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कालीचरण 2 दिन की रिमांड पर, कोर्ट के बाहर जमकर हुआ हंगामा

रायपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपशब्द कहने वाले कालीचरण महाराज को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। रायपुर पुलिस ने 1 जनवरी तक कालीचरण महाराज की रिमांड मांगी थी। ​​​​​कालीचरण समर्थकों को हाथ दिखाते हुए एक सेलिब्रिटी की तरह करीब 6.32 मिनट पर कोर्ट में दाखिल हुआ था। इस दौरान कोर्ट परिसर में जमकर हंगामा भी हुआ। कालीचरण की पेशी को देखते हुए पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोर्ट के अंदर 4-5 वकीलों ने कालीचरण की ओर से पक्ष रखा और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों की हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया। इससे पहले पुलिस ने रायपुर पुलिस लाइन में कालीचरण के सभी टेस्ट करवाए। शुगर, बीपी की रिपोर्ट के साथ-साथ कालीचरण की कोरोना जांच भी निगेटिव आई। कालीचरण ने किसी भी पुरानी बीमारी से इनकार किया। उसे जिला न्यायालय में जस्टिस चेतना ठाकुर की कोर्ट में पेश किया गया। बड़ी संख्या में लोग कोर्ट परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान कालीचरण महाराज समर्थन में जय श्री राम और गोडसे जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। लगभग 500 पुलिसकर्मी और अलग-अलग थानों के प्रभारी डीएसपी रैंक के अफसर कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात रहे। कालीचरण महाराज को रायपुर पुलिस ने गुरुवार तड़के मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ रायपुर, पुणे और अकोला में केस दर्ज किए गए थे। महात्मा गांधी के खिलाफ बयानबाजी के बाद से ही वह फरार था। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने गिरफ्तारी के तरीके पर आपत्ति जताई है। हालांकि जवाब में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इसे नियमों के तहत एक्शन करार दिया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कालीचरण के परिवार और वकील को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी गई। उसे जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा। रायपुर पुलिस ने उसे गुरुवार तड़के 4 बजे खजुराहो से 25 किलोमीटर दूर बागेश्वर धाम स्थित लॉज से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि कालीचरण ने अपने छिपने के लिए एक कॉटेज भी बुक कराया था। पुलिस को देखकर अकड़ने लगा कालीचरण पुलिस जब बागेश्वर स्थित लॉज में पहुंची तो कालीचरण यहां अपने 4 चेलों के साथ आराम फरमा रहा था। अचानक पुलिस को देख कालीचरण ने बहसबाजी शुरू कर दी। रायपुर पुलिस के अफसरों ने कहा- चलना तो पड़ेगा, विरोध करने का कोई फायदा नहीं है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…) कालीचरण पर राजद्रोह का केस भी दर्ज रायपुर की पुलिस ने राजद्रोह की धाराएं भी इस केस में जोड़ी हैं। कालीचरण अकोला महाराष्ट्र का रहने वाला है। धर्म संसद में दिए गए विवादित बयानों को देखकर पहले धारा 294, 505(2) के तहत मामला दर्ज हुआ था। अब धारा 153 A (1)(A), 153 B (1)(A), 295 A ,505(1)(B) , 124A इन धाराओं को भी जोड़ा गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें कहा था- गांधी ने देश का सत्यानाश किया, नाथूराम गोडसे को नमस्कार रायपुर में हुई धर्म संसद के समापन के दिन शनिवार को महाराष्ट्र से आए कालीचरण ने मंच से गांधीजी के बारे में गलत बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए राष्ट्र पर कब्जा करना है। सन् 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर कब्जा किया गया। मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया। नमस्कार है नाथूराम गोडसे को, जिन्होंने उन्हें मार दिया। शिवराज के मंत्री बोले- एक्शन की जानकारी MP पुलिस की देनी चाहिए थी मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कालीचरण की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर ऐतराज जताया है। उन्होंने ट्वीट किया- छत्तीसगढ़ पुलिस को अपने एक्शन की जानकारी मध्यप्रदेश पुलिस को देनी चाहिए थी। इससे इंटरस्टेट प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ पुलिस से आपत्ति दर्ज कराएंगे। अपने बयान पर कालीचरण को पछतावा नहीं गिरफ्तारी से पहले कालीचरण का एक बयान सामने आया था। इसमें वह कह रहा है- गांधी को अपशब्द कहने के लिए मुझ पर FIR हुई है, मुझे उसका कोई पश्चाताप नहीं है। मैं गांधी से नफरत करता हूं, मेरे हृदय में गांधी के प्रति तिरस्कार है। अपने ताजा बयान में कालीचरण ने गोडसे को महात्मा बताते हुए कहा कि मैं गोडसे को कोटि-कोटि नमस्कार करता हूं उनके चरणों में मेरा साष्टांग प्रणाम है।

UP Election 2022 : बीजेपी से क्यों नाराज हैं ब्राह्मण, किसे देंगे वोट – पढ़ें विश्लेषण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में चुनावी साल है और चुनावी शोर में अब सबसे ज्यादा पूछ बहुत ही अहम माने जाने वाले बाह्मण (Brahmin) की होने लगी है. भले ही यूपी में बाह्मण सियासी तौर पर हाशिए पर हों, लेकिन हर सियासी दल ब्राह्मण को जरिए ही चुनावी वैतरणी को पार करना चाहता है. तभी तो यूपी में बीएसपी ने नारा दिया है कि ‘ब्राह्मण शंख बजाएगा और हाथी बढ़ता जाएगा’. आज यूपी में ब्राह्मणों की स्थिति भी हाथी की तरह हो गई है और किसी भी सियासी दल सत्ता में रहने के दौरान ब्राह्मण पांच साल तक उस बंधे हुए हाथी की रहते हैं, जो कुछ नहीं कर सकता है. जब चुनाव आते हैं तो ब्राह्मणों की पूजा जाती है और उसे माला पहनाई जाती है और उसे तिलक लगाकर पैर छूए जाते हैं और हर सियासी दल चाहे समाजवादी पार्टी हो या बीएसपी या फिर बीजेपी और या कांग्रेस, कहते हैं कि आपका आशीर्वाद चाहिए और सुदामा की तरह खाली हाथ रहने वाला ब्राह्मण फिर खुश होकर आशीर्वाद देकर पांच साल तक फिर खाली हाथ ही रहता है. ऐसा नहीं है कि ब्राह्मण नेता सियासी मलाई का स्वाद नहीं चखते हैं. वह सत्ता की मलाई का स्वाद चखते हैं और इसकी सियासी मलाई की जूठन भी उनके परिवार और करीबी लोगों के अलावा किसी अन्य को नसीब नहीं होती है. सच्चाई ये है कि यूपी नहीं कमोवेश देश में ब्राह्मण की यही स्थिति है. हाल ही में उत्तर प्रदेश में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में ब्राह्मणों का सम्मेलन हुआ और इस सम्मेलन को आयोजित कराने वाले थे, समाजवादी पार्टी के नेता और पार्टी में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ओम प्रकाश बाबा दुबे. जो दावा करते हैं कि वह ब्राह्मणों को संगठित करने के लिए कार्य कर रहे हैं. काशी में हुए ब्राह्मणों के सम्मेलन में लोकहित सप्तसमिति का गठन किया गया और जल्द ही दो लाख ब्राह्मणों का ब्रहमादेश समागम महासभा करने करने का संकल्प लिया गया. लेकिन चुनावी साल में ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भी सवाल उठ रहे है. दूबे दावा करते हैं कि वह पिछले कुछ सालों से ब्राह्मणों को लेकर कार्य कर रहे हैं और पिछले दो साल से उन्होंने ब्राह्मण समाज के उत्थान और सामाजिक और राजनैतिक तौर पर उसे मजबूत करने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की वो पूछ नहीं जो यादव और मुस्लिमों की है. दुबे साफगोई से कहते हैं कि जो कार्य वह कर रहे हैं उसमें राजनीति भी है. क्योंकि राजनैतिक ताकत के बगैर कुछ हासिल नहीं किया जासकता है. जबकि अन्य सियासी दलों के नेता इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि ब्राह्मणों को लेकर राजनीति की जा रही है. दुबे कहते हैं कि यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक 18 से 20 फीसदी है. भले ही आंकड़े यूपी में 9 से 11 फीसदी बताते हों. लिहाजा आज के समय में ब्राह्मणों को एकजुटकर अपनी ताकत का अहसास करना चाहिए. अगर हम एसपी की बात करें तो 2012 के चुनाव में भी पार्टी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए भगवान परशुराम जी की प्रतिमा स्थापित करने का वादा किया था. लेकिन करीब एक दशक बीतने, और चुनाव की दस्तक के बाद एसपी को अपना वादा फिर याद आया है. ब्राह्मणों को साधने को बीजेपी भी हुई एक्टिव वहीं यूपी में बीजेपी भी ब्राह्मण वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए एक्टिव हो गई है. बीजेपी ने पिछले दिनों राज्य के बीजेपी के बड़े ब्राह्मण नेताओं को बुलाया और राज्य में बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने को कहा. बीजेपी का दावा है कि ब्राह्मण उससे नाराज नहीं है. जबकि विपक्षी दल कहते हैं कि यूपी में पिछले पांच साल में बीजेपी ने ब्राहामणों के लिए कुछ नहीं किया. हालांकि विपक्ष के तर्कों में ज्यादा दम भी नहीं दिखता है. क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा ब्राह्मण बीजेपी के टिकट पर जीत कर आए और बीजेपी ने ही सबसे ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट दिए. एसपी परशुराम जी के जरिए ब्राह्मणों को साधने में जुटी राज्य में समाजवादी पार्टी में कई बाह्मण नेता शामिल हो चुके हैं. पिछले दिनों ही गणेश शंकर पांडे और विनय शंकर तिवारी समेत कई नेता शामिल हुए हैं. जबकि पार्टी में ही कई बड़े ब्राह्मण नेता है. एसपी के ब्राह्मणों को जोड़ने ने रायबरेली से पार्टी के एकमात्र विधायक मनोज पांडे काफी दिनों से कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं. वहीं पार्टी यूपी के सभी शहरों में भगवान परशुराम की मूर्ति को स्थापित कर रही है. ताकि 2012 की तरह ब्राह्मणों के आशीर्वाद के जरिए फिर से सत्ता पर काबिज हुआ जा सके. हालांकि राज्य में परशुराम जी की प्रतिमा स्थापित करने का वादा समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज से किया था. ब्राह्मण सम्मेलनों से बीएसपी को उम्मीद वहीं अगर बीएसपी की बात करें तो बीएसपी चीफ मायावती ने पार्टी के ब्राह्मण नेता माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को आगे किया. अगर बीएसपी की पिछली सरकार की बात करें तो सतीश चंद्र मिश्रा पार्टी में मजबूत माने जाते थे और समय के साथ वह पार्टी में और ज्यादा मजबूत होते गए. हालांकि परिवारवाद को लेकर मिश्रा पर आरोप लगते आए हैं. चुनाव को देखते हुए सतीश चंद्र मिश्रा राज्य में ब्राह्मण सम्मेलन करा रहे हैं और ब्राह्मणों को झुकाव बीएसपी की तरफ करने का दावा कर रहे हैं. बीएसपी को इस बार अपने दलित और ब्राह्मण समीकरण पर उम्मीद है. प्रियंका कर रही हैं मंदिर दर्शन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मंदिरों के दर्शन कर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रही है. ये तो समय ही बताएगा कि प्रियंका गांधी के प्रयास कितने सफल होंगे. लेकिन पार्टी दावा कर रही है कि ब्राह्मण एक बार फिर कांग्रेस में आएगा क्योंकि ये कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक हैं और यूपी में कांग्रेस ने ही छह सीएम ब्राह्मण समाज से दिए हैं. हालांकि सच्चाई ये है कि पिछले दिनों कांग्रेस को छोड़ने वाले ज्यादातर नेता ब्राह्मण समाज के ही हैं. यूपी में 2017 में जीते से 58 ब्राह्मण विधायक अगर आंकड़ों की बात करें तो 2017 के विधानसभा में यूपी में … Read more

जनविश्वास यात्रा की जनसभा में BJP नेताओं के बीच चले लात-घूंसे

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) को लेकर सरगर्मी तेज हैं. ऐसे में सियासी दल एक दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. लेकिन इस बीच कन्नौज (Kannauj) में बीजेपी की जनविश्वास यात्रा (BJP Jan Vishwas Yatra) के दौरान पार्टी के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए. माहौल ऐसा गरमाया कि देखते ही देखते भाजपा नेताओं के समर्थकों में लात-घूंसे चलने लगे. दरअसल बुधवार को कन्नौज के छिबरामऊ स्थित कॉलेज में भाजपा की ‘जन विश्वास यात्रा’ की जनसभा आयोजित की गई थी. आजतक ऑनलाइन मीडिया के मुताबिक इसी दौरान वर्तमान विधायक अर्चना पांडे और बीजेपी जिला उपाध्यक्ष के समर्थकों में मंच पर बैठने को लेकर विवाद हो गया. अर्चना पांडे के समर्थकों पर बीजेपी जिला उपाध्यक्ष और उनके समर्थकों पर हमला करने का आरोप है. कार्यकर्ताओं में गाली-गलौज के साथ शुरू हुई हाथापाई मामले ने इतना तूल पकड़ गया, कि गाली-गलौज के साथ हाथापाई भी शुरू हो गई. लोगों के मुताबिक दोनों गुटों के नेता पार्टी से टिकट की जुगत में लगे हैं. इस वजह से मनमुटाव चल रहा है. मंच से ही जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई. सांसद सुब्रत पाठक ने भी समझाकर शांत कराया. जन विश्वास यात्रा में ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष पर बोला हमला भाजपा की ‘जन विश्वास यात्रा’ को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा इत्रनगरी कन्नौज पहुंचे थे. इस दौरान ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला. ऊर्जा मंत्री ने कहा- 2017 में जो मैनोफेस्ट्रो जारी किया था, लगभग लगभग पूरे मैनोफोस्ट्रो पर सरकार ने काम किया है. कहा- राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे. ऐसा सवाल अखिलेश एंड कंपनी करती थी. मंत्री ने आगे कहा कि आज अयोध्या में मंदिर बन रहा है. सांस्कृति राष्ट्रवाद, देश की सुरक्षा व गरीब कल्याण की योजनाएं हमारे कुछ मुद्दे हैं, जिन हम खरे उतरे हैं. कहा- हम सौभाग्यशाली हैं हमारे भगवान राम हैं, भगवान श्रीकृष्ण हैं, हमारे साथ बाबा विश्वनाथ भी हैं. हमारी सरकार चौमुखी विकास कर रही है. दीवारों से रुपए निकल रहे हैं. इसीलिए कुछ लोग नोटबंदी का विरोध कर रहे थे.

NCP चीफ शरद पवार ने की पीएम मोदी की तारीफ, बोले – पीएम मोदी की प्रशासन पर अच्छी पकड़ है

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार (NCP Chief Sharad Pawar) ने पीएम मोदी नरेंद्र मोदी (PM Modi) की जमकर तारिफ की है. मुंबई में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीपी चीफ ने कहा कि पीएम मोदी की प्रशासन (Administration) पर अच्छी पकड़ है. यही उनका पक्ष काफी मजबूत करता है. शरद पवार ने कहा कि पीएम के कामकाज की शैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक बार जब कोई कार्य करते हैं तो वो इसे पूरा करना सुनिश्चित करते हैं. पवार ने कहा कि मोदी बहुत प्रयास करते हैं और काम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी का स्वभाव ऐसा है कि एक बार जब वो किसी भी कार्य को हाथ में लेते हैं, तो वो ये सुनिश्चित करेंगे कि जब तक वो अपने निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाता, तक तक वो नहीं रुकेगा. सहयोगियों को साथ ले जाने का एक अलग तरीका एनसीपी चीफ ने आगे कहा कि पीएम इस बात पर भी जोर देते हैं कि उनकी सरकार की नीतियों के प्रभावी कार्यान्यवयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और उनके सहयोगी एक साथ कैसे आ सकते हैं. मोदी के पास अपने सहयोगियों को साथ ले जाने का एक अलग तरीका है और वो शैली मनमोहन सिंह जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों में नहीं थी. पवार ने कहा कि मेरी और तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह की राय थी कि तत्कालीन गुजरात के सीएम मोदी के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति नहीं की जानी चाहिए. पवार ने कहा कि जब मोदी गुजरात के सीएम थे, मैं केंद्र में था. जब पीएम सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाते थे, तब मोदी बीजेपी शासित राज्यों के सीएम के एक समूह का नेतृत्व करते थे और केंद्र पर हमला करते थे. मोदी लगातार सरकार पर हमला करते थे उन्होंने कहा कि तो ऐसी स्थिति में मोदी को कैसे जवाब दिया जाए, इस पर रणनीति बनाई जाती थी. मेरे अलावा यूपीए सरकार में कोई अन्य मंत्री नहीं था जो मोदी से बातचीत कर सके क्यों कि वो मनमोहन सिंह सरकार पर लगातार हमला करते थे. राज्यसभा सांसद ने कहा कि यूपीए की आंतरिक बैठकों मे वह उपस्थित सभी लोगों से कहते थे कि भले ही उनके और मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के बीच मतभेद हों, किसी को ये नहीं भूलना चाहिए कि वो सीएम थे. उन्होंने कहा कि मैं बैठकों में कहा करता था कि हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि वो एक राज्य के सीएम हैं और लोगों ने उन्हें जनादेश दिया है, अगर वो यहां मुद्दों के साथ आ रहे हैं, तो ये सुनिश्चित करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि मतभेदों का समाधान हो और हित उनके राज्य के लोग प्रभावित नहीं है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने उनकी राय का समर्थन किया.

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