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मध्य प्रदेश की 50% सब्सिडी स्कीम से बकरी पालन बनेगा किसानों का सुपरहिट बिजनेस, नोटों की बारिश

छिंदवाड़ा  किसानों के लिए एक ऐसी योजना आई है जो 50% सब्सिडी के साथ मालामाल कर सकती है. इसके लिए आधी रकम किसानों को लगाना होता है तो आधा सरकार खर्च उठाती है. कुछ ऐसा ही किया है बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने. जिन्होंने एक करोड़ रुपए का बकरी फॉर्म खोलकर खेती को फायदा का सौदा बनाया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन से हो जाएंगे मालामाल छिंदवाड़ा के बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने बताया कि, ”पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन एनएलएम योजना का लाभ लेकर बकरी पालन शुरू किया है और फायदे का व्यापार साबित किया है. सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है.” उन्होंने बताया कि, ”एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं. फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है. इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे एक्स्ट्रा इन्कम हो रही है.” 1 करोड़ की लागत में आधी सब्सिडी उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि, ”बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. योजना के अंतर्गत पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि नवीन रघुवंशी को प्रदान की जा चुकी है. इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है. पोषण, ब्रीडिंग और तकनीक पर विशेष ध्यान बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है. दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं. ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत करीब 2 लाख रुपये है. बेहतर पोषण और मैनेजमेंट के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन अच्छा हो रहा है. खेती में डिजिटल टेक्निक का उपयोग देश-विदेश तक पहचान नवीन रघुवंशी के बेटे मंथन रघुवंशी बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दे रहे हैं. वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों जानकारी के वीडियो भी शेयर कर रहे हैं. कुछ दिन पहले उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस. पक्षवार, एपीसी ग्रुप एवं एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा के साथ एनएलएम योजना के अंतर्गत संचालित इस बकरी फार्म के संचालन की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे. निरीक्षण दल में उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जितेन्द्र कुमार सिंह, उप संचालक उद्यानिकी विभाग एम.एल. उइके, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. झाड़े, डॉ. अलवा तथा कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के प्रमुख डॉ. आर.एल. राउत पहुंचे थे.

MP Police Bharti में आरक्षक भर्ती फिजिकल टेस्ट की तारीखों का ऐलान, 10 जिलों में होंगे एग्जाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती से जुड़ी बड़ी अपडेट है। आरक्षक भर्ती के लिए 23 फरवरी से फिजिकल टेस्ट शुरू होने जा रहा है। प्रदेश के 10 जिलों में ये टेस्ट होगा। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा, बालाघाट, रतलाम, मुरैना जिले शामिल हैं, जहां फिजिकल टेस्ट एग्जाम होना है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आरक्षक जीडी के कुल 7500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरु करने वाली है। इसके लिए 30 अक्टूबर 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 25 जनवरी 2026 को जारी किया गया है। ये फिजिकल टेस्ट होंगे सफल उम्मदीवारों को अगले चरण के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा ली जाएगी। अभ्यर्थियों की 800 मीटर दौड़, लंबी कूद और गोला फेंक तथा दस्तावेजों का परीक्षण 23 फरवरी से 13 मार्च के बीच किया जाएगा, जो हर दिन सुबह 6 बजे से शुरू होगा। चयन प्रक्रिया पुलिस भर्ती में लिखित परीक्षा के बाद शारीरिक दक्षता और दस्तावेज सत्यापन होगा। एग्जाम का स्तर हाई स्कूल योग्यता पर आधारित होगा। ये सैलरी मिलेगी चयनित उम्मीदवारों को पुलिस विभाग में आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के पद पर नियुक्ति मिलेगी। जिनका वेतन 19,500 से 62,000 रुपए प्रतिमाह होगा।

TESLA को बड़ा झटका: हाई-EV मार्केट में भी 88% फिसली बिक्री, जानें गिरावट की वजह

 नई दिल्ली     यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात हो और टेस्ला का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उलटी है. जिस नॉर्वे को टेस्ला अपना सबसे मजबूत किला मानती रही, वहीं अब उसके दरवाजे चरमराते दिख रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि नॉर्वे की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की बाढ़ है, लेकिन EV की इस भीड़ में टेस्ला की नाव लड़खड़ा गई है. सवाल सिर्फ बिक्री घटने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या यूरोप में टेस्ला का जादू सच में कमजोर पड़ने लगा है. बिक्री के मोर्चे पर आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है.  वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. फॉक्सवैगन ID.3 ने 299 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, जो टेस्ला से लगभग पांच गुना ज्यादा है. नॉर्वे में टेस्ला के लिए जनवरी भले ही मुश्किल रहा, लेकिन इस देश में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बनी हुई है. पिछले महीने नॉर्वे में बिकने वाली नई गाड़ियों में से करीब 94 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें थीं. डीजल गाड़ियों की सिर्फ 98 यूनिट्स बिकीं, जबकि पेट्रोल कारों का आंकड़ा केवल 7 पर सिमट गया. यह अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है. कुछ यूरोपीय देशों में टेस्ला की वापसी नॉर्वे में गिरावट के बावजूद टेस्ला को यूरोप के कुछ अन्य देशों में राहत मिली है. स्पेन में कंपनी की बिक्री 70 प्रतिशत बढ़कर 456 यूनिट्स तक पहुंच गई. इटली में 75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 713 कारें बिकीं. स्वीडन में बिक्री 26 प्रतिशत बढ़कर 512 यूनिट्स रही, जबकि डेनमार्क में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ आंकड़ा 458 यूनिट्स तक पहुंचा. इन देशों में आई तेजी का कारण टेस्ला की नई और किफायती स्टैंडर्ड मॉडल्स मानी जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में Model 3 और Model Y के किफायती वेरिएंट को लॉन्च किया है. जो काफी बजट फ्रेंडली है. जानकारों का मानना है कि, कम कीमत और बेहतर रेंज के चलते इन कारों को लोग प्राथमिकता दे रहे हैं. भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए खास ऑफर भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी टेस्ला की हालत खराब ही है. बीते साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े जोर-शोर के साथ इंडिया एंट्री का ऐलान किया था. कंपनी ने मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC) में अपना पहला शोरूम शुरू किया. जिसे बाद में दिल्ली और गुरुग्राम तक बढ़ा दिया गया है. टेस्ला ने भारत में अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 73.89 लाख रुपये तक जाती है. दरअसल, हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते टेस्ला की कार यहां काफी महंगी पड़ रही है. शुरुआत में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि, कुछ ग्राहकों ने टेस्ला मॉडल वाई की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कैंसिल करा दी. खैर, टेस्ला भारत में भी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी टेस्ला मॉडल Y पर खास स्कीम्स दे रही है. इसके तहत पेट्रोल या डीजल गाड़ी के बदले एक्सचेंज कराने पर ग्राहकों को 3 लाख रुपये तक का एक्सचेंज बोनस ऑफर किया जा रहा है.   

टोल सिस्टम में बड़ा बदलाव, प्लाजा पर रुके बिना अपने आप कटेगा टोल टैक्स

नई दिल्ली देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.  देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर. बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.  हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा? अगर आपकी गाड़ी में  फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.  जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा. 

पीरियड्स में चिड़चिड़ापन और थकान? सही देखभाल से रखें शरीर और मन स्वस्थ

 पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना बहुत आम बात है और हर लड़की या महिला कभी न कभी इससे गुजरती है। पेट के निचले हिस्से में ऐंठन, कमर दर्द, सिर दर्द, उलझन या बिना किसी खास वजह के मूड खराब होना हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है। इस समय शरीर थोड़ा कमजोर भी महसूस करता है, इसलिए खुद को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। सबसे पहले खाने-पीने पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स के दिनों में हल्का, पोषण से भरपूर खाना जैसे हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन से भरपूर चीजें शरीर को ताकत देती हैं। खूब पानी पीना भी बहुत जरूरी है, इससे पेट की सूजन और थकान कम होती है। ज्यादा नमक, जंक फूड, चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाकर रखना बेहतर रहता है क्योंकि ये दर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही आराम और हल्की-फुल्की गतिविधि का संतुलन भी जरूरी है। बहुत ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहना भी शरीर को सुस्त बना देता है, इसलिए हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। हालांकि, भारी एक्सरसाइज या ज्यादा थकाने वाला काम करने से बचना चाहिए। अगर मन करता है तो गुनगुने पानी से नहाना या पेट पर गर्म पानी की थैली रखना भी काफी आराम देता है। नींद पूरी लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से मूड स्विंग्स और थकान बढ़ सकती है। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। समय-समय पर सैनिटरी पैड या साफ कपड़ा बदलना चाहिए, आमतौर पर हर 6 घंटे में। इस्तेमाल किए गए पैड को ठीक से लपेटकर फेंकें और अंडरगारमेंट्स रोज बदलें। अंडरगारमेंट्स को अच्छे से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कीटाणु न पनपें। इस दौरान गंदे या नम कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। मानसिक सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक सेहत का। पीरियड्स के समय भावनाएं जल्दी आहत हो सकती हैं, गुस्सा या उदासी बिना वजह महसूस हो सकती है। ऐसे में खुद पर ज्यादा सख्त न हों। मनपसंद काम करें, हल्का संगीत सुनें, किताब पढ़ें या किसी अपने से बात करें। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या पीरियड्स बहुत अनियमित हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

कांग्रेस में घमासान, लक्ष्मण तिवारी के इस्तीफे के बाद भाजपा ने जीतू पटवारी की कार्यकुशलता पर की टिप्पणी

 भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस एक ओर संगठन को सशक्त बनाने के लिए संगठन सृजन अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर गुटबाजी के आरोप लग रहे हैं। मऊगंज विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने गुटबाजी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। उनके आरोप से भाजपा के निशाने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी आ गए हैं। भाजपा नेताओं ने कहा है कि प्रदेश नेतृत्व की ‘कार्यकुशलता’ से कांग्रेस के नेता ही आहत हैं। यह प्रदेश अध्यक्ष की ‘कार्यकुशलता’ पर सवाल है। लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी कांग्रेस में शामिल हुए थे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ही उन्हें सदस्यता दिलाई थी। भारतीय जनशक्ति पार्टी के टिकट पर विधायक वह 2008 में उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी के टिकट पर मऊगंज से विधायक बने। 2013 के विधानसभा चुनाव में मऊगंज सीट से ही भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2018 में टिकट नहीं मिलने पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 10 हजार मत प्राप्त किए। 2023 में समाजवादी पार्टी से होते हुए कांग्रेस में आए। अब उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी। गुरुवार को रीवा में पत्रकार वार्ता में तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जमीनी मुद्दों से भटक गई है। गुटबाजी हावी है। पार्टी में खींचतान चल रही है, जो भविष्य के लिए हानिकारक है। ईमानदारी से काम करने वालों की बात नहीं सुनी जाती है। भाजपा का हमला इस आरोप को आधार बनाकर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा है कि दिग्विजय सिंह ने मंच से, हरीश चौधरी व उमंग सिंघार ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे-राहुल गांधी के सामने, कमलेश्वर पटेल ने मीडिया में जीतू पटवारी की कार्यकुशलता पर सवाल उठाए हैं। अब अपनी उपेक्षा से आहत पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी का पार्टी से त्यागपत्र दे दिया जो प्रदेश नेतृत्व की विफलता का प्रमाण है। अब उन्हें झूठ और भ्रम फैलाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।

क्रिस गेल का 16 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 2026 टी20 वर्ल्ड कप में लगा सबसे तेज अर्धशतक

नईदिल्ली  2026 टी20 वर्ल्ड कप का दूसरा मैच वेस्टइंडीज और स्कॉटलैंड के बीच खेल जा रहा है. इस मुकाबले में शिमरोन हेटमायर ने क्रिस जेल का 16 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ डाला है. हेटमायर ने टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. उन्होंने स्कॉटलैंड के विरुद्ध 22 गेंदों में फिफ्टी पूरी की. अर्धशतक पूरा करने तक उन्होंने अपनी पारी में 6 छक्के और एक चौका लगाया. क्रिस गेल का 16 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा शिमरोन हेटमायर ने स्कॉटलैंड के खिलाफ 22 गेंदों में अर्धशतक लगाया, जो टी20 वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज फिफ्टी है. इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 2009 के वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 23 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया था. हेटमायर ने उनसे एक गेंद कम खेलकर फिफ्टी पूरी की. गेल के बाद इस सूची में शाय होप का नाम आता है, जिन्होंने 2024 वर्ल्ड कप में 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया था. वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज फिफ्टी (टी20 वर्ल्ड कप)     22 गेंद – शिमरोन हेटमायर – 2026     23 गेंद – क्रिस गेल – 2009     24 गेंद – शाय होप – 2024 अंतर्राष्ट्रीय टी20 क्रिकेट की बात करें तो वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड आज भी क्रिस गेल के ही नाम है. उन्होंने साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 17 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर ली थी. मगर सबसे तेज वर्ल्ड कप फिफ्टी के मामले में शिमरोन हेटमायर उनसे आगे निकल चुके हैं. युवराज सिंह हैं सबसे आगे टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड पिछले 19 सालों से युवराज सिंह के नाम है. उन्होंने 2007 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में 12 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर ली थी. उस मैच को युवराज के 6 छक्कों के लिए याद किया जाता है.

इंदौर में मोबाइल पर भेजा गया शादी का कार्ड, लिंक पर क्लिक करने से अकाउंट खाली हो सकता है

 इंदौर इंदौर में साइबर ठगों ने ठगी का ऐसा तरीका अपनाया कि लोग पहले चौंके, फिर सतर्क हो गए. मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सदाशिव यादव के नाम से जुड़े एक फर्जी शादी के निमंत्रण कार्ड का है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. यह डिजिटल कार्ड लोगों को शादी का न्योता दे रहा था, साथ में एक लिंक भी, जिस पर क्लिक करने की अपील की गई थी. शहर के कई लोगों के मोबाइल पर जब यह इनविटेशन कार्ड पहुंचा तो पहले तो उन्होंने इसे सामान्य समझा. तारीख लिखी थी… 24 फरवरी 2026… और भाषा भी बिल्कुल औपचारिक. लेकिन कुछ लोगों को लिंक देखकर शक हुआ. उधर, जब यह कार्ड खुद सदाशिव यादव तक पहुंचा, तो वे भी हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि यह इनविटेशन कार्ड पूरी तरह फर्जी है और उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है. सदाशिव यादव ने तुरंत सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर लोगों को आगाह किया. उन्होंने कहा कि उनका मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर ये फैलाया जा रहा है. उन्होंने सभी परिचितों, कार्यकर्ताओं और रिश्तेदारों से अपील की कि इस कार्ड में दिए गए किसी भी लिंक को न खोलें और न ही इसे आगे फॉरवर्ड करें. इस मामले की जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला साइबर ठगी से जुड़ा हो सकता है. ऐसे मामलों में ठग फर्जी निमंत्रण, कूरियर या इवेंट लिंक भेजकर लोगों से क्लिक करवाते हैं, जिससे उनके मोबाइल या बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाई जा सके. कई बार लिंक पर क्लिक करते ही मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है या फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर निजी जानकारी मांगी जाती है. इस मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल सक्रिय हो गई. एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी कार्ड किस प्लेटफॉर्म से बनाया गया और सबसे पहले किस अकाउंट से शेयर हुआ. डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक, डिजिटल कार्ड या संदिग्ध मैसेज से सावधान रहें, भले ही वह किसी परिचित या बड़े नाम से क्यों न आया हो. किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें.

योगी सरकार ने चाइनीज मांझा कारोबार पर कसा शिकंजा, पूरे नेटवर्क की जांच शुरू

चाइनीज मांझा बेचने वालों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, पूरे नेटवर्क की सघन जांच शुरू मुख्यमंत्री योगी की दो टूक, चाइनीज मांझे से होने वाली मृत्यु हादसा नहीं, हत्या है ऑनलाइन सप्लायर से लेकर गोदामों तक जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई तेज स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान, बच्चों और युवाओं से अपील,चाइनीज मांझे से दूर रहें दुर्घटना हुई तो स्थानीय पुलिस-प्रशासन भी जिम्मेदार माना जाएगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेशभर में चाइनीज मांझे के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि चाइनीज मांझे की वजह से होने वाली मृत्यु कोई ‘साधारण हादसा’ नहीं है, बल्कि ‘हत्या’ जैसी गंभीर वारदात है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इसके उत्पादन, बिक्री, भंडारण और परिवहन से जुड़े हर व्यक्ति पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में थोक विक्रेताओं, ऑनलाइन सप्लायर्स, परिवहन चैनल और गोदामों की सघन जांच कर पूरे अवैध नेटवर्क को खत्म करने का आदेश दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में चाइनीज मांझे की एक भी रील न बिके और न ही कहीं स्टोर हो पाए। इसके लिए जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।  हर जिले में एक नोडल अधिकारी को 24×7 मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया ग्रुप्स और अनौपचारिक चैनलों के जरिए होने वाली अवैध बिक्री पर भी सख्त नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरीके से इसकी आपूर्ति को रोका जा सके। सरकार अब इस अभियान को जन-सहयोग से भी जोड़ रही है। स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि बच्चों और युवाओं को बताया जा सके कि चाइनीज मांझा प्रतिबंधित होने के साथ-साथ जानलेवा भी है। बाजारों और पतंग विक्रेताओं को आगाह किया जा रहा है कि कहीं भी चाइनीज मांझा मिलता पाया गया तो तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि किसी क्षेत्र में चाइनीज मांझे से कोई घटना हुई तो केवल विक्रेता ही नहीं, बल्कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी जिम्मेदार माना जाएगा।

उत्तर प्रदेश में ‘गोदान’ फिल्म टैक्स फ्री, गो संरक्षण को बढ़ावा देने पर आधारित

उत्तर प्रदेश में फिल्म गोदान टैक्स फ्री, गो संरक्षण को बढ़ावा देने पर आधारित है फिल्म गो सरंक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, करमुक्त होने से अधिक लोग देख सकेंगे फिल्म लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण पर आधारित फिल्म गोदान को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित फिल्म आज  देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय सरकार की उस नीति को रेखांकित करता है, जिसके तहत गो सुरक्षा को सामाजिक और प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि फिल्म के माध्यम से गो संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचेगा और आमजन को इस विषय की गंभीरता से जोड़ने में मदद मिलेगी। अधिक दर्शक फिल्म देख सकेंगे उत्तर प्रदेश में करमुक्ति के बाद दर्शकों के लिए टिकट दरों में कमी आएगी, जिससे अधिक से अधिक लोग फिल्म देख सकेंगे। पद संभालते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु किया था और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई थी। गोहत्या और तस्करी के मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।  गो संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।  वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है फिल्म गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुके हैं। लगभग दो घंटे की इस फिल्म में गाय के धार्मिक, सामाजिक और व्यावहारिक महत्व को दर्शाया गया है।

IAS पुलकित गर्ग की बेटी का आंगनबाड़ी में एडमिशन, समाज में हो रही तारीफ

चित्रकूट  चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग इन दिनों एक खास फैसले को लेकर चर्चा में हैं. जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का एडमिशन सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर मिसाल पेश की है. उनके इस कदम को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी के प्ले स्कूल में एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे औपचारिकता की तरह नहीं लिया, बल्कि एक जागरूक अभिभावक की तरह विकल्पों की गंभीरता से पड़ताल की. उन्होंने और उनकी पत्नी ने जिले के कई निजी प्ले स्कूलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया. सुविधाएं, वातावरण, बच्चों की गतिविधियां और शिक्षण व्यवस्था देखने के बाद उन्होंने जिला मुख्यालय में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया. जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी सिया का दाखिला कराया गया है, वहां करीब 35 बच्चे पंजीकृत हैं. सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर एक्टिविटीज में भाग लेती है, पढ़ाई करती है और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है. केंद्र में बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का माहौल तैयार किया गया है. रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, एबीसी और नंबर चार्ट जैसे साधन हैं, जो प्राइमरी एजुकेशन को रोचक बनाते हैं. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या हाई फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटी से आती है. उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल या प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री पर लगातार काम किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं को यह तय शेड्यूल दिया जाता है कि बच्चों को रोज क्या और कैसे सिखाना है- जैसे कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी सीख. आईएएस पुलकित गर्ग ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग भी कराई जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके. छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक विकास पर यहां विशेष ध्यान दिया जाता है. उनका कहना है कि अभिभावकों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भरोसा करना चाहिए और छोटे बच्चों को वहां जरूर भेजना चाहिए. आईएएस अधिकारी के इस फैसले का एक प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है. यदि व्यवस्थाएं मजबूत हों तो अधिकारी खुद भी उन पर भरोसा दिखा सकते हैं. पुलकित गर्ग ने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है. जहां जरूरत होगी वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजते हैं तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है.

भारत बनाम अमेरिका: बुमराह की अनुपस्थिति में ईशान किशन करेंगे ओपन, 13 फिट खिलाड़ियों के साथ टीम इंडिया उतरेगी

मुंबई IND vs USA T20 WC Match: टी20 वर्ल्ड कप कप 2026 की शुरुआत आज (7 फरवरी) से हो रही है. भारत अपना पहला मैच संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के ख‍िलाफ खेलेगा. लेकिन इस मैच से पहले भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए टेंशन बढ़ गई है. भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के खिलाफ होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले मुकाबले में खेलने की संभावना बेहद कम है. वायरल फीवर से जूझ रहे बुमराह को टीम मैनेजमेंट आराम देने के पक्ष में है और उन्हें वानखेड़े स्टेडियम में शनिवार को होने वाले ओपनिंग मैच के लिए जल्दबाज़ी में उतारने का कोई इरादा नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, बुमराह को एहतियातन आराम दिया जाएगा. मैच की पूर्व संध्या पर वह मैदान पर जरूर पहुंचे, लेकिन उन्होंने अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया. ऐसे में मोहम्मद सिराज के प्लेइंग इलेवन में शामिल होने की पूरी संभावना है. इस मुकाबले के लिए भारतीय टीम के पास फिलहाल सिर्फ 13 फिट खिलाड़ी उपलब्ध हैं. ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर अभी तक पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अंतिम फिटनेस क्लीयरेंस का इंतज़ार कर रहे हैं. सुंदर की गैरमौजूदगी में टीम चयन की चुनौती और बढ़ गई है. गौरतलब है कि मोहम्मद सिराज को अंतिम समय पर टीम में शामिल किया गया था, जब तेज गेंदबाज हर्षित राणा साउथ अफ्रीका के खिलाफ 4 फरवरी को नवी मुंबई में खेले गए वॉर्म-अप मुकाबले के दौरान घुटने में चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे. उस समय बीसीसीआई ने अपने बयान में कहा था कि विशेषज्ञ से सलाह और स्कैन के बाद हर्षित को टूर्नामेंट के लिए अनफिट घोषित किया गया है और सिराज को उनके स्थान पर टीम में शामिल किया गया है. बल्लेबाज़ी क्रम की बात करें तो ईशान किशन और अभिषेक शर्मा के पारी की शुरुआत करने की संभावना है. ईशान किशन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में ओपनर के तौर पर 53 रन बनाए थे. इससे पहले, उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ त्रिवेंद्रम में खेले गए टी20 मुकाबले में नंबर तीन पर उतरते हुए 103 रन की पारी खेली थी. संजू सैमसन के फॉर्म में न होने के चलते टीम मैनेजमेंट शीर्ष क्रम में ईशान किशन पर भरोसा जता रहा है और उन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

देसी राफेल तैयार, HAL ने एयर फोर्स की चिंता खत्म की, अब चीन-पाकिस्तान होंगे थर्र-थर्र

बेंगलुरु  भारत का देसी राफेल अब धमाल मचाने को तैयार है. जिस बात की चिंता भारत के एयर फोर्स चीफ को सता रही थी, अब वह दूर होने जा रही है. खुद एचएएल यानी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने एयरफोर्स की टेंशन दूर कर दी है. अब चीन और पाकिस्तान थर्र-थर्र कांपेंगे. दरअसल, भारत का देसी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए अब हवा में तूफान मचाने को पूरी तरह तैयार है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहली खेप के पांच तेजस एमके-1ए विमान की डिलीवरी के लिए पूरी तरह तैयार है. एचएल का कहना है कि पांच LCA Mk1A फाइटर जेट की डिलीवरी में कोई देरी नहीं है और न कोई अड़चन है. इंडियन एयरफोर्स यानी IAF को स्वदेशी LCA Mk1A फाइटर जेट के पहले बैच की डिलीवरी होने वाली है. एचएएल ने अब देसी राफेल यानी LCA Mk1A फाइटर जेट की संभावित देरी की अटकलों को खारिज कर दिया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने गुरुवार को कहा कि पांच LCA Mk1A विमान डिलीवरी के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, जिनमें सहमत स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार प्रमुख अनुबंधित क्षमताएं शामिल हैं. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘पांच LCA Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं. उनमें सभी बड़े कॉन्ट्रैक्ट वाले फीचर्स लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा नौ और विमान बन चुके हैं और उड़ान भी भर चुके हैं. बस जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से इंजन आने का इंतजार है. जनरल इलेक्ट्रिक (अमेरिकी कंपनी) ने अब तक पांच इंजन दे दिए हैं और आने वाले इंजनों का प्लान भी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की डिलीवरी स्कीम से मैच कर रहा है. यानी इस वित्तीय वर्ष में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपना टारगेट पूरा कर लेगा. तेजस एमके-1ए अब हवा में तूफान मचाने को पूरी तरह तैयार है. कंपनी ने क्या कहा? LCA Mk1A विमानों के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने कहा कि कंपनी एक साथ कई रणनीतिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है, जिसमें इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (IMRH), तेजस LCA Mk2 और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) शामिल हैं, जिनमें से सभी के 2032 के बाद उत्पादन में आने की उम्मीद है. यह खबर उन खबरों पर पानी फेर देती है, जो कह रही थीं कि डिलीवरी में देरी हो रही है. अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने साफ कर दिया है कि सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा है. एचएएल को कितना ऑर्डर मिला दरअसल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को फरवरी 2021 में भारतीय वायुसेना से 83 LCA Mk1A जेट (73 फाइटर और 10 ट्रेनर) के लिए पहला कॉन्ट्रैक्ट मिला था. बाद में सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त LCA Mk1A विमानों (68 फाइटर और 29 ट्विन-सीटर) के लिए 62,370 करोड़ रुपये से अधिक की लागत पर एक फॉलो-ऑन कॉन्ट्रैक्ट मिला. इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 के दौरान शुरू होगी और छह साल की अवधि में पूरी हो जाएगी. कब तक पूरी फ्लीट मिलेगी इन लड़ाकू विमानों में 64 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी, जिसमें 67 अतिरिक्त आइटम शामिल होंगे. कुल मिलाकर वायुसेना ने दो चरणों में इन विमानों के 180 का ऑर्डर दिया था. कुछ विमान पिछले साल डिलीवर किए जाने थे, लेकिन वायुसेना ने जोर दिया कि एचएएल विमानों को पूरी तरह से ऑपरेशनल कॉन्फ़िगरेशन में प्रदान करे. पिछले साल 17 अक्टूबर को कंपनी ने नासिक सुविधा से पहले तेजस Mk1A प्रोटोटाइप की पहली उड़ान का संचालन किया था. अभी, HAL की फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की क्षमता हर साल 24 एयरक्राफ्ट है. इस दर से 180 एयरक्राफ्ट के तेजस Mk1A ऑर्डर को पूरा करने में सात साल से ज़्यादा लगेंगे और वायुसेना को पूरा फ्लीट 2033 से पहले मिलने की उम्मीद नहीं है. एचएएल पांच तेजस फाइटर जेट की डिलीवरी करने को तैयार है. क्या है ये देसी राफेल? तेजस एमके-1ए हल्का लड़ाकू विमान है, लेकिन यह दमदार है. यही कारण है कि इसे भारत का देसी राफेल कहा जाता है. इसमें एडवांस्ड AESA रडार, बेहतरीन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मिसाइलों के लिए नई कैपेबिलिटी, रिफ्यूलिंग की सुविधा…सब कुछ है. इसमें 64 फीसदी से अधिक पार्ट्स भारतीय हैं. यानी 67 नए आइटम्स भारतीय कंपनियों ने बनाए हैं. यह आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा उदाहरण है. चीन-पाकिस्तान क्यों कांपेंगे? तेजस एमके-1ए छोटा फाइटर जेट है, लेकिन तेज, दमदार और मॉडर्न हथियारों से लैस है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह देसी राफेल पाकिस्तान के JF-17 और चीन के J-10, J-16 से मुकाबला करने में सक्षम है. जब 180+ तेजस आसमान में उड़ेंगे तो दुश्मन की सांसें अटक जाएंगी. खासकर बॉर्डर इलाके में. जब भारतीय पायलटों के हाथ में देसी राफेल होगा होगा तो दुश्मनों के होश उड़ने तय हैं.

Google ने दी चेतावनी, 40% स्मार्टफोन में है खतरा – जानें सेफ्टी के लिए क्या करें

 नई दिल्ली अमेरिकी कंपनी गूगल ने एक बड़ी वॉर्निंग दी है और बताया है कि करीब आधे एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स पर मैलवेयर और स्पाईवेयर के खतरे में है. ये खतरा पुराने Android OS वर्जन होने की वजह से है.  ये जानकारी फॉर्ब्स ने दी है. रिपोर्ट में बताया है कि इस खतरे की वजह पुराना एंड्रॉयड ओएस वर्जन है. जो एंड्रॉयड 13 या उससे भी पुराने ओएस पर काम करते हैं. पुराने Android OS को अब सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलता है, जिसकी वजह से उनपर सबसे ज्यादा खतरा है. ऐसे स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या दुनियाभर में 1 अरब से ज्यादा है.  Android 16 इतने यूजर्स के फोन में  दुनियाभर में Android 16 अभी सिर्फ 7.5% डिवाइस में ही मौजूद है, जो दिसंबर तक का डेटा है. Android 15 पर 19.3 परसेंट फोन काम करते हैं. Android 14 पर 17.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं और Android 13 पर 13.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं. सिर्फ इतने परसेंट लोग सिक्योरिटी अपडेट के तहत आते हैं रिपोर्ट्स में बताया है कि 58 परसेंट स्मार्टफोन ऐसे हैं, जो सिक्योरिटी सपोर्ट के अंदर आते हैं, जबकि 40 परसेंट स्मार्टफोन के लिए सिक्योरिटी अपडेट अवेलेबल नहीं है.  पुराना स्मार्टफोन चलाने वाले यूजर्स को सलाह  स्मार्टफोन यूजर्स को सलाह दी गई है कि जिनके मोबाइल पुराने OS पर काम करते हैं, उनको लेटेस्ट एंड्रॉयड ओएस के साथ अपडेट कर लेना चाहिए. साथ ही सिक्योरिटी सपोर्ट को रेगुलर अपडेट करते रहना चाहिए. iPhone को मिलते हैं सिक्योरिटी अपडेट  पुराने iPhone को समय रहते अपडेट मिल जाते हैं और कई पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन में जरूरी सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिल पाते हैं. अगर कंपनी की तरफ से सपोर्ट बंद किया जा चुका है तो नया स्मार्टफोन खरीद लेना चाहिए.   कंपनियां 4-5 साल के लिए देती हैं सिक्योरिटी अपडेट  स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से अपने हैंडसेट के लिए एक फिक्स टाइम तक सिक्योरिटी अपडेट दिया जाता है. आमतौर पर कंपनियां इसे 4 साल या 5 साल के लिए देती हैं. अब Samsung और गूगल पिक्सल हैंडसेट में 7 साल से ज्यादा के लिए सिक्योरिटी अपडेट देने का ऐलान किया है.  सिक्योरिटी अपडेट क्या होता है? स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से हैंडसेट की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी अपडेट जारी किए जाते हैं. यह अपडेट बग्स और उन खामियों को दूर करने का काम करता है, जो कई बार गलती से पुराने OS में आ जाती हैं. इन कमजोरियों और बग्स का फायदा उठाकर हैकर्स डिवाइस तक एक्सेस कर सकते हैं और डेटा चोरी कर सकते हैं. कई बार स्मार्टफोन को हैक तक किया जा सकता है.     एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले स्मार्टफोन की संख्या दुनियाभर में बहुत ज्यादा है. वहीं iPhone के iOS का यूज सिर्फ ऐपल के स्मार्टफोन को ही मिलता है और उनकी संख्या भी बहुत कम है. Android OS के साथ मिलकर सैमसंग, रियलमी, रेडमी, ओप्पो, वनप्लस जैसे स्मार्टफोन तैयार करते हैं और उनको ग्लोबल मार्केट में सेल करते हैं.     

एमपी में क्यूआर कोड से ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से बचाव, जानें इसकी कार्यप्रणाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश पुलिस एक नई और प्रभावी पहल करने जा रही है। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्यूआर कोड आधारित जागरूकता व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही साइबर अपराध से बचाव से जुड़ी आवश्यक और प्रमाणिक जानकारी सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस साइबर विशेषज्ञों के सहयोग से इस नवाचार को अंतिम रूप दे रही है। योजना के तहत भोपाल सहित पूरे प्रदेश के भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी एवं निजी कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर ये क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मार्च 2026 से प्रदेशवासियों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी।  इस परियोजना पर साइबर पुलिस के नेतृत्व में तेजी से काम चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में अपराधी नये-नये हथकंडे अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे में तकनीक के जरिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह क्यूआर कोड न सिर्फ जानकारी देगा, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने में भी मदद करेगा। सभी प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे क्यूआर कोड सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी संस्थानों में भी प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ-साथ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें। पुलिस अधीक्षक (साइबर) प्रणय नागवंशी ने बताया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। साइबर मुख्यालय समय-समय पर एडवाइजरी जारी करता है और अब क्यूआर कोड के माध्यम से यह जानकारी और अधिक सुलभ हो जाएगी। क्यूआर कोड से मिलने वाले प्रमुख लाभ क्यूआर कोड स्कैन करने पर यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें और किन बातों से बचें। आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों के सरल उत्तर भी उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime-gov-in) का सीधा लिंक दिया जाएगा, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे। ठगी के अलावा फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग से जुड़ी सावधानियों की जानकारी भी मिलेगी। साथ ही, फर्जी कॉल, नकली नोटिस और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धोखाधड़ी से बचने के जरूरी उपाय भी बताए जाएंगे। 

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