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मुनाफा छुपाने का खेल, मप्र में बिजली कंपनी ने दिखाया 6044 करोड़ का ‘काल्पनिक’ घाटा, दाम बढ़ाने की तैयारी

A game of profit concealment, Madhya Pradesh power company shows ‘fictitious’ loss of 6044 crores, prepares to increase prices जबलपुर। बिजली कंपनियों ने प्रदेश में बिजली के दाम औसत 10.19 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। आयोग ने याचिका पर सुझाव और आपत्ति बुलाई है। इसमें बिजली विशेषज्ञों का दावा है कि बिजली कंपनी ने 6044 करोड़ का घाटा बताया है जबकि 9204 करोड़ रुपये के मनमाने आंकड़े आयोग के सामने रखकर इस घाटे को दर्शाया गया है ताकि बिजली की दर को बढ़ाया जा सके। बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को जो आपत्ति दी है उसमें दावा किया है कि 9204 करोड़ रुपये के आंकड़े गलत और तथ्यहीन है। विद्युत नियामक आयोग यदि इन आंकड़ों से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करेगी तो निश्चित ही घाटे की जगह मुनाफा नजर आएगा। 9204 करोड़ के फर्जी आंकड़े सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी काल्पनिक खर्च को बताकर बिजली कंपनियों का घाटा बताया है। उनके अनुसार पावर मैनजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक की सत्यापन याचिका में खारिज 3450.63 करोड़ रुपये पूरक बिजली खरीदी लागत की पुन: असंवैधानिक मांग की गई है। इसके अलावा 832.96 करोड़ रुपये अन्य लागत जो कि स्टेशन आधार पर आवंटित नहीं की जा सकी थी उसकी असंवैधानिक मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि ताप गृह से बिजली खरीदी का व्यय अलग है लेकिन अन्य व्यय का एक मुश्त यह राशि क्यों और किस लिए मांगी गई इसका कोई ब्यौरा नहीं है। पूरक बिल के नाम पर 2185 करोड़ रुपये मांगा है जबकि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने पहले ही साफ किया है कि पूर्ण वितरण दस्तावेज सहित प्रस्तुत नहीं करने पर यह राशि स्वीकृति नहीं होगी। अग्रवाल का कहना है कि विद्युत चोरी के कारण हुए नुकसान को उपभोक्ता से 696 करोड़ रुपये वसूल करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पिछले दस साल की वार्षिक राजस्व आवश्यक्ता में पूंजीकरण में संसोधन के तहत 623 करोड़ के अवैधानिक मांग की है। वहीं याचिका में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी का कार्य मात्र विद्युत वितरण कंपनी के लिए बिजली खरीद कर उपलबध कराना है किंतु मैनेजमेंट कंपनी समानांतर रूप से अवैधानिक रूप से बिजली खरीदी के लिए 438 करोड़ रुपये मांगे है।इसके साथ ही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जो राशि नहीं मांगी वो भी उल्लेखित है 5.15 करोड़ रुपये की मांग की गई है। मैनेजमेंट कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं पर दो वर्ष के ब्याज कि रुप में 774 करोड़ रुपये की मांग की है आपत्तिकर्ता ने इसे गलत मांग बताया है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर के लिए 197 करोड़ रुपये की मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को भेजे पत्र में दावा किया है कि अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने स्मार्ट मीटर के नाम पर राशि का भुगतान ही नहीं किया है ऐसे में यह राशि वसूल करना गलत है। 25 जनवरी तक आपत्ति-सुझाव मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ याचिका को लेकर 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद मप्र विद्युत नियामक आयोग आपत्ति और सुझाव के आधार पर प्रदेश के तीन शहर जबलपुर, भोपाल और इंदौर में जनसुनवाई का आयोजन करेगा।राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग से मांग की है कि इस बार आनलाइन की बजाए फिजिकल जनसुनवाई की जाए ताकि लोग अपनी बात बेहतर तरीके से कह सके।

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

The State Government is establishing AI as the cornerstone of citizen-centric, transparent and efficient governance: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य ने बनाये 4 प्रमुख स्तंभ : एसीएस दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने “AI for People, Planet, and Progress” के सिद्धांत पर आधारित एक स्पष्ट और दीर्घकालिक एआई रोडमैप तैयार किया है। राज्य का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब प्रयोगात्मक तकनीक नहीं, बल्कि शासन की एक मुख्य क्षमता बन चुकी है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य 4 प्रमुख सक्षम स्तंभों—अवसंरचना, डेटा, प्रतिभा और रणनीति को सुदृढ़ कर रहा है। … Read more

लोकायुक्त जांच के दायरे में आ सकते हैं पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह व ADM आर.पी. वर्मा, जिला प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल

Former Collector IAS Raghavendra Singh and ADM R.P. Verma may be subject to Lokayukta scrutiny; the district administration’s silence raises questions. संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा (आगर मालवा)। विश्वविख्यात मां बगलामुखी मंदिर के कोष में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित करोड़ों रुपये की राशि से जुड़े एक गंभीर प्रकरण ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा मांगी गई बिंदुवार रिपोर्ट अब तक जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे जांच की प्रक्रिया और प्रशासनिक भूमिका को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस ने दिनांक 25 अप्रैल 2025 को संबंधित सभी दस्तावेज एवं जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज दिनांक तक जिला मुख्यालय से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। क्या है पूरा मामलालोकायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत की गई शिकायत के अनुसार, निजी भूमि स्वामियों से संबंधित भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर तैयार किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद भूमि अधिग्रहण की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं थी।इसके बावजूद निजी भूमि को अधिग्रहण योग्य दर्शाने से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे मंदिर कोष से धनराशि व्यय होने की संभावना बनी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो कई प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह और ADM आर.पी. वर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावनासूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त द्वारा जिन पत्रों, आदेशों एवं अनुमोदनों से संबंधित जानकारी मांगी गई है, वे सभी जिला स्तर से जुड़े हुए हैं। ऐसे में आगर मालवा के पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह तथा वर्तमान अपर कलेक्टर (ADM) आर.पी. वर्मा की भूमिका भी लोकायुक्त जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में अनुमोदन की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि लोकायुक्त जांच में संबंधित दस्तावेजों की बिंदुवार समीक्षा की जाती है, तो उस अवधि में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण स्वाभाविक रूप से किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि फिलहाल यह पूरा मामला जांचाधीन है और किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।लोकायुक्त का पक्षउप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि संबंधित शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। जांच नियमानुसार जारी है।

मध्य प्रदेश में फिर तेज हुई दलित-आदिवासी राजनीति, कांग्रेस साधने के लिए मुद्दों को दे रही हवा

Dalit-tribal politics has once again intensified in Madhya Pradesh, with the Congress raising issues to gain traction. भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलित-आदिवासी राजनीति केंद्र में आ गई है। भले ही विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस दलित और आदिवासी समाज को फिर से अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाती दिख रही है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए विवाद से लेकर आदिवासी संगठनों के मुद्दों तक, कांग्रेस लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इन वर्गों के साथ खड़ी है। हाल ही में ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद ने दलित राजनीति को नया मुद्दा दे दिया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई नेता खुलकर दलित संगठनों के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए दलित अस्मिता से जोड़कर इसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया। ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस का यह रुख महज संयोग नहीं माना जा रहा। विधानसभा गणित और दलित-आदिवासी महत्वप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 35 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 सामान्य सीटों पर भी इन वर्गों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल इन मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और असंतोष के चलते दलित-आदिवासी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर रहा, जिससे 15 वर्षों बाद कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हालांकि 2023 में समीकरण बदले और भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीतिकांग्रेस का मौजूदा फोकस सिर्फ दलित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज पर भी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अधिकांश राजनीतिक जोर आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा आदिवासी समाज से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन रहा है। वर्मा को दिए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) समेत कई आदिवासी संगठन एकजुट हैं, जबकि ब्राह्मण समाज सरकार की निष्क्रियता से नाराज है। दिग्विजय सिंह और दलित एजेंडाप्रदेश में दलित राजनीति को धार देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में नया दलित एजेंडा तैयार किया जा रहा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस एजेंडे को लेकर गतिविधियां चलाई जाएंगी और 13 जनवरी 2027 को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2002 में भी दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते दलित एजेंडा लागू हुआ था, हालांकि उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का पलटवारभाजपा कांग्रेस की इस सक्रियता को महज “एजेंडा की राजनीति” बता रही है। प्रदेश के मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी वर्ग के विकास का नहीं रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने जाति को जाति से लड़ाने का काम किया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति करती है। 2028 से पहले सियासी तापमानकुल मिलाकर, 2028 के चुनाव से काफी पहले ही मध्य प्रदेश में दलित-आदिवासी राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास और समरसता के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

नलखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 20 हजार की चाइनीज डोर जप्त

Nalkheda police take major action, seize Chinese rope worth Rs 20,000 संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में चाइनीज डोर से होने वाली दुर्घटनाओं और बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संक्रांति पर्व के दौरान जिला दंडाधिकारी महोदय द्वारा जारी आदेशों के पालन में नलखेड़ा पुलिस ने प्रतिबंधित चायनीज माझा के विरुद्ध विशेष कार्रवाई की। थाना प्रभारी नलखेड़ा के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने नगर में जांच अभियान चलाया। इसी क्रम में नलखेड़ा निवासी मुकेश पिता रमेश चंद्र जैन, उम्र 42 वर्ष, निवासी महावीर मार्ग, नलखेड़ा की बगलामुखी मंदिर रोड स्थित बेकरी की दुकान पर दबिश दी गई। जांच के दौरान दुकान की आड़ में छुपाकर रखा गया प्रतिबंधित चायनीज माझा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से चायनीज माझा के 13 छोटे-बड़े चकरे, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 20,000 रुपये है, जप्त किए। जप्ती के पश्चात नलखेड़ा पुलिस द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित चायनीज डोर का उपयोग, विक्रय या भंडारण न करें। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आमजन, पशु-पक्षियों और राहगीरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मां बगलामुखी मंदिर के कोष में जमा करोड़ों की राशि हड़पने की साजिश की शिकायत, जिला मुख्यालय से आज तक नहीं दी गई रिपोर्ट

A complaint has been filed alleging a conspiracy to embezzle crores of rupees deposited in the treasury of the Maa Baglamukhi Temple, but the district headquarters has not yet submitted a report. संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा /आगर मालवा। पूरे विश्व में प्रख्यात मां बगलामुखी मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप चढ़ाई जाने वाली करोड़ों रुपये की राशि पर कुछ लोगों की गिद्ध दृष्टि लगी होने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस संबंध में पूर्व में एक विस्तृत शिकायत की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज दिनांक तक जिला मुख्यालय स्तर से कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2025 को पत्र जारी कर निश्चित समयावधि में बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे,परंतु आज तक कलेक्टर जिला आगर मालवा द्वारा इस संदर्भ में कोई जानकारी लोकायुक्त पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई। इस स्थिति को लेकर यह प्रश्न खड़े हो रहे हैं कि कहीं जानकारी जानबूझकर रोकी तो नहीं जा रही और क्या वास्तविक तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत सही पाए जाने पर अधिकारियों पर गिर सकती है गाज कार्यालय पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन को की गई शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार निजी भूमि स्वामियों एवं तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आपसी साठगांठ कर फर्जी भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव के तहत मंदिर से लगी निजी भूमि को अधिग्रहित दर्शाकर भूमि स्वामियों को करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि दिए जाने की योजना बनाई गई, जिसमें तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता बताई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त कार्यालय में साक्ष्यों सहित शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद मंदिर के कोष में जमा करोड़ों रुपये की धनराशि को निकालने के उद्देश्य से षड्यंत्रपूर्वक दस्तावेज तैयार किए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। लोकायुक्त द्वारा जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा निम्नलिखित पत्रों एवं आदेशों से संबंधित जानकारी एवं प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे— पत्र क्रमांक /अक/स्टेनो/2023/455 दिनांक 06.12.2023, अपर कलेक्टर द्वारा तहसीलदार से जानकारी प्राप्त करने हेतु पत्र क्रमांक री/12023/1292 दिनांक 20.12.2023, तत्कालीन तहसीलदार द्वारा पालन में भेजा गया पत्र क्रमांक री/2024/04 सुसनेर, दिनांक 01.01.2024, एसडीओ सुसनेर द्वारा अपर कलेक्टर को पत्र क्रमांक /492/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 09.09.2024, कलेक्टर के अनुमोदन पश्चात निजी भूमि से प्रतिबंध हटाने संबंधी आदेश पत्र क्रमांक /671/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 28.11.2024, संभावित अधिग्रहण बताकर निजी भूमि पर प्रतिबंध पत्र क्रमांक आ/का/देव/2024/641 दिनांक 09.10.2024, तहसीलदार नलखेड़ा द्वारा पत्र क्रमांक रि/2024/1929 दिनांक 10.10.2024 पत्र क्रमांक भू-अर्जन/2024/646 दिनांक 25.11.2024, अपर कलेक्टर द्वारा आयुक्त उज्जैन को पत्र क्रमांक 6496/देव/भू-अर्जन/2024 दिनांक 17.12.2024, आयुक्त उज्जैन पत्र क्रमांक 04/भू-अर्जन/2024 दिनांक 02.01.2025, धर्मस्व विभाग को पत्र क्रमांक एफ/आरटीई/2049/2025 दिनांक 13.09.2025, धर्मस्व विभाग भोपाल द्वारा की गई जांच इसके अतिरिक्त यह भी निर्देश दिए गए थे कि यदि इस शिकायत से संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या पूर्व जांच उपलब्ध हो, तो उसकी प्रमाणित प्रति भी दिनांक 25.04.2025 को कार्यालयीन समय में विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, बृहस्पति भवन, कोठी पैलेस के सामने, उज्जैन संभाग में उपलब्ध कराई जाए। लोकायुक्त का बयान इस संबंध में उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि उक्त शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन वहां से अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और लोकायुक्त जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि मां बगलामुखी मंदिर जैसे पवित्र स्थल के कोष की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

मकर संक्रांति पर सहारा समाचार टीम संग विधायक अभिलाष पांडे ने मनाया उत्सव, पतंगों से सजा आसमान

MLA Abhilash Pandey celebrated Makar Sankranti with the Sahara News team, the sky was decorated with kites. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सहारा समाचार टीम ने उत्तर मध्य के लोकप्रिय विधायक अभिलाष पांडे के साथ मिलकर पारंपरिक उल्लास और सामाजिक सौहार्द के साथ पर्व मनाया। इस अवसर पर पतंगबाजी का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आसमान, बच्चों की हँसी और “काई पो छे” की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। विधायक अभिलाष पांडे ने स्वयं पतंग उड़ाकर क्षेत्रवासियों के साथ खुशियाँ साझा कीं और सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करते हैं।सहारा समाचार टीम की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हुई। स्थानीय नागरिकों ने इसे जनप्रतिनिधि और जनता के बीच आत्मीय संवाद का सशक्त उदाहरण बताया। कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता और उत्सव की भावना को और प्रगाढ़ किया।

आवरिया से ठानी होते हुए बेलोड सारणी तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्यारह गांव के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा ।

Villagers from eleven villages reached the Collector’s office and submitted a memorandum demanding construction of a road from Awariya to Thani via Belod Sarni.  हरिप्रसाद गोहे आमला। आवरिया ठानी सारणी के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से  कोई ग्यारह गांव के रहवासियों की मौजूदगी में कलेक्टर कार्यालय पहुंच कलेक्टर से आवरिया ठानी बेलोंड होते हुए सारनी पहुंच मार्ग बनाए जाने पुरजोर मांग की गई। इस दौरान कलेक्टर ने विस्तार से ग्रामीणों की समस्या सुनी और समस्या का निराकरण करने बात ग्रामीणों से कही। वही आमला विधायक डॉक्टर योगेश पांडागरे ने भी सड़क मार्ग का सर्वे करवाकर समस्या का उचित हल निकालने बात कहीं। प्रेषित ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों बताया वर्तमान में आमला से सारनी जाने के लिए 35 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है, जबकि आवरिया-ठानी मार्ग बनने से दूरी कम हो जाएगी और यातायात सुरक्षित होगा। साथ ही समय की बचत भी कम होंगी। इस दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण नहीं किया जाता है, तो वे आंदोलन, भूख हड़ताल जैसे कार्यक्रम आयोजित करेंगे। कलेक्टर ने ग्रामीणों को समस्या निराकरण का भरोसा दिलाया है। ज्ञापन सौंपते समय सैकड़ों से अधिक की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहें।

विधायक योगेश पंडाग्रे, नपा अध्यक्ष नितिन गाडरे ने किया करोड़ों से अधिक लागत के निर्माण कार्यों का भूमि पूजन।

MLA Yogesh Pandagre, Municipal Council President Nitin Gadre performed the ground breaking ceremony of construction works costing more than crores. हरिप्रसाद गोहे आमला। बीते लंबे समय समय से नगर पालिका क्षेत्रांतर्गत आने वाला जनपद चौक, पिरमंजिल, बस स्टैंड, से चंद्रभागा नदी क्षेत्र विकास कि राह देख रहा था। जिसके लिए आमला सारनी विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे से लोग मांग भी कर रहे थे। लोगों से विधायक ने वादा भी किया था कि मेरे द्वारा शहर कि हर बुनियादी सुविधाओं को पूर्ण किया जाएगा । जिस पर आज शुक्रवार आमला विधायक ने अमल करते हुए आमला शहर के लिए बड़ी सौगात कहीं जाने वाली (2 करोड़ 8 लाख से शहर में होने वाले निर्माण कार्यों का मुख्य मंत्री अधोसंरचना शहरी विकास योजना (चतुर्थ चरण) अंतर्गत निर्माण कार्यों का भूमि पूजन कर आमजन से किया वादा को पूरा किया।जल्द ही शहर दूधिया रौशनी से जगमगाएगा, आमला शहर में स्ट्रीट लाईट,रोड़ नाली, डीवाइडर  जैसी बुनियादी मूलभूत सुविधाओं से परिपूर्ण होंगा। भूमि पूजन कार्यक्रम का विधिवत् भूमि पूजन विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे, नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे, नगर पालिका उपाध्यक्ष किशोर माथनकर, परिषद् के गणमान्य पार्षद गण एवं आमजन कि गरिमामय उपस्थिति में शहर के जनपद चौक पर किया गया। नगर पालिका परिषद् आमला के बैनरतले नगर पालिका स्कूल परिशर में भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे मौजूद रहे।वहीं कार्यक्रम कि अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे, नपा उपाध्यक्ष किशोर माथनकर दौरा की गई। विषेश अतिथि बतौर रामकिशोर देशमुख सांसद प्रतिनिधि, प्रदीप ठाकुर विधायक प्रतिनिधि, गणमान्य पार्षद गण, पत्रकार गण, सहित आमजन मौजूद रहे। कार्यक्रम की विधिवत् शुरुवात अतिथियों द्वारा डॉक्टर बाबा साहब अबेडकर प्रतिमा के समक्ष पूजन कर किया गया। बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी नितिन कुमार बिज़वे द्वारा शहर में किए जाने वाले निर्माण कार्यों से जुड़े विचार आमजन के बीच रख कार्यक्रम कि शुरुवात कि।  अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे ने आमला शहर को दो करोड़ आठ लाख रुपए की मुख्य मंत्री अधोसंरचना शहरी विकास निधि से मिली सौगात को कहा यह में अकेला और विधायक जी की सहभागिता नहीं है। इस कार्य में मेरी पूरी परिषद् की सहभागिता है। जिनकी बदौलत यह सौगात मिली है। जिससे आमला शहर स्वक्ष और सुंदर बनेगा। वहीं विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे ने क्षेत्र वासियों को मिली सौगातों पर मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद ज्ञापित कर कहा। आमला का विकास मेरी पहली प्राथमिकता साथ ही आमला शहर के सौन्दरीयकरन के साथ यहां हर बुनियादी सुविधाए पूर्ण हो जिसके लिए में सतत प्रयासरत हु।

आमला पुलिस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दे रही जागरूकता संदेश।

Amla police is giving awareness message through street play. सड़क पर चलते समय, यातायात नियमों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का मूल मंत्र है (एस पी वीरेंद्र जैन) हरिप्रसाद गोहे आमला। सड़क सुरक्षा सप्ताह अंतर्गत जिला पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन ने आमजन से अपिल कर कहा यातयात नियमों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा का मूल मंत्र है। हेलमेट, सीट बेल्ट निर्धारित गति सीमा एवं नशे से दूरी अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार तथा समाज को सुरक्षित रख सकते है। दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति की सहायता कर आप एक नेक नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं तथा शासन की राहवीर योजना का लाभ भी प्राप्त कर सकते है। गौरतलब हो कि उक्त अभियान अंतर्गत आमला पुलिस इन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह रोड सेफ्टी अभियान अंतर्गत  थाना आमला में नगर निरीक्षक मुकेश ठाकुर के मार्ग दर्शन में आमला पुलिस,यातायात पुलिस बैतूल, ट्रैफिक वार्डन, व्यापारी संघ सदस्यों, एवं गणमान्य जनप्रतिनिधियों एवं आमजन की मौजूदगी में नगर के जनपद चौक एवं पुराने थाने के समाने आमजन को सड़क दुर्घटनाओं से बचाव एवं जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने पर राहवीर योजना के अंतर्गत शासन द्वारा उचित पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि, आर्थिक क्षति एवं पारिवारिक पीड़ा के बारे में प्रभावी ढंग से आमजन को अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त आमला नगर में भ्रमण कर वाहन चालकों को तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन न चलाने, हेलमेट एवं सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग, वाहन बीमा एवं पंजीयन, तथा शराब के सेवन के पश्चात वाहन न चलाने के संबंध में समझाइश दी गई, जिससे स्वयं के साथ-साथ परिवार एवं समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Indore Water Contamination: CAG ने 6 साल पहले चेताया था, सरकार सोती रही और 15 मौतें हो गईं; बोले नेता प्रतिपक्ष सिंघार

Indore Water Contamination: इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल और इंदौर की जल आपूर्ति को लेकर कैग (CAG) ने 2019 में ही गंदे पानी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। पढ़ें पूरी खबर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 2019 में ही गंभीर चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने न रिपोर्ट को गंभीरता से लिया और न ही सुधार किए। उमंग सिंघार ने ट्वीट कर कहा कि गंदे पानी की वजह से जानें जाना किसी हादसे का नतीजा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है। ADB से कर्ज, फिर भी साफ पानी नसीब नहींनेता प्रतिपक्ष ने याद दिलाया कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के जल प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (तब करीब 906 करोड़ रुपये) का कर्ज लिया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य हर नागरिक को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन कर्ज लेने के करीब 15 साल बाद 2019 में आई CAG रिपोर्ट ने इस पूरे प्रोजेक्ट को असफल और भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताया। कैग (CAG) रिपोर्ट, सिस्टम फेल होने की कहानीनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में केवल 4 जोन और भोपाल में सिर्फ 5 जोन में रोज पानी की सप्लाई हो रही थी।दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से महज 5.30 लाख को ही नल कनेक्शन मिल सके। इपलाइन लीकेज की शिकायतों पर नगर निगम 22 से 182 दिन तक लगाता रहा। 2013 से 2018 के बीच लिए गए 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए, लेकिन इन पर की गई कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लाखों लोगों तक पहुंचा गंदा पानीनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG की स्वतंत्र जांच में 54 में से 10 पानी के नमूने दूषित पाए गए, जिनमें गंदगी और मल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद था। इसके चलते भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख कुल 8.95 लाख लोगों को गंदा पानी सप्लाई हुआ। इसी अवधि में स्वास्थ्य विभाग ने 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले दर्ज किए। पानी गायब, जवाबदेही नदारदनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि गैर-राजस्व पानी (Non-Revenue Water) 30 से 70 प्रतिशत तक है, यानी इतना पानी कहां जा रहा है—किसी को पता नहीं। नियमित जल ऑडिट नहीं होने से बर्बादी और चोरी पर लगाम नहीं लग पाई। इसके अलावा दोनों शहरों में पानी के टैरिफ की वसूली भी नहीं हो सकी और नगर निगम पर 470 करोड़ रुपये का बकाया चढ़ गया। जरूरत से बहुत कम पानी मिल रहानेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG के मुताबिक, भोपाल में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन केवल 9 से 20 लीटर और इंदौर में 36 से 62 लीटर पानी की आपूर्ति हो रही थी, जो तय मानकों से काफी कम है। वहीं, ओवरहेड टैंकों की नियमित सफाई भी नहीं की जा रही थी। सरकार बिना मौत के नहीं जागतीउमंग सिंघार ने कहा कि CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न दोषियों पर कार्रवाई हुई और न व्यवस्था सुधारी गई। अब जब इंदौर में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, तब सरकार हरकत में आई है।उन्होंने सवाल उठाया जब रिपोर्ट पहले से थी, चेतावनी पहले से थी, तो सुधार क्यों नहीं किए गए? क्या सरकार हर बार त्रासदी के बाद ही जागेगी?

श्रमिक नेता राजेश आर रावत का जन्मदिन वनग्राम के बच्चों को गर्म कपड़े भेंट कर मनाया गया।

Labour leader Rajesh R Rawat’s birthday was celebrated by gifting warm clothes to the children of Vangram. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला क्षेत्र में “वैष्णव जन तो तेने कहिए,जे पीर पराई जाने रे” को चरितार्थ करने वाले समाजसेवी और नैशनल रेलवे मज़दूर यूनियन के रेलवे के श्रमिक नेता – राजेश आर रावत, वैसे तो रेल विभाग के कर्मचारी के रूप में अजनी (नागपुर) में पदस्थ हैं, लेकिन अपनी मातृभूमि आमला में आयोजित विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक गतिविधियों से भी सतत् जुड़े रहते हैं। श्रमिक नेता राजेश आर रावत के दोस्तों ने राजेश भाई के अपनी जन्मभूमि आमला के प्रति समर्पण को देखते हुए, इस बार उनके जन्मदिन को एक वनग्राम में मासूम बच्चों को ठंड से बचने के लिए गर्म वस्त्र और मिठाई बांटकर मनाया। इस अवसर पर राजेश आर रावत ने कहा कि आमला की पुण्य भूमि और यहां के लोगों ने मुझे और मेरे परिवार को भरपूर स्नेह और आशीर्वाद दिया है, इसलिए यह मेरा भी कर्तव्य है कि मैं उनके प्रति सदैव कृतज्ञ और समर्पित रहुं।

संरक्षण बनाम विकास: टाइगर कॉरिडोर के पास खनन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर सख्त शर्तों के साथ मंजूरी

Conservation vs. development: Mining and infrastructure near tiger corridors approved with strict conditions भोपाल। मध्यप्रदेश के बाघ आवास क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप में तीन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सतना जिले के आरक्षित वन क्षेत्र में एक चूना पत्थर खदान को सैद्धांतिक स्वीकृति देने की सिफारिश भी की गई है। समिति के अनुसार, पन्ना टाइगर रिज़र्व की टाइगर संरक्षण योजना के अंतर्गत स्वीकृत वन्यजीव कॉरिडोर के भीतर और आसपास की 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे पर दी जाएगी। यह कॉरिडोर पन्ना–बांधवगढ़–संजय टाइगर रिज़र्व के प्रमुख आवास क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है और बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा संजय डबरी और रातापानी टाइगर रिज़र्व में भूमिगत जल पाइपलाइन और बरना बांध से जुड़े ढांचागत कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सीमा से सटे मंडला जिले के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को सिफारिशी मंजूरी प्रदान की गई है। समिति ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं भले ही कोर या बफर ज़ोन में नहीं आतीं, लेकिन संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर के निकट होने के कारण यहां कड़े पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य होगा। कॉरिडोर के पास सख्ती जरूरीसमिति ने साफ किया कि प्रस्तावित खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के भीतर नहीं हैं, लेकिन पन्ना–बांधवगढ़ और कान्हा–अचानकमार जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित हैं। ऐसे में वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की प्राकृतिक आवाजाही पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए विशेष प्रबंधन और सतत निगरानी आवश्यक होगी। अक्टूबर माह में 266.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले AAA रिसोर्स लिमिटेड के चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, संबंधित प्राधिकरण और मध्यप्रदेश वन विभाग की संयुक्त समिति ने किया था। निरीक्षण में पाया गया कि पट्टे का दक्षिणी हिस्सा घने वनों से जुड़ा हुआ है और बाघों की आवाजाही के लिए उपयुक्त है, जबकि उत्तरी हिस्सा अपेक्षाकृत खंडित है। खनन सीमित, संरक्षण पर जोरसमिति ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शर्त रखी है कि दक्षिणी कॉरिडोर को हर हाल में सुरक्षित और मजबूत रखा जाए, खनन गतिविधियां सीमित दायरे में हों और आवास सुधार से जुड़े उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं। उद्देश्य साफ है—विकास परियोजनाओं के साथ-साथ बाघ संरक्षण और जैव-विविधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अंदर जनप्रतिनिधियों से मिल रहे थे साहब, बाहर जनता करती रहीं इंतजार, अनदेखी दिखी तो लोगों ने जमीन पर बैठकर किया प्रदर्शन।

Inside, the sir was meeting the public representatives, outside the public kept waiting, when they saw neglect, the people sat on the ground and protested. हरिप्रसाद गोहे आमला। बुधवार मध्य रेल महाप्रबंधक आमला जक्शन वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे थे। जिनसे मिलने क्षेत्र के गणमान्य जनप्रतिनिधि भी पहुंचे थे। इसके अलावा आमला नगर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न संगठनों के संगठन प्रमुखों के अलावा क्षेत्र कि जनता भी बड़ी संख्या में आमला रेल्वे स्टेशन में व्याप्त समस्याओं को जी एम के समक्ष रखने रेल्वे स्टेशन पहुंचे थे। बताया गया जी एम से मिलने के लिए बाकायदा लोगों द्वारा समय भी मांगा गया था। बावजूद जीएम से मुलाकात करने रेल्वे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का आलम दिखाई दिया। इतना ही नहीं क्या आम क्या खास लोगों के अलावा मीडिया कर्मी भी सुरक्षा में तैनात पुलीस कर्मियों के हस्ते धक्का मुक्की के शिकार होते दिखाई दिए। जिस बात से न खुश लोगों ने यात्री प्रतीक्षालय के गेट के समाने बैठकर जी एम से मिलने अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। बाद रेल अधिकारियों की समझाइश के बाद लोगों ने महाप्रबंधक से मुलाकात कर ज्ञापन प्रेषित कर रेल समस्या रखी। इस दौरान खास बात यह देखी गई स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य, आमला व्यापारी संघ अध्यक्ष, विभिन्न संगठन प्रमुखों सहित अन्य लोग साहब से मिलने खासे परेशान दिखाई दिए। उम्र दराज लोग भी हाथों में गुलदस्ता लेकर मिलने का इंतजार करते दिखाई दिए। जिस बात लोगों में खासी नाराजगी दिखाई दी।जिस बात की दिन भर शहर चर्चा रही। इन्होंने क्या कहा  मंडल स्तर के अधिकारियों को जी एम से मिलने का व्यवस्थित समय निर्धारण करना चाहिए जिसकी कमी देखी गई। पंडित राजेंद्र उपाध्याय वरिष्ठ अधिवक्ता,स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य मध्य रेल आमला।। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जी को चाहिए था कि वे व्यापारियों एवं हम लोगों को साथ ले जाकर महाप्रबंधक से मिलते उन्होंने मीडिया ओर हमसे मिलना  उचित नहीं समझा।  यशवंत चढ़ोकार स्टेशन सलाहकार समिति आमला।। हम जनता की समस्या बताने गए थे अ व्यवस्थाओं से एवं मिलने से रोके जाने से आत्म सम्मान को ठेस पहुंचती है। जिन अधिकारियों ने हमें मिलने के लिए बुलाया था वे प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर पाए। अनिल सोनी अध्यक्ष प्रगतिशील व्यापारी कल्याण संघ आमला।।

रेल्वे महाप्रबंधक ने किया आमला स्टेशन का वार्षिक निरीक्षण, सुनी आमजन कि समस्याएं।

Railway General Manager conducted annual inspection of Amla station, listened to the problems of the common people. हरिप्रसाद गोहे  आमला। मध्य रेल महाप्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता वार्षिक निरीक्षण करने आमला पहुंचे थे। जिन्होंने निरीक्षण के दौरान रेल्वे स्टेशन, रेल्वे अस्पताल एवं नव निर्मित रेल्वे कॉलोनी के साथ आमजन की समस्याएं सुन समस्या निराकरण करने बात कही। निरीक्षण के दौरान उनके साथ मंडल रेल प्रबंधक नागपुर विनायक गर्ग सहित रेल अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद रेल्वे स्टेशन स्थित यात्री प्रतीक्षालय में बैठकर महाप्रबंधक ने आमजन कि समस्याएं सुन ज्ञापन लेकर समस्या निराकरण करने बात कहीं। इस मौके पर नगर के विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों ने पहुंच कर अपनी, अपनी समस्याएं ज्ञापन के माध्यम जी एम गुप्ता के समक्ष रखी। इस दौरान रेल्वे कॉलोनी आमला आंबेडकर वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद ओमवती विश्वकर्मा ने रेल्वे कॉलोनी में व्याप्त समस्याओं पर ध्यानाकर्षण करा कालोनी की सुविधाओं में विस्तार करने ज्ञापन के माध्यम से बात कही। वहीं प्रगतिशील व्यापारी कल्याण संघ आमला के अध्यक्षा अनिल सोनी ने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ पहुंच क्षेत्रवासियों की अति महत्वपूर्ण मांग रेल्वे की रिक्त पड़ी भूमि पर रेल्वे की नई परियोजना ईकाई स्थापित करने विभिन्न बिंदुवार ज्ञापन प्रस्तुत कर समस्या निराकरण करने जी एम से मांग की। इस मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी रेल अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

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