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दिग्विजय सिंह ने वित्त विभाग के दो आईएएस पर लगाया 250 करोड़ के घोटाले का आरोप.

Digvijaya Singh has accused two IAS officers in the Finance Department of a scam amounting to 250 crore. ईओडब्ल्यू से की शिकायत, दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के तीन दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों पर 250 करोड़ के भ्रष्टाचार बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारी आईएएस अजीत केसरी और ज्ञानेश्वर पाटिल की ईओडब्ल्यू से शिकायत की है। इसके साथ उन्होंने दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई है। दिग्विजय सिंह बोले-प्राथमिकी दर्ज करेंपूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीजी को दी शिकायत में लिखा कि उनको दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की शिकायत मिली है। एमपी में वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों ने 250 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने शिकायत के साथ दिए दस्तावेज और ऑडियो सीडी के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की। यह है मामलाशिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आईएफएमएस सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर ढाई सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके लिए टेंडर में मनमानी शर्तें डालते हुए टीसीएस जैसी टाटा समूह की कंपनी को बाहर किया गया। इसके बाद टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव को ठेका देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार इस घोटाले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केसरी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा एक अन्य आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल पर कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया। 50 करोड़ रुपये का लेन देनपूरे टेंडर घोटाले में करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन का आरोप है। शिकायत में रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को देने की बात कही गई है। एसीएस वित्त अजीत केसरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाइड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सएप पर हुई चेटिंग पत्र शिकायत के साथ दिए गए हैं। यह है ऑडियो में…पत्र के साथ सीडी में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा कर रहे हैं। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टीसीएस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था। आरोप है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया, जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया। शर्तें कंपनी के अनुकूल बनाई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी टेंडर में भाग ही न ले सके। चुनावी साल में और चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाइल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड मोबाइल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाना चाहिए।

भाजपा से विधायकों के घेराबंदी के बचाने कांग्रेस करेगी बाड़ाबंदी.

The Congress will undertake a blockade to save legislators from the Bharatiya Janata Party (BJP). बिकाऊ के डर से कर्नाटक शिफ्ट करने की रहेगी कोशिश, भाजपा से विधायकों के घेराबंदी के बचाने कांग्रेस करेगी बाड़ाबंदी, जीत का सर्टिफिकेट मिलने के बाद आर्ब्जवर करेंगे स्ट्रांग रूम के बाहर संपर्क, भोपाल में तैयार रहेंगे चार्टर भोपाल। साल 2020 में आपरेशन लोटस की मार से घायल कांग्रेस दोबारा भुगतान नहीं करना चाहती है। इसलिए कांग्रेस ने भाजपा के घेराबंदी से बचाने के लिए जीतने के बाद विधायकों की बाड़ाबंदी करेगी। यानी कि उन्हें आइसोलेट कर कनार्टक शिफ्ट किया जा सकता है। इसके पीछे की वजह है कि भाजपा के प्लान की बी कांग्रेस को लग चुकी है। यही कारण है कि भोपाल में कर्नाटक भेजने के लिए चार्टर प्लेन तैयार रहेंगे। हालांकि कांग्रेस ने जिला स्तर पर आर्ब्जवर और जिला अध्यक्ष को पहले ही सर्तक कर दिया है। उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान कांग्रेस के प्रति निष्ठा रखने के लिए कहा गया था। खुद कमलनाथ ने वीसी के दौरान यह बात कही थी कि भाजपा डोरे डाल सकती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों को जिताने के लिए मेरा पूरा प्रयास रहा। नाथ ने कहा था कि कोई कहेगा सट़्टा बाजार ये कह रहा है। मैं किसी पर विश्वास नहीं करता। मैं मप्र के मतदाताओं पर ही विश्वास करता हूं। बीजेपी के लोग सोचते हैं हम हथकंडे अपना लेंगे। हम लोगों को खरीद लेंगे। अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप लोग इस ट्रेनिंग में भाग लें। जो प्रजेंटेशन दिए गए हैं। वो सब मैंने देखे हैं। हमारी टेक्निकल टीम ने तैयार किए हैं। सूत्रों ने बताया कि भाजपा के सामने चुनाव में जीत के लिए चुनौती ज्यादा है। इसलिए कांग्रेस पूरी तरह से अलर्ट मोड कर हैं। प्रत्याशियों को एजेंसियों का डर दिखाकर अपने पाले में ला सकती है। जिसकी आशंका दिग्विजय सिंह ने भी जताई थी। कारण यही है कि जिसके चलते कांग्रेस के कई संगठनों के नेताओं को भी कमलनाथ ने जिम्मेदारी सौंप रखी है। खुद सुबह से नाथ पीसीसी से रखेंगे नजर मतगणना के दिन पीसीसी अध्यक्ष खुद सुबह 9 बजे से मुख्यालय से प्रदेश भर में नजर रखेंगे। एआईसीसी के लीगल एक्सपर्ट और वार रूम के सदस्यों के साथ चुनाव परिणाम पर राउंड वार जानकारी लेंगे। इसके लिए वार रूम भी तैयार किया जा रहा है। पोलिंग के दिन भी कांग्रेस दफ्तर में मौजूद रहे थे। काउंटिंग के दिन नाथ के कई दिग्गज नेता भी वार रूम में परिणामों पर नजर रखेंगे।

एमपी में निर्दलीय, सपा-बसपा की जो मानेगा शर्तें, वही बनेगा ‘सिकंदर’ आधा दर्जन सीटों पर निर्दलीय भारी, सपा-बसपा ने भी मतदाताओं पर खूब डाले डोरे.

Madhya Pradesh, an independent candidate, along with the terms accepted by the SP-BSP alliance, will become a significant player. Heavy competition is expected on half a dozen seats with independent candidates, and the SP-BSP alliance is also actively engaging with voters. पूर्व सांसद गुड्डू, अंतर, चौहान, त्रिपाठी, केदारनाथ शुक्ला सहित आधा नेताओं ने खड़ी कर दी मुश्किल, तीसरा चहेरे ने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के लिए खड़ा कर दिया जीत का पहाड़, बागियों की बागवत चुनाव परिणाम में पड़ेगी भारी. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान जहां कई बागियों ने बागवत की है, वहीं सपा और बसपा ने भी मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसका नतीजा है कि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने बड़ी चुनौती है। तीसरे चेहरे पर भी जनता भरोसा कर सकती है। ऐसी स्थिति कई अहम सीटों पर बनी है। जो कांग्रेस और भाजपा के पास लंबे तक रिजर्व के तौर पर रही हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए थे तो भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी। एमपी में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में किंगमेकर की भूमिका में निर्दलीय, सपा और बसपा के विधायक थे। रिजल्ट से पहले एक बार फिर 2018 वाली स्थिति को लेकर पूवार्नुमान लग रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस समेत प्रदेश के लोगों की नजर उन निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों पर टिक गई है, जिनकी जीत तय मानी जा रही है। वहीं, कुछ सीटों पर उनके जीतने की संभावना है। पूरे प्रदेश में ऐसे चेहरों की संख्या सात से आठ हो सकती है। दरअसल, 3 दिसंबर को एमपी विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। भाजपा और कांग्रेस 150-150 सीटें लाने का दावा कर रही है। वहीं, वोटिंग से पहले आए ओपिनियन पोल में दोनों में से कोई दल बहुमत के आंकड़े के करीब नहीं पहुंच रहा था। एमपी में सट्टा बाजार भी इसी ओर इशारा कर रहा है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस इन्हें साधने की जुगत में जुट गई है। इनमें से अधिकांश चेहरे इन्हीं दलों से बागी होकर मैदान में हैं। मैहर में नारायण और फिर नारायण बीजेपी ने इस बार मैहर से नारायण त्रिपाठी को टिकट नहीं दिया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से उनका टिकट कटा था। इसके बाद नारायण त्रिपाठी ने विंध्य विकास पार्टी बना ली थी। अपनी ही पार्टी से नारायण त्रिपाठी मैहर से चुनाव लड़ रहे हैं। वोटिंग के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि नारायण त्रिपाठी चुनाव जीत सकते हैं। इनकी नजदीकियां भाजपा और कांग्रेस दोनों से हैं। पूर्व अध्यक्ष के बेटे शेरा और चटनिस के लिए चुनौती वहीं, बुरहानपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस की नजर है। इस सीट से अभी निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा विधायक हैं। हालांकि वह शुरू से कांग्रेस के साथ रहे हैं। सुरेंद्र सिंह शेरा इस बार कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और उन्हें पार्टी ने टिकट दिया है। वहीं, बीजेपी ने अर्चना चिटनिस को यहां से उम्मीदवार बनाया है। अर्चना चिटनिस को टिकट मिलने के बाद बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष सिंह चौहान नाराज हो गए। हर्ष सिंह चौहान बीजेपी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार हर्ष सिंह चौहान दोनों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। अगर चुनाव जीतते हैं तो बीजेपी इन्हें मनाने की कोशिश करेगी। कांग्रेस के साथ जाएंगे गुड्डू या फिर घर बैठेंगे कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भी आलोट विधानसभा चुनाव से टिकट चाहते थे। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया तो वह निर्दलीय अलोट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर कई आरोप लगाए थे। इन पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर है। प्रेमचंद्र गुड्डू भाजपा में भी रह चुके हैं।महू में दरबार के लगने की ज्यादा उम्मीद- महू विधानसभा सीट पर अभी भाजपा का कब्जा है। वहीं, सबसे ज्यादा चर्चा अंतर सिंह दरबार की हो रही है। अंतर सिंह दरबार कांग्रेस में रह चुके हैं। कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि महू में अंतर सिंह दरबार का पलड़ा भारी दिख रहा है। कांग्रेस ने फिर से उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। सीधी में भाजपा के लिए सीधी नहीं जीत, शुक्ला हावी वहीं, पेशाबकांड की वजह से भाजपा ने इस बार अपने सीटिंग विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट दिया था। उनकी जगह सांसद रीति पाठक को टिकट दिया है। सीधी में केदारनाथ शुक्ला ने रीति पाठक की मुश्किलें बढ़ा दी है। हालांकि चर्चा यह भी है कि केदारनाथ शुक्ला अगर टक्कर दिए होंगे तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है।चौधरी, राजू और रघुवंशी भी कांग्रेस के लिए कम नहीं- गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में करीब एक दर्जन विधानसभा की ऐसी सीटें हैं, जहां छोटे दल और निर्दलीय बड़े दलों का खेल खराब कर सकते हैं। इनमें गोटेगांव से कांग्रेस के बागी शेखर चौधरी निर्दलीय लड़ रहे हैं। सिरमौर में बीएसपी ने बीजेपी उम्मीदवार की चुनौती बढ़ा दी है। धार में बीजेपी के बागी राजू यादव निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सिवनी मालवा में ओम रघुवंशी निर्दलीय मैदान में हैं। इससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

तेलंगाना की 119 सीटों पर वोटिंग: इस बार तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है.

Voting on 119 seats in Telangana: This time, a triangular contest is being witnessed in Telangana. 3 करोड़ से ज्यादा वोटर; BRS, कांग्रेस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हो गई। यह शाम 5 बजे तक चलेगी। राज्य में 3.17 करोड़ से ज्यादा वोटर्स हैं। इनमें 8 लाख लोग पहली बार वोट डालेंगे। नेशनल और स्टेट लेवल की कुल 109 पार्टियों के 2290 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे।तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल 16 जनवरी 2024 को खत्म होने वाला है। यहां पिछली बार दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) ने सरकार बनाई थी। चंद्रशेखर राव दूसरी बार CM बने थे। TRS का नाम अब BRS (भारत राष्ट्र समिति) हो गया है। BRS विधायक के कविता ने हैदराबाद के बंजारा हिल्स में वोट डाला। इस बार के चुनाव में सत्तारूढ़ BRS और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा भी इस बार जोर लगा रही है। साल 2018 में BRS को 88, कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं। वहीं, भाजपा के खाते में केवल एक सीट आई थी।स्टेट इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, राज्य में 35,655 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 511 केंद्र संवेदनशील हैं। ये सभी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे हैं और नक्सल प्रभावित हैं। सुरक्षा के लिए सेंट्रल आई पुलिस फोर्स की 100 से ज्यादा कंपनियां तैनात की गई हैं।

सरकार पर भड़कीं उमा भारती, पटवारी की हत्या शासन-प्रशासन के लिए कलंक और शर्मनाक है.

Uma Bharti has criticized the government, stating that the murder of a Patwari is a stain and shameful for the administration. पूर्व सीएम ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की Udit Narayan भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहडोल के ब्यौहारी में खनन माफिया द्वारा अवैध खनन रोकने के कारण एक सरकारी कर्मचारी की हत्या मध्य प्रदेश की सारी व्यवस्था समाज, शासन, प्रशासन सबके लिए कलंक एवं शर्मनाक हैं। पूर्व सीएम ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की हैं। इससे पहले पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी घटना पर शिवराज सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व सीएम ने कहा था कि यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश में रेत माफिया ने इस तरह से किसी सरकारी व्यक्ति को कुचल कर मार दिया हो। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान पनपा भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण यह स्थिति बनी हैं। बता दें शहडोल के ब्यौहारी में शनिवार रात रेत माफिया ने पटवारी प्रसन्न सिंह की ट्रैक्टर से कुलचकर हत्या कर दी। प्रसन्न सिंह सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद पटवारी बने थे। वह सोन नदी के घाटों पर रेत माफिया पर कार्रवाई कर रहे थे। शनिवार रात वह अपने तीन साथियों के साथ कार से सोन नदी के किनारे पहुंचे थे। इस बीच रेत का ट्रेक्टर आता देख उन्होंने रूकने का इशारा किया, लेकिन ट्रैक्टर चालक ने उन पर ही ट्रैक्टर चढ़ा दिया। प्रसन्न सिंह के सिर से पहिया गुजर जाने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक और उसके मालिक को गिरफ्तार कर लिया।

भितरघातियों पर फूटेगा हार का ठीकरा,3 के बाद गिरेगी गाज.

The counterattack against the infiltrators will result in the defeat; after three, the intensity will increase. भितरघातियों की भाजपा-कांग्रेस तैयार की कुंडली, प्रत्याशियों की शिकायत को आधार मानकर होगी कार्रवाई, दोनों पार्टियों के िलए दाे दर्जन सीटों में खतरनाक साबित होंगे भितरघाती. Udit Narayanभोपाल। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा- कांग्रेस उन बागियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है जो पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ रहे हैं। अब बारी भितरघातियों की है जिनकी वजह से दोनों दलों के दो दर्जन से ज्यादा प्रत्याशी खतरें में हैं। दोनों दलों में प्रत्याशियों से मिली शिकायतों के आधार पर इन भितरघातियों की कुंडली तैयार हो रही हैं। तीन दिसंबर को मतगणना के बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मतदान के बाद आई शिकायतों की बाढ़भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान के दौरान जानते हुए भी उन पार्टी नेताओं की शिकायत नहीं की, जो उनके खिलाफ काम कर रहे थे। ऐसा करने की बजाय उन्हें मनाने की कोशिश हो रही थी, क्योंकि खतरा ज्यादा नुकसान का था लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद दोनों दलों के पास ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। शिकायतें प्रत्याशियों द्वारा ही भेजी जा रही हैं। इन शिकायतों की सही संख्या नहीं बताई जा रही है लेकिन दो दर्जन से ज्यादा सीटों की शिकायतें गंभीर हैं। कार्रवाई से पहले पक्ष रखने का मौकाबागी होकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं के खिलाफ जैसी कार्रवाई हुई है, भितरघातियों के खिलाफ वैसा नहीं होगा। जिनके खिलाफ शिकायतें आई हैं, उन्हें पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद नोटिस देकर उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर ही इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन भितरघातियों के खिलाफ कार्रवाई तय है जिनकी वजह से प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ेगा। तीन अंचलों से आ रहीं ज्यादा शिकायतेंप्रदेश के तीन अंचलों चंबल-ग्वालियर, बुंदेलखंड और विंध्य से भितरघात करने वालों की सबसे ज्यादा शिकायतें भाजपा और कांग्रेस के पास आ रही हैं। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी का कहना है कि जो शिकायतें आ रही हैं, उन्हें सूचीबद्ध कर रखा जा रहा है। अभी मतगणना की तैयारी चल रही है। प्रत्याशियों, एजेंटों को प्रिशिक्षित किया जा रहा है। मतगणना के बाद इन शिकायतों पर विचार किया जाएगा। भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि पार्टी के पास काम न करने वालों की शिकायतें ज्यादा नहीं है। लेकिन जो भी शिकायतें आई हैं। संबंधित से जवाब लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में.

Former minister P.C. Sharma, who served in the Congress government, is once again in discussion due to his statement. बोले- प्रचार के दौरान कमल पटेल के क्षेत्र की जनता कहती थी भाजपा से सब कुछ मिला, लेकिन वोट कांग्रेस को देंगेदावा – कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही, भाजपा वाले बहुमत से सरकार बनाने की बात नहीं कर रहे. Udit Narayanभोपाल। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि वो मंत्री कमल पटेल के क्षेत्र में गए थे, वहां उन्होंने जब जनता से पूछा बीजेपी में कुछ मिला था क्या, तो जनता बोली मिला सब कुछ, लेकिन वोट कांग्रेस को ही करेंगे। बता दें, शर्मा अपने बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इसके पहले भी उन्होंने हाल ही बयान दिया था कि भारतीय टीम ईडी के छापे के डर से क्रिकेट वर्ल्ड कप में हार गई थी। शर्मा ने ये दावा किया कि कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही है। कांग्रेस की लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी बहुमत से सरकार बनाने की बात कहती थी पर अब नहीं कह रही है। शर्मा ने कहा कि बीजेपी के सर्वे भी बता रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार बन रही है। बीजेपी जान गई है कि अब कांग्रेस की सरकार बन रही है। कांग्रेस के प्रशिक्षण में कमलनाथ के वर्चुअली संबोधन पर पीसी शर्मा ने कहा कि ये वक्त बदलाव का है। ईवीएम में गड़बड़ी के सवाल पर पीसी शर्मा ने कहा कि जब तक बीजेपी की सरकार है। ये गड़बड़ी करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपा के कई मंत्री हारेंगे – पीसी- विधानसभा चुनाव के परिणाम पर पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा कई मंत्री इस बार हारेंगे। वहीं बुधनी विधानसभा को लेकर उन्होंने कहा कि हनुमान जी की लीला है और हनुमान जी कुछ भी कर सकते हैं। शर्मा खुद भोपाल की दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने उनके सामने भगवानदास सबनानी को उतारा है। पिछले चुनाव में शर्मा ने इसी सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता को पटकनी दी थी।

अपने दिग्गजों की राजनैतिक विरासत संभालने निकले ‘वंशज’ डेंजर जोन में फंसे.

The ‘descendants’ set out to uphold the political legacy of their stalwarts find themselves trapped in the danger zone. मैदान में अर्जुन, दिग्विजय, कैलाश, पटवा और सकलेचा के बेटे, बड़ा कारण – कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय लड़ा चुनाव, राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद, 3 को खुलेगा तो ही चमकेगी विधायकी की तरदीर उदित नारायणभोपाल। इस बार मप्र के चुनाव में सबसे ज्यादा दिग्गज नेताओं के वारिस चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें से ज्यादातर का राजनैतिक भविष्य दाव पर लगा है, हालांकि कुछ के लिए राह आसान भी दिखाई दे रही है। जब 3 दिसंबर को ईवीएम परिणाम उगलेगी तो जीत और हार के दावे की हकीकत सबके सामने आ जाएगी। विधानसभा चुनाव में कई राजनेताओं के वंशज व परिवार के सदस्य मैदान में उतरे हैं जिनका राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद है। इनमें कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों अर्जुनसिंह व दिग्विजय सिंह, गैर कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र सकलेचा, बाबूलाल गौर, उमा भारती और गोविंदनारायण सिंह के वंशज प्रमुख हैं। इनके अलावा प्रदेश सरकारों के पूर्व मंत्री, सक्रिय राजनेताओं के वंशज भी चुनाव मैदान में उतरे हैं जिन्होंने कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय चुनाव लड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों में अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह चुरहट और साले राजेंद्र सिंह अमरपाटन से हैं जिनकी स्थिति पिछले चुनाव से बहुत अच्छी बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह के पुत्र मंत्री जयवर्द्धन सिंह और भाई विधायक लक्ष्मण सिंह की स्थिति पिछली बार से कमजोर है लेकिन दोनों के किसी तरह संकट से बाहर निकल जाने की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं। कैलाश जोशी के पुत्र दीपक के चुनाव के ठीक पहले भाजपा से मोहभंग होने तथा कांग्रेस में पहुंचने से कुछ नुकसान है तो फायदा भी मिलेगा। सुंदरलाल पटवा के भतीजे विधायक सुरेंद्र, वीरेंद्र सकलेचा के पुत्र मंत्री ओमप्रकाश और बाबूलाल गौर की बहू विधायक कृष्णा गौर की स्थिति बेहतर है लेकिन भारती के भतीजे मंत्री राहूल लोधी की सीट पर चुनौतीपूर्ण मुकाबला है। अन्य वंशजों में कुछ बेहतर तो कुछ मुकाबले में फंसेराजनेताओं के अन्य वंशजों में मुकाबले में फंसे प्रत्याशियों में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे कांग्रेस प्रत्याशी राहुल भदौरिया, सिंधिया परिवार की निकटतम रिश्तेदार भाजपा प्रत्याशी माया सिंह, विधानसभा अध्?क्ष गिरीश गौतम के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पद्मेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ, इंदौर की सांवेर सीट पर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू की बेटी कांग्रेस की रीना बौरासी के भविष्य का रास्ता 3 दिसंबर को खुलेगा। पूर्व मंत्री चिटनिस, डिप्टी सीएम रहे यादव के सामने चुनौती देपालपुर में निर्भयसिंह पटेल के पुत्र भाजपा प्रत्याशी मनोज पटेल, रतलाम की जावरा सीट पर पूर्व सांसद लक्ष्मीनाराण पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र पांडेय, बुरहानपुर की नेपानगर सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र दादू की बेटी भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृजमोहन मिश्र की पुत्री पूर्व मंत्री व भाजपा प्रत्याशी अर्चना चिटनीस, पूर्व विधायक चिड़ाभाई डाबर के बेटे विधायक कांग्रेस प्रत्याशी केदार डाबर, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव के पुत्र पूर्व मंत्री सचिन यादव, पूर्व विधायक सीताराम साधौ की पुत्री व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ हैं। केंद्रीय मंत्री भूरिया बेटे के लिए परेशानपूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया, पूर्व विधायक प्रेम सिंह दत्तीगांव के पुत्र मंत्री भाजपा प्रत्याशी राजवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी नितेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुवेर्दी के भाई कांग्रेस प्रत्याशी विधायक आलोक चतुवेर्दी, पूर्व विधायक चौधरी दिलीप सिंह के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक के पुत्र भाजपा प्रत्याशी संजय पाठक, पूर्व विधायक प्रभात पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी प्रणय पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी अनुभा मुंजारे, पूर्व मंत्री लिखीराम कांवरे की पुत्री पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस प्रत्याशी हिना कांवरे भी शामिल है। अकील की बेटे के लिए ज्यादा चिंंतापूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी की पुत्री भाजपा प्रत्याशी मोनिका, पूर्व मंत्री आरिफ अकील के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी आतिफ अकील, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश नारायण सारंग के पुत्र मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई विधायक भाजपा प्रत्याशी उमाकांत, पूर्व विधायक केदार सिंह चौहान के पुत्र भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विधायक गोविंद शर्मा के पुत्र विधायक भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा, पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी के पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी के नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं की सीट में अच्छे संकेतवहीं जिन नेताओं के वंशजों के लिए चुनाव में मुकाबला आसान दिखाई दे रहा है उनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के भतीजे व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी उमंग सिंगार, पूर्व मंत्री सुलोचना रावत के पुत्र भाजपा प्रत्याशी विशाल रावत, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार की पत्नी विधायक गायत्रीराजे, पूर्व सांसद सुखराम कुशवाह के पुत्र विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की समधन पूर्व विधायक चंदा गौर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह शामिल हैं।

सियासत किस करवट लेगी, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म.

Political discussions are heating up over which direction politics will take. गगनचुंबी दावों के बीच किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, तीन दिसंबर को स्थिति होगी साफ, लगभग 150 घंटे का इंतजार बांकी. उदित नारायण उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश चुनाव 2023 के परिणाम को भले ही लगभग 150 घंटे शेष हों, लेकिन सियासत में कांग्रेस और भाजपा के परिणाम इस बार किस करवट बैठेंगे, इसको लेकर भारी चर्चा हो रही है। मध्यप्रदेश में बिना किसी लहर के नजर आए मतदाताओं के उत्साह और भारी मतदान के बाद राजनीतिक दल और राजनेता आंकड़ों के खेल में उलझ कर इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि आखिर सता का ताज किसके सिर सजेगा। भाजपा को भरोसा है कि सत्ता का ताज उसके सर पर ही सजा रहेगा। वहीं कांग्रेस को भरोसा है कि कांग्रेस की ही सरकार बन रही है और कमल नाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। लाडली बहना बनाम एंटी इनकमबेंसी को लेकर ही अनुमान लगाए जा रहे हैं। शिवराज सरकार की लाडली बहना योजना को भाजपा अपने पक्ष में मानकर चल रही है तो कांग्रेस एंटी इनकमबेंसी और महंगाई के कारण महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में मानकर अपनी जीतका गगनचुंबी दावा कर रही हैं। भाजपा नेता मध्यप्रदेश में 230 सीटों में से 150 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस नेता 125 से लेकर 150 सीट तक जीतने का दावा कर रहे हैं। अपने अंदरूनी सर्वे में दोनों ही दल यह मानकर चल रहे हैं कि लगभग 100 -100 सीटें तो जीत ही रहे हैं और बची हुई 30 सीटों में से जो भी आधे से अधिक जीत लेगा उसे ही मध्य प्रदेश में सत्ता साकेत में नौकायन का मौका मिल जाएगा। लाख टके के सवाल का जवाब 3 दिसंबर को मतगणना से ही मिलेगा 116 का जादुई आंकड़ा कौन पर करता है। वास्तव में भारी मतदान किसके पक्ष में हुआ है इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी अपने-अपने ढंग से इसका अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह रहा है कि चुनाव कौन जीत रहा है। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि शिवराज की लाडली बहना ने कोई गुल खिलाया है या फिर एंटी इनकंबेंसी मतदाताओं के मानस पटल पर पूरी तरह छाई रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का पक्का भरोसा है कि लाडली बहनों ने अपने भाई का साथ दिया है और भाजपा की ही सरकार बनने वाली है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का दावा है कि मतदाता मध्यप्रदेश का निर्माण करेगा और उनका एक-एक वोट प्रदेश में फैले कुशासन को समाप्त कर जनहित की सरकार की स्थापना करेगा। सूत्रों के अनुसार भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में उसे 124 सीटें जीतने का पक्का भरोसा है जबकि उसका अनुमान है कि कांग्रेस को लगभग 100 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस 130 से अधिक सीटों के साथ अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है तो वहीं पर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी 124 सीटों पर अपनी जीत पक्की मान वह लगभग 4 सीटों पर कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में जहां तक विंध्याचल का सवाल है वहां पर पार्टी है यह मान रही है कि उसे यहां की 30 में 19 सीटें मिल ही जाएंगी तो वहीं दूसरी ओर 11 सीटें कांग्रेस को भी मिल सकती है। यहां की 25 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला बताया जा रहा है जबकि 5 सीटों में मुकाबला त्रिकोणात्मक माना जा रहा है। महाकौशल आंचल की कुल 38 सीटों में से भाजपा को 19 सीटों पर जीत का भरोसा है और इतनी सीटें वह कांग्रेस के लिए पक्की मानकर चल रही है। इस प्रकार भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी इस अंचल में दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला माना जा रहा है जबकि कांग्रेस इस अंचल में अपनी स्थिति काफी मजबूत मानकर चल रही है। यह तो मतगणना से ही पता चलेगा कि आखिर यहां के मतदाताओं ने किस पर अधिक और किस पर कम भरोसा जताया। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार भोपाल- नर्मदापुरम संभाग की 36 सीटों में से भाजपा 20 पर अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है और कांग्रेस को वह 15 सीटें दे रही है। राजधानी भोपाल की एक सीट भोपाल मध्य में वह कांग्रेस के साथ क कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। इस संभाग में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य चुनावी मुकाबला हो रहा है। ग्वालियर चंबल संभाग में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को धीरे से जोर का झटका लगा था लेकिन यहां वह दल बदल के बाद भाजपा को अपनी स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत नजर आ रही है क्योंकि इस बार उसे भरोसा है कि उसकी झोली में 15 सीटें तोआ ही रहीं हैं जबकि एक मुरैना सीट पर कड़े मुकाबले में बसपा को जीतते हुए देख रही है। इस सर्वे में माना जा रहा है कि इस अंचल में सबसे अधिक 17 सीटें कांग्रेस जीत सकती है। दतिया सीट पर भाजपा कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले की स्थिति देख रही है ।यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हो रही है। बुंदेलखंड अंचल की 26 सीटों में से भाजपा यह मानकर चल रही है कि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त है तो वहीं 12 सीटों को अपने लिए पक्की मान रही है जबकि एक सीट निवाड़ी में समाजवादी पार्टी को जीते हुए देख रही है। निमाड़ और मालवांचल की 66 सीटों में से वह अपने लिए 39 सीटें पक्की मान रही है जबकि क्षेत्र 25 सीटें कांग्रेस पार्टी को दे रही है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है उसे 130 से 140 सीटें जीतने का भरोसा है। कांग्रेस पार्टी का आंतरिक सर्वे भाजपा को मात्र 80 से 85 ही सीटें दे रहा है। वही आम आदमी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आदि को लगभग दस तक सीटें मिल जाएगी ऐसा मानकर कांग्रेस चल रही है।कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत का दावा पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं।दोनों के अपने अपने तर्क हैं और अपने अपने विश्वास । सभी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने … Read more

महाकौशल के तीन दिग्गज नेताओं दाव पर लगी साख.

Mahakaushal three stalwart leaders of expertise face a challenge. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद और फग्गन सिंह कुलस्ते मैदान में, तीनों के परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजर, भाजपा और कांग्रेस बेचैन, परिणामों को लेकर सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा 2023 के परिणामों को लेकर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग्वालियर-चंबल, निमाड़-मालवा, बुंदेलखंड, बिंध्य क्षेत्र और महाकौशल में यूं तो लोग अपने-अपने नेताओं की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के महाकौशल क्षेत्र की है। क्योंकि यह क्षेत्र उनका गढ़ कहा जाता है। इस क्षेत्र में इस बार कांग्रेस भारी रहेगी या भाजपा, इसको लेकर प्रदेश भर की नजर लगी हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में जहां पर जबरदस्त बढ़त ली थी। कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सभी 7 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा ने अपने दो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और फगन सिंह को भी इस क्षेत्र से विधानसभा के चुनाव मैदान में उतारा है। इस क्षेत्र में आने वाले आठ जिलों की 38 सीटों पर किसे कितनी सीटें मिलेंगी इस पर पूरे प्रदेश की नजर है। दरअसल, मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए इस क्षेत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कमलनाथ के परिणामों पर सबकी नजरमध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। साल 2018 में वह चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन उनका प्रभाव साफ तौर पर इस जिले में दिखाई दिया था। जिले की सभी सिम कांग्रेस ने जीत ली थी बाद में कमलनाथ के उपचुनाव छिंदवाड़ा सीट से लड़ा और चुनाव जीत गए। इस बार कमलनाथ कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा इसलिए ना सिर्फ उनकी सीट छिंदवाड़ा पर लोगों की नजर है, बल्कि उनके जिले की हर सीट पर प्रदेश भर की नजर गड़ी हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते के चौकाने वाले होंगे परिणामकेंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर से चुनाव लड़ रहे हैं उनके भाई जालम सिंह पटेल इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार प्रहलाद सिंह पटेल के चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के साथ प्रदेश भर के सभी राजनेताओं की नजर उन पर है। केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का भाजपा के दलित आदिवासियों नेताओं में बड़ा नाम है। इस बार उन्होंने निवास विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है। साल 2018 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। भाजपा ने आदिवासियों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले कुलस्ते को इस सीट से उतर कर मुकाबला रोचक बना दिया है। पूरे प्रदेश पर की नजर इस सीट पर है। महाकौशल में आने वाली आदिवासी बाहुल्य सीटों पर कुलस्ते के चुनावी मैदान में उतरने से कितना असर पड़ेगा। इस पर भी दोनों ही राजनीतिक दलों के लोगों की नज़रें टिकी हुई है।

सरकार किसी की भी बने, इस बार डिप्टी सीएम का फार्मूला भी.

Regardless of which government is formed, this time the formula for the Deputy Chief Minister is also there. Manish Trivediभोपाल, मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में मतगणना के बाद सरकार किसी भी दल की बने चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, लेकिन इतना तय है कि अब मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम के फार्मूले भी चलेंगे। इस बार दोनों ही दलों में सीएम बनने की चाहत वाले नेताओं को संतुष्ट करने के लिये यूपी , महाराष्ट्र व छत्तीसगढ की तर्ज पर डिप्टी सीएम बनाया जायेगा। ताकि सत्तारूढ पार्टी के बडे नेताओं में समन्वय रहे। यदि भाजपा की सरकार बनती है तो सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम बनेंगे, इसमें एक दलित वर्ग से भी पार्टी के एक बडे नेता को संतुष्ट किया जायेगा। वहीं कांग्रेस की सरकार बनती है तो ग्वालियर-चंबल या विंध्य, अंचल के एक बडे नेता को अब डिप्टी सीएम बनाना तय है। यह नेता कमलनाथ की पिछली सरकार में भी पावरफुल मंत्री रहे थे।कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियां अब अंदर ही अंदर नाराजगी रोकने के लिये डिप्टी सीएम के फार्मूले पर काम कर रही है।

वोटिंग के बाद भाजपा के बडे नेता व मंत्री पूजा पाठ में तल्लीन.

After voting, senior leaders and ministers of the BJP were immersed in prayer. उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग के बाद प्रदेश के एक दर्जन मंत्री और भाजपा के बडे नेता पूजा पाठ में लगे हैं । इन्हें विश्वास है कि उनकी पूजा पाठ से नैया पार लग जायेगी। यह मंत्री और बडे नेता धार्मिक स्थानों पर निकल गये हैं, तो कुछ अज्ञात वास पर हैं। जहां नियमित तौर पर अपने धार्मिक सलाहकारों की सलाह से पूजा पाठ में लगे हैं।कुल मिलाकर भाजपा की सरकार के मंत्री व बडे नेता मध्यप्रदेश में हुई बम्पर वोटिंग से मन ही मन घबरा रहे हैं, और अपने सलाहकारों की सलाह पर परिणाम अपने पक्ष में आने की संभावना पर धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर रहे हैं। स्वयं मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पांचवी बार सरकार के रिपीट की संभावना पर पूजा पाठ कर रहे हैं। उन्होंने भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन किये हैं। कुल मिलाकर अब राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री , मंत्री व भाजपा के बडे नेता चुनावी घमासान में वोटर रूपी भगवान की मान मनोब्बल करने के बाद अब देव मंदिरों व देव आराधना की शरण में हैं। विशेष बात यह है कि इन सभी ने अपनी दिनचर्या भी पंडितों व ज्योत्षियों के बताई सलाह पर कर ली है। राज्य के एक बडे मंत्री तो एक वास्तु विशेषज्ञ की सलाह भी ले रहे है। वैसे यह सभी कवायद चुनाव जीतने के लिये ही है। वहीं एक भाजपा कार्यकर्ता का तो यह कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं की पूछ परख की होती तो इतनी चकल्लस ही क्यों करनी पडती।कांग्रेसी भी पूजा पाठ के सहारे राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को कडी टक्कर देने वाली कांग्रेस के नेता व प्रत्याशी भी अपनी जीत के लिये विभिन्न मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। किसी ने अपने घर अखंड रामायण तो किसी ने सुंदरकांड तक के आयोजन कराये हैं। स्वयं कमलनाथ भी अपने एक ज्योतिष व धार्मिक सलाहकार की सलाह से चल रहे हैं।

राज्यसभा में MP की 5 सीटों का नंबर गेमः कौन किस पर भारी

The number of seats for Members of Parliament (MP) in the Rajya Sabha is 5. मौजूदा 4 सीटों को बचाने भाजपा को चाहिए 152 विधायक; अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल मध्यप्रदेश में 3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से दो सवालों का जवाब मिलेगा। मध्यप्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी?अप्रैल 2024 में खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों में से कितनी-किस पार्टी के खाते में जाएंगी। एमपी के 11 में से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इनमें से 4 सीटें भाजपा जबकि 1 कांग्रेस के पास है। भाजपा को यदि यह आंकड़ा बरकरार रखना है तो विधानसभा में उसे 152 सीटें जीतना होंगी क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए न्यूनतम 38 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। राज्यसभा सांसद का चुनाव तय फॉर्मूले के तहत होता है। इसके मुताबिक, जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है, उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत तय होती है। पहले जानिए, कैसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। व्हिप के उल्लंघन से खत्म हो सकती है सदस्यता राज्यसभा चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की तरह गुप्त मतदान नहीं होता है। राज्यसभा सांसद के नाम के आगे एक से चार तक का नंबर लिखा होता है। विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए राजनीतिक दल रिक्त सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के साथ अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। यदि किसी विधायक ने व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। नियमानुसार पार्टी विधानसभा सचिवालय को ऐसे विधायक की लिखित शिकायत करती है तो जांच के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है। किस फॉर्मूले से तय होती है जीत? राज्यसभा चुनाव के लिए एक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं, उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है। इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, वह जीत का आंकड़ा होता है। 2020 में भाजपा ने ऐसे पलट दिया था नंबर गेम 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी क्योंकि 2 विधानसभा सीटें मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी।इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे। 5 विधायकों ने भी बदल लिया था पाला 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कमलनाथ सरकार ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली थीं लेकिन 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों पर हुए चुनाव से ठीक पहले बसपा के दो, सपा का एक और 2 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ था। दिग्विजय को तीन वोट ज्यादा मिले थे 3 सीटों के चुनाव में भाजपा को दो वोटों का नुकसान हुआ था। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह क्रॉस वोटिंग की थी। सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में दिया गया भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी का वोट निरस्त हो गया था। 3 सीटों पर चुनाव से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2020 को कमलनाथ के निवास पर एक बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि दिग्विजय सिंह को 54 विधायक वोट देंगे लेकिन उन्हें 57 वोट मिले। यानी जिन तीन विधायकों को दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को वोट देना था, उन्होंने दिग्विजय सिंह को वोट दे दिया था। से ओबीसी, दलित और महिला वर्ग को साधा था। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की राजनीति में ओबीसी एक बड़ा मुद्दा बन गया था। ओबीसी आरक्षण की वजह से पंचायत और निकाय चुनाव टल गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के दखल के बाद निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। प्रदेश में ओबीसी वोटरों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी ने कविता पाटीदार के नाम की घोषणा कर एक बड़ा ओबीसी कार्ड खेला था। इसी तरह सुमित्रा वाल्मीकि को राज्यसभा में भेजकर दलित वर्ग को साधने की कोशिश की थी। जानकार कहते हैं कि यदि भाजपा फिर दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलती है तो उसे मिशन 2024 में भी बड़ा फायदा होगा।

कांग्रेस की सरकार बनेगी या नहीं, अब चर्चा डिप्टी सीएम बनाने की.

Whether the Congress will form the government or not is now under discussion, focusing on the appointment of the Deputy Chief Minister. कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर एमपी में भी कांग्रेस कर सकती है प्रयोग उदित नारायणभोपाल – मध्य प्रदेश में सरकार आखिर किसकी बनेगी। यह फैसला 3 दिसंबर के बाद ही होगा। इस बीच कांग्रेस के अंदर डिप्टी सीएम बनाए जाने का जिन निकलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के अंदर चर्चा है कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर कवायद चल रही है। कांग्रेस की शुरूआत से ही अपने कम फीस के तौर पर कमलनाथ को प्रेजेंट किया है। अब डिप्टी सीएम कौन बनेगा या फिर बनाया जाएगा। यह मामला केंद्रीय आलाकमान ही तय करेगा। कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर फैसला सेंट्रल लीडरशिप करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का फैसला होगा। अगर डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो कमलनाथ को भी भरोसे में लिया जाएगा। केंद्रीय लीडर से जो भी तय करेगी, वह मध्य प्रदेश में भी होगा। यानी कि केंद्रीय गला कमान की मंजूरी होती है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बन सकती है। हालांकि अभी इसके लिए लंबा कांग्रेस का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस पूरे भरोसे में है कि सरकार बनने जा रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा

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