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हाथियों के बाद इंसानों को मुसीबत बढ़ा रहा है कोदो कुटकी खाने से लोग बीमार

After elephants, people are facing problems, people are falling ill after eating Kodo Kutki. सतना। मध्य प्रदेश में एक ओर जहां कोदो खाने से 10 हाथियों की मौत हो गई, वहीं अब कोदो की रोटी खाने से एक परिवार की जान पर बन आई है। मामला सतना से सामने आया है। जहां पति-पत्नी और बेटी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। दरअसल, सतना जिले के रैगांव चौकी क्षेत्र अंतर्गत डिलौरी गांव में पति दयाराम कुशवाहा, पत्नी शंखी कुशवाहा और 18 वर्षीय बेटी सरोज कुशवाहा की तबियत कोदो की रोटी खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज किया जा रहा है। दयाराम के भतीजे ने बताया कि, आज तीनों ने घर में कोदो की रोटी खाई है। तब ही से इन्हें उल्टियां हो रही और अब बेहोशी की हालत में सतना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बतादें कि, अभी हाल ही में बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के पीछे भी हाथियों द्वारा कोदो की फसल खाने की बात बताई गई थी। वहीं अब इस घटना पर कोदो अनाज को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला जांच का विषय बन गया है। देखना होगा कि अब जिला प्रशान इस मामले को लेकर कितना संजीदा नजर आता है। हालाकि इस घटना को लेकर अबतक जिला प्रशान ने कोई सुध नहीं ली है। इतना ही नहीं गंभीर बीमार मरीज जैसे तैसे ऑटो से सतना जिला अस्पताल पहुंचे तो, न तो उन्हें स्ट्रेचर नसीब हुआ और न ही बेड। एक बेड पर मां बेटी तो जमीन में अर्ध नग्न हालत में पिता तड़पता नजर आया। हालांकि कुछ देर बाद दयाराम को बिस्तर नसीब हुआ। इस घटना ने गंभीर मरीजों को मिलने वाली बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी सिस्टम की भी पोल खोल कर रख दी है।

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा।

पटवारी रिश्वतखोर : किसान की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों दबोचा

Patwari briber: Lokayukta police caught red handed on farmer’s complaint मंदसौर में एक पटवारी को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है. पटवारी ने किसान से जमीन के बंटवारे के लिए 25,000 रुपये की मांग की थी. मंदसौर ! किसान की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार राजस्व महा अभियान तीन चल रही है. इसी बीच मंदसौर जिले का पटवारी बंटवारे के लिए किसान से ₹25000 की मांग कर रहा था. लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत मिलने पर ₹10000 की रिश्वत लेते हुए पटवारी को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की गई है. लोकायुक्त एसपी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मंदसौर जिले के इशाकपुर में रहने वाले धर्मेंद्र मालवीय ने पैतृक भूमि के पारिवारिक बंटवारे को लेकर पटवारी के यहां आवेदन दिया था. पटवारी जगदीश पाटीदार द्वारा तहसीलदार के नाम पर ₹25000 की रिश्वत मांगी गई. पटवारी ने कहा कि ₹25000 देने के बाद ही तहसीलदार द्वारा नामांतरण और बंटवारा आदि प्रकरण निपटाए जा रहे हैं. यह सुनते ही धर्मेंद्र मालवीय चौंक गया. धर्मेंद्र मालवीय ने इसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी अनिल विश्वकर्मा से की. लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी की शिकायत का सत्यापन किया तो फरियादी सही साबित हुआ. इसके बाद मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने ₹10000 की रिश्वत लेते हुए पटवारी जगदीश पाटीदार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में प्रकरण बनाया गया है. जैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी को पकड़ा वह उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा. पटवारी लोकायुक्त पुलिस से छोड़ने की गुहार भी लगाई. तहसीलदार को नहीं कोई जानकारी फरियादी धर्मेंद्र मालवीय के परिवार की जमीन का बंटवारा होना था. उसके द्वारा तहसील कार्यालय में आवेदन किया गया जो कि पटवारी के पास पहुंचा. पटवारी ने तहसीलदार के नाम पर रिश्वत की मांग कर ली जबकि तहसीलदार को घटना की जानकारी तक नहीं थी लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि अभी मामले में और भी विवेचना की जा रही है.

मामूली विवाद के बाद घर में घुसकर चाचा भतीजे को गोली मारी, 3 लोग घायल

After a minor dispute, uncle entered the house and shot nephew, 3 people injured छतरपुर ! छतरपुर जिले में बढ़ते अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है, जहां रात में हुए मामूली विवाद में सुबह बाइक सवारों ने घर आकार चाचा-भतीजे को गोली मार दी। जहां चाचा को गोली बांए हाथ में तो वहीं भतीजे को सिर में लगी है। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां इलाज चल रहा है। इनमें से एक (भतीजे) की हालत गंभीर होने पर उसे रेफर किया गया है। मामले में पीड़ित और आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। आरोपी घटना को अंजाम देकर फरार हो गए हैं और पुलिस मामले की जांच पीड़ित घायलों से पूछताछ आरोपियों की तलाश/गिरफ्तारी और अग्रिम कार्यवाही में जुट गई है। यह है पूरा मामलाजानकारी के मुताबिक घटना जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है। जहां बीती रात हुए चौक समारोह में दोनों पक्षों जो आपस में रिश्तेदार भी है। उनमें खाने-पीने के दौरान मामूली विवाद हो गया। जिसपर कि रात में 100 डायल पुलिस पहुंची थी और मामला समझकर वापिस भी आ गई पर आज सुबह एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के घर बाइक से जाकर फायरिंग कर दी। जिसमें से एक घायल को गोली उसके हाथ में तो वहीं दूसरे 37 वर्षीय घायल को गोली उसके सिर में लगी है। वहीं तीसरे व्यक्ति को मामूली चोटें आई हैं। ग्वालियर रेफर37 वर्षीय घायल जिसकी कनपटी/सिर में गोली लगी है जिसकी हालत गंभीर होने पर उसे पहले शहर के मिशन अस्पताल और वहां से ग्वालियर मेडिकल रेफर किया गया है। जिला आपताल में सिटी कोतवाली थाना एवं बमीठा थाना पुलिस पहुंचकर पूछताछ और मामले की जांच में जुटी हुई है।

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

स्कूल जा रही छात्राओं को देख पशुपालन मंत्री ने रोका काफिला, पूछा- पैदल क्यों जा रही हो? छात्राएं बोली…

Seeing the girl students going to school, the Animal Husbandry Minister stopped the convoy and asked – Why are you going on foot? The girls said… पैदल स्कूल जा रहीं छात्राओं को देखकर पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने अपना काफिला रोककर पूछा कि पैदल क्यों जा रही हो। छात्राओं ने जवाब दिया कि साइकिलें नहीं मिलीं। यह जवाब सुनकर मंत्री पटेल ने छात्राओं को साइकिल देने की बात कही और अन्य समस्यायों भी जानी। इस बातचीत का वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।एक छात्रा दीपा लोधी ने बताया कि जब वह कक्षा 9वीं में पढ़ती थी। उस दौरान लॉकडाउन लग गया, तभी से साइकिल नहीं मिलीं। छात्रा ने बताया कि गांव में सड़क नहीं है, खेत से होकर जाना पड़ता है। मंत्री पटेल ने पूछा कि कितनी सहेलियों को जरूरत है। दीपा ने कहा 20 से 25 छात्राओं को चाहिए। मंत्री ने छात्रा दीपा से पांच छात्राओं के नाम लिखकर देने को कहा और वहां से चले गए। बता दें शासन द्वारा उपलब्ध कराईं साइकिलें स्कूल परिसरों में पड़ी-पड़ी धूल खा रही हैं। वितरण न होने से साइकिलों पर अब जंग लगने लगी है। पथरिया ब्लॉक की बात करें तो यहां 1200 से अधिक साइकिलें किंद्रहो स्कूल परिसर में रखी हैं। वितरण में देरी होने के कारण इनमें जंग लगती जा रही है। कई छात्र-छात्राएं पैदल स्कूल जाने को मजबूर हैं। इसकी हकीकत स्थानीय विधायक व मंत्री लखन पटेल ने खुद महसूस की। दरअसल मंत्री पटेल पथरिया विधानसभा अंतर्गत खजरी गांव के दौरे पर थे। कई जगह रुक कर उन्होंने लोगों से जानकारी भी ली। 5 महीने पहले आ चुकी है साइकिलपथरिया ब्लॉक के 48 स्कूलों के लिए 5 महीने पहले साइकिल आ चुकी हैं। कक्षा 8 वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को यह दी जाना है, लेकिन अब जंग लगने से खराब होने लगी हैं। इस संबंध में पथरिया विधायक और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा साइकिलों का वितरण क्यों नहीं हुआ है, यह मालूम कराता हूं, लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

किसान और जंगली जानवरों का संघर्ष: नील गाय और सूअरों को मारना चाहते हैं किसान

Conflict between farmers and wild animals: Farmers want to kill Nilgai and pigs मालवा क्षेत्र के किसान घोड़ा रोज(नीलगाय) व जंगली सुअरों से काफी परेशान हैं। ये जंगली जानवर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि घोड़ा रोज और सूअर जिस खेत में घुसते हैं, वहां की सारी फसल को खाकर और रौंदकर नष्ट कर देते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने इस समस्या को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि घोड़ा रोज और सुअरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये जानवर खेत में लगी फसलों को बर्बाद कर रहे है। किसानों पर रोज हमला मालवांचल के किसानों का कहना है कि घोड़ा रोज कई बार खेत में काम करते समय किसानों पर भी हमला कर देते हैं और कई बार रोड पर निकलने वाले राहगीरों को भी इनका शिकार होना पड़ता है। इसके बावजूद कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही। किसानों का कहना है कि घोड़ा रोज को मारने की अनुमति दी जानी चाहिए या फिर इसे जंगल के अंदर रखने का कोई प्रबंध होना चाहिए। नियमों के सरलीकरण की मांग वन विभाग ने इन्हें मारने की अनुमति देने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसमें नियमों का सरलीकरण करने के लिए कहा गया है, जिसके तहत किसानों को घोड़ा रोज़ और जंगली सूअर मारने के लिए लाइसेंस दिया जा सकेगा परंतु लंबे समय बाद भी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई।इधर, संयुक्त किसान मोर्चा के रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव ने मांग की है कि घोड़ा रोज को समूल नष्ट करने के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर कार्यवाही नहीं की तो संयुक्त किसान मोर्चा बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।

छिंदवाड़ा, शहडोल और सिंगरौली के एसपी बदले: 10 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर

SP of Chhindwara, Shahdol and Singrauli changed: 10 IPS officers transferred भोपाल ! मध्यप्रदेश शासन ने सोमवार को 10 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की। साथ ही राज्य पुलिस सेवा के भी दो अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं। देखिए लिस्ट

डिजिटल अरेस्ट कर कारोबारी से ठगे 10 लाख, फर्जी एफआइआर के नाम पर डराया

10 lakh rupees were cheated from businessman by digital arrest, threatened in the name of fake FIR रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में डेढ़ महीने के अंदर आनलाइन स्टोर कारोबारी को दूसरी बार ठगने का मामला सामने आया है। शिकायत पर समान थाना पुलिस ने शनिवार देर शाम प्रकरण दर्ज किया। फर्जी FIR की दर्ज10 नवंबर को हुई घटना में कारोबारी को ठगों ने सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक फर्जी एफआइआर के नाम पर डरा-धमकाकर डिजिटल अरेस्ट रखा और 10 लाख 73 हजार रुपये विभिन्न खातों में जमा करा लिए। पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह के अनुसार नेहरू नगर निवासी नितिन वर्मा से ठगों ने 19 अक्टूबर को आनलाइन कार्य के लिए 50 हजार रुपये ठग लिए थे।

भारत दर्शन : अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक पहुंचने का सम्पूर्ण मार्गदर्शन

Bharat Darshan: Complete guide to reach Ayodhya Shri Ram Janmabhoomi Temple भोपाल ! अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित, भारतीय इतिहास और धार्मिक मान्यताओं का अभिन्न अंग है। यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में जानी जाती है, जो पूरे भारत और दुनिया भर के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, इसकी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध, हर भक्त के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। आइए जानते हैं कि भोपाल सहित मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से अयोध्या तक कैसे पहुंचा जा सकता है। भोपाल से अयोध्या तक की यात्रा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से अयोध्या पहुंचने के लिए तीन मुख्य साधन उपलब्ध हैं: रेल, सड़क, और हवाई मार्ग। रेल मार्ग: भोपाल से अयोध्या तक ट्रेन यात्रा सबसे लोकप्रिय और किफायती विकल्प है।मुख्य रेलवे स्टेशन: अयोध्या कैंट और फैजाबाद जंक्शन। प्रमुख ट्रेनें: साकेत एक्सप्रेस (भोपाल से फैजाबाद)।गोंडा एक्सप्रेस (भोपाल से अयोध्या के पास)।अन्य ट्रेनें लखनऊ होते हुए उपलब्ध हैं।समय: 12-15 घंटे।किराया: ₹400-₹1500 (स्लीपर से एसी क्लास)। सड़क मार्ग: भोपाल से अयोध्या सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। बसें और निजी वाहन द्वारा यात्रा करना सुविधाजनक है।मार्ग: भोपाल → झांसी → कानपुर → लखनऊ → अयोध्या।समय: 16-18 घंटे।बस किराया: ₹1000-₹2000।निजी वाहन से यात्रा करना चाहें तो यह यात्रा दर्शनीय स्थलों के साथ रोमांचक बन सकती है। हवाई मार्ग: भोपाल से अयोध्या के लिए सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन लखनऊ तक फ्लाइट लेकर वहां से अयोध्या पहुंच सकते हैं।हवाई अड्डा: लखनऊ (चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा)।भोपाल से लखनऊ फ्लाइट: 1.5 घंटे।लखनऊ से अयोध्या: टैक्सी/बस द्वारा 140 किमी (2-3 घंटे)।किराया: ₹4000-₹8000। मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों से यात्रा मार्गदर्शन उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर जैसे लखनऊ, वाराणसी, और गोरखपुर से अयोध्या आसानी से पहुंचा जा सकता है।लखनऊ से अयोध्या: 140 किमी। टैक्सी और बसें 2-3 घंटे में पहुंचा देती हैं।वाराणसी से अयोध्या: 200 किमी, ट्रेन/बस द्वारा 4-5 घंटे। राजस्थान:जयपुर, कोटा और उदयपुर से अयोध्या के लिए ट्रेन और बसें उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र:मुंबई और पुणे से ट्रेनें और फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़:रायपुर और बिलासपुर से ट्रेन और बसें आसानी से उपलब्ध हैं। गुजरात:अहमदाबाद और सूरत से लखनऊ होकर अयोध्या पहुंचा जा सकता है। अयोध्या में प्रमुख आकर्षण यात्रा के लिए उपयोगी सुझाव अयोध्या एक ऐसा शहर है, जो आध्यात्मिकता, भक्ति, और भारतीय इतिहास का प्रतीक है। भोपाल और आसपास के राज्यों से अयोध्या की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी अद्वितीय है। चाहे आप रेल, सड़क, या हवाई मार्ग से जाएं, यह तीर्थ यात्रा आपको अनमोल अनुभव प्रदान करेगी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन हर व्यक्ति के जीवन का एक यादगार हिस्सा बन सकते हैं। जय श्री राम!

एनसीएल की बड़ी योजना: सिंगरौली में बस्ती का पुनर्वास और 60 करोड़ टन कोयला खनन का लक्ष्य

NCL’s big plan: rehabilitation of settlement in Singrauli and target of mining 60 crore tonnes of coal सिंगरौली  । कोल इंडिया की शाखा एनसीएल एक बड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन (आरएंडआर) परियोजना की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बी साईराम ने कहा कि इसके तहत मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक बस्ती के निवासियों को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जिसके नीचे 60 करोड़ टन खनन योग्य कोयला है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में मोरवा बस्ती 927 हेक्टेयर में फैली हुई है। यह एक बड़ी परियोजना है, जिसमें नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की मोरवा बस्ती को पूरी तरह स्थानांतरित किया जाएगा। साईराम ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस अधिग्रहण में लोग पुनर्वास के लिए तैयार हैं। इसलिए आधी समस्या हल हो गई है, क्योंकि पहला प्रतिरोध लोगों की तरफ से ही आता है। उन्होंने कहा कि अब केवल मुआवजे की दरों और आरएंडआर लाभ को अंतिम रूप देना बाकी है। पिछले छह महीनों से एनसीएल पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर लोगों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एनसीएल की मदद कर रहा है और पुनर्वास के पहले चरण का ब्यौरा तैयार किया जाना है। सीएमडी ने कहा, मई से हम मुआवजे का पहला चेक देना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 572.5 हेक्टेयर कृषि भूमि खाली कराई जानी है। सूत्रों के अनुसार कंपनी अभी भी योजना के विवरणों पर काम कर रही है, जिसमें वित्तीय पक्ष भी शामिल हैं। मोरवा बस्ती पुनर्वास और पुनर्स्थापन परियोजना बहुत बड़ी होगी और इस पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित व्यय होने का अनुमान है। इस परियोजना से 30 हजार परिवार प्रभावित होंगे और इसमें 22 हजार घरों, संरचनाओं का स्थानांतरण शामिल होगा।

जबलपुर: दमोह नाका स्थित चौकसे यात्री निवास होटल में पुलिस का छापा, देह शोषण और असामाजिक गतिविधियों का खुलासा

Jabalpur: Police raid at Chaukse Yatri Niwas Hotel located at Damoh Naka, जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता) जबलपुर । दमोह नाका स्थित चौकसे यात्री निवास होटल में पुलिस ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया, जहां देह शोषण और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा चल रहा था। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल से पांच युवक-युवतियों और कई दलालों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, होटल में देह शोषण के कई मामले चल रहे थे, और यह स्थान अवैध गतिविधियों के लिए जाना जाता था।  पुलिस ने होटल पर छापेमारी के बाद देह शोषण और अन्य अपराधों को लेकर एक मामला दर्ज किया और दंडात्मक कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ दलाल भी शामिल हैं, जो युवाओं और युवतियों को इस अवैध गतिविधि में शामिल कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई इलाके में असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और समाज में सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए की गई है।  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस छापेमारी के दौरान होटल के भीतर कई संदिग्ध गतिविधियाँ पाई गईं और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ के बाद यह साफ हो गया कि यह स्थान देह व्यापार और अन्य अवैध कार्यों का केंद्र बन चुका था। पुलिस ने अब सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना बनाई है।  इस मामले के बाद स्थानीय समुदाय में भी चिंता का माहौल है, और पुलिस प्रशासन से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद की जा रही है।

विशाल बाल मेले में विद्यार्थियों ने लगाए एक से बढ़कर एक स्टॉल ।

Students set up multiple stalls in the huge children’s fair. हरिप्रसाद गोहेआमला। भीमनगर स्थित लाईफ कैरियर सीनियर सेकेंडरी एवं इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में बाल दिवस के मौके पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कर धूमधाम से बाल दिवस मनाया गया । इस मौके पर स्कूली विद्यार्थियों द्वारा गरबा नृत्य एवं गायन की शानदार प्रस्तुति दे उपस्थित जनों का मन मोहा वहीं इस दौरान विशाल बाल मेले का आयोजन किया गया था। जिसमे विद्यार्थियों द्वारा व्यंजनों, पेय पदार्थों तथा विभिन्न खेलों के कोई 100 स्टाल सजाएं थे। जो आयोजित बाल मेले में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा । लाईफ केरियर स्कूल से प्राप्त जानकारी अनुसार लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेंडरी सी. बी. एस. ई.स्कूल एवं यूनिवर्सल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में “विशाल बाल मेला” का आयोजन प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बाल दिवस के उपलक्ष में लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेंडरी सी.बी.एस.ई.स्कूल एवं यूनिवर्सल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल आमला के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन किया गया यह कार्यक्रम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शैलेंद्र बडोनिया के मुख्य आतिथ्य ,थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सक्सेना ,नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे, हरि मोहन निरंजन टी.आई.आर.पी.एफ., एम.के .पाटिल टी आई जी आर पी शिवराम सिंह सब इंस्पेक्टर आर. पी. एफ. के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर एवं द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विशाल बाल मेले मे विभिन्न व्यंजनो एवं पेय पदार्थो तथा विभिन्न खेलों के लगभग 100 स्टाल विद्यार्थियो द्वारा लगाए गए ।बाल मेले के दौरान विद्यार्थियों द्वारा गरबा, नृत्य और गायन की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गई।छिंदवाड़ा की गायिका श्रीमती अंजू विश्वकर्मा ने आकर्षक गीतों द्वारा उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष किशोर माथनकर , समाजसेवी मनोज विश्वकर्मा ,पार्षद श्रीमती ओमवती विश्वकर्मा , पार्षद सुनील उईके ,पार्षद रोहित हारोडे, लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेंडरी सीबीएसई स्कूल की प्राचार्या श्रीमती छंदा सरकार, यूनिवर्सल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल आमला की प्राचार्या श्रीमती रश्मि सोनी, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर के एडवोकेट शाहीद उल्ला बेग तथा विद्यालय के शिक्षक तथा शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती सोनिका जोशी एवं रितु गुगनानी ने किया हसिब बेग ने उपस्थित अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया ।

सर्दियों में जंगल सफारी: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रकृति और वन्यजीवों का अद्भुत संगम

Jungle Safari in Winter: Amazing confluence of nature and wildlife in Bandhavgarh Tiger Reserve Kanha and Bandhavgarh tiger reserve घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है। अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं। उमरिया। Kanha and Bandhavgarh tiger reserve ऊंचे-ऊंचे साल के वृक्षों के बीच से होकर धरती को चूमती सूर्य रश्मियां, पक्षियों के कलरव, कुलांचे मारते हिरणों के झुंड और उन्मुक्त विचरण करते बाघ। घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है।अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा, पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं।पर्यटकों से संकोच नहीं करते बजरंग और छोटा भीमटाइगर स्टेट में सर्वाधिक बाघों की संख्या वाला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व है। 165 बाघों वाले इस राष्ट्रीय उद्यान में बजरंग और छोटा भीम नाम के बाघ लोगों को सर्वाधिक आकर्षित करते हैं। यह दोनों पर्यटकों के समक्ष आने में संकोच नहीं करते। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने वाले पर्यटक एक ही दिन में कम से कम दो टाइगर रिजर्व की सफारी कर सकते हैं। बांधवगढ़ में सुबह की सफारी करने के बाद पर्यटक कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय धुबरी टाइगर रिजर्व अथवा मुकुंदपुर टाइगर सफारी का भ्रमण आसानी से कर सकते हैं। इन सभी स्थानों की दूरी चंद घंटों की है। टाइगर स्टेट के टाइगर रिजर्व की बुकिंग के आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर के दूसरे पखवाड़ा से जनवरी के पहले पखवाड़ा तक एक लाख से ज्याद पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। अन्य प्रमुख स्थल बांधवगढ़ से कान्हा की दूरी महज 210 किलोमीटर है और सड़क बेहद शानदार है। पर्यटक रास्ते में पड़ने वाले घुघुवा जीवाश्म पार्क का भ्रमण भी कर सकते हैं। बांधवगढ़ आने वाले पर्यटक मुकुंदपुर टाइगर सफारी इसलिए जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें वहां सफेद बाघ की सतवीं-आठवीं पीढ़ी के दर्शन सुगम होते हैं। यहां से 129 किमी की दूरी पर मुकुंदपुर टाइगर सफारी तथा 84 किमी की दूरी पर संजय धुबरी टाइगर रिजर्व है। इस तरह पहुंचे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और दुबरी टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए जबलपुर केंद्र बिंदु है। जबलपुर हवाई अड्डे से सभी प्रमुख शहरों की कनेक्टिवटी है। जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक बांधवगढ़ पहुंच सकते हैं इसके लिए उमरिया स्टेशन उतरना होता है। कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर से 160 किमी तथा पेंच पार्क 170 किमी दूर है। वहीं संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जबलपुर से 350 किमी की दूरी पर है। ठहरने की व्यवस्था बांधवगढ़, पेंच, कान्हा और संजय दुबरी में रुकने के लिए अच्छे होटल और सर्वसुविधा संपन्न होम स्टे सुविधा है। यहां मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के गेस्ट हाउस भी पर्यटकों की अच्छी आवभगत करता है।

पटवारी: किसानों के सेवक और योजनाओं के आधारस्तंभ, लेकिन सरकार का ‘दुश्मन’?

Patwari: Servant of farmers and pillar of schemes, but ‘enemy’ of the government? मध्यप्रदेश के पटवारी—एक ऐसा अनोखा प्राणी, जिसे देख के किसान को तो राहत मिलती है, लेकिन सरकार की भृकुटियाँ तन जाती हैं। यह वो कर्मचारी है जो कागज़ों में सरकारी योजनाओं को मिट्टी में मिलाने का माद्दा रखता है, ताकि वो असल में किसान की ज़मीन पर उतर सकें। पटवारी, जो सीमांकन से लेकर नामांतरण तक के काम में हर किसान के लिए खड़ा होता है, उसे ही “दुश्मन” का तमगा मिल जाता है! और वेतन? अरे भाई, 5200-20200 ग्रेड पे में तो पटवारी अपनी रोटी-सब्जी और चाय का खर्च भी संभाल लें, यही क्या कम है! बाकी राज्यों में अगर उन्हें मोटी तनख्वाह मिलती है, तो वो बेकार की बात है, आखिर ये तो मप्र के पटवारी हैं। अब 24 सालों से एक ही वेतन पर डटे रहना भी तो एक मिसाल है, न? उनके लिए सिर्फ़ 258 रु का आवास भत्ता और 300 रु का यात्रा भत्ता काफी है। सरकारी योजनाओं की वाहवाही लूटने में भले सरकार आगे हो, पर ज़मीन पर इन्हें लागू करवाने का सारा दायित्व पटवारियों पर है। राजस्व महाअभियान की बात करें, तो पहले और दूसरे चरण में 80 लाख से अधिक मामलों का पटवारियों ने समाधान कर किसानों और आम जनता को राहत दी। लेकिन क्या मजाल कि सरकार ने कभी उनके इस योगदान का ढोल पीटा हो? तीसरे चरण में भी पटवारियों की भूमिका अहम रहेगी, लेकिन शायद फिर भी उनकी मेहनत का श्रेय कोई और ले जाएगा। सरकारी तकनीक की हालत यह है कि ई-बस्ता में काम ऑनलाइन होते हैं, मगर पटवारी के पास उपकरणों की किल्लत ऐसी कि कुछ को 2017 में मोबाइल दिए गए थे, जो अब कबाड़ बन चुके हैं। साफ्टवेयर ऐसे हैं कि जैसे कठिनाइयों की मीनार खड़ी कर दी गई हो। हर रोज़ नए-नए प्रयोगों के बीच पटवारी, किसानों की सेवा में लगा हुआ है, फिर भी उसे “दुश्मन” कहना कितना उचित है? यही तो विरोधाभास है कि किसान हितैषी को दुश्मन कहा जा रहा है। वो पटवारी जो सरकार की रीढ़ है, हर किसान के हक़ में खड़ा है, और जो बिना किसी नाम के सिर्फ़ अपने फर्ज को निभाता है, क्या उसे ये दुश्मनी का तमगा चाहिए?

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