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आश्वासन पर बैंक कर्मचारियों ने की स्थगित हड़ताल — साथी प्रमोद चतुर्वेदी

Bank employees postponed the strike on assurance — Comrade Pramod Chaturvedi हरिप्रसाद गोहेआमला। अखिल भारतीय कर्मचारी संघ की 24 और 25 मार्च को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित हो गई है । जीस कारण सोमवार बैंक खुले रहे खंडवा यूनिट यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद चतुर्वेदी ने बताया कि वित्त मंत्रालय और आईबीए द्वारा कर्मचारियों को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इसलिए 25 मार्च को भी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक खुले रहेंगे । हमारे आंदोलन के लिए जो केन्द्रीय नेतृत्व से प्रोग्राम मिला था उसके सफलतापूर्वक संचालन में यू एफ बी यू के सभी घटक दलों के साथियों ने अपनी पूर्ण निष्ठा एवं ताकत से साथ देकर इसे कामयाब बनाया। यू एफ बी यू के बैंकिंग घटकों के सभी साथियों ने भविष्य में भी अपना पूर्ण समर्थन एवं सहयोग का आश्वासन दिया । उन्होंने कहा अभी हड़ताल पूर्णतः निरस्त नहीं हुई है वरन् केवल आइ बी ए एवं सभी घटक बैंकों के प्रबंधन और सेंटल लेबर कमीशन के आश्वासन मिलने के कारण स्थगित हुई है । अभी तो यह अंगड़ाई है अगर हमारी मांगे नहीं मानी गई तो फेर से हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है ।

HAPPY birthday cm : ‘जल पुरुष’ डॉ. मोहन यादव का संकल्प हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना, सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां

Happy birthday mohan yadav: ‘Water Man’ Dr. Mohan Yadav’s resolve to deliver water to every farmer’s field, achieved unprecedented achievements in the field of irrigation भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। Happy birthday mohan yadav पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। दो बड़ी परियोजनाओं में मिली सफलतामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया। Happy birthday mohan yadav मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड वाटर रिचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना “ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना” का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।” जानिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के बारे मेंकेन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।रुपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी।साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे।सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजनासंशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केंद्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केंद्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्य प्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है। क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान होगीमुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान बने और सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रुपये की लागत की “कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना” के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। Happy birthday mohan yadav क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आरंभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जाएगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। Read more: Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने बुन्देलखण्ड में दूर होगा जलसंकटमध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “अटल भू-जल योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में “डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल” गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत … Read more

Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने

When the leopards caught the cow, the villagers threw stones at it, they did not listen even after the forest department’s warning Kuno National Park sheopur श्योपुर ! Kuno National Park sheopur से बाहर निकले पांच चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की बात कहती रही, लेकिन वे नहीं माने, घटना सोमवार की है। दरअसल, एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। चीते रविवार दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। Kuno National Park sheopur वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। घटना के बाद करीब 10 बजे चीता दल, कूनो पुल क्षेत्र से निकलकर वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र पहुंचा है। Read more: डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरुक किया। उन्होंने बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की।

माफी नहीं मांगूंगा… BJP विधायक चिंतामणि मालवीय का पार्टी के खिलाफ मोर्चा, कांग्रेस का भी मिल गया साथ

ujjain kumbh land acquisition controversy chintamani malviya उज्जैन ! बीजेपी विधायक चिंतामणि को राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने नोटिस भेजा है. इस पर चिंतामणि ने कहा है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिली है. अगर मिलती भी है तो मैंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है. मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा.उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को लेकर बवाल मचा हुआ है. बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने विधानसभा में मुद्दा उठाया और कहा कि उज्जैन के किसान परेशान हैं और डरे हुए है. उनकी ज़मीन जबरदस्ती अधिग्रहण की जा रही है. इस बयान के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने उन्हें नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि आज सार्वजनिक जगह पर बयानबाजी कर पार्टी की छवि धूमिल कर रहे हैं. बीजेपी की ओर से भेजे गए नोटिस में चिंतामणि को 7 दिनों जवाब देने के लिए कहा गया है. मुझे नोटिस नहीं मिलाइस मामले पर आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा कि मैं बीजेपी का प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हूं. मैंने जो कुछ कहा, वो सदन के अंदर का विषय है. मैंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है. मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा. पार्टी का नोटिस अभी मुझे प्राप्त नहीं हुआ है. अगर मुझे मिलेगा तो मैं उसके तथ्यानुरूप जवाब से पार्टी को अवगत कराऊंगा. उन्होंने कहा था कि भू-माफियाओं की साजिश की वजह से किसानों को अपनी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है. सालों से यहां भूमि का अधिग्रहण कुछ ही महीनों के लिए होता था, लेकिन स्थाई तौर पर कब्जा सही नहीं है. दूसरे नेताओं को क्यों नहीं जारी किया नोटिस?वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी में कोई आवाज़ उठाता है तो उसकी आवाज़ दबा दी जाती है. किसानों के मुद्दे पर हम उनके साथ है. कांग्रेस पार्टी भी उज्जैन जाकर किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल होगी.नोटिस जारी करना ही थे बीजेपी को तो आख़िर क्यों गोविंद राजपूत ,प्रहलाद पटेल और विश्वास सारंग को नहीं किए. दूसरी तरफ़ बीजेपी इस मामले पर चुप है. सिंहस्थ क्या है?सिंहस्थ उज्जैन मध्य प्रदेश में आयोजित होने वाला महाकुंभ मेला है, जो हर 12 साल में एक बार शिप्रा नदी के तट पर होता है. इसे ‘सिंहस्थ कुंभ महापर्व’ भी कहा जाता है. यह हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें संत, महात्मा, अखाड़े, श्रद्धालु और तीर्थयात्री बड़ी संख्या में शामिल होते हैं.

शहीद दिवस पर विशाल रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन ।

A massive blood donation camp was organised on Martyr’s Day. हरिप्रसाद गोहे आमला । रविवार भीमनगर क्षेत्र स्थित बचपन प्ले स्कूल में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन आयोजित किया गया। उक्त आयोजन बचपन प्ले स्कूल, एच पी एस आमला, जन सेवा कल्याण समिति एवं निफा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ । जिसमें रक्तदाताओं ने नि स्वार्थ सेवा का परिचय देते हुए रिकार्ड 154 यूनिट रक्तदान किया ।,यह रक्तदान शिविर वीरता,सहयोग व ममता को समर्पित था। वीरता का पर्याय भगत सिंह,राजगुरु व सुखदेव जी के बलिदान दिवस पर ये रक्तदान शिविर सहयोग व सेवाभाव के श्रेष्ठ उदाहरण स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्व. शशि टिकारे जी की स्मृति में आयोजित किया गया । आयोजन समिति के राहुल धेण्डे व नीरज बारस्कर ने बताया कि बचपन प्ले स्कूल में आयोजित इस रक्तदान शिविर में कुल 154 रक्तदाताओ ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा का परिचय दिया ,उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी रक्तदाताओं का ये उत्साह हमारे लिए सुकून अनुभव करवाने वाला था। सागर चौहान ,डॉ शिशिरकांत गुगनानी व कैलाश ठाकरे ने जानकारी दी कि इस वर्ष रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को धन्यवाद के साथ निफा के प्रशस्ति पत्र व विशेष ट्रॉफी भी प्रदान की गई। रक्तदान को आमला में अब एक पर्व की तरह लिया जाता है,जिसे सभी मिलकर मनाते है। आयोजन समिति के अमित यादव, आकाश जैन व हर्षित ठाकरे ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत हो चुकी है, इसके बावजूद भी जिस उत्साह व जोश के साथ शहर के रक्तदाताओं ने अपनी भागीदारी इस शिविर में सुनिश्चित की उसके लिए हम मन से आभारी है सभी रक्तदाताओं के नितिन ठाकुर,चंद्रकिशोर टीकारे व जितेंद्र भावसार आगे बताते है कि विभिन्न सामाजिक संस्थाओ व धार्मिक समितियों, व्यवसायिक संगठनो एवं सेवाभावी संगठनो के सदस्यों ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई, शिविर में भी सभी सदस्य एवं समाजसेवियों ने पहुँचकर रक्तदाताओं का मनोबल बढ़ाया, क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे एवं भाजपा पदाधिकारी भी रक्तदान शिविर में पहुँचे और आयोजन की सराहना की, वहीं कांग्रेस पार्टी से भी मनोज मालवे,नपाध्यक्ष नितिन गाडरे, उपाध्यक्ष किशोर माथनकर सहित विभिन्न नेता शिविर में पहुँचे। वहीं बैतूल से मां शारदा समिति के शैलेन्द्र बिहारिया, पिंकी भाटिया एवं परशुराम सेना के अनिल पेशवे की विशेष उपस्थिति भी रक्तदान शिविर मे रही।भावेश मालवीय, शुभम खातरकर व अनिल सोनी ने कहा कि युवाओं के साथ-साथ महिलाओं की भी बड़ी संख्या इस शिविर में दिखी, जिससे अंदाजा लगाना मुश्किल नही है कि आमला में रक्तदान को अब अपना कर्तव्य मान लोग सतत इस परोपकार में शामिल हो रहे है। एवं प्रतिवर्ष इस रक्तदान शिविर में सौ रक्तदाताओं से अधिक की संख्या इस बात को सत्य भी साबित करती है कि आमला में रक्तदान के प्रति अद्वितीय जागरूकता आ चुकी है।राजा राठौर व अनिल सोनपुरे बताते है कि जिले के साथ अब प्रदेश स्तर पर भी आमला को रक्तदान में विशेष सहयोग के लिए पहचाना जाने लगा है। चूंकि एक्सीडेंट तथा थैलेसीमिया, सिकलसेल व विभिन्न बीमारियों में रक्त की हमेशा आवश्यकता पड़ती है, पर रक्त के लिए अभी दूसरा कोई विकल्प भी नही है, सिर्फ मानव का रक्त ही मानव के काम आ सकता है, ऐसे में इस तरह के रक्तदान शिविर बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है,एवं इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते है वे सभी रक्तदाता जो हाथ बढ़ाकर सहज भाव से रक्तदान के लिए तैयार रहते है। बचपन प्ले स्कूल में आयोजित इस रक्तदान शिविर में शहरवासियो का जोश देखकर बैतूल हॉस्पिटल से आई ब्लड बैंक की टीम भी खासी प्रभावित हुई। जानने योग्य बात है कि जिले में सबसे ज्यादा रक्तदान शिविर आमला में ही लगते है, एवं शहर की विभिन रक्तदान समितियां व सेवाभावी संगठन मिलकर इन शिविरों को सफल बनाते है।बचपन प्ले स्कूल के मैनेजमेंट सदस्यों व जनसेवा कल्याण समिति के सदस्यों द्वारा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी परोपकारी नागरिकों, युवाओं, मातृ शक्तियों, व्यापारियों, समाजसेवियों के साथ उन सभी का मन से आभार जो समय निकालकर इस पुण्य अभियान का हिस्सा बने एवं रक्तदान कर हमारा व अपने शहर का मान बढ़ाया।

मैहर मां शारदा मंदिर के मन्नत वाले पेड़ में लगी आग, सामने आ रही भक्तों की लापरवाही

maihar fire broke out in maa sharda temple wishing tree burned मैहर ! देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार मां शारदा देवी मंदिर के कैंपस में अचानक आग लग गई. मां शारदा देवी के मंदिर परिसर में स्थित मान्यता वाले पेड़ में के पास ये आग लेगी, जो देखते-देखते मंदिर के घंटे तक पहुंच गई. आग की वजह से पेड़ के पास रखे मान्यता के नारियल भी जलकर खाक हो गए. मंदिर प्रबंध समिति ने तत्काल आग पर काबू पाया जिससे बड़ी दुर्घटना होने से बच गई. इस दौरान भारी संख्या में लोग मंदिर परिसर में मौजूद थे. भक्तों की लापरवाही से लगी आग? संभावना जताई जा रही है कि दर्शनार्थी द्वारा अगरबत्ती या दीपक जलाने के दौरान वहां बांधी गई मन्ना वाली चुनरी ने आग पकड़ ली, जिससे आग पेड़ के आसपास विकराल रूप धारण कर लिया. गनीमत रही कि हादसे के वक्त मंदिर परिसर में श्रद्धालु और मंदिर समिति के लोग मौजूद थे, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया. समय रहते समिति के लोगों ने दर्शनार्थियों की मदद से आग पर काबू पा लिया. समय रहते पा लिया गया आग पर काबू इस मामले में मैहर एसडीएम विकास सिंह ने बताया,” रविवार की शाम मंदिर परिसर में लगे वृक्ष के नीचे लोग दीपक जलाकर रखते हैं. ऐसे में अचानक पेड़ में लगे रक्षा सूत्र व छोटे-छोटे चुनर में आग लग गई. आग पर तुरंत ही काबू पा लिया गया था, जिससे किसी भी प्रकार की कोई बड़ी घटना या दुर्घटना नहीं हुई है. समय रहते दर्शनार्थियों को मौके से हटा दिया गया, जिससे जानमाल की हानि नहीं हुई.”

पति ने लगाई फांसी, पत्नी और सास 44 मिनट तक ऑनलाइन देखती रहीं… पुलिस ने किया गिरफ्तार

man hanged himself on social media live streams wife and mother in law arrested रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र के मेहरा गांव में 30 वर्षीय युवक शिव प्रकाश तिवारी ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव आकर फांसी लगा ली। घटना के लिए उसने पत्नी और सास को जिम्मेदार बताया। दोनों ने पूरा घटनाक्रम लाइव देखा, परंतु उसे नहीं रोका। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रिया तिवारी व उसकी सास गीता पत्नी विनायक दुबे के विरुद्ध आत्महत्या करने के लिए उकसाने व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का मामला पंजीबद्ध कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना 16 मार्च की है। पत्नी किसी ओर से बात करने लगीसिरमौर के एसडीओपी उमेश प्रजापति ने बताया कि सेल्समैन का काम करने वाले शिव प्रकाश की शादी दो साल पहले बैकुंठपुर के रिमारी की प्रिया तिवारी से हुई थी। कुछ महीनों बाद पत्नी छिप-छिपकर किसी और से बात करने लगी, जिससे दोनों में विवाद बढ़ता गया। लगभग दो माह पहले एक दुर्घटना में पैर टूटने पर शिव प्रकाश बैसाखियों पर आ गया। इसके बाद पत्नी नवजात बच्चे को लेकर मायके चली गई और लौटने से इन्कार कर दिया। दुर्घटना के बाद मृतक अपने गांव में रह रहा था। घटना को 44 मिनट तक सास व पत्नी ने देखा ऑनलाइनयुवक पति के लाइव आकर अपनी पीड़ा सुनाने से लेकर सुसाइड करने तक का 44 मिनट का घटनाक्रम पत्नी एवं उसकी मां ऑनलाइन देखती रही। उसने पति को रोकने की कोशिश नहीं की। घटना वाले दिन युवक पत्नी को मनाने के लिए ससुराल गया था, लेकिन वहां भी उसकी बेइज्जती और मारपीट की गई। इसके बाद वह अपने घर लौट आया और फांसी लगा ली। मामले की जांच अभी जारी है। इंटरनेट मीडिया वीडियो को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा गया है।

डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई

the forest fire spread over one hectare दमोह ! जिले में तेंदूखेड़ा से 20 किलोमीटर दूर वन परिक्षेत्र की झलौन की डुकरसता बीट के जंगल में रविवार दोपहर अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग एक हेक्टेयर तक फैल गई। मशीन खराब होने के कारण वनकर्मी गीली झाड़ियों से आग बुझाते रहे। तेज हवाओं और जंगलों में सूखे घास-फूस और पत्तों के कारण आग कुछ ही देर में बड़े क्षेत्र में फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के द्वारा चौकीदारों की टीम को मौके पर भेजा गया। उन्होंने पेड़ की टहनियों से कुछ समय आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन तेज हवाओं में आग फैलती चली गई, जिसे बुझाना संभव नहीं था। आग बुझाने की मशीन खराब होने से कर्मचारी बेबस नजर आए और गीली पेड़ों की टहनियों से आग बुझाने का प्रयास करते रहे। चौकीदार ब्रजेश ठाकुर ने बताया चार महीने पहले आग बुझाने वाली मशीन विभाग द्वारा खरीदी थी, जो खराब हो गई है। इसलिए गीली टहनियों से आग बुझा रहे हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीही ने बताया आग लगने का कारण अज्ञात है। आग बुझाने के लिए 15 कर्मचारी प्रयास करते रहे, लेकिन आग बुझाने वाली मशीन खराब हो गई थी। करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में आग लगी है। आग से पेड़ों को नुकसान नहीं हुआ है। सूखी घास की पत्तियों में आग तेजी फैल गई थी, जिसे सोमवार की सुबह तक काबू कर लिया गया है। वन विभाग के पास नहीं संसाधनबता दें गर्मी शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। खेतों में फसल कटाई के बाद किसान आग लगा रहे हैं, जिससे भी जंगल में आग लग रही है। जिस पर काबू पाने के लिए वन विभाग और शासन प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। आगजनी की घटनाओं से जंगलों का भारी विनाश हो रहा है। फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड वाहन पहुंचता है। बड़े इलाके में आग लग चुकी होती है।

परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट, नेता प्रतिपक्ष बोले- जद में हैं कई अधिकारी और नेता

opposition will go to supreme court regarding transport scam भोपाल ! मध्य प्रदेश में परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है। कई बड़े अधिकारी और नेता इसकी जद में आ रहे थे, इसी कारण लोकायुक्त डीजी जयदीप प्रसाद का तबादला किया गया। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रही है। जब बड़े अधिकारी और नेता जांच के दायरे में आने लगे तो लोकायुक्त डीजी को हटा दिया गया। हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे और दोषियों को बेनकाब करेंगे। सत्र संचालन पर भी उठाए सवाल विधानसभा सत्र को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर सही जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा उठाए गए मामलों का भी जवाब नहीं दिया गया। हमने मांग की थी कि सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण होना चाहिए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। विश्वास सारंग बोले- बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष न निकालें विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और विपक्ष को जांच के निष्कर्ष तक रुकना चाहिए। सारंग ने कहा कि हर स्तर पर जांच हो रही है और जांच के आधार पर कार्रवाई भी की जा रही है। विपक्ष को बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

डॉक्टर पर कार्रवाई को लेकर विधायक कमलेश्वर ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

MLA Kamleshwar warned of hunger strike for action against the doctor भोपाल ! मध्य प्रदेश विधानसभा में भारत आदिवासी पार्टी के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार ने रतलाम जिला अस्पताल के डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें जातिसूचक गालियां देकर न केवल उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान किया है। विधायक ने चार महीने से डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने पर आक्रोश व्यक्त किया है। अन्याय के खिलाफ आमरण अनशन का एलान विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर बताया कि अगर 24 मार्च 2025 को सदन में उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे विधानसभा परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डॉक्टर को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक वे न भोजन करेंगे और न ही पानी ग्रहण करेंगे। चार महीने से न्याय की लड़ाई विधायक डोडियार ने बताया कि यह घटना 5 दिसंबर 2024 की है, जब वे खुद की तबीयत खराब होने के कारण रतलाम जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां इमरजेंसी वार्ड में एक व्यक्ति से डॉक्टर की उपलब्धता के बारे में पूछने पर उसने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर थे। इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आदिवासी समाज में आक्रोश विधायक ने कहा कि इस मामले को उन्होंने विधानसभा के पिछले सत्र में भी उठाया था, लेकिन सरकार ने अब तक डॉक्टर को निलंबित करने या अभियोजन की स्वीकृति देने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अब तक मामले की जांच पूरी नहीं की और न ही न्यायालय में चालान पेश किया। इससे न सिर्फ उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान हुआ है। सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग डोडियार ने कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि संपूर्ण भीलप्रदेश (मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र) के आदिवासियों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से तत्काल डॉक्टर के निलंबन की मांग की और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे।

केन्द्रीय जेल जबलपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी का निरीक्षण, बंदियों से संवाद

District and Sessions Judge Alok Awasthi’s inspection of Central Jail Jabalpur, interaction with prisoners जितेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर। आज दिनांक को केन्द्रीय जेल जबलपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी जी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शक्ति वर्मा जी एवं जिला विधिक सेवा अधिकारी, बी. ड़ी दीक्षित जी द्वारा भ्रमण किया गया, एवं दण्डित एवं विचाराधीन बंदियों से संवाद किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय के करकमलों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जेल आर्केस्ट्रा द्वारा सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा दण्ड़ित एवं विचाराधीन बंदियों के साथ संवाद किया गया। आगे न्यायाधीश द्वारा जेल का भ्रमण किया गया एवं पाठशाला का निरीक्षण किया गया। जेल प्रशासन की ओर मदन कमलेश, उप जेल अधीक्षक (प्रशासन), श्रीमती रूपाली शर्मा उप जेल अधीक्षक, हिमांशु तिवारी, सहायक जेल अधीक्षक, राहुल चौरसिया लेखापाल एवं सुभाष यादव द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों को जेल का भ्रमण एवं निरीक्षण कराया गया।

कौन होंगा आमला ब्लाक कांग्रेस का नया अध्यक्ष, चर्चाओ का बाजार गर्म

Who will be the new president of Amla Block Congress, discussions are abuzz. हरिप्रसाद गोहेआमला ! काग्रेस ब्लाक अध्यक्ष पद के लिए नामो को लेकर क्षेत्र में सरगर्मियां बढ़ने लगी है नए अध्यक्ष को लेकर तरह, तरह के कयास लगाए जा रहे हैं । वहीं ब्लाक कांग्रेस कमेटी आमला के नए अध्यक्ष पद को लेकर शहर सहित अंचल के ग्रामों में चर्चाओं का बाजार भी गर्म है । गौरतलब हो की लगातार हार का दंश झेल रही कांग्रेस नए ब्लॉक प्रमुख के लिए जहां एक ओर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े खानदानी कांग्रेसी कार्यकर्ता किसी परंपरागत कांग्रेसी को ब्लॉक अध्यक्ष बनते देखना चाहते हैं, वही अन्य युवा कांग्रेस नेता भी इस बार कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष बनने अपनी मंशा जाहिर करते देखे जा रहे है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर एवं ग्रामीण अंचल के निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता पूर्व आमला ग्रामपंचायत के सरपंच, समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित जमीदार स्व ठाकुर गोपाल सिंह चंदेल जी के पौत्र एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आमला के पूर्व अध्यक्ष एवं सरपंच संघ आमला के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर शिवपाल सिंह चंदेल के पुत्र चंद्रशेखर सिंह चंदेल को कांग्रेस संगठन के जमीनी मजबूती के लिए अध्यक्ष बनते देखना चाहते हैं। पीढी दर पीढी कांग्रेस विचारधारा से जुड़े कांग्रेस परिवारों को लगता है कि चंद्रशेखर सिंह के ब्लॉक अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को ग्रामीण जनप्रतिनिधियों, किसानों के साथ ही शहरी शिक्षित युवाओं का भी समर्थन प्राप्त होगा ।अपने सरल सहज व्यक्तित्व के कारण जनप्रिय,उच्च शिक्षित युवा चंद्रशेखर सिंह चंदेल अपने छात्र जीवन से ही छात्र एवं युवा राजनीति के साथ ही सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। बरहाल ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद के दावेदारों में नमो की चर्चा आम है, कौन होंगा आमला का नया ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जिसका अभी करना हॉगा इंतजार ?

पटवारी ही क्यों? हर घोटाले में छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बड़े अधिकारी रहे सुरक्षित!

Why only Patwari? In every scam, the smaller employees were punished, the big officers remained safe! सिवनी ! जिले के एक खरीदी केंद्र में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भी किसी विभाग में कोई गड़बड़ी होती है, तो सबसे पहले कार्रवाई केवल पटवारी पर ही क्यों होती है? क्या घोटाले केवल पटवारी ही करते हैं, या फिर बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाते हैं? इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस घोटाले में खाद्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी, उसमें कार्रवाई एक निर्दोष पटवारी पर कर दी गई, जो उस समय अवकाश पर था और एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण अपनी ड्यूटी पर मौजूद भी नहीं था। बिना गहन जांच के, बिना किसी ठोस आधार के उसे निलंबित कर दिया गया। यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या केवल पटवारी ही जवाबदेह हैं? यह पहली बार नहीं हुआ है जब किसी घोटाले का ठीकरा पटवारी पर फोड़ा गया हो। ऐसा लगता है कि जैसे ही कोई मामला तूल पकड़ता है, तो विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सबसे आसान शिकार पटवारी को ही बनाते हैं। बड़े अधिकारियों पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, न ही उनकी भूमिका की जांच की जाती है। सरकार और प्रशासन को यह तय करना होगा कि क्या न्याय केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगा? क्या हमेशा घोटालों का ठीकरा पटवारियों पर ही फोड़ा जाएगा? जब तक इस अन्यायपूर्ण परंपरा को रोका नहीं जाएगा, तब तक न तो पारदर्शिता आएगी और न ही कोई ठोस सुधार हो पाएगा। अब समय आ गया है कि दोषियों की सही पहचान हो और बिना पक्षपात के दोषियों पर कार्रवाई की जाए – चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों!

श्रीमद् भागवत कथाः छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन

Shrimad Bhagwat Katha: Description of the pastimes of Lord Shri Krishna on the sixth day हरिप्रसाद गोहे  आमला । ग्राम जंबाड़ी में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा अमृत महोत्सव के छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा कंस वध, जरासंध युद्ध और श्री कृष्ण रुकमणी विवाह का वर्णन किया गया। कथा वाचक पंडित श्याम मनावत ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पंडित श्याम मनावत ने बताया कि जब भगवान श्री कृष्ण बड़े हो जाते हैं तो वह कंस की जेल में बंद अपने माता-पिता देवकी वासुदेव को छुड़ाने के लिए कंस का वध कर छुड़ा लाए। कंस वध से नाराज़ कंस के ससुर मगध के राजा जरासंध श्री कृष्ण से बदला लेने के लिए मथुरा पर सत्रह बार हमला किया। हर बार श्रीकृष्ण भगवान और बलराम पराजित कर छोड़ देते थे लेकिन मारते नहीं थे। पंडित श्याम मनावत ने श्री कृष्ण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विवाह के लिए जब कोई नंदगांव आता तो उनकी बाल लीलाओं को सुना वापस कर देते थे। जब विदर्भ देश के राजा की बेटी रुक्मिणी को लेकर भगवान श्रीकृष्ण द्वारकाधीश गए जहां आधे द्वारकावासी बाराती बने वहीं आधे जनाती बने और श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह संपन्न हुआ। कथा में श्री कृष्ण रुक्मणी की आरती  सानतराव देशमुख ललिता देशमुख ने की। इस अवसर पर रामकिशोर देशमुख अध्यक्ष भाजपा नगर मंडल आमला, हितेश देशमुख, राहुल देशमुख, लोकेश देशमुख तथा बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष, श्रद्धालु मौजूद रहे। आगामी दिनों में भी कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाता है कि वे इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का आनंद लें। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सफल बनाने में सभी का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण था। श्रीमद् भागवत कथा भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करती है। यह कथा श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है ।

काम के बोझ से दबे हुए रेलवे के सभी विभागों के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) कैसे मिले ?

How did the Senior Supervisors of all departments of Railways, who are burdened with work, get Grade Pay 4800/- & Grade Pay 5400/- (Pay Level -8, Pay Level -9)? आमला/बैतूल (हरिप्रसाद गोहे) !लगभग दो वर्ष पूर्व जारी हुआ रेलवे का एक आदेश कार्यबोझ से दबे कर्मचारियों के विषाद का विषय बना हुआ है। यह प्रावधान रेलवे सुपरवाइज़रों को उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- एवं ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) में पदोन्नति देने से संबंधित है, जिसमें एक अजीब शर्त जोड़ी गई है – उनके अपने विभाग से कुछ पदों को “मैचिंग-सरेंडर” करना। सतह पर यह नीति विभागीय संसाधनों के संतुलन और कुशलता को बढ़ाने का प्रयास लगती है, लेकिन गहराई में जाएं तो यह अव्यवस्था, अन्याय और कर्मचारियों के साथ भेदभाव की एक दर्दनाक कहानी बयां करती है। प्रावधान की दोहरी मार ………इस नीति के तहत, जिन विभागों में “फालतू कर्मचारियों” की भरमार है, वहां सुपरवाइज़रों को आसानी से उच्चतम वेतनमान में पदोन्नति मिल गई। उनके विभाग से कुछ पदों को सरेंडर कर दिया गया, और यह प्रक्रिया उनके लिए एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गई। लेकिन दूसरी ओर, वे विभाग जहां स्टाफ की कमी है या कर्मचारी पहले ही अत्यधिक कार्यबोझ तले दबे हुए हैं, वहां यह शर्त एक अभिशाप बन गई। इन विभागों मे सरेंडर करना संभव ही नहीं है, क्योंकि हर कर्मचारी पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। नतीजा? रेलवे के कुछ विभागों के सुपरवाइज़र अब तक उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) से वंचित हैं।यहां सवाल उठता है – क्या मेहनती और समर्पित कर्मचारियों को दंडित करना और निकम्मेपन को पुरस्कृत करना नैसर्गिक न्याय है? क्या यह नीति कर्मचारियों के बीच समानता और प्रोत्साहन की भावना को बढ़ाती है, या इसे कुचलती है? नौकरशाही अव्यवस्था का नमूना …………यह प्रावधान नौकरशाही अव्यवस्था (Bureaucratic Chaos) का एक जीता-जागता उदाहरण है। नौकरशाही अव्यवस्था तब उत्पन्न होती है, जब नीतियां बनाते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया जाता है और एक समान नियम सभी पर थोप दिए जाते हैं, भले ही परिस्थितियां भिन्न हों। इस मामले में, नीति निर्माताओं ने यह नहीं सोचा कि हर विभाग की अपनी जरूरतें और चुनौतियां होती हैं। जहां एक विभाग में अतिरिक्त कर्मचारी हो सकते हैं, वहीं दूसरा विभाग न्यूनतम स्टाफ के साथ संचालित हो रहा हो। एक ही छड़ी से सबको हांकने की कोशिश ने व्यवस्था को और उलझा दिया है। प्रभावित कर्मचारियों का दर्दकल्पना करें उस सुपरवाइज़र की मन:स्थिति का, जो दिन-रात मेहनत करता है, अपने सीमित संसाधनों के साथ विभाग को चलाता है, और फिर उसे पता चलता है कि उसकी मेहनत का इनाम नहीं, बल्कि सजा मिलेगी। दूसरी ओर, वह अपने समकक्ष को देखता है, जिसके विभाग में काम का बोझ कम है और कर्मचारी अधिक हैं, और उसे आसानी से पदोन्नति मिल जाती है। यह केवल पदोन्नति का मामला ही नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक आघात भी है।“हम दिन-रात काम करते हैं, छुट्टियां तक नहीं लेते, फिर भी हमें पीछे छोड़ दिया जाता है। क्या हमारा मेहनत करना ही हमारी गलती है?” – यह कहना है हर एक प्रभावित सुपरवाइज़र का, जिसकी आवाज में निराशा और गुस्सा साफ झलकता है। ऐसे कर्मचारी न केवल अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर भी गहरा असर पड़ रहा है। नैसर्गिक न्याय कहां है ? ……..नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत कहता है कि हर व्यक्ति को उसकी योग्यता और परिस्थिति के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए। लेकिन इस प्रावधान में तो उल्टा हो रहा है। जहां कार्य बोझ कम और स्टाफ़ अधिक है उन्हें इनाम मिला, और जहाँ स्टाफ़ कम और कार्य बोझ अधिक उन्हें दंड। यह नीति कर्मचारियों के बीच असमानता को बढ़ावा दे रही है और मेहनत करने की भावना को कुचल रही है। क्या यह उचित है कि पदोन्नति का आधार आपकी मेहनत न हो, बल्कि यह हो कि आपके विभाग में कितने “फालतू” कर्मचारी हैं ? निष्कर्ष और सुझाव …….यह प्रावधान न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है। इसे तत्काल संशोधित करने की जरूरत है। विभागों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लचीले नियम बनाए जाने चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन विभागों में स्टाफ की कमी है, वहाँ सरेंडर की शर्त को हटाया जा सकता है या वैकल्पिक मानदंड तय किए जा सकते हैं। साथ ही, कर्मचारियों की मेहनत और योगदान को मापने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कोई भी अपने अधिकारों से वंचित न हो।अंत में, यह सवाल पूछना जरूरी है – क्या हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जहां मेहनत की सजा और निकम्मेपन का इनाम मिले? अगर नहीं, तो इस जारी नौकरशाही अव्यवस्था को खत्म करने का समय आ गया है, ताकि प्रभावित कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके और उनका दर्द सुना जा सके।वीरेंद्र कुमार पालीवालसेवानिवृत्त स्टेशन प्रबंधक(लेखक स्वयं इस अव्यवस्था का शिकार हुआ है)

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