LATEST NEWS

सोनिया गांधी और जॉर्ज सोरोस के संबंधों को लेकर भारी हंगामे के चलते राज्यसभा में गतिरोध जारी, कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस के संबंधों को लेकर भारी हंगामा हुआ जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले भी सदन की कार्यवाही इसी मुद्दे पर 12 बजे तक स्थगित की गई थी।पहले स्थगन के बाद उपसभापति हरिवंश ने सदन में प्रश्नकाल शुरू करने के लिए कार्यवाही आरंभ की तो सत्ता पक्ष‌ और विपक्ष के सदस्य जोर-जोर से बोलने लगे। सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से सदस्य श्रीमती गांधी और सोरोस के संबंधों को लेकर उद्वेलित है। इन संबंधों का असर देश की संप्रभुता और अखंडता पर प्रभाव पड़ सकता है। यह संबंध देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि देश को इन संबंधों की वास्तविकता जानने का अधिकार है इसलिए सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए। श्री नड्डा ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा से बचने के लिए देश का ध्यान भटकना चाहती है इसलिए सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लायी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रहा है और उनका अपमान कर रहा है। विपक्षी ने कभी भी संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का सम्मान नहीं किया है और सदन के भीतर तथा बाहर लगातार अपमानजनक बर्ताव करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस निवेशक सोरोस का उपकरण बन गई है और इसके तीव्र भर्त्सना की जानी चाहिए। इस बीच सदन में दोनों पक्षों की ओर से शोरशराबा और नारेबाजी होती रही। श्री हरिवंश दोनों पक्षों से शांत होने की अपील करते रहे लेकिन हंगामा बढ़ता गया। उसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित करने की घोषणा कर दी। राज्यसभा में इस सप्ताह लगातार तीसरे दिन भी सोरोस को लेकर हंगामा जारी रहा और कार्यवाही ठप्प रही। लगातार तीसरे दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका।  

यह नोटों का बंडल सीट नंबर 222 के नीचे से मिली जो अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है, जांच जारी: सभापति

नई दिल्ली राज्यसभा में नोटों की गड्डियां मिलने का दावा किया गया है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को सदन को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि एक नियमित एंटी-सैबोटेज जांच के दौरान सदन के अंदर से नकदी के बंडल बरामद किए गए। सभापति ने बताया कि यह नकदी सीट नंबर 222 के नीचे से मिली जो कि वर्तमान में तेलंगाना से निर्वाचित कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है। धनखड़ ने सदन में कहा, “सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने चेंबर की नियमित जांच की। इस दौरान सीट नंबर 222 के नीचे से नकदी का बंडल बरामद किया गया। मामला मेरे संज्ञान में लाया गया और मैंने सुनिश्चित किया कि इस पर जांच हो। फिलहाल जांच जारी है।” क्या बोले अभिषेक मनु सिंघवी? सिंघवी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं राज्यसभा में जाते समय केवल 500 का एक नोट अपने साथ रखता हूं। मैंने इस मामले के बारे में पहली बार सुना है। कल मैं ठीक 12:57 बजे सदन में पहुंचा। सदन 1 बजे स्थगित हो गया। उसके बाद मैं कैंटीन में 1:30 बजे तक बैठा रहा और फिर संसद परिसर से चला गया।” राज्यसभा में संसदीय दल के नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे काफी गंभीर घटना करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह सदन की गरिमा पर एक चोट है। सदन के क्रियाकलाप पर सवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने इस दौरान सिंघवी का नाम भी लिया था। कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने जेपी नड्डा के द्वारा कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी का नाम लेने पर पलटवार किया है। खरगे ने कहा, “मैं यह निवेदन करता हूं कि जब तक इस घटना की जांच पूरी नहीं होती और इसकी प्रामाणिकता स्थापित नहीं होती,तब तक किसी सदस्य का नाम नहीं लिया जाना चाहिए।” सभापति के इस खुलासे के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी और सत्ताधारी दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कुछ सदस्यों ने निष्पक्ष जांच की मांग की तो कुछ ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।

लोकसभा चुनाव के बाद राज्यसभा में कैसे पलट गया सीटों का गणित? कांग्रेस का नुकसान

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के बाद उच्च सदन राज्यसभा का नंबरगेम भी बदल गया है. उच्च सदन के कुछ सदस्यों ने लोकसभा चुनाव में जीत के बाद राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इनमें कांग्रेस के भी दो सांसद हैं. पार्टी के राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल और दीपेंद्र सिंह हुड्डा लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. केसी वेणुगोपाल राजस्थान और दीपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा से राज्यसभा सदस्य थे. इन दोनों नेताओं के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत संभव नजर नहीं है. ऐसे में पार्टी को दो सीटों का नुकसान होना तय माना जा रहा है. लोकसभा चुनाव तक उच्च सदन में कांग्रेस का संख्याबल 28 सदस्यों का था. अब दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद पार्टी उच्च सदन के नंबरगेम में 26 सीट पर आ गई है. कांग्रेस राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बाद दूसरे नंबर की पार्टी है. बीजेपी के राज्यसभा में 90 सदस्य हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 63 सीटों का नुकसान हुआ था और पार्टी 2019 की 303 के मुकाबले इस बार 240 सीटें जीत सकी लेकिन राज्यसभा में उसे दो सीट का फायदा होना तय माना जा रहा है. लोकसभा चुनाव में 99 सीटें जीतकर दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस का गेम राज्यसभा में कैसे खराब हो रहा है, बीजेपी को कैसे फायदा हो रहा है? बीजेपी को होगा 2 सीट का लाभ बीजेपी को राज्यसभा उपचुनाव में दो सीट का लाभ होगा और पार्टी संख्याबल के लिहाज से 92 सीटों के साथ नंबर वन पोजिशन को और मजबूत कर लेगी. दरअसल, राज्यसभा चुनाव या उपचुनाव में मतदान के लिए प्लस वन फॉर्मूले का उपयोग होता है. हरियाणा विधानसभा की स्ट्रेंथ के लिहाज से देखें तो दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए किसी भी दल को 46 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए होंगे. बीजेपी के 41 विधायक हैं और एक निर्दलीय विधायक, हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा को मिलाकर सरकार के पास कुल 43 विधायकों का समर्थन है जो 46 से तीन कम है. हरियाणा में बीजेपी अकेले दम सीट जीतने की स्थिति में नहीं है फिर भी कांग्रेस या कोई और पार्टी उसके खिलाफ उम्मीदवार उतारने में हिचक रही है. इसके पीछे बीजेपी की ओर से जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के चार विधायकों के समर्थन का दावा है. बीजेपी ने जब जेजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था, जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली स्थित अपने फॉर्महाउस पर विधायकों की बैठक बुलाई थी जिसमें चार विधायक नहीं पहुंचे थे. सरकार ने जिस दिन सदन में बहुमत साबित किया, जेजेपी प्रमुख रैली कर रहे थे और सभी विधायकों से इस रैली में पहुंचने के लिए कहा गया था लेकिन पार्टी के कुछ विधायक विधानसभा में मौजूद थे. राजस्थान में क्या है गणित? राजस्थान में भी तस्वीर बदल चुकी है. सूबे में अब बीजेपी की सरकार है. राजस्थान विधानसभा की स्ट्रेंथ 200 सदस्यों की है. सूबे के कोटे की एक सीट जीतने के लिए 101 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए होंगे. 199 सीटों के लिए हुए चुनाव में ही बीजेपी को 115 सीटों पर जीत मिली थी जो जीत के लिए जरूरी 101 विधायकों से कहीं अधिक है. क्या खतरे में आई खड़गे की कुर्सी? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं. राज्यसभा में कांग्रेस के 26 सीटों पर आने से उनकी विपक्ष के नेता की कुर्सी पर भी संकट की बात होने लगी थी. राज्यसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा पाने या बनाए रखने के लिए सदन की कुल स्ट्रेंथ का 10 फीसदी संख्याबल चाहिए होता है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता के लिए यह नंबर 25 है. कांग्रेस के 26 सदस्य ही रह गए जो जरूरी संख्याबल से दो ही अधिक है. ऐसे में अगर पार्टी के दो सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो जाए या अपरिहार्य कारणों से उच्च सदन के सदस्य नहीं रहते हैं तो कांग्रेस की स्ट्रेंथ 25 से कम हो सकती है. ऐसे में खड़गे का नेता प्रतिपक्ष पद पर बने रहना मुश्किल होता. तेलंगाना से होगी नुकसान की भरपाई? राजस्थान और हरियाणा से हो रहे दो सीटों के नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस की नजर तेलंगाना जैसे राज्य पर है. तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है और सूबे की सीटों पर राज्यसभा चुनाव हुए तो पार्टी के जीतने की संभावनाएं मजबूत हैं. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के राज्यसभा सांसद केशव राव के इस्तीफे को भी कांग्रेस की इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. केशव राव के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत तय है. ऐसे में कांग्रेस की स्ट्रेंथ भी उच्च सदन में 26 से बढ़कर 27 पहुंच जाएगी.  

राज्यसभा जाएंगी अजित पवार की पत्नी सुनेत्र, NCP ने बनाया उम्मीदवार

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार की पत्नी सुनेत्र पवार राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन करने वाली हैं। वह मुंबई में विधान भवन में अपना पर्चा दाखिल करेंगी। राज्यसभा चुनाव के लिए आवेदन दाखिल करने का आज आखिरी दिन है। सुनेत्र पवार हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में बारामती से एनसीपी उम्मीदवार और अपनी ननद सुप्रिया सुले से 1.5 लाख से अधिक मतों से हार गई थीं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव हो रहा है। प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई है। एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा जाएगा। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, एनसीपी विधायकों ने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने की मांग की थी। इसके बाद सुनेत्रा पवार के नाम पर मुहर लगी। प्रफुल्ल पटेल ने दिया था इस्तीफा महाराष्ट्र में राज्यसभा की दो सीटें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे से खाली हुई हैं। प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा की एक सीट से इस्तीफा दिया था। पटेल ने राज्यसभा की जिस सीट से इस्तीफा दिया था। उस सीट के कार्यकाल में चार साल बाकी थे। चुनाव आयोग (ईसीआई) ने फरवरी में पटेल द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट के लिए चुनाव की घोषणा की। नए राज्यसभा सांसद का चुनाव राज्य के विधायकों द्वारा किया जाएगा और एनसीपी के पास दो सत्तारूढ़ सहयोगियों भाजपा और शिवसेना की मदद से सीट जीतने की पूरी ताकत है। राज्यसभा सीट के लिए 25 जून को मतदान होना है। पवार परिवार के अलावा तीसरा नाम छगन भुजबल का है। सूत्रों की मानें तो सुनेत्रा पवार को अजित पवार दिल्ली भेज सकते हैं। क्या है एनसीपी की ताकत? अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के पास लोकसभा में अभी सिर्फ एक सांसद है। पार्टी के महाराष्ट्र ईकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे इस बार जीते हैं। प्रफुल्ल पटेल राज्यसभा में इकलौते सांसद हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में पार्टी के पास 40 विधायक है। इसके अलावा 6 विधान परिषद् सदस्य महाराष्ट्र में हैं। 3 विधायक हाल ही में संपन्न हुए अरुणाचल प्रदेश के चुनाव में जीते हैं। लोकसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग अजित पवार के अगुवाई वाली एनसीपी के गुट को असली एनसीपी माना था। इसके बाद उन्हें पार्टी के सिंबल घड़ी का भी इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी।  

राज्यसभा में MP की 5 सीटों का नंबर गेमः कौन किस पर भारी

The number of seats for Members of Parliament (MP) in the Rajya Sabha is 5. मौजूदा 4 सीटों को बचाने भाजपा को चाहिए 152 विधायक; अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल मध्यप्रदेश में 3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से दो सवालों का जवाब मिलेगा। मध्यप्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी?अप्रैल 2024 में खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों में से कितनी-किस पार्टी के खाते में जाएंगी। एमपी के 11 में से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इनमें से 4 सीटें भाजपा जबकि 1 कांग्रेस के पास है। भाजपा को यदि यह आंकड़ा बरकरार रखना है तो विधानसभा में उसे 152 सीटें जीतना होंगी क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए न्यूनतम 38 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। राज्यसभा सांसद का चुनाव तय फॉर्मूले के तहत होता है। इसके मुताबिक, जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है, उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत तय होती है। पहले जानिए, कैसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। व्हिप के उल्लंघन से खत्म हो सकती है सदस्यता राज्यसभा चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की तरह गुप्त मतदान नहीं होता है। राज्यसभा सांसद के नाम के आगे एक से चार तक का नंबर लिखा होता है। विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए राजनीतिक दल रिक्त सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के साथ अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। यदि किसी विधायक ने व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। नियमानुसार पार्टी विधानसभा सचिवालय को ऐसे विधायक की लिखित शिकायत करती है तो जांच के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है। किस फॉर्मूले से तय होती है जीत? राज्यसभा चुनाव के लिए एक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं, उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है। इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, वह जीत का आंकड़ा होता है। 2020 में भाजपा ने ऐसे पलट दिया था नंबर गेम 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी क्योंकि 2 विधानसभा सीटें मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी।इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे। 5 विधायकों ने भी बदल लिया था पाला 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कमलनाथ सरकार ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली थीं लेकिन 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों पर हुए चुनाव से ठीक पहले बसपा के दो, सपा का एक और 2 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ था। दिग्विजय को तीन वोट ज्यादा मिले थे 3 सीटों के चुनाव में भाजपा को दो वोटों का नुकसान हुआ था। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह क्रॉस वोटिंग की थी। सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में दिया गया भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी का वोट निरस्त हो गया था। 3 सीटों पर चुनाव से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2020 को कमलनाथ के निवास पर एक बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि दिग्विजय सिंह को 54 विधायक वोट देंगे लेकिन उन्हें 57 वोट मिले। यानी जिन तीन विधायकों को दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को वोट देना था, उन्होंने दिग्विजय सिंह को वोट दे दिया था। से ओबीसी, दलित और महिला वर्ग को साधा था। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की राजनीति में ओबीसी एक बड़ा मुद्दा बन गया था। ओबीसी आरक्षण की वजह से पंचायत और निकाय चुनाव टल गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के दखल के बाद निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। प्रदेश में ओबीसी वोटरों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी ने कविता पाटीदार के नाम की घोषणा कर एक बड़ा ओबीसी कार्ड खेला था। इसी तरह सुमित्रा वाल्मीकि को राज्यसभा में भेजकर दलित वर्ग को साधने की कोशिश की थी। जानकार कहते हैं कि यदि भाजपा फिर दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलती है तो उसे मिशन 2024 में भी बड़ा फायदा होगा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login