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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा का राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया

To save their lives in the 1984 riots, people of the Sikh community shaved their beards and took off their turbans: VD Sharma

1984 के दंगों में अपनी जान बचाने सिख समुदाय के लोगों ने दाढ़ी कटवाई,पगड़ी उतारी: वीडी शर्मा To save their lives in the 1984 riots, people of the Sikh community shaved their beards and took off their turbans: VD Sharma भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान सिख समुदाय को लेकर देश के खिलाफ दिए गए बयान की आलोचना करते हुए निंदा की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद शर्मा ने कहा कि अमेरिकी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भारत में रहने वाले सिखों के बारे में गलत बयान देकर अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय को गुमराह किया है। शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी ने अमेरिका में कहा है कि भारत में सिख समुदाय तनाव में जीते हैं। उन्हें पगड़ी, कड़ा-कृपाण पहनने में दिक्कत होती है। जबकि सच्चाई यह है कि भारत में रहने वाले सिख समुदाय के लोग हमेशा से कड़ा-कृपाण पहन कर गर्व महसूस करते हैं और देश के हर हिस्से में भ्रमण करते हैं। शहरों से लेकर देश के दूरदराज इलाकों में भी सिख भाईयों को पगड़ी पहन कर अपना-अपना काम करते हम देखते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी गुरूद्वारा गए हैं, तब वे पगड़ी पहनकर गुरूद्वारा गए। सिख समुदाय को गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व की सरकार में सिख समुदायों की लंबित मांगों को पूरा करते हुए करतारपुर साहिब जाने का रास्ता खुलवाया। दशम गुरू गोविंद सिंह के शहजादों के बलिदान को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया।कांग्रेस शासनकाल में अपनी जान बचाने सिख समुदाय ने पगड़ी उतारी व दाढ़ी कटवाई थीभाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि वर्ष 1984 में राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते सिख समुदाय का सामूहिक नरसंहार किया गया, जिसमें करीब 3000 से अधिक सिख भाई-बहनों का कत्लेआम किया गया था। उस समय आगजनी की गयी थी और सिखों को घरों से खींचकर जिंदा जला दिया गया था। उस वक्त कई सिख भाईयों ने जिंदा रहने के लिए अपनी पगड़ी तक उतार दी थी और दाढ़ी-बाल कटवा लिए थे। राजीव गांधी ने कहा था कि “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।“ सिखों के नरसंहार में संलिप्त लोगों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गयी थी और लंबे समय बाद सिख दंगे के दोषियों को तब सजा हुई, जब माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सरकार बनी।दुनिया को सिख दंगों की सच्चाई बताना चाहिए, लेकिन वे सिखों को गुमराह कर रहे हैंभाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी विदेशी धरती पर देश को बदनाम करने का अभियान चला रहे हैं। वे दुनिया के समक्ष भारत की यह सच्चाई नहीं रखते हैं कि भारत में मजबूत लोकतंत्र है। भारत लोकतंत्र की जननी है। दुनिया को सच्चाई बताने के बदले राहुल गांधी अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। कभी राहुल गांधी कहते हैं कि भारत में बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है, जबकि भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। राहुल गांधी अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को देश के प्रति भ्रमित कर रहें हैं। राहुल गाँधी को थोड़ा ज्ञान होता तो देश पर जब-जब मुसीबत आयी है, तब आगे बढ़कर देशहित में कार्य करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन के खिलाफ बयानबाजी नहीं करते। राहुल गांधी अब एक आम नागरिक नहीं हैं, बल्कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, फिर भी वे विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं। राहुल गांधी भारत की न्यायिक व्यवस्था, निर्वाचन आयोग, प्रशासनिक व्यवस्था समेत देश के सभी संवैधानिक संस्थानों के खिलाफ बोलते रहते हैं। राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के एकाउंट फ्रीज होने पर देश के प्रशासनिक तंत्र पर हमला बोला था, लेकिन उसकी सच्चाई लोगों के सामने नहीं बताई।राहुल गांधी देश की एकता व अखंडता के खिलाफ खतरनाक नैरेटिव सेट कर रहेराहुल गांधी के बयान के पीछे उनके सलाहकार सैम पित्रोदा हैं। पित्रोदा कहते हैं कि राहुल गाँधी अब पप्पू नहीं रहे। वे पप्पू रहें या न रहें, उनको क्यों इस तरह से अलंकृत किया गया, हमें इसमें कोई रूचि नहीं है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि राहुल गांधी के सलाहकार कहते हैं कि भारत एक देश नहीं है। उनके अनुसार, जो लोग नार्थ से आते हैं, वे अफगानिस्तान से आते हैं और नार्थ-ईस्ट के लोग चाइनीज के समकक्ष हैं। जिस तरह के विचार वाले लोगों के साथ राहुल गांधी रहते है, इसलिए जब राहुल गाँधी ओछी बातें करते हैं, तो आश्चर्य नहीं होता। पिछले कई सालों में राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान को एक दूसरे से जोड़कर देखें, तो उससे स्पष्ट होता है कि राहुल गांधी को कई बातों की समझ नहीं है। कई ऐसे मुद्दे हैं, जिसमें राष्ट्र की पहचान, विविधता के साथ एकता और अखंडता के विषय शामिल होते हैं। राहुल गांधी देश की विविधता के साथ एकता और अखंडता के मुद्दों पर बहुत ही खतरनाक नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं।

युवा कांग्रेस का हल्लाबोल, मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले

Youth Congress's ruckus, came out to surround the Chief Minister's residence

Youth Congress’s ruckus, came out to surround the Chief Minister’s residence भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता घोटाला सहित युवाओं की समस्याओं को लेकर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ने शुक्रवार को भोपाल में जंगी प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से आए यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता रोशनपुरा चौक पर एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले। युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष मितेंद्र सिंह की अगुआई में यह प्रदर्शन हो रहा है। संगठन द्वारा चलाए गए ‘क्या हुआ तेरा वादा’ अभियान के तहत प्राप्त साढ़े चार लाख पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री को सौंपे जाएंगे। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। जीतू पटवारी ने कहा कि युवाओं के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार धोखेबाजी कर रही है। नर्सिंग कॉलेज घोटाला सबके सामने है। ना तो युवाओं को रोजगार मिला है और ना ही स्वरोजगार। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रास्ते में बैरिकेडिंग कर दी है। भारी पुलिसबल मौके पर तैनात है। भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी का आरोपयुवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष मितेंद्र सिंह ने कहा कि लाड़ली बहनों को आवास देने की घोषणा की, पर उसकी योजना तक नहीं बनी। सरकारी नौकरी की परीक्षा फॉर्म फीस माफ नहीं की गई और न ही नर्सिंग घोटाले के आरोपितों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की गई। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी भी नहीं मिली है। इन सभी मुद्दों को लेकर ‘अब युवा करेगा क्रांति’ कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

बुधनी उपचुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारियां तेज, जीतू पटवारी ने बनाई जीत की रणनीति

Congress preparations intensified for Budhni by-election, Jitu Patwari made strategy for victory

Congress preparations intensified for Budhni by-election, Jitu Patwari made strategy for victory प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा सीट छोड़े जाने के बाद उपचुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है. शिवराज के गढ़ बुधनी में अब कांग्रेस भी एक्टिव मोड में आ गई है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को बुधनी विधानसभा में कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन पार्टी में शामिल हुए.बता दें बुधनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से प्रभारी व सह प्रभारी की नियुक्ति की जा चुकी है. कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह को प्रभारी और इछावर से पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल को सह प्रभारी बनाया है. वहीं बीजेपी ने प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को प्रभारी बनाया है और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को सह प्रभारी बनाया है. पटवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ किया संवादसलकनपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधनी विधानसभा के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित रेहटी, बुधनी ब्लॉक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी भावना प्रदेशाध्यक्ष के सामने रखी. संवाद कार्यक्रम के बाद टिफिन पार्टी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें घर से टिफिन लेकर आये बूथ के कार्यकर्ताओं के साथ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोजन किया. इस अवसर पर बुधनी विधानसभा सह प्रभारी शैलेंद्र पटेल, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव गुजराती, पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल, डॉ. बलवीर तोमर, जिला संगठन मंत्री गणेश तिवारी, दिनेश मेघवानी, महेश राजपुत, विक्रम मस्ताल, रेहटी ब्लॉक अध्यक्ष प्रेमनारायण गुप्ता, भैरूंदा ब्लॉक अध्यक्ष देवीसिंह थारोल, लाडक़ुई ब्लॉक अध्यक्ष चंदर मीणा, गोपालपुर ब्लॉक अध्यक्ष अशोक सिंह भाटी, बुधनी ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र यादव, शाहगंज ब्लॉक अध्यक्ष बहादुर सिंह, मंगलसिंह ठाकुर, विष्णु ठाकुर, उमाशंकर नागर, राधेकिशन नागर, रामकरण यादव, इसरार खां, अर्जुन गौर एवं कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्तागण मौजूद रहे. देवीधाम सलकनपुर मंदिर में पूजा-अर्जनाउपचुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बुधनी विधानसभा के दौरे पर थे. इस दौरान वे प्रसिद्ध देवी धाम सलकनपुर मंदिर पहुंचे. जहां उन्होंने मां बीजासन माता के दरबार में पूजा अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली की कामना की.

नोटा ने तोड़ा रिकॉर्ड : इन्दौर में नोटा को 70,000 वोट मिले काउंटिंग जारी

NOTA broke record: NOTA got 70,000 votes in Indore, counting continues इंदौर में BJP के Shankar Lalwani, बसपा के संजय सोलंकी और जनहित पार्टी के अभय जैन के बीच मुख्य मुकाबला है। नोटा Nota भी रिकॉर्ड बनाने की ओर है।

विधायक जी ने अपनी फॉर्च्यूनर से दुल्हा-दुल्हन को पहूंचाया घर,घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

The MLA took the bride and groom to their home in his Fortuner, the happiness of the family members knew no bounds. राघोगढ़ ! दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर परिजन भी हैरान रह गए. कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. गुना जिले के राघोगढ़ में शादी सम्मेलन के बाद दूल्हा-दुल्हन बाइक पर सवार होकर घर जा रहे थे. इसी दौरान क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे .कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने जब नवदंपती को देखा तो उन्होंने अपने वाहन को रोका और दूल्हा-दुल्हन को फॉर्च्यूनर कार में बैठाकर उनके घर तक पहुंचाया , अब इस पूरे वाकए का वीडियो अब वायरल हो रहा है. नवल धाकड़ नवविवाहिता पत्नी को साथ लेकर पूजा-पाठ करने गया था. भीषण गर्मी में बाइक सवार नवल धाकड़ और उसकी पत्नी को जब क्षेत्रीय विधायक ने देखा तो अपने फॉर्च्यूनर वाहन को रोककर  बैठने को कहा. जयवर्द्धन के साथ विधायक पंकज उपाध्याय भी मौजूद थे. दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर नवल के परिजन भी हैरान रह गए.  जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. दूल्हा बने नवल धाकड़ ने बताया कि जयवर्द्धन सिंह शादी सम्मेलन में भी पहुंचे थे. नवल के परिजन साफा बांधकर सम्मान करने के लिए आगे बढ़े तो जयवर्द्धन ने कहा, “मैं तो आपके परिवार का हूं. पंकज उपाध्याय का सम्मान कीजिए.” जयवर्द्धन सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है. महंगे वाहन में बैठकर घर तक पहुंचे नवदंपती की खुशी का ठिकाना नहीं है.

प्रदेश में दूसरे चरण में 6 सीटों पर होगी वोटिंग, कहां किससे मुकाबला?

Voting will be held on 6 seats in the second phase in the state, where will there be competition with whom? प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 6 सीटों पर 80 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है. इसके लिए मतदान 26 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) को होगा. इस बार चुनाव मैदान में 75 पुरुष उम्मीदवार, 4 महिला उम्मीदवार और एक थर्ड जेंडर प्रत्याशी हैं. साल 2019 की तुलना में होशंगाबाद (नर्मदापुरम) छोड़ कर सभी सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या कम हुई है. टीकमगढ़ में सबसे कम सात प्रत्याशी मैदान में हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की सीट खजुराहो पर भी सेकंड फेज में ही वोटिंग होनी है. विधानसभा चुनाव में हारे सांसद इस बार मैदान मेंहोशंगाबाद सीट से कांग्रेस प्रत्याशी संजय शर्मा के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है. नवंबर 2023 में विधानसभा चुनाव हार चुके सांसद गणेश सिंह को सतना सीट से पार्टी ने एक बार फिर से मैदान में उतारा है. उनकी किस्मत का फैसला भी 26 अप्रैल को ईवीएम (EVM) में कैद होगा. बता दें, लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मध्य प्रदेश की जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, सीधी और शहडोल संसदीय सीट पर मतदान 19 अप्रैल को हो चुका है. दूसरे चरण की 6 सीटों दमोह, टीकमगढ़, खजुराहो, सतना, रीवा और होशंगाबाद में 26 अप्रैल को मतदान होना है. इन सीटों पर कुल 80 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. दूसरे चरण की 6 लोकसभा सीटों पर ये नेतादूसरे चरण की 6 सीटों में चुनाव लड़ने वाले प्रमुख नेताओं में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी शामिल हैं. खजुराहो सीट पर उनका मुकाबला फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) के राजा भैया प्रजापति से है. शर्मा पहली बार साल 2019 में खजुराहो सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे. इसी तरह केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक टीकमगढ़ (एससी आरक्षित) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. साल 2008 में परिसीमन के बाद अलग हुए इस निर्वाचन क्षेत्र में हुए सभी तीन चुनावों में खटीक ने जीत हासिल की है. कांग्रेस ने इस सीट से पंकज अहिरवार को मैदान में उतारा है. बीजेपी ने सतना से गणेश सिंह और रीवा से जनार्दन मिश्रा को फिर से टिकट दिया है. होशंगाबाद लोकसभा सीट से दर्शन सिंह और दमोह से राहुल लोधी जैसे नए चेहरों को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने सतना से मौजूदा विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, रीवा से पूर्व विधायक नीलम मिश्रा, होशंगाबाद से पूर्व विधायक संजय शर्मा और दमोह से पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी को मैदान में उतारा है. सतना में सबसे ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवारनिर्वाचन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 की तुलना में इनमें होशंगाबाद छोड़ सभी सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या कम हुई है. टीकमगढ़ में सबसे कम सात प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि पिछले चुनाव में यहां से 14 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे थे. रीवा, सतना, खजुराहो और होशंगाबाद सीट पर एक-एक महिला प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं. इसी तरह दमोह से एक ट्रांसजेंडर दुर्गा मौसी भी चुनौती दे रही हैं. सबसे अधिक नौ निर्दलीय उम्मीदवार सतना में हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 101 उम्मीदवार इन छह सीटों पर मैदान में उतरे थे.इस बार इनकी संख्या 80 है,जबकि पहले चरण की छह सीटों जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, सीधी और शहडोल पर 88 उम्मीदवार मैदान में थे.साल 2019 में इनमें भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी छोड़ बाकी सभी की जमानत जब्त हो गई थी. 80 में से 26 उम्मीदवार करोड़पतिनिर्वाचन आयोग में कैंडिडेट द्वारा दिए गए हलफनामे से पता चला है कि दूसरे चरण की 6 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने वाले 26 प्रत्याशी करोड़पति हैं. जबकि,17 प्रत्याशी 10वीं पास भी नहीं हैं. होशंगाबाद सीट से कांग्रेस प्रत्याशी संजय शर्मा के पास सबसे ज्यादा 232 करोड़ की संपत्ति है. दूसरे नंबर पर रीवा से कांग्रेस प्रत्याशी नीलम मिश्रा हैं, जिनकी संपत्ति 34 करोड़ रुपये है. सतना से सांसद और बीजेपी प्रत्याशी गणेश सिंह के पास 9 करोड़ रुपये की संपत्ति है. दूसरे चरण में दो डॉक्टर भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कुल 80 में से 9 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं, पांच पर गंभीर आपराधिक केस हैं. इसके अलावा, तीन प्रत्याशी सिर्फ पांचवीं पास हैं. 9 उम्मीदवार ऐसे हैं जो 12वीं पास हैं. 8 कैंडिडेट 10वीं पास हैं.13 प्रत्याशी स्नातक, 21 प्रत्याशी स्नातकोत्तर हैं. सात ग्रेजुएट प्रोफेशनल हैं.

प्रदेश में आज थम जाएगा पहले चरण का प्रचार, 19 अप्रैल को होगी वोटिंग

Campaigning for the first phase will end in the state today, voting will take place on April 19. मध्य प्रदेश की 6 सीटों पर पहले चरण में होने वाले मतदान का प्रचार आज थम जाएगा। भोपाल। मध्य प्रदेश की 6 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए चुनाव प्रचार आज शाम 6 बजे थम जाएगा, लिहाजा इन क्षेत्रों में रोड शो और रैलियां नहीं की जाएगी। जबकि बालाघाट लोकसभा क्षेत्र के बैहर, लांजी और परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में यह प्रतिबंध चार बजे से लागू होगा। ऐसे में उन सभी लोगों को निर्वाचन क्षेत्र छोड़ना होगा, जो वहां के मतदाता नहीं हैं। इसके लिए होटल, लाज और धर्मशालाओं की जांच होगी। जहां राजनीतिक दलों का प्रचार थमने जा रहा है वहीं पहले चरण के मतदान के लिए प्रशासनिक तैयारियां भी अंतिम दौर में हैं। सुरक्षा एवं जांच समग्र रूप से की जा रही है। चुनाव आयोग के निर्देश हैं कि मतदान पूरी तरह से निष्‍पक्ष एवं पारदर्शी होना चाहिये, इसी को ध्‍यान में रखते हुए मैदानी अमला पूरी तरह से जुटा हुआ है। गौरतलब है कि 19 अप्रैल को सीधी, शहडोल, मंडला, जबलपुर, बालाघाट और छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। जिसके चलते बुधवार को शाम पांज बजे के बाद रोड शो, रैली और सभाओं पर प्रतिबंध लग जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया है कि प्रचार-प्रसार समाप्त होने की समय-सीमा के बाद बाहरी क्षेत्र के व्यक्तियों को जो उस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता नहीं हैं, उन्हें वह क्षेत्र छोड़ना होता है। इसके लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। पुलिस प्रशासन द्वारा होटल, लाज, धर्मशालाओं की जांच कर ऐसे लोगों को चिन्हित कर बाहर भेजा जाएगा, जो वहां के मतदाता नहीं हैं। संवेदनशील केंद्रों पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल तैनात किया गया है तो अन्य केंद्रों पर जिला पुलिस बल रहेगा। गुरुवार को रवाना होंगे मतदान दल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण का मतदान संपन्न कराने के लिए मतदान दल गुरुवार को रवाना होंगे। रात में ही मतदान को लेकर सभी व्यवस्थाएं कर ली जाएंगी। अभ्यर्थियों की उपस्थिति में स्ट्रांग रूम से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मतदान केंद्रों में पहुंचाई जाएंगी। यहां मतदान से एक घंटे पहले अभ्यर्थी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति में माकपोल होगा। 50-50 वोट डलवाए जाएंगे। बालाघाट के तीन विधानसभा क्षेत्रों में चार बजे तक ही होगा मतदानबालाघाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे आते हैं, जो नक्सल प्रभावित हैं। इनमें बैहर, लांजी और परसवाड़ा शामिल हैं। तीनों में सुबह सात से चार बजे तक मतदान होगा। बाकी निर्वाचन क्षेत्रों में शाम छह बजे तक मतदान कराया जाएगा।

ग्राउंड रिपोर्ट: विकास को लेकर असंतोष, भाजपा को प्रत्याशी की कट्टर हिंदू नेता की छवि से फायदा

Ground report: Dissatisfaction over development, BJP benefits from candidate’s image of hardline Hindu leader मालवा अंचल की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित देवास लोकसभा सीट से भाजपा ने अपने सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी को लगातार दूसरी बार मौका दिया है। क्षेत्र में महेंद्र की पहचान कट्टर हिंदूवादी नेता की है। वे अपने आसपास या मंच पर भी किसी मुस्लिम की मौजूदगी पसंद नहीं करते। कहा यहां तक जाता है कि यदि कोई पत्रकार मुस्लिम है तो वे उसको भी इंटरटेन नहीं करते। इसीलिए िवकास को लेकर असंतोष होने के बावजूद देवास में माहौल भाजपा के पक्ष में है। इसके विपरीत कांग्रेस के राजेंद्र मालवीय की पहचान मात्र इतनी है कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे स्व राधाकिशन मालवीय के बेटे हैं। राजेंद्र का व्यवसाय इंदौर में है। इस नाते उनका संपर्क इंदौर में ही ज्यादा है। देवास से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनका प्रचार भी दो-चार दिन पहले ही प्रारंभ हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ही उनके लिए मेहनत करते दिख रहे हैं।           भोपाल। देवास लोकसभा सीट का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ। परिसीमन में शाजापुर सीट को खत्म किया गया था। शाजापुर भी अजा वर्ग के लिए आरक्षित थी। यहां 1996 से लगातार भाजपा के दिग्गज दलित नेता थावरचंद गहलोत जीतते आ रहे थे। लेकिन देवास के गठित होने के बाद 2009 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा ने थावरचंद गहलोत को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2014 में भाजपा के सत्यनारायण जटिया और 2019 में भाजपा के ही महेंद्र सिंह सोलंकी ने जीत दर्ज की। इस लिहाज से सीट भाजपा के दबदबे वाली है।लगातार भाजपा का कब्जा होने के बावजूद विकास को लेकर यह क्षेत्र पिछड़ा माना जाता है। नौकरी और रोजगार के लिए देवास के लोग इंदौर पर आश्रित हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी यही स्थिति है। हर किसी को इंदौर की ओर देखना पड़ता है। ट्रेन के स्टापेज कम हैंे और देवास से इंदौर के व्यस्ततम रोड के आरओबी का काम अटका पड़ा है। मेट्रो इंदौर से महू पहुंच गई लेकिन देवास की ओर किसी का ध्यान नहीं। क्षिप्रा की सफाई और स्वच्छ करने की योजना उज्जैन और अन्य शहरों में बन रही है लेकिन देवास में कुछ नहीं हो रहा।  आज भी फैक्ट्रियों की गंदगी क्षिप्रा में आकर मिलती है। इन तमाम मुद्दों को लेकर लोगों में भाजपा के प्रति नाराजगी है। प्रत्याशी महेंद्र सिंह सोलंकी की कट्टर हिंदू नेता की छवि विकास काे लेकर पैदा असंतोष पर भारी पड़ रही है। महेंद्र के अंदर कट्टरता इस कदर है कि वे कह चुके हैं कि उन्हें मुस्लिमों के वोट नहीं चािहए। एक बार उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा के मुस्लिम से अच्छा तो कांग्रेस का हिंदू है। पहले तो वे चाहते नहीं कि उनके कार्यक्रम में कोई मुस्लिम आए और आ गया तो उसका परिचय जरूर पूछते हैं। इसकी वजह से भाजपा देवास में इस बार रिकार्ड जीत का सपना देख रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस के राजेंद्र मालवीय इंदैारी नेता हैं। देवास में उनका कोई बैकग्राउंड नहीं। भाजपा के साेलंकी का प्रचार काफी पहले प्रारंभ हो गया था क्योंकि वे पहली सूची में ही प्रत्याशी घोषित हो गए थे जबकि कांग्रेस के राजेंद्र ने अभी पांच दिन पहले अपना कार्यालय खोल कर प्रचार प्रारंभ किया है। मालवीय के तुलना में सोलंकी प्रखर वक्ता भी हैं। विकास पर भारी हिंदू-मुस्लिम के बीच ध्रुवीकरण  चुनाव के जो मुद्दे होते हैं वे देवास के लोगों के बीच भी हैं। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। अयोध्या में राम मंदिर का प्रचार हो रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्य गिनाए जा रहे हैं। इसके विपरीत कांग्रेस अपने घोषणा पत्र के 5 न्याय और 24 गारंटियों का प्रचार कर रही है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस बता रही है कि विकास के मामले में इंदौर और दूसरे शहरों की तुलना में किस तरह देवास को उपेक्षित कर रखा गया है जबकि देश और राज्य में लगातार भाजपा की सरकार है। इन मुद्दों से अलग हटकर भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह सोलंकी की कट्टर हिंदू नेता की छवि के कारण देवास में हिंदू-मुस्लिम के बीच ध्रुवीकरण बड़ा मुद्दा बन रहा है। हिंदू साेलंकी के पक्ष में लामबंद हो रहा है जबकि मुस्लिम शत प्रतिशत कांग्रेेस के मालवीय के पक्ष में खड़ा है। इसकी वजह से पूरा चुनाव भाजपा की ओर झुका दिखाई पड़ रहा है। विधानसभा की सभी सीटों पर भाजपा काबिज चार माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने देवास लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली सभी 8 सीटों में एकतरफा जीत दर्ज की थी। इनमें एक शाजापुर सीट ही ऐसी थी जिसमें भाजपा मात्र 28 वोटों के अंतर से जीती। इसके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा कोर्ट भी गए हैं, पर जीत तो जीत है। भाजपा की सभी 8 सीटों में जीत का अंतर 1 लाख 2 हजार 893 वोटों का है। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले 2018 में कांग्रेस ने 8 में से 3 विधानसभा सीटों में जीत दर्ज की थी। फिर भी 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा लगभग पौने चार लाख वोटों के अंतर से जीती थी जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार क्षेत्र के चर्चित सख्श प्रहलाद सिंह टिपानिया थे। इस बार तो भाजपा के पक्ष में माहौल ज्यादा है। कांग्रेेस प्रत्याशी भी अपेक्षाकृत कमजोर और बाहरी है। ऐसे में भाजपा यदि रिकार्ड जीत का दावा करती है तो गलत नहीं। देवास क्षेत्र में तीन जिलों की विधानसभा सीटें देवास संसदीय सीट का भौगोलिक क्षेत्र तीन जिलों को छूता है। ये जिले देवास के अलावा शाजापुर और सीहोर हैं। शाजापुर जिले की सबसे ज्यादा 4 विधानसभा सीटें आगर, शाजापुर, शुजालपुर और कालापीपल देवास क्षेत्र में हैं। सीहोर जिले की एक सीट आष्टा इसमें शामिल है। इसके अलावा देवास जिले की तीन विधानसभा सीटें सोनकच्छ, हाटपिपल्या और देवास इस लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। जहां तक सीट के राजनीतिक मिजाज का सवाल है तो सभी विधानसभा सीटों में भाजपा का कब्जा है ही, लोकसभा सीट में आमतौर पर भाजपा ही जीतती है। 2009 में एक ही बार कांग्रेस के सज्जन वर्मा जीते हैं वर्ना लगातार भाजपा का कब्जा है। पहले … Read more

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को मध्य प्रदेश के पिपरिया और 17 अप्रैल को दमोह में करेंगे सभा

Prime Minister Narendra Modi will hold meetings in Pipariya, Madhya Pradesh on Sunday and Damoh on April 17. एक सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मध्य प्रदेश में तीसरा दौरा। भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए सप्ताह में तीसरी बार रविवार को प्रदेश में आएंगे। वे होशंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में आने नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में जनसभा को संबोधित करेंगे। यहां से भाजपा के किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दर्शन सिंह चौधरी प्रत्याशी हैं, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। यहां 26 अप्रैल को मतदान होना है। वहीं, दूसरे चरण के ही चुनाव में शामिल दमोह लोकसभा सीट के लिए 19 अप्रैल को दमेाह के इमलाई में सभा करेंगे। यह सभा पहले रहली विधानसभा के गढ़ाकोटा में प्रस्तावित थी, लेकिन शुक्रवार को स्थल परिवर्तन कर दमोह किया गया। यहां से राहुल लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है। वह भी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके पहले सात अप्रैल को जबलपुर में रोड-शो किया था। इसके बाद बालाघाट में उनकी सभा हुई थी। पिपरिया में उनकी सभा से होशंबाद सीट के अतिरिक्त इससे लगी जबलपुर लोकसभा सीट को भी साधने की कोशिश है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे रतलाम आ सकते हैं। प्रचार थमने के एक दिन पहले छिंदवाड़ा में रोड-शो करेंगे अमित शाह प्रचार थमने के एक दिन पहले 16 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छिंदवाड़ा में रोड-शो करेंगे। इसके पहले यहां 12 अप्रैल को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की सभा हो चुकी है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव पांच बार चुनाव प्रचार के लिए छिंदवाड़ा पहुंच चुके हैं। पिछली बार एकमात्र इस सीट पर कांग्रेस के नकुल नाथ जीते थे जो फिर मैदान में हैँ। कांग्रेस अपने इस गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत से जुटी है।

छिंदवाड़ा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जन सभा

Public meeting of BJP National President JP Nadda in Chhindwara लोकसभा चुनाव 2024 : छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है। छिंदवाड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार को सीधी व छिंदवाड़ा में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा करेंगे। छिंदवाड़ा के दशहरा मैदान में संबोधित कर रहे हैं। छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है।

लोकसभा चुनाव 2024: ग्राउंड रिपोर्ट ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से, सहारा समाचार टीम

Lok Sabha Elections 2024: Ground report from Gwalior parliamentary constituency, Sahara News Team ग्वालियर। ग्वालियर की लोकसभा सीट शुरू से ही काफी अहम रही है, क्योंकि विजयाराजे सिंधिया सहित राजघराने का हर सदस्य राजनीति से जुड़ा रहा। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से की थी। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा अभी हाल ही में की है, जबकि भाजपा पहले ही कर चुकी थी, लेकिन खास बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं। भाजपा ने भारत सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें विवेक नारायण शेजवलकर के स्थान पर मैदान में उतारा गया है। भारत सिंह कुशवाहा अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ग्वालियर ग्रामीण से चुनाव हारे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में ग्वालियर दक्षिण से पराजित हुए थे। दोनों उम्मीदवार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की कुशवाह समाज के साढ़े तीन लाख वोटरों पर नजर है। वहीं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी होने का भी लाभ भारत सिंह कुशवाहा को मिला है। जबकि कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाकर शहर के वोटरों को साधने की कोशिश की है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस को विश्वास है कि विधानसभा चुनाव जीत दिलाने वाले लोकसभा में भी सहयोग करेंगे। इसलिए भाजपा को है जीत की उम्मीदग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार के अलावा ठाकुर क्षत्रिय वोटर की अहम भूमिका रही है और 19 लोकसभा चुनाव में से सिंधिया परिवार के सदस्यों ने 8 बार जीत दर्ज की है। जबकि इसमें भी ठाकुर क्षत्रिय वोटर ने सहयोग किया है। इस बार भी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं और नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक को ही उम्मीदवार बनाया गया हैं। यहां से माधवराव सिंधिया कांग्रेस और मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पांच बार निर्वाचित हुए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर यशोधरा राजे सिंधिया दो बार यहां से निर्वाचित हुईं। इसके अलावा विजयाराजे सिंधिया भी एक बार यहां से चुनाव जीती हैं। कांग्रेस ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। जब रामसेवक सिंह निर्वाचित हुए थे। यह बात अलग है कि सवाल पूछने के बदले पैसे लेने के आरोप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था लोकसभा चुनाव में दोनों नए चहरेलोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखा जाए तो इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों ने ही नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। दोनों के समीकरण भी एक समान हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद ही दोनों अपने लिए लोकसभा के लिए वोट मांग रहे हैं। भारत सिंह कुशवाहा राममंदिर और हमारा परिवार मोदी परिवार को लेकर आगे चल रहे हैं। वहीं प्रवीण पाठक लोकतंत्र बचाओ के साथ ही राहुल गांधी की यात्राओं में उठाए गए मुद्दों का वोटर के सामने रख रहे हैं। जातीय समीकरणभाजपा ने ग्वालियर में अपनी जीत के लिए जातिगत समीकरण पर दांव खेला है। इस संसदीय क्षेत्र से पूर्व मंत्री भारत सिंह कुशवाह को अपना उम्मीद्वार बनाया है। तकरीबन साढ़े तीन लाख कुशवाह वोटर के सहारे भाजपा जनाधार मजबूत करेगी। जबकि कांग्रेस ब्राह्मण व क्षत्रिय के गणित लेकर चल रही है। प्रवीण पाठक का मानना है कि 19.59 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 5.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं, जिनका कांग्रेस पर पूरा भरोसा है। जबकि ब्राह्मण समाज के 18 प्रतिशत से ज्यादा वोटर पर भी उन्हें पूरा विश्वास है। वहीं 25 प्रतिशत से ज्यादा पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस का समर्थन देगा। क्योंकि इसका प्रभाव विधानसभा चुनावो में देखने को मिला है। इस जातीय समीकरण के कारण ही भाजपा के द्वारा पूरी ताकत लगाने के बाद भी आधी सीटें विधानसभा की तीने में सफलता मिली थी। ग्वालियर संसदीय सीट में 8 विधानसभाग्वालियर संसदीय क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभाओं में से कांग्रेस व भाजपा के पास चार-चार विधायक हैं। यदि विधानसभा चुनाव का ट्रेंड रहता है तो भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी कड़ा होगा और हार जीत का अंतर बड़ा नहीं होगा। इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6 लाख 96 हजार 246 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 6 लाख 82 हजार 233 वोट मिले हैं। इस हिसाब से मुकाबला कड़ा है। इसके अनुसार भाजपा को 14 हजार 13 वोट ही अधिक मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं, जबकि भाजपा के पास दो सीट हैं। कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत है। वोट भी अधिक मिला है, लेकिन शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा मजबूत है। शहर में तीन सीटे हैं, जिनमें कांग्रेस के पास एक सीट है। पोहरी विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी ने 49 हजार 481 वोट से भाजपा के मंत्री को हराया था। जबकि भाजपा भितरवार और ग्वालियर विधानसभा में मजबूत है। इन विधानसभा को भाजपा ने बड़े अंतर से जीता था। डबरा, ग्वालियर दक्षिण व करैरा में मुकाबले करीबी रहे हैं। ग्वालियर संसदीय चुनाव में मुद्देइस संसदीय सीट की खास बात यह रही है कि यहां विकास के कोई मुद्दे नहीं रहे हैं। चाहे माधव राव सिंधिया ने विकास के नाम पर वोट मांगे हों। उस समय व्यक्ति के चेहरे पर लोगों ने वोट दिया था। क्योंकि मुद्दे विधानसभा चुनावो में ही इतने उठ जाते हैं कि लोकसभा में लोग सिर्फ चेहरे देखते हैं। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के मुद्दे को लेकर ही वोटिंग होती रही है। इस बार प्रवीण पाठक शहर से और भारत सिंह कुशवाह ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। भाजपा हमेशा शहरी क्षेत्र से उम्मीदवार बनाती रही है और लगातार जीतती रही है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र से भाजपा ने और शहरी क्षेत्र से कांग्रेस ने टिकिट दिया। यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा, लेकिन यह मुद्दा कितना कारगर रहेगा यह तो चुनाव बाद ही मालुम होगा। क्योंकि माहौल इस समय भाजपा के पक्ष में है।

लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदना चाह रहे नकुलनाथ : विजयवर्गीय

Nakulnath wants to buy democracy through demonetization: Vijayvargiya भोपाल। कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का चरित्र ही रहा है कि वह जनमत पर भरोसा नहीं करते। यही कार्य छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस और कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी नकुलनाथ कर रहे हैं। कांग्रेस छिंदवाड़ा में लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस सोचती है अब भी बांटो और राज करो चलेगा। कांग्रेस ने पहले देश बांटकर राज किया, अब छिंदवाड़ा को अपना गढ़ समझने वाले नकुलनाथ पैसा बांटकर राज करना चाहते हैं। मतदाता भगवान है और भगवान को खरीदने की सोचने वाली कांग्रेस रंगे हाथ पकड़ी गई है। यह बात प्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने छिंदवाड़ा में जिला कांग्रेस महामंत्री गिरीश साहू के बिसापुर गांव में रूपए बांटते पकड़े जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। विजयवर्गीय ने कहा कि न्याय-पत्र के झूठे वादे चले नहीं तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेता पैसों से बोली लगाकर लोकतंत्र के भगवान को खरीदने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज करायेगी और कांग्रेस और नकुलनाथ के ठिकानों की जांच करने की मांग करेगी। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं: मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी धनबल के आधार पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। नोट बांटने का खुलासा होने से यह सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और वह लोगों को पैसों का लालच देकर खरीदने में जुटी है। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं है। कांग्रेस पार्टी पहले नोट देकर वोट खरीदने का प्रयास करती है, जब चुनाव हार जाती है तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ती है।

ग्राउंड रिपोर्ट: जबलपुर में भाजपा के आशीष लैंड लार्ड, कांग्रेस के दिनेश मांग रहे ‘एक नोट-एक वोट’

Ground report: BJP’s Ashish Land Lord, Congress’s Dinesh are demanding ‘one note-one vote’ in Jabalpur भोपाल। जबलपुर लोकसभा सीट में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला तो है लेकिन पलड़ा भाजपा का भारी है। ऐसा पहली बार नहीं है, भाजपा यहां लगातार जीत भी दर्ज करती आ रही है। 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के श्रवण पटेल पहली बार मामूली अंतर 6 हजार 722 वोटों के अंतर से भाजपा के बापूराव परांजपे को हरा कर चुनाव जीते थे। इसके बाद से सीट पर भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस एक अदद जीत के लिए तरस रही है। 1996 और 1998 के दो चुनाव बापूराव परांजपे ने जीते और 1999 में जयश्री बनर्जी ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2004, 2009, 2014 और 2019 में भाजपा की ओर से लगातार राकेश सिंह ने कमल खिलाया। राकेश सिंह ने पिछला चुनाव साढ़े 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीता। मौजूदा माहौल देखकर कहा जा रहा है कि जीत का यह आंकड़ा और बढ़ने वाला है। लगातार चार जीत दर्ज करने वाले राकेश सिंह इस बार जबलपुर से मैदान में नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वे विधानसभा का चुनाव लड़े थे और इस समय राज्य सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं। उनके स्थान पर भाजपा ने बिल्कुल नए चेहरे आशीष दुबे को प्रत्याशी बनाया है। वे तीन बार से विधानसभा का टिकट मांग रहे थे लेकिन मिला नहीं। उन्होंने ज्यादा संगठन में काम किया है और अब लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अपनी छवि के कारण आशीष भाजपा की पसंद बने हैं। वे कभी विवादों में नहीं रहे। उनकी बेदाग और निर्विवाद छवि है। आशीष की पारिवारिक पृष्ठभूमि भाजपाई है। उनकी गिनती जबलपुर के लैंड लार्ड के तौर पर होती है। कांग्रेस के दिनेश यादव भी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वे प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री हैं। इससे पहले वे पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। कांग्रेस की ओर से वे महापौर का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी छवि भी अच्छी है लेकिन वे भाजपा के आशीष से काफी पिछड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। जबलपुर में भाजपा जैसी जीत दर्ज करती है, उसे देखकर स्पष्ट है कि यहां जातीय और सामाजिक गणित फेल हो जाते हैं। बावजूद इसके कांग्रेस को जातीय आधार पर ही वोट मिलने की संभावना है। भाजपा द्वारा कराए गए काम बने चुनाव का मुद्दाजबलपुर प्रदेश का महानगर है, इसलिए यहां राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दो ंका खासा असर है। इसके साथ यहां सरकार द्वारा कराए गए काम भी मुद्दा बने हुए हैं। गांव-गांव तक सड़कों की कनेक्टिविटी अच्छी हुई है। सड़कों का जाल बिछा है। 4-5 फ्लाई ओवर बन कर तैयार हुए हैं। एक बड़ा फ्लाई ओवर बन रहा है। अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र और राज्य सरकार ने काफी काम किए है। भाजपा मोदी और राम लहर के साथ इन कामों को मुद्दा बना रही है। भाजपा के आशीष पारिवारिक संबंधों का हवाला देकर भी समर्थन मांग रहे हैं। कांग्रेस अपनी 19 माह की सरकार के कार्यों को गिना रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस किस तरह सभी किसानों का कर्ज माफ करने जा रही थी लेकिन भाजपा ने इसे रोक दिया। केंद्र एवं राज्य सरकार की महंगाई और रोजगार को लेकर नाकामिंया भी बताई जा रही है। कांग्रेस के 5 न्याय और 24 गारंटियों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कांग्रेस के दिनेश को यादव समाज से भी काफी उम्मीद है। विधानसभा में भाजपा को हासिल है बड़ी बढ़तप्रदेश की कई अन्य सीटों की तरह जबलपुर में भी भाजपा को विधानसभा में बड़ी बढ़त हासिल है। लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 7 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट है। 4 माह पहले हुए चुनाव में भाजपा ने पाटन, बरगी, जबलपुर उत्तर, जबलपुर कैंट, जबलपुर पश्चिम, पनागर और सिहोरा विधानसभा क्षेत्रों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस सिर्फ जबलपुर पूर्व सीट ही जीत सकी है। जबलपुर पूर्व में कांग्रेस के लखन घनघोरिया 27 हजार 741 वोटों के अंतर से जीते हैं जबकि सातों सीटों में भाजपा की जीत का अंतर 2 लाख 36 हजार 359 वोट है। साफ है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव से ही 2 लाख से ज्यादा वोटों की बढ़त हासिल है। कांग्रेस के लिए इस अंतर को पाटना बड़ी चुनौती है। जबलपुर जिले को मिलाकर बनी लोकसभा सीटजबलपुर लोकसभा सीट का भाैगोलिक एरिया बाहर नहीं गया। इसके तहत आने वाली सभी 8 विधानसभा सीटें जबलपुर जिले की ही हैं। जातीय आधार पर जरूर हर विधानसभा सीट की अलग-अलग स्थिति है। किसी सीट में दलित और आदिवासी ज्यादा हैं तो किसी में पिछड़े और ब्राह्मण। कुल मिलाकर दबदबा भाजपा का ही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था। तब भाजपा और कांग्रेस को बराबर 4-4 सीटें मिली थीं। बावजूद इसके 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के राकेश सिंह 4 लाख 54 हजार 744 वोटों के बड़े अंतर से जीते थे। अब तो विधानसभा में भी भाजपा का पलड़ा भारी है। माहौल भी भाजपा का है। ऐसे में यदि भाजपा के जीत का अंतर और बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है तो गलत नहीं है। वैसे भी जबलपुर में भाजपा की जीत का अंतर हर चुनाव में बढ़ता ही गया है। क्षेत्र में ब्राह्मण, दलित, पिछड़े वर्ग का दबदबाजबलपुर लोकसभा सीट में आमतौर पर जातीय आधार पर मतदान नहीं होता। सामाजिक समीकरण फेल होने की वजह से यहां हार-जीत का अंतर ज्यादा होता है। लोकसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग और दलित वर्ग के मतदाताओं का दबदबा है। ब्राह्मण एकमुश्त भाजपा के खाते में जा सकते हैं जबकि पिछड़े वर्ग का एक हिस्सा कांग्रेस को मिल सकता है। भाजपा प्रत्याशी ब्राह्मण और कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से हैं। क्षेत्र में मुस्लिम और आदिवासी वर्ग के मतदाताओं की तादाद भी काफी है। इनमें मुस्लिम का अधिकांश वोट कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है जबकि दलित और आदिवासी मतों में बंटवारा होगा। हालांकि इनका ज्यादा हिस्सा भी भाजपा के पक्ष में ज्यादा जाने की संभावना है। क्षेत्र के वैश्य, क्षत्रिय एवं अन्य जाितयों में भाजपा का दबदबा देखने को मिल रहा है।

भाजयुमो ने प्रदेश के सभी मंडलों पर मनाया भाजपा स्थापना दिवस

BJYM celebrated BJP Foundation Day in all the divisions of the state भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार ने भोपाल में वार्ड क्रमांक 50 के बूथ क्रमांक 202 पर महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई व कार्यकर्ताओं के यहां घर-घर पार्टी का झंडा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं के साथ संगठन के माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता कर नमो ऐप के माध्यम से डोनेशन किया।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सेवा ही संगठन के भाव को समर्पित संगठन है। राष्ट्र सेवा और जन सेवा ही हमारे मूल सिद्धांत हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि 5 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक यथा संभव माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागी बनकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रदेशभर में स्थापना दिवस मनाया है और माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह स्थापना दिवस हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा को निरंतर मिल रहे अपार जनसमर्थन के साथ हम सभी को मिलकर मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए अपनी भूमिका निभाना है। प्रदेश अध्यक्ष ने इंदौर संभाग में की बैठक मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार शनिवार को इंदौर पहुंचे और उन्होंने इंदौर संभाग के युवा मोर्चा पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने बैठक में कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने बीते चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसका उल्लेख हमारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी पूरे मन से किया था। हमें इस बार भी लोकसभा चुनाव में दोगुनी ताकत के साथ संगठन कार्यों को सिद्धि तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि हम सभी कार्यकर्ताओं को इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक सशक्त नेतृत्व मिला है। आज विदेशों में भी भारत का डंका बज रहा है। उन्होंने कहा कि जिस अंत्योदय की बात हमारे महापुरुषों ने सोची थी आज उसे मोदी जी के नेतृत्व में हम पूरा होते देख रहे हैं। इसलिए हम सभी मोर्चा कार्यकर्ताओं का भी ये दायित्व बनता है कि हम लाभार्थियों से संपर्क करें उन तक मोदी जी की राम राम भी पहुंचाएं और बदलते भारत की चर्चा युवाओं के साथ करें। उन्होंने कहा कि नवमतदाताओं को इस बात से जरूर अवगत कराएं कि कांग्रेस शासन में देभ की स्थिति क्या थी और मोदी जी के नेतृत्व में आज स्थिति कितनी बदल गयी है।

विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है, उसे ठीक करना है

A lot of junk has happened in Vidisha parliamentary constituency in last 3 decades, it has to be rectified. विदिशा-रायसेन लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा से ‘पुष्पेन्द्र अहिरवार’ का ‘चुनावी साक्षात्कार’ ये भी बोले शर्मा? पुष्पेन्द्र अहिरवार.भोपाल/विदिशा। विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी ने दो बार सांसद रहे प्रतापभानु शर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाकर उतारा है। यह सीट आजादी के बाद से ही कांग्रेस के लिए मुश्किल भरी रही है। यहां कुल 15 लोकसभा चुनाव में से कांग्रेस दो बार जीतने में कामयाब रही। यह सीट पर अटल विहारी वाजपेयी और रामनाथ गोयनका, जैसी शंखसियत को संसद भेज चुकी है। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान भी जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। हालही में तथाकथित राजनैतिक वनवास खत्म कर शिवराज सिंह चौहान फिर से मैदान में हैं। उनके मुकाबले के लिए कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा हैं। शर्मा इस सीट पर 33 साल बाद चुनावी मैदान में उतरे हैं। वे 1980 और 1984 में सांसद चुने गए थे। अब वादाखिलाफी बहुत हो चुकी है। इसके चलते बदलाव बेहद जरूरी है। विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है। उसको ठीक करने के लिए प्रताप भानू को फिर हथियार उठाने पड़ंेगे। वे हरिभूमि और आईएनएच चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से ‘चुनावी संवाद’ कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे। उनसे सीधी बात सवाल: आप लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, आपकी क्या है चुनावी रणनीति?जवाब: मैं कांग्रेस पार्टी का अिधकृत प्रत्याशी हूं। पूरी दमखम से चुनाव लड़ रहा हूं और जीतूंगा भी। भाजपा ने जिस प्रत्याशी को मेरे सामने उतारा है, उन्होंने अपने संसदीय और मुख्यमंत्रित्व काल में ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसका उल्लेख किया जाए। उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है, यह जनता समझ चुकी है। लोकल मुद्दे इतने हो गए हैं कि उसका कोई सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है। बेतवा नदी की शुद्धि के लिए शिवराज ने 20 साल पहले कहा था, जो आज तक नहीं हुआ। उद्योग आएंगे, वे भी नहीं आए। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यहां की सांसद सुषमा स्वराज को रेल कारखाना दिया था, जिसका अिस्तत्व नहीं दिख रहा। रोजगार का मुद्दा वहीं का वहीं है। किसानों को फसल के दाम नहीं मिल रहे। महंगाई का मुद्दा तो बना ही हुआ है। ये सब स्थानीय मुद्दे हैं जिनसे लोग परेशान हैं। सवाल: जब शिवराज के प्यादे चुनाव जीत जाते हैं तो अब वजीर खुद मैदान में हैं, कैसे आप जीतेंगे?जवाब: क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझने की जरूरत है। 30 साल के सांसद या मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज ने हमारे क्षेत्र को क्या दिया। नौजवाब को रोजगार के लिए कितने उद्योग लगाए। नेता तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता तो वहीं की वहीं खड़ी है। जनता के आशीर्वाद से हम जीतेंगे। नेता तो स्वार्थ की सौदेबाजी करते रहते हैं। भाजपा ने तो ‘दलबदल सेल’ खोल दिया है, यह कितना शर्मनाक है। भ्रष्टाचार के आवरण में भाजपा ढकी हुई है। लोगों को लालच देकर खरीद रही है। हो सकता है कि शशांक भार्गव हारने के बाद टेंशन आए हों तो वे भाजपा में फोटो खिंचाने चले गए। 50 साल के अनुभव से कह सकता हूं कि जिस तरह की गंदी राजनीति चल रही है, ऐसी कभी नहीं हुई। जब जनता ने ही तय कर लिया कि हमें बदलाव लाना है तो नेताओं के आने-जाने से कुछ नहीं होगा। सवाल: विधानसभा चुनाव के दौरान भी उतना ही आत्मविश्वास था, जितना आज है, इतना आत्मविश्वास कहां से लाते हैं?जवाब: हम वक्त की कसौटी पर खरे उतरे हैं। क्षेत्र की कसौटी पर खरे उतरे हैं। मप्र में हमारी सरकार रही है। अभी हमारा प्रयास सरकार बनाने का था, लेकिन किसी कारणवश नहीं बना पाए। इसके कई कारण रहे हैं। प्रत्याशियों ने कई शिकायतें की। सबसे ज्यादा ईवीएम की शिकायतें की, जिनपर चुनाव आयोग मौन रहा है। परिणामों में हेराफेरी की शिकायतें भी आई हैं। यह सब आपने भी देखा है। ईवीएम पर नजर रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि पूरा खेल और हेराफेरी इसी से संभव है। ईवीएम का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहा है, यह हमें कहने की जरूरत नहीं है। सवाल: उसी ईवीएम से ही चुनाव हो रहे हैं तो आपके लिए गुंजाइश कहां बची है?जवाब: ईवीएम पर कड़ी निगाह रखेंगे। अब ईवीएम में हेराफेरी बिल्कुल नहीं होने देंगे। यदि हुआ तो उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अब हाथ पर हाथ धरे कांग्रेस नहीं बैठे रहेगी। क्योंकि अब नेता और जनता इस बात को अच्छी से समझ चुकी है। पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे उठाए हैं। आगे भी लड़ाई लड़ंेगे। हमने चुनाव आयोग से कहा है कि ईवीएम से परिणाम दे रहे हैं, उसके साथ वीवीपेट की पर्ची की भी काउंटिंग की जाए, भले ही दो दिन लग जाएं, तभी परिणाम आएं। इससे डिजीटल टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को लेकर लोगों में जो शंका है, वह दूर हो जाएगी। अगर मैं कांग्रेस को वोट दे रहा हूं, वो हमें नहीं मिल रहा है तो यह हमारे मताधिकार का हनन है। सवाल: आपके नेता तो पार्टी छोड़ रहे हैं, फिर कैसे जीत रहे हैं आप?जवाब: देखिए, भाजपा सारे साम-दाम-दंड अपनाकर हमारे नेताओं को तोड़ रही है। ईडी, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है। यह भाजपा का छलकपट जनता देख रही है, वही इसका इस बार जवाब देगी। मेरा मानना है कि इस चुनाव के बाद दलबदलुओं की कोई औकात नहीं रहेगी। कोई 17 हजार कार्यकर्ता या नेता भाजपा में नहीं गए। मेरा दावा है कि भाजपा इन 17 हजार लोगों की लिस्ट प्रकाशित करे, तभी सच्चाई सामने आएगी। कुछ लोग पद या कमाने के लालच से सौदेबाजी करके गए हैं। यदि इस बार दिल्ली में सरकार बदली तो यही जाने वाले नेता उल्टी नाक से पांव रगड़ेंगे, ये मेरा दावा है। सवाल: शिवराज 10 लाख वोटों से जीतने का दावा कर रहे हैं तो आपका क्या होगा?जवाब: उनकी हवाहवाई बात करने की, घोषणावीर होने की पुरानी आदत है। मेरा दावा है कि वे 1 लाख से ज्यादा वोटों से हारेंगे। मप्र का इतिहास देख लीजिए कोई 10 लाख मतों से नहीं जीता। इसी से अंदाजा लगा लीजिए यह कितनी फर्जी … Read more

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