानों के हितों को प्रभावित करतीं. उन्‍होंने कहा कि मीट , चीनी, पॉल्‍ट्री, डेयरी, सोयाबीन , मक्‍का, चावल, गेंहूं , चीनी, ज्‍वार, बाजरा, रागी,  अमरनाथ , फल, ग्रीन टी, कोका,  चना , एनीमल सीड्स प्रोडक्‍ट्स, नॉन-एल्‍कोहलिक चीजें,  इथेनॉल, तंबाकू इन सभी वस्‍तुओं पर किसी प्रकार की रियायत नहीं दी गई है.  30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खुला पीयूष गोयल ने कहा कि 30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कम टैरिफ पर खुल गया है. किसानों और डेयरी को संरक्षित किया गया है. यह फ्रेमवर्क कल देर रात फाइनाइज हुआ. आज देश के कोने-कोने में इसका स्‍वागत हुआ है.  यह ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट हैं हर भारतीय को अवसर देता है. अब अमेरिका 50 प्रतिशत से घटाकर 18  फीसदी टैरिफ कर रहा है. यह पड़ोसी देशों से कम टैरिफ है. यह भारत के लिए आने वाले दिनों में ज्‍यादा लाभ पहुंचाएगा. उहोंने कहा कि हमारे कम्‍पटीटर देश जैसे चीन पर 35, वियतनाम पर 20 फीसदी और इंडोनेशिया पर 19 फीसदी टैरिफ है.   आज का दिन काफी खास पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान कहा कि आज 2047 तक विकसित भारत बनने की भारत की यात्रा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है. भविष्य को ध्यान में रखते हुए, और दोनों देशों के संबंधों, राजनयिक संबंधों और उनके नेताओं के बीच दोस्ती को देखते हुए, फरवरी 2025 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई. इसका मकसद भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सालाना 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना था. उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. पूरे देश में खुशी की लहर है.  देश के हर सेक्टर में भविष्य को लेकर बहुत उत्साह है. ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में नए अवसर खुलेंगे और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, लगभग तीस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला संयुक्त राज्य अमेरिका, अब हमारे निर्यातकों के लिए सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा देगा. 

सूर्यवंशी को टीम इंडिया में मौका नहीं दे सकता BCCI, ICC के नियम ने खड़ी की बाधा

 नई दिल्ली हरारे स्पोर्ट्स क्लब में अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल खत्म हुए भले ही वक्त गुजर गया हो, लेकिन वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी की गूंज अब भी पूरी क्रिकेट दुनिया में सुनाई दे रही है. इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में वैभव ने 80 गेंदों पर 175 रन बनाए.यह सिर्फ एक पारी नहीं थी, बल्कि रिकॉर्ड बुक पर सीधा कब्जा था. 15 छक्के, जबरदस्त स्ट्राइक रेट और ऐसा खेल जिसने फाइनल जैसे बड़े मुकाबले को भी एकतरफा बना दिया. बिहार के 14 साल के इस बल्लेबाज को देखकर हर फैन के मन में एक ही सवाल है अगर वैभव इंग्लैंड के बेस्ट युवा गेंदबाजों को तहस-नहस कर सकता है और IPL में भी शतक ठोक सकता है, तो वह सीनियर भारतीय टीम में क्यों नहीं है? इस सवाल का जवाब है- आईसीसी का नियम. क्यों नहीं खेल सकते सीनियर टीम में? वैभव सूर्यवंशी के सामने सबसे बड़ी रुकावट है ICC का न्यूनतम उम्र नियम. 2020 में लागू किए गए इस नियम के तहत किसी भी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए कम से कम 15 साल का होना जरूरी है. यह नियम खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था. फरवरी 2026 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतते समय वह अभी भी तकनीकी रूप से 14 साल के ही थे. इसका मतलब साफ है  कि चाहे वह बिहार के लिए 36 गेंदों में शतक लगाए, चाहे IPL में राजस्थान रॉयल्स के लिए गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दे, लेकिन सीनियर टीम में चयन 27 मार्च 2026 से पहले मुमकिन नहीं है. यहां एक दिलचस्प बात है. वैभव सीनियर टीम के लिए अभी छोटे हैं, लेकिन अंडर-19 टीम के लिए भी अब वह दोबारा नहीं खेल सकते. BCCI का एक सख्त नियम है कि एक खिलाड़ी सिर्फ एक बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल सकता है. इस नियम का मकसद है कि हर टूर्नामेंट में नए खिलाड़ियों को मौका मिले और कोई भी खिलाड़ी उम्र-ग्रुप का “स्पेशलिस्ट” न बन जाए. 2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद, वैभव अब 2028 या 2030 का U19 वर्ल्ड कप नहीं खेल सकते जबकि उम्र के हिसाब से वह तब भी अंडर-19 ही होते. पिछले 12 महीनों में वैभव सूर्यवंशी ने जो रिकॉर्ड बनाए हैं, वही उनकी चर्चा की असली वजह हैं: * अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 80 गेंदों पर 175 रन. * 2026 वर्ल्ड कप में 30 छक्के- टूर्नामेंट का नया रिकॉर्ड * 14 साल 272 दिन की उम्र में लिस्ट-A शतक- दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी * विजय हजारे ट्रॉफी में 59 गेंदों में 150 रन- एबी डिविलियर्स का रिकॉर्ड टूटा * IPL में 35 गेंदों का शतक- सबसे कम उम्र के IPL शतकवीर * भारत-A के लिए T20 शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी * इंग्लैंड U19 के खिलाफ 52 गेंदों में शतक- सबसे तेज यूथ ODI शतक * यूथ टेस्ट में 58 गेंदों में शतक- भारत के लिए सबसे तेज * सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में नाबाद 108- सबसे युवा शतक

नवनिर्मित सामुदायिक भवन हुआ लोकार्पित, वहीं सड़क, नाली, पेयजल व्यवस्था कार्य सहित आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्यो का किया गया भूमिपूजन

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने किया विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण कोरबा नगर निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 47 एवं 39 को आज शनिवार को 02 करोड़ 17 लाख रूपए के विकास कार्यो  की सौगात मिली, जिसमें नवनिर्मित सामुदायिक भवन के लोकार्पण, विभिन्न वार्डों  के 08 स्थानों पर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण सहित सड़क, नाली व पाईप लाईन विस्तार के नवीन कार्य शामिल हैं। प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने इन विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण किया। उन्होने पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करते हुए समयसीमा में कार्य को पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 47 शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला में 25 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार निगम द्वारा वार्ड क्र. 47 अंतर्गत शिवनगर बिरसामुन्डा बस्ती में 30 लाख रूपये की लागत से आर.सी.सी.नाली एवं सी.सी. रोड का निर्माण, बालको जोन के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर 01 करोड़ 04 लाख रूपये की लागत से 08 नग आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण, वार्ड क्र. 39 अंतर्गत रिंग रोड से रोहित घर तक एवं रिंकी घर से विबल साहू घर तक 41 लाख 66 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य एवं वार्ड क्र. 47 अंतर्गत पॉलिटेक्निक कालेज बस्ती 16 लाख 48 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य कराया जाना हैं।  इस मौके पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि वार्डवासियों व आमजन की मांग एवं आवश्यकता के अनुरूप वार्डों  में विकास कार्य किए जाएं, यह हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जनता जनार्दन की मांग को पूरा करना, मैं अपना प्रथम कर्तव्य समझता हू। उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला के नागरिक बंधुओं एवं शिव फाउंडेशन के द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण की मांग मेरे समक्ष रखी गई थी, उनकी मांग का सम्मान करते हुए 25 लाख रूपये की लागत से यह भवन बनाया गया है, आज यह भवन यहॉं की जनता जनार्दन की सेवा के लिए समर्पित किया गया, अब बस्ती के लोगों को अपने विभिन्न आयोजनों, कार्यक्रमों के लिए एक सुविधापूर्ण स्थान उपलब्ध हो चुका है। मंत्री  देवांगन ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के आशीर्वाद एवं उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री  अरूण साव के मार्गदर्शन में कोरबा नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं हो रही है, जो भी प्रस्ताव मेरे द्वारा या महापौर के द्वारा उनके समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, उन पर शीघ्र स्वीकृति मिल रही है, जिसके कारण कोरबा में तेजी से विकास हो रहा है। उन्हेने आगे कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर लोगों के दुख दर्द को दूर किया है, तो वहीं देश के सर्वांगीण विकास की दिशा में भी ऐतिहासिक रूप से कार्य हो रहे है।  इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन कोरबा के विकास के लिए सदैव समर्पित रहे हैं, उन्होने कोरबा के विकास के लिए, वार्ड बस्तियों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया है। महापौर मती राजपूत ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि अपने जिस आशा व विश्वास के साथ मुझे एवं उद्योग मंत्री  देवांगन को अपना आशीर्वाद दिया है, आपके उस विश्वास, आपकी उस उम्मीद को कभी खंडित नहीं होने दिया जाएगा तथा हम सदैव आपके सुख-दुख में आपके साथ खडे़ नजर आएंगे, मैं यह विश्वास दिलाती हूॅं। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र देवांगन, सत्येन्द्र दुबे, वार्ड पार्षद सीमाबाई कंवर व चंदादेवी, पार्षद मुकुंद सिंह कंवर व जनकसिंह राजपूत, मनोज लहरे, प्रफुल्ल तिवारी, तुलसी ठाकुर, नारायण सिंह ठाकुर, ईश्वर साहू, हेतराम चन्द्रा, किशोर साहू, भूपेन्द्र साहू, धनबाई निर्मलकर सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। रविवार को होगा विकास कार्यो  का भूमिपूजन उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत के द्वारा रविवार 08 फरवरी को नगर पालिक निगम कोरबा के टी.पी.नगर जोनांतर्गत एवं कोरबा जोनांतर्गत वार्ड क्र 09 में किए जाने वाले पेयजल व्यवस्था से जुड़े साढे़ 87 लाख रूपये के कार्यो  का भूमिपूजन किया जाएगा, भूमिपूजन का यह कार्यक्रम टी.पी.नगर स्थित टैगोर उद्यान में दोपहर 03 बजे से आयोजित किया गया है। 

अमरूद व शिमला मिर्च उत्पादन से कमाए पांच लाख, ड्रिप इरिगेशन का प्रयोग कर 4.09 हेक्टेयर में लगाई थी फसल

अयोध्या जिले में एक प्रगतिशील किसान की सफलता की प्रेरणादायक कहानी ने सबका ध्यान खींचा है। तारुन विकासखंड के ग्राम सिहोरिया के निवासी राजित राम ने अपनी मेहनत, नई तकनीकों और योगी सरकार की किसान-समर्थक नीतियों के सहारे मात्र 4.09 हेक्टेयर भूमि पर अमरूद व शिमला मिर्च की खेती से पांच लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया है। यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सफल रही, बल्कि जिले के अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल बन गई है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि जनपद अयोध्या मे प्रगतिशील किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग लगातार कार्य कर रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख करें। राजित राम जैसे किसान अब अन्य साथी किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर अपनी तकनीक और अनुभव साझा कर रहे हैं। बता दें कि योगी सरकार ने पिछले वर्षों में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और अन्य सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं पर सब्सिडी, बागवानी मिशन के तहत सहायता और बाजार उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों से किसानों की स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है।  3.40 लाख रुपये लागत, मुनाफे ने भरा उत्साह राजित राम ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में 4.09 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद व शिमला मिर्च की फसल लगाई। इसमें ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, इंटरक्रॉपिंग और स्टेप क्रॉपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का भरपूर उपयोग किया गया। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (ड्रिप इरिगेशन) के कारण पानी की बचत हुई और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी। कुल निवेश लगभग 3.40 लाख रुपये रहा, जबकि उत्पादन से कुल आय 8.50 लाख रुपये हुई। इससे शुद्ध लाभ 5.10 लाख रुपये प्राप्त हुआ। उत्पादन में 20 टन अमरूद व 14 टन शिमला मिर्च शामिल थी। उन्होंने स्थानीय मंडियों के साथ-साथ मंडलीय स्तर पर भी विपणन किया, जिससे फसल का अच्छा भाव मिला।  राज्यपाल ने थपथपाई पीठ राजित राम की इस सफलता को राज्य स्तर पर भी सराहा गया। जन भवन में शुक्रवार को आयोजित फल-फूल एवं शाकभाजी प्रदर्शनी में उन्होंने भाग लिया, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनकी पीठ थपथपाई और उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान उनके नवाचारपूर्ण कार्य और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान के लिए दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे किसान प्रदेश की प्रगति के प्रतीक हैं और सरकार किसानों की बेहतरी के लिए निरंतर प्रयासरत है। औद्यानिक फसलों से की थी राजित ने शुरुआत अयोध्या जैसे पवित्र स्थल में जहां राम मंदिर के कारण पर्यटन और आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, वहां बागवानी फसलों की मांग भी बढ़ी है। अमरूद व शिमला मिर्च जैसी फसलें न केवल स्थानीय बाजार में अच्छा दाम पाती हैं, बल्कि आसपास के शहरों में भी निर्यात की जा रही हैं। राजित राम कहते हैं कि मैंने लघु कृषक के रूप में औद्यानिक फसलों से शुरुआत की थी। पहले आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन नवीन तकनीकों और सरकारी सहायता से आय कई गुना बढ़ गई। अब हमारी परिवार की स्थिति आशातीत रूप से बेहतर हो गई है। उनकी सफलता से सिहोरिया गांव और तारुन ब्लॉक के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

अब तक 40,000 बीसी सखियों की तैनाती, ग्रामीणों को मिली बैंक संबंधित कार्यों में सहूलियत

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में ‘एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी’ योजना ने सफलता की नई कहानी लिखी है। बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बीसी सखी) के रूप में काम कर रही ग्रामीण महिलाओं ने अब तक करीब 40,000 करोड़ का बैंकिंग लेन-देन किया है, जिसके जरिए 106 करोड़ से ज्यादा का लाभांश भी मिला है। राज्य में इस योजना के तहत अब तक 40 हजार बीसी सखियां तैनात की जा चुकी हैं, जिनके जरिए बैंक अब लोगों के घर तक पहुंचा है। ग्रामीणों को भी रोजमर्रा के बैंक संबंधित कामों में काफी सहूलियत मिल रही है। योजना से राज्य की हजारों महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रही हैं। गांव में ही मिल रही बैंक की सुविधाएं बीसी सखियां गांवों में लोगों की पैसे जमा करने और निकालने समेत खाते से लेन-देन, लोन के लिए आवेदन, मनी ट्रांसफर, आरडी व एफडी खुलवाने तक में मदद करती हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ रही। इस योजना की शुरुआत मई 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसका मकसद था कि गांवों के लोगों को बैंक की सुविधाएं उनके घर के पास मिल जाएं और स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिलें। इस सुविधा के शुरू हो जाने के बाद से ग्रामीणों को शहरों के चक्कर काटने से राहत मिली है। सभी ग्राम पंचायतों तक विस्तार राज्य की 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत अभी तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया जा चुका है। इनमें से लगभग 40,000 बीसी सखियां वर्तमान में गांवों में काम कर रही हैं। आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं बीसी सखियां बीसी सखी योजना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। आज ये महिलाएं गांव में बैंकिंग की पहचान बन चुकी हैं और लोगों का भरोसा भी जीत रही हैं। योगी सरकार की यह योजना गांवों में बैंकिंग पहुंचाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल बन रही है। इस योजना के तहत 106 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभांश भी अर्जित किया जा चुका है।

वर्ष 2017 से अब तक 523 तटबंधों के निर्माण से 3,869 किमी क्षेत्र बना सुरक्षित

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में मॉडल स्टेट के तौर पर सामने आया है। वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक हर साल बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की संख्या, सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के आठ प्रमुख रिवर बेसिन गंगा, यमुना, गण्डक, सरयू, रामगंगा, राप्ती-रोहिन, सोन और गोमती नदियों के डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से अब तक 1,950 बाढ़ परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 3869 किलोमीटर क्षेत्र में 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है, जिससे प्रदेश की लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुई है, साथ ही प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है।   वर्ष 2017-18 से बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में निरंतर वृद्धि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 में जहां 74 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाए संचालित की गई थीं, जिनकी संख्या वर्ष 2018-19 बढ़कर 111 हो गई। जिसके चलते प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र 0.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 1.88 लाख हेक्टेयर पहुंच गया और इससे लाभान्वित जनसंख्या बढ़कर 22.03 लाख पहुंच गई। इसी क्रम में वर्ष 2019-20 में 151 और वर्ष 2020-21 में 196 परियोजनाओं के माध्यम से क्रमशः 2.88 और 5.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की गई। वहीं वर्ष 2021-22 में 167 परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र दोगुना बढ़कर 10.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। जिसने प्रदेश के 46.26 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर राहत प्रदान की।  वर्ष 2023-24 में सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा बाढ़ सुरक्षा कार्य  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को निरंतर प्रगति देते हुए वर्ष 2022-23 में 283 परियोजनाओं के जरिए 3.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में बाढ़ सुरक्षा कार्यों ने अब तक का सर्वोच्च स्तर छुआ। इस वर्ष 362 परियोजनाओं ने 10.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान की, जिससे 68.97 लाख लोगों को राहत मिली। वहीं वर्ष 2024-25 में 321 परियोजनाओं के संचालन से 4.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। इसी क्रम में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 285 परियोजनाओं के माध्यम से बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र में  4.33 लाख हेक्टेयर वृद्धि की गई और 55.69 लाख आबादी को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई है। विभाग की इन परियोजनाओं के सफल संचालन से प्रदेश में लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्षतौर पर लाभान्वित हुई है।  रिकार्ड संख्या में तटबंधों के निर्माण से हुआ प्रभावी बाढ़ नियंत्रण  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण और रिवर बेसिन में रहने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तटबंधों का भी निर्माण करता है। इस दिशा में वर्ष 2017 से अबतक 3,869 किलोमीटर की लंबाई के 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है। इनमें 464.92 किमी लंबाई के 19 अतिसंवेदनशील और 241.58 किमी के 18 संवेदनशील तटबंध भी शामिल हैं। इस क्रम में बाढ़ से प्रभावित बलिया, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, कुशीनगर सहित अनेक जिलों में कटान-रोधी एवं तटबंध सुरक्षा कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अतिरिक्त विभाग प्रदेश में 60,047 किमी की लगभग 10,727 ड्रेनेज परियोजनाओं का भी संचालन करता है। जिनके विस्तार के लिए वर्ष 2025-26 में 74.32 करोड़ रुपये की लागत से गोंडा, बिजनौर, हापुड़, बहराइच और मिर्जापुर में नये ड्रेजिंग कार्यों को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में लगातार वृद्धि, योगी सरकार की जनकेंद्रित और जवाबदेह कार्यसंस्कृति का परिणाम है। राज्य सरकार की इन निरंतर पहलों ने उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा के क्षेत्र में देश के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया है।

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: अमित शाह के दौरे से पहले 103 नक्सलियों का सरेंडर, करोड़ों के इनामी भी

छतीसगढ़  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से ठीक 2 दिन पहले बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 49 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए का इनाम घोषित है। सरेंडर नक्सलियों में डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), प्लाटून पार्टी कमेटी जानकारी के मुताबिक सिर्फ बीजापुर जिले में ही 1 जनवरी 2025 से अब तक 421 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। 410 माओवादियों ने हथियार छोड़ दिया है। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। बीजापुर जिले में गुरुवार को 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कैडर सरेंडर नक्सलियों की संख्या DVCM    1 PPCM    4 ACM    4 प्लाटून पार्टी सदस्य    1 DKAMS अध्यक्ष    3 CNM अध्यक्ष    4 KAMS अध्यक्ष    2 एरिया कमेटी पार्टी सदस्य    5 मिलिशिया कमांडर, डिप्टी कमांडर    5 जनताना सरकार अध्यक्ष    4 PLGA सदस्य    1 CNM सदस्य    12 जनताना सरकार उपाध्यक्ष    4 DAKMS उपाध्यक्ष    1 जनताना सरकार सदस्य    22 मिलिशिया प्लाटून सदस्य    23 जीपीसी    2 DAKMS सदस्य    4 भूमकाल मिलिशिया सदस्य    1 बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने कहा कि अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप की स्थापना के साथ सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली और शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है। सुरक्षा बलों का ग्रामीणों के साथ सकारात्मक संवाद हो रहा है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर और कई माओवादी नेताओं के मारे जाने या उनके आत्मसमर्पण करने के बाद इन लोगों ने वामपंथी उग्रवादी आंदोलन छोड़ने का फैसला किया। SP ने बताया कि माओवादियों के एक डिवीजनल कमेटी सदस्य लच्छू पुनेम उर्फ ​​संतोष (36), गुड्डू फरसा (30), भीमा सोढ़ी (45), हिड़मे फरसा (26) और सुखमती ओयम (27), सभी प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य हैं। प्रत्येक पर 8 लाख रुपए का इनाम था। इसके अलावा 4 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपए का इनाम था। 15 कैडरों पर 2-2 लाख रुपए का इनाम था। 10 पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था। 12 कैडरों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था और 3 पर 10-10 लाख रुपए का इनाम था। SP के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादियों के आरपीसी (क्रांतिकारी पार्टी समिति) सदस्यों की संख्या ज्यादा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। 4 अक्टूबर को आ रहे शाह 4 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर आएंगे। वे जगदलपुर में बस्तर दशहरा की मुरिया दरबार रस्म और लाल बाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला में शामिल होंगे। अमित शाह के दौरे को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। पहले 71 नक्सलियों ने किया था सरेंडर बता दें कि इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर कुल 71 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनमें 21 महिला और 50 पुरुष नक्सली शामिल थे। 30 नक्सलियों पर 64 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में डिवीजन कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रैंक के नक्सली हैं। कई नक्सली ऐसे थे, जो कई बड़ी मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं। क्या है लोन वर्राटू अभियान लोन वर्राटू का मतलब होता है घर वापस आइए। इस अभियान के तहत दंतेवाड़ा पुलिस अपने जिलों के ऐसे युवाओं को पुनर्वास करने और समाज की मुख्य धारा में लौटने का संदेश देती है, जो नक्सलियों के साथ हो गए हैं। पुलिस की इस योजना के तहत गांवों में उस इलाके के नक्सलियों की सूची लगाई जाती है। उनसे घर वापस लौटने की अपील की जाती है। उन्हें पुनर्वास योजना के तहत कृषि उपकरण, वाहन और आजीविका के दूसरे साधन दिए जाते हैं, जिससे वे नक्सल विचारधारा को छोड़कर जीवन यापन कर सकें। शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे। वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं। लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था। 21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।  

ईरान-अमेरिका वार्ता: खामनेई के फैसले पर निर्भर होगा वक्त और स्थान, अमेरिका को नहीं मिली कोई राहत

मस्कट: मिडिल ईस्ट में जंग और बातचीत एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की तल्खी, धमकियों और सैन्य तनाव के बाद आखिरकार ओमान में बातचीत हुई. यह वही दौर है, जब बीते साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और पूरा इलाका युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था. खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई. दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे. यही मॉडल पहले भी ईरान-अमेरिका बातचीत में अपनाया जाता रहा है. हालांकि इस बातचीत के ठीक बाद अमेरिका ने नए प्रतिबंध ठोंक दिए. बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद दोनों पक्ष आगे और बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. इसे फिलहाल एक ‘सकारात्मक लेकिन सतर्क शुरुआत’ माना जा रहा है. कौन-कौन था बातचीत में शामिल? ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मौजूद रहे. ओमान की सरकारी तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी भी दिखी, जिसने इस बातचीत के सैन्य महत्व को और बढ़ा दिया. बातचीत से पहले धमकी दी गईं बातचीत से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर दस्तखत नहीं किए या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर से भी सख्त तेवर दिखाए गए थे. अराघची ने बातचीत से पहले साफ कहा कि ईरान ‘खुली आंखों से कूटनीति’ में उतरा है और उसे पिछले साल की घटनाएं अच्छे से याद हैं. अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा ईरान ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को एक शुरुआती प्रस्ताव सौंपा, जिसे मौजूदा हालात संभालने की कोशिश बताया गया. अमेरिका की प्रतिक्रिया इस प्रस्ताव पर अगली बातचीत में ईरान को दी जानी है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है. बैलिस्टिक मिसाइल, क्षेत्रीय संगठन और घरेलू विरोध जैसे मुद्दे उसके लिए बातचीत के एजेंडे में नहीं हैं. इसके उलट अमेरिका चाहता है कि मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान किसी भी कीमत पर झुक नहीं रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. ईरानी तेल ढोने वाले 14 जहाजों और कई कंपनियों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल से कमाए पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और अपने ही नागरिकों पर दमन के लिए करता है. वहीं व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें उन देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई है जो ईरान से सामान या सेवाएं खरीदना जारी रखते हैं.

DK कैंप का दावा- ‘2.5 साल का फॉर्मूला था तय, सिद्धारमैया ने वादा किया था’

बेंगलुरु कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री पद का मुद्दा सतह पर आ गया है. DK शिवकुमार कैंप के विधायक बसवराज शिवगंगा ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल का पावर-शेयरिंग समझौता हुआ था. बसवराज शिवगंगा ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को लेकर किसी भी बयान को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, जब तक वो कांग्रेस हाईकमान की ओर से ना आया हो. उन्होंने यथींद्रा के बयानों को भी हल्के में लेने की बात कही. शिवगंगा ने कहा, हाईकमान के अलावा किसी के बयान को गंभीरता से मत लीजिए. कम से कम मेरे बयान को तो गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि मैं एक विधायक हूं और मुख्यमंत्री चुनने में मेरा वोट है. यथींद्रा के पास ऐसा कोई वोट नहीं है. मीडिया को तय करना है कि किसके बयान को तवज्जो देनी है. उन्होंने आगे दावा किया कि उन्हें यह संदेश मिला है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच 2.5 साल का फॉर्मूला वास्तव में तय हुआ था. शिवगंगा के मुताबिक, सिद्धारमैया ने इस पावर शेयरिंग व्यवस्था का वादा किया था. इस बीच, DK शिवकुमार के समर्थन में एक और विधायक सामने आ गए हैं. मंगलुरु से कांग्रेस विधायक अशोक राय ने खुले मंच से DK शिवकुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है. अशोक राय ने कहा कि DK शिवकुमार छह महीने के भीतर मुख्यमंत्री के रूप में मंगलुरु लौटेंगे. मंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान अशोक राय ने DK शिवकुमार के साथ मंच साझा करते हुए कहा, हम छह महीने में इस कांग्रेस भवन का निर्माण पूरा कर लेंगे और जब आप मुख्यमंत्री बनकर आएंगे, तब इसी भवन का उद्घाटन करेंगे. अशोक राय का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर पहले से ही अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं. एक के बाद एक विधायकों के बयान पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही असहमति को सार्वजनिक रूप से उजागर कर रहे हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक किसी भी तरह के पावर शेयरिंग फॉर्मूले या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. कांग्रेस हाईकमान लगातार यह दोहराता रहा है कि सरकार स्थिर है और मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बदलाव तय नहीं है.

भारत-पाक मुकाबले पर पिघला पाकिस्तान, ICC की सख्ती लाई असर

देश  भारत-पाकिस्तान के बीच टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले को लेकर जारी विवाद के बीच एक नया ट्विस्ट सामने आया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) से औपचारिक बातचीत की मांग की है. दरअसल, पीसीबी ने पहले आईसीसी को पत्र लिखकर भारत के खिलाफ मैच से हटने की बात कही थी और इसे असाधारण परिस्थितियों का मामला बताते हुए अपनी सरकार के ट्वीट को भी आधार के तौर पर जोड़ा था. इसके जवाब में आईसीसी ने पीसीबी से पूछा कि वह असाधारण परिस्थितियों के तहत किन हालातों का हवाला दे रहा है. साथ ही आईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि मैच से हटने पर कानूनी परिणाम और संभावित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. अब ताजा घटनाक्रम में पीसीबी ने आईसीसी से इस पूरे मुद्दे को सुलझाने के लिए संवाद का रास्ता अपनाने की पहल की है, ताकि भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर पैदा हुए विवाद का समाधान निकाला जा सके. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपनी सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए 15 फरवरी (रविवार) को भारत के खिलाफ ग्रुप मैच के लिए मैदान में नहीं उतरने की बात कही थी और इसे ;असाधारण परिस्थितियों’ के तहत रखा. इसके जवाब में आईसीसी ने नियमों के अनुसार पीसीबी से पूछा कि उसने किन परिस्थितियों में यह फैसला लिया और इन हालातों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए. संवाद के जरिए निकलेगा समाधान सूत्रों के मुताबिक आईसीसी ने पूरे मामले में अपना रुख साफ करते हुए निष्पक्षता, नियमों की पवित्रता और संवाद को प्राथमिकता देने की बात दोहराई. आईसीसी का उद्देश्य वैश्विक टूर्नामेंट की गरिमा बनाए रखना, खिलाड़ियों और फैन्स के हितों की रक्षा करना और सभी फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े विवादों को संभालते हुए आईसीसी ने टकराव के बजाय संवाद का रास्ता चुना. आईसीसी ने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य देश के साथ निर्णय लेते समय नियमों, पूर्व उदाहरणों और टूर्नामेंट की अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. आईसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में पाकिस्तान के चयनात्मक भागीदारी के फैसले पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह वैश्विक खेल आयोजन की भावना के अनुरूप नहीं है. आईसीसी ने अपने विस्तृत जवाब में यह भी बताया कि किन शर्तों के तहत कोई बोर्ड असाधारण परिस्थितियों का दावा कर सकता है, इसके लिए किस तरह के सबूत जरूरी होते हैं और मैच से हटने के खेल, व्यावसायिक और प्रशासनिक परिणाम क्या हो सकते हैं. साथ ही आईसीसी ने संभावित आर्थिक नुकसान और कानूनी दावों की भी चेतावनी दी. सूत्रों के मुताबिक आईसीसी ने अपनी आधिकारिक नीति के तहत यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन नियमों और अनुबंधों से समझौता नहीं किया जाएगा. आईसीसी ने कहा कि खेल का हित किसी एकतरफा फैसले से ऊपर है और भविष्य में गलत उदाहरण बनने से रोकना भी जरूरी है. आईसीसी से औपचारिक जवाब मिलने के बाद पीसीबी ने अब अंतरराष्ट्रीय संस्था से आगे की बातचीत शुरू करने की पहल की है. फिलहाल आईसीसी और पीसीबी के बीच संरचित तरीके से संवाद जारी है, ताकि इस विवाद का समाधान निकाला जा सके. आईसीसी का यह रुख नया नहीं है. इससे पहले बांग्लादेश और अन्य सदस्य बोर्डों से जुड़े संवेदनशील मामलों में भी उसने जल्दबाजी या टकराव से बचते हुए संवाद, स्थिरता और नियमों की रक्षा को प्राथमिकता दी थी. आईसीसी ने साफ किया है कि उसका उद्देश्य क्रिकेट, खिलाड़ियों और फैन्स के हितों की रक्षा करना है.  

दलहन उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता हासिल करना हमारा लक्ष्य: केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री  मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी। उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्यप्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रूपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है। दलहन उत्पादन में अग्रणी है मध्यप्रदेश : केन्द्रीय मंत्री  चौहान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। उन्होंने अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 … Read more

‘हिंदू शब्द का भारत में कोई उल्लेख नहीं, रामायण में भी नहीं’, भागवत ने स्पष्ट किया

 मुंबई  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं. इसके उपलक्ष्य में आज मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस आयोजन का नाम ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ है. उन्होंने इस संबोधन में साफ किया कि संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग पॉलिटिक्स में हैं. उन्होंने संघ की परिभाषा, संघ के कार्य, हिंदू शब्द की उत्पति और सभी धर्मों के भाव के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि क्या भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. ये जोड़ने वाला स्वभाव है, जिसे हमें अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप RSS कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं. बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. वे RSS के प्रधानमंत्री हैं. तो बता दें कि उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है, बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी है.     संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. हमारा काम बिना किसी के विरोध किए है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं. उन्हें करने के लिए संघ है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.     भागवत ने बताया– संघ में भारतीय रागदरबारी के आधार पर घोष की धुनें बजती है. व्यक्तिगत गीत होते हैं, सांगिक गीत होते हैं. लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीत शाला नहीं है. संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी है. लेकिन संघ पॉलिटिकल पार्टी नहीं है. कई बातें ऊपर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी. और इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना है. संघ को अंदर से देखना है. चीनी कैसे, इस पर व्याख्यानमाला हो सकती है. प्रश्नोत्तर भी हो सकते हैं. लेकिन, एक चम्मच चीनी खा लेंगे तो इस सब की आवश्यकता ही नहीं है. परंतु ऐसा कुछ खाना है तो कम से कम वो ठीक है. उसकी परीक्षा करने में कोई खतरा नहीं है. इतना तो पता होना चाहिए. इसलिए फिर एक बार 100 साल के बाद हम आपको बता रहे हैं.     ये संघ क्या है? क्योंकि, संघ का जो काम है, वो संघ के लिए नहीं है, वो पूरे देश के लिए है. भारतवर्ष के लिए। संघ क्या है जानना है तो पहले संघ क्या नहीं है ये जानना चाहिए. संघ किसी दूसरे संगठन की कंपटीशन में निकला नहीं और नहीं है. संघ किसी एक विशिष्ट परिस्थिति की रिएक्शन में प्रतिक्रिया में नहीं चला है. संघ किसी के विरोध में नहीं चला है. हमारा काम सर्वेषाम अविरोधेन बिना किसी का विरोध किए करने का काम है, चलने वाला काम है. संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए. संघ को पॉवर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम एक अनोखा काम हैं. पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं हैं. संघ को देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं. देश के गतिविधियों के केंद्र में संघ का नाम आता हैं, इसलिए वो देखने आते हैं. कोई भी इसे देखने के बाद एक प्रश्न पूछता हैं. हमारे जवान पीढ़ी में ऐसा कुछ करने की इच्छा हैं , ये पद्यति आप हमको सीखा सकते है क्या. संघ को ऊपर से और दूर से देखेंगे तो भी गलतफहमी होती हैं. संघ के स्वयंसेवकक रूट मार्च करते हैं, लेकिन संघ पैरामिलिटरी आर्गेनाइजेशन नहीं हैं. संघ के स्वयंसेवक राजनीती में भी हैं, लेकिन संघ राजनितिक पार्टी नहीं हैं. इसलिए संघ को जानना है, तो संघ को अंदर से आ कर देखना होगा. संघ का काम पूरे देश के लिए हैं. संघ किसी दूसरे संगठन के कंपटीशन में निकला नहीं हैं. संघ किसी के विरोध में नहीं चला हैं. संघ को पॉपुलरीटी, पावर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने भाषण में कहा, ‘RSS न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही कोई पॉलिटिकल पार्टी. संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है. यह कोई रिएक्शनरी संगठन भी नहीं है. संघ किसी के खिलाफ नहीं है. संघ को पब्लिसिटी, पावर या पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए.’     संघ के कार्यक्रम को आप यहां देख सकते हैं- इस कार्यक्रम में साधु-संत के साथ-साथ कई गणमान्य जुटे हुए हैं. आयोजन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई. क्यों अहम है आज का भाषण? दिल्ली में दिए गए उनके हालिया भाषणों की तर्ज पर, उम्मीद जताई जा रही है कि डॉ. भागवत आज कई ज्वलंत मुद्दों पर बात करेंगे. इसमें हाल ही में हुई बड़ी ट्रेड डील्स (Trade Deals), वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत, आगामी चुनाव और देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर उनकी टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण होगी. क्या भागवत आज के भाषण में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं? हम उनके भाषण का पूरा प्रसारण नहीं, बल्कि मुख्य अंश (Highlights) और ब्रेकिंग हेडलाइंस अपने दर्शकों के लिए लेकर आएंगे. मुंबई के सियासी और कारोबारी गलियारों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त चर्चा है.

पुष्कर सिंह धामी ने कहा- यूपी का सुशासन और सुरक्षा मॉडल है देश के लिए आदर्श

सुशासन व सुरक्षा का यूपी मॉडल देश के लिए उदाहरण: पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने खुलकर प्रशंसा की यूपी के सीएम की, कहा- योगी आदित्यनाथ साधना से तपे संन्यासी, उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी आदित्यनाथ ने साधारण से असाधारण बनने की यात्रा तय की यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल  पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुले मन से सराहना करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति का रक्षक, सुशासन का प्रतीक और प्रेरणास्रोत बताया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्रदेश को बार-बार प्राप्त हो रहा है। वह इसी क्षेत्र की मिट्टी से निकले हैं और उनका इस पूरे अंचल से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। यही कारण है कि वह उत्तराखंड को कभी भूलते नहीं और समय-समय पर यहां के शिक्षा संस्थानों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती देने के लिए सहयोग करते रहे हैं। साधारण राजनेता नहीं, साधना से तपे संन्यासी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि साधना से तपे संन्यासी हैं। उनके जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। समाज में योगी आदित्यनाथ के प्रति जो सम्मान है, वह उनके व्यक्तित्व, आचरण और कार्यशैली का परिणाम है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस प्रकार सुशासन स्थापित हुआ है, वह आज पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुका है। कभी गुंडाराज व माफिया संस्कृति के लिए बदनाम रहा उत्तर प्रदेश आज सुरक्षा, कानून व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। गांव की मिट्टी से निकलकर शिखर तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि योगी आदित्यनाथ ने इसी क्षेत्र में सामान्य परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण की। गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी जी ने अपने अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प से असाधारण ऊंचाइयों को छुआ। आज वह देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं। वह राज्य जिसे कभी बीमारू राज्य के रूप में देखा जाता था, लेकिन योगी जी ने अपनी नीतियों और विजन से उसे आज देश में अग्रिम राज्यों की पंक्ति में पहुंचा दिया है। योगी आदित्यनाथ का जीवन विद्यार्थियों के लिए जीवंत उदाहरण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो, तो हर चुनौती अवसर में बदल जाती है। उत्तराखंड से योगी का भावनात्मक रिश्ता मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जहां भी रहे, उन्होंने अपनी जन्मभूमि और देवभूमि उत्तराखंड से नाता कभी नहीं तोड़ा। भारतीय परंपरा में कहा गया है कि “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” और योगी जी इस भाव को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। पिछले वर्षों में योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में कई विद्यालयों का लोकार्पण हुआ, जहां आधुनिक शिक्षा सुविधाएं, कंप्यूटर लैब और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए गए। योगी आदित्यनाथ का जीवन यह सिखाता है कि सादा जीवन, उच्च विचार और कठोर परिश्रम से कोई भी व्यक्ति राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चीता परिवार में 5 शावकों के जन्म पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है। मादा चीता आशा ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत के चीता पुनर्स्थापन अभियान को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि कूनो में कुल चीतों की संख्या 35 तक पहुँच गई है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को देश में वन्य जीव संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती है। इस सफलता का श्रेय समर्पित वन अमले और पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और अथक मेहनत को जाता है। कूनो में हो रहा यह सकारात्मक विकास भारत की जैव-विविधता संरक्षण यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।  

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