Ujjain to become the capital of time, discussed in ‘Mahakal: The Master of Time’, also gets the gift of a Science City
उज्जैन ! महाकाल की नगरी उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में उज्जैन को काल गणना नगरी बनाने की बात कही गई तो दूसरी ओर ग्रीनविच मीन टाइम को महाकाल स्टैंडर्ड टाइम बनाने पर फोकस किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उज्जैन के तारामंडल परिसर में हुआ। इसके साथ ही उज्जैन सिंहस्थ-2028 के लिए 19.80 किलोमीटर लंबे 701.86 करोड़ रुपये की लागत के 4 लेन बायपास और 22.52 करोड़ रुपए की सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज इकाई की विस्तार परियोजना का भूमिपूजन हुआ।
विज्ञान की नगरी भी है उज्जैन
सीएम मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ-साथ विज्ञान की भी नगरी है। महाकाल की इस नगरी की माटी में विज्ञान-गणित-खगोल-ब्रह्मांड का चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा। यहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती थी।
उन्होंने कहा कि जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था, तब उज्जैन के ज्योतिष और विद्वान काल गणना के आधार पर नक्षत्र की स्थिति बता रहे थे। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी, तब यहां महर्षियों ने खगोलीय गणनाओं का वैश्विक मानक स्थापित किया। मोहन यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है। लेकिन, शिव उस अनंत का प्रतीक हैं जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता यानी मास्टर ऑफ टाइम हैं।
उज्जैन में सूर्य की छाया हो जाती है शून्य
इसके साथ ही सीएम मोहन यादव ने कहा कि भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था, जो अब यहां से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है। आज समय और स्पेस दोनों को एक दूसरे से समेकित रूप ले समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
उज्जैन को मिलीं कई सौगातें
वहीं, उज्जैन को कई सौगातें भीमिली है। 15 करोड़ रुपए की लागत से साइंस सिटी का उद्घाटन किया गया है। मोहन यादव ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 हमारे लिए उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। वे महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ-साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जानेंगे। उन्होंने कहा कि भव्य और दिव्य सिंहस्थ के आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं। आज ही उज्जैन को करीब 20 किलोमीटर के नए बायपास रोड का भूमिपूजन हुआ है।
पुराने गौरव को है लौटाना
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अगर हमारे धार्मिक स्थलों को अध्ययन के स्तर पर देखा जाए तो उज्जैन, काशी, कांची और पुरी धाम भारतीय ज्ञान परंपरा विज्ञान-कला-संस्कृति-साहित्य-आध्यात्म आधारित प्रयोगशालाएं हैं। विज्ञान अध्यात्म के बिना अधूरा है। महाकाल की नगरी उज्जैन हमारी संस्कृति का पवित्र स्थान है, जिसका विशेष सांस्कृतिक महत्व है। दुनिया के किसी भी अनुसंधान को देखा जाए तो उज्जैन के बिना काल की गणना अधूरी है। यहां पृथ्वी की मध्य रेखा और कर्क रेखा का केंद्र बिंदु उज्जैन या उसके आसपास ही है। पश्चिमी देशों के लिए टाइम सिर्फ गणना है, लेकिन भारतीय सभ्यता में समय और टाइम में अंतर है। समय एक भावना और अभिव्यक्ति है। पश्चिमी कैलेंडर में दिन 30 या 31 तक सीमित हैं। भारत में पल-पल की वैज्ञानिक व्याख्या है। उन्होंने कहा कि आज भारत स्पेस टेक्नोलॉजी में अग्रणी देश बनकर उभरा है।









