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हेरिटेज मदिरा बनाने में अब पर्यावरण एनओसी नहीं लगेगी.

Heritage liquor production will no longer require Environmental NOC. एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की होटलों और वाइन शॉप में उपलब्ध उदित नारायणभोपाल। राज्य सरकार ने महुआ से निर्मित हेरिटेज मदिरा के उत्पादन के लिये बने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब इसके निर्माण के लिये प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एनओसी जमा नहीं कराना होगी। हालांकि आबकारी विभाग ने अपने नियमों में इसका प्रावधान हटा दिया है परन्तु यदि प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपने विनियमों में इसका प्रावधान करेगा तो फिर यह एनओसी लेना जरुरी होगा। फिलहाल प्रदेश में अलीराजपुर जिले के ब्लाक कट्ठीवाड़ा के ग्राम कोछा में आदिवासी वर्ग के हनुमान आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा महुआ से हेरिटेज मदिरा का निर्माण किया जा रहा है तथा इससे हेरीटेज को प्रदेश के चुनिंदा एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की कतिपय होटलों एवं एमबी वाईन के आउटलेट पर विक्रय के लिये उपलब्ध कराई गई है। डिण्डौरी जिले के ब्लाक अमरपुर के ग्राम भाखानाल में स्थित मां नर्मदा आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा अभी हेरीटेज मदिरा का निर्माण शुरु नहीं किया गया है। नये बदलावों के अंतर्गत, अब हेरीटेज मदिरा के विनिर्माता मूल्य, अधिकतम फुटकर मूल्य एवं न्यूनतम विक्रय मूल्य का निर्धारण आबकारी आयुक्त के अनुमोदन से होगा। स्वसहायता समूह में कम से कम 25 सदस्य दसवीं कक्षा अथवा उसके समकक्ष अर्हता रखने वाला प्रावधान अब खत्म कर दिया गया है। हेरीटेज मदिरा निर्माण इकाई में योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय का ही हो सकेगा तथा इकाई में केवल अजजा समूदाय के व्यक्यिों से ही समस्त प्रकार की गतिविधियों का संचालन करवाया जायेगा। इसी प्रकार, अब हेरीटेज मदिरा के परिवहन हेतु एक ही अनुज्ञा-पत्र होगा जो भले की विनिर्माण इकाई से गोदाम तक एवं गोदाम से रिटेल दुकान तक किया जाये। पहले अलग-अलग परिवहन अनुज्ञा-पत्रों का प्रावधान था। हेरीटेज मदिरा के परिवहन में 0.25 प्रतिशत की छीजन यानि वेस्टेज (टूट-फूट) दी जायेगी। हेरीटेज मदिरा की फुटकर दुकान चलाने का एचएल-2 लायसेंस 5 हजार रुपये प्रति वर्ष के स्थान पर एक हजार रुपये प्रति वर्ष लगेगा।

भारतीय-संविधान दिवस आत्मचिंतन का पर्व………..

Indian Constitution Day is a day of introspection सलाहकार संपादक,,शीतला शंकर मिश्राहम भारत के लोगों ने 26नवम्बर1949को भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व लोकतंत्रात्मक गण राज्य बनाने के लिए संविधान को अंगीकृत,अधिनियमित व आत्मार्पित किया था।यही संविधान 26जनवरी 1950को लागू किया गया था।विश्व के सबसे बड़े संविधान की 74वीं वर्ष गाँठ का उल्लास स्वाभाविक है, लेकिन निराशा की खाइयाँ ढेर सारी हैं।संविधान दिवस को आत्मचिंतन दिवस के रूप में मनाने की आवश्यकता है। भारत का संविधान किसी क्रांति का परिणाम नहीं है। ब्रिटिश सरकार ने पराजित क़ौम की तरह भारत नहीं छोड़ा था। स्वाधीनता भी ब्रिटिश संसद के भारतीय स्वतंत्रता क़ानून 1947से मिली। भारतीय संविधान में ब्रिटिशसंसद द्वारा पारित 1935 के अधिनियम की ही अधिकांश बातें हैं। भारत ने भारत शासन अधिनियम 1935को आधार बनाकर गलती की थी। यह आरोप मै ही लगा रहा हूँ ऐसा नहीं है उस समय के विचारकों, क़ानून विदों ने भी लगाया था और आरोपों का उत्तर देते हुए डाक्टर अम्बेडकर ने स्पष्टीकारण दिया था कि उनसे इसी अधिनियम के आधार की अपेक्षा की गई है। भारत की संसदीय व्यवस्था, प्रशासनिक तंत्र व प्रधानमंत्री ब्रिटिश व्यवस्था की उधारी है। दुःखद है कि भारत ने अपनी संस्कृति व जन गण मन की भावना के अनुरूप अपनी राजव्यवस्था नहीं गढ़ी।जिसका परिणाम आप सबके समक्ष है।एक सैकड़ा से ऊपर संविधान संशोधनों के पश्चात् भी परिस्थितियों में मूल भूत सुधार नहीं हो सका है। सम्प्रति भारतीय संविधान और गणतंत्र संकट में है। संविधान सभा ने अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में मात्र 63 लाख 96हज़ार रुपए ही खर्च किये। जम कर बहस हुई,2473संशोधनों पर चर्चा हुई। आज संसद और विधान मंडलों के स्थगन शोर शराबे और करोड़ों रुपयों के खर्च विस्मय कारी हैं।संविधान में शतक से अधिक संशोधन हो चुके हैं। संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है।राजनीति भ्रष्ट उद्योग बन गई है। संविधान के शपथी मंत्री, सांसद, विधायक जेल जा रहे हैं। अनेक जेल में रहकर मंत्री पद के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। जेल में रहकर अनेक जन प्रतिनिधि चुनाव लड़ रहे हैं, जीत भी रहे हैं।निराशा की खाईं गहरी है , राष्ट्रीय उत्सव अब उल्लास नहीं पाते। संवैधानिक संस्थाएँ धीरज नहीं देतीं। आम जन हताश और निराश हैं। राजनीतिक अड्डों में ही गण तंत्र के उल्लास का जग मग आकाश है 15-20%लोग ही संविधान के सुख और गणतंत्र के माल से अघाए हैं। शेष अस्सी प्रतिशत लोग भुखमरी में हैं। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था मोदी मय है और राजनीतिक व्यवस्था गणतंत्र विरोधी है।मेरी दृष्टि में संविधान दिवस राष्ट्रीय आत्मचिंतन का पर्व होना चाहिए।जयहिंद

सरकार किसी की भी बने, इस बार डिप्टी सीएम का फार्मूला भी.

Regardless of which government is formed, this time the formula for the Deputy Chief Minister is also there. Manish Trivediभोपाल, मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में मतगणना के बाद सरकार किसी भी दल की बने चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, लेकिन इतना तय है कि अब मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम के फार्मूले भी चलेंगे। इस बार दोनों ही दलों में सीएम बनने की चाहत वाले नेताओं को संतुष्ट करने के लिये यूपी , महाराष्ट्र व छत्तीसगढ की तर्ज पर डिप्टी सीएम बनाया जायेगा। ताकि सत्तारूढ पार्टी के बडे नेताओं में समन्वय रहे। यदि भाजपा की सरकार बनती है तो सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम बनेंगे, इसमें एक दलित वर्ग से भी पार्टी के एक बडे नेता को संतुष्ट किया जायेगा। वहीं कांग्रेस की सरकार बनती है तो ग्वालियर-चंबल या विंध्य, अंचल के एक बडे नेता को अब डिप्टी सीएम बनाना तय है। यह नेता कमलनाथ की पिछली सरकार में भी पावरफुल मंत्री रहे थे।कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियां अब अंदर ही अंदर नाराजगी रोकने के लिये डिप्टी सीएम के फार्मूले पर काम कर रही है।

वोटिंग के बाद भाजपा के बडे नेता व मंत्री पूजा पाठ में तल्लीन.

After voting, senior leaders and ministers of the BJP were immersed in prayer. उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग के बाद प्रदेश के एक दर्जन मंत्री और भाजपा के बडे नेता पूजा पाठ में लगे हैं । इन्हें विश्वास है कि उनकी पूजा पाठ से नैया पार लग जायेगी। यह मंत्री और बडे नेता धार्मिक स्थानों पर निकल गये हैं, तो कुछ अज्ञात वास पर हैं। जहां नियमित तौर पर अपने धार्मिक सलाहकारों की सलाह से पूजा पाठ में लगे हैं।कुल मिलाकर भाजपा की सरकार के मंत्री व बडे नेता मध्यप्रदेश में हुई बम्पर वोटिंग से मन ही मन घबरा रहे हैं, और अपने सलाहकारों की सलाह पर परिणाम अपने पक्ष में आने की संभावना पर धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर रहे हैं। स्वयं मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पांचवी बार सरकार के रिपीट की संभावना पर पूजा पाठ कर रहे हैं। उन्होंने भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन किये हैं। कुल मिलाकर अब राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री , मंत्री व भाजपा के बडे नेता चुनावी घमासान में वोटर रूपी भगवान की मान मनोब्बल करने के बाद अब देव मंदिरों व देव आराधना की शरण में हैं। विशेष बात यह है कि इन सभी ने अपनी दिनचर्या भी पंडितों व ज्योत्षियों के बताई सलाह पर कर ली है। राज्य के एक बडे मंत्री तो एक वास्तु विशेषज्ञ की सलाह भी ले रहे है। वैसे यह सभी कवायद चुनाव जीतने के लिये ही है। वहीं एक भाजपा कार्यकर्ता का तो यह कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं की पूछ परख की होती तो इतनी चकल्लस ही क्यों करनी पडती।कांग्रेसी भी पूजा पाठ के सहारे राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को कडी टक्कर देने वाली कांग्रेस के नेता व प्रत्याशी भी अपनी जीत के लिये विभिन्न मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। किसी ने अपने घर अखंड रामायण तो किसी ने सुंदरकांड तक के आयोजन कराये हैं। स्वयं कमलनाथ भी अपने एक ज्योतिष व धार्मिक सलाहकार की सलाह से चल रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में कयासों का बाजार गर्म.

The market of speculations is hot in Chhattisgarh. Special Corrospondent. विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर छत्तीसगढ़ में कयासों का बाजार गर्म है। कोई कह रहा है राज्य में कांग्रेस सरकार बना लेगी, तो किसी का मत भाजपा के पक्ष में हैं। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर चुनाव नतीजों की समीक्षा में लगे हैं। जमीनी हकीकत को लेकर प्रत्याशियों से फीड बैक भी ले रहे हैं और उनकी शिकवा-शिकायत भी सुन रहे हैं। शिकायतों के आधार पर कांग्रेस ने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल भी दिया। सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल ताल ठोंक रहे हैं, पर संख्या बल को लेकर दोनों दल सशंकित बताए जाते हैं। बागियों और अधिकृत प्रत्याशियों के लिए काम न करने को लेकर दोनों दलों। खबर है कि कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता और मंत्री भी शिकवा-शिकायत के लिए प्रभारी महासचिव सैलजा के पास पहुंच गए। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के दिग्गजों की हालत भी पतली है, ऐसा न होता तो शिकवा-शिकायत की नौबत ही नहीं आती। पिक्चर तो तीन दिसंबर को ही साफ़ होगी।चुनावी दंगल में फंसे हैं पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे कहते हैं पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल के बेटे अमितेश शुक्ल और पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा इस बार चुनावी दंगल में फंस गए हैं। दोनों के ख़िलाफ भाजपा ने नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। चर्चा है कि एंटी इंकम्बैंसी फैक्टर और भितरघातियों के फेर में दोनों उलझ गए हैं। 2018 में अमितेश शुक्ल राजिम से ही 58 हजार से अधिक वोटों से जीते थे। अरुण वोरा ने भी दुर्ग से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 21 हजार से अधिक मतों से हराया था। गौरतलब है कि दोनों के पिता संयुक्त मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी भी पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं। दो धाकड़ लोगों की लड़ाई में अमित जोगी कितना वोट हासिल कर सकते हैं, इसी की चर्चा है। राजेंद्र कटारा को क्लीन चिट ? बीजापुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा को लेकर भाजपा लगातार शिकायत कर रही है। भाजपा उन पर पक्षपात का आरोप लगा रही है। कहते हैं भाजपा की शिकायत पर चुनाव आयोग ने करीब पखवाड़ेभर पहले जांच रिपोर्ट बुलवाई थी। कहा जा रहा है जांच रिपोर्ट में राजेंद्र कटारा के खिलाफ शिकायत सही नहीं पाई गई। भाजपा की टीम शुक्रवार को फिर राजेंद्र कटारा की शिकायत लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर गई और उन्हें मतगणना कार्य से दूर रखने की मांग की। खबर है कि भाजपा की टीम को सीईओ ने बीजापुर कलेक्टर के खिलाफ शिकायत सही नहीं पाए जाने की जानकारी दे दी। बीजापुर में पूर्व मंत्री महेश गागड़ा भाजपा प्रत्याशी हैं, उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम मंडावी से है। विक्रम मंडावी अभी विधायक हैं। बीजापुर विधानसभा में सात नवंबर को मतदान हुआ था। कांग्रेस नेता की धर्मगुरु से डील की चर्चा कहते हैं एक कांग्रेस नेता को अपनी जीत के लिए एक धर्मगुरु से लंबी डील करनी पड़ी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता को अपनी हार का अहसास होने के बाद धर्मगुरु की शरण में जाना पड़ा। कांग्रेस नेता कई बार से चुनाव जीत रहे हैं। कांग्रेस नेता जिस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां एक विशेष धर्म के वोटर काफी संख्या में हैं और वही हार -जीत का फैसला करते हैं। खबर है कि धर्मगुरु से डील के बाद समाज में प्रभाव रखने वाले करीब 40-50 लोग कांग्रेस नेता के समर्थन में उतरे। बताते हैं प्रारंभिक चरण में कांग्रेस नेता के खिलाफ बदलाव की हवा चल पड़ी थी। धर्मगुरु की कृपा से माहौल बदला। हार-जीत का अंतर कम रहने के कयास इस बार के विधानसभा चुनाव में कयास लगाया जा रहा है कि हार-जीत का अंतर काफी कम रहने वाला है। विश्लेषक और राजनीतिज्ञ मानकर चल रहे हैं कि सभी सीटों में मुकाबला कांटे का रहा। इस कारण प्रत्याशियों की जीत -हार काफी कम वोटों से होगी। जानकारों को किसी भी सीट में एकतरफा मुकाबला नजर नहीं आ रहा है। 2018 में मोहम्मद अकबर कवर्धा से 59 हजार से अधिक मतों से जीते थे। माना जा रहा है कि इस बार किसी भी प्रत्याशी के जीत का अंतर इतना बड़ा नहीं होगा। “आप” चर्चा से गायब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) बड़ी चर्चा में थी, लेकिन चुनाव के दौरान वह सुर्ख़ियों में नहीं रही। मतदान के बाद भी लोग ‘आप’ को याद नहीं कर रहे हैं। बसपा और जोगी कांग्रेस के कुछ सीटों पर जीत की बात हो रही है, लेकिन आप की जीत की बात कोई नहीं कर रहा है। नतीजों के बाद कांग्रेस और भाजपा को बहुमत नहीं मिलने पर बसपा और जोगी कांग्रेस की भूमिका की भी बात हो रही है।

रेत माफिया ने पटवारी को फिर ट्रैक्टर से कुचला.

The sand mafia then ran over the revenue officer with a tractor. Special Correspondent शहडोल/ब्यौहारी, शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर ब्यौहारी के ग्राम गोपालपुर बुढ़वा में रेत माफिया ने पटवारी की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। घटना को बीते शुक्रवार की रात को उस समय अंजाम दिया गया जब पटवारी अवैध रेत परिवहन होने की सूचना पाकर दल के साथ उसे रोकने गए थे। तभी ट्रैक्टर ड्राइवर से पटवारी प्रसन्ना सिंह की कहासुनी हुई। पटवारी ने रेत के अवैध परिवहन का विरोध किया जिससे गुस्साए ड्राइवर ने उन्हें कुचलकर मार डाला और फरार हो गया। बता दें बुढ़वा से लगे गोपालपुर, सथनी आदि ग्रामों में रेत का सालों से अवैध परिवहन हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार उसे रोकने का अनुरोध किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। थाना देवलोंद की पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। बताते हैं कि घटना स्थल पर अन्य लोग भी थे जो भाग गए।

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