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मंत्रियों के विभाग तय, जाने किस को मिली किस विभाग जिम्मेदारी.

Departments of ministers decided, who got the responsibility of which department? छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के विभाग तय, ओपी चौधरी वित्त और विजय संभालेंगे गृह मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा ने मुलाकात की थी। इसी बैठक में मंत्रियों के नामों पर मुहर लगी है। नवागढ़ विधायक दयालदास बघेल को खाद्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहली बार के विधायक टंकराम वर्मा खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय संभालेंगे। डिप्टी सीएम अरूण साव पीडब्ल्यूडी, आरईएस और नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई. रायपुर। विष्णुदेव सरकार में मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद अब मंत्रियों के विभाग तय कर लिया गया है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नईदिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा ने मुलाकात की थी। इसी बैठक में मंत्रियों के नामों पर मुहर लगी है। इंटरनेट मीडिया में प्रसारित सूची में मुख्यमंत्री के पास सामान्य प्रशासन, ऊर्जा, जनसंपर्क मंत्रालय रहेगा। वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा गृह, जेल एवं पंचायत मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे। डिप्टी सीएम अरूण साव पीडब्ल्यूडी, आरईएस और नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई है।

सीएम दिल्ली दौरे पर, केंद्रीय नेताओं से करेंगे चर्चा, आज हो सकता है मंत्रियों को विभाग का बंटवारा.

CM on Delhi tour, will discuss with central leaders, departments may be distributed among ministers today भोपाल ! मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रियों को आज विभाग का बंटवारा हो सकता है। सीएम आज दिल्ली दौरे पर हैं। वहां केंद्रीय नेताओं के साथ विभाग के बंटवारे को लेकर फाइनल चर्चा कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रियों को शुक्रवार को विभाग का बंटवारा हो सकता है। मुख्यमंत्री गुरुवार को दिल्ली पहुंचे। दिल्ली दौरे पर सीएम केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात कर मंत्रियों के विभाग बंटवारे को लेकर अंतिम चर्चा कर सकते हैं। सीएम शुक्रवार दोपहर में दिल्ली से भोपाल लौटेंगे।दिल्ली दौरे पर जाने से पहले सीएम ने संगठन महामंत्री हितानंद से उनके निवास पर चर्चा की। इसके बाद सीएम दिल्ली रवाना हो गए। सीएम शुक्रवार को दोपहर में दिल्ली से भोपाल लौटेंगे। सीएम के दिल्ली दौरे को लेकर अटकलें लगाई जा रही है कि वह दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर सकते है और विभाग के बंटवारें को लेकर चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद प्रदेश के मंत्रियों को विभाग का बंटवारा कर दिया जाएगा। बता दें डॉ. मोहन यादव कैबिनेट का 12 दिन चले विचार मंथन के बाद 25 दिसंबर को विस्तार हो गया, लेकिन तीन दिन बाद भी मंत्री खाली हाथ हैं। उन्हें विभागों का आवंटन नहीं हो सका है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के नाम के साथ ही विभागों का आवंटन भी दिल्ली से होना है। इसको लेकर सीएम ने सूची बनाकर आलाकमान को भेज दी है। अब इस पर केंद्रीय नेताओं की तरफ से अंतिम मुहर लगना है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के अलावा दो डिप्टी सीएम और 28 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। प्रदेश में 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम का चयन किया गया। इसके बाद 13 दिसंबर को सीएम और दोनों डिप्टी सीएम ने शपथ ली। इसके 12 दिन बाद 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, लेकिन अब तक मंत्रियों को विभाग का बंटवारा नहीं हुआ है।

कैलाश विजयवर्गीय ने BJP राष्‍ट्रीय महासचिव पद से दिया इस्‍तीफा

Kailash Vijayvargiya resigns from the post of BJP National General Secretary कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के सिद्धांत एक व्यक्ति एक पद के अनुसार मैंने महासचिव पद से उन्हें इस्तीफा सौपा। उन्होंने दिल्‍ली में पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मिलकर उन्‍हें अपना इस्‍तीफा सौंपा। इस आशय का पोस्‍ट विजयवर्गीय ने एक्‍स हैंडल पर भी किया है। नई दिल्ली। मोहन यादव मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाए गए कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव पद से त्‍यागपत्र दे दिया है। उन्होंने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा,”आज मैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी से मिला। हमारी पार्टी के सिद्धांत ‘एक व्यक्ति एक पद’ के अनुसार मैंने महासचिव पद से उन्हें इस्तीफा सौपा।उन्होंने दिल्‍ली में पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जगत प्रसाद नड्डा से मिलकर उन्‍हें अपना इस्‍तीफा सौंपा। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया हैंडल एक्स के जरिए दी। पार्टी ने मध्यप्रदेश में एक नई भूमिका के लिए भेजा है: कैलाश विजयवर्गीयउन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा,”आज मैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रसाद नड्डा जी से मिला। हमारी पार्टी के सिद्धांत ‘एक व्यक्ति एक पद’ के अनुसार मैंने महासचिव पद से उन्हें इस्तीफा सौपा। मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने 9 वर्ष तक पहले श्री अमित शाह जी फिर श्री जेपी नड्डा जी के मार्गदर्शन में देश के विभिन्न स्थानों पर संगठन को गढ़ने में प्राणप्रण से कार्य किया। अब मुझे पार्टी ने मध्यप्रदेश में एक नई भूमिका के लिए भेजा है। मैं प्रधानमंत्री जी का संकल्प वर्ष 2047 में भारत, विश्व का शक्तिशाली देश बने। इस दिशा में मध्यप्रदेश को शक्तिशाली बनाने के लिए हम माननीय प्रधानमंत्री श्री जी के नेतृत्व में कार्य करेगें

योगी की राह पर मोहन

Mohan on the path of Yogiफैसलों मे दिख रहा है आत्मविश्वास. उदित नारायण मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के फैसलों मे उत्तरप्रदेश के फायरब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि नजर आने लगी है ! गुना बस हादसे पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक कड़े फैसले मे उन्होंने तत्काल प्रभाव से परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार खत्री और कलेक्टर तरुण राठी का तबादला करते हुए यह साफ सन्देश देने का प्रयास किया है कि प्रदेश मे अब कोई भी प्रशासनिक लापरवाही बर्दास्त नही की जाएगी ! एक तरफ जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री मंत्री बनते ही बुलडोज़र कार्यवाही को अंजाम दिलाया हो या धान खरीदी तथा तेंदुपत्ता खरीदी का मूल्य सुनिश्चित करना हो, या गुना हादसे पर ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्यवाही हो इन सभी फैसलों मे मुख्यमंत्री के आत्मविश्वास, और कड़े फैसले की झलक दिखाई देती है मुख्यमंत्री के ये कदम प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को पूर्ण करने का एक मजबूत कदम है..

चंबल नदी में अवैध खनन, पुलिस और फॉरेस्ट अधिकारी की मिलीभगत।

Illegal mining in the Chambal River, clash between police and forest officers पुलिस और फॉरेस्ट अधिकारी की मिली भगत से चल रहा सारा खेल। Special Correspondent, Sahara Samachaar, Morena. मुरैना।अम्बाह चम्बल नदी मे रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद,की शासन प्रशासन रेत माफियाओं के सामने सरेंडर होता प्रतीत हो रहा है। अंबाह थाने के अंतर्गत आने वाले बीच का पूरा घाट से चंबल नदी के रेत का अवैध खनन रुकने का नाम ही नही ले रहा है अंबाह फॉरेस्ट अधिकारी अपनी चैंबर में कुंभ करन की नींद सो रहे है । फॉरेस्ट अधिकारी न तो किसी घाट का चक्कर लगाने जाते है और न ही किसी रेत माफिया पर कार्यवाई कर रहे है। जिसके चलते रेत माफियाओं के हौंसले बुलंद होते नज़र आ रहे है बीच के पूरा घाट से चंबल नदी के रेत के अवैध खनन लगातार जारी हैं। क्या रेत माफियायों पर पुलिस प्रशासन और फॉरेस्ट अधिकारी कार्यवाई करने में असमर्थ है ? क्या रेत का अवैध खनन पुलिस और फॉरेस्ट अधिकारी की मिलीभगत से हो रहा है ? ऐसे अनेके प्रकार के सवाल उठते नज़र आ रहे हैं अब देखना ये रहा की अंबाह थाने के अंतर्गत आने वाले बीच का पूरा घाट पर शासन और प्रशासन के द्वारा क्या कार्यवाई की जायेगी या यू ही खेल चलता रहेगा।

बीजेपी ने रामलला को किया किडनैप, हम बाद में जाएंगे अयोध्या- संजय राउत

BJP has kidnapped Ram Lalla, we will visit Ayodhya later – Sanjay Raut. मुंबई ! संजय राउत ने कहा कि बीजेपी का न तो राम से नाता है और न ही उनके विचार से नाता है. अयोध्या में जो कार्यक्रम हो रहा है वो देश का कार्यक्रम नहीं है बल्कि बीजेपी का कार्यक्रम है. बीजेपी के कार्यक्रम में कौन जाए? बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद हम अयोध्या जाएंगे.राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में विपक्ष के नेताओं से पुछ जा रहा है कि क्या आपको न्योता आया..क्या आपको न्योता आया…ये सब क्या है? वहां बीजेपी की सत्ता है. मुझे लगता है की प्रभू श्री राम को एक तरह से किडनैप कर लिया गया है. हम क्या बीजेपी के न्योते का इंतजार में बैठे हैं. जब बीजेपी का कार्यक्रम में खत्म हो जाएगा उसके बाद हम अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जाएंगे.राउत ने कहा कि बीजेपी कौन होती है रामलला का निमंत्रण देने वाली? बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद हम अयोध्या जाएंगे. राउत ने कहा कि ये देश का राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है. बीजेपी के प्रोग्राम में कौन जाए.अयोध्या में जो हो रहा है वो बीजेपी का प्रोग्राम है. ये कोई राम लल्ला के लिए प्रोग्राम नहीं है. राउत ने आगे कहा कि बीजेपी का न तो राम से नाता है और न ही उनके विचार से नाता है. वहीं, अयोध्या स्टेशन का नाम बदलने को लेकर राउत ने कहा कि अच्छी बात है स्टेशन का नाम बदला है. इसका विरोध नहीं करना चाहिए लेकिन आप विकास तो करें. बता दें कि 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम में पीएम मोदी सहित देश की तमाम हस्तियां शामिल होंगी.

सामाजिक जनजागरण है, राहुल गांधी की “भारत न्‍याय यात्रा “- जीतू पटवारी

Rahul Gandhi’s “Bharat Nyay Yatra” is social awareness – Jitu Patwari मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है।राहुल गांधी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। भोपाल। भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मणिपुर से मुंबई तक क़रीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी से लेकर 20 मार्च तक निकाली जाएगी। यह यात्रा 14 राज्यों से होकर निकलेगी। इनमें मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ भी शा‍म‍िल है। भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय रखा गया है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। उन्‍होंने कहा कि राहुल जी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। आधुनिक भारत के पहले शख्‍स थे जिन्‍होंने देश में भाईचारे के लिए, प्रेम के लिए, प्‍यार के लिए भगवान राम-कृष्‍ण और भारत वर्ष के जो मूल विचार हैं, इंसानियत की रक्षा के लिए, प्राणियों में सद्भावना हो इस विश्‍वास के लिए यात्रा निकाली थी। पूरे देश ने उसे आत्‍मसात किया था। अब न्‍याय यात्रा निकाली जा रही है।पटवारी बोले-वोट की ताकत को कम किया जा रहा पटवारी ने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से जो तानाशाही देश में चल रही है, लोकतंत्र की हत्‍या करने का जो दुष्‍चक्र चल रहा है। विधायकों और सांसदों को अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। वोट की ताकत को कम किया जा रहा है। व्‍यापक रूप से दलबदल किया गया। इसके खिलाफ और सामाजिक जनजागरण के लिए न्‍याय यात्रा है।

राहुल गांधी करेंगे ‘भारत न्याय यात्रा’, मणिपुर से 14 जनवरी से होगी शुरुआत, 6200 KM का होगा पूरा सफर

Rahul Gandhi will undertake the ‘Bharat Nyay Yatra’ starting from January 14th, beginning from Manipur. The entire journey will cover a distance of 6200 kilometers. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पहले ही पूरी कर चुके हैं. इस यात्रा में उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक का सफर तय किया था.नई दिल्ली ! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘भारत न्याय यात्रा’ करने वाले हैं. पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल 14 जनवरी तक भारत जोड़ो यात्रा करने के बाद अब राहुल इस नई यात्रा को करने जा रहे हैं. ‘भारत न्याय यात्रा’ लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए की जा रही है. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से हुई थी, जो कश्मीर में जाकर खत्म हुई थी. राहुल ने इस यात्रा में दक्षिण से उत्तर का सफर किया था. वहीं, भारत न्याय यात्रा की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से होगी, जो पश्चिम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर खत्म होगी. इस तरह राहुल भारत न्याय यात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करने वाले हैं. पूरी यात्रा में 6200 किमी सफर तय किया जाएगा. ज्यादातर यात्रा बस के जरिए ही कवर की जाएगी, मगर कहीं-कहीं पैदल भी सफर किया जाएगा. भारत न्याय यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा संस्कृरण बताया गया है, जिसकी शुरुआत 14 जनवरी से होगी. यात्रा में क्या होने वाला है खास? कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 14 जनवरी को मणिपुर में भारत न्याय यात्रा को झंडा दिखाएंगे. इस तरह यात्रा की आधिकारिक तौर पर शुरुआत हो जाएगी. ये यात्रा 20 मार्च को जाकर मुंबई में खत्म होगी. भारत न्याय यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी. मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से भारत न्याय यात्रा गुजरने वाली है. कैसे आया भारत यात्रा का विचार? कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार (27 दिसंबर) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत न्याय यात्रा को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा, ’21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सर्वसम्मति से अपना मत रखा कि राहुल गांधी को पूर्व से पश्चिम की ओर एक यात्रा करनी चाहिए. राहुल गांधी भी सीडब्ल्यूसी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार हो गए.’ उन्होंने कहा, ‘ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी ने फैसला किया है कि 14 जनवरी से 20 मार्च तक मणिपुर से लेकर मुंबई तक भारत न्याय यात्रा की जाएगी. इस यात्रा में राहुल गांधी युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करने वाले हैं. बस यात्रा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा. यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुक कर पैदल भी कवर किया जाएगा.’ भारत जोड़ो यात्रा क्या थी? राहुल गांधी ने सितंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी, जो जनवरी 2023 में जाकर खत्म हुई. राहुल गांधी की यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई. इस यात्रा के जरिए उन्होंने 4500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पैदल ही तय किया. इस यात्रा का मकसद भारत को एकजुट और देश को मजबूत करना था. कांग्रेस की इस यात्रा से उसका संगठन काफी मजबूत हुआ था. भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी, 2023 को कश्मीर में जाकर खत्म हुई. भारत जोड़ो यात्रा के जरिए 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 75 जिलों को कवर किया गया था. ये यात्रा जिस-जिस राज्य से होकर गुजरी, उस-उस राज्य में कांग्रेस नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया. कई प्रमुख हस्तियों को भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होते हुए देखा गया था.

चेतन्य कश्यप, सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय उस राशि को अभावग्रस्त लड़कियाँ की शिक्षा पर खर्च करें : उमा

Instead of returning the salary to the Government, the amount should be spent on the education of underprivileged girls, according to Uma Bharti. भोपाल। उमा भारती ने लिखा है कि हाल ही में मंत्री बने रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चेतन्य काश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की हैं। अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ़ लिखी गई थी कि वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जोकि साल भर का क़रीब 12 लाख होता हैं । 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं । उन्होंने लिखा है कि चेतन्य काश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करें ।उमा ने आगे लिखा है कि हमें यह याद रखना पड़ेगा कि सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और न वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं।एक बार सांसद वरुण गांधी ने कहा था कि सांसदों को तनखा एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए। वरुण गांधी ऐसा कर सकते है क्यूँकि वो हज़ारों-करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है । अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए ।अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन्य काश्यप जैसे पूंजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की तनखा एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए

खून और पसीने से मिट्टी को सींच कर खिलाड़ी अपने देश के लिए मेडल लाता है, राहुल गांधी

After irrigating the soil with blood and sweat, the player brings a medal for his country. Rahul Gandhi वर्षों की जीतोड़ मेहनत, धैर्य एवं अप्रतिम अनुशासन के साथ अपने खून और पसीने से मिट्टी को सींच कर एक खिलाड़ी अपने देश के लिए मेडल लाता है। आज झज्जर के छारा गांव में भाई विरेंद्र आर्य के अखाड़े पहुंच कर ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया समेत अन्य पहलवान भाइयों के साथ चर्चा की। सवाल सिर्फ एक है – अपने अखाड़े की लड़ाई छोड़ अगर इन खिलाड़ियों, भारत की बेटियों को अपने हक और न्याय की लड़ाई सड़कों पर लड़नी पड़े तो कौन अपने बच्चों को यह राह चुनने के लिये प्रोत्साहित करेगा? यह किसान परिवार के निश्छल, सीधे एवं सरल लोग हैं, इन्हें तिरंगे की सेवा करने दीजिए। इन्हें पूरे मान और सम्मान के साथ भारत का सर गौरव से ऊंचा करने दीजिए।

मंत्री बनने के बाद अब मोहन सरकार को विभाग बंटवारे में आ रहा पसीना.

After becoming a minister, Mohan Sarkar is now breaking a sweat over the departmental allocations. भोपाल। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मोहन कैबिनेट की पहली बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सभी वरिष्ठ और अनुभवी हैं। हमें मिलकर काम करना है। संकल्प पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी है। अधिकारियों को संकल्प पत्र की प्रक्रिया की जा चुकी है और सबसे कार्य योजना बनाने के लिए दे दिया है। सोमवार को 28 मंत्रियों की शपथ के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कैबिनेट के सहयोगियों के साथ मंगलवार को मंत्रालय में बैठक की। हालांकि यह बैठक बिना एजेंडे की भी, इसमें सभी ने एक दूसरे को बधाई दी। इस बैठक के साथ ही यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि मंत्रियों के विभागों को बंटवारा मंगलवार शाम तक हो सकता है। सीनियर मंत्रियों को नहत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने की भी चर्चा जोरों पर हैं।जानकारी के मुताबिक बैठक में प्रदेश के विकास और विकसित भारत संकल्प यात्रा पर चर्चा हुई। विकसित भारत संकल्प यात्रा प्रदेशभर में शुरू हो चुकी है। अब मंत्रयों की जिम्मेदारी तय होगी कि वे जिलों में विकसित भारत संकल्प यात्रा को सफल बनाने के लिए काम करें। इसके लिए लोगों से संवाद और उनको केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कहा जाएगा, ताकि चुनाव के पहले सभी लोकसभा क्षेत्रों में शतप्रतिशत हितग्राहियों को लाभ मिल सके।

बदलाव की राह पर भाजपा ने लगाई मुहर

On the path of change, the BJP has stamped its approval. उदित नारायण भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में जिस तरह लगभग दो तिहाई नए चेहरों को पहली बार शामिल किया, वह भाजपा द्वारा बदलाव की राह लाने जैसा है। विजय शाह, विश्वास सारंग प्रदुम्न तोमर तुलसी सिलावट ,करण सिंह वर्मा को छोड़कर किसी ऐसे मंत्री को मौका नहीं दिया गया है, जो लंबे समय तक मंत्रिमंडल में रहा हो। भाजपा का यह बदलाव नए नेतृत्व को उभारने का प्रयोग है। जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। इस बदलाव से कुछ अनुभवी और वरिष्ठ मंत्री मौका पाने से चूक गए, तो डेढ़ दर्जन नए चेहरों को मौका मिला। परंपरागत राजनीति करने और देखने वालों को इससे हैरत हुई होगी, लेकिन यथास्थिति में बदलाव किसी भी राजनीतिक दल के जीवंत रहने के लिए आवश्यक होता है। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में जिस तरह नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में जो बदलाव किया, वह नए तरह की राजनीति है। बदलाव तो हार के बाद किया जाता रहा है और बंपर जीत के बाद यथास्थितिऔर मजबूत होती आई है। भाजपा ने जीत के बाद बदलाव कर भविष्य में हार की आशंका को खारिज करने का प्रयास किया है। मध्यप्रदेश में भाजपा थोड़े अंतराल से दो दशक लगातार सत्ता में है और अगले पांच साल का सफर जारी है। मंत्रिमंडल में लगातार लंबे समय तक मंत्री रहने वालों को बदलकर नए चेहरों को मौका देने से एकतरफ जहां एकरसता टूटती है, वहीं पार्टी कैडर में यह विश्वास जागता है कि उन्हे भी आने वाले समय में मौका मिल सकेगा।

मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर गोपाल भार्गव की प्रतिक्रिया

Gopal Bhargav’s reaction to not getting a place in the cabinet. भोपाल। गोपाल भार्गव को मोहन यादव मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। जिसके बाद उन्होंने पोस्‍ट कर प्रतिक्रिया दी। हालांकि बाद में यह पोस्ट उन्होंने डिलीट कर दी। सोमवार को हुए मंत्रिमंडल गठन में 18 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। हालांकि इसमें नौवीं बार विधायक बनने वाले गोपाल भार्गव को जगह नहीं मिली है। वे रहली सीट से विधायक हैं। इससे पहले गोपाल भार्गव शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं गोपाल भार्गव को मंत्री न बनाए जाने को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही है। इसी बीच गोपाल भार्गव ने सोशल मीडिया पर पोस्‍ट कर अपना पक्ष रखा है। हालांकि गोपाल भार्गव ने यह पोस्‍ट बाद में डिलीट कर दी। अब इस पोस्‍ट का स्‍क्रीन शॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। क्‍या लिखा था पोस्‍ट मेंवायरल हो रही पोस्‍ट में गोपाल भार्गव ने लिखा कि, ‘आज मप्र राज्य के मंत्री परिषद् का पूर्ण रूपेण गठन हो गया है, मैं नवनियुक्त मंत्रीगणों को अपनी ओर से शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। प्रदेश भर से मेरे समर्थक मुझसे पूछ रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ है कि आपको मंत्री मंडल में नहीं लिया गया? मैंने उनसे कहा 40 वर्षों के लंबे राजनीतिक जीवन में अब तक पार्टी ने जो भी जिम्मेदारियां दी है उनको समर्पित भाव से पूर्ण किया है और आगे भी करते रहने के लिए संकल्पित हूं इसलिए आज मंत्रिपरिषद के गठन में पार्टी द्वारा लिए गए निर्णय का मैं स्वागत करता हूं। पद आते-जाते रहते हैं, पद अस्थायी हैं, पर जन विश्वास स्थाई है, इतने वर्षों तक मैंने अपने क्षेत्र और प्रदेश की जो सेवा की है वह मेरी पूंजी और धरोहर है। मेरे क्षेत्र ने मुझे प्रदेश का सबसे वरिष्ठ 9वीं बार विधायक बनाया जो देश में दुर्लभ एवं अपवाद है, मुझे 70% वोट देकर 73000 वोटों से जिताया यह ऋण मेरे ऊपर है। मैं जब तक इस क्षेत्र का विधायक रहूँगा कोई कमी या अभाव नहीं रहने दूंगा। राजनीतिक दलों के अपने-अपने फार्मूले हैं। सामाजिक, क्षेत्रीय कारण हैं जिनके आधार पर पद दिए जाते हैं, उसके भीतर जाने या जानने में मेरी कोई रुचि नहीं है इसलिए मैं मौन हूं। खाली समय में अब में प्रदेश में समाज को संगठित कर समाज उत्थान के लिए कार्य करूंगा।’

मंत्रिमंडल विस्तार में सभी को साधने की कोशिश

Efforts to accommodate everyone in cabinet expansion मंत्रिमंडल विस्तार में सभी को साधने की कोशिश, 50 फीसदी नए विधायकों को मिला मौका— प्रथम पेज मंत्रिमंडल विस्तार में सात सामान्य, 12 ओबीसी व बाकी एससी-एसटी विधायक बने मंत्री भोपाल। माेहन कैबिनेट में आज से 28 मंत्री और जुड़ गए। मंत्रिमंडल विस्तार में 18 कैबिनेट, 6 स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री व 4 राज्य मंत्री बनाए गए हैं। इन मंत्रियों में 11 ऐसे हैं, जो मंत्री रह चुके हैं। इसमें से 6 मंत्री ऐसे हैं, जो पिछली भाजपा सरकार में भी मंत्री थे। मंत्रियों की कुल संख्या के हिसाब से 50 फीसदी नए विधायकों को मंत्री बनाया गया है। करीब 20 फीसदी यानी कुल 5 महिलाएं कैबिनेट व राज्य मंत्री बनी है। तीन ऐसे मंत्री भी हैं, जो लोकसभा सांसद या केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर व दमोह से दो-दो मंत्री व बाकी जिलों से एक-एक मंत्री बने हैं।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय, जातीय व जिलेवार संतुलन को साधने की पुरजोर कोशिश की है। मंत्रिमंडल विस्तार में 7 सामान्य, 12 ओबीसी व बाकी एससी-एसटी विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इसके लिए हालांकि स्थानीय संगठन व संघ पदाधिकारियों से लेकर नई दिल्ल्ाी में राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा की गई। इस विस्तार में मप्र से मुख्यमंत्री यादव के अलावा किसी की नहीं चली। पुराने मंत्रियों को दरकिनार करने की मुख्य वजह क्षेत्रीय संतुलन व उनके पुराने परफारमेंस व अंदरूनी रिपोर्ट को देखा गया। इसमें भी क्षेत्रीय संतुलन भारी रहा। सूची फायनल करने में तीन बार दिल्ली के चक्कर लगाने पड़े-मंत्रियों के नाम फायनल करने में मुख्यमंत्री को पिछले 12 दिनों में तीन बार दिल्ल्ाी के चक्कर लगाने पड़े। कैबिनेट, स्वतंत्र प्रभार व राज्यमंत्रियों के चयन में दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ ही संघ नेताओं व प्रदेश अध्यक्ष को तवज्ज्ाों दी गई। सूत्रों के मुताबिक पिछले 48 घंटे में ही कई तरह के बदलाव करने पड़े। कुछ मामलों में तो वरिष्ठ नेताओं के दबाव को भी दरकिनार कर दिया गया। संगठन का स्पष्ट कहना था कि चूंकि सभी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में नए विधायकों पर ज्यादा भरोसा जताया गया।  कई मामलों में चौकानें वाले निर्णय लिए गए-भोपाल जिले से चार दावेदार थे। किंतु दो को ही मंत्री बनाया जा सकता था। मुख्यमंत्री ने वही निर्णय लिया। रायसेन जिले से पिछली बार डॉ. प्रभुराम चौधरी मंत्री थे, इस बार उन्हें मौका नहीं दिया गया। जबकि पुराने भाजपाई, पहली बार के विधायक नरेंद्र शिवाजी पटेल को मंत्री बनाया गया। नरेंद्र के पिता शिवा जी पटेल करीब 20 वर्ष पहले भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वे अब हालांकि नहीं हैं, किंतु उन्ाके बेटे को मौका दिया गया। सागर जिले में दो कद्दावर मंत्रियों गोपाल भार्गव व भूपेंद्र सिंह को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला, जबकि इनमें से भूपेंद्र सिंह को मंत्री बनाने की पूरी संभावना थी। हो सकता है लोकसभा चुनाव में इस पर ध्यान दिया जाए। इसीतरह बैतूल जिला पूरी तरह से अछूता रहा। यहां से एक भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। नए विधायकों पर बड़ी जवाबदारी -मंत्रिमंडल में 50 फीसदी नए विधायकों को मंत्री पद दिया गया है। इस हिसाब से मुख्यमंत्री यादव ने पुरानाें के साथ ही नए विधायकों पर भरोसा जताया है। हालांकि इनमें से कई ऐसे हैं, जो दो-दो बार के विधायक हैं। कैबिनेट मंत्रियों में चार विधायक ऐसे हैं, जो पहली बार मप्र विधानसभा का टिकट लेकर चुनाव लड़े और विधायक बने। हालांकि यह सभी केंद्र में जरूर सांसद और मंत्री थे। अब उन्हें प्रदेश में भी बड़ी जिम्म्ोदारी दी गई है। अभी भी हालांकि विधानसभा की कुल संख्या के हिसाब से 15 फीसदी यानी कुल 34 मंत्री बनाए जा रहे हैं। इस तरह से तीन मंत्री और बनाए जा सकते हैं। मंत्रिमंडल में यह बने कैबिनेट, स्वतंत्र प्रभार व राज्य मंत्री बने-राजभवन में आज सोमवार को गरिमामय माहौल में दोपहर बाद 3.30 बजे राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मंत्रियों को शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व वरिष्ठ भाजपा व संघ के नेता मौजूद थे। शपथ विधि का संचालन मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा ने किया। शपथ ग्रहण समारोह को काफी सीमित रखा गया था। इसीलिए काफी लोगों को आमंत्रण नहीं दिया गया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा वीडी शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।कैबिनेट मंत्री -1-प्रदुम्न सिंह तोमर, ग्वालियर2-तुलसी सिलावट, इंदौर3- एंदल सिंह कसाना, मुरैना4-नारायण सिंह कुशवाह, ग्वालियर5-विजय शाह, खंडवा6-राकेश सिंह, जबलपुर7-प्रह्लाद पटेल, नरसिंहपुर8-कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर-19-करण सिंह वर्मा, इछावर, सीहोर10-संपतिया उईके, मंडला11-राव उदय प्रताप सिंह, गाडरवारा, नर्मदापुरम12-निर्मला भूरिया, पेटलावद झाबुआ13-विश्वास सारंग, नरेला भोपाल14-गोविंद सिंह राजपूत, सुरखी सागर15-इंदर सिंह परमार, शाजापुर16-नागर सिंह चौहान, अलीराजपुर17-चैतन्य कश्यप, रतलाम18-राकेश शुक्ला, मेहगांव भिंड। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार )19-कृष्णा गौर, गोविंदपुरा भोपाल20-धर्मेंद्र लोधी, जबेरा दमोह21-दिलीप जायसवाल22-गौतम टेटवाल23- लखन पटेल, दमोह24- नारायण पवार, राजगढ़। राज्यमंत्री -25–राधा सिंह, चितरंगी सीधी26-प्रतिमा बागरी, रैगांव सतना27-दिलीप अहिरवार, चंदला छतरपुर28-नरेन्द्र शिवाजी पटेल, उदयपुरा, रायसेन।

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