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मुरैना में हरेंद्र मौर्यकी मौत के मामले में आया नया मोड़, मारपीट के एक वीडियो वायरल

मुरैना मुरैना में रहने वाले हरेंद्र मौर्य ने बीते शनिवार की रात अपने घर में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. रविवार सुबह परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया. लेकिन घटना के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया. दरअसल, वायरल वीडियो में शहर की गांधी कॉलोनी में रहने वाले हरेंद्र मौर्य को उनकी पत्नी और बेटियां बेरहमी से डंडे से पीटती दिख रही हैं. हरेंद्र मौर्य पलंग पर लेटे हुए दिखाई दे रहे हैं, जहां उनकी पत्नी रचना मौर्य उनके पैर पकड़े हुए हैं. उनकी एक बेटी हाथ पकड़े हुए है, जबकि दूसरी बेटी डंडे से बेरहमी से पिटाई कर रही है. पास बैठे हरेंद्र के छोटे बेटे ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बड़ी बहन ने उसे भी डंडे का डर दिखाकर चुप करा दिया. इस चौंकाने वाले वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का रुख बदल दिया है. मृतक का पोस्टमॉर्टम अब ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के बोर्ड से कराया जाएगा. CSP मुरैना दीपाली चंदोलिया ने बताया, “गांधी कॉलोनी निवासी हरेंद्र मौर्य की आत्महत्या की सूचना मिली थी. मौके पर सिटी कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. लेकिन वायरल वीडियो ने मामले को उलट दिया. इसमें मृतक के परिजन (पत्नी, दो बेटियां और मां) उसकी मारपीट करते दिख रहे हैं. वीडियो के आधार पर सभी से पूछताछ की जा रही है और शव का पोस्टमॉर्टम ग्वालियर मेडिकल बोर्ड से कराया जा रहा है.” पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या मारपीट के कारण ही हरेंद्र ने यह कदम उठाया? इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और सोशल मीडिया पर वीडियो की चर्चा हो रही है.

गाड़ी चलाते समय बजाया हूटर तो चलेगा डंडा! पुलिस मुख्यालय ने विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश

भोपाल मध्य प्रदेश में निजी वाहनों पर लाल, पीली, नीली फ्लैश लाइट, हूटर और VIP स्टीकर लगाकर रौब झाड़ने वाले चालकों के खिलाफ पुलिस अब सख्त कार्रवाई करने जा रही है. पुलिस मुख्यालय ने भोपाल और इंदौर के पुलिस कमिश्नर सहित सभी जिलों के SP को निर्देश जारी किए हैं. 1 मार्च से 15 मार्च तक 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह कदम अनधिकृत वाहनों की बढ़ती संख्या और अवांछित गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है. पुलिस मुख्यालय का निर्देश पुलिस मुख्यालय ने अपने पत्र में कहा, “प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ निजी वाहनों पर हूटर, फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), VIP स्टीकर और गलत नंबर प्लेट के मामले बढ़ रहे हैं. कार्यवाही न होने से ऐसे चालकों को प्रोत्साहन मिल रहा है.” पत्र में एक हालिया घटना का जिक्र है, जहां एक जिले में VIP भ्रमण के दौरान ऐसा वाहन पकड़ा गया और उसके खिलाफ BNS और मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया. सभी जिलों से इसी तरह की कार्रवाई की अपेक्षा की गई है. रिपोर्ट 18 मार्च तक ईमेल  cell02_ptri@mppolice.gov.in या aig_ptri@mppolice.gov.in  पर मांगी गई है. अभियान का दायरा1 से 15 मार्च तक चलने वाले इस अभियान में चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस होगा:   – हूटर का दुरुपयोग   – फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती) का अनधिकृत इस्तेमाल   – VIP स्टीकर का गलत प्रयोग   – गलत नंबर प्लेट वाले वाहन दिग्विजय की मांग से शुरुआत इस अभियान की पृष्ठभूमि में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का हालिया पत्र भी है. कुछ समय पहले उन्होंने DGP को पत्र लिखकर ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उनका कहना था कि यह चलन न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों में भय और भ्रम भी पैदा करता है. अब पुलिस मुख्यालय के निर्देश से यह मांग कार्रवाई में बदल रही है. सड़क पर बढ़ेगा शिकंजा यह अभियान निजी वाहनों के जरिए रौब दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पुलिस का कहना है कि यह कदम अवैध गतिविधियों को हतोत्साहित करेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा हूटर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस मुख्यालय ने जताई नाराजगी पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश में यह भी कहा गया कि कुछ दिन पहले VIP विजिट के दौरान एक ऐसा अनाधिकृत वाहन भी पकड़ा गया था, लेकिन उसके बाद भी मध्य प्रदेश के सड़कों पर अनवरत रूप से हूटर समेत प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग निजी वाहन चालकों द्वारा धडल्ले से किया जा रहा है. मध्य प्रदेश में निजी वाहनों पर अनाधिकृत सामग्री के उपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैं गौरतलब है. प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ निजी वाहनों पर हूटर, वाहन पर फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), VIP स्टीकर व गलत नम्बर प्लेट के मामले तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से उन्हें प्रोत्साहन मिल रहा है. जारी निर्देश में कहा गया है कि ऐसे अनाधिकृत वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है

उप्र पुलिस जवानों ने पेश की कर्तव्यनिष्ठा की अद्वितीय मिसाल, बिछड़ों को अपनों से मिलाया; खोने वालों को कीमती सामान लौटाए

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में जहां एक ओर आस्था का महासमुद्र उमड़ा, वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन विभाग के जवानों ने सेवा, सुरक्षा और ईमानदारी की मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संचालित विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 15 देशों और 20 से अधिक राज्यों के श्रद्धालुओं को उनके परिवारों से मिलाने का कार्य किया। जवानों ने न केवल लाखों रुपए की नकदी, आईफोन, गहने और अन्य कीमती सामान खोने वालों को वापस लौटाया, बल्कि बीमारों को तत्काल चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई। इसके अलावा, पुलिस ने बुजुर्गों और दिव्यांगों को संगम स्नान में मदद की। इस सेवा भाव की चर्चा रूस, अमेरिका और जर्मनी समेत तमाम देशों तक पहुंच गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूरे मेले में खोया-पाया केंद्र बनाए और विशेष खोज अभियान चलाया। इस अभियान के प्रभारी आईजी पीएसी पूर्वी जोन डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने कहा “हमारे जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की मदद की। इस अभियान से यूपी पुलिस की ईमानदारी और सेवाभाव की गूंज सात समंदर पार तक पहुंच गई है।” केस 1: 17 फरवरी को जयपुर के पुष्पेंद्र सिंह शेखावत अपने परिवार के साथ महाकुंभ में आए थे। उनका पर्स, जिसमें 69,000 रुपए नकद, दो आईफोन, सोने की चेन, दो अंगूठियां और एटीएम कार्ड थे, खो गया। 42वीं वाहिनी पीएसी नैनी प्रयागराज के अरविंद कुमार सिंह ने अरैल घाट पर यह पर्स खोजा और श्रद्धालु से संपर्क कर वापस सौंप दिया। केस 2: छत्तीसगढ़ की राजकुमारी यादव की अचानक तबीयत बिगड़ गई। 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा के आरक्षी प्रशांत कुमार और रवींद्र सिंह ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें समय पर इलाज मिला। केस 3:29 जनवरी को रूस की रीता अपने साथियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रही थी। रात में वह अपने समूह से बिछड़कर पाल बस्ती मवैया पहुंच गई।33वीं वाहिनी पीएसी झांसी के आरक्षी अमरदीप ने उन्हें खोजकर उनके साथियों से मिलाया। केस 4: 15 जनवरी को जर्मनी से आए श्रद्धालु नवाबगंज जाना चाहते थे, लेकिन रास्ता भटक गए।28वीं वाहिनी पीएसी इटावा के आरक्षी राजू सिंह ने उन्हें सुरक्षित नवाबगंज तक पहुंचाया। केस 5: बंगलुरु की शोभा संगम स्नान के दौरान घायल हो गईं। 33वीं वाहिनी पीएसी झांसी के आरक्षी सुरजीत यादव ने उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया और प्राथमिक चिकित्सा दिलवाई। केस 6: 24 जनवरी को संगम मार्ग पर विवेक भारती को कार चलाते समय मिर्गी का दौरा पड़ा। 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद के आरक्षी गुरदीप और कपिल कुमार ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, परिवार को सूचित किया और ठीक होने पर घर भेजा।

पत्थरबाजों को ट्रैक करने रतलाम पुलिस का हाईटेक प्लान, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर ड्रोन से निगरानी

रतलाम  एमपी के रतलाम-झाबुआ क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लगातार पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए अब रतलाम पुलिस नाइट विजन ड्रोन का सहारा ले रही है. 8 लेन पर पत्थरबाजी कर भाग जाने वाले बदमाशों को अब नाइट विजन ड्रोन की मदद से ट्रैक किया जा सकेगा और धरपकड़ भी की जाएगी. इससे पूर्व पुलिस ने इन क्षेत्रों में कैंप लगाकर और रेंडम पेट्रोलिंग कर स्थानीय ग्रामीणों से पत्थरबाजी रुकवाने में मदद करने की अपील भी की थी. जिसका कुछ असर भी देखने को मिला था. लेकिन बीते दिनों फिर से पत्थर बाजी की घटनाएं हुई हैं. एसपी ने ड्रोन उड़ाकर की टेस्टिंग वहीं, अब पुलिस पत्थरबाजी करने वाले बदमाशों को टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रैक करने का प्रयास कर रही है. रतलाम एसपी ने पुलिस अधिकारियों के साथ पत्थरबाजी वाले क्षेत्र में ड्रोन उड़ाकर इसका परीक्षण भी किया है. वहीं, हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाने के साथ 90 किलोमीटर के इस हिस्से में पुलिस चौकियां भी बनाई जाएंगी. बीते कुछ महीनों में पत्थर बाजी की करीब दर्जन भर घटनाएं सामने आई हैं. इसके बाद पुलिस पेट्रोलिंग भी इस क्षेत्र में बढ़ाई गई है. एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भेजा दरअसल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर जब से आवागमन शुरू हुआ है, तब से ही झाबुआ के थांदला, रतलाम के शिवगढ़, रावटी और औद्योगिक थाना क्षेत्र में पत्थरबाजी की घटनाओं की कई शिकायत दर्ज हुई हैं. कई मामलों में तो राहगीर शिकायत किए बिना ही आगे रवाना हो जाते हैं. जिसकी वजह से पत्थरबाजी की घटनाओं के लिए दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा बदनाम होने लगा है. रतलाम पुलिस प्रशासन ने करीब 90 किलोमीटर के इस हिस्से पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है. ड्रोन से ट्रैक होंगे पत्थरबाज वहीं, पुलिस पेट्रोलिंग के साथ ही नाइट विजन कैमरों से निगरानी भी करेगी. एनएचएआई के साथ मिलकर पुलिस ड्रोन उड़ाकर पत्थरबाजी करने वाले लोगों को ट्रैक करेगी. पूर्व में अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी करने वाले बदमाश भाग जाया करते थे, जिन्हें ढूंढना और पकड़ना मुश्किल होता था. लेकिन अब हाई क्वालिटी के नाइट विजन ड्रोन के फुटेज के आधार पर पत्थरबाजी करने वाले और 8 लेन पर चोरी, तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर पकड़ा जा सकेगा. सामाजिक तत्वों पर लगेगा अंकुश रतलाम एसपी अमित कुमार ने बताया कि, ”एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है. वहीं, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद कर ऐसा करने वाले और सामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जाएगा.” बहरहाल रतलाम पुलिस अब दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पत्थरबाजी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. जिससे यहां से रात में गुजरने वाले यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे.

बंधुआ मजदूर: बुरहानपुर के 17 मजदूरों को महाराष्ट्र में बनाया बंधक, पुलिस ने मुक्त कराया

 बुरहानपुर रहानपुर के बंभाड़ा गांव से मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गए 17 लोगों को बंधक बना लिया गया था। एसपी देवेंद्र पाटीदार के निर्देश पर शाहपुर थाना पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए इन सभी को सकुशल मुक्त करा लिया गया है। शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में गई पुलिस टीम ने उस्मानाबाद के कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन की मदद से सभी को मुक्त कराया। बचाव अभियान में एएसआई महेंद्र पाटीदार, प्रधान आरक्षक शहाबुद्दीन के अलावा जन साहब संस्था के लीगल को-ऑर्डिनेटर सीएस परमार, राज्य समन्वयक यास्मीन खान और एफओ देव भोरे की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीआई ने बताया कि हर साल बुरहानपुर जिले से बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों में जाते हैं, जहां कई बार उन्हें बंधक बना लिया जाता है। पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई कर मजदूरों की मदद करता है। इस मामले में भी सभी मुक्त कराए गए लोगों को सुरक्षित उनके गांव बंभाड़ा पहुंचा दिया गया है।

दलित दूल्हे की घुड़चढी को रस्म पूरा करने एसपी ने पुलिसकर्मियों की फौज उतारी

अहमदाबाद  गुजरात के बनासकांठा जिले में दलित वकील मुकेश परेचा ने घोड़ी पर बैठकर अपनी शादी की बारात निकाली। इलाके में किसी दलित परिवार में घुड़चढ़ी का यह पहला मौका था। इस बारात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बाद में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी के साथ पुलिस अफसरों ने दूल्हे की गाड़ी ड्राइव की। हालांकि घोड़ी के उतरकर कार पर चढ़ने के दौरान किसी ने उनकी कार पर पत्थर फेंका। दूल्हे परेचा ने कहा कि वह एक-दो दिन में इसकी शिकायत देंगे। शादी में घुड़चढ़ी के लिए मांगी थी सुरक्षा बनासकांठा ज़िले के पालनपुर तहसील के गडलवाड़ा गांव में गुरुवार को एक अनोखी शादी देखने को मिली। यह शादी आम शादियों से बिल्कुल अलग थी। दूल्हे मुकेश परेचा अपनी शादी में घुड़चढ़ी की रस्म करना चाहते थे। इलाके के दबंगों ने दलितों की घुड़चढ़ी पर रोक लगा रखी थी। परेचा ने इस रस्म के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी। उन्होंने 22 जनवरी को बनासकांठा ज़िले के पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन दिया। आवेदन में परेचा ने बताया कि उनके गांव में दलित कभी घुड़चढ़ी या वरघोड़ा नहीं निकालते हैं। मैं पहला व्यक्ति हूं जो वरघोड़ा निकालूंगा, जिसमें किसी अनहोनी की पूरी संभावना है। आपसे निवेदन है कि हमें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। इंस्पेक्टर ने खुद चलाई दूल्हे की कार पुलिस ने उनकी बरात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। खुद जिग्नेश मेवाणी भी पुलिस अफसरों के साथ बारात में शामिल हुए। बनासकांठा ज़िला अदालत में वकालत करने वाले परेचा ने कहा कि पुलिस सुरक्षा के बीच उनकी बारात निकली। जब वह घोड़े पर सवार थे, तब कुछ नहीं हुआ। लेकिन जब वह घोड़े से उतरे और अपनी कार में बैठे तो किसी ने उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंक दिया। फिर पुलिस इंस्पेक्टर के. एम. वसावा ने खुद स्टेयरिंग थाम लिया। उनके साथ कार में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी मौजूद थे।

पुलिस मुख्यालय में तैनात तीन पुलिसकर्मियों पर 76 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल बिल भुगतान का आरोप लगाया

भोपाल पुलिस मुख्यालय में तैनात तीन पुलिसकर्मियों पर 76 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल बिल भुगतान का आरोप लगा है। ये तीनों में एक सूबेदार, एक सब-इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर है। सभी लेखा शाखा में काम करते थे। इन्होंने वित्तीय वर्ष 2022, 2023 और 2024 में खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को बीमार बताकर यह धोखाधड़ी की। संचालक ट्रेजरी की ओर से भेजे गए एक पत्र के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें इनके खातों में असामान्य रूप से उच्च भुगतान की ओर इशारा किया गया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। ऐसे हुआ खुलासा यह मामला तब सामने आया जब संचालक ट्रेजरी ने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र भेजा। इस पत्र में बताया गया कि तीन पुलिसकर्मियों के खातों में मेडिकल बिल के मद में काफी ज्यादा रकम ट्रांसफर हुई है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच के दौरान पाया गया कि सूबेदार नीरज कुमार, सब-इंस्पेक्टर हरिहर सोनी और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हर्ष वानखेड़े ने फर्जी मेडिकल बिल बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है। अलग-अलग बीमारियों के नाम पर मेडिकल बिल लगाए तीनों आरोपियों ने खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को अलग-अलग बीमारियां बताकर मेडिकल बिल जमा किए थे। यह बिल असामान्य रूप से ज्यादा थे, जिससे शक पैदा हुआ। जांच में पता चला कि इन्होंने ‘प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट’ का भी गलत इस्तेमाल किया। यह सर्टिफिकेट गंभीर बीमारियों के लिए सिविल सर्जन द्वारा जारी किया जाता है। लेकिन जांच दल ने जब सिविल सर्जन से पुष्टि की, तो पता चला कि उन्होंने इन तीनों को केवल दो ही सर्टिफिकेट जारी किए थे। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि बाकी सभी सर्टिफिकेट फर्जी हैं। एडीजी अनिल कुमार ने बताया कि संचालक ट्रेजरी से पत्र मिलने के बाद गोपनीय जांच शुरू की गई थी। जांच शुरू होने से पहले ही तीनों आरोपियों को लेखा शाखा से हटा दिया गया था। जांच में आरोप सही पाए जाने पर 8 जनवरी को तीनों को निलंबित कर दिया गया। तीनों के खिलाफ जहांगीराबाद थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 318, 319, 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है। वानखेड़े ने किए 35 लाख गबन जांच में यह भी पता चला है कि तीनों आरोपियों ने अलग-अलग रकम का गबन किया है। हर्ष वानखेड़े के खाते में लगभग 35 लाख रुपए, हरिहर सोनी के खाते में लगभग 24 लाख रुपए और नीरज कुमार के खाते में लगभग 17 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। यह कुल मिलाकर लगभग 76 लाख रुपए होता है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया है। एसीपी जहांगीराबाद सुरभि मीणा ने बताया कि लेखा शाखा की रिपोर्ट के आधार पर तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस घोटाले में और लोग भी शामिल हैं। इस मामले में सिविल सर्जन से भी पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस ने कर्नाटक के कॉफी बागान में बंधक बनाए गए 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया

 अशोकनगर कर्नाटक के कॉफी बागान में बंधक बनाकर रखे गए मध्यप्रदेश के 12 मजदूरों को पुलिस ने मुक्त करवा लिया है. सभी मजदूर मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से कॉफी बागान में काम करने गए थे. दरअसल, अशोकनगर एसपी विनीत जैन को 30 जनवरी को मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस की एक टीम कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में गई थी. टीम के सदस्यों ने सबसे पहले कॉफी बागान में बंधक बनाए गए मजदूरों को ढूंढा. अशोकनगर थाने के प्रभारी मनीष शर्मा ने बताया कि मजदूरों के स्थान का पता लगाने के बाद पुलिस ने चिकमंगलूर जिले के जयापुरा थाने से संपर्क किया और स्थानीय पुलिस की मदद से 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया और मध्यप्रदेश वापस लाया गया. वहीं, ठेकेदार अफसर अली को बाद में पकड़ लिया गया और अशोकनगर लाया गया. अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कॉफी बागान मैनेजमेंट से 90 हजार रुपये का एडवांस लेकर ठेकेदार अली अशोकनगर से मजदूरों को कर्नाटक ले गया था. लेकिन वह वहां से भाग निकला था. एसपी ने बताया कि ये लोग कुछ हद तक बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि कुछ और लोग भी इसी तरह से वहां काम कर रहे हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है. मजदूरों को कर्नाटक लेकर गया ठेकेदार फरार जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्र टकनेरी से कई मजदूरों को ठेकेदार अफसर अली मजदूरी के लिए कर्नाटक लेकर गया। वह उनको कर्नाटक के घने जंगलों में कॉफी के फल को तोड़ने के काम के लिए लेकर गया था। ठेकेदार करीब 2 महीने पहले उनको लेकर गया था। उनको वहां छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया। वहां काम करने गए मजदूरों ने अपने घर पर ऐसी बात बताई की परिजन हैरान परेशान हो गए। साथ ही पुलिस में शिकायत करने पहुंच गए। पुलिस के पास पहुंचे परिजन मजदूरों के परिजन में से एक मनकुंवर बाई ने पुलिस में शिकायत की गई। उसने बताया कि उनके परिवार और आसपास के रहने वाले कई मजदूर कर्नाटक में फंसे हुए हैं। उन्हें घर नहीं आने दिया जा रहा। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत सुन मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन एसपी विनीत कुमार जैन ने तुरंत एक्शन लेते हुए निर्देश दिए। जिस पर थाना कोतवाली प्रभारी मनीष शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बनाकर जांच शुरू की गई। उनकी तरफ से कॉफी कंपनी के लोगों से मामले को लेकर चर्चा की गई। साथ ही वहां के मैनेजर को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। इसके बाद कंपनी ने मजदूरों को वहां से छोड़ा। वहां से छूटते ही बुधवार की सुबह मजदूर शहर लौटे और एसपी से मुलाकात की। मजदूरों के छूटने में महाराज सिंधिया ने की मदद बंधक से आजाद होकर आई मजदूर इंदर बाई ने बताया कि उन्होंने वहां फंसे होने की सूचना बीजेपी नेता उपेंद्र पाराशर को बताई थी। जिसके बाद उन्होंने मामले को क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संज्ञान में लाया। इसके बाद एसपी को शिकायत की गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां फंसे मजदूरों को यहां लाने की कार्रवाई शुरू की थी। बाउंड्री वॉल के अंदर बने थे मजदूरों के मकान कर्नाटक से लौटे मजदूर मोतीलाल ने बताया कि उन्हें वहां पर घने जंगल के बीच एक बाउंड्री वॉल के अंदर रखा जाता था। साथ ही मजदूरी के लिए पहाड़ी इलाके में ले जाया जाता था। बाहर जाने के लिए भी अनुमति लेना पड़ता था। राशन लेने के लिए भी एक ही व्यक्ति जंगल से कुछ ही दूरी पर स्थित बाजार से आता था। उसके लिए भी एक ही मजदूर को भेजा जाता था जो सभी मजदूरों का राशन लेकर आता था। छोड़ने आए व्यक्ति ने जो बताया कर देगा हैरान कर्नाटक से मजदूरों को लेकर आए राम सिंह ने बताया कि वह भी यहां से मजदूरों को 380 रुपए रोज में लेकर जाते हैं। हालांकि फंसे हुए मजदूरों का ठेकेदार अफसर अली वहां से एडवांस पैसा लेकर भाग आया। मजदूरों लेकर आए व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने मेरी पत्नी और बच्चे को भी वही रोका है और कंपनी के लोगों ने मुझे इन मजदूरों को यहां छोड़ने के लिए कहा है। अब इन्हें छोड़ कर वापस भी जाना है। वहीं मजदूरों ने अभी भी वहां अन्य 70 मजदूरो के फंसे होने की बात भी बताई। एसपी ने बताया कि जिले के टकनेरी ग्राम के कुछ मजदूर पिछले दो माह पहले कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के अन्नापुरई में काम करने के लिए गए थे। जहां उन्हें पैसे के लेनदेन के कारण रोक लिया गया। इसके बाद उनके परिजनों ने शिकायत की तो लगभग एक दर्जन मजदूर घर लौट आए। जिनमें इंदर बाई आदिवासी, मोटीलाल आदिवासी, जानकी बाई, सिमरन आदिवासी, गीता आदिवासी, कृष्ण, मोतीलाल, कल्लू, रामसिंह सहित अन्य मजदूर शामिल हैं।  

बाराबंकी में पुलिस पर बदमाश ने चला दी गोली, मुठभेड़ में तीन बदमाशों के पैर में लगी गोली, 5 गिरफ्तार

बाराबंकी यूपी के बाराबंकी जिले में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से गोलियां चलीं. इस दौरान पुलिस की गोली से तीन बदमाश घायल हो गए. वहीं, दो को दौड़ाकर पकड़ लिया गया. इस तरह कुल 5 बदमाश पकड़े गए हैं. घटना जिले के अलग-अलग थानों की है. फिलहाल, घायल बदमाशों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है.    आपको बता दें कि पहली पुलिस मुठभेड़ में कैब ड्राइवर को बंधक बनाकर कार लूट की घटना को अंजाम देने वाले अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया. इन पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित था. मामले में पीड़ित उमाशंकर यादव ने बताया कि वो थाना सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में रैपिडो टैक्सी में अपनी स्विफ्ट डिजायर कार चलाते हैं.  5 फरवरी की दोपहर को अहिमामऊ चौराहा के पास खड़ा था, तभी एक राइड मिली जिसमें दो व्यक्तियों द्वारा गाड़ी में बैठकर रेलवे स्टेशन बाराबंकी चलने की बात कही गई. लेकिन रास्ते में उन्होंने कार व अन्य समान लूट लिया. जिसके बाद उमाशंकर ने फौरन पुलिस को इनफॉर्म किया तो पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी. बुधवार रात थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के सूत मिल रोड के पास 3 बदमाश मोटरसाइकिल से आते हुए दिखाई दिए. पुलिस टीम द्वारा बदमाशों को रोकने का प्रयास किया गया तो पुलिस टीम को देखकर गिरफ्तारी से बचने हेतु बदमाशों द्वारा पुलिस पर फायरिंग की गई. पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही करते हुए फायरिंग की जिसमें एक बदमाश के पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया. घायल/गिरफ्तार अभियुक्त का नाम विजय कुमार रावत को गिरफ्तार कर लिया गया है. वह लखनऊ का रहने वाला है. वहीं, दूसरी घटना थाना बड्डूपुर क्षेत्रान्तर्गत बुजुर्ग दंपति से हुई लूट की घटना से संबंधित है. इस मामले में फरार अभियुक्त को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा थाना सतरिख, जैदपुर, सफदरगंज, फतेहपुर क्षेत्रान्तर्गत अनाज के गोदामों से चोरी की घटना करने वाले 3 अभियुक्तों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया है. इस बाबत पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने बताया कि तीन अलग-अलग मामलों में पुलिस और बदमाशों से मुठभेड़ हुई है, जिसमें तीन बदमाशों के पैर में गोली लगी है. उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है. वहीं, 2 गिरफ्तार हुए हैं. तीनों घटनाओं का पुलिस ने खुलासा कर दिया है.  

विवाह के 30 साल बाद पत्नी ने लगाया दहेज प्रताड़ना का केस, चार दिन के सदमे के बाद उठाया ये कदम

भोपाल  शादी के 30 साल बाद एक पत्नी अपने पति के खिलाफ थाने पहुंची तो दुखी पति ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। अवधपुरी में रहने वाली पत्नी ने 26 जनवरी को महिला थाने में पति के विरूद्ध दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करवाया था। चार दिन तक सदमे में रहने के बाद पति ने शुक्रवार को जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने के बाद उसका बेटा अस्पताल लेकर पहुंचा। कुछ देर इलाज के बाद उसने दम तोड़ दिया। अवधपुरी पुलिस ने मर्ग कायम कर खुदकुशी के कारणों की जांच शुरू की है। दंपती की बेटी की शादी हो चुकी है अवधपुरी थाना प्रभारी के अनुसार 52 वर्षीय राजीव गिरी मूलत: रायसेन जिले के बरेली के रहने वाले थे। वर्तमान में वह सौम्य स्टेट कॉलोनी में रहते थे। वह पूर्व में राजीव सिविल ठेकेदार थे, फिलहाल खेती करते थे। करीब 30 साल पहले राजीव की जानकी गिरी से शादी हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा अविवाहित है और प्राइवेट नौकरी करता है। दोनों के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था, जिसके बाद जानकी ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत पुलिस से की थी, जिस पर प्रकरण भी दर्ज कर लिया गया था। पत्नी ने पुलिस से कहा केस खत्म करने का दबाव बना रहा है पति शुक्रवार को राजीव गिरी के जहर खाने के बाद उनका बेटा अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। जबकि उनकी पत्नी जानकी पति की खैर मनाने की बजाए थाने पहुंच गई। पति वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा था, जबकि पत्नी पुलिस से कह रही थी कि उसका पति केस वापस लेने का दबाव बना रहा है, उस पर कार्रवाई की जाए। हालांकि पुलिस ने वह कार्रवाई नहीं की और फिर कुछ देर बाद राजीव गिरी ने दम तोड़ दिया।

मध्यप्रदेश में 8500 पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी मिली, 8 साल बाद एसआई की भर्ती होगी

भोपाल मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया का इंतजार खत्म हुआ। सरकार ने 8500 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इसमें 7500 सिपाही (Constable), 500 सब-इंस्पेक्टर (Sub-Inspector) और 500 ऑफिस स्टाफ (Office Staff) शामिल हैं। मध्यप्रदेश में 8 साल बाद एसआई पदों पर भर्ती होने जा रही है। पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) ने गृह विभाग (Home Department) को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। सिपाही के 7500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू प्रदेश में 18,000 सिपाही पद रिक्त हैं। इनमें से 7500 पदों पर भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए एक प्रक्रिया पहले से चल रही है। ऑफिस स्टाफ के 500 पद पिछले 8 वर्षों से रिक्त थे। इनमें स्टेनो (Steno) और एएसआई (ASI) पद शामिल हैं। 30 जनवरी को शासन ने इन पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। राज्य शासन ने 30 जनवरी को ऑफिस स्टाफ की भर्ती की अनुमति भी जारी कर दी। 7500 सिपाहियों की भर्ती को भी जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने पद संभालने के बाद समीक्षा में पाया कि मप्र पुलिस के पास वर्तमान बल सिर्फ एक लाख है, जबकि 25 हजार पद रिक्त हैं। हर साल 500-700 पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे यह संख्या बढ़ती जा रही है। गृह विभाग ने एसआई पदों की भर्ती लिए नियमों में संशोधन किया है। इनमें एसआई रेडियो, आयुध व फोटो /फिंगर प्रिंट शामिल हैं। इन पदों के लिए 36 की बजाय 38 वर्ष की उम्र तक परीक्षा दे पाएंगे। 7500 पद पर सिपाही भर्ती होंगे: मप्र के सभी जिलों में 18,000 सिपाही पद रिक्त हैं, जिनमें से 7,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वर्तमान में एक भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें लिखित परीक्षा के परिणाम लंबित हैं। एसआई-सूबेदार के 500 पद: मप्र में आठ साल पहले एसआई-सूबेदार पदों पर भर्ती हुई थी। वर्तमान में 1200 से ज्यादा पद रिक्त हैं। भर्ती नियमों में संशोधन लंबित था, लेकिन अब नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। ऑफिस स्टाफ के 500 पद: स्टेनो और एएसआई (एम) पदों पर पिछले आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। पुलिस मुख्यालय ने 1 जनवरी को प्रस्ताव भेजा, जिसके बाद 30 जनवरी को शासन ने मंजूरी दी। अब 100 स्टेनो और 400 एएसआई (एम) पदों पर भर्ती होगी। रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती मप्र पुलिस में रिक्त पदों की संख्या काफी ज्यादा है। शासन इन पदों पर भर्ती की मंजूरी दे रहा है। जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -कैलाश मकवाणा, डीजीपी

पुलिस ने मादक पदार्थ तस्कर सलमान लाला 25.83 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स के साथ गिरफ्तार

उज्जैन मोस्ट वांटेड मादक पदार्थ का तस्कर सलमान पिता शैरूलाला को पुलिस ने चंबल नदी के पुलिया ग्राम बनावाड़ा से गिरफ्तार किया। वह उज्जैन पुलिस का मोस्ट वांटेड आरोपी था। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 15 से अधिक अपराध पंजीबद्ध हैं। सलमान फर्जी पासपोर्ट के माध्यम से पत्नी बच्चों को लेकर दुबई फरार हो गया था। वीजा की अवधि खत्म होने पर वह नेपाल के रास्ते इंडिया और फिर नागदा पहुंचा था। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया सलमान पिता शैरूलाल निवासी राजीव नगर नागदा कुख्यात अपराधी है। वह 25.83 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स के साथ पकड़ाया है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 25 लाख रुपए है। सलमान 2 साल से फरार था। फरारी के दौरान वह दुबई में रहा। पुलिस को मुखबीर से सूचना मिली कि सलमान एमडीएमए ड्रग्स लेकर खाचरौद, चांपाखेड़ा, होते हुए ताल-आलोट की ओर क्रय विक्रय के लिए जाने की फिराक में खड़ा है। सूचना पर तत्काल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम को रवाना किया। पुलिस ने उसे ग्राम बनवाड़ा में सफेद रंग की स्कोडा कार के साथ देखा तो वह पुलिस को देखकर भागने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया। सलमान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। सलमान के खिलाफ राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न थानों में फिरौती मांगने, प्राणघातक हमले, अवैध हथियार रखने जैसे दर्जनों अपराध पंजीबद्ध हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक जोन उज्जैन द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी पर थाना नागदा के अपराध पर 20 हजार इनाम व राजस्थान पुलिस द्वारा 40 हजार रुपए इनाम की घोषणा की गई थी। सलमान की गिरफ्तारी पर कुल 60 हजार रुपए इनाम था। फर्जी पासपोर्ट पर दुबई की यात्रा आरोपी ने स्वयं को थांदला के वार्ड क्रमांक 13 का निवासी बताकर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए थांदला जिला झाबुआ से अपना अपनी पत्नी का व बच्चों का फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाया। इन फर्जी पासपोर्ट का उपचयोग कर उसने कई बार दुबई की यात्रा की और वहां शिफ्ट होने की योहना बना रहा था। पुलिस उसके दस्तावेजों की जांच कर रही है। उज्जैन व राजस्थान पुलिस सलमान की लंबे समय से तलाश कर रही थी। पुलिस को संदेह है कि वह अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करों के संपर्क में था। आरोपी नेपाल के मार्ग से फरार होकर किसी अन्य देश में शरण लेने की फिराक में था।

नववर्ष मनाने पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने जारी की एडवाइजरी

नववर्ष मनाने पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने जारी की एडवाइजरी शरारती तत्वों एवं हुड़दंग बाजियों पर पुलिस की रहेगी नजर अनूपपुर  जिले भर में नववर्ष 2025 हर्ष्षोल्लास के साथ शांति पूर्ण तरीके से मनाए जाने के लिए पुलिस अधीक्षक मोतीउर्र रहमान एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इसरार मन्सूरी ने आमजनों के लिए निर्देश जारी किए है।  जश्न मनाने के लिए आमजनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिसके लिए एसपी के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इसरार मन्सूरी द्वारा जिले के समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में चौकस बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। पुलिस अधीक्षक मोतीउर्र रहमान ने कई बिन्दुओं पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस दौरान नियमों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए है, जिनमें सभी आयोजकों के निर्धारित समय तक आयोजित कार्यक्रम स्वयं बंद करने, सभी आयोजक डीजे एवं लाउडस्पीकर का उपयोग सुप्रीम कोट एवं शासन द्वारा जारी गाइडलाईन के अनुसार सुनिश्चित करने, नववर्ष की पूर्व संध्या पर पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर चेकिंग एवं पेट्रोलिंग कर नशे में वाहन चलाने वाले, तेज रफ्तार वाहन चलाने वाले चालको के विरूद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही किए जाने, शरारती तत्वों द्वारा शराब पीकर सार्वजनिक स्थानों एवं मार्गो पर की जाने वाली हुड़दंग बाजी और गतिविधियों को नियंत्रित करे के उद्देश्य से भीड़भाड़ इलाके में चौकस बढ़ाए जाने, नववर्ष के उपलक्ष्य पर जिला अंतर्गत संचालित होटल, रेस्टोरेंट, ढ़ाबों पर निगरानी रखने के साथ असामाजिक तत्वों की प्रत्येक गतिविधियों पर पैनी नजर रखने, किसी भी आयोजन के संबंध में पूर्व से संबंधित कार्यपालिक मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त कर निर्धारित मापदंडों का पालन सुनिश्चित करने के साथ ही नववर्ष के उपलक्ष्य में अफवाहों पर ध्यान न देने और यदि कोई अफवाह फैलती है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देने संबंधी निर्देश जारी किए है। उन्होने बताया है कि पुलिस सोशल मीडिया पर पैन नजर बनी हुई है। नववर्ष की आड़ में असामजिक गतिविधियों को अंजाम देने वालो के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। एसपी मोतीउर्र रहमान ने अपील की है कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही आयोजनकर्ता कानून व्यवस्था बनाये रखने में पुलिस का सहयोग करे अगर किसी भी व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन करते पाया गया तो कार्यवाही की जाएगी।

नए साल के जश्न के मद्देनजर भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रमुख मार्गों पर पुलिस के चैकिंग पाइंट लगाए जाएंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में न्यू ईयर पार्टी को लेकर पुलिस ने चैकिंग और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं, खासतौर पर राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रमुख मार्गों पर पुलिस के चैकिंग पाइंट लगाए जाएंगे, इसके अलावा शाम 6 बजे के बाद से ओवर स्पीड, ब्रीथ एनालाइजर और बॉडी कैमरों से भी नजर रखी जाएगी. अगर कोई ओवर स्पीड़िंग और शराब के नशे में वाहन चलाता मिलता है तो उसके ऊपर कार्रवाई की जाएगी. जबकि न्यू ईयर पार्टी को लेकर आयोजन स्थलों और पिकनिक स्पॉट पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस तुरंत अलर्ट रहे. भोपाल-इंदौर में पार्टी की तैयारियां राजधानी भोपाल समेत इंदौर और अन्य सभी शहरों में नए साल के स्वागत के लिए पार्टी के इंतजाम किए गए हैं, पिकनिक स्पॉट समेत अन्य सभी जगहों पर नाइट पार्टी के इंतजाम भी किए गए हैं, यही वजह है कि डीजीपी ने सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं. भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरीनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि शहर में 50 प्रमुख पाइंट पर पुलिस तैनात रहेगी और चैंकिंग भी तेज रहेगी. क्योंकि सभी आयोजन स्थलों पर रात दस बजे तक ही पार्टी की अनुमति दी गई है. वहीं भोपाल के सैर सपाटा, बोट क्लब और बड़ा तालाब के किनारे पर रात दस बजे के बाद भीड़ जमा नहीं होने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं सार्वजनिक स्थलों पर भी धूमधड़ाके को लेकर सख्त मनाही की गई है. इंदौर में भी पुलिस अलर्ट वहीं इंदौर में भी पुलिस अलर्ट पर रहेगी, यहां भी प्रशासन ने रात 10 तक की ही अनुमति दी है, जबकि सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ नहीं बढ़ने की बात कही गई है. जबकि इंदौर के सभी नाइट क्लब और रेस्तरा में भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इसके अलावा अवैध शराब को लेकर भी पुलिस ने सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा शहरों में होटल-ढाबे और रेस्ट्रां भी अपने तय समय पर ही बंद होंगे, वहीं शहरों में अतिरिक्त पुलिसबल भी तैनात किया जाएगा. इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर भी चैकिंग की जाएगी. लाउड स्पीकर का शोर नहीं होगा मध्य प्रदेश में पुलिस ने लाउड स्पीकर को लेकर भी गाइडलाइन जारी है. रात दस बजे के बाद लाउड स्पीकर नहीं बजाने की अनुमति दी गई है. वहीं आयोजकों को कुछ निर्देश भी दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यक्रम स्थल पर अनुमानित लोगों की संख्या होनी चाहिए. कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगेंगे, जबकि धारधार हथियार रखने पर भी पाबंदी रहेगी. इस तरह एमपी में सभी जगहों पर पुलिस की निगरानी रहेगी. 

महाकुम्भ 2025 में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की बारीकियों से समझने MP पुलिस इन दिनों प्रयागराज में

 उज्जैन उज्जैन में 2028 में लगने वाले कुम्भ की तैयारियों के लिए मध्य प्रदेश पुलिस इन दिनों महाकुम्भ 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के मॉडल का अध्ययन कर रही है। एसीपी राजकुमार मीणा ने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रयागराज का दो दिनों का दौरा किया। महाकुम्भ 2025 में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण समेत अन्य व्यवस्थाओं को बारीकियों से समझने के लिए दोनों प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के बीच बैठक हुई। उन्होंने बताया कि इस बैठक में मध्य प्रदेश पुलिस ने महाकुम्भ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल, साइबर क्राइम से निपटने की प्रणाली आदि की जानकारी ली। उज्जैन के पुलिस अधिकारियों ने मेला क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करके उत्तर प्रदेश पुलिस की तैयारियों को देखा तथा समझा। अन्य प्रदेशों को भी यूपी पुलिस का मॉडल अपनाना चाहिए : तरुण कौशिक मध्य प्रदेश के पुलिस उपमहानिरीक्षक (एटीएस) तरुण कौशिक ने कहा कि अन्य प्रदेशों की पुलिस को उत्तर प्रदेश पुलिस के मॉडल को अपनाना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस उज्जैन कुम्भ के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस से समन्वय बनाकर काम करेगी। कौशिक ने उत्तर प्रदेश पुलिस तथा प्रयागराज पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी सभी स्तर के पुलिस कर्मियों के रहने, खान-पान और उनकी छोटी से छोटी जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं, जो सीखने लायक है। राजकुमार मीणा ने बताया कि मध्य प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (उज्जैन जोन) उमेश जोगा, पुलिस उपमहानिरीक्षक (उज्जैन रेंज) नवनीत भसीन और पुलिस उपाधीक्षक (उज्जैन) भारत सिंह यादव को कानून व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, कृत्रिम मेधा का विभिन्न तरह से इस्तेमाल, साइबर अपराध के खतरों से बचाव, जल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था आदि कई तरह की जानकारी दी गईं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस से आए हुए अधिकारियों को आईसीसीसी और कुम्भ मेला क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का भ्रमण भी कराया गया।

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