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न्यू मार्केट में प्रीमियम सहित अन्य सार्वजनिक स्थान पर अवैध बन गईं पार्किंग हटेंगी.

Illegal parking, including in New Market and other public places, will be removed with fines. दो पहिया वाहनों को भी न्यू मार्केट के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा, पूरी मार्केट में अंदर एंबूलेंस को हर रास्ते पर ले जाकर की जाएगी जांच भोपाल। नगर निगम द्वारा न्यू मार्केट में अवैध पार्किंग और मार्केट के अंदर रास्ते जाम होने को लेकर अब सख्ती की जाएगी। मार्केट के अंदर के रास्तों पर काफी समय से दो पहिया वाहनों की लगातार बड़ रही अवैध पार्किंग और रास्ते जाम होने की शिकायत आ रही हैंए जिससे गत दिवस एक महिला के बेहोश होने के बाद एंबूलेंस प्रवेश नहीं कर पाई। इस महिला को बाद में आटो में बैठाकर बाहर एंबूलेंस तक लाया गया। आटो को बाहर तक लाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। नगर निगम कमिश्नर फ्रेंक नोब ए के अनुसार न्यू मार्केट के अंदर न तो किसी प्रकार के वाहन पार्क हो सकेंगे और न किसी वाहन को प्रवेश दिया जाएगा। इस संबंध में नए सिरे से प्लानिंग तैयार की जा रही है। जो अधिकारी इस संबंध में लापरवाही दिखा रहे थे, उन्हें भी हटा दिया गया। मार्केट के अंदर सभी रास्ते पूरी तरह से इस तरह से साफ किए जाएंगे कि अंदर किसी भी स्थान पर इमरजेंसी वाहन आ जा सकें। इस संबंध में नए अमले को तैनात किया जा रहा है। बाहर प्रीमियम पार्किग को भी अनुमति नहींनगर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के अनुसार न्यू मार्केट के बाहर प्रीमियम पार्किंग को लेकर भी काफी शिकायत आ रही हैं। यह पार्किंग काफी पहले ही फ्री कर दी गई हैं। यहां अभी कुछ लोग अभी भी अवैध वसूली कर रहे हैं। जबकि न्यू मार्केट की पार्किंग सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए निगम का पूरा अमला तैनात है। इस अमले को भी बदला जा रहा है। दुकानों के बाहर पार्क नहीं हो सकेंगे वाहननगर निगम अधिकारियों के अनुसार न्यू मार्केट के अंदर दुकानदारों के वाहन पार्क नहीं हो सकेंगे। इसको लेकर सभी दुकानदारों को चेतावनी दी जा चुकी है और इसके लिए मल्टीपार्किंग में व्यवस्था भी है। इसके बाद भी मार्केट में बाहर से आ रहे व्यापारी और स्टाफ मार्केट के अंदर वाहनों को पार्क कर रहे हैं। सोमवार को मार्केट का साप्ताहित बंद थाए इसके बाद भी नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी अमले ने कार्रवाई की।

पोस्टिंग के लिए, अफसरों ने तेज की मंत्रियों की ‘बंगला परिक्रमा’ यात्रा. 

For postings, officers conducted a ‘bungalow inspection’ tour of ministers with speed. गुलदस्ते के साथ पहुंचे, भरोसा जीतने के लिए कई ने पुराने के कामों का ब्यौरा, वरिष्ठ आईएएस और पुलिस मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ आईपीएस अफसरों की धड़कने तेज, पोर्टफोलियों के बाद नेता पोस्टिंग के लिए करेंगे सिफारिश . उदित नारायण भोपाल। प्रदेश नई सरकार के गठन के साथ ही ब्यूरोक्रेट्स की धड़कनें तेज हो गई है। जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों से लेकर मंत्रालय में पदस्थ वरिष्ठ आईएएस और पुलिस मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ आईपीएस अफसरों की भी धड़कने तेज हो गई कि उन्हें मलाईदार पोस्टिंग मिलेगी या नहीं मिलेगी। हालांकि कुछ अफसरों ने बंगला परिक्रमा शुरू कर दी है। अफसर गुलदस्ते के साथ मंत्रियों के बंगलों पर पहुंचने लगे हैं। कई अफसरों ने अपनी उपब्धियों की भी ब्यौरा भी पेश किया है। मंत्रियों ने भी अफसरों का मान रखा है और भरोसा दिलाया है। मध्य प्रदेश में ऐसे कई ब्यूरोक्रेट्स हैं, जो पिछल कई समय से सत्ता के बहुत करीबी थे, इसके चलते उन्होंने लगातार अच्छी पोस्टिंग मिल रही थी। अब जब मुख्यमंत्री बदल गए हैं तो ऐसे सभी अफसरों की बैचेनी बढ़ गई है। ऐसे अफसर अब नए मुख्यमंत्री की टीम में अपनी अच्छी पोस्टिंग को लेकर सक्रिय होने के रास्ते खोज रहे हैं। इसमें इन्हें कितनी सफलता मिलेगी यह तो उनकी प्राशसनिक सर्जरी में स्पष्ट हो जाएगा। हालांकि पिछले दिनों आधा दर्जन अफसरों के तबादले से जाहिर है कि बड़े स्तर पर फेरबदल किया जाएगा। जानकारी है कि अब पोर्टफोलियो मंत्रियों के बाद भी पोस्टिंग के लिए सिफारिश शुरू हो जाएगा।  लूप लाइन के अफसरों को दिन फिरने की उम्मीद – लंबे अरसे से लूप लाइन में पदस्थ आईपीएस-आईएएस को अब अपने दिन फिरने की उम्मीद जागी है। प्रदेश में ऐसे कई अफसर हैं, जो पिछली सरकार में अपनी पैठ नहीं बना सके थे, नतीजे में वे अच्छी पोस्टिंग से दूर थे। अब वे भी अच्छी पोस्टिंग पाने के प्रयास में लग गए हैं। पिछले साल में पूर्व सीएस की गुड लिस्ट शामिल नहीं थे। इसलिए बड़े जिलों से हटाकर निगम और मंडलों में बैठा दिया था। एसीएस, पीएस से लेकर कलेक्टर्स में पोस्टिंग को लेकर बैचेनी- एक दर्जन कलेक्टर ऐसे हैं जो पिछली सरकार के करीबी थे, अब इस सरकार में उनकी ट्यूनिंग कैसी होगी, इसे लेकर ब्यूरोक्रेसी में जमकर चर्चा है। इन्हें जिलों से हटाया जाएगा या इन्हें फिलहाल पदस्थ रखा जाएगा इसे लेकर अफसरों की धड़कने तेज हो चली है। ये सभी आईएएस अधिकारी नई सरकार में अपने कनेक्शन को तलाश रहे हैं। साथ ही अफसर नए हुकुमरानो को यह भी समझा रहे हैं कि वे पार्टी की विचारधारा से कितने प्रभावित है और किस हद तक जुड़े हुए हैं।

ग्वालियर सहित कई रेंज के डीआईजी-आईजी बदले जाएंगे,10 से अधिक एसपी के भी होंगे तबादले.

Several DIGs and IGs, including those from Gwalior range, to be transferred; transfers for more than 10 SPs as well. – पुलिस मुख्यालय की कई शाखाओं के मुखिया के भी काम काज में होगा बदलाव  उदित नारायण भोपाल। – इस साल के अंत में आईपीएस अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादले की कवायद शुरू हो गई हैं। चार रेंज के डीआईजी-आईजी के साथ ही पुलिस मुख्यालय की कई शाखाओं के मुखिया के भी काम काज में बदलाव होने जा रहा है। जिलों से भी एक दर्जन के लगभग पुलिस अधीक्षकों की बदली होने वाली है। डीआईजी रेंज में भी नए साल की शुरूआत में ही फेरबदल होने वाला है। पुलिस मुख्यालय से लेकर गृह विभाग तबादलों और पदोन्नति को लेकर अपने काम को अंतिम रूप देने में जुट गया है। पुलिस के लगभग दो दर्जन आईपीएस अफसरों के एक नए साल में प्रमोशन होना है। इनमें से तीन अफसर अभी जिलों में पदस्थ हैं। अमित सांघी छतरपुर में पुलिस अधीक्षक हैं, वहीं वीरेंद्र सिंह खंडवा और मनीष अग्रवाल इंदौर में डीसीपी के पद पर पदस्थ हैं। वहीं 2010 बैच के मोहम्मद युसूफ कुरैशी सिंगरौली में पुलिस अधीक्षक हैं और निमिष अग्रवाल, राजेश कुमार सिंह इंदौर में डीसीपी के पद पर पदस्थ हैं। इन 6 अफसरों की एक जनवरी को डीआईजी के पद पदोन्नति होना है, ऐसे में अब अफसरों को पदोन्नति के बाद नई पोस्टिंग दी जाएगी। प्रदेश की सात रेंज में पदस्थ अफसर एक जनवरी को आईजी के पद पर पदोन्नत होने जा रहे हैं। इनमें से कितनों को रेंज में आईजी बनाया जाएगा और कितनों को पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा, यह अभी तय नहीं हैं। चंद्रशेखर सोलंकी खरगौन,अनिल कुशवाह उज्जैन, आरआरएस परिहार जबलपुर,राजेश कुमार हिंगणकर इंदौर ग्रामीण, मनीष कपूरिया एडिश्नल कमिश्नर आॅफ पुलिस इंदौर, मिथलेष शुक्ला डीआईजी रीवा, अनुराग शर्मा एडिश्नल कमिश्नर आफ पुलिस भोपाल, ये सभी अफसर आईजी होने जा रहे हैं।ग्वालियर में नए आईजी की तलाश- ग्वालियर रेंज के एडीजी श्रीनिवास वर्मा प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई जा रहे हैं। उनके प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद यहां पर नए एडीजी या आईजी को पदस्थ किया जाएगा। यहां पर राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अफसर की पोस्टिंग होगी। वहीं पुलिस मुख्यालय में पदस्थ स्पेशल डीजी, एडीजी की शाखाओं में बदलाव हो सकता है।

कमीशन के लिए दुकान के नौकर आपस में लड़े, सीने में नुकीला हथियार से हत्या.

Shop employees fought over commission, one killed with a sharp weapon to the chest. कमीशन के लिए दुकान के नौकर आपस में लड़े, सीने में नुकीला हथियार से हत्यानोट खबर की फोटो मेल पर है।  -बैरागढ़ स्थित संत हिरदाराम शॉपिंग कांप्लेक्स में रविवार दोपहर हुए विवाद में युवक की निर्मम हत्या  भोपाल। बैरागढ़ थाना क्षेत्र स्थित संत हिरदाराम शॉपिंग कांप्लेक्स में रविवार दोपहर अलग-अलग दुकान में काम करने वाले युवकों के बीच कहासुनी हो गई। कहासुनी बढ़ने पर दोनों में मारपीट हुई और एक युवक ने दूसरे युवक के सीने पर किसी नुकेले हथियार से हमला कर दिया। सीने में हमला होने से युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, वहां डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। उसकी तलाश की जा रही है। थाना प्रभारी कमलजीत रंधावा ने बताया कि अंकित सिंह राजपूत मनोज सिंह राजपूत (22) बूढ़ाखेड़ा बैरागढ़ में रहता था। वह संत हिरदाराम शॉपिंग कांप्लेक्स स्थित श्रीमाया कलेक्शन में काम करता था। उसकी दुकान के बगल वाली दुकान में भरत सिंह काम करता है।  दोनों दुकान के बाहर खड़े होकर ग्राहकों को बुलाते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। रविवार को भी दोनों अपनी अपनी दुकान मालिकों की दुकान के सामने खड़े थे और ग्राहकों को बुला रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। कहासुनी से शुरू हुआ विवाद लात घूंसो में तब्दील हो गया और देखते ही देखते दोनों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। दुकान के बाहर रखा सामान जो भी हाथ में आता गया वह एक दूसरे पर फेंकते रहे और लातू घूंसे चलते रहे। इसी बीच भरत सिंह के हाथ में कोई नुकीली चीज लग गई और उसने अंकित पर नुकीली चीज से हमला कर दिया। उसके सीने में नुकीली चीज लगने से वह बेसुध होकर गिर गया था। अस्पताल में हुई मौत दोपहर करीब ढाई बजे के आसपास हुए इस विवाद के बाद अंकित को अस्पताल ले जाया गया, वहां सीने में गंभीर चोट होने के कारण उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी रंधावा ने बताया कि घटना के बाद से भरत सिंह फरार है। उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। उसकी तलाश की जा रही है।

पुलिस को सरेआम चुनौती देती हैं। बुलेट की पटाखेदार आवाज

Publicly challenges the police. Bullet’s crackling sound प्रतिबंध के बावजूद साइलेंसर बदलकर दौड़ा रहे बुलेट मलखान सिंह परमार, सहरा सामाचार अंबाह ! अंबाह शहर में बुलेट मे पटाखे की आवाज वाला साइलेंसर मोडिफाई करवाने वाले युवा यातायात नियमों का पालन करना ही भूल गए हैं। युवा वर्ग नियमों को दरकिनार कर बुलेट मोटरसाइकिल से पटाखे बजाना अपनी शान समझते हैं और जनून इस कदर छाया है कि वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। आलम यह है कि ऐसे युवा चालकों को पुलिस का भी डर नहीं रहा है। और शरारती तत्व सरेआम पुलिस को चुनौती देते हुए नजर आ रहे हैं। नगर के ज्यादातर स्कूल कॉलेज लगने के टाइम एक बुलेट पर तीन तीन सवार नौजवान जब बुलेट साइलेंसर मोडिफाई करवाकर काफी तेज गति में पटाखे बजाते हैं जैसे कि उनको पुलिस की परवाह ही नहीं है और लड़कियों पर गलत कमेंट बाजी भी करते हैं एवं तेज आवाज लोगों के लिए सिर दर्द बनी हुई है। इनका कहना है कि ऐसे लोग हमारे निशाने पर हैं शीघ्र कारवाई की जायेंगी मगर पालकों को भी बच्चों पर निगरानी करनी चाहिए जिससे बो भी नियम का पालन कर सके। टीआई आलोक परिहार इनका कहना है कि कलेक्टर के निर्देश अनुसार कोलाहल अधिनियम के तहत मॉडिफाइड साइलेंसर ध्वनि नियंत्रण के तहत चालान की कार्रवाई की जा सकती है जिसमें 5000 क जुर्माना हो सकता है। अर्चना परिहार आरटीओ मुरैना

अम्बाह नगर थाने मे 5 साल से अधिक पदस्थ कर्मचारियों की तानासाही

Dictatorship of employees posted for more than 5 years in Ambah Nagar police station सहारा सामाचार,अम्बाह अंबाह ! थाने में कई साल से पदस्थापना हुई पुलिस कर्मचारियों के तवादले ना होने के कारण उनकी मनमानी से आम जनता त्रस्त हैं! ना सट्टे वाले पर कार्यवाही नही हो रही है ना ही जुआ शराब की तो दुकान अनेक जगह खुली हुई है कार्रवाई के नाम पर जीरो थाना प्रभारी को कई बार अवगत को होने के बाद भी सट्टा वाले पर कार्रवाई नहीं नहीं कर रहे हैं यहां तक की देखा गया गली-गली में सट्टे की दुकान ऐसे खुली हुई है जैसे कि पुड़िया की दुकान हो पर पुलिस कर्मचारी जो कि कई सालों से टिके हुए इसलिए कार्रवाई नहीं करते हैं कि शायद इनके पास मोटी रकम जा रही हो इसलिए कार्रवाई नहीं करते जबकि खुलेआम सट्टा शराब और जुए के अड्डा चल रहे है पर कार्रवाई जीरो

नगर में सट्टे का कारोबार तेजी से फल फूल रहा जिम्मेदार अधिकारी मौन

Betting business is booming in the city, responsible officer silent विशेष संवाददाता मुरैनाअम्बाह ! मुरैना जिले के अम्बा में जुआ-सट्टे का कारोबार जोरो पर है। सूत्रों की माने तो चौराहे सहित अन्य स्थानों पर जुआ-सट्टे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। लेकिन यहां तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इन सटोरियो पर कार्यवाही करने नहीं पहुँच पा रहे है। और स्थानीय लोगों की मदद से यहाँ जुआ-सट्टे का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। युबाओ पर हो रहा सट्टे का असर:- जुआ-सट्टा जैसे संगीन अपराध यहाँ के युवा वर्ग के लोगों पर ज्यादा असर दिखाई पड़ रहा है। युवा वर्ग के लोग सट्टा एवं जुआ जैसे संगीन अपराध में संलिप्त हो रहे हैं।। लेकिन इस अपराध को हर कोई रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। नगर के चौराहा और बाजार में खुले आम सट्टे का कारोबार खूब चल निकला है। कभी कभार पुलिस दो-चार छोटे एजेंटों को पकड़ कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। जबकि हकीकत में यहाँ सटोरियों के कारनामों को जानने के बाद भी पुलिस के स्थानीय और आला अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। ओर यही वजह है कि यह कारोबार मेघनगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भी कॉफी फल फूल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब खुलेआम सट्टा खेल रहे हैं और उनमें पुलिस का भी कोई डर नहीं नजर आ रहा हैं। वहीं पुलिस भी इस पूरे मामले पर अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। नगर की तंग गलियों में काफी लोग सट्टे के धंधे में लगे हुए हैं। हालात देखकर लगता है कि इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं पुलिस इन सटोरियों पर बड़ी कार्यवाई नही कर रह हैं और लोग खुलेआम सट्टा लगा रहे हैं।

पुलिस लाइन में शुक्रवार को विदाई समारोह का आयोजित सम्पन्न.

The farewell ceremony in the police lineup was successfully organized on Friday. ग्वालियर ! पुलिस लाइन में शुक्रवार को एक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में हाल ही में सीबीआई में स्थानांतरित हुए रेंज के एडीजीपी डी श्रीनिवास वर्मा का विदाई समारोह भी रखा गया था। सम्मेलन में पुलिस कर्मियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभोज भी किया । इस दौरान पुलिसकर्मियों की व्यवहारिक समस्याओं को लेकर उनके विचारों अफसरों ने जाना और भविष्य में एक टीम भावना के साथ काम करने के लिए सभी पुलिस कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेरित किया। इस मौके पर एडीजीपी डी श्रीनिवास वर्मा ने बहादुर पुलिस कर्मचारियों का सम्मान भी किया। जिन्हें एक बदमाश को पकड़ने के दौरान गोली लगी थी। उन्होंने बावजूद इसके आरोपी को नहीं छोड़ा था और उसे कानून के हवाले किया था ।इनमें कपिल और रफीक नामक पुलिस कांस्टेबल शामिल थे। इनका नाम गैलंट्री मेडल के लिए भी अग्रेषित किया गया है। पुलिस अधीक्षक ने एडीजीपी डी श्रीनिवास वर्मा के कार्यकाल और उनके मार्गदर्शन की प्रशंसा की है और उनके कार्यकाल को एक बेहतर अफसर का कार्यकाल बताया है।

आरजीपीवी: वर्चस्व को लेकर दो गुटों में झगड़ा, एंटी रैगिंग सेल में दर्ज हुई शिकायत.

RGPV: Clash between two factions over dominance, complaint registered in the Anti-Ragging Cell. भोपाल। शुक्रवार को राजीव गांधी प्रौद्यागिकी विश्वविद्यालय में वर्चस्व को लेकर फिर से दो गुटों में झगड़ा हुआ। आरजीपीवी के यूआईटी में प्रथम वर्ष के छात्रों की रैङ्क्षगग को लेकर अंतिम वर्ष के छात्रों के दो गुटों में आपसी बहस के बाद झगड़े की बात सामने आई है। इस मामले में सूत्रों का कहना है कि पहले से सक्रिय भेल ग्रुप का नाम एक बार फिर से सामने आया है। यूआईटी केंपस के बाहर हुए झगड़े में दोनों गुटों के बीच तीखी बहस के बाद धक्कामुक्की हुई। बताया गया है कि दो दिन पहले प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों की रैगिंग अंतिम वर्ष के छात्रों ने की थी, जिसको लेकर भेल ग्रुप के छात्रों ने अंतिम वर्ष के छात्रों के साथ मारपीट कर दी। दोनों गुटों के बीच हुई मारपीट में एक छात्र शिवांक बह्मे के सिर में गहरी चोट बताई गई है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस पूरे मामले को एंटी रैगिंग सेल ने भी ऑनलाइन दर्ज कर लिया है। दो दिन से चल रहा झगड़ा अंतिम वर्ष के छात्र जैद खान का कहना है कि प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों की रैगिंग दो दिन से ली जा रही थी। कुछ सीनियर्स को इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हम लोगों से पूछताछ की। जैद का कहना है कि जूनियर पुलिस स्टेशन भी गए थे, लेकिन उस समय उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। शुक्रवार को पेपर के पहले हम लोग केंपस में कार से जा रहे थे, तभी कुछ सीनियरों ने आकर मारपीट शुरू कर दी। इसमें एक छात्र शिवांग को सिर में चोट आई है।

दस करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से सवा चार लाख रुपए की ठगी.

Defrauding a businessman of one and a half million rupees by luring him with the promise of a ten crore loan. भोपाल। एमपी नगर पुलिस ने तेलंगाना के कारोबारी की शिकायत पर एक जालसाज पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जालसाज ने दस करोड़ रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से 4 लाख 35 हजार रुपए ले लिए। लेनदेन का एग्रीमेंट भी किया था। तय सीमा पर लोन नहीं दिला पाने पर कारोबारी ने अपने रुपए वापस मांगे थे। रुपए नहीं लौटाने पर कारोबारी ने शिकायत की और एमपी नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया। पुलिस के अनुसार डॉक्टर देवेंदूकरी पिता सुरेश राव (63) तेलंगाना के है। वे कारोबारी व इन्वेस्टर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन अल्फा कंपनी के नाम से था। कंपनी ने अपने विज्ञापन के माध्यम से बताया था कि वह आसान किस्तों पर अधिक से अधिक लोन दिला सकती है। बदले में लोन राशि का एक प्रतिशत भुगतान देना पड़ेगा। दिए गए नंबर पर डॉक्टर देवेंदूकरी की बात लोन दिलाने वाली अल्फा कंपनी के संचालक किरण कुमार रथ से हुई। किरण कुमार रथ ने देवेंदूकरी को अपने दफ्तर एमपी नगर जोन क्रमांक टू स्थित आफिस बुलाया लिया। दफ्तर में बातचीत के दौरान देवेंदूकरी ने बताया कि उन्हे सीएनजी प्लांट में निवेश करना है और 10 करोड़ रुपए के लोन की आवश्यकता है। किरण कुमार ने कहा कि वे 10 करोड़ रुपए के लोन दिला देंगे बदले में कंपनी को 1 प्रतिशत के हिसाब से 10 लाख रुपए देने होंगे। देवेंदूकरी ने 4 लाख 35 हजार रुपए किरण कुमार की कंपनी में जमा करा दिए। 9 अक्टूबर को दोनों पक्षों के बीच अनुबंध भी हो गया।तीस दिन में कराना था लोनदेवेंदूकरी ने पुलिस को बताया कि अनुबंध में तीस दिन के भीतर लोन दिलाने की बात हुई थी, लेकिन एक महीने के भीतर लोन नहीं मिला। देवेंदूकरी ने अपने रुपए वापस मांगे तो आरोपी ने रुपए देने से मना कर दिया। इसके बाद एमपी नगर पुलिस समेत आलाधिकारियों को शिकायती आवेदन दिया गया था। आवेदन जांच के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी किरण कुमार रथ को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे रिमांड पर लिया गया है। आरोपी से पूछताछ में पता चला कि लोन दिलाने के नाम पर मनीष तिवारी नाम के एक युवक से भी 1 लाख रुपए ले चुका है। पुलिस को आरोपी किरन कुमार के साथी रवि शंकर उर्फ अविनाश दुबे की भी तलाश है।

सीएम डॉ. यादव ने एसीएस लेवल के अधिकारियों को सौंपी संभागीय बैठक की जिम्मेदारी.

CM Dr. Yadav assigned the responsibility of the regional meeting to the officers of the ACS level. पीएम मोदी की गारंटी और भाजपा के संकल्प को पूरा करने के लिए रहेगा लक्ष्य, रिव्यू के साथ करेंगे मानिटरिंग भोपाल। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने संभागीय बैठक के लिए एसीएस लेवल के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम ने अधिकारियों को संभाग बैठक के लिए प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेश के दस संभाग के लिए दस अधिकारियों की तैनाती की गई है। ये सभी अधिकारी संभागीय बैठक की न सिर्फ तैयारी करेंगे बल्कि बैठक के बाद बैठक में दिए गए सीएम के निदेर्शों की मॉनिटरिंग भी करेंगे। एसीएस स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने के पीछे की वजह है कि मध्य प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी को प्राथमिकता देनी है। यानी कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि गारंटियों को पूरा किया जाए। इसके साथ ही भाजपा के संकल्प को भी पूरा करने की चुनौती होगी। लोक स्वास्थ्य, वन विभाग, गृह, नर्मदा घाटी विकास प्रधिकरण, जनजातिय कार्य विभाग, वित्त विभाग, किसान कल्याण, पिछड़ा वर्ग, उच्च शिक्षा से जुड़े विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। दरअसल, सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालते ही संभागों की बैठक लेना शुरू किया है। उन्होंने इसकी शुरूआत अपने गृह संभाग उज्जैन से की थी। इसके बाद जिले वार समीक्षा के लिए अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है। अधिकारियों को भी फील्ड की जानकारी भी सीएम को देना होगा। खास बात है कि राजेश राजौरा को उज्जैन का प्रभार दिया गया है। सीएम बनने के बाद राजौरा ही पहले अधिकारी थे। जिन्होंने लाउड स्पीकर पर नियंत्रण का आदेश जारी कराया। उज्जैन में रहते हुए एसीएस राजौरा सीएम मोहन यादव के काफी भरोसेमंद अफसरों में शुभार रहे हैं। इन्हें बनाया प्रभारी एसीएस मोहम्मद सुलेमान को भोपाल संभाग, एसीएस विनोद कुमार को जबलपुर संभाग, एसीएस जेएन कंसोटिया को रीवा संभाग, एसीएस राजेश राजौरा को उज्जैन संभाग, एसीएस एसएन मिश्रा को सागर संभाग, एसीएस मलय श्रीवास्तव को इंदौर संभाग, एसीएस अजीत केसरी को नर्मदापुरम संभाग, एसीएस अशोक वर्णवाल को शहडोल संभाग, एसीएस मनु श्रीवास्तव को चंबल संभाग और एसीएस केसी गुप्ता को ग्वालियर संभाग की जिम्मेदारी दी गई।

नए पदों की मिली मंजूरी, 4 अफसर डीजीपी, 2 एडीजी,13 आईजी और 18 डीआईजी रैंक में होंगे पदोन्नत.

Approval granted for new positions, including 4 DIGs, 2 ADGs, 13 IGs, and 18 DIGs. 7 आईपीएस अधिकारियों को मिलेगा सिलेक्शन ग्रेड, जानिए सभी रैंक के आईपीएस अधिकारियों के नाम भोपाल। मध्यप्रदेश में आईपीएस अफसरों की पदोन्नति की राह अब आसान हो गई है। पदोन्नति के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के दो, महानिरीक्षक (आईजी) के तेरह, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के 18, और सलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति के लिए सात पदों की मंजूरी मिल गई है।पदोन्नति की बांट जोह रहे आईपीएस अफसरों के लिए अच्छी खबर है। नये साल से इन अफसरों को पदोन्नतियां मिलने लगेंगी।सूत्रों के मुताबिक डीजीपी के जो चार पद मंजूर हुए है उनपर वर्ष 2024 में जैसे-जैसे पद रिक्त होते जाएंगे उस हिसाब से अफसरों को पदोन्नत किया जाएगा। जो अफसर डीजीपी के पद पर पदोन्नत होंगे उनमें एक मार्च को विजय कटारिया,एक मई को अनुराधा शंकर सिंह,एक जून को वरुण कपूर, 1 जुलाई को उपेन्द्र जैन डीजी बन जाएंगे। एक जनवरी से जिन अफसरों को पदोन्नति मिलना है उसमें जो अफसर एडीजी बनेंगे उनमें 1999 बैच के राकेश गुप्ता, दीपिका सूरी शामिल है। जो तेरह अफसर आईजी बनेंगे। इनमें 2006 बैच के चंद्रशेखर सोलंकी, रुचि वर्धन, एस चित्रा, अनिल कुशवाहा, आर आरएस परिहार, राजेश हिंगणकर, अंशुमान सिंह, मनीष कपूरिया, अरविंद सक्सेना, विनीत खन्ना, हिमानी खन्ना, मिथिलेश शुक्ला, अनुराग शर्मा शामिल है।जो 18 अफसर डीआईजी बनेंगे उनमे 2009 बैच के साकेत प्रकाश पांडे, अमित सांघी, टीके विद्यार्थी, सत्येन्द्र शुक्ला, वीरेन्द्र कुमार सिंह, प्रशांत खरे, अतुल सिंह, मनीष कुमार अग्रवाल और 2010 बैच के आबिद खान, आशुतोष प्रसाद सिह, मोहम्मद युसूफ कुरेैशी, निमिष अग्रवाल, सिद्धार्थ बहुगुणा,पंकज श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिंह, विनीत कपूर, धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, हेमंत चौहान शामिल है।इसके अलावा 2011 बैच के सात अफसरों को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। इनमें रियाज इकबाल, आदित्य प्रताप सिंह, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद, डॉ असित यादव, सुशील रंजन सिंह, संजय कुमार सिंह शामिल है।

पत्रकारों से सूत्र पूछने का अधिकार नहीं है – सीजेआई (सुप्रीम कोर्ट).

Do not have the right to question journalists’ sources,” says CJI (Supreme Court). नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा और उन्हें चेतवानी भी दी । मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूर्ण की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19 और 22 के तहत पत्रकारों के मूल अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार के सूत्र नही पूंछ सकती है और न ही न्यायालय तब तक जब तक कि पत्रकारों के खिलाफ बिना जांच और पुख्ता सबूत के दर्ज मुकदमे और गवाही की जांच नही हो जाती है । आज कल देखा जा रहा है कि पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता का हनन कर रही है क्यों कि अधिकतर मामले में पुलिस खुद को श्रेष्ठ बनाने के लिए ऐसा करती है। इस संबंध में उच्च न्यायालय ने अब अपना कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है अगर पुलिस ऐसा करती पाई जाती है तो फिर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है व उस अधिकारी की सेवाये भी समाप्त की जायेगी ।

रीवा पुलिस का नशे पर बड़ा प्रहार

Rewa Police’s big attack on drugs रीवा ! रीवा पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने जिले में नशे पर बड़ा प्रहार किया है, पुलिस कप्तान को मुखबिर से मिली सूचना के बाद asp विवेक लाल के निर्देश पर Sdop त्यौंथर उदित मिश्रा के मार्गदर्शन में चाकघाट थाना प्रभारी उषा सोमवंशी, सोहागी थाना प्रभारी गोकुलानंद पांडे, गढ़ थाना प्रभारी जानकी प्रसाद,सोनौरी चौकी प्रभारी ऋषभ सिंह, लालगांव चौकी प्रभारी मनोज गौतम, समान थाना प्रभारी जेपी पटेल, बैकुंठपुर थाना प्रभारी विजय सिंह की टीम ने देर रात घेराबंदी कर नशीली कफ शिरफ की बड़ी खेप पकड़ी है,वही नशे के तस्कर जो पुलिस को चकमा देकर भाग निकले थे, पुलिस ने तीन को गिरफ्तार किया है,बताया जा रहा है की यूपी से नशे की खेप लाई गई थी, इस कार्यवाई में पुलिस व तस्कर के बीच घंटो चला भागम भाग व धर पकड़ का खेल।

पुलिस चौकियों पर ताले पड़े रहने से चोरों की बले बले

Thieves are vulnerable due to police posts being locked अंबाह ।अम्बाह नगर में जनता की सुरक्षा के लिए बनाई गई पुलिस चौकियां मात्र शो पीस बनकर रह गई है। घटनाओं के बाद भी नगर की पुलिस चौकिया में पड़े ताले पर पुलिस का इस और कोई ध्यान नहीं है ,पुलिस अपने पास स्टाफ की कमी बता देती है, पर आमजन में असुरक्षा बढ़ रही है तो अपराधियों में पुलिस का खौफ घट रहा है। इसके चलते अपना घर छोड़कर सुकून से बाजार भी नहीं जा सकते। जनसुरक्षा-कानून व्यवस्था में पुलिस चौकियों का बड़ा रोल है। नगर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधिकारी गंभीर नहीं है। बाजार सहित अन्य स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से स्थापित की गई पुलिस चौकियों पर पुलिस कर्मचारी तैनात नहीं हैं। इनमें कुछ तो ऐसी पुलिस चौकी हैं। जिन पर हमेशा ताला लगा रहता है। इस कारण बाजार में वारदात होने की स्थिति में लोगों को तत्काल पुलिस सहायता मिल नहीं पाती। पुलिस गार्ड तैनात ना होने से इन , पोरसा चौराहा पुलिस चौकी के पास अक्सर जाम लगा रहता है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ज्ञात रहे कि इन चौकियों को बनाने के पीछे यही उद्देश्य था कि लोगों को तत्काल सहायता के साथ साथ इन चौराहों पर जाम की समस्या ना रहे। यहां बता दें कि नगर में पोरसा चौराहा, जग्गा चौराहा पुलिस चौकी काफी समय पहले बनवाई गई थीं। लेकिन अब यहां कोई भी पुलिस कर्मचारी तैनात नजर नहीं आता। इससे आम जनमानस में असुरक्षा की भावना बनी हुई है। पुलिस चौकी में पुलिस कर्मचारी मौजूद न रहने की बात से अधिकारी भी वाकिफ हैं। उन्होंने इस दिशा में कोई संज्ञान नहीं लिया है।जग्गा चौराहा , शहर के इस इलाके में काफी भीड़ रहती है। बीच बाजार का चौराहा होने के कारण दिन भर लोगों का आना-जाना बना रहता है। लेकिन यहां स्थापित पुलिस चौकिया में हमेशा ताला पड़ा रहता है। बाजार आने वाले लोग इसका उपयोग चौकिया के बाहर बैठकर सुस्ताने में करते हैं। और टमटम वाले पार्किंग स्टैंड समझ कर पार्किंग करते हैं, ,जग्गा चौराहे एवं पोरसा चौराहे पर भी दिन भर भीड़ जमा रहती है। लेकिन यहां पुलिस चौकी का तो दरवाजा तक नहीं खुलता। कोई भी वारदात होने पर लोगों को अपनी फरियाद लेकर थाने तक जाना पडता है। पुलिस चौकिया में अफसर ना होते हुए ताले पड़े रहते हैं जिसकी वजह से गुंडो के हौसले बुलंद रहते हैं, नागरिकों में हमेशा डर पैदा रहता है पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है

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