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रमजान में संस्कृति बचाओ मंच ने लाउडस्पीकर पर बैन लगाने का मुद्दा उठाया, कलेक्टर से कार्रवाई करने की अपील

भोपाल उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में भी लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है. रमजान के पवित्र महीने में संस्कृति बचाओ मंच ने लाउडस्पीकर पर बैन लगाने का मुद्दा उठाया है. मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि नमाज के वक्त साउंड तेजी से बज रहा है. तय पैमाने पर ही लाउडस्पीकर बजने चाहिए. कई लोगों ने संस्कृति बचाओ मंच से शिकायत की है. संस्कृति बचाओ मंच का कहना है कि मस्जिदों के अंदर लाउडस्पीकर पर हमें कोई आपत्ति नहीं. ऊपर लगे माइक को हटाया जाना चाहिए. संस्कृति बचाओ मंच का कहना है कि कलेक्टर और मुख्यमंत्री का भी आदेश है कि तेज आवाज नहीं होनी चाहिए. 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं. लाउडस्पीकर  से तेज आवाज आ रही है. नियम सभी के लिए एक समान होने चाहिए. तेज साउंड से लोगों को परेशानी हो रही, बच्चों को परेशान हो रही है. संस्कृति बचाओ मंच से कई लोगों ने इसकी शिकायत की है. इस पर कलेक्टर को संज्ञान लेना चाहिए. सभी को अपनी बात रखने का हक: कांग्रेस लाउडस्पीकर मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा का कहना है कि कोर्ट के आदेश और तय मापदंडों के अनुसार साउंड होना चाहिए. एक धर्मविशेष को टारगेट न कराया जाए. देश में सभी को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है. इधर, बीजेपी प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि मध्य प्रदेश में सभी चीजें कानून के अनुसार तय होती हैं. हिन्दू मुस्लिम करने का काम कांग्रेस करती है. कानून का पालन सबको करना होगा.

मानव संग्रहालय की नई टाइमिंग 1 मार्च से 31 अगस्त 2025: 11 AM से 6:30 PM, वन विहार 5 से 7 मार्च तक सुबह 6.30 से 10 बजे तक बंद रहेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश की झीलों से घिरी खूबसुरत राजधानी भोपाल अपने खानपान और टूरिस्ट एडवेंचर के लिए पूरे देश में एक अलग स्थान रखती है. जहां आप तालाब के सुंदर दृश्य से लेकर आदिवासी कला और रहन-सहन देख सकते हैं. राजधानी भोपाल के बीचों बीच श्यामला हिल्स की पहाड़ियों पर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय पर्यटकों के आकर्षण का खास केंद्र है. इसके साथ ही वन विहार नेशनल पार्क भी भोपाल आए टूरिस्ट्स की मस्ट-वॉच लिस्ट में शुमार होते हैं. अब गर्मी के मौसम के ठीक पहले यहां की एंट्री टाइमिंग में बदलाव हुआ है. राजधानी के श्यामला हिल्स स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में अगर आप घूमने जाने का सोच रहे हैं तो बता दें कि यहां एंट्री के समय में बदलाव हुआ है. जिसके बाद अब 1 मार्च से 31 अगस्त 2025 तक मानव संग्रहालय की समस्त मुक्ताकाश और अंतरंग भवन की विभिन्न प्रदर्शनियों रोज सुबह 11 बजे से शाम के 6.30 बजे तक दर्शकों के देखने के लिए ओपन रहा करेंगी. इसके अलावा मानव संग्रहालय हर सोमवार और नेशनल हॉली-डे पर बंद रहा करेगा. वन विहार में 5 से 7 मार्च तक देर से होगी एंट्री झीलों के शहर भोपाल में अगर आप पक्षियों से लेकर तरह-तरह के जानवरों का दीदार करना चाहते हैं तो वन विहार राष्ट्रीय उद्यान आपके ही इंतजार में है, लेकिन हां अब अगर आप वन विहार नेशनल पार्क में जाने का प्लान बना रहे हैं तो बता दें कि आने वाले 5 से लेकर 7 मार्च तक वन विहार टूरिस्ट के लिए जरा देरी से खुलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बीच वन विहार में जानवरों की गिनती होगी जो 5 से 7 मार्च तक सुबह 7 से 9 तक होगी. इसके चलते वन विहार में सुबह 6.30 से 10 बजे तक पर्यटकों को एंट्री नहीं मिलेगी. इसके बाद टूरिस्ट शाम 6.30 बजे तक यहां घूम सकेंगे तो अगर आप भी मानव संग्रहालय या फिर वन विहार जाने वाले है तो जानें से पहले टाइमिंग जरूर चेक कर लें.

संपदा-1 पोर्टल पर अब 726 स्लाट की बुकिंग हो सकेगी प्रतिदिन, 396 स्लाट बुक हो रहे थे अब तक

 इंदौर  समाप्त हो रहे वित्त वर्ष 2024-25 के अंतिम माह मार्च में पंजीयन कार्यालय अवकाश के दिन भी खुले रखने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत जिले में रविवार को भी पंजीयन कार्यालय खुले रहे और दस्तावेज पंजीकृत हुए। आमजन की सुविधा के लिए अब संपदा-1 पोर्टल पर भी स्लाट बुकिंग की संख्या को बढ़ाया गया है। सोमवार से एक सब रजिस्ट्रार के पास 33 स्लाट की बुकिंग हो सकेगी। इससे पहले एक सब रजिस्ट्रार के पास सिर्फ 18 स्लाट ही बुक हो सकते थे। इससे संपदा-1 पोर्टल पर रजिस्ट्री की पांच से सात दिन की वेटिंग आ रही थी। मार्च में अधिक दस्तावेज पंजीकृत हो सके, इसके लिए स्लाट की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। लंबी वेटिंग चल रही थी पंजीयन विभाग द्वारा संपदा-2 पोर्टल के आने के बाद संपदा-1 के स्लाट की बुकिंग को कम कर दिया गया था। एक सब रजिस्ट्रार के पास सिर्फ 18 स्लाट ही संपदा-1 पर बुक होते थे। इस वजह से सभी पंजीयन और उप पंजीयन कार्यालय में संपदा-1 पर रजिस्ट्री कराने के लिए लंबी वेटिंग चल रही थी। बुकिंग को दोगुना कर दिया लोगों को एक सप्ताह के बाद ही रजिस्ट्री के लिए अपाइंटमेंट मिल पा रहा था। इसे देखते हुए पंजीयन विभाग ने एक सब रजिस्ट्रार के पास स्लाट बुकिंग को दोगुना कर दिया। जानकारों का कहना है कि संपदा-2 को प्रमोट करने के लिए संपदा-1 पर स्लाट कम किए थे, लेकिन अब राजस्व बढ़ाने के लिए संपदा-1 पर स्लाट की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। एक दिन में 726 स्लाट हो सकेंगे बुक इंदौर जिले में 22 सब रजिस्ट्रार कार्यरत हैं और इनके पास पहले कुल 396 स्लाट संपदा-1 पर बुक हो रहे थे। प्रत्येक सब रजिस्ट्रार के पास स्लाट की संख्या को दोगुना करने से जिले में संपदा-1 पर 726 स्लाट की बुकिंग प्रतिदिन हो सकेगी। इससे लोगों को रजिस्ट्री के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। संपदा-2 पर स्लाट बुकिंग की कोई लिमिट तय नहीं है। मार्च में होते हैं सर्वाधिक दस्तावेज पंजीकृत वित्त वर्ष के अंतिम माह मार्च में हर बार सर्वाधिक दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। ऐसे में पंजीयन कार्यालयों में भीड़ भी बढ़ जाती है। संपदा-1 पर स्लाट की संख्या बढ़ाने से आमजन सुविधा से दस्तावेज पंजीकृत करवा सकेंगे। संपदा-2 पर आनलाइन पंजीयन की सुविधा मुहैया हो रही है, इसके बावजूद आमजन संपदा-1 पर अधिक दस्तावेज पंजीकृत करवा रहे हैं। रविवार को पंजीकृत हुए 350 दस्तावेज पंजीयन कार्यालय मार्च में शनिवार और रविवार के अवकाश के दिन भी खुले रहे। पंजीयन विभाग की वेबसाइट के अनुसार दो दिनों में 1100 दस्तावेज पंजीकृत हुए और आठ करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। शनिवार को 750 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे और 6.25 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं रविवार को 350 दस्तावेज पंजीकृत हुए और 1.77 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ।

पन्ना में थाने को बना दिया ‘होटल’, दरोगाजी के बर्थडे पर पुलिसवालों ने लगाए ठुमके; SP ने दिए जांच के आदेश

पन्ना मध्य प्रदेश के एक थाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें थाना प्रभारी के बर्थडे पर कुछ पुलिसवाले डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। डांस करने वाले कुछ लोगों ने तो अपने कपड़े भी उतार दिए। एसपी ने पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के एक थाने से डांस एवं मौज मस्ती के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में कुछ सिपाही नाबालिग लड़कों के साथ डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। डांस की मस्ती में चूर ये सिपाही यह भूल गए कि उनके साथ डांस करने वाले लड़के नाबालिग हैं। मामला यहीं नहीं रुका। डांस करने वाले कुछ लोगों ने तो अपने कपड़े तक उतार दिए। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पन्ना एसपी साइन कृष्णा थोटा ने वीडियो में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। मामला पन्ना जिले के धर्मपुर थाना थाना का है। यहां तैनात थाना प्रभारी का जन्मदिन था। इस मौके पर थाने को जमकर सजाया गया था। डीजे से लेकर तमाम तरह की तैयारियां की गई थीं। इसी मौके पर डीजे की धुन पर पुलिसवालों सहित कुछ लोग देसी गानों पर डांस करने लगे। डांस करते-करते कुछ लोगों ने अपने कपड़े उतार दिए। वीडियो में कुछ नाबालिग लड़के भी डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मामले में जब पन्ना एसपी साइन कृष्णा थोटा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद वीडियो में दिखाई देने वाले सिपाहियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। जिस थाना प्रभारी का जन्मदिन था, वह मौके से जा चुके थे। मामले की जांच एसडीओपी कर रहे हैं। अगर थाना प्रभारी की संलपिता पाई जाती है तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल थानेदार साहब के जन्मदिन की पार्टी के कई वीडियो वायरल हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करते हुए लोग पन्ना पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वीडियो में थाने के अंदर की सजावट भी दिखाई दे रही है। साथ ही थाने के अंदर एक महिला पुलिसकर्मी व्यवस्थाओं को देख रही थी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिस थाना प्रभारी का जन्मदिन था, पन्ना एसपी उस पर क्या कार्रवाई करते हैं।  

रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए ग्वालियर-इंदौर-ग्वालियर स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू

इंदौर  इंदौर। रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए ग्वालियर-इंदौर-ग्वालियर स्पेशल ट्रेन का दोनों दिशाओं में 13-13 फेरे चलाने का निर्णय लिया गया है। ग्वालियर इंदौर स्पेशल ट्रेन (01825) तत्काल प्रभाव से 11 मार्च तक और 16 व 17 मार्च को ग्वालियर से दोपहर एक बजे चलकर रात दो बजे इंदौर रेलवे स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार वापसी में इंदौर-ग्वालियर स्पेशल ट्रेन (01826) तत्काल प्रभाव से 12 मार्च तक और 17 व 18 मार्च को इंदौर शाम सात बजे चलकर अगले दिन सुबह 10.15 बजे ग्वालियर पहुंचेगी। रतलाम मंडल में चलेंगी 4 स्पेशल ट्रेन गर्मी की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों की घोषणा शुरू कर दी है। रतलाम मंडल से होकर चार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसमें इंदौर-पुणे स्पेशल ट्रेन भी शामिल है। यह ट्रेन पांच मार्च से 25 जून तक प्रति बुधवार इंदौर से शुरू होकर अगले दिन पुणे पहुंचेगी। वर्तमान में इंदौर-पुणे के बीच दो ही नियमित ट्रेनें हैं। इस स्पेशल ट्रेन की बुकिंग भी शुरू हो गई है। इंदौर-पुणे के बीच इंदौर-दौंड और लिंगमपल्ली हमसफर ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। इसमें लिंगमपल्ली एक्सप्रेस प्रति शनिवार को रवाना होती है। वेटिंग कम करने चलेंगी स्पेशल ट्रेन वहीं इंदौर-दौंड का संचालन रोज होता है, लेकिन दोनों में हमेशा लंबी वेटिंग रहती है। इसी वेटिंग को कम करने के लिए ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन शुरू की गई है। इंदौर-पुणे-इंदौर स्पेशल (09324) पांच मार्च से 25 जून तक इंदौर से प्रति बुधवार सुबह 11.15 बजे चलेगी। यह देवास 11.50 बजे, उज्जैन 12.40 बजे, नागदा 13.57 बजे व रतलाम 14.35 बजे पहुंचेगी। ट्रेन प्रति गुरुवार रात 3.10 बजे पुणे पहुंचेगी। वापसी में पुणे-इंदौर स्पेशल (09323) छह मार्च से 26 जून तक पुणे से प्रति गुरुवार को सुबह 5.10 बजे चलेगी। ट्रेन रतलाम 8.30 बजे, नागदा 9.10, उज्जैन 10.05, देवास 11 और इंदौर रेलवे स्टेशन पर 11.55 बजे पहुंचेगी।

फरार तहसीलदार को Supreme Court से झटका, कोर्ट ने जमानत के लिए कहा रेगुलर कोर्ट में जाएं, अब तहसीलदार पर गिरफ्तारी का संकट

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रेप मामले मे फरार तहसीलदार को सर्वोच्च न्यायालय से भी कोई राहत नहीं मिली हैं. महिला को शादी का झांसा देकर 17 साल तक उससे  शारीरिक संबंध बनाने के पुलिस मे दर्ज मामले मे  आरोपी तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान को अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. जिला और हाईकोर्ट के ख़ारिज किए जाने के बाद  तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था. ये है मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने तहसीलदार को अग्रिम जमानत के लिए रेगुलर कोर्ट में ही उपस्थित होने के लिए कहा है.सर्वोच्च न्यायालय  से  भी अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद अब आरोपी तहसीलदार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. उधर  दुष्कर्म पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपी को जानबूझकर गिरफ्तार नहीं कर रही है. जिसका फायदा उठाकर भिंड में आरोपी उनके परिजन को परेशान करवा रहा है. एक महिला ने तहसीलदार के खिलाफ शिकायत दी थी कि आरोपी ने उसे शादी का झांसा दिया और अनेक बार शारीरिक संबंध भी बनाए. उसको एक बेटा भी है. आरोपी ने उसे रतनगढ़ मंदिर ले जाकर शादी का नाटक भी किया था. लेकिन अब इंकार करने लगा. तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान के एमपी के भिंड व यूपी के इटावा में दर्ज 16 आपराधिक मामलों से संबंधित डिटेल पुलिस पहले ही हाईकोर्ट में पेश कर चुकी है. रिकॉर्ड पेश होने के बाद जिला कोर्ट और हाईकोर्ट ने तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान की जमानत याचिका  खारिज कर दी थी. इसके  बाद तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दायर की थी.  लेकिन यहां से भी उसे राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने उसे सक्षम जिला न्यायालय मे ही रेगुलर जमानत आवेदन करने को कहा.   तहसीलदार के खिलाफ  साल 2000 से 2011 तक  हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती जैसे 16 गंभीर अपराध दर्ज होना बताए गए हैं.जिसका रिकॉर्ड पीड़िता के वकील और पुलिस कोर्ट में बार-बार पेश कर चुकी है. इस मामले में पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि पुलिस तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान को गिरफ्तार नहीं कर रही है.जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के अधिकारी उसे बचा रहे हैं. जिस कारण पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है और उसे बचने का मौका दिया जा रहा है. पीड़ित महिला ने आरोपी से अपनी जान को खतरा बताया था.  

अयोध्या में राम मंदिर के प्रवेश मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में लावारिस जूते-चप्पलें जुट रहे, नगर निगम ने अब तक 20 ट्रॉलियाँ हटवाई

अयोध्या  राम मंदिर के प्रवेश मार्ग के पास करीब एक माह से रोजाना बड़ी संख्या में लावारिस जूते-चप्पलें जमा हो रहे हैं। नगर निगम अब तक 20 ट्रॉली जूते-चप्पलें यहां से हटवा चुका है। ये लावारिस जूते-चप्पलें अयोध्या व अयोध्या कैंट में बने नगर निगम के रिड्यूज, रिसाइकल, रियूज (RRR) सेंटर पर डंप जा रहे हैं। असल में महाकुंभ शुरू होने के बाद से प्रयागराज पहुंचने वाले श्रदालु स्नान के बाद बालकराम के दर्शन करने के लिए अयोध्या का रुख कर रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के मुताबिक श्रद्धालुओं की अप्रत्‍याशित भीड़ को सुलभ दर्शन हो सकें व अफरातफरी न हो इसके लिए पिछले 30 दिन से व्यवस्था में यह बदलाव किया गया है। मंदिर परिसर का गेट नंबर-3 खोला गया है। बालकराम के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को इसी गेट से बाहर निकाला जा रहा है। दर्शन के बाद श्रद्धालु श्रीराम हास्पिटल के आगे निकलते हैं। रामपथ पर वन-वे ट्रैक होने के कारण श्रद्धालुओ को पुन: 5-6 किमी पैदल चलने के बाद उतारे गए जूता स्‍थल पर आना पड़ता है। इतनी लंबी दूरी के कारण बाहर से आने वाले ज्यादातर लोग जूते-चप्पलें लेने नहीं लौट रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्था में बदलाव दरअसल, अयोध्या में भक्तों की उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थागत बदलाव के चलते राम मंदिर के प्रवेश द्वार के पास करीब एक महीने से रोजाना बड़ी संख्या में लावारिस जूते-चप्पल एकत्र हो रहे हैं। नगर निगम पहले ही वहां से बड़ी संख्या में जूते-चप्पल हटा चुका है। ये जूते-चप्पल तीर्थयात्रियों के हैं, जिन्होंने इन्हें राम पथ पर स्थित मुख्य प्रवेश द्वार गेट संख्या एक पर उतार दिया था। जूते-चप्पल वापस लेने के लिए तय करनी पड़ती है लंबी दूरी शुरुआत में, लगभग आधा किलोमीटर का गोलाकार मार्ग पूरा करने के बाद, तीर्थयात्री उसी द्वार (गेट संख्या एक) से बाहर निकलते थे और अपने जूते-चप्पल लेते थे। हालांकि, बढ़ती भीड़ के कारण, अयोध्या प्रशासन ने गेट संख्या तीन और अतिरिक्त द्वारों के माध्यम से निकास को पुनर्निर्देशित किया। इससे प्रवेश बिंदु से अपने जूते-चप्पल वापस पाने के लिए तीर्थयात्रियों को पांच से छह किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती, जिस कारण वे अपने जूते-चप्पल छोड़ दे रहे हैं और नंगे पैर अपने वाहनों या आवास की ओर जा रहे हैं। महाकुंभ की शुरुआत से ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि महाकुंभ की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। मिश्रा ने कहा, “पिछले 30 दिन से व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भक्तों की अप्रत्याशित भीड़ को बिना किसी अव्यवस्था के आसानी से दर्शन मिल सके।” रोजाना लाखों की संख्या में लावारिस जूते-चप्पल हटा रहा नगर निगम उन्होंने कहा, “मंदिर परिसर का गेट संख्या तीन खोल दिया गया है। दर्शन के बाद भक्तों को इस गेट से बाहर निकाला जा रहा है। इसलिए भक्त श्रीराम सरकारी अस्पताल से आगे बढ़ते हैं। रामपथ पर एक-तरफा मार्ग होने के कारण, भक्तों को जूता उतारने वाले क्षेत्र तक पहुंचने के लिए फिर से पांच-छह किलोमीटर चलना पड़ता है।” निगम के अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम रोजाना लाखों की संख्या में लावारिस जूते-चप्पल हटा रहा है, उन्हें जेसीबी मशीनों का उपयोग करके इकट्ठा कर रहा है और ट्रॉलियों पर लाद रहा है।  

संघ प्रमुख मंगलवार को राजधानी भोपाल में विद्या भारती के एक प्रशिक्षण शिविर का उदेघाटन करेंगे

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) के सरसंघचालक मोहन भागवत चार मार्च को राजधानी भोपाल में विद्या भारती के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करेंगे. दरअसल, इस अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के लगभग 700 कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है. संघ के एक पदाधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में आयोजित किया जाएगा. संघ के इस पदाधिकारी ने बताया कि आठ मार्च को शिविर के समापन सत्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और आरएसएस के विचारक और विद्या भारती के वरिष्ठ सलाहकार सुरेश सोनी भी संबोधित करेंगे. मंत्री विश्वास सारंग करेंगे प्रदर्शनी का उद्घाटन उन्होंने बताया कि उद्घाटन से एक दिन पहले यानी सोमवार 3 मार्च को मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग और अन्य गणमान्य व्यक्ति सोमवार को उसी स्थान पर भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. उन्होंने बताया कि पूरे प्रशिक्षण शिविर के दौरान आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे. संघ के अनुसार, आरएसएस से संबद्ध विद्या भारती, एक गैर-सरकारी शैक्षणिक संगठन है, जो 1952 से देश में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. तब उसने गोरखपुर में अपना पहला स्कूल स्थापित किया था. इस वक्त विद्या भारती देश भर में 22,000 स्कूल चलाती है. इन विद्यालयों में सामूहिक रूप से 1,54,000 शिक्षक और लगभग 36 लाख विद्यार्थी हैं.

नगर सरकार ‘अटल विश्वास पत्र’ में किए गए सभी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर नगर पालिक निगम अंबिकापुर के नवनिर्वाचित महापौर एवं पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह आज अंबिकापुर में पीजी कॉलेज हॉकी स्टेडियम में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति में कलेक्टर विलास भोसकर ने महापौर श्रीमती मंजूषा भगत और पार्षदों को 8-8 के समूह में शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नगर निगम अंबिकापुर का यह शपथ ग्रहण समारोह जनता के विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और नगर के विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।नगर सरकार ‘अटल विश्वास पत्र’ में किए गए सभी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ महापौर और पार्षदों को चुना है, वे उस पर खरा उतरेंगे।  उन्होंने कहा कि अंबिकापुर को स्वच्छ, स्मार्ट और समृद्ध नगर बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शुभकामनाएँ देते हुए नगर के विकास में पारदर्शिता और प्रभावी प्रशासन पर जोर दिया। इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम, सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बस्तर क्षेत्र अब नई संभावनाओं और उपलब्धियों की ओर अग्रसर – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की समृद्ध संस्कृति, शांति और विकास का प्रतीक बन चुका है। इस प्रतिष्ठित मैराथन में देश-विदेश के हजारों धावकों ने भाग लिया और अमन, चैन और खुशहाली का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल क्षेत्रीय खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देता है, बल्कि सामाजिक समरसता और सौहार्द को भी मजबूत करता है। मुख्यमंत्री साय ने इस आयोजन को बस्तर क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति और विकास की नई राह खुली है।इससे पहले, बस्तर ओलंपिक में भी 1 लाख 65 हजार से अधिक प्रतिभागियों की ऐतिहासिक भागीदारी देखी गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बस्तर क्षेत्र अब नई संभावनाओं और उपलब्धियों की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार क्षेत्रीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और यह आयोजन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि खेल और विकास के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन न केवल एक खेल आयोजन है, बल्कि यह बस्तर में शांति और सद्भाव के संदेश को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भव्य बनाया जाएगा ताकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की पहचान बने। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन न केवल खेल के प्रति जागरूकता को बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय युवाओं को खेल के माध्यम से नए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की सकारात्मक छवि को स्थापित करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन में भाग लेने वाले सभी धावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। हजारों धावकों की ऐतिहासिक भागीदारी, विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार नारायणपुर जिले में आयोजित अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2025  में 11 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय धावकों की शानदार प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस मैराथन में उत्तर प्रदेश के अक्षय कुमार ने पुरुष वर्ग में और इथियोपिया की हिवेत जेब्रीवाहिद ने महिला वर्ग में बाजी मारी। पुरुष 21 किमी वर्ग में अक्षय कुमार (उत्तर प्रदेश) ने 01 घंटा 02 मिनट 15 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि महिला 21 किमी वर्ग में इथियोपिया की हिवेत जेब्रीवाहिद ने 01 घंटा 13 मिनट 01 सेकंड में दौड़ पूरी कर जीत दर्ज की। 10 किमी और 5 किमी वर्ग में भी रोमांचक प्रतिस्पर्धा रही, जहां उत्तर प्रदेश की अमृता पटेल और सूरजपुर की सोनिका राजवाड़े ने क्रमशः 10 किमी और 5 किमी महिला वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया। पुरुष 10 किमी वर्ग में उत्तर प्रदेश के मोनू कुमार और 5 किमी वर्ग में स्थानीय धावकों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार और सम्मान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त विजेताओं को 1.5 लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त विजेताओं को 1 लाख रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को 75 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वालों को भी पुरस्कार दिया गया। स्थानीय प्रतिभाओं को भी 5-5 हजार रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। मैराथन का शुभारंभ संसदीय कार्य, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप और धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने किया। कार्यक्रम में बस्तर आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई, वरिष्ठ अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं हजारों दर्शक उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री ने किया गौवंश वन्य विहार में प्रशासनिक भवन का लोकार्पण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार, गौ सेवा का आदर्श स्थल बनेगा। गौवंश वन्य विहार में अधोसंरचना व विकास के अधिकतर कार्य पूर्णता की ओर हैं। गौवंश वन्य विहार में संरक्षित गौवंश के गोबर व मूत्र से बनने वाले उत्पादों का विक्रय कर इसे पूर्णत: आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। शुक्ल ने एक करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए प्रशासनिक भवन गौ कार्यालय का लोकार्पण किया। गौ-कार्यालय के नव निर्मित हॉल में समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने गौवंश वन्य विहार में शेष कार्यों की विभागवार जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि गौवंश वन्य विहार में जल की निर्बाध आपूर्ति होती रहे इसलिए आवश्यक है कि भूजल स्तर कम न हो। उन्होंने गौवंश वन्य विहार से लगे तालाब को नदी से भरने के निर्देश दिए। द्वितीय चरण के तहत नाला में रपटा कम स्टॉप डैम, चेकडैम तथा शेष बाउन्ड्रीवाल के निर्माण कार्य को स्वीकृत कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश बैठक में दिए गए। उन्होंने कहा कि निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। आगामी समय में सब स्टेशन का भी निर्माण कार्य कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने बैठक में गौवंश वन्य विहार में गौ सेवा के लिए प्रोटोकाल बनाकर कार्य किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संरक्षित गौवंश का डाटा शीट में पूर्ण विवरण दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि गोबर व गौमूत्र से बनने वाले उत्पादों का विक्रय कर गौवंश वन्य विहार को पूर्णत: आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। गोबर से बनने वाली खाद का विक्रय किया जाएगा। किसानों को गौशाला से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता से होगा ताकि वह यहाँ से जरूरत के अनुसार खाद क्रय कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बॉयो गैस प्लांट को शीघ्र प्रारंभ किया जाए तथा मृत पशुओं के निष्पादन की यूनिट लगाने का काम शीघ्र प्रारंभ कराएं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का आदर्श संचालन सुनिश्चित कराते हुए गौ सेवा के साथ ही इसे पूर्णत: आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने गौवंश वन्य विहार में निर्मित रेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम किया तथा प्रात:काल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए गौवंश को चारा एवं गुड़ खिलाया। बैठक में अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती नीता कोल, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, सीसीएफ राजेश राय, अमित अभयरामदास महाराज, समाजसेवी राजेश पाण्डेय, सहित अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट :अपशिष्ट के दहन की लगातार की जा रही है मॉनिटरिंग

पीथमपुर उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 2802/2004 (आलोक प्रताप सिंह विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य) में विगत 18 फरवरी 2025 को पारित आदेशानुसार यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का प्रथम ट्रायल रन  27 फरवरी 2025 से मेसर्स पीथमपुर इंडस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट प्रा.लि. पीथमपुर, जिला धार द्वारा संचालित इंसीनरेटर में किया जा रहा है। संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि आज 02 मार्च,2025 को शाम 05 बजे तक 6750 किलोग्राम अपशिष्ट का दहन किया जा चुका है। अपशिष्ट के साथ लगभग 6750 किलोग्राम लाईम भी मिलाकर दहन किया गया है। फ्लू गैसेस की सफाई हेतु लगभग 7500 किलोग्राम लाईम, 3750 किलोग्राम एक्टीवेटेड कार्बन तथा 50 किलोग्राम सल्फर का उपयोग किया गया। अपशिष्ट को जलाने हेतु लगभग 33 हजार लीटर डीजल की खपत हो चुकी है। अपशिष्ट के दहन के दौरान चिमनी से हो रहे इमीशन की लगातार मॉनिटरींग केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लगभग 20 अधिकारी / कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। साथ ही इमीशन के लगातार मॉनिटरींग के लिये ऑनलाईन कन्टीन्युअस इमीशन मॉनिटरींग सिस्टम (OCEMS) भी संचालित है। चिमनी से उत्सर्जन निर्धारित मानक सीमा के भीतर पाये जा रहे है। संभागायुक्त सिंह ने बताया कि पर्टीक्यूरेट मेटर का उत्सर्जन 9.6 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, जिसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। इसी तरह सल्फर डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 70 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 200 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। नाईट्रोजन ऑक्साईड्स का उत्सर्जन 116 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 400 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। कार्बन मोनो ऑक्साईड का उत्सर्जन 18 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 100 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। इसी प्रकार कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 6.54 प्रतिशत हो रहा है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 7 प्रतिशत है। हाईड्रोजन क्लोराईड का उत्सर्जन 3.86 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी अधिकतम मानक सीमा 50 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है। हाईड्रोजन फ्लोराईड का उत्सर्जन 1.85 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 4 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है तथा टोटल आर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन 2 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है, इसकी निर्धारित अधिकतम मानक सीमा 20 मिलीग्राम/सामान्य घनमीटर है।  

नक्सलियों संगठनों के पास सिर्फ 14 नक्सली कमांडर बचे, नक्सलवाद मुक्त करने का लक्ष्य हो रहा पूरा : आईजी पी सुंदरराज

रायपुर छत्तीसगढ़ में माओवादियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। मार्च 2026 तक को नक्सलवाद मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। माओवादियों के खात्मे के लिए केंद्र सरकार टारगेट के 365 दिन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। बस्तर के आईजी पी सुंदरराज के अनुसार, नक्सलियों संगठनों के पास सिर्फ 12 से 14 नक्सली कमांडर बचे हैं। बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। जिस कारण से नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं। आईजी पी सुंदरराज ने बताया- “जनवरी 2024 से अब तक 300 से ज़्यादा माओवादी मारे जा चुके हैं, ऐसे में बस्तर संभाग में बमुश्किल 400 हथियारबंद कैडर बचे हैं। उन्होंने कहा कि माओवादियों की सेंट्रल कमेटी भी काफी कमजोर हो गई है और उसके पास सिर्फ 12-14 एक्टिव कमांडर बचे हैं। ये संख्याएं सुरक्षा एजेंसियों को भरोसा दिलाती हैं कि वे मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को पूरा करने में सक्षम होंगी।” केवल 1200 नक्सलवादी बचे आईजी ने कहा कि बस्तर संभाग में अब केवल 1,200 माओवादी बचे हैं। उनके लिए हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ का दरवाज़ा खुला है। 2021 से अब तक 385 नक्सलियों के मारे जाने के बाद, बस्तर में लगभग 400 नियमित सशस्त्र कैडर बचे हैं। बाकी 700-800 मिलिशिया पुरुष हैं जो सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करते हैं, वे चेतना नाट्य मंच और दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ जैसे सांस्कृतिक विंग के सदस्य हैं। सेंट्रल कमेटी भी सिकुड़ रही है। हमारी मुख्य चिंता- वर्दीधारी लोग हैं, जो ज़्यादातर PLGA संरचनाओं और बटालियन 1 के वरिष्ठ स्तर के कैडर हैं। हिडमा करता है नेतृत्व बटालियन 1 का नेतृत्व खूंखार माओवादी कमांडर हिडमा कर रहा है। जिसका गृह क्षेत्र अब सुरक्षा बलों के कब्जे में है। हिडमा के गांव में पुलिस कैंप की स्थापना की गई है। वहीं, सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हो रही हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले चार सालों में कई सेंट्रल कमेटी के सदस्य उम्र संबंधी बीमारियों के कारण मर चुके हैं या गिरफ़्तार किए गए हैं। जो बचे हैं वे भी नक्सलियों के खात्मे के साथ अपने आप खत्म हो जाएंगे। सुंदरराज ने कहा कि मिलिशिया के सदस्य अक्सर पीएलजीए के कट्टर कार्यकर्ताओं की तरह ही खतरनाक साबित होते हैं, लेकिन ध्यान उन्हें मुख्यधारा में लाने पर है, क्योंकि वे ‘जिसका दम उसके हम’ वाक्यांश को समझते हैं। आईजी ने कहा, “उन्हें एहसास है कि उन्हें एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एक बार जब वे बाड़ के इस तरफ आ जाते हैं, तो वे केवल विकास और सुविधाएँ चाहते हैं। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये संख्याएं केवल एक धारणा है और नक्सलियों की सटीक संख्या बताना संभव नहीं है। “निश्चित रूप से, माओवादियों को हाल ही में भारी नुकसान हुआ है और वे कगार पर पहुंच गए हैं। उनकी आक्रामकता लगभग समाप्त हो गई है, फिर भी आगे एक लंबी लड़ाई है।” प्रभुत्व का क्षेत्र कम हुआ पी सुंदरराज ने कहा- अगर अगले साल नक्सलवाद वास्तव में खत्म हो जाता है, तो कोई भी गारंटी नहीं दे सकता है कि 31 मार्च, 2026 के बाद कोई हिंसा नहीं होगी, लेकिन नक्सलियों को खत्म करने के पूरे अभियान का फोकस एक बिंदु एजेंडे पर आधारित नहीं है। उनके प्रभुत्व का क्षेत्र कम हो गया है, उनकी ताकत पहले जैसी नहीं रही, सुरक्षा शिविर लोगों की चाहत के मुताबिक विकास ला रहे हैं, इसलिए हमें वांछित लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद है।”

2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत का दावा ‘मजबूत’ है: आईओसी के अध्यक्ष पद के दावेदार सेबेस्टियन

नई दिल्ली भारत ने आईओसी के भावी मेजबान आयोग को 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए पहले ही आशय पत्र सौंप दिया है जो वैश्विक खेल की शीर्ष संस्था के साथ महीनों की अनौपचारिक बातचीत के बाद एक महत्वाकांक्षी योजना में पहला ठोस कदम है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष पद के दावेदार सेबेस्टियन को का मानना है कि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत का दावा ‘मजबूत’ है लेकिन कई अन्य देशों के इस दौड़ में शामिल होने से प्रतिस्पर्धा कठिन होगी। भारत ने आईओसी के भावी मेजबान आयोग को 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए पहले ही आशय पत्र सौंप दिया है जो वैश्विक खेल की शीर्ष संस्था के साथ महीनों की अनौपचारिक बातचीत के बाद एक महत्वाकांक्षी योजना में पहला ठोस कदम है। को ने ‘पीटीआई’ से विशेष साक्षात्कार में कहा, मेरी पृष्ठभूमि को देखते हुए मेरे यह कहने से आपको हैरानी नहीं होगी कि मैं बहुत खुश हूं कि भारत वैश्विक खेल और विशेष रूप से ओलंपिक आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध है। मुझे यह सुनकर बहुत खुशी हुई। पर यह बहुत प्रतिस्पर्धी होगा। क्योंकि इसमें सिर्फ एक ही बोलीदाता नहीं होगा, लेकिन भारत इसे बहुत मजबूत दावा बना सकता है। पोलैंड, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, कतर, हंगरी, तुर्कीये, मैक्सिको और मिस्र उन अन्य देशों में शामिल हैं जिन्होंने 2036 ओलंपिक की मेजबानी की इच्छा व्यक्त की है। 2036 खेलों के मेजबान देश का 2026 से पहले पता नहीं चलेगा।लेकिन यह निश्चित है कि नए आईओसी प्रमुख के 20 मार्च के चुनाव के विजेता की अध्यक्षता के दौरान मेजबान का चयन किया जाएगा। आईओसी अध्यक्ष के रूप में चुनाव लड़ने वाले सात उम्मीदवारों में उन्हें सबसे आगे माना जा रहा है। 68 वर्षीय को दो बार ओलंपिक 1500 मीटर के स्वर्ण पदक विजेता हैं। उन्होंने भारत को सलाह देते हुए कहा कि अगर उसे 2036 ओलंपिक की मेजबानी का अधिकार नहीं मिलता है तो उसे ओलंपिक आयोजित करने की अपनी महत्वाकांक्षा को खत्म नहीं करना चाहिए। को ने कहा, बहुत से शहरों ने बोली लगाई और लेकिन उनकी बोली स्वीकार नहीं हुई। दिलचस्प बात यह है कि जब लंदन ने 2005 में (2012 चरण के लिए) बोली हासिल की थी, तो उसने पेरिस को हराया था। हम सभी अभी पेरिस ओलंपिक खेलों (2024) में गए थे। रियो उन शहरों में से एक था जो 2012 की बोली के लिए शुरुआती मूल्यांकन से आगे नहीं बढ़ पाया था। और ब्रिटेन के तुरंत बाद उनके पास 2016 में बोली थी। इसलिये यह किसी भी तरह से कहानी का अंत नहीं है। और बोली लगाने से मिली विरासत भी एक बहुत मजबूत विरासत है।  

रेस्क्यू अभियान पूरा, आठ हुई मृतकों की संख्या, लापता सभी चार श्रमिकों के शव रेस्क्यू टीम ने बरामद कर लिए

ज्योतिर्मठ (चमोली) चीन सीमा पर माणा के पास शुक्रवार को हिमस्खलन की चपेट में आए सभी लोगों को ढूंढ लिया गया है, जिसमें से 46 सुरक्षित हैं, जबकि आठ की मौत हो गई। रविवार को लापता सभी चार श्रमिकों के शव रेस्क्यू टीम ने बरामद कर लिए हैं। जबकि चार श्रमिकों के शव शनिवार को बरामद हो गए थे। वहीं, रविवार को एक अन्य घायल को एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर कर दिया गया है, जबकि एक घायल श्रमिक शनिवार को रेफर किया गया था। इसके साथ ही तीन दिनों से चला आ रहा रेस्क्यू अभियान भी समाप्त हो गया। बता दें कि माणा के पास शुक्रवार तड़के भारी हिमस्खलन हुआ था, जिसके चपेट में बीआरओ के 54 श्रमिक आ गए थे। आईटीबीपी और सेना के जवानों ने शुक्रवार सुबह रेस्क्यू अभियान शुरू किया। पहले दिन 33 श्रमिकों को सुरक्षित निकाला गया था। शनिवार को रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ भी शामिल हुई। शनिवार तक रेस्क्यू टीमों ने 46 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया था, जबकि चार श्रमिकों के शव बरामद हुए थे। उसके बाद लापता चल रहे चार अन्य श्रमिकों की खोजबीन के लिए रविवार को फिर तीनों रेस्क्यू टीमों ने सर्च अभियान चलाया। दोपहर करीब एक बजे पहले एक शव बरामद हुआ। उसके बाद दो अन्य श्रमिकों के शव भी बरामद हुए। अंतिम लापता व्यक्ति का शव दोपहर करीब चार बजे बरामद कर लिया गया। जिसके बाद हादसे में मृतकों की संख्या आठ हो गई। अंतिम व्यक्ति का शव मिलने के साथ ही रेस्क्यू अभियान भी समाप्त कर दिया गया। ज्योतिर्मठ सेना अस्पताल में भर्ती हैं घायल माणा से सभी श्रमिकों को हेलीकॉप्टर से ज्योतिर्मठ स्थिति सेना के अस्पताल में लाया गया है। सबसे बाद में मिले शव को भी लाने का प्रयास किया जा रहा है। स रेस्क्यू अभियान में सेना के सात और एक निजी हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। जिनसे श्रमिकों को माणा से ज्योतिर्मठ लाया गया। दो श्रमिक एम्स ऋषिकेश भेजे गए। अन्य का आर्मी अस्पताल ज्योतिर्मठ में उपचार चल रहा है।

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