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दुनिया में धाक जमाती हिंदी

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष हिंदी महज एक भाषा नहीं बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की संस्कृति, सभ्यता, साहित्य और इतिहास को बयां करती है और उन्हें एकता के सूत्र में बांधती है। हिंदी भारतीयों के मान, सम्मान और स्वाभिमान की भाषा है। हिंदी भाषा ही नहीं यह भावों की अभिव्यक्ति है। हिंदी मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है। हिंदी हमारा ईमान है और हिंदी हमारी पहचान है। हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची परिचायक भी है। आइए जानते हैं विश्व हिंदी दिवस पर विश्व में हिंदी के बढ़ते प्रभाव और उसका महत्व। डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) 10 जनवरी को पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक भारतीय के लिए यह बेहद गर्व की बात है। बहुल सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवतः सबसे वैज्ञानिक भाषा है। जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हिंदी भाषा वक्ताओं की ताकत है, लेखकों का अभिमान है। करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बांधने के साथ ही हमारी आन-बान, शान और अभिमान है। हिंदी को राष्ट्र की अस्मिता और प्रणम्य का प्रतीक माना जाता है। इसके हर शब्द में गंगा जैसी पावनता और गगन सी व्यापकता है। समुद्र सी गहराई और हिमालय सी ऊंचाई है, जो इसे महान बनाती है। यही वजह है कि पूरी दुनिया विश्व हिंदी दिवस मना रही है।यदि हम हिंदी भाषा के विकास की बात करें तो यह कहना मुनासिब होगा कि पिछली शताब्दी मेंं हिंदी का तेजी से विकास हुआ है और दिनों-दिन इसका प्रभाव बढ़ रहा है। हिंदी का करीब एक हजार वर्ष पुराना इतिहास है। संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसे देवभाषा भी कहा जाता है। माना जाता है कि हिंदी का जन्म भी संस्कृत से हुआ है। ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। यह मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। इस कारण हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है।भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, बावजूद इसके हिंदी सबसे ज्यादा बोली, लिखी व पढ़ी जाती है। इसीलिए हिंदी भारत की सबसे प्रमुख भाषा है। 26 जनवरी 1950 को संसद के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को प्राथमिक भाषा माना गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर विदेशी धरती पर मातृभाषा का मान बढ़ाया। हिन्दी के जहां अंग्रेजी में मात्र 10 हजार मूल शब्द हैं। वहीं हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या 2 लाख 50 हजार से भी अधिक है। हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ हमारी राजभाषा भी है। हिन्दी ने भाषा, व्याकरण, साहित्य, कला, संगीत के सभी माध्यमों में अपनी उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं वर्चस्व कायम किया है। हिन्दी की यह स्थिति हिन्दी भाषियों और हिन्दी समाज की देन है, हमें अहसास होना चाहिये कि हिन्दी दुनिया की किसी भी भाषा से कमजोर नहीं है। हिंदी भाषा के इतिहास पर पुस्तक लिखने वाला कोई हिंदुस्तानी नहीं बल्कि फ्रांसीसी लेखक ग्रेसिम द टैसी था। हिंदी के बढ़ते प्रभाव के कारण ही ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में अच्छा और सूर्य नमस्कार जैसे कई हिंदी शब्दों को शामिल किया गया है।हिंदी का वर्चस्व बढ़ाने के लिए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से इसकी वर्षगांठ के उपलक्ष में हर साल मनाया जाता है। आज दुनियाभर में अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी तीसरे नंबर की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सर्वे एजेंसी स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में 43. 63 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा बोलते और समझते हैं।भारत के अलावा फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिनाद, टोबैगो, गुयाना, नेपाल, तिब्बत और पाकिस्तान में हिंदी बोली जाती है। इसके चलते इंटरनेट की दुनिया में अब हिंदी का वर्चस्व बढ़ रहा है।यही कारण है कि हिंदी आज दुनिया भर में इंटरनेट की पसंदीदा भाषा बन रही है। प्रति वर्ष 94 फीसदी हिंदी भाषी जुड़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी के महज 17 प्रतिशत हैं। गूगल-केपीएमजी रिसर्च, सेंसस इंडिया और आईआरएस की सर्वे रिपोर्ट को मानें तो आने वाले साल में हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वाले अंग्रेजी वालों से ज्यादा हो जाएंगे। एक अनुमान के मुताबिक 34 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे। हिंदी के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की मशहूर ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया ने अपना एप हिन्दी में लॉन्च किया। ओएलएक्स, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न कंपनियों के प्लेटफॉर्म पहले ही हिन्दी में उपलब्ध हैं। स्नैपडील भी हिन्दी में आ चुका है। 2023 तक 16.1 करोड़ लोगों ने डिजिटल पेमेंट के लिए हिन्दी का उपयोग किया। जबकि 2016 में यह संख्या 2.2 करोड़ थी। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी। जो 2023 में बढ़कर 24.4 करोड़ तक हो गई।इसी को दृष्टिगत रखते हुए इस बार हिंदी दिवस मनाने की थीम “ हिंदी पारंपरिक ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता“ रखी गई है।विदेशों में हिंदी जनमानस के दिलो दिमाग पर अपनी छाप छोड़ रही है। लंदन में हिंदी पढ़ाई जा रही है। जर्मन में ऐसे स्कूल और गुरुकुल हैं जहां बच्चों को हिंदी के साथ ही संस्कृत भी पढ़ाई जाती है। क्योंकि हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह दुनिया की प्राचीन समृद्ध और सबसे सरल भाषा है। वर्तमान में दुनियाभर के करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं और लिखते भी हैं। कह सकते हैं कि दुनिया के भाल पर चंदन की भांति चमकने वाली हिंदी अपनी धाक जमा रही है।

जहाँ जहाँ पड़े श्रीकृष्ण के पाँव, वहीँ बनेगा तीरथ धाम…. मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का ऐलान.

Wherever the feet of Lord Krishna touch, there will become a pilgrimage site… Announcement by the Chief Minister of Madhya Pradesh. उज्जैन । मध्यप्रदेश के मुख्य्मंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है कि मध्यप्रदेश मे जहाँ जहाँ भगवान कृष्ण के पाँव पड़े है उनको तीर्थ स्थलों के स्वरुप मे विकसित किया जायेगा, मध्य प्रदेश संस्कृति धरोहरों, अध्यात्म और पौराणिक कहानियो के लिए जाना जाता है धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन मे हमेशा मध्यप्रदेश अग्रणी रहा है, इसी क्रम मध्यप्रदेश के नये मुख्य्मंत्री मोहन यादव ने भगवान श्री कृष्ण की उन विरासत को जहाँ भगवान ने लीलाएं की थी उन्हें तीर्थ स्थल के स्वरुप मे विकसित करने का ऐलान किया है. ज्ञात हो कि महाकाल की नगरी उज्जैन मे भगवान ने गुरु संदीपन जी के आश्रम मे शिक्षा ग्रहण की थी जहाँ पर उन्होंने 18 दिनों मे 18 पुराण, 4 दिनों मे चारों वेद, 6 दिनों मे 6 शास्त्र, 16 दिनों मे 16 कलाएं और 20 दिनों मे गीता का ज्ञान प्राप्त किया था, उज्जैन मे मंगालनाथ मार्ग पर क्षिप्रा नदी के पावन तट पर गंगा घाट पर महर्षि संदीपन की तपोभूमि पर आज से तकरीबन 5235 साल पहले भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और सखा सुदामा जी के साथ विद्यारम्भ संस्कार धारण किया था, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय प्रमुख एवं पक्षकार राजेश मणि त्रिपाठी जी बताते हैँ कि उज्जैन मे भगवान ने 64 दिन मे 64 कलाएं सीखी थी, यही पर गुरु संदीपन जी ने भगवान को 3 मंत्र लिखवाये थे तथा भगवान ने गुरु दक्षिणा के रूप मे उनके मृत पुत्र को वापस कराया था,श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के प्रभारी उदित नारायण बता रहे थे कि मध्य प्रदेश के धार ज़िले मे स्थित अमझेरा जहाँ जानापाव वही स्थल है जहाँ प्रवास के दौरान भगवान परसुराम जी ने श्रीकृष्ण जी को उनका पावन अस्त्र सुदर्शन भेंट किया था तथा द्वापर युग मे धर्म कि स्थापना का उपदेश दिया था, श्री कृष्ण जन्मभूमि के राष्ट्रीय सहप्रमुख तथा संगठन मंत्री महेंद्र तिवारी ने चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश के मुख्य्मंत्री जी का इस पावन पहल हेतु धन्यवाद प्रेषित करते हुये बताया कि मध्यप्रदेश के साथ भगवान श्रीकृष्ण का बहुत गहरा नाता रहा है भगवान कि शिक्षा के अतिरिक्त उज्जैन कि अवंतिका नगरी को भगवान कि ससुराल भी माना जाता है मान्यता है कि यहाँ के राजा जयसेन की पुत्री मित्रविंद्रा से विवाह किया था जहाँ के मंदिर मे भगवान मित्रविंद्रा जी के साथ विराजमान हैँ कृष्ण विद्रा धाम के पुजारी श्री गिरीश गुरु बालक महराज बताते हैँ कि मित्रविंद्रा जी भगवान की पाँचवी पटरानी थी जिनसे भगवान ने स्वयंबर मे विवाह किया था. मुख्य्मंत्री की यह पहल विश्व मे श्री कृष्ण के अनुनायियों के लिए हर्ष का विषय है और इससे मध्यप्रदेश पर्यटन को भी सनातन के साथ विश्व पटल पर आकर्षित करेगी

बुंदेलखंड में आईएएस व आईपीएस विलेज रैपुरा (चित्रकूट) उत्तर प्रदेश: कभी डकैतों के लिए मशहूर था, अब आईएएस आईपीएस की है फैक्ट्री, हर घर में अफसर.!

Bundelkhand, the village of Raipura (Chitrakoot), Uttar Pradesh, was once infamous for dacoits but now boasts of IAS and IPS officers. It has transformed into a hub of factories, with every household having officers. Udit Narayanभोपाल। देश के हर गांव की अपनी एक विशेषता होती है और उसी वजह से वह अपनी पहचान बना लेता है, उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड अंचल के चित्रकूट का पाठा क्षेत्र कभी डकैतों का गढ़ माना जाता था । दरअसल इस इलाके में एक डकैत के खात्मे के बाद दूसरा डकैत बन जाता था, लेकिन अब इस पाठा क्षेत्र में डकैत नहीं बल्कि आईएएस और पीसीएस का जलवा है। इस छोटे से गांव के हर घर में एक सरकारी नौकर है। हम चित्रकूट जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रैपुरा गांव कर रहे हैं।यह गांव कभी डकैतों के लिए मशहूर था, लेकिन अब इसकी पहचान आईएएस और आईपीएस हैं। दरअसल गांव के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक लोग इस समय आईएएस, आईपीएस, पीसीएस जैसी विभिन्न सेवाओं में उच्चाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं । खास आज यह है कि रैपुरा गांव में हर घर में कोई न कोई सरकारी कर्मचारी-अधिकारी है।हर घर में एक सरकारी कर्मचारी रैपुरा गांव के इंटर कॉलेज रिटायर प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि इस गांव में लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग आईएएस, पीसीएस हैं। इन सभी की स्‍कूली पढ़ाई गांव में ही हुई है । हालांकि बाहर से उच्‍च शिक्षा हासिल कर अधिकारी बने हैं। साथ ही कहा कि इस गांव में हर एक घर में कोई न कोई सरकारी नौकरी में है। सिंह ने बताया कि वह जब स्कूल के प्रिंसिपल थे, तब स्कूल में बच्चों को दूसरों के बारे में बात कर प्रोत्साहित करते थे। इसका असर बच्‍चों पर सकारात्‍मक हुआ और गांव के युवाओं में सरकारी नौकरी हासिल करने की होड़ सी लग गई। कभी डकैतों के लिए मशहूर यह गांव सरकारी अफसरों के लिए पहचान रखता है। आईएएस और पीसीएस की भरमार महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि गांव के अभिजीत सिंह, रोहित सिंह, कुलदीप कुमार और सीपी सिंह (आईएएस), यदुवेंद्र शुक्ल (आईपीएस), तेज स्वरुप, सुरेन्द्र, राजेन्द्र ,प्रकाश कुमार, सुरेश चन्द्र पाण्डेय, प्रह्लाद सिंह और सुरेश गर्ग बतौर पीसीएस कार्यरत हैं। इसके अलावा भी कई युवा अधिकारी बनकर रैपुरा गांव का नाम रौशन कर रहे हैं। साथ ही बताया कि आज भी तमाम युवा सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए बाहर रहकर पढ़ाई में जुटे हैं । हर साल कोई न कोई छात्र आईएएस या पीसीएस की परीक्षा में सफल जरूर रहता है. पिछली बार भी यह रिकॉर्ड कायम रहा है ।

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य का आमरण अनशन 11वें दिन अनवरत जारी।

The fast unto death of the ascetic Chhawni Peethadhishwar Jagatguru Paramhans Acharya continues for the 11th day continuously for the demand of Hindu Rashtra. अन्न जल का परित्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में कर रखा है कैद। समर्थन में उतरे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने गदा भेंट कर किया सम्मान। संतोष सिंह तोमर अयोध्या। भारत देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य को उनके सहयोगियों ने आज अनशन के 11 दिन बीतने पर करीब आधा घंटे के लिए अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान तपस्वी छावनी में मौजूद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय प्रमुख ने संघठन के सदस्यों के साथ आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर को हनुमान जी का गदा भेंट कर उनका सम्मान किया। हम आपको याद दिला दें की विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने विगत 7 नवंबर मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने सुबह 4 बजे से ही अन्न जल का त्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में बंद कर लिया था वह तब से लेकर आज तक अपने आश्रम पर अन्न जल के बिना खुद को कमरे में बंद किए हुए हैं। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन पर जबरन आमरण अनशन तुड़वाने की साजिश करने का आरोप लगाया है। हम आपको बता दें कि परमहंसाचार्य ने हिंदू राष्ट्र घोषित ना होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी बहुत पहले ही दे दी थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी लिख चुके हैं कई पत्र आमरण अनशन से जगतगुरु परमहंसाचार्य एक बार फिर से सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए वह एक लंबे समय से संवैधानिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में घूम- घूमकर हिंदू राष्ट्र की अलख जगाई। हिंदू राष्ट्र की मुहिम से भारत के कई हिंदूवादी संगठनों को भी जोड़ा। उनकी मांग थी कि 6 नवंबर 2023 तक भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। नही तो 7 नवंबर से अन्न जल का त्याग कर वह आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे इसके लिए वह कई बार देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई, जिसके कारण उन्हें भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने हेतु अन्न जल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा है। इससे पूर्व राममंदिर के लिए उन्होंने 16 दिनों तक आमरण- अनशन किया था जो श्रीरामजन्मभूमि के फैसले में निर्णायक भी साबित हुआ था। पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना, भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर उन्होंने सबसे पहले देश में आवाज उठाई और आमरण अनशन किया। आज हिंदू राष्ट्र की मांग पूरे देश की आवाज बन चुका है। विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि हिंदू राष्ट्र सौ करोड़ हिंदुओं की मांग है। जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश दिया गया। जो मुस्लिम राष्ट्र बन चुका है, तो भारत हिंदुराष्ट्र क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि 1947 के बंटवारे से भारत का जो भाग बचा हुआ है। उसको जल्द से जल्द हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म व मानवता को बचाने के लिए भारत संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि देश में लगातार लव जेहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सनातन धर्म को मिटाने की चुनौती दे रहे हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और मानवता को बचाने के लिए भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो इसके लिए हमारी मांग मान ली जाए। नही तो मेरा शरीर छूट जाए कोई बात नहीं एक परमहंस जायेंगे, तो न जानें कितने हजारों-लाखों परमहंस आयेंगे। परमहंसाचार्य के समर्थन में ओजस्वी फाउंडेशन महाराष्ट्र के एकनाथ महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी समेत उनके तमाम समर्थक आमरण अनशन स्थल पर मौजूद रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने दिया है संपूर्ण समर्थन जगतगुरु परमहंस आचार्य के आमरण अनशन को समर्थन देने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी अनशन शुरू होने के साथ ही तपस्वी छावनी पहुंच गए थे। जहां उन्होंने स्पष्ट कर दिया था श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल जगतगुरु परमहंस आचार्य के हिंदू राष्ट्र की मांग के समर्थन में पूरी तरह खड़ा है। यह कोई नाजायज नहीं बल्कि जायज मांग है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैं तपस्वी छावनी पहुंचा तो महाराज श्री एक कमरे में अपने आपको बंद करके आमरण अनशन कर रहे थे। पता चला कि पुलिस प्रशासन उनको उठाने के लिए तपस्वी छावनी पहुंच गया था। आज ग्यारह दिन बाद अनशन पर बैठे आचार्य श्री से निवेदन कर उन्हें अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान हिंदू राष्ट्र के लिए प्रयत्नशील तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री परमहंस आचार्य को हिन्दू राष्ट्र के लिए शुरू की गई इस लड़ाई में विजय हेतु महाबली श्री हनुमान जी का गदा प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट कर उनका सम्मान किया गया। इस बीच करीब तीस मिनट तक आचार्य श्री अनशन कक्ष से बाहर ही रहे लेकिन तीस मिनट के बाद उन्होंने फिर से अपने आपको तालों के बीच कैद कर लिया। भारत का शायद पहला ऐसा आमरण अनशन होगा। जहां पर किसी अनशनकारी ने खुद की सुरक्षा के लिए अपने आपको तालों में बंद कर रखा हो, ऐसा शायद इतिहास में कहीं नहीं मिलेगा। संत के आमरण अनशन से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेश मणि त्रिपाठी ने महाराज जी के इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक जनमानस जिस लिए भाजपा को चुनाव जीताकर यहां पहुंचाया इसका मुख्य आधार इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाया जाना ही था, लेकिन हिंदू राष्ट्र का सपना आम जनमानस का साकार नहीं हुआ। आज एक संत हिंदू राष्ट्र के लिए आमरण आसान कर … Read more

पातालकोट एक्सप्रेस में लगी आग, 3 जनरल कोच पूरी तरह जले.

Pataalkot Express; Fire Broke; Indian Railways; Sahara Samachaar;

Fire broke out in the Patalkot Express, completely burning three general coaches. मनीष त्रिवेदीभांडई, पातालकोट एक्सप्रेस में लगी आग, घटना उत्तरप्रदेश के भांडई स्टेशन की घटना, पातालकोट एक्सप्रेस आगरा की ओर जा रही थी, चलते चलते सामान्य श्रेणी के कोच में आग भड़क गयी. आग की चपेट में पातालकोट एक्सप्रेस के तीन कोच आ गए. 3 जनरल कोच पूरी तरह जल गए। घटना को देखते हुए झांसी से दिल्ली जाने वाला ट्रैफिक दोनों ट्रेक पर किया बंद. मौके पर रेलवे के अधिकारी और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गए. इस घटना में 13 लोग घायल हुए, 7 लोगों को एस ऐन मेडिकल कॉलेज में, जबकि 6 यात्री सोलंकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. आग लगने के बाद कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर जान बचाई।

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