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ग्रामीण परिवहन को मजबूत और टिकाऊ बनाना है योगी सरकार का लक्ष्य

योगी सरकार का ग्रामीण परिवहन को संबल, मुख्यमंत्री जनता सेवा बसों के चालकों-परिचालकों के मानदेय में बढ़ोतरी योगी सरकार ने चालक-परिचालकों को 14 पैसे प्रति किमी अतिरिक्त भुगतान का लिया निर्णय ग्रामीण यात्रियों को साधारण बसों से 20% कम किराये का मिलेगा लाभ प्रदेश भर के 20 क्षेत्रों में 395 मार्गों पर 299 बसों का किया जा रहा संचालन ग्रामीण परिवहन को मजबूत और टिकाऊ बनाना है योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा संचालित मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत चल रही बसों के संचालन हेतु चालकों व परिचालकों को दिए जाने वाले मानदेय में 14 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की गई है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस फैसले से एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बस संचालन से जुड़े कर्मियों को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आम ग्रामीण यात्रियों को कम किराये में सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा निरंतर उपलब्ध होती रहेगी। मानदेय बढ़ोतरी से मिलेगा संचालन को बल परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मुख्यमंत्री जनता सेवा के अंतर्गत संविदा चालकों और परिचालकों को 2.18 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जा रहा था। ताजा निर्णय के तहत अब यह दर बढ़ाकर 2.32 रुपये प्रति किलोमीटर कर दी गई है। मानदेय में की गई यह वृद्धि बस संचालकों और सेवा प्रदाताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बसों का नियमित, सुरक्षित और सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। ग्रामीण यात्रियों को 20 प्रतिशत कम किराया परिवहन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत संचालित बसों का किराया साधारण बसों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम रखा गया है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों को मिल रहा है, जिन्हें कम किराये में अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण अंचलों में रहने वाले नागरिकों को भी शहरी क्षेत्रों के समान किफायती और सुलभ परिवहन सुविधाएं मिलें। प्रदेशभर में 299 बसें कर रही हैं सेवा परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 20 क्षेत्रों में कुल 395 अनुमन्य मार्गों पर 299 बसों का संचालन किया जा रहा है। यह योजना ग्रामीण परिवहन को सशक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार का एक बड़ा और प्रभावी कदम मानी जा रही है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

रायपुर. तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  संतोष पांडेय, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, विधायक  मोतीलाल साहू,  राजेश मूणत, मुख्य सचिव  विकास शील, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह)  मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर  संजीव शुक्ला उपस्थित थे।

आदिवासी संस्कृति की झलक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भव्य जनजातीय प्रदर्शनी देखी

रायपुर.  द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली। राष्ट्रपति  मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया। जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए। बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति  मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया। लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।  

अबूझमाड़ का गौरव बढ़ा: मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति ने राष्ट्रपति का ध्यान खींचा

रायपुर. राष्ट्रपति  मुर्मु ने की प्रशंसा, ताली बजाकर हौसला बढ़ाया छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और लंबे समय तक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ ने शनिवार को अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव नारायणपुर जिले के उन दुर्गम और बीहड़ इलाकों में पड़ी है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं। कुटूर, करपा और परपा जैसे सुदूर वनांचलों से निकलकर इन बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा न तो संसाधनों की मोहताज होती है और न ही भौगोलिक सीमाओं की। इस संघर्षपूर्ण यात्रा के प्रेरणास्रोत मनोज प्रसाद हैं, जो एकेडमी के संस्थापक होने के साथ-साथ 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासन और सतत मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इन नन्हे मल्लखंब खिलाड़ियों ने ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतकर और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता बनकर पहले ही वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में 40 से 50 से अधिक टेलीविजन शो, देशभर में सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियों, तथा अनेक प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह टोली निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। अब यह दल अपनी मिट्टी की खुशबू, लोक-संस्कृति और अद्वितीय कौशल को और अधिक सशक्त रूप में सात समंदर पार ले जाने के लिए तैयार है। एकेडमी का अगला लक्ष्य भविष्य में ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारत और अबूझमाड़ की लोक-कला का प्रदर्शन करना है। जगदलपुर में हुआ यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन ‘बदलते बस्तर’ की उस सशक्त तस्वीर को प्रस्तुत करता है, जहां संघर्ष की जमीन से प्रतिभा के नए सितारे उभर रहे हैं।

बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।      

पीएम मोदी का बयान: भारत-मलेशिया संबंध मजबूत, मलेशिया पहुंचने पर बोले- ऐसा स्वागत भारत याद रखेगा

नई दिल्ली/ कुआलालंपुर   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दो दिनों के दौरे पर हैं. वह शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे है. इस दौरान उन्होंने कहा कि मलेशिया में भारत के लिए प्यार और सम्मान है. ऐसा स्वागत भारत याद रखेगा. पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि मैं पिछले साल आसियान समिट में हिस्सा लेने के लिए मलेशिया नहीं आ पाया था. लेकिन मैंने मेरे दोस्त से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊंगा और जैसा वादा किया था मैं यहां हूं. ये 2026 की मेरी पहले विदेश यात्रा है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रति मलेशिया का प्यार दिखा है. ऐसा स्वागत भारत याद रखेगा. मलेशिया में भारतीय संगीत और सिनेमा लोकप्रिय है. मलेशिया के 500 स्कूलों में भारतीय भाषाओं की पढ़ाई हो रही है. दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती आई है..  पीएम मोदी ने कहा कि आज हम प्रगति में एक दूसरे के साथ हैं. भारत और मलेशिया की साझा विरासत है. मलेशिया में विवेकानंद को काफी लोग मानते हैं. मैंने मन की बात में भी मलेशिया का जिक्र किया था. हम एक दूसरे के साझेदार देश हैं. भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है.  यूपीआई मलेशिया में भी जल्द लॉन्च होगा. एक दशक में बड़े सुधार हुए हैं.  भारत और मलेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिन के दौरे पर मलेशिया रवाना हो चुके हैं. इस यात्रा से पहले पीएम मोदी ने साफ संकेत दिए कि भारत अब मलेशिया के साथ रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है. रवाना होने से पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और बीते कुछ वर्षों में इन रिश्तों में लगातार मजबूती आई है. उन्होंने कहा कि वह मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ विस्तृत बातचीत को लेकर उत्साहित हैं. पीएम मोदी के मुताबिक, दोनों देश अपनी समग्र रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगे. इसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को नई दिशा देने पर चर्चा होगी. साथ ही दोनों देश नए क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते भी तलाशेंगे. मलेशिया रवाना होने का वीडियो आया सामने पीएम नरेंद्र मोदी का मलेशिया से रवाना होने का वीडियो सामने आया है. इसमें वह हमेशा की तरह एक सफेद कुर्ते में हैं और उनके दाहिने कंधे पर शॉल रखा है. रवाने होने के दौरान उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की. मलेशिया में भव्य स्वागत की तैयारी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर मलेशिया में भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह है. कुआलालंपुर में उनके स्वागत के लिए एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसका नाम है ‘वेलकम मोदी जी’. इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यहां 750 से ज्यादा कलाकार एक साथ मंच पर उतरेंगे और सामूहिक नृत्य प्रस्तुति देंगे. आयोजकों का दावा है कि यह आयोजन मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो सकता है. रिकॉर्ड के लिए आवेदन पहले ही किया जा चुका है और रिकॉर्ड्स टीम मौके पर मौजूद रहेगी. 2047 तक बनेगा विकसित भारत : PM Modi पीएम मोदी ने विकसित भारत का सपना एक बार फिर से दोहराते हुए कहा कि ‘भारत के लोग 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे’. उन्होंने कहा इस जर्नी में भारतीय प्रवासी अहम पार्टनर हैं. ‘भारत का UPI जल्द आएगा मलेशिया’: PM Modi प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के लोगों से एक बड़ा वादा किया. उन्होंने कहा भारत का UPI जल्द मलेशिया में आएगा. पीएम मोदी ने भारत की बेहतरीन डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा. ‘हम टॉप 3 के दरवाजों को खटखटा रहे हैं’: PM Modi पीएम मोदी ने मलेशिया के लोगों को भारत आने का न्योता दिया और इसके साथ ही अपने दोस्तों को साथ लाने के लिए भी कहा. उन्होंने भारत की सफलताएं गिनाते हुए कहा कि अब हम ‘टॉप 3 के दरवाजों को खटखटा रहे हैं’. ‘MGR के गाने सुनते हैं मलेशिया के प्रधानमंत्री’ : पीएम मोदी पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि मलेशिया के प्रधानमंत्री बहुत अच्छे सिंगर हैं और भारतीय म्यूजिक के बहुत बड़े फैन हैं. मलेशिया पीएम तमिल अभिनेता, फिल्म निर्माता एमजीआर के गाने सुनते हैं. ‘ये 2026 में मेरा पहला विदेश दौरा है’: पीएम मोदी पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि कि कैसे प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रोटोकॉल की सीमाओं को तोड़कर एयरपोर्ट पर स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और उन्हें अपनी ही कार में साथ बिठाया. भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘उन्होंने अपनी कार ही नहीं, बल्कि अपनी सीट भी साझा की’. पीएम ने कहा कि ‘मैंने वादा किया था और मैं आ गया. ये 2026 में मेरा पहला विदेश दौरा है’.

सागर के रुद्राक्ष धाम में रामकथा में शामिल हुए शिवराज सिंह, भूपेंद्र सिंह को बताया सौभाग्यशाली

सागर  कथा तो भगवान की ही सुनने लायक है. हर जीव के पास उसकी कथा से ज्यादा उसकी व्यथा है. भगवान की कथा जीव की व्यथा का हरण कर लेती है. प्रभु की कथा हम जितनी बार सुनते हैं नित्य नई लगती है और मन को शांति प्रदान करती है. ये बात पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कही. पिछले सात दिनों से सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में श्रीराम कथा का आयोजन चल रहा था, जिसका शुक्रवार 6 फरवरी को समापन हो गया. इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए. इसके बाद शिवराज सिंह ने रुद्राक्ष धाम पहुंचकर दक्षिण मुखी हनुमान जी के दर्शन और आरती कर आशीर्वाद लिया. कथा शुरू से आखिरी तक पढ़नी और सुननी चाहिए प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में भगवान की पूरी कथा है. मानस जी में ही लिखा है कि “भगवान की कथा अति हरि कृपा होने से ही प्राप्त होती है. कथा प्रारंभ से अंत तक पढ़नी और सुननी चाहिए, खंडित करके नहीं. जैसे कक्षा 2, 4, 5 में नहीं पढ़कर सीधे मास्टर की पढ़ाई नहीं की जा सकती.” दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की सागर के रुद्राक्ष धाम में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह द्वारा सात दिवसीय रामकथा का आयोजन कराया गया. पं. प्रेमभूषण महाराज की राम कथा को सुनने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में भक्तगण पंडाल में पहुंचे. वहीं 1 फरवरी को दक्षिणमुखी श्याम वर्ण हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है. इस कार्यक्रम में स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर राम कथा का श्रवण किया. राम कथा सुनने सागर पहुंचे शिवराज सिंह श्रीराम कथा को सुनने के लिए शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे. जहां विधायक शैलेंद्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया और देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया समेत अन्य बीजेपी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया. इसके बाद वे सड़क मार्ग से होते हुए रुद्राक्ष धाम पहुंचे. यहां पहुंचकर उन्होंने प्रेमभूषण महाराज का पूजन कर आशीर्वाद लिया और भगवान के दर्शन कर कथा में शामिल हुए. ‘सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं बल्कि सेवक बनने में है’ मंच से भक्तों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा,”सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं बल्कि सेवक बनकर कार्य करने में है. मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और आनंद की अनुभूति है. शास्त्रों में भगवान को प्राप्त करने के 3 मार्ग बताए गए हैं ज्ञान, भक्ति और कर्म. मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और समाज कल्याण के लिए होना चाहिए.” ‘बड़े सौभाग्यशाली हैं भूपेंद्र सिंह’ मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “व्यासपीठ पर विराजमान परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज का जीवन प्रेम, ज्ञान और भक्ति का अनुपम उदाहरण है. आत्मा के मोक्ष और जगत के कल्याण के लिए की जाने वाली उनकी कथाएं समाज को सही दिशा देती हैं.” उन्होंने कहा कि “दक्षिणमुखी हनुमान जी के भव्य मंदिर का निर्माण कराने वाले भूपेन्द्र सिंह वास्तव में सौभाग्यशाली हैं. ऐसे कार्य केवल ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव होते हैं.” ‘रुद्राक्ष धाम के कण-कण में शिव हैं’ खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा, “पिछले 7 दिनों में भगवान श्री राधाकृष्ण और दक्षिणमुखी हनुमान के दर्शन और श्रीरामकथा का आप सभी ने धर्म लाभ लिया. रुद्राक्ष धाम भगवान की जागृत भूमि है. यहां हमारे गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा के सानिध्य में 2014 में 7 दिवस में 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और उनका रुद्र अभिषेक हुआ था. ऐसा सौभाग्य प्राप्त करने वाली यह भारत की इकलौती भूमि है. 108 पुराण, श्रीमद्भागवत कथा भी उन 7 दिनों में हुई, इसलिए इसका नाम रुद्राक्ष धाम रखा गया, यहां के कण कण में शिव हैं.” 

नीदरलैंड्स के खिलाफ पाकिस्तान की मुश्किल जीत, आखिरी ओवर में पसीने छूटे

 कोलंबो आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में बड़ा उलटफेर होते-होते बचा. पाकिस्तान और नीदरलैंड के बीच ये मुकाबला कोलंबो में खेला गया. जिसमें पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. नीदरलैंड्स की टीम ने 148 का लक्ष्य रखा था. लेकिन इसके जवाब में उतरी पाकिस्तान एक समय पर बेहद मुश्किल स्थिति में आ गई थी. लेकिन फहीम अशरफ की ताबड़तोड़ पारी के चलते पाकिस्तान ने ये मैच 3 विकेट से जीत लिया. ऐसे रही पाकिस्तान की बल्लेबाजी 148 के जवाब में उतरी पाकिस्तान की शुरुआत बेहद आक्रामक रही. साहिबजादा फरहान और सैम अयूब ने तेज शुरुआत की. लेकिन तीसरे ही ओवर में पाकिस्तान को पहला झटका लगा, जब सैम अयूब आउट हुए. अयूब ने 24 रन बनाए. लेकिन कप्तान सलमान आगा भी ज्यादा नहीं चल सके. उनके बल्ले से केवल 12 रन आए. इसके बाद साहिबजादा फरहान और बाबर आजम के बीच अच्छी साझेदारी हुई. 10 ओवर में पाकिस्तान का स्कोर 90-2 था. लेकिन इसके बाद नीदरलैंड्स ने कमाल की वापसी की. बैक-टू-बैक पाकिस्तान को 3 झटके दिए. आलम ये हुआ की 13 ओवर में पाकिस्तान के 103 रन पर 5 विकेट गिर गए. बाबर आजम 18 गेंद में 15 रन बनाकर आउट हुए. फरहान भी फिफ्टी से चूक गए. और उस्मान खान खाता भी नहीं खोल सके. 16वें ओवर में पाकिस्तान को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब मोहम्मद नवाज 13 गेंद में 6 रन बनाकर आउट हो गए. तब पाकिस्तान को 4 ओवर में 34 रन चाहिए थे. लेकिन 17वें ओवर की पहली ही गेंद पर शादाब भी चलते बने. इसके बाद पाकिस्तान को 3 ओवर में 33 रन चाहिए थे. लेकिन 19वें ओवर में फहीम अशरफ ने 24 रन ठोक दिए और मैच पाकिस्तान की ओर मोड़ दिया. आखिरी ओवर में केवल 5 रन चाहिए थे. पाकिस्तान ने ये मैच 3 विकेट से जीत लिया. फहीम पाकिस्तान के लिए गेम चेंजर बने, जिन्होंने 11 गेंद में 29 रन ठोके. जिसमें 3 छक्के शामिल थे. ऐसे रही नीदरलैंड्स की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी नीदरलैंड्स की शुरुआत अच्छी रही. पहले विकेट के लिए 28 रनों की साझेदारी हुई. चौथे ओवर में पहला विकेट मैक्स का गिरा. इसके बाद अगले ही ओवर में माइकल भी चलते बने. लेकिन इसके बाद नीदरलैंड्स ने अच्छी बल्लेबाजी. खास बात ये रही की रनों की गति नहीं रुकी. 13वें ओवर में जब नीदरलैंड्स को चौथा झटका लगा जब उसका स्कोर 105 था.  नीदरलैंड्स की ओर से सबसे ज्यादा रन स्कॉट एडवर्ड्स ने बनाए. उन्होंने 37 रन बनाए. उनकी इस पारी के दम पर नीदरलैंड्स ने 147 रन बनाए. वहीं, पाकिस्तान की ओर से सलमान मिर्जा ने सबसे ज्यादा 3 विकेट झटके. वहीं, सैम अयूब, अबरार और नवाज को 2-2 विकेट मिले. शाहीन आफरीदी को 2 ओवर में 28 रन पड़े और केवल 1 विकेट मिला.  

मुंबई में मेयर पद पर बीजेपी का कब्जा, रितु तावड़े होंगी मेयर, शिंदे की शिवसेना को डिप्टी मेयर का दायित्व

मुंबई  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शनिवार को मुंबई मेयर चुनाव के लिए कॉर्पोरेटर रितु तावड़े को नॉमिनेट किया, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना ने संजय घाडी को डिप्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया. बीजेपी नेता अमित सतम ने तावड़े के नाम की घोषणा की, जबकि शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय में घड़ी की उम्मीदवारी की घोषणा की. तावड़े वार्ड 132 से कॉर्पोरेटर हैं, जबकि घड़ी 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 5 से चुने गए थे. शिवसेना सचिव संजय मोरे ने एक बयान में कहा है कि घड़ी 15 महीने तक डिप्टी मेयर के तौर पर काम करेंगे. वह शिवसेना (UBT) के उन सीनियर पूर्व कॉर्पोरेटर में से एक थे, जिन्होंने पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जॉइन कर ली थी. मुंबई में डिप्टी मेयर का कार्यकाल बांटकर, शिवसेना अपने चार कॉर्पोरेटरों को मौका देना चाहती है. 227 सदस्यों वाली बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीती. सत्ताधारी गठबंधन, जिसके पास कुल 118 कॉर्पोरेटर हैं, 114 के आधे के आंकड़े को पार कर चुका है और मेयर का पद हासिल करने की अच्छी स्थिति में है. शिवसेना (UBT), जिसने 1997 से 25 सालों तक नगर निकाय पर राज किया, उसने 65 सीटें जीती, जबकि उसके सहयोगी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), ने क्रमशः छह और एक सीट जीती. अन्य पार्टियों में, कांग्रेस ने 24 सीटें, एआईएमआईएम ने आठ, एनसीपी (अजित पवार गुट) ने तीन और समाजवादी पार्टी ने दो सीटें जीती. नौ साल के अंतराल के बाद हुए महत्वपूर्ण चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते. पिछले कार्यकाल के खत्म होने के बाद 7 मार्च 2022 से बीएमसी कमिश्नर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहे हैं. बीएमसी देश की सबसे अमीर सिविक बॉडी है, जिसका 2025-26 का बजट 74,450 करोड़ रुपये है, जो कुछ छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा है.

PoK को भारत का हिस्सा मानने पर अमेरिका का बयान, शहबाज-मुनीर ने उठाया नक्शे का मुद्दा

वाशिंगटन  अमेरिका से पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली खबर आई है. अमेरिका और भारत ने ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी किया है. मगर इससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है. अब सवाल है कि आखिर अमेरिका ने ऐसा क्या किया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की नींद उड़ जाएगी. दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके को भारत का हिस्सा माना है. वैसे भी पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके भारत का हिस्सा है. भारत शुरू से यह मानता है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा जमा रखा है. अब भारत की इस बात पर अमेरिका ने भी मुहर लगा दी है. अमेरिका ने जो नक्शा जारी किया है, वह साफ-साफ बता रहा है कि पाकिस्तान का कब्जा अवैध है और पीओके भारत का ही हिस्सा है. जी हां, अमेरिका ने एक ऐसा नक्शा जारी किया है जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ने भारत-अमेरिका के नए अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट की जानकारी देते हुए जो नक्शा इस्तेमाल किया है, उसे देखकर शहबाज और मुनीर की छाती फट जाएगी. अमेरिका की ओर से जारी नक्शे में पूरा कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है. इस नक्शे के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी भारत में शामिल है. इस नक्शे में न कोई लाइन ऑफ कंट्रोल है और नकोई विवादित क्षेत्र. साफ-साफ सब कुछ भारत का दिखाया गया है. क्या हुआ नक्शे में दरअसल, यूएसटीआर यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अंतरिम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में अमेरिकी उत्पादों (ट्री नट्स, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड सोरघम, फल आदि) के लिए भारत में नए बाजार खुलने की बात थी. अमेरिका ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘ट्री नट्स और सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन से लेकर लाल ज्वार और ताज़े और प्रोसेस्ड फलों तक, अमेरिका-भारत एग्रीमेंट अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए नए मार्केट एक्सेस देगा.’ मगर इस पोस्ट के साथ जारी नक्शे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अमेरिका ने यही नक्शा जारी किया है, जिसमें पीओके को भारत का हिस्सा माना गया है. अमेरिका का बड़ा संकेत अमेरिका की ओर से जारी यह नक्शा सिर्फ एक तस्वीर नहीं है.यह अमेरिका की सोच का बड़ा संकेत है. भारत हमेशा कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न अंग है. इसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी हैं. अब अमेरिका के आधिकारिक अकाउंट से ऐसा नक्शा आने का मतलब है कि वाशिंगटन भारत की इस बात को मान रहा है. इसका यह भी संकेत है कि अमेरिका अब पीओके के मसले पर न्यूट्रल नहीं है. यह बात हाल ही में हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील के साथ आई है. दोनों देशों ने टैरिफ कम करने और ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क जारी किया है. पाक को झटका अमेरिका का यह कदम पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका है. पाकिस्तान दशकों से पीओके पर अवैध कब्जा जमा रखा है. भारत ने यह प्रण कर रखा है कि पीओके को वापस लेकर रहेगा. इस दिशा में भारत के लिए यह अच्छी खबर है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर को इस नक्शे को आंख खोलकर देखना चाहिए. उनका सबसे पुराना दोस्त अमेरिका अब भारत के साथ खड़ा दिख रहा है. जिनके घर जाकर मुनीर बिरयानी खाते हैं, उन्होंने कैसे भारत का लोहा माना है.

एनजीटी का आदेश: केरवा डेम में निजी भूमि नियमों से बाहर नहीं, 33 मीटर दायरे में हुआ भराव हटेगा

भोपाल  निजी जमीन का हवाला देकर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसको लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. एनजीटी ने जलस्रोतों, हरित क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में हो रहे अवैध निर्माण और अन्य गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई स्थानों पर रोक लगा दी है. एनजीटी का कहना है कि पर्यावरण की कीमत पर विकास की मंजूरी नहीं दी जा सकती है. कैचमेंट एरिया में हो रहा हस्तक्षेप गंभीर एनजीटी के समक्ष आए मामलों में पाया गया कि कई जगहों पर निजी स्वामित्व की जमीन होने का तर्क देकर खनन, निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां की जा रही थीं. इस पर एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण कानून सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे निजी जमीन हो या सरकारी. एनजीटी ने खास तौर पर नदियों, तालाबों, जलाशयों और उनके कैचमेंट एरिया में हो रहे हस्तक्षेप को गंभीर माना है. इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य बताई गई है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केरवा डेम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) की स्पष्ट मार्किंग करने, उसका जोन ऑफ इन्फ्लुएंस यानी प्रभाव क्षेत्र तय करने और अतिक्रमण रोकने के लिए महीने में दो बार नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।  ट्रिब्यूनल ने यह निर्देश पिछले साल केरवा डेम के एफटीएल क्षेत्र में 2000 डंपर मिट्टी व निर्माण सामग्री के भराव को लेकर आई खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर याचिका पर दिए हैं। एनजीटी ने साफ किया है कि बफर जोन में आने वाली निजी भूमि पर भी पर्यावरण से जुड़े सभी कानून-नियम पूरी तरह लागू होंगे। ऐसे में डेम के एफटीएल से 33 मीटर के दायरे में निजी जमीन पर किया गया भराव भी हटाना होगा। गौरतलब है कि पिछले साल एनजीटी के निर्देश पर कलेक्टर, सीपीसीबी, एमपीपीसीबी व स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित की गई थी। शेष | पेज 12 पर वेटलैंड अथॉरिटी तय करेगी प्रभाव क्षेत्र     एनजीटी ने स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को केरवा डेम का जोन ऑफ इन्फ्लुएंस तय करने के निर्देश दिए हैं, जबकि सीमांकन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है। जोन ऑफ इन्फ्लुएंस में जलाशय के एफटीएल के साथ-साथ कैचमेंट एरिया में आने वाली नदियों और नालों का भी सीमांकन किया जाएगा। इन क्षेत्रों के आसपास निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी।     निजी भूमि का तर्क नहीं चलेगा… एनजीटी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि एफटीएल व बफर जोन के भीतर निजी स्वामित्व का दावा पर्यावरण कानूनों से छूट का आधार नहीं बन सकता। ट्रिब्यूनल ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्धारित क्षेत्र में किया गया भराव नहीं हटाया गया तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। दोषियों से होगी पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई एनजीटी ने संबंधित जिलों के कलेक्टर, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की जांच करें और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करें. एनजीटी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है. साथ ही, पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई भी दोषियों से कराई जाएगी. वेटलैंड रुल्स 2017 का हो रहा उल्लंघन इस मामले में शिकायतकर्ता राशिद नूर खान ने बताया कि “भोपाल के ग्राम महुआखेड़ा स्थित केरवा डैम के फुल टैंक लेवल और आसपास के क्षेत्र में 2000 से अधिक डंपरों से कोपरा, मुर्रम और काली मिट्टी डाली गई है. इसका उद्देश्य जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियां करना बताया गया है. जो वेटलैंड नियम 2017 और पर्यावरण कानूनों का सीधा उल्लंघन है.” संयुक्त समिति की रिपोर्ट से हुआ खुलासा एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति ने स्थल निरीक्षण में पाया कि फुल टैंक लेवल की चिन्हांकित सीमा के भीतर करीब 10 फीट तक कोपरा से अवैध भराव किया गया है. इससे डैम की जल भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा बताया गया. समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी भूमि पर किया गया भराव भी सीधे जल निकाय को प्रभावित कर रहा है. एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि भूमि का निजी होना पर्यावरणीय उल्लंघन को वैध नहीं बनाता. 33 मीटर बफर जोन के उल्लंघन को स्वीकार करते हुए मिट्टी और कोपरा हटाने के नोटिस को सही ठहराया गया. सख्त निर्देश और निगरानी के आदेश एनजीटी ने जल संसाधन विभाग को एफटीएल क्षेत्र की नियमित निगरानी, जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को 2 माह में जोन आफ इंफ्लुएंस चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सतत निगरानी के आदेश दिए गए हैं. एनजीटी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है. वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह     वेटलैंड पाटना कितना खतरनाक है…. वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते हैं। बाढ़ रोकते हैं। भूजल रिचार्ज करते हैं। जैव विविधता बचाते हैं।     जोन ऑफ इन्फ्लुएंस क्यों तय होता है… इसमें वे इलाके आते हैं-जहां भूजल स्तर प्रभावित होता है, जहां बाढ़ या जलभराव का खतरा रहता है, जहां पर्यावरण व वेटलैंड सुरक्षित रखना जरूरी होता है। केरवा डेम महत्वपूर्ण क्यों? केरवा-कलियासोत का वन क्षेत्र आपस में जुड़ा है, जो जैव विविधता के लिहाज से संवेदनशील। केरवा से कोलार क्षेत्र में रोज करीब 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उत्तराखंड के पंचूर गांव में रात्रि विश्राम, बच्चों के बीच दिखा उनका बालप्रेम

‘हम भी तेरे दादा लगते हैं’ बच्चों के बीच उमड़ा ‘बाबा’ का बालप्रेम,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड के अपने पैतृक गांव पंचूर में किया रात्रि विश्राम  मुख्यमंत्री ने शनिवार सुबह गांव में बड़े-बुजुर्गों से हालचाल पूछा, बच्चों को किया दुलार  पंचूर  उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने पैतृक गांव पंचूर में रात्रि विश्राम किया। शनिवार सुबह उन्होंने अपने गांव के बड़े-बुजुर्गों का हालचाल जाना और बच्चों को दुलार किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बालप्रेम उमड़ आया। उन्होंने गांव के बच्चों पर अपना स्नेह बरसाया, उनसे बातचीत की और उन्हें चॉकलेट भी दी। सीएम योगी ने एक बच्चे को अपनी गोद में लेकर उसे प्रेम से खिलाया। बच्चों ने भी सहज भाव से मुख्यमंत्री से बातचीत की। इस दौरान, गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सेल्फी भी ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अपने परिजनों से भी मिले, सभी का कुशलक्षेम जाना। सीएम योगी की विनम्रता, सरलता व सहजता देखकर स्थानीय लोग भी भाव-विभोर हो गए। इसके बाद अपने गांव में भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों व परिचितों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को दुलार किया।  भ्रमण के दौरान मार्ग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बच्चे ने फूल भेंट किया तो उन्होंने मासूम को खाने का सामान दिया। बच्चे ने वह सामान वहां खड़े अपने दादा को दे दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए प्यार भरे शब्दों में बच्चे से कहा, ‘हम भी तेरे दादा लगते हैं।’ गांव में भ्रमण के दौरान योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीणों को गांव में रहने और खेतीबाड़ी करने के लिए प्रेरित किया।

अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को आर्थिक संबल प्रदान कर योगी सरकार सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा कर रही साकार

समावेशी विकास की दिशा में योगी सरकार का सशक्त कदम, अल्पसंख्यक समुदाय के 2.39 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत वर्ष 2025-26 में लगभग 71.35 करोड़ रुपये की धनराशि का हुआ वितरण अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को आर्थिक संबल प्रदान कर योगी सरकार सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा कर रही साकार  लखनऊ  योगी सरकार ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के अपने संकल्प को मजबूती प्रदान की है। इस दिशा में योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत 2.39 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष अब तक लगभग 71.35 करोड़ रुपये की धनराशि का वितरण किया जा चुका है। योगी सरकार की ये योजना प्रदेश के सिख, जैन, बौद्ध और मुस्लिम जैसे अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक संबल प्रदान करती है। साथ ही समाज के सभी वर्गों को विकास का समान अवसर प्रदान कर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की अवधारणा को साकार कर रही है।  प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत अल्पसंख्यक समुदाय के 1,09,084 छात्र हुए लाभान्वित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 1,09,084 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। योजना के तहत इस मद में लगभग 37.20 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। इसमें पहले और दूसरे चरण में लगभग 64,312 छात्र-छात्राओं को 19.03 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। तीसरे चरण में 25 जनवरी 2026 तक लगभग 44,772 विद्यार्थियों को 13.16 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया है। इस प्रकार प्री-मैट्रिक स्तर पर अब तक तीन चरणों में लगभग 32.19 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का वितरण किया चुका है। शेष धनराशि से वंचित विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 1,30,265 छात्रों को मिली छात्रवृत्ति  राज्य सरकार, योजना के तहत पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के 11वीं और 12वीं के अलावा अन्य तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इस क्रम में वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 1,30,265 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की है। इस दिशा में विभाग की ओर से अब तक तीन चरणों में लगभग 39.16 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई है। इसके तहत पहले और दूसरे चरण में लगभग 51,519 विद्यार्थियों को 15.72 करोड़ रुपये की छात्रवृति प्रदान की गई, जबकि तीसरे चरण में 25 जनवरी 2026 तक 78,746 विद्यार्थियों को 23.44 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार मानते हुए प्रदेश सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करती है ताकि कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई से वंचित न रहे, बल्कि शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर हो प्रदेश के विकास में सकारात्मक योगदान दे सके। प्रदेश सरकार की ये पहल न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में सहायक साबित हुई है, डबल इंजन सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” की अवधारणा को भी साकार किया है।

कर्नल सोफिया विवाद: मंत्री विजय शाह ने मीडिया से दूरी बनाई, 9 फरवरी को होगी मामले की सुनवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश मुख्यालय में  समस्याएं सुनने पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह उस वक्त असहज नजर आए, जब मीडिया ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण को लेकर सवाल पूछ लिया. सवाल सुनते ही मंत्री विजय शाह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गए. हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल को अकेले प्रेस ब्रीफिंग की. मंत्री शाह और पटेल ने सुनी समस्या भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश मुख्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है. प्रतिदिन दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेशभर से कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव होता है, उनका मौके पर निराकरण किया जाता है, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजा जाता है. शुक्रवार को यह जिम्मेदारी मंत्री विजय शाह और मंत्री शिवाजी पटेल को सौंपी गई थी. मीडिया के सवालों से बचते दिखे विजय शाह कार्यकर्ताओं की सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों मंत्री कार्यालय से बाहर निकले, मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर सवाल किया. सवाल सुनते ही मंत्री बिना कुछ कहे वाहन में बैठकर निकल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. इसलिए अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है. सरकार को 3 दिन में देना होगा जबाव 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है. कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन का निर्णय लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है, जबकि कार्यदिवसों के आधार पर सरकार के पास अभी लगभग तीन दिन का समय बचा है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख शुरुआत से मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का भी रहा है। पार्टी और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा सूत्रों के अनुसार, इस मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटार्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली गई है। लंबी चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि सरकार 9 फरवरी की सुनवाई में समय विस्तार की मांग कर सकती है, जिससे सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है। सरकार ने रिपोर्ट दिल्ली भेजी मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी मंशा से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। इस संबंध में एसीएस गृह शिवशेखर शुक्ला, सचिव गृह कृष्णा वेणी देशावतु और अतिरिक्त सचिव मनीषा सेंतिया दिल्ली गए थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदु पर सुनवाई संभावित है, जबकि 11 फरवरी को मामले के अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है। तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच विजय शाह प्रकरण की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- ‘उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’ बजट सत्र के बाद हो सकती है कार्रवाई एसआईटी छह माह पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि करते हुए मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है. अब अंतिम निर्णय सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा लिया जाएगा. माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद सरकार और पार्टी मंत्री विजय शाह के खिलाफ एकशन ले सकते हैं.

भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर को दिया सुरक्षा कवच, अमेरिका के लिए ढील से इनकार; लिस्ट देखें

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30000 अरब डॉलर का बाजार खुलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार इसकी जानकारी दी। इस फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों जैसे गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करने का वादा किया है, लेकिन मुख्य रूप से केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में। कृषि क्षेत्र में क्या खुला है? भारत ने अमेरिकी उत्पादों जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और रेड सोरघम (पशु चारे के लिए), ट्री नट्स (जैसे बादाम, अखरोट आदि), ताजा और प्रोसेस्ड फ्रूट्स, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स आदि पर टैरिफ कम या खत्म करने पर सहमति जताई है। ये मुख्य रूप से पशु आहार, नट्स और फलों से जुड़े हैं, जो भारत के मुख्य खाद्यान्न उत्पादन को सीधे प्रभावित नहीं करते। कृषि क्षेत्र में क्या बंद/संरक्षित है? भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों और ग्रामीण आजीविका की रक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की गई है। गेहूं, चावल, दूध और डेयरी उत्पादों जैसे मुख्य आइटम्स को डील से लगभग पूरी तरह बाहर रखा गया है। यह भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति है कि कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए, खासकर क्योंकि अमेरिकी उत्पाद सब्सिडी वाले होते हैं और भारतीय किसानों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच हुए इस हालिया व्यापार समझौते में एक महत्वपूर्ण पहलू ‘भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र का संरक्षण’ बनकर उभरा है। 1. अनाज और आटा भारतीय अनाज बाजार को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: प्रमुख अनाज: गेहूं, चावल, मक्का, जौ, ज्वार और रागी। मोटा अनाज (Millets): बाजरा, कोदो, कांगनी, ओट्स, श्यामक और अमरंथ। अन्य: कोपरा, मैदा, विभिन्न प्रकार के आटे (गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा आदि) और छिलका रहित अनाज। 2. डेयरी उत्पाद भारतीय डेयरी क्षेत्र, जो करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है, उसे पूर्ण संरक्षण दिया गया है: तरल और पाउडर उत्पाद: दूध (तरल, पाउडर, कंडेंस्ड), क्रीम और बटर मिल्क। वसा और अन्य: घी, मक्खन, बटर ऑयल, योगहर्ट और पनीर। चीज की किस्में: मोज़ेरेला, ब्लू वेंड, ग्रेडेड/पाउडर्ड चीज और व्हे प्रोडक्ट्स। 3. मसाले और औषधीय जड़ी-बूटियां भारतीय मसालों की वैश्विक साख को देखते हुए, इस श्रेणी में व्यापक सुरक्षा दी गई है: रोजाना के मसाले: काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, धनिया, जीरा, हल्दी, अदरक और हींग। अन्य बीज और पाउडर: सूखी हरी मिर्च, अजवाइन, मेथी, सरसों, राई, भूसी, चक्रमर्द, कैसिया और अन्य सभी पाउडर मसाले। 4. सब्जियां और फल ताजी और फ्रोजन दोनों प्रकार की सब्जियों और फलों को इस समझौते में संरक्षित श्रेणी में रखा गया है: सब्जियां: आलू, प्याज, मटर, फलियां, मशरूम, तोरी, कुंदरू, भिंडी, कद्दू, लहसुन, खीरा, शिमला मिर्च, काबुली चना और शकरकंद। फल (सामान्य): केला, आम, स्ट्रॉबेरी, संरक्षित चेरी, इमली और सिंघाड़ा गिरी। ड्राई फ्रूट्स: सूखा आलू बुखारा, सूखा सेब और अन्य सूखे फल। साइट्रस फल: संतरा, मैंडरिन, चकोतरा, नींबू, अंगूर और अन्य साइट्रस फल। इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन (लगभग 500 अरब डॉलर) मूल्य का सामान खरीदेगा। इसमें शामिल हैं:     ऊर्जा और संसाधन: तेल, गैस और कोकिंग कोल।     विमानन: विमान और उनके पुर्जे।     तकनीक: डेटा सेंटर के पुर्जे और AI अनुप्रयोगों के लिए उपयोग होने वाले GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट)। भारतीय निर्यातकों को क्या मिलेगा? हालांकि अमेरिका अधिकांश भारतीय सामानों (जैसे कपड़ा, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक और रसायन) पर 18% टैरिफ जारी रखेगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में विशेष राहत दी गई है: विमानन और ऑटो पार्ट्स: भारतीय विमान पुर्जों को वही राहत मिलेगी जो अमेरिका के अन्य सहयोगी देशों को मिलती है। ऑटो पार्ट्स के लिए एक विशेष कोटा तय किया जाएगा जिस पर कम शुल्क लगेगा। फार्मास्युटिकल्स: जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए बातचीत के जरिए अनुकूल परिणाम निकाले जाएंगे। टैरिफ (शुल्क) में भारी कटौती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इस 50% टैरिफ में से 25% हिस्सा ट्रंप प्रशासन ने दंड स्वरूप लगाया था क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदने की सहमति के बाद, ट्रंप ने शुक्रवार को उस 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। दोनों देशों का लक्ष्य मार्च 2026 तक एक औपचारिक और पूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है। इसके बाद भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर दी जाने वाली टैरिफ कटौती प्रभावी हो जाएगी। बरसों के विवादों (जैसे डिजिटल ट्रेड और कृषि) के बाद, अब चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा ने इन वार्ताओं को नई गति दे दी है।  

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