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प्रधानमंत्री बनने के बाद 18 जून को काशी आएंगे पीएम मोदी, किसान सम्मेलन को करेंगे संबोधित

 वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी आएंगे। इस दिन वो किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कहा कि केंद्र में तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला वाराणसी दौरा होगा। काशी क्षेत्र के भाजपा मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने कहा कि अभी तय नहीं है कि ये कार्यक्रम वाराणसी में कहां आयोजित होगा। किसान सम्मेलन के लिए भाजपा जगह की तलाश कर रही है। कार्यक्रम रोहनिया या सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियों पर चर्चा के लिए गुलाब बाग स्थित पार्टी कार्यालय में वाराणसी भाजपा पदाधिकारियों की एक बैठक हुई। पटेल ने कहा कि किसान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी बाबा काशी विश्वनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ही किसान सम्मान निधि की राशि जारी की है। राष्ट्रपति भवन में रविवार शाम पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले पीएम मोदी ने सोमवार सुबह करीब 9.3 करोड़ पात्र किसानों के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की राशि जारी करने से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किये। किसान सम्मान निधि के तहत हर किसान को साल में तीन बार दो-दो हजार रुपये की किस्त दी जाती है। केंद्र सरकार ने योजना की 16वीं किस्त चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले 28 फरवरी को जारी की थी।

भारतीयों की सुरक्षा सबसे पहले, पाकिस्तान को भारत की शर्त पर ही मिलेगा दोस्ती का हाथ

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने पीएम मोदी को तीसरी बार शपथ लेने पर बधाई तो भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी नेता को साफ कर दिया कि भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। वैसे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पीएम मोदी को बधाई संदेश भेजा था, लेकिन उनके बड़े भाई नवाज शरीफ के संदेश में गर्माहट ज्यादा थी। पीएमएल-एन मुखिया नवाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, ‘तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी जी को मेरी हार्दिक बधाई। हाल के चुनावों में आपकी पार्टी की सफलता आपके नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दिखाती है।’ इसके साथ ही उन्होंने भारत से दोस्ती की पहल भी की। शरीफ ने आगे लिखा, ‘आइए हम नफरत की जगह उम्मीद को लाएं और इस अवसर का लाभ उठाते हुए दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों का भविष्य संवारें।’ पीएम मोदी ने नवाज शरीफ के संदेश की तारीफ की तो भारत का रुख भी साफ कर दिया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत के लोग हमेशा शांति और सुरक्षा तथा प्रगतिशील विचारों के पक्षधर रहे हैं। हमारे लोगों की भलाई और सुरक्षा को आगे बढ़ाना हमेशा हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।’ पीएम मोदी ने दिया साफ संदेश पीएम मोदी का संदेश साफ बताता है कि मोदी 3.0 में भी भारत का रुख यही रहने वाला है कि पाकिस्तान को अगर भारत से दोस्ती करनी है तो उसे पहले आतंकवाद और आतंकवादियों को पालना बंद करना होगा। भारत ने पहले भी कहा है कि पाकिस्तान से बात तब ही हो सकती है जब यह भरोसा दिलाए कि वह भारत के खिलाफ अपने जहरीले मंसूबों को रोकना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि मोदी ने अपने संदेश ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पार से आतंकवाद को समाप्त करने की शर्त को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है। नवाज शरीफ ने मानी थी पाकिस्तान की गलती नवाज शरीफ भारत के साथ दोस्ताना संबंधों के पक्षधर रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के साथ दोस्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। नवाज शरीफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान ही भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए थे, जहां दोनों पक्षों ने लंबित मुद्दों को बातचीत से हल करने पर सहमति जताई थी लेकिन इसके कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने धोखा देते हुए कारगिल में घुसपैठ की जिसने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया।

सिंगापुर के पीएम ने दी बधाई ‘PM मोदी उल्लेखनीय परिवर्तनों के नेतृत्वकर्ता हैं’

संयुक्त राष्ट्र,  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरे कार्यकाल की शुरुआत पर बधाई दी और वह उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, “भारत की जनता और सरकार को इस बड़े पैमाने पर चुनाव आयोजित करने के लिए बधाई, जो दुनिया में कहीं और नहीं देखा गया है। देश भर में लगभग 1.1 करोड़ मतदान कर्मचारियों द्वारा संचालित लगभग 10 लाख पोलिंग स्टेशनों पर करीब 64.2 करोड़ नागरिकों ने वोट डाला था। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत में उल्लेखनीय परिवर्तनों का नेतृत्वकर्ता बनाया है। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक पत्र में पीएम वॉन्ग लिखते हैं, मुझे पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी आपके नेतृत्व में भारत तेजी से समृद्ध और विकसित होगा। उन्होंने भारत-सिंगापुर के बहुआयामी एवं मधुर संबंधों का जिक्र करते हुए लिखा, अगले वर्ष हमारे राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ है। हम इस मौके पर साझेदारी को बढ़ाने डिजिटलीकरण, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देंगे। वॉन्ग पिछले महीने ही सिंगापुर के प्रधानमंत्री बने हैं। उन्हें ली सीन लूंग से सत्ता मिली है, जिन्हें नरेंद्र मोदी के करीबी मित्रों में एक माना जाता है। और मजबूत होगी भारत-द. अफ्रीका के बीच साझेदारी : रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई। मोदी भारत के लोगों के प्रति उनके समर्पण के लिए भी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने भारत की जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी बधाई दी। साथ ही कहा, भारत-दक्षिण अफ्रीका एक रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में इस साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है। भारत से हुए समझौतों की समीक्षा कर रही मालदीव की संसद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु जब भारत में पीएम मोदी के शपथ समारोह में शामिल हो रहे थे, उसी दौरान मालदीव की संसद ने 2018 से 2023 के बीच दोनों देशों में हुए चार समझौतों की जांच शुरू कर दी। इनमें 2018-2023 के बीच हाइड्रोग्राफी संधि, उत्तरी थिलाफाल्हू में सैन्य डॉकयार्ड संधि, डोर्नियर विमान व हेलिकॉप्टर संधि की जांच शुरू की है।   सियासी, आर्थिक स्थिरता का संदेश है मोदी-3.0 कार्यकाल : यूएसआईबीसी भारत-अमेरिकी व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने कहा है कि नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल भू-रणनीतिक अनिश्चितता के बीच राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता का एक मजबूत संदेश दे रहा है। परिषद के अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा, मोदी का यह कार्यकाल इसलिए भी अहम है क्योंकि विश्व स्तर पर कट्टरपंथ के बीच भारतीय वोटरों ने विकास का समर्थन किया है। यह समर्थन भारत को समृद्धि और तकनीकी नवाचार के आधार के साथ अमेरिका का अहम भागीदार भी बना रहा है।

Modi 3.0: मोदी सरकार 3.0 का गठन हो चुका, कुछ हारे हुए नेताओं को भी दिया गया मंत्री पद

नई दिल्ली नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बन गए हैं। रविवार को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मोदी के साथ ही 71 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 30 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री हैं। ज्यादातर पुराने चेहरों को ही नई सरकार में जगह मिली। लेकिन मोदी सरकार 3.0 में एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिला है। वहीं नए मंत्रिमंडल में लगभग हर राज्य का प्रतिनिधित्व है। केरल से दो मंत्रियों को बनाया गया है, पंजाब से भी मंत्री बनाए गए हैं। ये बताता है कि सरकार का केरल और पंजाब पर फोकस है, और हो भी क्यों न पहली बार केरल में कमल खिला है। वहीं पंजाब में बीजेपी का वोट शेयर 9 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया। सबका साथ: मोदी मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरणों का पूरा ख्याल मोदी सरकार 3.0 में सामाजिक समीकरणों का पूरा ख्याल रखा गया। प्रधानमंत्री के बाद सबसे पहले राजनाथ सिंह ने फिर अमित शाह, फिर नितिन गडकरी और फिर जेपी नड्डा ने शपथ ली। नड्डा के बाद शिवराज सिंह चौहान, फिर निर्मला सीतारमण, फिर एस जयशंकर और उनके बाद मनोहर लाल खट्टर ने शपथ ली। सहयोगी दलों में से सबसे पहले जेडीएस के एचडी कुमार स्वामी ने शपथ ली। एनडीए सरकार में जिन 71 मंत्रियों ने शपथ ली उनमें 27 ओबीसी, 10 एससी, 5 एसटी और 5 माइनॉरिटी से हैं। हालांकि कोई भी मुस्लिम मंत्री नहीं बना है। मोदी सरकार 3.0 में महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहेगा। कैबिनेट मंत्री के तौर पर 2 महिलाओं को शामिल किया गया है। इसमें झारखंड से सांसद अन्नपूर्णा देवी और राज्यसभा सांसद निर्मला सीतारण शामिल हैं। वहीं राज्य मंत्री में 4 महिलाएं हैं। इसमें अपना दल की अनुप्रिया पटेल, बीजेपी की शोभा करंदलाजे, रक्षा खडसे और सावित्री ठाकुर, नीमूबेन बंभानिया शामिल हैं। गठबंधन के बोझ तले नहीं है मोदी 3.0 मोदी सरकार 3.0 के मंत्रिमंडल ने ये संदेश दिया है कि सरकार पर गठबंधन की कोई राजनीतिक मजबूरी नहीं है। मोदी के 71 मंत्रियों में से 60 से ज्यादा बीजेपी के ही हैं। इसके अलावा सरकार के टॉप-4 मंत्रिमंडल भी बीजेपी को ही मिलने के आसार हैं। एनसीपी को सरकार की ओर से एक मंत्री पद की पेशकश की गई, लेकिन एनसीपी के भीतर भी खींचतान के चलते इसका फैसला नहीं हो पाया। बीजेपी ने भी इस पर बहुत फोकस नहीं किया। यही हाल जेडीयू और टीडीपी का दिखा। भले ही खबरों में आया कि गठबंधन को बड़े मंत्री पद देने होंगे, लेकिन ऐसा नहीं दिखा।   इधर कांग्रेस ने भी तंज कसते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट शेयर करते हुए कहा था कि ‘अबकी बार बैसाखी सरकार’। लेकिन मोदी 3.0 ने साफ कर दिया कि नई सरकार में उनका पुराना अंदाज कायम रहेगा।   तीसरे टर्म में आजमाए नामों पर भरोसा मोदी सरकार 3.0 में कई आजमाए नामों पर ही भरोसा रखा गया है। पहले ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि अपने तीसरे टर्म में नरेंद्र मोदी पूरी तरह नई टीम बना सकते हैं। सरकार के स्तर पर नई टीम दे सकते हैं। मगर, 71 मंत्रियों के शपथ में राजनीतिक मजबूरी दिखी। 10 वर्षों के शासन में मात्र 14 ऐसे मंत्री रहे जो पीएम मोदी के तीनों कार्यकाल में मंत्री बने रहे। जो नाम तीनों टर्म में कॉमन रहे वे हैं- राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, जितेंद्र सिंह, राव इंद्रजीत सिंह, मनसुख मांडविया, किरेन रिजिजू, सर्वानंद सोनेवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, अनुप्रिया पटेल, हरदीप पुरी और धर्मेंद्र प्रधान। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि BJP के अंदर क्या मंत्रियों को उनके पुराने मंत्रालय ही रिपीट होंगे।   चुनाव में हार के बाद भी बनाया मंत्री नई सरकार में पीएम मोदी ने कुछ ऐसे मंत्रियों को भी शामिल किया है, जो लोकसभा चुनाव हार गए थे। सबसे हैरतअंगेज रहे नामों में पंजाब के लुधियाना से ‌BJP उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू और तमिलनाडु के नीलगिरी के उम्मीदवार एल. मुरुगन माने जा रहे हैं। पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू ने चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थामा था। वहीं मोदी सरकार में राज्यमंत्री रहे एल. मुरुगन DMK के ए. राजा से हारे थे। मोदी ने इन दोनों को मंत्रिमंडल में जगह देकर पंजाब और साउथ के राज्यों को संदेश दिया है। माना जा रहा है कि BJP ने भावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए हारने के बावजूद पंजाब में एक जट सिख चेहरे पर दांव लगाया है, ये कदम बीजेपी को पंजाब में फायदा दिला सकता है।   कौन-कौन ड्रॉप हुए? अब तक केंद्रीय मंत्री रहे अनुराग ठाकुर, स्मृति इरानी, अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे, नारायण राणे, पुरुषोत्तम रूपाला, आरके सिंह को इस बार जगह नहीं मिला। अनुराग ठाकुर हिमाचल से, नारायण राणे महाराष्ट्र से और पुरुषोत्तम रूपाला गुजरात से चुनाव जीते हैं। चुनाव के दौरान रुपाला के एक बयान को लेकर खासा विवाद हुआ था और राजपूत संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। स्मृति इरानी ने जहां 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को अमेठी से हराया था, वहीं इस बार वह अमेठी से चुनाव हार गई हैं। अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे और आरके सिंह भी चुनाव नहीं जीत पाए। पिछली सरकार में राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी सरकार में जगह नहीं मिली। उन्होंने केरल से कांग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन करीबी मुकाबले में हार गए। मंत्रिमंडल की औसत उम्र 59 साल मोदी सरकार 3.0 की औसत उम्र 59 साल है। पिछली बार यह औसत उम्र 61 साल थी, हालांकि 2021 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में यह घटकर 58 साल रह गई थी। इस बार सबसे उम्रदराज मंत्रियों में 79 साल के जीतनराम मांझी हैं तो वहीं सबसे कमउम्र के टीडीपी के 36 वर्षीय के राममोहन नायडू और बीजेपी की 37 वर्षीया रक्षा खड़से हैं। पीएम नरेंद्र मोदी को मिलाकर उनकी सरकार में लगभग एक दर्जन चेहरे 70 साल या उससे ज्यादा के हैं। सरकार में महिला और युवा चेहरे मोदी सरकार में इस बार युवा और महिलाओं का एक संतुलन दिखा। हालांकि महिलाओं को … Read more

PM मोदी के मंत्रिमंडल में 7 महिलाएं शामिल, निर्मला सीतारमण-रक्षा खडसे समेत इनको मिला मौका

नईदिल्ली नई केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुल 7 महिलाओं को शामिल किया गया है, जिनमें 2 कैबिनेट मंत्री बनाई गई हैं। वहीं, 5 जून को भंग की जा चुकी पिछली मंत्रिपरिषद में कुल 10 महिला मंत्री थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी, ​​राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार, साध्वी निरंजन ज्योति, दर्शना जरदोश, मीनाक्षी लेखी और प्रतिमा भौमिक को 18वीं लोकसभा की मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली। नई मंत्रिपरिषद में पूर्व केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी, शोभा करंदलाजे, रक्षा खडसे, सावित्री ठाकुर और निमुबेन बांभनिया और अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल को शामिल किया गया है। सीतारमण और अन्नपूर्णा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि शेष ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। लोकसभा चुनाव में इरानी, पवार और ज्योति अपनी मौजूदा सीटों क्रमश: अमेठी डंडोरी और फतेहपुर से हार गईं। वहीं, जरदोश, लेखी और भौमिक को भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। आम चुनाव में 74 महिला उम्मीदवादों ने जीत दर्ज की और यह संख्या 2019 में निर्वाचित 78 महिला प्रत्याशियों की तुलना में कुछ कम है। मालूम हो कि रविवार शाम को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की और उनकी मंत्रिपरिषद के 71 सदस्यों ने शपथ ली। मंत्रियों की टीम युवा और अनुभवी लोगों का मिश्रण: मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने नए केंद्रीय मंत्रिपरिषद को युवाओं और अनुभवी लोगों का बेहतरीन मिश्रण बताया। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया, ‘मैं 140 करोड़ भारतीयों की सेवा करने और भारत को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मंत्रिपरिषद के साथ काम करने के लिए तत्पर हूं।’ नवनियुक्त मंत्रियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, ‘मंत्रियों की यह टीम युवा और अनुभवी लोगों का बेहतरीन मिश्रण है। हम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’ मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों का भी आभार जताया।  

योगी की राह पर मोहन

Mohan on the path of Yogiफैसलों मे दिख रहा है आत्मविश्वास. उदित नारायण मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के फैसलों मे उत्तरप्रदेश के फायरब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि नजर आने लगी है ! गुना बस हादसे पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक कड़े फैसले मे उन्होंने तत्काल प्रभाव से परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार खत्री और कलेक्टर तरुण राठी का तबादला करते हुए यह साफ सन्देश देने का प्रयास किया है कि प्रदेश मे अब कोई भी प्रशासनिक लापरवाही बर्दास्त नही की जाएगी ! एक तरफ जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री मंत्री बनते ही बुलडोज़र कार्यवाही को अंजाम दिलाया हो या धान खरीदी तथा तेंदुपत्ता खरीदी का मूल्य सुनिश्चित करना हो, या गुना हादसे पर ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्यवाही हो इन सभी फैसलों मे मुख्यमंत्री के आत्मविश्वास, और कड़े फैसले की झलक दिखाई देती है मुख्यमंत्री के ये कदम प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को पूर्ण करने का एक मजबूत कदम है..

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

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