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श्रद्धा वालकर मर्डर केस के दो साल… पिता को अंतिम संस्कार का है इंतजार

नई दिल्ली आपको श्रद्धा बाल्कर हत्याकांड तो याद होगा। किस तरह से एक लड़की को प्यार के जाल में फंसाया गया और फिर कर दी गई निर्मम हत्या। इस हत्याकांड के बाद दिल्ली में मानों हड़कंप सा मच गया। लेकिन श्रद्धा के पिता को आज भी बेटी के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। उनका आज भा यही सवाल है कि आखिर कब मिलेगा मेरी बेटी को इंसाफ…. इसी पूरे मामले में आज हम आपको इस खबर का पूरा विशलेषण करने जा रहे हैं। छोटे से बाक्स में बंद है श्रद्धा का शव दिल्ली में एक पुलिस थाने के मालखाने में एक छोटा सा बक्सा रखा है, जिसमें बंद है श्रद्धा वॉल्कर। जिसे आज भी अपने अंतिम संस्कार का इंतजार है। ये वही श्रद्धा वॉल्कर है, जिसे उसके प्रेमी ने मौत की नींद सुला दिया था और लाश के टुकड़ों को कई दिनों तक फ्रीज में बंद रखा था। दो साल पूरे होने को हैं इस मुकदमें को शुरू हुए करीब दो साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन अब भी इस केस हर दिन सुनवाई का इंतजार था। अब जाकर अदालत ने फैसला किया है कि मार्च के महीने से अब हर दिन इस केस की सुनवाई होगी। हालांकि इस केस में अभी तक बहुत सी कार्रवाई अधूरी है। महरौली थाने का है पूरा मामला महरौली थाने से लगभग 4 किलोमीटर दूरी पर मौजूद है साकेत कोर्ट। 1 जून 2023 यानी लगभग पिछले पौने दो साल से इसी कोर्ट में श्रद्धा केस की सुनवाई लंबित है। इस सुनवाई के दौरान ऐसा कई बार हुआ जब एक छोटे से बक्से में बंद श्रद्धा को महरौली थाने के मालखाने से निकाल कर कोर्ट में पेश किया गया। यह कहना है पिता का श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर को नवंबर 2022 में पहली बार पता चला था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी बेटी श्रद्धा के इसी दोस्त यानी आफताब पूनावाला ने श्रद्धा का कत्ल करने के बाद लाश के टुकड़ों को महरौली के जंगलों में किस्तों में ठिकाने लगा दिया था। लगभग सवा दो साल से विकास वॉल्कर को पता है कि उनकी बेटी श्रद्धा अब इस दुनिया में नहीं है। श्रद्धा के नाम पर कुछ है तो छोटे से बक्से में बंद उसकी चंद हड्डियां। मगर इस बदकिस्मत बाप की बदनसीबी देखिए कि श्रद्धा तो छोड़िए उसकी लाश के बचे खुचे टुकड़े तक उन्हें अंतिम संस्कार के लिए नहीं सौंपे गए। दो साल काट रहे हैं कोर्ट के चक्कर बीते पौने दो साल से जब जब विकास वॉल्कर साकेत कोर्ट में हाजिर होते हैं, तो बस कभी कभार कोर्ट रूम के अंदर ही उन्हें बक्से में बंद श्रद्धा नजर आ जाती है। न जाने ये कैसा मजाक है जो कानून के नाम पर एक बेबस बाप के साथ किया जा रहा है। जिस बाप की जवान बेटी को पहले ही उससे छीन लिया गया हो, जिसके कत्ल और कत्ल के तरीके की कहानी को सुन कर श्रद्धा को न जानने वाले भी गमजदा हो जाते हों, उसी श्रद्धा के अंतिम संस्कार के लिए पिछले सवा दो साल से उसके बाप को इंतजार कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश का नया केंद्र बन रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल सूचना प्रौद्योगिकी अब केवल एक सेक्टर नहीं, बल्कि हर उद्योग की आधारभूत आवश्यकता बन चुका है। स्वास्थ्य से लेकर कृषि, शिक्षा, उद्योग सहित हर क्षेत्र में आईटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश इस बदलाव का केंद्र बन रहा है, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्ट-अप्स और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी मिलकर नए अवसरों को जन्म दे रहे हैं। राज्य सरकार की आईटी और ईएसडीएम नीति, डेटा सेंटर पार्क, आईटी पार्क्स और इनक्यूबेटर्स के विकास ने मध्यप्रदेश को तकनीकी निवेश के लिए आकर्षक स्थान बनाया है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आईटी कंपनियों के नए केंद्र बन रहे हैं। टीसीएस, इनफोसिस, यश टेक्नॉलोजीज, इंपीट्स जैसी कंपनियाँ यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 24-25 फरवरी को भोपाल में होने वाली जीआईएस में आईटी, आईटीइएस और ईर्एसडीएम सेक्टर की बड़ी कम्पनियां शामिल होंगी। जिससे मध्यप्रदेश इस सेक्टर में भी नई ऊँचाईयों को प्राप्त करेगा। डिजिटल इंडिया मिशन के साथ कदम मिलाकर मध्यप्रदेश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, ब्लॉक-चेन और साइबर सिक्योरिटी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। आज आईटी सेक्टर ही नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और एग्रीटेक सेक्टर में भी तकनीकी नवाचार हो रहे हैं। राज्य में 15 आईटी पार्क और 5 आईटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन पहले से कार्यरत हैं और आने वाले वर्षों में इंदौर में क्रिस्टल आईटी पार्क-3 और 4, 50 एकड़ में डेटा सेंटर पार्क, जबलपुर में 1 लाख वर्गफुट का आईटी टॉवर और कई अन्य परियोजनाएँ डिजिटल विकास को नई गति देंगी। मध्यप्रदेश केवल आईटी निवेश के लिए नहीं, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस, किफायती ऑपरेशनल लागत और सरकारी सहयोग के कारण भी स्टार्ट-अप्स और आईटी कंपनियों के लिए एक आदर्श स्थान बन रहा है। मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक स्थान, निवेश-अनुकूल नीतियों और अत्याधुनिक अवसंरचना के कारण तेजी से आईटी, आईटीईएस (इन्फोर्मेशन टेक्नॉलोजी इनेबल्ड सर्विसेज) और ईएसडीएम (इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग) के लिए एक प्रमुख हब बन रहा है। भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2025) में इस क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे पूरे देश के बाजारों तक सीधा और सुगम संपर्क प्रदान करती है। राज्य में 6 प्रमुख हवाई अड्डे और 6 इनलैंड कंटेनर डिपो मौजूद हैं, जिससे वैश्विक व्यापार को गति मिलती है। प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और समर्पित फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ा यह राज्य लॉजिस्टिक्स और परिवहन के लिए भी अनुकूल है। वर्तमान में 1 मिलियन वर्गफुट आईटी स्पेस उपलब्ध है, और 5 लाख वर्गफुट का नया आईटी अवसंरचना निर्माण कार्य जारी है। राज्य में डेटा सेंटर पार्क (50 एकड़) विकसित किया जा रहा है, जिससे एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डेटा केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इंदौर में क्रिस्टल आईटी पार्क 3 और 4 विकसित किए जा रहे हैं, जिससे नई आईटी कंपनियों के लिए बेहतरीन अवसर खुलेंगे। एलटीआई माइंड ट्री इंदौर में ₹800 करोड़ रूपये का निवेश कर रहा है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए उभरती तकनीकों का एक केंद्र स्थापित कर रहा है। राज्य की आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति 2023 निवेशकों को विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएँ प्रदान करती है। आईटी और आईटीईएस कंपनियों को ₹30 करोड़ रूपये तक की पूंजीगत सहायता, ईएसडीएम सेक्टर के लिए ₹150 करोड़ रूपये तक की प्रोत्साहन राशि और डेटा सेंटर निवेशकों को 125 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध है। भूमि शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है, जबकि स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह से माफ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा ₹10 करोड़ तक की मार्केटिंग सहायता और ₹15 करोड़ तक की रोजगार सहायता प्रदान की जा रही है। छोटे एवं मध्यम उद्यमों को विशेष अनुदान और टैक्स छूट के अतिरिक्त बिजली शुल्क प्रतिपूर्ति ₹2 प्रति यूनिट तक और 100 प्रतिशत बिजली शुल्क की छूट दी जा रही है। भोपाल तेजी से आईटी और ईएसडीएम के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और कई स्टार्ट-अप्स इनक्यूबेटर्स उपलब्ध हैं। रोजगार के बेहतरीन अवसर, जीवन की उच्च गुणवत्ता और निम्न लागत पर व्यवसाय संचालन की सुविधा इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है। जबलपुर, जो अपनी डिफेंस पीएसयू कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, तकनीकी निवेश के लिए एक उभरता हुआ केंद्र है। यहाँ 60 एकड़ का आईटी पार्क और 40 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर मौजूद है। इसके अतिरिक्त 1 लाख वर्गफुट का नया आईटी टॉवर भी विकसित किया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को और बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश न केवल अपनी रणनीतिक अवस्थिति, निवेश-अनुकूल नीतियों और तकनीकी अवसंरचना के कारण, बल्कि अपने स्थिर प्रशासन, कुशल मानव संसाधन और सशक्त डिजिटल इको-सिस्टम के कारण भी आईटी और ईएसडीएम उद्योगों के लिए भारत में सबसे आकर्षक निवेश स्थानों में से एक बनता जा रहा है। भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाले जीआईएस-2025 में आईटी और टेक्नोलॉजी निवेशकों को प्रदेश की व्यापक संभावनाओं से परिचित होने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।

महाकुंभ में स्नानर्थियों की कुल संख्या 40 करोड़ के करीब पहुंच गई, सरकार अनुमानित संख्या के करीब पहुंची

महाकुंभ, प्रयागराज महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. कल शाम 4 बजे तक 63.12 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया. संगम में 63.12 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. अब स्नानर्थियों की कुल संख्या 40 करोड़ के करीब पहुंच गई है. इसके साथ ही सरकार का अनुमानित आंकड़ा वास्तविकता की ओर बढ़ रहा है. वहीं महाकुंभ में 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कल्पवास किया है. 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान महाकुंभ में इस बार 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र संगम में स्नान करने का अनुमान है. हर 12 साल बाद लगने वाले इस कुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं. इसी वजह से इसे महाकुंभ कहा जा रहा है और इसमें आने वाला श्रद्धालुओं की संख्या पहले के किसी भी कुंभ से ज्यादा है. ऐसे में कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए यूपी सरकार ने हाईटेक उपकरणों का सहारा लिया है और इस बार AI बेस्ड कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है. अब तक कौन-कौन कर चुका है स्नान महाकुंभ में अब तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अखिलेश यादव, रवि किशन, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में स्नान कर चुकी हैं. वहीं बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी त्रिवेणी संगम में स्नान किया है.

कौन से कानून के तहत सीएम के कार्यक्रम में निगमायुक्त डीजल भरवाए? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सवाल

जबलपुर  मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री का सम्मान कार्यक्रम जबलपुर में रखा गया था, जिसमें बसों के डीजल का मामला कोर्ट पहुंच गया है. दरअसल, सीएम के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित की गई बसों में भरे गए डीजल का अबतक भुगतान नहीं किया गया है, जिसके बाद एक पेट्रोल पंप संचालक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. सीएम के कार्यक्रम के लिए 6 लाख का डीजल दरअसल, जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप के संचालक सुगम चंद्र जैन ने ये याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया था कि 3 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन जबलपुर में किया गया था. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम के खाद्य अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से आकर निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा था कि निगमायुक्त ने उक्त निर्देश दिए थे. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रु का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था. बिल भुगतान कराने के लिए की कई बार की मांग अगस्त 2024 में याचिकाकर्ता ने बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया. इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान के संबंध में आदेश जारी किए गए थे, पर भुगतान नहीं हुआ. एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की ओर से पीओएल जारी किया गया था या नहीं? याचिकाकर्ता ने इसपर जवाब दिया कि सिर्फ मौखिक आदेश जारी किए गए थे. बिना पीओल कैसे भर दिया बसों में डीजल? एकलपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी प्राधिकरण के याचिकाकर्ता ने बसों में कैसे डीजल भरा? इसके साथ ही कोर्ट ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से एसोसिएशन व उसके सदस्य को पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कलेक्टर से मांगा जवाब कोर्ट ने इसके अलावा कलेक्टर से जवाब मांगा है कि किस कानून में यह लिखा है कि निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री की रैली में लगी बसों में डीजल भरवाए? एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का मामला प्रतीत हो रहा है. इस संबंध में एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को हलफनामे में जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं. एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की. पेट्रोल पंप से भरवाया गया छह लाख का डीजल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आइएसबीटी बस स्टैंड के समीप याचिकाकर्ता का पेट्रोल पंप है। मुख्यमंत्री के सम्मान में तीन जनवरी, 2024 को जबलपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम आयुक्त ने खाद्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से भेजा था। अधिग्रहित बसों में लगभग छह लाख रुपये का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था। डीजल का भुगतान न होने के कारण उन्होंने निगमायुक्त से संपर्क किया। निगमायुक्त द्वारा बताया गया कि संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी के कार्यालय की ओर से बसों में डीजल भरवाने कहा गया था। याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं याचिकाकर्ता ने अगस्त, 2024 को बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान करने के संबंध में लिखित निर्देश दिए गए थे। शपथ पत्र के जरिए जवाब प्रस्तुत करें संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त ने पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने का निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस संबंध में जिला कलेक्टर शपथ पत्र के जरिए जवाब प्रस्तुत करें। इसके अलावा यह भी बताएं कि किस कानून में निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लगी बसों में डीजल भरवाए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा।

सीयूईटी पीजी परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आगामी 08 फरवरी को खत्म होने वाली है, जल्द भरें सीयूईटी परीक्षा फॉर्म

नई दिल्ली सीयूईटी पीजी परीक्षा के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अहम सूचना है। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आगामी 08 फरवरी, 2025 को खत्म होने वाली है। चूंकि रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट समाप्त होने में अब सिर्फ एक दिन का ही समय बचा है, इसलिए परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे बिना देरी करे फटाफट एप्लीकेशन फॉर्म भर दें। अंतिम तिथि बीतने के बाद कोई आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। अप्लाई करने के लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट https://exams.ntaonline.in/CUET-PG/ पर जाकर आवेदन करना होगा। परीक्षार्थी चाहें तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके भी आवेदन कर सकते हैं। सबसे पहले कैंडिडेट्स को आधिकारिक वेबसाइट, Exams.nta.ac.in/CUET-PG पर जाना होगा। अब, होमपेज पर, CUET PG 2025 लिंक पर क्लिक करें। यहां, ‘नया पंजीकरण’ चुनें। सटीक व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी के साथ आवेदन पत्र पूरा करें। लेटेस्ट पासपोर्ट आकार की तस्वीर और हस्ताक्षर सहित आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करें। फॉर्म जमा करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रति सहेज कर रख लें। इस तारीख तक कर पाएंगे करेक्शन कैंडिडेट्स ध्यान दें कि परीक्षा के लिए फीस जमा करने की अंतिम तिथि 09 फरवरी, 2025 है। आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद कैंडिडेट्स को दो दिनों के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में करेक्शन का मौका दिया जाएगा। इसके तहत, अभ्यर्थियों को 10 से 12 फरवरी,2025 तक अपने आवेदन पत्र में सुधार करने का अवसर दिया जाएगा। इस दौरान कैंडिडेट्स, निर्धारित सेक्शन में बदलाव कर सकते हैं। जनवरी से शुरू हुई थी आवेदन की प्रक्रिया सीयूईटी पीजी परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया 02 जनवरी, 2025 को शुरू हुई थी। परीक्षार्थियों को 1 फरवरी, 2025 तक अप्लाई करने का मौका दिया गया था। हाल ही में एनटीए ने अंतिम तिथि में विस्तार करने की घोषणा की थी। इसके बाद, आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाकर 08 फरवरी 2025 कर दिया गया था। हालांकि, अब यह तिथि भी जल्द समाप्त होने वाली है। परीक्षा का आयोजन मार्च में 13 से 31 के बीच आयोजित की जाएगी।  परीक्षा के सफल संचालन के बाद आंसर-की रिलीज की जाएगी। यह भी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी हाेगी।

मुख्यमंत्री योगी 3 दिवसीय उत्तराखंड दौरे के चलते कल भतीजी की शादी में होंगे शामिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर जाएंगे। वह अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए पौड़ी जिले के अपने पैतृक गांव पंचूर जा रहे हैं। शादी समारोह में भाग लेने के बाद वह अपने गांव के पास आयोजित कुछ स्थानीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम 5 बजे पंचूर पहुंचने की उम्मीद है, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगे। 6 फरवरी को यमकेश्वर ब्लॉक के बनास तल्ला गांव का दौरा करेंगे CM योगी मिली जानकारी के मुताबिक, 6 फरवरी को वह यमकेश्वर ब्लॉक के बनास तल्ला गांव का दौरा करेंगे। जहां वह यमकेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करेंगे, और इसके बाद पौड़ी जिले के विथ्याणी गांव स्थित गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय में आयोजित किसान मेले में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाविद्यालय में 100 फीट ऊंचे तिरंगे का उद्घाटन भी करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 8 फरवरी की शाम लखनऊ लौटने का कार्यक्रम है। 2022 में उन्होंने अपनी मां से आशीर्वाद लिया था, लेकिन कोविड महामारी के कारण वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। 5 जून 1972 को पौड़ी के पंचूर गांव में हुआ था सीएम योगी का जन्म योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को पौड़ी के पंचूर गांव में हुआ था। उनका असली नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चामकोटखाल के स्कूल से प्राप्त की थी और फिर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक की डिग्री पूरी की। योगी आदित्यनाथ ने 1990 के दशक में अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने के बाद संन्यास ले लिया था और गोरखपुर स्थित गुरु गोरक्षनाथ मठ में निवास करने लगे। CM के 7 भाई-बहन हैं, जिनमें 3 बहनें और 4 भाई शामिल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 7 भाई-बहन हैं। उनकी तीन बहनें और चार भाई हैं। उनके बड़े भाई मानवेंद्र मोहन सरकारी कॉलेज में नौकरी करते हैं, जबकि शैलेंद्र मोहन भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं और महेंद्र मोहन एक स्कूल में कार्यरत हैं। यह दौरा योगी आदित्यनाथ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपने पैतृक गांव में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के बाद परिवार और राज्य के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

सिवनी कॉन्फ्रेंस में 25 राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होंगे

भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त  मनोज श्रीवास्तव ने बताया हैकि विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों की 31वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस पेंच जिला सिवनी में एक से 4 मार्च तक आयोजित की जायेगी। इस कॉन्फ्रेंस में लगभग 25 राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होंगे। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव ने बताया है कि कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त स्थनीय निकायों के निर्वाचन के दौरान आयीं चुनौतियों तथा उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा करेंगे। साथ ही नवाचारों और सुधारों से भी अवगत करायेंगे। इस दौरान स्थानीय निकायों के निर्वाचन में नई तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा होगी।  

जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया

जबलपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा जबलपुर परियोजना इकाई के अतंर्गत 7 नगरीय निकायों में जल प्रदाय योजना का काम पूरा कर लिया गया है। यह कंपनी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्य कर रही है। एशियन डेवपलमेंट बैंक की सहायता से नर्मदा पेयजल योजना तैयार की गई है। इस योजना को नर्मदा पेयजल योजना भेड़ाघाट के नाम से जाना जा रहा है। इस पेयजल योजना से जिन निकायों को पेयजल उपलब्ध हो रहा है, उनमें भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले का तेंदूखेड़ा शामिल हैं। जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया गया है। वहीं जल शोधन के लिए 31 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। सभी 7 निकायों में जल संग्रहण के लिए कुल 13 उच्च स्तरीय टंकियों का निर्माण किया गया है। हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचे, इसके लिए 159 किलोमीटर की मुख्य पाईप लाईन और 328 किलोमीटर की वितरण पाईप लाईन बिछाई गई है। भेड़ाघाट जल प्रदाय योजना से 7 नगरों में 32 हजार से अधिक घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इन नगरों की 1 लाख 62 हजार की आबादी लाभन्वित हो रही है। योजना की विशेष बात यह है कि आगामी 30 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर योजना डिजाइन की गई है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ योजना की लागत लगभग 257 करोड़ रूपये है। पहले इन निकायों में जल प्रदाय की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी। महिला हो या बच्चे पानी लेने के लिए घर से दूर जाकर कठिन कार्य करते थे। पूर्व में इन नगरों में हैंडपंप के आस-पास लंबी कतारें होती थीं और जनसामान्य तकलीफों का सामना करता था। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की कोशिशों से शोधन उपरांत शुद्ध पानी घर घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। शोधित पानी होने के कारण जल से होने वाली बीमारियों से भी जनसामान्य को छुटकारा मिला है।

महाकाल के दर पर पहुंचकर शिवराज सिंह ने परिवार संग लगाई हाजिरी, भोलेनाथ को कुणाल की शादी का दिया निमंत्रण

उज्जैन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचे। जहां उन्होंने परिवार संग महाकालेश्वर मंदिर में हाजिरी लगाई। शिवराज सिंह ने भोलेनाथ को छोटे बेटे कुणाल की शादी का निमंत्रण दिया। गर्भगृह में की पूजा अर्चना मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला हवाई पट्टी से सीधे महाकाल मंदिर पहुंचा। उन्होंने सपरिवार महाकालेश्वर मंदिर पहुंच कर गर्भ गृह में पूजा अर्चना की। इसके बाद नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया। प्रशांत पुजारी और यश पुजारी ने पूजा सम्पन्न करवाई। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से प्रशासक प्रथम कौशिक की ओर से शिवराज सिंह चौहान का सम्मान किया गया। 14 फरवरी को है कुणाल सिंह की शादी शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे कुणाल सिंह की शादी 14 फरवरी वेलेंटाइन-डे पर भोपाल में होगी। कुणाल सिंह चौहान की करीब 8 माह पहले सगाई हुई थी। भोपाल के जाने माने डॉक्टर इंद्रमल जैन की पोती रिद्धि जैन से कुणाल का रिश्ता हुआ है। रिद्धि के पिता का नाम संदीप जैन है। कुणाल और रिद्धि साथ में पढ़े हैं।

शिप्रा घाट पर मदिरा के नशे में मस्त मिले युवक-युवती, बुलाना पड़ी पुलिस

उज्जैन उज्जैन क्षिप्रा नदी के सिद्ध आश्रम घाट पर युवक-युवती पानी में पैर डालकर नशे का सेवन कर रहे थे। दोनों अत्यधिक नशे की हालत में थे। घाट पर पेट्रोलिंग कर रहे जवानों ने जब उन्हें देखा तो महिलाओं की मदद से युवती को बाहर निकाला गया। महाकाल थाना पुलिस ने बताया कि होमगार्ड चौकी से सूचना मिलने पर पुलिस क्षिप्रा नदी के घाट पर पहुंची। जांच में सामने आया कि दोनों नदी में पैर डालकर बैठे थे और शराब पी रहे थे। उनके आसपास से ग्लास, कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलें और शराब की बोतल बरामद हुई। युवती इतना अधिक नशा कर चुकी थी कि उठ भी नहीं पा रही थी। घाट पर मौजूद श्रद्धालु महिलाओं की मदद से उसे बाहर निकाला गया। महाकाल थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि दोनों को थाने लाया गया, जहां युवक की पहचान योगेश पिता ओमप्रकाश, निवासी नंदानगर इंदौर के रूप में हुई। युवती खंडवा की रहने वाली थी। युवक ने पेट्रोल पंप पर काम करने की जानकारी दी। दोनों को मेडिकल परीक्षण के लिए चरक भवन भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने अत्यधिक शराब के नशे में होने की पुष्टि की। मामले में युवक के खिलाफ सार्वजनिक स्थान पर शराब सेवन करने के आरोप में आबकारी अधिनियम की धारा 36 बी के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। परिजनों को भी सूचना दी गई। दोनों दर्शन के लिए आने की बात कह रहे थे। क्षिप्रा नदी के किनारे युवक-युवती के नशे में होने की खबर फैलते ही घाट पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे होमगार्ड और एसडीआरएफ के जवानों ने हटाया। युवक के बैग से शराब की बोतल भी बरामद हुई। तालाब में गिरा शराबी युवक सांवेर रोड पर तालाब में एक युवक गिर गया, युवक नशे की हालत में था। उसे डूबता देख आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने युवक को बचाने के लिए चेन बनाई और तालाब के किनारे से अंदर लटक गए। उन्होंने युवक की शर्ट पकड़कर उसे बाहर खींचने का प्रयास किया। कुछ देर की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान तालाब के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस के पहुंचने से पहले युवक वहां से चला गया, लेकिन घटना का वीडियो कई लोगों ने अपने मोबाइल से बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। राजस्थान के 3 युवकों को डूबने से बचाया क्षिप्रा नदी के रामघाट पर राजस्थान के तीन युवकों को डूबने से बचाया गया। मां क्षिप्रा तैराक दल के सचिव संतोष सोलंकी ने बताया कि राजस्थान का एक परिवार धार्मिक यात्रा पर आया था। परिवार के दो युवक, विकास और विक्रम, गहरे पानी में चले गए, उन्हें गहराई का अंदाजा नहीं था। दोनों भाइयों को डूबता देख मामा नरेंद्र ने बचाने के लिए छलांग लगा दी, लेकिन वह भी डूबने लगा। तभी तैराक दल के दीपक कहार और राकेश गौड़ ने तीनों को बचाने के लिए छलांग लगाई और कुछ देर में ही तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी, आबकारी नीति को भी मिली मंजूरी

लखनऊ सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी है. कैबिनेट बैठक में यूपी सरकार ने 2025-26 की आबकारी नीति को मंजूरी दी है. इससे उत्तर प्रदेश में अंग्रेजी शराब की दुकान, बीयर शॉप या अन्य वाइन शॉप का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाएगा. आबकारी विभाग की नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया गया है.

ब्राजील में लगे पशुओं के मेले में भारतीय नस्ल की गाय 40 करोड़ में बिकी, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में बनाई जगह

नई दिल्ली ब्राजील में लगे पशुओं के मेले में भारतीय नस्ल की एक गाय 40 करोड़ रुपये में बिकी है। यह किसी भी गाय के लिए लगी अब तक की सबसे महंगी बोली है, जिसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बना ली है। यह बोली ब्राजील के मिनास गेरैस में लगी, जहां एक ग्राहक ने वियाटिना-19 नाम की गाय के लिए इतनी ऊंची बोली लगा दी। गाय का वजन 1101 किलो पाया गया है, जो इस नस्ल की अन्य गायों की तुलना में लगभग दोगुना है। नेल्लोर नस्ल की यह गाय चर्चा में आ गई है। यह नस्ल भारत के आंध प्रदेश, तेलंगाना में पाई जाती है। वियाटिना-19 नाम की गाय ने पूरी दुनिया में पहचान हासिल की है। इसकी पहचान असाधारण जीन और शारीरिक सुंदर के लिए है। इस गाय ने मिस साउथ अमेरिका का टाइटल भी जीता था। इसके बाद से ही यह गया चर्चा में है। दुनिया के कई देशों में इस गाय की संतानों को लोग लेकर गए हैं ताकि अच्छी नस्ल गायें तैयार की जा सकें। यही वजह है कि जब इस गाय के लिए बोली लगाई गई तो एक ग्राहक ने 40 करोड़ रुपये तक का ऊंचा मूल्य चुकाने का फैसला लिया। नेल्लोर नस्ल की गायों को ऑन्गोल ब्रीड के तौर पर भी जाना जाता है। इन गायों की विशेषता यह है कि ये बेहद कठिन और गर्म परिस्थितियों में भी रह सकती हैं। इनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित नहीं होती। आमतौर पर अत्यधिक गर्म मौमस में गायों का दूध कम हो जाता है। इसके अलावा नेल्लोर नस्ल की गायों की इम्युनिटी भी शानदार होती है और वे बीमारियों से लड़ पाती हैं। यही कारण है कि इनकी दुनिया भर में लोकप्रियता काफी अधिक है। यह गाय बेहद कम देखभाल के साथ भी कठिन परिस्थिति वाले इलाकों में रह लेती हैं। सफेद फर और कंधे पर ऊंचे हंप वाली इन गायों की यह विशेषता है कि ये ऊंटों की तरह लंबे समय तक के लिए खाने और पीने की सामग्री को स्टोर कर लेती हैं। इसके चलते इनका रेगिस्तान, गर्म वाले इलाकों में रहना आसान होता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया में नेल्लोर नस्ल की गायों की मांग बढ़ गई है। कई बार चारे आदि की कमी पर पशुओं के लिए सर्वाइव करना मुश्किल होता है। ऐसे में ये गायें एक अच्छा विकल्प हैं। ये गायें फैट की स्टोरेज कर लेती हैं। इसे कठिन परिस्थितियों में भी उनके स्वास्थ्य पर ज्यादा असर नहीं दिखता। नेल्लोर नस्ल की गाय की इतनी ऊंची बोली लगने से साफ है कि इनकी डिमांड काफी तेज है। इन गायों का बीमारियों से बचाव का प्रतिरोधी तंत्र काफी मजबूत होता है। इसके अलावा उनका गर्म मौसम में रहना बहुत कठिन नहीं है। इन गायों की रोग प्रतिरोधक क्षमता ऐसी होती है कि उन्हें कम से कम मेडिकल केयर की जरूरत रहती है। बता दें कि साहीवाल, नेल्लोर, पेंगनूर और बदरी गाय समेत देश में ऐसी कई नस्लें हैं, जिनकी भारत समेत दुनिया भर के देशों में काफी ज्यादा डिमांड है। नेल्लोर नस्ल की गायों को ब्राजील में भी बड़े पैमाने पर पाला जाता है। वर्ष 1800 से ही ब्राजील में इनका पालन हो रहा है।

आर्थिक तंगी के चलते जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के वंशज शिरिश महाराज मोर ने आत्महत्या कर ली

 पुणे जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के ग्यारहवें वंशज शिरिश महाराज मोर ने आत्महत्या कर ली है. उन्होंने ऐसा कदम वित्तीय बाधाओं के चलते उठाया है. इस बात का जिक्र उन्होंने सुसाइड नोट में किया था, जिसे पुलिस ने उनके आवास से बरामद किया है. सुसाइड नोट में उन्होंने उल्लेख किया है कि वह वित्तीय बाधाओं से आत्महत्या कर रहे हैं. शिरिश महाराज संत तुकारम महाराज के ग्यारह वंशज थे. उनके पास निगडी में इडली रेस्त्रां भी था. परिवार में उनके अलावा मां और पिता हैं. उनकी पिछले महीने शादी तय हुई थी. शादी अप्रैल या मई में आयोजित की जानी थी. लेकिन शादी से पहले ही उन्होंने आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या की घटना से देहुगांव में शोक की लहर दौड़ गई है. फिलहाल देहरोड पुलिस घटना की आगे जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि शिरिश महाराज अपने रूम में सोए थे. सुबह जब उनको उठाने के लोए परिवार के लोग गए तो उन्होंने अंदर जवाब नहीं दिया. जिसके बाद परिवार के लोगों ने कुछ देर बाद दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद परिजनों ने जब सामने की ओर देखा तो शिरिश महाराज पड़े थे. हालांकि, इसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

भाजपा और आरएसएस संविधान के खिलाफ हैं क्योंकि संविधान दलितों और वंचितों को अधिकारों की गारंटी देता है: राहुल गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देशव्यापी जाति आधारित जनगणना की अपनी मांग को दोहराते हुए बुधवार को कहा कि वह उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब दलित और कमजोर वर्ग के लोग भारत के हर संस्था में शीर्ष पद संभालेंगे। गांधी ने यहां स्वतंत्रता सेनानी एवं दलित नेता जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संविधान के खिलाफ हैं क्योंकि संविधान दलितों और वंचितों को अधिकारों की गारंटी देता है। ‘मैं दलितों के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा’ उन्होंने कहा, ‘‘देश के मौजूदा सत्ता तंत्र और संस्थाओं में दलितों और वंचितों की कोई भागीदारी नहीं है… दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों की सटीक संख्या का पता करने के लिए पूरे भारत में जाति जनगणना की आवश्यकता है।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डालने के बाद बुधवार सुबह पटना पहुंचे। गांधी ने कहा, ‘‘मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब दलित और कमजोर वर्ग देश की हर संस्था में नेतृत्व की स्थिति में होंगे… और मैं दलितों के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।” ‘यह दलितों-पिछड़ों और आदिवासियों का धन’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आप (दलितों) लोगों के इतिहास का कोई उल्लेख नहीं है। क्या देश में दलित प्रोफेसर परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार कर रहे हैं? उद्योग जगत की बात करें तो नरेन्द्र मोदी जी ने देश के 25 सबसे अमीर लोगों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया …यह दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का धन है।” गांधी ने कहा, ‘‘देश में 100 रुपये में दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग सभी को मिलाकर हिस्सेदरी 6.10 रुपये है और इसे भी वो छीनने की कोशिश कर रहे हैं ।”  

छात्रावास सुप्रिटेंडेंट ने छात्राओं से की मारपीट, थाने पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत

अनूपपुर अनूपपुर जिले में पुलिस ने सरकारी हॉस्टल में रहने वाली 25 से अधिक नाबालिग लड़कियों की कथित तौर पर पिटाई करने के आरोप में महिला सुप्रिटेंडेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है.एक अधिकारी ने बुधवार को ये जानकारी दी है. कोतमा पुलिस थाने के प्रभारी सुंदरेश मरावी ने पीड़ितों के परिवार के सदस्यों द्वारा दर्ज की गई शिकायत के हवाले से कहा कि आरोपी ने रविवार रात यहां के एक सरकारी स्कूल की कक्षा 7 की सभी लड़कियों की हॉस्टल में कथित तौर पर पिटाई की. अधिकारी ने कहा कि इसके पीछे के कारण का अभी तक पता नहीं चला है. लड़कियों ने दावा किया कि उन्हें बिना किसी कारण के पीटा गया. उन्होंने बताया कि लड़की के परिवार के सदस्यों और स्कूल के प्रिंसिपल ने बाद में शिकायत दर्ज कराई. अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मंगलवार को छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 (अश्लील कृत्य), 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 351 (आपराधिक धमकी) के अलावा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया. उन्होंने कहा कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जांच चल रही है. बीते साल बिहार के मुंगेर से ऐसा ही मामला सामने आया था. यहां संग्रामपुर उत्क्रमित उच्च विद्यालय भीखाडीह से हैरान करने वाला मामला सामने आया था.स्कूल की एक महिला टीचर ने चार छात्राओं की बुरी तरह पिटाई कर दी थी. इस पिटाई से एक बच्ची की आंख बाल-बाल बच गई. जबकि अन्य छात्राओं के शरीर पर काला निशान बन गया थी. तब सूचना पर पहुंचे विभाग के अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही थी साथ ही शिक्षिका को क्लास में पढ़ाने से भी रोक दिया गया.

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