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बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

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लाहौर 
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं. 

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है?

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है.

BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं.

पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है.

बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं?

बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है.

बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. 

अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है. 

सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं.

BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा 

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती.

पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी.

ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती."

BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क

पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं.

पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं.

चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा

लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं.

पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है?

बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है. 

गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां

हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके.

आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण जगहों पर होते हैं. 2025 में ऐसे कई हमले हुए, जैसे नोशकी और पंजगुर कैंपों पर, जहां बीएलए ने तीन दिन तक इलाका कब्जे में रखा.

कॉर्डिनेटेड अटैक: बीएलए एक साथ कई जगहों पर हमला करती है ताकि सेना की ताकत बंट जाए. जैसे ऑपरेशन हेरोफ (ब्लैक स्टॉर्म), जिसका दूसरा चरण 2026 में शुरू हुआ. इसमें 10 शहरों में हमले हुए. राजमार्ग बंद किए गए और पाकिस्तानी झंडे हटाकर बलूच झंडे लगाए गए. 2025 में बीएलए ने 521 हमलों का दावा किया, जिसमें 1060 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. 
 
टारगेट: बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना, पुलिस, बुनियादी ढांचे (जैसे गैस पाइपलाइन, रेलवे), चीनी परियोजनाओं (सीपीईसी) और गैर-बलूच निवासियों को निशाना बनाती है. वे चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर हमले करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान उनके संसाधनों का शोषण कर रहा है. 

डिजिटल और प्रचार रणनीति: बीएलए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है. टेलीग्राम, व्हाट्सएप और रंबल जैसे प्लेटफॉर्म पर वे हमलों के वीडियो, प्रचार सामग्री और शहीदों की कहानियां शेयर करते हैं. इससे भर्ती आसान होती है. वे स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाते हैं, जैसे जबरन गायब करना और संसाधनों का शोषण.

जब बढ़े हमले: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

हाल के विकास: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

क्या प्रभाव पड़ रहा है?

यह संघर्ष बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है. पाकिस्तानी सेना बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अलगाववाद रुक नहीं रहा. विशेषज्ञ कहते हैं कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी; राजनीतिक बातचीत और विकास की जरूरत है.

बलूचिस्तान में अशांति के कारण

बलूचिस्तान में दशकों से चल रहा यह विद्रोह कई कारणों से भड़क रहा है…

    आर्थिक शोषण: बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन बिना स्थानीय लोगों को लाभ दिए किया जा रहा है.
    राजनीतिक हाशिए पर: बलूच लोगों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित रखा गया है.
    मानवाधिकार उल्लंघन: अमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, हजारों बलूच कार्यकर्ता, पत्रकार और छात्रों को जबरन गायब किया गया या मार डाला गया.

 

 

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