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India-US डील के तहत $30 ट्रिलियन मार्केट का खुलासा, 18% टैरिफ आज से लागू, जानें 10 महत्वपूर्ण पहलु

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अगले हफ्ते साइन हो समती है. हालांकि उससे पहले दोनों देश ने अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट (India-US Trade Agreement) का फ्रेमवर्क जारी किया है. इसके तहत भारत पर आज से  18 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया एक्‍स्‍ट्रा 25%  टैरिफ को भी हटा दिया गया है.  भारत और अमेरिका के इस फ्रेमवर्क को जल्‍द लागू किया जा सकता है और दोनों देशों के बीच व्‍यापक द्विपक्षीय व्‍यापार समझौता (BTA) के तौर पर बात आगे बढ़ेगी. यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी से शुरू हो रहे भारत-अमेरिका द्व‍िपक्षीय व्‍यापार समझौता (BTA) वार्ता को आगे बढ़ाएंगे. पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि इस वार्ता के तहत धीरे-धीरे बाजार पहुंच बढ़ेगी, सप्‍लाई चेन को मजबूत किया जाएगा और  ट्रेड बैरियर जैसे प्रावधान खत्‍म किए जा सकते हैं. साथ ही भारत और अमेरिका सभी औद्योगिक चीजों पर टैरिफ को कम कर सकते हैं. वाणिज्‍य मंत्री ने कहा कि यह ट्रेड डील भारत के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खोलेगा.  ट्रेड डील की 10 बड़ी बातें     अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को हटाकर 18 फीसदी टैरिफ आज से लागू कर दिया है.      टैरिफ कम करने के बाद भारत के लिए अमेरिका 30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खोलेगा.      जिसके तहत टेक्‍सटाइल, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, जैविक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद और चुनिंदा मशीनरी जैसे कारोबार को बडा अवसर मिलेगा.      भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर की वस्‍तुओं को खरीदने की सहमति जताई है, जिसमें तेल,  विमान, फाइटर जेट, एनर्जी और कुछ खाद्य पदार्थ शामिल हैं.      भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ हटा देगा या कम कर देगा.      इसमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेसिंग  फ्रूट, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं.      वहीं अमेरिका भारत के लिए  जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और हीरे और विमान के पुर्जों जैसे चुनिंदा उत्पादों पर टैरिफ समाप्त कर देगा.      इस डील से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और मछुआरों को ज्‍यादा लाभ होगा. महिलाओं और  युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.      भारत ने  मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, मांस, दूध, पनीर (डेयरी), इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू और कुछ सब्जियों जैसे प्रमुख उत्पादों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी है.      भारत अगले पांच वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा, विमान, बहुमूल्य धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदेगा. जीपीयू और डेटा-सेंटर उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देगा.   

उमरिया में 7° तापमान, 10 जिलों में हल्का कोहरा, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में पारा लुढ़केगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार रात तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे सर्दी का असर और गहरा हो गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रीवा, खजुराहो, मंडला और सतना जैसे शहरों में भी पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों में भी सर्दी के इस नए दौर काअसर साफ नजर आ रहा है। करीब एक हफ्ते राहत नहीं मौसम विभाग के अनुसार- आने वाले दिनों में ठंड से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। हालांकि, 10 फरवरी से पहले बारिश या ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन कोहरा और सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन और बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा, जहां पारा गिरकर 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, उमरिया के बाद रीवा दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो में भी 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, सतना में 8.9 डिग्री, राजगढ़ और शिवपुरी में 9 डिग्री, पचमढ़ी में 9.4 डिग्री तथा दमोह और मलाजखंड में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। इधर, प्रदेश में घने कोहरे का खास असर नहीं देखा गया। शनिवार सुबह भोपाल, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, मंडला, सतना समेत करीब 10 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जिससे सुबह के समय हल्की ठंड और दृश्यता में कमी महसूस की गई। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। एक नजर प्रदेश में तापमान पर MP में 4 दिन कड़ाके की ठंड  ग्वालियर-चंबल में असर ज्यादा भोपाल-उज्जैन में भी पारा गिरेगा ग्वालियर, खजुराहो समेत 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे  कटनी, शहडोल और छतरपुर सबसे ठंडे  वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से प्रदेश में ओले-बारिश शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री रहा

रुपये की शानदार बढ़त: 3 साल में बेहतरीन प्रदर्शन, India-US ट्रेड डील का असर साफ

 नई दिल्‍ली ,    शुक्रवार को डॉलर की संभावित निकासी और व्यापारियों द्वारा लॉन्ग पोजीशन कम करने के कारण भारतीय रुपया गिरावट पर बंद हुआ, लेकिन इस सप्‍ताह के दौरान भारतीय करेंसी ने शानदार तेजी दिखाई है. इस सप्‍ताह की तेजी ने 3 साल में सबसे तेज बढ़ोतरी को दर्ज किया है.  डॉलर की तुलना में रुपया शुक्रवार को 90.6550 पर बंद हुआ, जो दिन में 0.3% की गिरावट के साथ सप्ताह में 1.4% की तेजी को दिखाता है. जनवरी 2023 के बाद यह इसकी सबसे बड़ी वीकली ग्रोथ है. यह तेजी भारत और अमेरिका के बीच डील पर सहमति बनने के बाद आई है.  आरबीआई का बड़ा फैसला रुपया में तेज उछाल के साथ ही भारत के केंद्रीय बैंक (RBI) ने पॉजिटिव आर्थिक नजरिया, अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापार समझौतों के बाद कम हुए दबावों से उत्साहित होकर रेपो दर को अपरिवर्तित रखा है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि हमारा मानना ​​है कि एमपीसी बदलती व्यापक आर्थिक स्थितियों और नई श्रृंखला के आंकड़ों पर आधारित नजरिए से मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा तय करेगी.  वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई रेपो रेट को कम रखकर बैंकों और लोन लेने वाले लोगों को सपोर्ट देना चाहता है. यह लोन लेने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत होगी. वहीं व्‍यापारियों का कहना है कि रेपो रेट में अनचेंज रखने से रुपया के गिरावट में ज्‍यादा योगदान नहीं रहेगा.  मंगलवार को आई थी उछाल मंगलवार को अमेरिका और भारत द्वारा महीनों की बातचीत के बाद व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारतीय करेंसी में बड़ी उछाल आई थी, लेकिन शुक्रवार को  इसमें थोड़ी कमी आई.  हालांकि व्यापारियों और विश्लेषकों का कहना है कि इस व्यापारिक सफलता ने रुपये पर छाए संकट को दूर किया है. एक स्थायी तेजी विदेशी निवेश में उछाल पर निर्भर करेगी.  4 अरब डॉलर के शेयर बेचे गौरतलब है कि विदेशी निवेशकों ने पिछले महीने 4 अरब डॉलर के स्थानीय शेयरों की नेट सेलिंग के बाद फरवरी में अब तक लगभग 1 अरब डॉलर के स्थानीय शेयर खरीदे हैं. वैश्विक बाजारों में, डॉलर सूचकांक थोड़ा नीचे 97.8 पर था, जबकि एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला असर देखने को मिला.  बता दें शेयर बाजार शुक्रवार को तेजी पर बंद हुआ. निफ्टी 50 अंक ऊपर चढ़कर 25,693 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्‍स 266 अंक चढ़कर 83580 पर क्‍लोज हुआ. निफ्टी बैंक भी 56 अंक चढ़कर क्‍लोज हुआ. 

T20 वर्ल्ड कप में आज तीन रोमांचक मुकाबले, भारत-अमेरिका की भिड़ंत भी होगी

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी (शनिवार) से हो रही है.  ये टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की सहमेजबानी में खेला जाना है. टूर्नामेंट में इस बार 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं, लेकिन खिलाड़ियों से ज्यादा चर्चा ऑफ-फील्ड राजनीति और ड्रामे की रही है. डिफेंडिंग चैम्पियन और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम इंडिया को खिताब का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. हालांकि टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े विवादों ने माहौल गरमा दिया है. बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं और तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान के IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) कॉन्ट्रैक्ट विवाद को लेकर भारत में खेलने से इनकार कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस फैसले को सही बताया. इस विश्व कप में पहले दिन कुल तीन मुकाबले खेले जाएंगे. उद्घाटन मुकाबला भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजे से पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स में खेला जाएगा. ये दोनों टीमें ग्रुप-ए में हैं. फिर दूसरा मुकाबला वेस्टइंडीज और स्कॉटलैंड के बीच दोपहर तीन बजे से कोलकाता के ईडन गार्डन्स में होगा. वेस्टइंडीज और स्कॉटलैंड को ग्रुप-सी में रखा गया है. इसके बाद शाम 7 बजे से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ग्रुप-ए का मुकाबला होगा, जिसपर फैन्स की निगाहें हैं. भारत सबसे संतुलित टीम दिख रही मैदान पर नजर डालें तो टीम इंडिया सबसे संतुलित और मजबूत दिखाई देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को हराने के लिए किसी टीम को असाधारण प्रदर्शन करना होगा या फिर भारत को खुद बड़ी गलती करनी पड़ेगी. अगर भारत यह वर्ल्ड कप जीतता है तो इसे सामान्य माना जाएगा, लेकिन हार बड़ी उलटफेर साबित होगी. अन्य दावेदार टीमों में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड और श्रीलंका शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी मजबूत है लेकिन मुख्य तेज गेंदबाजों की कमी दिख सकती है. इंग्लैंड की बल्लेबाजी बेहद आक्रामक है, जबकि साउथ अफ्रीका की गेंदबाजी दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जा रही है. न्यूजीलैंड उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में ढल चुका है और श्रीलंका घरेलू मैदान का फायदा उठा सकता है। एसोसिएट टीमों में नेपाल सबसे ज्यादा चर्चा में है. दीपेंद्र सिंह ऐरी पर सबकी नजरें रहेंगी, जिन्होंने 9 गेंदों में अर्धशतक का विश्व रिकॉर्ड बनाया हुआ है. वहीं यूएसए और इटली जैसी टीमें भी इस बार दिलचस्प कहानियां लेकर आई हैं. कुल मिलाकर, विवादों और राजनीतिक तनाव के बीच शुरू हो रहा यह टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट के रोमांच के साथ-साथ ऑफ-फील्ड ड्रामे के लिए भी यादगार रहने वाला है. टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अक्षर पटेल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, संजू सैमसन (विकेटकीपर), कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर अर्शदीप सिंह, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज और ईशान किशन (विकेटकीपर). टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पहले दिन के मैच 07 फरवरी. 11:00 AM. पाकिस्तान vs नीदरलैंड्स. SSC, कोलंबो 07 फरवरी. 3:00 PM. वेस्टइंडीज vs बांग्लादेश. कोलकाता 07 फरवरी. 7:00 PM. भारत vs USA. मुंबई

भारत पर 18% टैरिफ का असर: ट्रंप प्रशासन ने निर्धारित की डेडलाइन

 नई दिल्ली भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है. अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ को खत्म कर दिया है. व्हाइट हाउस की ओर से जारी कार्यकारी आदेश के मुताबिक संशोधित 18 प्रतिशत टैरिफ व्यवस्था 7 फरवरी 2026 से लागू होगी. यह आदेश भारतीय समयानुसार आज सुबह 10:30 बजे से प्रभावी होगा. इसके बाद भारत से अमेरिका में आयात किए जाने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त एड-वेलोरम ड्यूटी लागू नहीं होगी. व्हाइट हाउस के कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत आयात शुल्क अब खत्म कर दिया गया है. इसके साथ ही अमेरिका की आधिकारिक टैरिफ सूची में शामिल भारत से जुड़े विशेष कोड और प्रावधान भी हटा दिए गए हैं, जिनके तहत यह अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा था. यह आदेश उन सभी वस्तुओं पर लागू होगा, जो 7 फरवरी 2026 को या उसके बाद अमेरिका में खपत के लिए पहुंचेंगी या वेयरहाउस से निकाली जाएंगी. यानी इस तारीख के बाद भारत से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैक्स नहीं लिया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि 7 फरवरी की सुबह 10:30 बजे के बाद जो भी भारतीय सामान अमेरिका में आधिकारिक तौर पर एंट्री करेगा या अमेरिकी वेयरहाउस से बिक्री या इस्तेमाल के लिए बाहर निकाला जाएगा, उस पर सिर्फ सामान्य आयात शुल्क लगेगा, जो करीब 18% है. अतिरिक्त 25% टैक्स अब नहीं लिया जाएगा. इसके लिए बनाए गए खास टैरिफ कोड भी अमेरिकी टैरिफ लिस्ट से हटा दिए गए हैं. सरल शब्दों में कहें तो इस समय के बाद आने वाली या क्लियर होने वाली खेपों पर अब पेनल्टी टैक्स नहीं लगेगा, सिर्फ सामान्य ड्यूटी ही देनी होगी. जो खेपें पहले ही पहुंच चुकी हैं या रास्ते में हैं, या वेयरहाउस में हैं और जिन पर 25% अतिरिक्त टैक्स वसूला जा चुका है, उनके लिए भी राहत दी गई है. आदेश में साफ कहा गया है कि अगर अमेरिकी कस्टम्स ने पहले से 25% अतिरिक्त टैक्स वसूला है तो जरूरत पड़ने पर वह राशि वापस की जाएगी. यह रिफंड अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की सामान्य प्रक्रिया के तहत होगा. आमतौर पर अमेरिकी आयातक कंपनी या उसका कस्टम्स एजेंट इसके लिए आवेदन करता है. इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत दस्तावेज जमा करने होते हैं. अधिकतर मामलों में रिफंड बिना ब्याज के और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किया जाएगा. हालांकि यह रिफंड अपने आप सभी को नहीं मिलेगा. जिन कंपनियों पर इसका असर पड़ा है, उन्हें कस्टम्स के तय नियमों के मुताबिक आवेदन करना होगा. पीएम मोदी ने ट्रेड डील पर क्या कहा… इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क का स्वागत किया और इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बड़ा बढ़ावा बताया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनी है और इसके लिए उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद किया. पीएम मोदी ने कहा कि यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे, साझेदारी और गतिशीलता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा और भारतीय किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप नवोन्मेषकों, मछुआरों समेत कई वर्गों के लिए नए अवसर खोलेगा. पीएम मोदी ने कहा कि इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार होंगी और वैश्विक विकास को गति मिलेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारत भविष्य-केंद्रित वैश्विक साझेदारियों पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है. भारत-अमेरिका व्यापार को मिलेगा फायदा विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूती मिलेगी. भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में राहत मिलेगी और कई सेक्टरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है.

15,000 करोड़ का निवेश और हजारों नौकरियां, महिंद्रा का ‘सुपर प्लांट’ बनेगा इस राज्य में

मुंबई  महाराष्ट्र के लिए महिंद्रा ने एक बड़ा ऐलान किया है. महिंद्रा एंड महिंद्रा अब महाराष्ट्र में अपने भविष्य की मजबूत नींव रखने जा रही है. कंपनी ने नागपुर में कार और ट्रैक्टर के लिए अपनी अब तक की सबसे बड़ी इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्ट पर अगले दस साल में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. महिंद्रा का ये इन्वेस्टमेंट विदर्भ इलाके की तस्वीर बदल देगा. क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. महिंद्रा ने इस तगड़े इन्वेस्टमेंट का ऐलान एडवांटेज विदर्भ (Advantage Vidarbha) कार्यक्रम के दौरान की. यह तीन दिन का आयोजन विदर्भ को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में पेश करने के लिए किया गया था. इस मौके पर कंपनी ने साफ किया कि यह प्लांट न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए अहम साबित होगा. 1500 एकड़ में बनेगा मेगा प्लांट नागपुर के पास बनने वाला यह नया प्लांट करीब 1,500 एकड़ में फैला होगा. इसके साथ ही संभाजीनगर में 150 एकड़ का सप्लायर पार्क भी तैयार किया जाएगा. साल 2028 से इस फैक्ट्री में ऑपरेशन शुरू होने की योजना है. यहां हर साल 5 लाख से ज्यादा कारें और करीब 1 लाख ट्रैक्टर बनेंगे. इसके बाद यह महिंद्रा की भारत में सबसे बड़ी इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बन जाएगी. इस प्लांट में महिंद्रा के नेक्स्ट जेनरेशन के वाहन प्लेटफॉर्म जैसे NU_IQ आर्किटेक्चर को सपोर्ट किया जाएगा. यहां पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रोडक्शन किया जाएगा. ये गाड़ियां घरेलू बाजार के साथ साथ दुनिया भर के बाजारों के लिए भी बनाई जाएंगी. इसके लिए फैक्ट्री में आधुनिक ऑटोमेशन और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे. महाराष्ट्र में और जमीन खरीदेगी कंपनी महिंद्रा यहीं नहीं रुकेगी. कंपनी इगतपुरी नासिक एरिया में भी जमीन खरीदेगी, ताकि मौजूदा प्रोडक्ट और इंजन कैपेसिटी को बढ़ाया जा सके. साथ ही एडवांस टेक्नोलॉजी बिजनेस को भी मजबूत किया जाएगा. कुल मिलाकर महिंद्रा महाराष्ट्र में तीन जगहों पर 2,000 एकड़ से ज्यादा जमीन लेने की योजना बना रही है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि, “महिंद्रा का यह निवेश राज्य के मजबूत औद्योगिक माहौल और प्रगतिशील नीतियों पर भरोसे का संकेत है. इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे और विदर्भ व आसपास के इलाकों का तेजी से विकास होगा. साथ ही महाराष्ट्र देश के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और मजबूत होगा.” महिंद्रा के ऑटो और फार्म सेक्टर के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ राजेश जेजुरिकर ने कहा कि, “यह प्लांट कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग जर्नी में एक बड़ा कदम है. यह फैसिलिटी मॉडर्न कार और ट्रैक्टर बनाने के लिए तैयार की जा रही है, जहां बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा. उन्होंने कहा कि यह निवेश मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के टार्गेट को और मजबूत करेगा.

सोना और चांदी क्यों हैं इंसान के फेवरेट मेटल्स? जानें साइंस से इसकी वजह

 नई दिल्ली दुनिया में करीब 95 ज्ञात धातुएं (Metals) हैं – लोहा, तांबा, एल्यूमिनियम से लेकर दुर्लभ प्लैटिनम तक. लेकिन हजारों साल से हर सभ्यता में सिर्फ सोना और चांदी ही मूल्य, सौंदर्य और धन के प्रतीक बने रहे हैं. मिस्र, रोम, भारत, चीन – सभी जगहों पर इन्हें देवता की तरह पूजा गया. गहने बनाए गए. सिक्के ढाले गए. आज भी शादियों में सोना-चांदी की मांग सबसे ज्यादा है. निवेश के रूप में ये सबसे सुरक्षित माने जाते हैं. आखिर इन दो धातुओं में ऐसा क्या खास है जो बाकी 93 धातुओं में नहीं? रासायनिक स्थिरता: ये कभी खराब नहीं होते सबसे बड़ी वजह विज्ञान में छिपी है. सोना और चांदी नोबल मेटल्स कहलाते हैं – यानी ये हवा, पानी, एसिड या नमी से आसानी से प्रतिक्रिया नहीं करते. सोना सबसे ज्यादा निष्क्रिय (इनर्ट) धातु है. यह ऑक्सीजन से नहीं जुड़ता. जंग नहीं लगता. हजारों साल तक चमक बरकरार रहती है. चांदी थोड़ी प्रतिक्रिया करती है. सल्फर से काली पड़ जाती है. लेकिन अन्य धातुओं की तुलना में बहुत कम. अन्य धातु जैसे– लोहा हवा लगते ही जंग लग जाता है. तांबा हरा पड़ जाता है. एल्यूमिनियम पर ऑक्साइड की परत बन जाती है. इसलिए प्राचीन काल में जब लोग कब्रों में सोने-चांदी के गहने दफनाते थे, तो हजारों साल बाद भी वे वैसा ही चमकदार मिलते था. यह स्थिरता ही इन्हें अमर धातु बनाती है. प्रकृति में शुद्ध रूप में मिलना प्राचीन मनुष्य को धातु गलाने (स्मेल्टिंग) की तकनीक नहीं थी. ज्यादातर धातुएं अयस्क (ऑक्साइड या सल्फाइड) के रूप में मिलती हैं, जिन्हें निकालने के लिए उच्च तापमान चाहिए. लेकिन… सोना और चांदी अक्सर शुद्ध रूप (नेटिव फॉर्म) में नदियों, चट्टानों में छोटे-छोटे दाने या टुकड़े के रूप में मिल जाते थे. इन्हें बस उठाकर हथौड़े से पीटकर आकार दिया जा सकता था. आज भी इतनी बड़ी मात्रा में इस्तेमाल क्यों?     गहने: भारत में सालाना 600-800 टन सोना सिर्फ गहनों में इस्तेमाल होता है. सौंदर्य और सामाजिक प्रतिष्ठा की वजह से.      निवेश: सोना सुरक्षित निवेश है – महंगाई और संकट में मूल्य बढ़ता है. औद्योगिक उपयोग…     चांदी: इलेक्ट्रॉनिक्स (सबसे अच्छी चालक), फोटोग्राफी, दर्पण, बैटरी.     सोना: इलेक्ट्रॉनिक्स (कनेक्टर), दंत चिकित्सा, अंतरिक्ष यान.     सांस्कृतिक महत्व: शादी-ब्याह, त्योहारों में परंपरा. विज्ञान और मानव स्वभाव का परफेक्ट मेल सोना और चांदी प्रकृति की ऐसी धातुएं हैं जो दुर्लभ, स्थिरता, सौंदर्य और इस्तेमाल होने का सही बैलेंस रखती हैं. अन्य धातुएं या तो बहुत आम हैं (जैसे लोहा) या बहुत प्रतिक्रियाशील या बहुत देर से खोजी गईं (जैसे प्लैटिनम). हजारों साल पहले मनुष्य ने जो चुना, वही आज भी पसंद है – क्योंकि विज्ञान और मानव भावनाएं दोनों इनके साथ में हैं. अगली बार जब आप सोने का गहना पहनें, तो याद रखिए – यह सिर्फ धातु नहीं, विज्ञान और इतिहास की जीती-जागती कहानी है. इसीलिए 5000-6000 ईसा पूर्व से सोने का इस्तेमाल शुरू हुआ. सबसे पुराना प्रमाण बुल्गारिया की वार्ना संस्कृति (4600 ई.पू.) से मिला है. चांदी का इस्तेमाल लगभग 4000 ई.पू. से शुरू हुआ. भौतिक गुण: सुंदरता और काम करने में आसानी     दुर्लभ लेकिन बहुत कम भी नहीं: दोनों पर्याप्त दुर्लभ हैं कि मूल्यवान लगें, लेकिन इतने कम नहीं कि मिलना असंभव हो.     चमक और रंग: सोना की पीली चमक और चांदी की सफेद चमक आंखों को बहुत आकर्षक लगती है.      मैलिबिलिटी और डक्टिलिटी: सोने की एक ग्राम को 1 वर्ग मीटर पतली शीट (गोल्ड लीफ) में पीटा जा सकता है. चांदी सबसे अच्छी बिजली और गर्मी की चालक है. ये आसानी से पिघलते नहीं (सोने का गलनांक 1064°C, चांदी का 962°C), इसलिए गहने बनाने में सुरक्षित. इतिहास में मुद्रा और मूल्य का प्रतीक क्यों बने?     टिकाऊ: खराब नहीं होते, इसलिए धन के रूप में जमा करने के बेस्ट है.       छोटे-छोटे टुकड़े किए जा सकते हैं.     पहचानने में आसान: नकली बनाना मुश्किल.      पूरी दुनिया में स्वीकृति: हर संस्कृति में मूल्यवान.     लिदिया (आधुनिक तुर्की) में 600 ई.पू. पहला सोने-चांदी का सिक्का बना. भारत में भी प्राचीन काल से रूप्य (चांदी) और हिरण्य (सोना) मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होते थे.  

बंगाल में यूपी के 54 भाजपाई संभालेंगे चुनावी मोर्चा, 47 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई

कलकत्ता  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से मंत्रियों, संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं और रणनीतिकारों की एक जंबो टीम बंगाल भेजी है, ताकि चुनावी जमीन मजबूत की जा सके। भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत बंगाल को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है। इनमें से तीन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सौंपी गई है। इनके साथ संबंधित राज्यों के संगठन महामंत्री भी तैनात किए गए हैं।  47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को पार्टी ने 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को सौंपा है। बंगाल का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और देशभर की निगाहें यहां के नतीजों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रह चुके जेपीएस राठौर को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए अक्टूबर में ही बंगाल भेज दिया गया था। वे कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे हैं और इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान यहां सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए अहम सीटों पर काम कर चुके हैं। राज्य के 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं के पास है। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक शामिल हैं। सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां की सात विधानसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का कोई विधायक नहीं है, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा सांसद जीत दर्ज कर चुके हैं।पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण की बिहाला सीट, उपेंद्र तिवारी को हावड़ा टाउन की संकरेल सीट और आनंद शुक्ला को हाबरा सीट का दायित्व दिया गया है। वहीं मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज बैरकपुर जिले की जगतदल विधानसभा सीट और कानपुर से एमएलसी अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इसके अतिरिक्त जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है। 

क्या बांग्लादेश को अमेरिका का गुलाम बनाएंगे यूनुस? चुनाव से पहले सीक्रेट डील ने बढ़ाई चिंताएं

ढाका  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की तब पड़ोसी बांग्लादेश में चिंताएं बढ़ गईं क्योंकि बांग्लादेश भी अमेरिका के साथ एक समझौता करने जा रहा है. ये चिंता इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह सीक्रेट रखा गया है. प्रस्तावित समझौते को लेकर सवाल ऐसे भी उठ रहे हैं कि क्या गैर-निर्वाचित मोहम्मद यूनुस प्रशासन के पास ऐसा समझौता करने का जनादेश भी है या नहीं. यह घटनाक्रम उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया गया है कि 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने वाली इस्लामी साजिश के साथ-साथ यूनुस प्रशासन को अमेरिकी डीप स्टेट का समर्थन मिला था. अमेरिका के साथ समझौता सीक्रेट रखा गया है जिसे लेकर बांग्लादेश के निर्यातक संगठनों और खासकर उसके अहम टेक्सटाइल सेक्टर के हितधारकों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि समझौते की शर्तें बांग्लादेशी निर्यात को और नुकसान पहुंचा सकती हैं. बांग्लादेश के कुल निर्यात का 90 फीसदी से ज्यादा रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स का है. ट्रंप के टैरिफ की वजह से बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा है और अगर अमेरिका के साथ कोई सीक्रेट समझौता हो जाता है तो बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले क्षेत्रों को यह प्रभावित कर सकता है. इससे बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है. समझौते की वैधता पर उठ रहे सवाल समझौते की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील बांग्लादेश में चुनाव से महज तीन दिन पहले 9 फरवरी को हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि चुनाव से ठीक पहले और अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यूनुस प्रशासन यह समझौता क्यों कर रहा है. बांग्लादेशी अखबार ‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यूनुस प्रशासन ने अमेरिका के साथ एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे, जिसके चलते समझौते के ड्राफ्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं है. बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और बुद्धिजीवी अनु मुहम्मद ने कहा है कि यूनुस प्रशासन की यह जल्दबाजी और झोल-झाल सिर्फ अमेरिका के साथ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि आम चुनाव से ठीक पहले जल्दबाजी में बंदरगाह लीज पर दिया जा रहा, हथियार आयात किए जा रहे और अमेरिका के साथ ‘अधीनता’ वाले समझौते साइन किए जा रहे हैं. अनु मुहम्मद ने सवाल किया कि 9 फरवरी के बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते से आखिर किसके हित सध रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये समझौते पूरी तरह गैर-पारदर्शी, अव्यावहारिक और अनियमित तरीके से आगे बढ़ाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी ‘लॉबिस्ट’ सलाहकार बनकर यूनुस प्रशासन के भीतर बैठाए गए हैं, जो इन समझौतों को किसी भी कीमत पर कराना चाहते हैं. यह भी आरोप हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से ही अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. ट्रेड डील को लेकर चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब रिपोर्टें हैं कि अमेरिकी डिप्लोमैट्स जमात के साथ बातचीत कर रहे हैं. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में जमात को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. कोलकाता में एक वर्चुअल प्रोग्राम को संबोधित करते हुए 2 फरवरी को शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश एक ‘फर्जी’ चुनाव की ओर बढ़ रहा है, जिसका मकसद विदेशी हितों के प्रति वफादार कमजोर सरकार बनाना है. उन्होंने यूनुस शासन पर इस्लामवादियों के समर्थन से चलने और अपारदर्शी तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया. रोचक बात ये हैं कि 12 फरवरी को बांग्लादेश सिर्फ नई सरकार के लिए वोटिंग नहीं करेगा, बल्कि जुलाई चार्टर पर भी मुहर लगाएगा या उसे खारिज करेगा. इस चार्टर को खुद मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है और ‘यस वोट’ के पक्ष में कैंपेन चला रही है. 2024 के हसीना-विरोधी प्रदर्शनों के बाद तैयार किया गया यह चार्टर संविधान में संशोधन करेगा. माना जा रहा है कि यह संशोधन अंतरिम शासन की तरफ से की गई कथित गड़बड़ियों का भी बचाव करेगा. जल्दबाजी में समझौता क्यों कराना चाहती है यूनुस सरकार? अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया, तो बांग्लादेश पर 37 फीसदी का भारी टैरिफ लगा. जून 2025 में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन किया, जिससे टैरिफ पर बातचीत सीक्रेट हो गई. जुलाई में अमेरिका ने अचानक टैरिफ घटाकर 35 फीसदी और अगस्त में 20 फीसदी कर दिया. ढाका स्थित ‘डेली सन’ के मुताबिक, बांग्लादेश के वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने कहा है कि अमेरिका से 9 फरवरी की तारीख मिली है और उसी दिन समझौते पर दस्तखत होंगे. सबसे ज्यादा चिंता निर्यातकों, खासकर गारमेंट सेक्टर में है. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट इनामुल हक खान ने कहा कि बिना किसी परामर्श के यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली है. उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले समझौते पर दस्तखत करना ठीक नहीं है, क्योंकि इसके दूरगामी असर होंगे. यूनुस प्रशासन के जाने के कुछ ही दिनों बाद यह समझौता लागू कराने की जिम्मेदारी एक निर्वाचित सरकार पर आ जाएगी, जिसका इस समझौते की बातचीत में कोई रोल नहीं रहा. सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के वरिष्ठ फेलो देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि सवाल यह भी है कि क्या आने वाली सरकार के हाथ पहले से ही बांधे जा रहे हैं. डर क्यों फैला रहा है यह समझौता? समझौते की शर्तें किसी को नहीं पता. नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट के चलते समझौते के बाद प्रभावित होने वाले पक्ष पूरी तरह अंधेरे में हैं. चिंता सिर्फ निर्यातकों तक सीमित नहीं है, घरेलू बाजार पर निर्भर कारोबारी भी डरे हुए हैं. ढाका चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष तस्कीन अहमद ने कहा कि ड्राफ्ट की जानकारी न होने से इसके असर का आकलन करना मुश्किल है और इसे चुनाव से पहले साइन करने से बचा जा सकता था. ये चिंताएं जायज भी हैं क्योंकि शेख हसीना की सरकार को हटाने और यूनुस को सत्ता में लाने में अमेरिका पर संलिप्तता के आरोप लगे थे. बांग्लादेशी पत्रकार साहिदुल हसन खोकन के मुताबिक, हसीना को हटाने में अमेरिका सीधे तौर पर भले ही शामिल … Read more

बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का ब्याह, कन्या विवाह महोत्सव में नेपाल की युवती भी बनेगी दुल्हन

खजुराहो  छतरपुर के बागेश्वर धाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी बहुत ही शानदार कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है. इस बार का महोत्सव काफी खास होने वाला है, क्योंकि यह महोत्सव सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है. नेपाल की भी एक बेटी की शादी धाम में होगी.  इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री दी. खजुराहो के बागेश्वर धाम में 300 जोड़ों की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। समारोह 12 से 15 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन अलग-अलग रस्में होंगी। आने वाले मेहमानों की खातिरदारी भी की जाएगी। दहेज में सभी जोड़ों को 90 लाख की FD, सोने-चांदी समेत गृहस्थी का सामान दी जयेगा।  बागेश्वर धाम में सातवीं बार आयोजन हो रहा है। इस बार 13 राज्यों से 1500 से अधिक आवेदन मिले। 60 जिलों की 600 सदस्यीय टीम ने एक महीने तक सर्वे किया। 300 जोड़ों को शादी के लिए बुलाया गया। इसमें एक जोड़ा नेपाल का भी है। 30,000 रुपये की जॉइंट एफडी बाबा बागेश्वर ने सभी ससुराल वालों को सलाह दी कि वे अपनी बहुओं को अपनी बेटियों जैसा मानें और यह पक्का करें कि किसी भी तरह की कोई शिकायत न हो. उन्होंने कुछ समधियों को बुलाया, उनके साथ मज़ाक किया और उनके चेहरों पर गुलाल लगाया. उन्होंने ऐलान किया कि इस बार दूल्हा और दुल्हन के नाम पर 30,000 रुपये की जॉइंट फिक्स्ड डिपॉज़िट खोली जाएगी. यह फिक्स्ड डिपॉज़िट पांच साल से पहले नहीं तोड़ी जा सकती. उन्होंने बताया कि शादियों के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी रही. सर्वे टीम ने 500 से ज़्यादा लड़कियों में से 300  लड़कियों को चुना, जिसमें उन लड़कियों को प्राथमिकता दी गई जो बहुत गरीब, अनाथ या बेसहारा थीं. धीरेंद्र शास्त्री बोले– ये अब बालाजी की बेटियां आयोजन को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि “ये अब बालाजी की बेटियां हो गई हैं। इनका विवाह धूमधाम से किया जाएगा। देशभर के संत, महात्मा, राजपीठ, व्यास पीठ के लोगों के सानिध्य में बेटियां विवाह बंधन में बंधेंगी। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम ने 600 से अधिक अति निर्धन, अनाथ, मातृहीन और पितृहीन बेटियों का चयन किया था। इनमें से वर्तमान संसाधनों को देखते हुए 300 बेटियों को विवाह के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि पात्र बेटियों की संख्या अधिक थी, लेकिन बागेश्वर धाम की वर्तमान सामर्थ्य के अनुसार ही चयन किया गया है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के ऑफिस में इन दिनों खासी हलचल है। कर्मचारी देर रात तक काम में व्यस्त हैं। सभी की टेबल पर शादी के निमंत्रण कार्ड का ढेर है। ये निमंत्रण पत्र VVIP मेहमानों को भेजे जाने हैं। बीच-बीच में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे कमल अवस्थी कार्ड उठाकर चेक कर ले रहे हैं। वो इसलिए कि नाम और पता सही है या नहीं। उसे वे अपने आईपैड में दर्ज लिस्ट से भी मिलान कर रहे हैं। कोशिश है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। दूसरी तरफ भंडार में दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले उपहार के ढेर लगे हैं। सेवादार सावधानी से पैकेट बना रहे हैं। कमल अवस्थी कहते हैं कि सभी अरेंजमेंट पूरे हो गए हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले ही हर जोड़े को बुलाकर उन्हें कपड़े और बाकी सामान दे दिया है। सभी को 13 फरवरी की सुबह 8 बजे बुलाया है। लगन मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन पंडाल अलग-अलग होंगे। तैयारियां तो पूरी हैं, फिर भी बहुत काम बाकी है। उस दिन पूरे बागेश्वर धाम को सजाया जाएगा। कमल अवस्थी ने नेपाल की रहने वाली अस्मिता सुनार से फोन पर हमारी बात कराई। अस्मिता भी नेपाल के युवक ये यहां सात फेरे लेने वाली हैं। इसके अलावा, मध्यप्रदेश की दो लड़कियाें से भी बात की। नेपाल की अस्मिता बोली- चार साल में आया नंबर अस्मिता ने फोन पर बताया कि परिवार की माली हालत कभी ठीक नहीं रही। मां दिल्ली में घर-घर जाकर बर्तन साफ करती हैं। पिता यहीं मजदूरी करते हैं। भाई केरल में मजदूरी करता है। एक बार मेरी तबीयत खराब हुई। पहले यहां फिर दिल्ली में डॉक्टर्स को दिखाया। फायदा नहीं हो रहा था। डॉक्टर बोलते थे कि दिमाग खराब है, पागल हो गई हूं। लोगों से सुना, तो बागेश्वरधाम पहुंचे। अब मैं एकदम ठीक हूं। बालाजी भगवान ने मुझे ठीक कर दिया। हमने यूट्यूब पर बागेश्वर धाम में हो रही शादियों के बारे में देखा था। मां पिछले चार साल से यहां मेरी शादी के लिए आवेदन कर रही थी, लेकिन इस बार नंबर लगा है। खुशी है कि मुझे गुरुजी से मिलने का मौका मिलेगा। अब मेरी शादी मेज बहादुर से हो रही है, वो मेरे ही देश के कंचनपुर के रहने वाले हैं। उनके परिवार की हालत भी हमारे जैसे ही हैं। पढ़ाई के दौरान हमारी मुलाकात हुई थी। मैं और उनकी बहन साथ पढ़ते थे। एक बार हम माउंटेन घूमने गए। वहां बात हुई। धीरे-धीरे प्यार हो गया। फिर हम लोगों ने अपने-अपने घर बताया, तो घरवाले बोले- इतना पैसा नहीं है कि अभी शादी कर दें। इसके बाद मां चार साल तक लगातार आवेदन करती रहीं। इस बार नंबर आ गया। फोन पर मिली सूचना, शादी के लिए चुना गया विदिशा जिले की गंजबासौदा के लाल पठार इलाके में रहने वाली सपना अहिरवार के पिता नहीं हैं। मां बीमार रहती हैं और भाई छोटा है। घर में दो वक्त खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी होती है। सपना कहती हैं- बीमार मां को हमेशा मेरी शादी की चिंता रहती थी। जब बागेश्वर धाम में होने वाली सामूहिक विवाह समारोह के बारे में पता चला, तो मन में आस सी जागी। पहले भी यहां आ चुकी हूं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने परिवार की मदद की। उन्हें अपने पिता जैसा मानती हूं। आवेदन के बाद यहां से घर पहुंचे थे। कुछ दिन बाद फोन पर सूचना मिली कि मुझे यहां शादी के लिए चुना गया है। उन्होंने शादी का लहंगा, सैंडल और होने वाले पति को शेरवानी, पगड़ी, जूते और माला दी है। उस दिन कपड़े पहनकर यहां आना है। गरीब हूं, पर आज इसका अहसास नहीं हो रहा है। बागेश्वरधाम से शादी होना सपने की तरह बागेश्वरधाम … Read more

हिमालय से आ सकती है ‘सुनामी’, IIT रुड़की का चेतावनी अलर्ट, 93 लाख लोग होंगे खतरे में

नई दिल्ली  हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच एक ऐसी तबाही आकार ले रही है, जो सुनामी से कम खतरनाक नहीं है. IIT रुड़की के रिसर्चर्स ने एक चौंकाने वाली स्टडी में बताया है कि हिमालय के पहाड़ों पर बनी ग्लेशियल झीलों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में छपी रवींद्र कुमार और सौरभ विजय की इस रिसर्च के अनुसार, हाई माउंटेन एशिया (HMA) क्षेत्र में 2016 से 2024 के बीच इन झीलों के क्षेत्रफल में 5.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. वर्तमान में करीब 31,000 से ज्यादा ऐसी झीलें हैं, जो 93 लाख लोगों के लिए सीधा खतरा बन गई हैं. क्या है ‘हिमालयी सुनामी’ या GLOF?     जब पहाड़ों पर स्थित ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनका पानी खाली जगहों पर जमा होकर झीलें बना लेता है. इन झीलों के चारों ओर पक्के बांध नहीं होते, बल्कि ये ढीली चट्टानों, बर्फ और मलबे (Moraine) के प्राकृतिक बांधों से घिरी होती हैं.     जब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पानी का दबाव बढ़ता है या कोई एवलांच (बर्फ का तूफान) इन झीलों में गिरता है, तो ये बांध गुब्बारे की तरह फट जाते हैं. इसे ही ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) या हिमालयी सुनामी कहा जाता है.     केदारनाथ की 2013 वाली त्रासदी और 2023 में सिक्किम में आई बाढ़ इसी तरह के खतरे के बड़े उदाहरण हैं. ये झीलें इतनी ऊंचाई पर स्थित हैं कि जब इनका पानी नीचे गिरता है, तो वह जबरदस्त रफ्तार पकड़ लेता है.     इसमें सिर्फ पानी नहीं होता, बल्कि अपने साथ बोल्डर, मिट्टी और पेड़ों को बहाकर लाने वाला एक ‘चलता-फिरता पहाड़’ बन जाता है, जो रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देता है. वैज्ञानिकों ने कैसे पहचाना इन 31,000 टाइम बमों को? हजारों फीट की ऊंचाई और बेहद कठिन रास्तों के कारण इन झीलों की निगरानी करना नामुमकिन जैसा था. लेकिन IIT रुड़की के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. उन्होंने नासा (NASA) और यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के ‘लैंडसैट 8’ के हाई-रेजोल्यूशन डेटा का उपयोग किया. इसके साथ ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के ‘सेंटिनल 1 और 2’ और कोपरनिकस डिजिटल एलिवेशन मॉडल की मदद ली गई. अमेरिका के नेशनल रिकॉनेस्सेंस ऑफिस द्वारा 3 जनवरी 1976 को ली गई इस तस्वीर में माउंट एवरेस्ट बीच में दिख रहा है. (AP) इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके राडार और ऑप्टिकल सेंसर बादलों के पार भी देख सकते हैं. इसकी मदद से वैज्ञानिकों ने 20,000 से 1,00,000 वर्ग मीटर तक की छोटी झीलों की भी सटीक पहचान की है. अब इस तकनीक से ‘तीसरे ध्रुव’ (Third Pole) कहे जाने वाले इस पूरे इलाके की रूटीन मॉनिटरिंग मुमकिन हो गई है. किन इलाकों में सबसे तेजी से फैल रही हैं झीलें? स्टडी के मुताबिक, झीलों के बढ़ने की रफ्तार हर इलाके में अलग-अलग है: किलियन शान (Qilian Shan): इस क्षेत्र में झीलों के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. पूर्वी हिमालय: यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यहां इन झीलों की संख्या सबसे अधिक है. भारत की स्थिति: भारत में करीब 30 लाख लोग सीधे तौर पर इन अस्थिर झीलों के नीचे बसे हुए हैं. बढ़ती गर्मी और बदलते मानसून की वजह से ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं. जहां पहले बर्फ हुआ करती थी, अब वहां गहरे और अस्थिर पानी के तालाब बन गए हैं. 93 लाख लोगों पर मंडराता मौत का साया दुनिया भर में ग्लेशियर की बाढ़ से जितने लोगों को खतरा है, उनमें से 62 प्रतिशत लोग अकेले हाई माउंटेन एशिया क्षेत्र में रहते हैं. हिमालय के इस हिस्से में रहने वाले कई परिवार झीलों से महज 10 किलोमीटर के दायरे में बसे हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई झील फटती है, तो लोगों को चेतावनी देने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए समय बहुत ही कम मिलेगा. ये झीलें ‘टिकिंग टाइम बम’ की तरह हैं, जिनकी दीवारें मिट्टी और बर्फ की बनी हैं. अगर ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार यही रही, तो आने वाले समय में केदारनाथ जैसे हादसों का खतरा और बढ़ सकता है.

PM मोदी का मलेशिया दौरा: भारत के लिए सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ सेक्टर में होगा बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल से दो दिन के लिए (7-8 फरवरी 2026) मलेशिया की यात्रा पर जा रहे हैं. यह यात्रा दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए दरवाजे खोलने का काम करेगी. हाल ही में यूनियन बजट 2026 में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा के बाद यह यात्रा और भी खास हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी, नौकरियां बढ़ेंगी और चीन पर निर्भरता कम होगी. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) कई बार कह चुके हैं कि कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से सेल्फ-रिलायंस बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता कम होगी. मलेशिया के साथ टेक्नोलॉजी शेयरिंग से यह आसान होगा. बता दें कि वैष्णव क्रिटिकल मिनरल्स पर काम कर रहे हैं. बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (Benchmark Mineral Intelligence) में रेयर अर्थ एक्सपर्ट और रिसर्च मैनेजर नेहा मुखर्जी (Neha Mukherjee) ने भारत की नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की तारीफ की है और कहा है कि मलेशिया जैसे पार्टनर्स से डाइवर्सिफिकेशन तेज होगा, जिससे चीन पर से निर्भरता घटेगी. कितना महत्वपूर्ण है मलेशिया? पीएम मोदी और मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम के बीच बातचीत के केंद्र में अन्य मुद्दों के साथ सेमीकंडक्टर पर गहरा सहयोग भी होगा. मलेशिया सेमीकंडक्टर का बड़ा हब है, जहां दुनिया की 12-15 फीसदी REE प्रोसेसिंग होती है. भारत यहां से तकनीक और निवेश ले सकता है. बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 40,000 करोड़ रुपये का ऐलान हुआ है, जो इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग पर फोकस करेगा. इससे भारत में सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटेरियल और फुल स्टैक आईपी डेवलप होगा. मलेशिया रेयर अर्थ पर भी बड़ा जोर देता है. मलेशिया में लिनास प्लांट दुनिया का बड़ा REE प्रोसेसर है. 2025 में लिनास में पहली बार भारी REE (जैसे डिस्प्रोसियम ऑक्साइड) का कमर्शियल उत्पादन शुरू किया, जो चीन के बाहर पहला ऐसा प्लांट है. भारत के आम बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिल नाडु में डेडिकेटेड REE कॉरिडोर्स बनाने का प्लान है. यह माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा. लक्ष्य है 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष REE परमानेंट मैग्नेट बनाना, जो EV, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस में इस्तेमाल होंगे. गौरतलब है कि यह भारत सरकार की एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका नाम REPM है. इसे नवंबर 2025 में कैबिनेट ने मंजूरी दी थी, और कुल ₹7,280 करोड़ का बजट रखा गया है. भारत को कितना फायदा?     सप्लाई चेन मजबूत: मलेशिया से REE और सेमीकंडक्टर पार्ट्स आसानी से मिलेंगे. इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग स्पीड बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता 20-30 फीसदी कम हो सकती है.     निवेश और टेक्नोलॉजी: मलेशिया के साथ JV से 3 अरब डॉलर का राजस्व और 24,800 नौकरियां पैदा होंगी. सेमीकंडक्टर मार्केट 2026 तक 64 अरब डॉलर और 2030 तक 110 अरब डॉलर पहुंचेगा.     EV और क्लीन एनर्जी: REE से EV बैटरी और मोटर सस्ते होंगे. मलेशिया 2030 तक EV प्रोडक्शन 15% बढ़ाना चाहता है, जिसमें भारत मदद कर सकता है.     ट्रेड बूस्ट: दोनों देशों का व्यापार 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. MICECA समझौते की समीक्षा से निर्यात बढ़ेगा.     स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रक्षा, डिजिटल टेक और हेल्थ में सहयोग बढ़ेगा, जो भारत को ASEAN में मजबूत बनाएगा. कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ा रोल प्ले करेगी. 2030 तक REE से 3 अरब डॉलर राजस्व और 6.5 अरब डॉलर की आर्थिक ग्रोथ हो सकती है. भारत और मलेशिया में कितना व्यापार? 2025 में भारत-मलेशिया का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 18-20 अरब डॉलर के आसपास रहा. भारत मलेशिया से मुख्य रूप से पाम ऑयल (करीब 2.8-3 अरब डॉलर का), इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, कंप्यूटर हार्डवेयर और अन्य वनस्पति तेल आयात करता है. वहीं भारत मलेशिया को परिष्कृत पेट्रोलियम (रिफाइंड पेट्रोलियम, करीब 2.3 अरब डॉलर), कृषि उत्पाद जैसे बफेलो मीट, और कुछ इलेक्ट्रिकल मशीनरी निर्यात करता है. कैसे हैं दोनों देशों में ऐतिहासिक संबंध? दोनों देशों के बीच मजबूत नींव है. 2010 में MICECA (मलेशिया-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट) ने व्यापार को आसान बनाया. 2015 में संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिला, और 2024 में इसे अपग्रेड करके कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बना दिया गया. ये समझौते टैरिफ कम करने, निवेश बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता खोलते हैं. भारत-मलेशिया: भविष्य के प्लान क्या हैं? दोनों देश AITIGA (ASEAN-इंडिया ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट) की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि टैरिफ और मार्केट एक्सेस बेहतर हो. फोकस डिजिटल फाइनेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और EV जैसे हाई-टेक क्षेत्रों पर है. मलेशिया में अनुमानित 16.2 मिलियन टन रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) के रिजर्व हैं, जिनकी वैल्यू सैकड़ों अरब डॉलर है. ये रिजर्व भारत के साथ JV या टेक्नोलॉजी शेयरिंग के जरिए इस्तेमाल हो सकते हैं, खासकर REE प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग में. व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट है. क्या चुनौतियां हैं सामने? ट्रेड बैलेंस अभी असंतुलित है. मलेशिया का सरप्लस ज्यादा है, इसलिए भारत नए निर्यात सेक्टर (जैसे सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग) ढूंढ रहा है. पर्यावरणीय मुद्दे भी बड़े हैं, खासकर पाम ऑयल की खेती से जुड़े जंगल कटाई और सस्टेनेबिलिटी के सवाल. REE माइनिंग में भी पर्यावरण सुरक्षा जरूरी है, ताकि प्रदूषण न फैले. दोनों देश इन मुद्दों पर बात करके बैलेंस्ड और ग्रीन ट्रेड बढ़ाना चाहते हैं. भारत-मलेशिया में ग्लोबल कनेक्शन? मलेशिया ने अमेरिका के साथ REE सप्लाई चेन पर MoU साइन किया है. भारत भी इंडो-US ट्रेड डील और क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के जरिए काम कर रहा है. इससे REE और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन मजबूत होगी, चीन पर निर्भरता कम होगी, और दोनों देश ग्लोबल वैल्यू चेन में बेहतर पोजिशन पा सकेंगे. कुल मिलाकर, ये रिश्ते सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, एनर्जी और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का मजबूत आधार बन रहे हैं. मोदी की मलेशिया यात्रा कब है? 7-8 फरवरी 2026 को. यह उनकी तीसरी यात्रा है, जिसमें व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर बात होगी. मलेशिया से सेमीकंडक्टर में भारत को क्या फायदा? मलेशिया से टेक्नोलॉजी और निवेश मिलेगा. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से 40,000 करोड़ रुपये लगेंगे, जो जॉब्स और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा. रेयर अर्थ एलीमेंट्स क्या हैं और क्यों जरूरी? REE विशेष … Read more

वन मंत्री केदार कश्यप एवं विधायक किरण सिंह देव भी रहे उपस्थित

  रायपुर. वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव भी रहे उपस्थित स्थानीय सर्किट हाऊस में शुक्रवार की शाम उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ जब जमीनी स्तर पर उतरा, तो हितग्राहियों के चेहरे खिल उठे। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव ने विभिन्न विभागों के माध्यम से पात्र लोगों को सामग्री और सहायता राशि वितरित कर सबका साथ, सबका विकास के मंत्र को चरितार्थ किया। कार्यक्रम के दौरान सबसे भावुक और उत्साहजनक क्षण तब देखने को मिले जब समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की पहल की गई। उप मुख्यमंत्री  शर्मा, वनमंत्री  कश्यप एवं विधायक  देव ने करण नाग, संजय सांतरा और विजय मौर्य को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल सौंपी, जिससे अब उनकी जिंदगी की रफ्तार नहीं थमेगी। इसी क्रम में राकेश कुमार मिश्रा को कृत्रिम पैर और विपिन सिंह को श्रवण यंत्र प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में सम्मान के साथ जीने का संबल दिया गया। शिक्षा और तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, विवेक कुमार और सुभद्रा को मोबाइल किट तथा जयबती और गायत्री को टैबलेट वितरित किए गए, ताकि ये बच्चे डिजिटल युग के साथ कदमताल कर सकें। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिला समूहों को बड़े संसाधन सौंपे गए। जागृति, तिरंगा, इंद्रावती और झांसी की रानी महिला क्लस्टर संगठनों को ईंट-सीमेंट निर्माण इकाई के संचालन हेतु चेक व स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही कंकालीन और दुर्गा स्व-सहायता समूहों जैसी संस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया गया। बरसों से अपने पक्के मकान का सपना देख रहे परिवारों के लिए भी यह शाम यादगार बन गई। उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) के तहत लक्ष्मी बाई राव, बबिता कश्यप, अलाबती, गजमती और सेवती नायक समेत कई गृहणियों को उनके सपनों के घर की चाबी सौंपी। वहीं छोटे व्यापारियों को मदद पहुंचाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत ममता यादव और नासिर खान को चेक प्रदान किए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुजुर्ग हितग्राहियों को प्रधानमंत्री वय वंदना योजना का लाभ देकर सरकार ने हर वर्ग के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी, सीईओ जिला पंचायत  प्रतीक जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

‘PM मोदी ने यूक्रेन पर परमाणु हमले को रोका’, किसने खोला राज? पुतिन को दी ये समझाइश

नई दिल्ली पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव बार्टोशेव्स्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय भूमिका की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक अहम हस्तक्षेप करते हुए हालात को और बिगड़ने से रोका था. IANS से बातचीत में बार्टोशेव्स्की ने दावा किया कि वर्ष 2022 के आखिर में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे बातचीत की थी. इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन में टैक्टिकल परमाणु हथियार के इस्तेमाल को लेकर रूस को पीछे हटने के लिए राजी किया. पोलैंड के उप विदेश मंत्री के मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी की बेहद सकारात्मक और जिम्मेदार वैश्विक भूमिका का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया में जिस तरह की भूमिका निभा रहा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. पोलैंड भारत के साथ अपने रिश्तों को बेहद अहम मानता है और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है. भारत के साथ पोलैंड के सौहार्दपूर्ण रिश्तों की चर्चा करते हुए बार्टोशेव्स्की ने कहा, ‘हमारे भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और हम दुनिया में भारत की भूमिका को स्वीकार करते हैं.’ क्या यूक्रेन पर होने वाला था परमाणु हमला? फिर उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग में भारतीय प्रधानमंत्री की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘जैसा कि मैंने नई दिल्ली में अपने एक इंटरव्यू में बताया था, प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 के आखिर में राष्ट्रपति पुतिन से बात की थी और उन्हें यूक्रेन में टैक्टिकल न्यूक्लियर डिवाइस का इस्तेमाल करने की कोशिश करने से रोका था. यह एक सकारात्मक भूमिका थी जो प्रधानमंत्री मोदी ने निभाई और जो भारत दुनिया के मामलों में निभाता है, और मुझे उम्मीद है कि यह जारी रहेगा.’ 45 साल बाद पोलैंड की यात्रा पर गए थे पीएम मोदी पीएम मोदी के पोलैंड दौरे को याद करते हुए बार्टोशेव्स्की ने कहा, ‘हमने 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. तब वो भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर पोलैंड आए थे; 45 साल में हमारे देश आने वाले वो भारत के पहले पीएम थे. यह एक बहुत अच्छी यात्रा थी, और अब हमने ईयू के साथ विदेश व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, हम भी इसका हिस्सा हैं. मैं अभी विदेश मंत्रालय से लौटा हूं, जहां हमने सैन्य सहयोग, डिजिटल उद्योग सहयोग, सुरक्षा मुद्दे, हाई-टेक में आईटी निवेश, अंतरिक्ष में सहयोग और अन्य चीजों से जुड़े कई व्यावहारिक कदमों पर चर्चा की.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने दूसरे देशों की तुलना में अमेरिका के साथ ज्यादा फायदेमंद ट्रेड डील की है, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति है. आप अब दुनिया में जीडीपी के मामले में चौथे नंबर पर हैं, और प्रधानमंत्री मोदी ने यह साफ कर दिया है कि आपका लक्ष्य बहुत जल्द दुनिया की तीसरी बड़ी शक्ति बनना है. भारत एक बहुत बड़ा बाजार है; लगभग डेढ़ अरब लोग यहां रहते हैं, और इस वजह से भी यह एक बहुत ही उन्नत बाजार है. इतनी क्षमता वाले देश को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है.’ भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या कहा? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पोलैंड के डिप्टी विदेश मंत्री बोले, ‘ट्रेड डील न होने के बजाय ट्रेड डील होना बेहतर है, क्योंकि आम तौर पर टैरिफ खुशहाली की गारंटी नहीं हैं. अगर आप किसी चीज पर टैरिफ लगाते हैं, तो ये टैरिफ आमतौर पर, आखिर में, कंज्यूमर ही चुकाता है इसलिए मुझे लगता है कि टैरिफ जितने कम होंगे, उतना ही अच्छा होगा. यह अच्छी बात है कि भारत और अमेरिका एक ऐसे समझौते पर पहुंचे जिससे टैरिफ में भारी कटौती की गई.’

महिला की मर्जी के बिना मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकती अदालत, SC ने गर्भपात की मंजूरी दी

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में महिला के प्रजनन संबंधी अधिकारों और उसकी स्वायत्तता को सर्वोपरि माना है। कोर्ट ने शुक्रवार को एक 18 वर्षीय युवती को 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साथ ही हाई कोर्ट ने सुझाव दिया था कि युवती को बच्चे को जन्म देना चाहिए और बाद में उसे गोद दे देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- अदालत किसी भी महिला को उसकी गर्भावस्था पूरी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, यदि वह ऐसा नहीं करना चाहती है। पूरा मामला क्या है? युवती ने 17 साल की उम्र में गर्भधारण किया था, और अब वह 18 साल 4 महीने की है। यह गर्भ एक मित्र के साथ संबंध के कारण ठहरा था। कोर्ट ने माना कि इस गर्भावस्था को जारी रखना युवती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद दर्दनाक होगा। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि गर्भपात की प्रक्रिया से युवती की जान को कोई गंभीर खतरा नहीं है। कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां युवती के वकील ने तर्क दिया कि अवैध बच्चे को जन्म देने से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचेगा। कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि अपीलकर्ता के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है, भले ही निर्णय लेने में देरी हुई हो। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया- हमें किसके हित को देखना चाहिए? एक अजन्मा बच्चा या वह मां जो उसे जन्म दे रही है? जस्टिस नागरत्ना ने चिंता जताई कि जब डॉक्टर कानूनी जटिलताओं के कारण मना कर देते हैं, तो महिलाएं मजबूरन झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाती हैं, जो उनके जीवन के लिए खतरनाक है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि यहां मुख्य मुद्दा यह है कि लड़की गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती। अदालत ने कहा- यह प्रश्न नहीं है कि संबंध सहमति से था या नहीं। वास्तविकता यह है कि बच्चा अवैध है और मां बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। मां की प्रजनन स्वायत्तता को महत्व दिया जाना चाहिए। कानून क्या कहता है? भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत 20 सप्ताह तक महिला स्वयं गर्भपात का निर्णय ले सकती है। 20 से 24 सप्ताह के बीच मेडिकल बोर्ड की राय जरूरी होती है। 24 सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति केवल अदालत दे सकती है। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए 30 सप्ताह की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी और याचिकाकर्ता से इसके लिए लिखित सहमति देने का निर्देश दिया।

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