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बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे

उज्जैन  उज्जैन से बदनावर की दूरी 65 किमी. की है। गुजरात के श्रद्धालु महाकाल दर्शन करने के लिए बदनावर होकर ही गुजरते हैं। हाल ही में बदनावर बागेश्वर धाम से उज्जैन के इंदौर बायपास तक फोरलेन बनकर तैयार हो चुका है तथा आवागमन भी शुरू हो गया है। यह रोड भी वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ(Simhastha 2028) के मद्देजनर ही बनाया गया है। इस समय आम जनता का झुकाव इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने बदनावर में 3 जगह चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) बनाने का निर्णय लिया है, इनमें मुख्य बस स्टैंड, गणेश वडली बस स्टैंड व नागेश्वर महादेव धाम है। यह सभी स्टेशन सिहंस्थ के चलते स्थापित किए जा रहे हैं। कलेक्टर प्रियांक मिश्र ने बदनावर के साथ पीथमपुर, मनावर, सरदारपुर और कुक्षी में भी स्थानीय निकाय को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर बस स्टैंड और डिपो के लिए भूमि चिन्हित की जाएगी। मंगलवार को स्थान के निरीक्षण के लिए एसडीएम वसीम अहमद भट्ट, तहसीलदार सुरेश नागर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव, सीएमओ लालसिंह राठौर आदि उपस्थित थे। गुजरात के अधिकांश वाहन बायपास से गुजरने लगे बदनावर-उज्जैन फोरलेन बनने के बाद गुजरात से आने वाले ज्यादातर वाहन अब बायपास से होकर गुजरने लगे हैं। जिन तीन जगह को सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे है, उनमें से बागेश्वर धाम का चार्जिंग स्टेशन गुजरात जाने वाले वाहनों के लिए उपयोग में आएगा। शेष दोनों चार्जिंग स्टेशन अन्य वाहनों के लिए उपयोगी रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि शासन को उज्जैन से बदनावर 70 किमी लंबे फोरलेन के आसपास चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) स्थापित करना चाहिए, ताकि सिंहस्थ के दौरान चार्जिंग स्टेशन पर वाहनों की लंबी कतार न लगे।

उज्जैन :रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर चौड़ा किया जा रहा, जिसके टेंडर हो चुके

उज्जैन नगर निगम ने रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते नृसिंहघाट तिराहे तक के मार्ग चौड़ीकरण के चलते मंगलवार को प्रभावित होने वाले मकानों पर लाल निशान लगाए। मार्ग के करीब 171 मकानों को चिह्नित किया है। तीन चौराहे पर मौजूद 20 मकानों पर बाद में निशान लगाए जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 के तहत निगम शहर के 6 मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है। इसी क्रम में रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर (80 फीट) चौड़ा किया जा रहा है, जिसके टेंडर हो चुके हैं। महापौर के सामने जताया लोगों ने विरोध वार्ड भ्रमण के दौरान महापौर मुकेश टटवाल के सामने रविशंकर नगर के रहवासियों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि 24 मीटर रोड़ चौड़ा होने से मकान का बड़ा हिस्सा टूट जाएगा। निगम 18 मीटर के मान से चौड़ीकरण करें। हालांकि रहवासियों को बताया गया कि मास्टर प्लान के मुताबिक ही मार्ग चौड़ा किया जा रहा है। तीन साल पूर्व स्मार्ट सिटी के माध्यम से मार्ग चौड़ा किए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। 171 मकानों पर लगाए लाल निशान निगम ने चौड़ीकरण में प्रभावित होने वाले 171 मकानों पर लाल निशान लगाए। वहीं हरिफाटक ब्रिज, महाकाल लोक और जयसिंहपुरा चौराहे पर बने 20 मकानों को फिलहाल छोड़ दिया गया। यहां चौराहे विकास के चलते भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मकानों पर लगे लाल निशान के तहत कई मकान 25 फीट तक चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। जोन 2 के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने गाड़ी अड्डे चौराहे से लेकर शीतला माता मंदिर तक शेष मकान एवं दुकानों पर लाल निशान लगाए।

आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध तेज, कांग्रेस ने की पदयात्रा शुरू

इंदौर आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे सर्वे का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इसे रुकवा दिया था। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रभावित गांवों के किसानों तक पहुंचने के लिए पदयात्रा निकालने की योजना बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे और आठ दिनों तक इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में पदयात्रा करेंगे।   सर्वे को लेकर क्यों हुआ विरोध?   जब आउटर रिंग रोड का सर्वे किया जा रहा था, तब प्रभावित गांवों के किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। भारतीय किसान संघ ने किसानों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे के अधिकारियों को किसी भी गांव में सर्वे करने से रोक दिया। यहां तक कि प्रशासन को कलेक्टर कार्यालय पर हुए धरने के बाद यह आश्वासन देना पड़ा कि जब तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो जाती, तब तक सर्वे नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद सर्वे कार्य पूरी तरह रोक दिया गया। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई है और किसानों के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है।  आउटर रिंग रोड और पूर्वी रिंग रोड के प्रभावित गांव   आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत धार जिले के पांच गांव, देपालपुर तहसील के 16 गांव और सांवेर तहसील के 18 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से देपालपुर तहसील का 35 किलोमीटर और सांवेर तहसील का 37 किलोमीटर का हिस्सा इस परियोजना में शामिल है। जीतू पटवारी इन सभी गांवों में पदयात्रा करेंगे। इसके अलावा, पूर्वी रिंग रोड भी इस पदयात्रा का हिस्सा होगी। यह रोड पीर कराड़िया गांव से शुरू होकर नेटरेक्स तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर सेंटर से 200 बीघा जमीन अधिग्रहित की जानी है। बेटमा खुर्द को भी एक केंद्र बनाया गया है। इस पूरे क्षेत्र की कुल लंबाई 77 किलोमीटर है, जिसे चार दिन में कवर किया जाएगा।   कैसा रहेगा पदयात्रा का कार्यक्रम? पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है।   – हर दिन सुबह नाश्ते के बाद पदयात्रा शुरू होगी।   – दिन में किसी गांव में रुककर भोजन किया जाएगा।   – शाम को जिस स्थान पर यात्रा रुकेगी, वहां पर सभा का आयोजन होगा।   – इस दौरान कांग्रेस के नेता किसानों से मिलकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगे।   – जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव के अनुसार, यह यात्रा 10 मार्च तक तय की गई है और होली के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।   किसानों को 15 गुना कम मुआवजा देने का आरोप कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक कीमत से 15 गुना कम मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता सदाशिव यादव का कहना है कि जिस गांव में सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 10 लाख रुपए प्रति एकड़ है, वहां की वास्तविक कीमत 1.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है। इसके बावजूद सरकार केवल दोगुना मुआवजा देने की योजना बना रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।   किसानों को पक्ष में लेने का प्रयास कांग्रेस इस पदयात्रा के जरिए किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार पर दबाव बनाकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग करेगी।   समय बताएगा पदयात्रा का कितना असर होगा आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पहले भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध करके सर्वे रुकवा दिया, और अब कांग्रेस ने पदयात्रा निकालकर इस मुद्दे को और गरमा दिया है। जीतू पटवारी की यह यात्रा किसानों को जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। अब देखना होगा कि इस पदयात्रा का कितना असर पड़ता है और क्या किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिल पाता है या नहीं।

उमरिया में पंजीयन विभाग ने बनाया रिकॉर्ड, कोल ब्लॉक के एक ही दस्तावेज में मिला 17 करोड़ 53 लाख का राजस्व

उमरिया  जिले में एक जमीन की रजिस्ट्री से 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व मिला है। यह रजिस्ट्री मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ी रजिस्ट्रियों में से एक हो सकती है। यह रकम उमरिया जिले के सालाना राजस्व लक्ष्य, जो कि 21 करोड़ रुपए है, का एक बड़ा हिस्सा है। यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया और शहडोल जिलों के पांच गांवों की लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन 30 साल की लीज पर दी गई है। एमपी का छोटा सा जिला है उमरिया उमरिया, जो कि एक छोटा सा जिला है। इस जिला ने एक ही रजिस्ट्री से राजस्व संग्रह में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में तो करोड़ों की रजिस्ट्रियां आम हैं। लेकिन उमरिया जैसे छोटे जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। जहां जिले का सालाना लक्ष्य ही 21 करोड़ है, वहां एक ही दिन में 17 करोड़ 53 लाख की रजिस्ट्री होना आश्चर्यजनक है। संपदा 2.0 पोर्टल के जरिए हुई रजिस्ट्री सब रजिस्ट्रार आशीष श्रीवास्तव ने इस रजिस्ट्री की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 पोर्टल के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया जिले के तीन और शहडोल जिले के दो गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन की 30 साल की लीज पर रजिस्ट्री हुई है। इससे सरकार को 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उमरिया जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने आगे कहा कि और जहां तक मैं समझता हूं कि शहडोल संभाग की सबसे बड़ी रजिस्ट्री है। जब उनसे प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहीं पूंछा गया कि प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री सुनने को नही मिली है तो बोले कि शहडोल संभाग में तो नहीं है लेकिन प्रदेश की जानकारी नहीं है। शहडोल संभाग के लिए है रेकॉर्ड यह रजिस्ट्री न केवल उमरिया जिले के लिए, बल्कि पूरे शहडोल संभाग के लिए भी एक रिकॉर्ड हो सकती है। संपदा 2.0 के लागू होने के बाद से यह प्रदेश की सबसे बड़ी एकल रजिस्ट्री भी हो सकती है। इससे उमरिया जिले का नाम प्रदेश भर में चर्चा में आ गया है। यह रजिस्ट्री भविष्य में जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी काफी मदद मिलेगी। यह एक मिसाल है कि कैसे छोटे जिले भी बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

दिल्ली के बजट के मद्देनजर सीएम रेखा गुप्ता ने की महिला संगठनों से मुलाकात, कई विषयो पर हुई चर्चा

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली के विभिन्न महिला संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया। इस बैठक में दिल्ली के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक अवसर, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे विषय शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित दिल्ली बजट के लिए दिल्ली के विभिन्न महिला संगठनों के साथ विचार-विमर्श क‍िया। दिल्ली सरकार से उनकी अपेक्षाएं और उनके सुझाव को हमने सुना। महिलाओं ने जो अपेक्षाएं और सुझाव दिए, वह बेहद महत्वपूर्ण हैं। चाहे वह सुरक्षा हो, स्वास्थ्य हो या शिक्षा, दिल्ली की महिलाओं की असल जरूरतों पर चर्चा हुई, और यह मेरे लिए बहुत ही सार्थक था। दिल्ली को लेकर मैं विश्वास दिलाती हूं कि आपकी मुख्यमंत्री बहन जरूर उन सभी क्षेत्रों में काम करेगी, जहां अभी तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। मैं दिल्ली की बहनों की सभी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। उन्होंने आगे कहा कि इसी कड़ी में अगले तीन दिन तक लगातार समाज के अलग-अलग वर्गों में जाकर हम उनके सुझाव लेकर आने वाले हैं। कल व्यापार और उद्योग से जुड़े हुए संगठनों को बुलाया गया है, आज शाम को शिक्षा से जुड़े हुए बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ग के लोगों को बुलाया गया है। मैं खुद झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली माताओं-बहनों से से मिलने जाऊंगी। उनको इस सरकार से जो अपेक्षाएं हैं, उसे पूरा करने की कोशिश करूंगी। सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि युवाओं और प्रोफेशनल्स का जो कार्यक्षेत्र है, उनसे बातचीत करते हुए दिल्ली का बजट तैयार किया जाएगा। यह एक ऐसा बजट होगा, जो जनता की उम्मीदों को पूरा पूरा करेंगा। महिलाओं की सम्मान निधि हो या फिर लोगों को मिलने वाला सिलेंडर, जो हमने जनता से वादे किए हैं, उसे पूरा किया जाएगा। दिल्ली का विकास हमारी प्राथमिकता है।

मध्‍य प्रदेश में ठंड का यू-टर्न, कई शहरों में सर्द हवाएं चली, कई शहरों में सर्द हवाएं चली

भोपाल वर्तमान में किसी मौसम प्रणाली के सक्रिय नहीं रहने के साथ ही हवाओं का रुख भी उत्तरी एवं उत्तर-पश्चिमी हो गया है। लगातार सर्द हवाओं के चलने से मध्य प्रदेश में एक बार फिर रात के तापमान में काफी गिरावट हुई है। इसी क्रम में बुधवार को प्रदेश में सबसे कम आठ डिग्री सेल्सियस तापमान राजगढ़ में दर्ज किया गया। गुना में रात का तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस पर रहा। हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात का पारा 10.3 डिग्री सेल्सियस पर रहा। दिन का सबसे कम 26.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रीवा में रिकार्ड किया गया। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक गुरुवार को ठंड का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। शुक्रवार से तापमान में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि लगातार आए पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के पहाड़ों पर जबरदस्त बर्फबारी और वर्षा हुई थी। इससे वहां का तापमान काफी कम बना हुआ है। उत्तर भारत की तरफ से आ रही सर्द हवाओं के कारण मध्य प्रदेश में रात के समय ठंड बढ़ गई है। गुरुवार को भी रात का तापमान इसी तरह बना रह सकता है। नौ मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में पहुंचने वाला है। उसके बाद एक बार फिर धूप में तल्खी बढ़ने लगेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- जीआईएस भोपाल से ग्लोबल हुआ प्रदेश का स्टार्ट-अप इको सिस्टम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीआईएस-भोपाल में देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश भी तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकांक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना है, जहां युवा उद्यमियों के आइडियाज को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ सेशन नें प्रदेश के स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम को पंख दे कर ग्लोबल बना दिया है। आधुनिक तकनीक के इस युग में देश के स्टार्ट-अप जगत में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज चुका है। जीआईएस-भोपाल में 20 से अधिक यूनिकॉर्न के संस्थापकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है। स्टार्ट-अप पर फोकस्ड सेशन ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ में शामिल होने के लिए कुल 180 स्टार्ट-अप्स ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 25 हाईली पोटेंशियल स्टार्ट-अप्स ने प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के विश्लेषण के बाद उन्हें जरूरी मार्गदर्शन और निवेश के अवसर भी मिले। इस सेशन में कुल 47 स्टार्ट-अप शामिल हुए थे। इनमें से 19 स्टार्ट-अप्स को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्राप्त हुए।   मध्यप्रदेश में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिये महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति के उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 18 फीसदी, अधिकतम 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल रही है। अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके साथ इन्क्यूबेटर विस्तार के लिए 5 लाख रुपये का एक मुश्त अनुदान, स्टार्ट-अप्स के ऑफिस किराए में 50 फीसदी राशि की वापसी (तीन वर्षों तक प्रतिमाह 5,000 रुपये) की भी व्यवस्था की गई है। नीति में पेटेंट कराने पर 5 लाख रुपये तक की सहायता और पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता का भी प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में इस समय 4,900 से अधिक स्टार्ट-अप संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा संचालित हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार की स्टार्ट-अप नीति और क्रियान्वयन योजना के अंतर्गत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय मदद, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सहायता और नीतिगत मदद मुहैया कराई जा रही है। नई स्टार्ट-अप नीति के तहत वित्तीय अनुदान के पात्र स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 फीसदी (अधिकतम 18 लाख रुपये) का अनुदान दिया जा रहा है। नई नीति में वित्तीय प्रोत्साहन, अधोसंरचना सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।  

राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे, इस दौरान बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। राहुल गांधी का यह दौरा आगामी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारियों को मजबूती देने के लिए हो रहा है। वे पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर देंगे। इसके अलावा, वे कांग्रेस के प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उनका मनोबल बढ़ाएंगे। कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन 8-9 अप्रैल को अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी का दौरा यह संकेत देता है कि पार्टी गुजरात चुनावों को लेकर गंभीर है और रणनीति में बदलाव की संभावना है। राजनीतिक सरगर्मियां तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 7-8 मार्च को गुजरात के सूरत और नवसारी जिलों के दौरे पर रहेंगे, जिससे प्रदेश में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं।  

बोफोर्स घोटाले की जांच फिर से शुरू होने की संभावना, CBI ने अमेरिका से मदद के लिए ‘लेटर रोगेटरी’ भेजा

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका को एक न्यायिक अनुरोध भेजकर निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से जानकारी मांगी है, जिन्होंने 1980 के दशक के 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत कांड के बारे में महत्वपूर्ण विवरण भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करने की इच्छा व्यक्त की थी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। ‘फेयरफैक्स ग्रुप’ के प्रमुख हर्शमैन 2017 में निजी जासूसों के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने विभिन्न मंचों पर आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था । उन्होंने कहा था कि वह सीबीआई के साथ विवरण साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें 1986 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विदेशों में भारतीयों द्वारा मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और धन शोधन की जांच और भारत के बाहर ऐसी संपत्तियों का पता लगाने के लिए नियुक्त किया गया था और उनमें से कुछ बोफोर्स सौदे से संबंधित थे। सीबीआई ने वित्त मंत्रालय से भी संपर्क कर हर्शमैन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे थे तथा यह भी पूछा था कि क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की है, लेकिन उस समय के रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एजेंसी ने कई साक्षात्कारों में हर्शमैन के दावों पर ध्यान दिया और 2017 में घोषणा की कि मामले की उचित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी। ‘लेटर रोगेटरी’ की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि आठ नवंबर, 2023, 21 दिसंबर, 2023, 13 मई, 2024 और 14 अगस्त, 2024 को अमेरिकी प्राधिकारियों को भेजे गए पत्रों और स्मरणपत्रों से कोई जानकारी नहीं मिली। ‘लेटर रोगेटरी’ एक लिखित अनुरोध है जो एक देश की अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले की जांच या अभियोजन में सहायता प्राप्त करने के लिए दूसरे देश की अदालत को भेजा जाता है। इंटरपोल से किये गए अनुरोध का भी कोई परिणाम नहीं निकला। सीबीआई को इस साल 14 जनवरी को गृह मंत्रालय से अमेरिका को ‘लेटर रोगेटरी’ भेजने के लिए हरी झंडी मिल गई थी। एजेंसी ने विशेष अदालत को इसकी जानकारी दी, जिसने 11 फरवरी को सीबीआई के ‘लेटर रोगेटरी’ आवेदन को मंजूरी दे दी। एक विशेष अदालत ने ‘लेटर रोगेटरी’ जारी करने के सीबीआई के आवेदन को मंजूरी देते हुए टिप्पणी की, ‘‘माइकल हर्शमैन द्वारा उपर्युक्त साक्षात्कार में किए गए दावों से संबंधित तथ्य का पता लगाने के लिए दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए अमेरिका में जांच करना आवश्यक है।” स्वीडन के एक रेडियो चैनल ने आरोप लगाया था कि बोफोर्स सौदे को हासिल करने के लिए भारत के राजनीतिक नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी जिसके तीन साल बाद सीबीआई ने 1990 में मामला दर्ज किया था। इन आरोपों ने राजीव गांधी सरकार के लिए बड़ा परेशानी खड़ी कर दी थी और प्रतिद्वंद्वी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इसका इस्तेमाल किया था। यह घोटाला स्वीडिश कंपनी बोफोर्स के साथ चार सौ 155 मिमी फील्ड हॉवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए 1,437 करोड़ रुपये के सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित था। इन तोपों ने करगिल युद्ध के दौरान भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीबीआई ने 1999 और 2000 में आरोपपत्र दाखिल किए थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2004 में राजीव गांधी को आरोप मुक्त कर दिया था। गांधी की लिट्टे के आत्मघाती हमले में हत्या किए जाने के करीब 13 साल बाद अदालत ने यह फैसला दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2005 में शेष आरोपियों के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि सीबीआई यह साबित करने में विफल रही कि बोफोर्स से इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोची को मिला धन भारत में लोक सेवकों को रिश्वत के रूप में दिया जाना था। सीबीआई ने 2005 के फैसले के खिलाफ 2018 में उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी लेकिन देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने 2005 में अधिवक्ता अजय अग्रवाल द्वारा दायर अपील में सभी बिंदुओं को उठाने की अनुमति दी थी।  

मोहम्मद शमी ने कहा- लय वापिस पाने की कोशिश कर रहा हूं, मेरे ऊपर अधिक जिम्मेदारी है

दुबई मोहम्मद शमी ने स्वीकार किया कि भारत के अकेले प्रमुख तेज गेंदबाज होने के नाते उन पर काफी जिम्मेदारी है लेकिन वह अपनी लय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चैम्पियंस ट्रॉफी में टीम की जरूरतों पर खरे उतर सकें। चोट से उबरकर वापसी करने वाले शमी ने चोटिल जसप्रीत बुमराह की गैर मौजूदगी में चैम्पियंस ट्रॉफी के दौरान हर्षित राणा या हार्दिक पंड्या के साथ नयी गेंद संभाली। राणा अभी नये हैं और पंड्या हरफनमौला है जो आम तौर पर वनडे मैच में दस ओवर नहीं डालते। शमी ने अभी तक टूर्नामेंट में आठ विकेट लिये हैं। उन्होंने आस्ट्रेलिया पर सेमीफाइनल में चार विकेट से मिली जीत के बाद मिश्रित जोन में कहा, ‘‘मैं अपनी लय फिर हासिल करके टीम के लिये ज्यादा योगदान देने की कोशिश कर रहा हूं। दो विशेषज्ञ तेज गेंदबाज टीम में नहीं है और मेरे ऊपर ज्यादा जिम्मेदारी है।’ शमी ने कहा कि बुमराह की गैर मौजूदगी में उनका कार्यभार बढ गया है लेकिन वह शत प्रतिशत से ज्यादा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप अकेले मुख्य तेज गेंदबाज हैं और दूसरा हरफनमौला है तो तो कार्यभार रहता है। आपको विकेट लेकर मोर्चे से अगुआई करनी होती है। मुझे इसकी आदत हो गई है और मैं अपना शत प्रतिशत से अधिक देने की कोशिश कर रहा हूं।’’ शमी को विश्व कप 2023 के दौरान टखने में चोट लगी थी और वह लंबे ब्रेक पर रहे। उन्होंने कहा कि अब वह लंबे स्पैल फेंकने की जिम्मेदारी लेने के लिये तैयार हैं। उन्होंने कहा,‘‘मुझे नहीं लगता कि किसी को अपनी फिटनेस के बारे में बहुत ज्यादा सोचने की जरूरत है। हमें प्रयास करने होंगे और देखते हैं कि शरीर इसे कैसे लेता है। हम सभी आखिर में मजदूर हैं।’’ शमी ने कहा, ‘‘मैं अब लंबे स्पैल फेंकने के लिये तैयार हूं। छोटे स्पैल हमेशा आसान होते हैं और सीमित ओवरों के क्रिकेट में यह मायने नहीं रखता कि दस ओवर फेंकने हैं या छह ओवर।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का भी फायदा मिला है कि भारतीय टीम सारे मैच दुबई में खेल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे निश्चित तौर पर फायदा मिला है क्योंकि हम हालात और पिच को बखूबी समझते हैं। एक ही जगह सारे मैच खेलने से फायदा मिला है।’’  

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स के शेयर बने रॉकेट, LIC ने खरीद डाले रामदेव की कंपनी के 73 लाख शेयर

नई दिल्ली बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स के शेयर आज बुधवार को कारोबार के दौरान फोकस में हैं। कंपनी के शेयर आज 2% चढ़कर 1759 रुपये के इंट्रा डे हाई पर पहुंच गए थे। शेयरों में इस तेजी के पीछे एक बड़ी वजह है। दरसल, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने ओपन मार्केट के जरिए से पतंजलि फूड्स में नई हिस्सेदारी खरीदी है। एलआईसी ने कंपनी में लगभग 2% हिस्सेदारी बढ़ाई है। अब पतंजलि फूड्स में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी 7% को पार कर 7.06% तक पहुंच गई। 73 लाख शेयर खरीदे गए LIC ने आज एक नियामक फाइलिंग में खुलासा किया कि उसने 25 नवंबर, 2024 और 4 मार्च, 2025 के बीच शेयर हासिल करके पतंजलि फूड्स के 73 लाख शेयर खरीदे हैं। दिसंबर तिमाही के अंत में, प्रमोटरों के पास कंपनी में 69.95% हिस्सेदारी थी, जबकि FII और DII के पास क्रमशः 13.3% और 6.3% हिस्सेदारी थी। बाकी 10.3% आम जनता शेयरधारकों के पास था। बता दें कि कंपनी खासकर तिलहनों के प्रोसेसिंग और फूड तेल के रिफाइनमेंट में सक्रिय है। क्या है डिटेल बाबा रामदेव के नेतृत्व वाली भारतीय उपभोक्ता सामान कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने 2019 में रुचि सोया इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर पतंजलि फूड्स कर दिया। जनवरी 2020 में, रुचि सोया के शेयर (अब पतंजलि फूड्स) को फिर से सूचीबद्ध किया गया। दिसंबर तिमाही के नतीजे दिसंबर तिमाही (Q3FY25) के लिए, कंपनी ने नेट मुनाफे में 71% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹371 करोड़ रहा। जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में इसका नेट मुनाफा ₹217 करोड़ था। दिसंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹9,103 करोड़ रहा, जो कि Q3 FY24 में ₹7,911 करोड़ से 15% अधिक है। जबकि परिचालन लाभ सालाना आधार पर 57% बढ़कर ₹541 करोड़ हो गया। QoQ आधार पर, इसमें 20.5% की वृद्धि हुई। दिसंबर तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन 6% रहा, जो FY24 की तीसरी तिमाही में 7% की तुलना में 200 आधार अंक अधिक है।

गुजरात में दो साल में 286 शेरों और 456 तेंदुओं की हो गई मौत, राज्य में 674 एशियाई शेर

अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में अंबानी की महत्वाकांक्षी परियोजना वनतारा का उद्घाटन किया और इसका दौरा किया। यहां पीएम मोदी वन जीवों के साथ तस्वीर भी खिचाते और शावक को दूध पिलाते नजर आए। लेकिन ठीक उसी दिन गुजरात विधानसभा में एक ऐसी रिपोर्ट पेश की गई जो जिसमें बताया गया कि राज्य में बीते दो साल में 286 शेरों की मौत हुई है। दरअसल, राज्य के वन मंत्री मुलुभाई बेरा ने मंगलवार को विधानसभा को यह जानकारी दी कि गुजरात में गत दो साल में कम से कम 286 शेरों की मौत हो गई, जिनमें 143 शावक भी शामिल हैं। इनमें से 58 शेरों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुईं।। बेरा ने प्रश्नकाल के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस विधायक शैलेश परमार के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्य में दो वर्षों – 2023 और 2024 – में 140 शावकों सहित 456 तेंदुओं की भी मौत हुई है। दो साल में 286 शेरों की मौत राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले दो सालों में राज्य में 143 शावकों सहित 286 एशियाई शेरों की मौत हुई है। इनमें से 58 अप्राकृतिक मौतें थीं। इसके अलावा, इसी अवधि के दौरान 456 तेंदुए और तेंदुए के शावकों की मौत की सूचना मिली। 2023 में 58 वयस्क शेर और 63 शावकों की मौत हुई, जबकि 2024 में मृत्यु दर बढ़कर 85 वयस्क शेर और 80 शावक हो गई। तेंदुओं की मौतों में सरकार ने कहा कि 2023 में 71 शावकों सहित 225 तेंदुए मारे गए, जबकि 2024 में मृत्यु दर बढ़कर 231 हो गई, जिसमें 69 शावक शामिल थे। कुल मिलाकर, 153 तेंदुए की मौतें अप्राकृतिक थीं। विशेषज्ञ का चौंकाने वाला खुलासा टीओआई से बातचीत में एक एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि आमतौर पर जब बड़ी बिल्लियों की बात आती है तो शावकों की मृत्यु की संख्या वयस्कों की मृत्यु से अधिक होती है। ऐसा नरभक्षण के कारण होता है। यहां तक कि शावकों के पहले तीन वर्षों तक जीवित रहने की संभावना बहुत कम है। यह लगभग 40 फीसदी है। चिंता का एक और मामला यह है कि वयस्क शेरों की मृत्यु 2023 से 2024 में 46 फीसदी बढ़ गई। विशेषज्ञ ने कहा कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसका एक कारण किसी बीमारी का प्रकोप हो सकता है। उन्होंने कहा कि शावकों की उच्च मृत्यु दर आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि गिर में आमतौर पर एक बार में तीन शावक होते हैं। सरकार ने उठाए ये कदम अधिकारी ने कहा कि बड़ी बिल्लियों के जीव विज्ञानियों के अनुसार शेरों की आबादी में 20% तक की मृत्यु दर आमतौर पर स्वीकार्य है, लेकिन अगर यह इससे अधिक हो जाती है, तो यह चिंता का विषय है। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि शेरों और अन्य जंगली जानवरों को बीमारी या दुर्घटना से संबंधित मामलों में तत्काल चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए एक पशु चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है, और एक समर्पित एम्बुलेंस सेवा भी मौजूद है। सरकार ने कहा कि अभयारण्य क्षेत्र से गुजरने वाली सार्वजनिक सड़कों पर स्पीडब्रेकर और साइनबोर्ड लगाए गए हैं। नियमित रूप से गश्त भी की जाती है, और अधिकारी वाहनों, हथियारों और वॉकी-टॉकी से लैस होते हैं। सरकार ने कहा कि चौकियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सासन में एक हाई-टेक निगरानी इकाई स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि 286 शेरों की मौत में से 121 की मौत 2023 में तथा 165 की मौत 2024 में हुई। गुजरात एशियाई शेरों का दुनिया में अंतिक प्राकृतिक आवास है। जून 2020 में की गई आखिरी गणना के अनुसार, राज्य में 674 एशियाई शेर हैं, जिनमें से मुख्य रूप से गिर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। मंत्री ने चल रहे बजट सत्र के दौरान विधानसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि 2023 में 225 और 2024 में 231 तेंदुओं की मौत हुई। उन्होंने बताया कि 228 शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई जबकि 58 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं, जैसे वाहनों की चपेट में आना या खुले कुओं में डूब जाना। बेरा ने बताया कि तेंदुओं में 303 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि 153 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं। वन मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने शेरों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए पशु चिकित्सकों की नियुक्ति और शेरों तथा अन्य जंगली जानवरों के समय पर उपचार के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करने जैसे विभिन्न कदम उठाए हैं।

राम मंदिर पर हमले का पूरा ब्लूप्रिंट था तैयार, अब्दुल रहमान के ठिकाने से मिली, किया गया था उसका ब्रेनवॉश

अयोध्या  फरीदाबाद के पाली से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान को राम मंदिर पर हमले का टारगेट दिया गया था. 19 वर्षीय अब्दुल रहमान को इस हमले के लिए पूरी तरह तैयार किया गया था. पूरे महीनों तक ब्रेनवॉश और ट्रेनिंग के बाद, अब्दुल को दो ग्रेनेड देकर नापाक मंसूबे को अंजाम देने के लिए भेजा जा रहा था. हालांकि, अयोध्या के लिए निकलने से पहले ही गुजरात एटीएस ने उसे दबोच लिया. अयोध्या के मिल्कीपुर में दुकान चलाता था अब्दुल पूछताछ में यह बात सामने आई है कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आरोपी को आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए उसका ब्रेनवॉश किया गया था. अब्दुल रहमान, जो अयोध्या के मिल्कीपुर में दुकान चलाता था, लंबे समय से राम मंदिर की रेकी कर रहा था. गुजरात एटीएस के हत्थे चढ़े अब्दुल ने खुलासा किया कि राम मंदिर को उड़ाने की साजिश आतंकी संगठनों ने रची थी. वह इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था और नाम बदलकर बड़ी साजिश रच रहा था.   वीडियो कॉल पर ली थी ट्रेनिंग अब्दुल ने वीडियो कॉल पर ट्रेनिंग ली थी और दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में भी काफी समय बिताया था. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस दौरान वह किस-किसके संपर्क में रहा. राम मंदिर के अलावा, अब्दुल रहमान के निशाने पर अन्य कई धार्मिक स्थल भी थे. उसके मोबाइल में कई अन्य धार्मिक स्थलों की फोटो और वीडियो मिले हैं, जिसके चलते उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. आईएस के इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस मॉड्यूल से जुड़ा अब्दुल रहमान नाम बदलकर बड़ी साजिश रच रहा था। उसने वीडियो कॉल पर ट्रेनिंग ली थी। वह दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में भी काफी समय बिताया था। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस दौरान वह किस-किसके संपर्क में रहा। मोबाइल में कई धार्मिक स्थलों के फोटो और वीडियो मिले निशाने पर राम मंदिर के अलावा भी अन्य कई धार्मिक स्थल भी थे। अब्दुल रहमान के मोबाइल में कई अन्य धार्मिक स्थलों की फोटो और वीडियो मिले हैं। जिसे लेकर उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। राम मंदिर और आसपास के फुटेज खंगाल रहीं एजेंसियां सूत्रों ने बताया है कि सुरक्षा एजेंसियां राम मंदिर और आसपास के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगालेगी। पता किया जा रहा है कि राम मंदिर की रेकी के अलावा वह जहां-जहां गया उसके साथ कौन-कौन मौजूद था। अब्दुल रहमान के फरीदाबाद पहुंचने का राज सीसीटीवी कैमरा खोलेगा। जांच में जुटी गुजरात एटीएस और पलवल एसटीएफ की टीम अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अलावा पाली में मौका स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है। सीसीटीवी की जांच कर रही पुलिस सुरक्षा एजेंसियां राम मंदिर और आसपास के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही हैं. सूत्रों के अनुसार, यह पता किया जा रहा है कि राम मंदिर की रेकी के अलावा वह जहां-जहां गया, वहां कौन-कौन मौजूद था. अब्दुल रहमान के फरीदाबाद पहुंचने का राज सीसीटीवी कैमरा खोलेगा. जांच में जुटी गुजरात एटीएस और पलवल एसटीएफ की टीम अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अलावा पाली में मौका स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है.  

शरत कमल के 20 साल के करियर पर लगा पूर्ण विराम, अचानक किया संन्यास का ऐलान, हो गए भावुक

मुंबई  भारत के महान टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंत शरत कमल ने बुधवार को घोषणा की कि चेन्नई में इस महीने के अंत में होने वाला डब्ल्यूटीटी कंटेंडर टूर्नामेंट उनके करियर का आखिरी टूर्नामेंट होगा। यह टूर्नामेंट 25 से 30 मार्च तक खेला जाएगा। 42 वर्षीय शरत ने कहा, “मैंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट चेन्नई में खेला था और अब यहीं पर मेरा आखिरी टूर्नामेंट होगा। यह पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर मेरा आखिरी मुकाबला होगा।” एक करियर जो प्रेरणा बना शरत कमल ने अपने दो दशक लंबे करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में सात स्वर्ण पदक और एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीते। पिछले साल पेरिस ओलंपिक में उन्होंने पांचवीं और आखिरी बार भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह उद्घाटन समारोह में भारत के संयुक्त ध्वजवाहक भी थे। 6 बार के गोल्ड मेडलिस्ट हैं कमल शरत ने राष्ट्रमंडल खेलों में छह स्वर्ण पदक जीते हैं जबकि एशियाई खेलों में दो कांस्य अपने नाम किये. पिछले साल पेरिस में पांचवां और आखिरी ओलंपिक खेलने वाले इस दिग्गज ने कहा, ‘मैने राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों में पदक जीते हैं. ओलंपिक पदक मैं नहीं जीत सका. उम्मीद है कि मैं आने वाली युवा प्रतिभाओं के जरिये अपना सपना पूरा कर सकूंगा.’ 20 साल के सफर को किया याद शरत कमल ने कहा, ‘चलिए 40 साल पहले की बात करते हैं, जब मैं दो साल का था. तब मैंने पहली बार अपने हाथ में रैकेट पकड़ा था, मुझे नहीं पता था कि यह मेरा सबसे लंबा साथी बन जाएगा. मैं इसे पूरी तरह से छोड़ नहीं रहा हूं, लेकिन यह निश्चित रूप से बड़ी भीड़ के सामने बड़ी टेबल पर हमारे लिए अंत है. अपने बंदना और रैकेट को थोड़ा आराम देने का समय आ गया है. इस खेल ने मुझे जो खुशियाँ, प्यार, दर्द, सबक और सभी लोगों का दिया है, उसके लिए मैं शब्दों से परे आभारी हूँ. हर छोटी-बड़ी चीज़ हमेशा मेरे साथ रहेगी.’ ओलंपिक पदक का सपना अधूरा अपने करियर के अंत की घोषणा करते हुए शरत ने कहा, “मैंने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में पदक जीते, लेकिन ओलंपिक पदक हासिल नहीं कर सका। मुझे उम्मीद है कि आने वाली युवा प्रतिभाएं मेरा यह सपना पूरा करेंगी।” शरत वर्तमान में आईटीटीएफ (अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ) रैंकिंग में दुनिया के 42वें नंबर के खिलाड़ी हैं और भारत के सर्वोच्च रैंकिंग वाले टेबल टेनिस खिलाड़ी भी। इंस्टाग्राम पर शेयर किया भावुक संदेश शरत ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक लंबा संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपने करियर के लिए आभार व्यक्त किया और नए चरण में खुद को फिर से तलाशने का वादा किया। उन्होंने लिखा, “मैं यह नहीं कह रहा कि मैं पूरी तरह से खेल छोड़ रहा हूं, लेकिन यह निश्चित रूप से दर्शकों की भीड़ के सामने बड़ी टेबल पर खेलने का अंत है। अब मेरे ‘बंदाना’ और ‘रैकेट’ को थोड़ा आराम देने का समय है।” दो साल की उम्र से शुरू हुआ सफर शरत ने अपने संदेश में उस समय को याद किया जब उन्होंने महज दो साल की उम्र में पहली बार रैकेट पकड़ा था। उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता था कि यह मेरा सबसे लंबे समय तक चलने वाला साथी बन जाएगा। इस खेल ने मुझे खुशी, प्यार, दर्द और सबक दिया है। हर छोटी चीज हमेशा मेरे साथ रहेगी।” एथलीट आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में नई भूमिका शरत वर्तमान में भारतीय ओलंपिक संघ के एथलीट आयोग के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “यह कल्पना करना कठिन है कि जब मैं टेबल टेनिस नहीं खेलूंगा, तो जीवन कैसा होगा। लेकिन ऐसा होगा ही।”

गाड़ी चलाते समय बजाया हूटर तो चलेगा डंडा! पुलिस मुख्यालय ने विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश

भोपाल मध्य प्रदेश में निजी वाहनों पर लाल, पीली, नीली फ्लैश लाइट, हूटर और VIP स्टीकर लगाकर रौब झाड़ने वाले चालकों के खिलाफ पुलिस अब सख्त कार्रवाई करने जा रही है. पुलिस मुख्यालय ने भोपाल और इंदौर के पुलिस कमिश्नर सहित सभी जिलों के SP को निर्देश जारी किए हैं. 1 मार्च से 15 मार्च तक 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह कदम अनधिकृत वाहनों की बढ़ती संख्या और अवांछित गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है. पुलिस मुख्यालय का निर्देश पुलिस मुख्यालय ने अपने पत्र में कहा, “प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ निजी वाहनों पर हूटर, फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), VIP स्टीकर और गलत नंबर प्लेट के मामले बढ़ रहे हैं. कार्यवाही न होने से ऐसे चालकों को प्रोत्साहन मिल रहा है.” पत्र में एक हालिया घटना का जिक्र है, जहां एक जिले में VIP भ्रमण के दौरान ऐसा वाहन पकड़ा गया और उसके खिलाफ BNS और मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया. सभी जिलों से इसी तरह की कार्रवाई की अपेक्षा की गई है. रिपोर्ट 18 मार्च तक ईमेल  cell02_ptri@mppolice.gov.in या aig_ptri@mppolice.gov.in  पर मांगी गई है. अभियान का दायरा1 से 15 मार्च तक चलने वाले इस अभियान में चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस होगा:   – हूटर का दुरुपयोग   – फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती) का अनधिकृत इस्तेमाल   – VIP स्टीकर का गलत प्रयोग   – गलत नंबर प्लेट वाले वाहन दिग्विजय की मांग से शुरुआत इस अभियान की पृष्ठभूमि में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का हालिया पत्र भी है. कुछ समय पहले उन्होंने DGP को पत्र लिखकर ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उनका कहना था कि यह चलन न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों में भय और भ्रम भी पैदा करता है. अब पुलिस मुख्यालय के निर्देश से यह मांग कार्रवाई में बदल रही है. सड़क पर बढ़ेगा शिकंजा यह अभियान निजी वाहनों के जरिए रौब दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पुलिस का कहना है कि यह कदम अवैध गतिविधियों को हतोत्साहित करेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा हूटर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस मुख्यालय ने जताई नाराजगी पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश में यह भी कहा गया कि कुछ दिन पहले VIP विजिट के दौरान एक ऐसा अनाधिकृत वाहन भी पकड़ा गया था, लेकिन उसके बाद भी मध्य प्रदेश के सड़कों पर अनवरत रूप से हूटर समेत प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग निजी वाहन चालकों द्वारा धडल्ले से किया जा रहा है. मध्य प्रदेश में निजी वाहनों पर अनाधिकृत सामग्री के उपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैं गौरतलब है. प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ निजी वाहनों पर हूटर, वाहन पर फ्लैश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), VIP स्टीकर व गलत नम्बर प्लेट के मामले तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से उन्हें प्रोत्साहन मिल रहा है. जारी निर्देश में कहा गया है कि ऐसे अनाधिकृत वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है

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