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भारत-साउथ अफ्रीका के बीच पहले T20I पर बारिश ने फेरा पानी.

Rain played spoilsport in the first T20I between India and South Africa. टॉस के लिए भी मैदान में नहीं आ सके कप्तान भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला डरबन में बारिश की भेंट चढ़ गया और टॉस भी नहीं हो सका. स्टोरी हाइलाइट्स: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच पहला T20I हुआ रद्द बारिश के चलते पहले टी20 में फिरा पानी भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया. साउथ अफ्रीका के डरबन में होने वाले मैच से पहले टीम इंडिया का स्वागत बारिश ने किया और इसके चलते टॉस तक नहीं हो सका. जिससे टीम इंडिया के खिलाड़ी मैच होने का इंतजार करते-करते फिर बिना खेले होटल को लौट गए. इसके साथ ही फैन को भी भारत-साउथ अफ्रीका के बीच पहले टी20 का रोमांच देखने को नहीं मिला. डरबन के मैदान में मैच से पहले ही बारिश हो रही थी और बाद में रुकी ही नहीं, जिसके चलते इसे रद्द करना ही अंतिम विकल्प बचा. अब भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दूसरा टी20 मैच 12 दिसंबर को ग्केबरा में खेला जाएगा. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टी20 टीम इंडिया अपने घर में पांच मैचों की टी20 सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को 4-1 से हराने के बाद साउथ अफ्रीका पहुंची थी. जहां पर अगले साल 2024 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी के लिहाज से इस सीरीज को काफी अहम माना जा रहा है. लेकिन तीन मैचों की टी20 सीरीज के पहले डरबन में होने वाले मैच में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी.

राज्यपाल श्री विश्व भूषण हरिचंदन को विष्णु देव साई ने समर्थन पत्र सौंपा.

Vishnu Dev Sai presented a letter of support to Governor Shri Vishwabhusan Harichandan. भारतीय जनता पार्टी छ्त्तीसगढ़ के विधायक दल के नेता चुने जाने पर माननीय श्री Vishnu Deo Sai जी ने माननीय राज्यपाल श्री Biswa Bhusan Harichandan जी से मुलाकात कर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश प्रभारी माननीय श्री Om Prakash Mathur जी, माननीय केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश चुनाव सह प्रभारी श्री Mansukh Mandaviya जी, माननीय केंद्रीय मंत्री एवं पर्यवेक्षक श्री Arjun Munda जी एवं माननीय प्रदेश अध्यक्ष एवं लोरमी विधायक श्री Arun Sao जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

गरीब, शोषित, पीड़ित और मजदूर वर्ग को उनका हक दिलाना ही मानवाधिकारो का उद्देश्य है: रविंद्र सिंह तोमर.

Empowering the poor, oppressed, distressed, and the labor class to ensure their rights is the aim of human rights: Ravindra Singh Tomar. ग्वालियर! अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवश 10 दिसंबर के अवसर पर मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दिल्ली अल्पसंख्यक दिल्ली सरकार सलाहकार समिति के सदस्य रविंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में विशाल रैली का आयोजन कर एवं जनसभा कर आम जन को उनके मानवाधिकारो के प्रति जागरूक किया गया । रैली फूलबाग़ से महाराज बाड़े तक निकाली गयी एवं मानस भवन फूलबाग पर विशाल जनसभा मानवाधिकारों के संदर्भ में आयोजित की गयी जनसभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सदस्य अल्पसंख्यक आयोग (राज्यमन्त्री दर्जा ) रविंद्र सिंह तोमर ने कहा की वर्तमान परिदृश्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग मजदूरों एवं ग्रामीण पिछड़े इलाको के लोगो के मानवाधिकारो का हनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है! काम के बदले उचित पारिश्रमिक मिले ये हर मजदुर का हर भारतीय का मौलिक अधिकार भी है और मानवाधिकार भी है परन्तु वर्तमान में ना केबल मजदूरों का वल्कि पड़े लिखे नौजवानो को प्राइवेट क्षेत्र में उचित मेहनताना नहीं दिया जा रहा है! और श्रम कानून का भी उल्ल्घन भी किया जा रहा परन्तु चुकी आम जन को उनके मानवाधिकारो का ज्ञान नहीं है जिसके आभाव में वे शोषण सहन करते है साथ ही श्री तोमर ने पुलिस द्वारा सबसे अधिक मानवाधिकार हनन की बात कही| तोमर ने बताया की संस्था मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग को सबसे ज्यादा पुलिस प्रताड़ना से संबधित शिकायत मिलती है एवं ज्यादातर मामलों में पीड़ित पक्ष की पुलिस द्वारा प्रथामिक सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी होती जबकि प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाना हर पीड़ित का अधिकार है! तोमर ने बताया की संस्था देश भर में मानवाधिकार जागरूकता कैंप एवं जनसुनवाई शिविर लगाकर आम जन को उनके मानवाधिकार के प्रति जागरूक कर रही है एवं मानवाधिकार हनन के शिकार पीड़ितों को प्रधानमंत्री कार्यालय एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के माध्यम से न्याय भी दिलवा रही है!इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष तोमर द्वारा शासन प्रशासन एवं पुलिस विभाग के अधिकारियो को उत्कृष्ट सेवा कार्य करने पर मानवाधिकार रत्न सम्मान दिया गया कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित मीना ने बताया कि कर्तव्यों की वकालत तो सब करते हैं लेकिन अगर हर व्यक्ति अमल करें तो मानव अधिकारों की जरूरत ही ना पड़े अपने अधिकारों को समझना और पालन करना यही मानव अधिकार बताता है ।कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन कटारे, प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश शर्मा, सह सचिव भानु व्यास, संभागीय अध्यक्ष अखिलेश परिहार, जिला अध्यक्ष विष्णु जादौन ,प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र कंसाना प्रदेश उपाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग संजय कंसाना, ग्वालियर ग्रामीण अध्यक्ष प्राण सिंह छवाई ,विधान सभा अध्यक्ष सोनू जादौन, विधान सभा अध्यक्ष राजेंद्र महोबिया, जिला मीडिया प्रभारी सोनू कौशल, जिला महसचिव तरुण राठौर ,जिला सचिव धर्मेंद्र खटीक ,प्रदेश महासचिव नरेश तोमर ,जिला अध्यक्ष यूथ राहुल चौहान ,प्रदेश मीडिया प्रभारी धर्म परमार ,जिला उपाध्यक्ष बहादुर कुशवाह उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट धर्म सिंह चौहान ने किया। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमृत मीना जी को स्मृति चिन्ह देकर फूल माला पहनकर सम्मानित किया गया। इनका किया सम्मान….. डीएसपी नागेंद्र सिंह भदोरिया ,टीआई अजय पवार ,टी आईआर बी परिहार , टी आई नरेंद्र वर्मा टी इला टंडन, टी आई प्रीति भार्गव ,टीआई जितेंद्र सिंह तोमर, टीआई राजेश तोमर, टी आई यशवंत गोयल, समाजसेवी सुधीर त्रिपाठी, एडवोकेट धर्म सिंह चौहान को मानव रन मेडल सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कौन हैं मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद, लोकसभा चुनाव में BSP के लिए करेंगे कमाल?

Who is Mayawati’s successor Akash Anand, set to make a mark for BSP in the Lok Sabha elections? बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती के इस एलान के बाद यूपी की सियासत में एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। चर्चा तेज हो गई है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती के इस एलान के बाद यूपी की सियासत में एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। चर्चा तेज हो गई है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? आकाश आनंद, बसपा सुप्रीमो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। आकाश ने लंदन के बड़े कॉलेज से एमबीए की डिग्री हासिल की है। आकाश पिछले कई सालों से पार्टी में एक्टिव थे, यूथ को जोड़ने के लिए आकाश ने हाल में हुए तीन राज्यों के विधासनभा चुनाव की जिम्मेदारी संभाली थी। साल 2017 में हुई थी एंट्रीबता दें मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद की अचानक एंट्री नहीं हुई है। साल 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव हारने के बाद बसपा सुप्रीमो ने उन्हें जनता के सामने पेश किया था। साल 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने आकाश को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया था। इसी समय बसपा का सपा के साथ गठबंधन टूट गया था और आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कॉर्डिनेटर घोषित किया गया है। मायावती ने घोषित किया उत्तराधिकारीइसके बाद साल 2022 में हुए हिलाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई, जिसमें आकाश का नाम मायावती के बाद दूसरे नंबर पर था। उन्हें विभिन्न राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी कैडर को तैयार करने का काम भी सौंपा गया था। अब मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। हालांकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मायावती ही पार्टी की जिम्मेदारी संभालेंगी, जबकि अन्य राज्यों में आकाश आनंद पार्टी का नेतृत्व करेंगे। बसपा के लिए करेंगे कमाल?सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बसपा को बढ़ाने वाले आकाश आनंद परंपरागत राजनीति से इतर, हर मोर्चे पर पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। सोशल मीडिया पर आकाश का अकाउंट काफी एक्टिव रहता है और वह युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए काफी कोशिशें भी कर रहे हैं। एक प्रश्न लगातार उठ रहा है कि क्या मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा के लिए कुछ कमाल करेंगे?

पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है हम आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में पोस्ट के बाद अफसरों में सन्नाटा.

In the cycle of positions upheaval occurs, Silence prevails among officers after the post in the IFS Association WhatsApp group is altered. उदित नारायण भोपाल। 1993 बैच के आईएफएस शशि मलिक ने सेवानिवृत के आठ महीने पहले एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप पर अपने भावनाओं को संकलित कर ब्लॉग के रूप में एक पोस्ट किया है। एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में ब्लॉग पोस्ट होते ही लोकसेवक बिरादरी में सन्नाटा खींच गया। मलिक ने लिखा है कि पदस्थापना को बदलवाने के फेर में हम ऐसे दुष्चक्र में फंस जाते कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें नहीं मिला पाते है. हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है।नए साल के जुलाई में रिटायर होने वाले शशि मलिक जहां भी सदस्य रहे, वहां सुर्खियों में बने रहे। वर्तमान में वे मुख्यालय के समन्वय शाखा में प्रमुख हैं। यहां का पदभार संभालते ही उन्होंने तृतीय और चतुर्थ कर्मचारी को कार्यालय में गणवेश (वर्दी) पहनकर आने की अनिवार्यता आदेश जारी कर सुर्खियों में है। इसकी वजह यह है कि मुख्यालय में ही उनके आदेश का माख़ौल उड़ाया जा रहा है। अपने तमाम पदस्थापनाओं के दौरान अनुभवों को समेटते हुए एक ब्लॉग में लिखा कि कई बार हम अपनी वर्तमान पद स्थापना से संतुष्ट नहीं होते है तथा येन-केन-प्रकारेण पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में हमारा कई प्रकार से दोहन किया जाता है। जिसका प्रभाव पुनः हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है। इस प्रकार हम एक दुष्चक्र में फंस जाते है जिससे निकलने का हमें कोई भी मार्ग नहीं मिलता है। हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है। इस दुष्वक्र में फंसकर हम न तो स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय ले पाते हैं तथा न ही कर्तव्यों का सम्पादन उचित रूप से कर पाते है, जिसकी हमसे अपेक्षा की जाती है। हम अपने वर्तमान की उस समय से तुलना करें, जब हम इस पवित्र शासकीय सेवा के सदस्य नहीं थे। उस समय हमारी विचारधारा क्या थी, हम क्या सोचते थे ? परन्तु शासकीय सेवा में आते ही हमारे विभिन्न प्रकार के स्वार्थ जाग्रत हो जाते हैं तथा हम उन्ही की पूर्ति में लग जाते है। हमें इस प्रकार की मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता है। जहां भी हमारी पदस्थापना होती है, हमें उसी में पूर्ण रूप से आनंद लेना चाहिए, क्योंकि कई बार इस दुष्चक्र में फंसकर जाने-अनजाने में हम कोई ऐसा कार्य कर जाते हैं कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें न मिला सकेंगे तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों होने दी जाए ? हमसे अपेक्षा की जाती है कि प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य को हम नौकरी समझ कर नही बल्कि एक पवित्र कार्य मानते हुये निष्काम भाव से पूर्ण करे। हमारे कर्तव्य पालन का केवल एक ही तरीका है।

एचडीएफसी बैंक जबलपुर शाखा द्वारा 46 केंद्रों में रक्तदान अभियान के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया.

HDFC Bank’s Jabalpur branch collected 4661 units of blood across 46 centers through a blood donation campaign. भोपाल! भारत का अग्रणी निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार 8 दिसंबर, 2023 से शुरू होने वाले अपने राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के 15वें संस्करण का आयोजन जबलपुर के विजय नगर शाखा में किया। अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम परिवर्तन के तहत भारत के 1200 शहरों में 6,000 केंद्रों पर रक्तदान शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन निर्मला देवी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्री मुनेंद्र मिश्रा जी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। श्री मिश्रा ने एचडीएफसी बैंक द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बैंक व्यवसायिक दायित्वों के निर्वाह के साथ साथ सामाजिक दायित्व के निर्वहन में भी देश का नंबर वन बैंक बन चुका है। एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री अनूप शर्मा ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि इस दान से बड़ा और कोई दान नहीं हो सकता। श्री शर्मा ने शहर के सभी युवाओं को स्वेच्छा से रक्तदान करने का आग्रह किया। गत माह में एचडीएफसी बैंक के जबलपुर सर्किल के द्वारा 45 विभन्न कैंपों के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया गया। एचडीएफसी बैंक अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, कॉरपोरेट्स, रक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न प्रकार के रक्त दानदाताओं को जुटाने के लिए तैयार है। इस साल एक अनोखे दृष्टिकोण में एचडीएफसी बैंक ने लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए ‘फीलिंग ऑफ सेविंग समवन नामक एक फिल्म लॉन्च की है। फिल्म व्यक्तियों को इस जीवन रक्षक कार्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है और रक्तदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। यह फिल्म बैंक के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी, यह जनता के बीच उनके योगदान के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करेगा और अभियान में बड़े पैमाने पर रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक, श्री भावेश ज़वेरी ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हम लोगों को इस प्रयास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि दान किए गए रक्त की हर बूंद एक संभावित जीवन रक्षक है। अपने 15वें अखिल भारतीय रक्तदान अभियान के साथ हम नागरिकों को इस नेक काम में भाग लेने और अपना योगदान देने के लिए एक मंच देना चाहते हैं।” यह पहल 2007 में केवल 88 केंद्रों और 4000 दानदाताओं के साथ शुरू की गई थी जो केवल बैंक कर्मचारियों के बीच ही चलाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया और इसमें कॉलेज के छात्रों, कॉरपोरेट्स और सेना और सेवा कर्मियों को शामिल किया गया। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डसा” से सबसे बड़े (सिंगल डे, मल्टीपुल वेन्यू) रक्तदान अभियान के रूप में मान्यता और प्रमाणन प्राप्त हुआ। 2022 में बैंक ने 25 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया। कुछ महत्वपूर्ण दानकर्ता 1500- कॉलेजों, 550 कॉरपोरेट्स और 105- रक्षा और सेवा कर्मियों से आए जिन्होंने रक्तदान अभियान में भाग लिया। एचडीएफसी बैंक के रक्तदान अभियान के बड़े पैमाने और व्यापक आधार ने देश के समग्र रक्त संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।रक्तदान शिविर का संचालन जबलपुर शाखा के ऑपरेशन प्रबंधक श्री लीजू जोसेफ ने किया एवं समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से रक्तदान करने आए बैंक के ग्राहकों एवं युवा वर्ग का आभार व्यक्त किया।

मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा रंग बिखेरेंगी, कांग्रेस विधायक रामसिया भारती.

After 20 years, the saffron color will adorn the Madhya Pradesh Legislative Assembly, Congress MLA Ramsiya Bharti to lead. उमा की मलहरा सीट से जीतीं कांग्रेस की रामसिया; भगवा पहने विपक्ष में दिखेंगी भोपाल! मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा कपड़े पहने एक और साध्वी नजर आने वाली हैं। फर्क इतना है कि इस बार ये साध्वी भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस से हैं। हम बात कर रहे हैं, छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस की रामसिया भारती की। रामसिया भारती ने भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह लोधी को मात दी है। 2003 में उमा भारती इसी सीट से चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। खास बात यह है कि रामसिया भारती ने अपना पूरा चुनाव भाजपा की स्टाइल में ही लड़ा। भाजपा के हिंदुत्व का जवाब अपने तरीके से दिया। उमा भारती की ही तरह रामसिया भारती ने भागवत कथाओं से अपनी सियासी जमीन मजबूत की और आस्था की डोर को थामे मतदाताओं तक पहुंचीं। चुनावी भाषण भी प्रवचन के अंदाज में दिया। उमा की तरह टीकमगढ़ जन्मभूमि, छतरपुर को बनाया कर्मभूमि माथे पर लाल तिलक के साथ भगवा वस्त्र पहने, रामचरितमानस और भागवत कथा में पारंगत रामसिया भारती की कहानी भी कम रोचक नहीं है। उमा भारती की तरह रामसिया भारती भी टीकमगढ़ की रहने वाली हैं। दोनों ने ही राजनीति की शुरूआत छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से की। दूसरी समानता यह है कि दोनों ने ही बचपन से प्रवचन देना शुरू कर दिया था। इतनी समानता होने के बाद रामसिया भारती ने कांग्रेस की बजाए बीजेपी को क्यों नहीं चुना? इस सवाल का जवाब देते हुए वे कहती हैं- दादाजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। पिता भी लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे। फिर मेरी राह कैसे जुदा हो सकती थी? रामसिया ने कहा- कांग्रेस का आइडिया ऑफ नेशन, बीजेपी के हिंदुत्व से कहीं ज्यादा बेहतर है। भाजपा को उसके ही प्रचार की शैली में दी मात चुनाव प्रचार के दौरान रामसिया भारती भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व का जवाब, उसकी ही शैली में देती नजर आईं। भारती अपने भाषण की शुरूआत भारत माता की जय, भगवान श्री राम की जय, हनुमान जी महाराज की जय जैसे नारे लगाकर करतीं और अंत में केवल ‘कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद’ कहती थीं। वे अपनी रैलियों की शुरुआत भगवान राम के नाम और महाकाव्य रामचरितमानस के छंदों से करतीं, फिर हनुमान और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर बढ़ती थीं।रामसिया भारती ने विपक्षी भाजपा नेताओं की तुलना राक्षस पात्रों से करते हुए मतदाताओं को लुभाने का हर हथकंडा अपनाया। वे भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहती थीं कि बीजेपी धर्म, राम, गाय के नाम पर वोट मांगती हैं लेकिन भारतीयों के बीच वैमनस्य पैदा करती है। यह हिंदू धर्म के खिलाफ है और मैं इसे बदलने के लिए यहां आई हूं। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, विकास और दलबदल का मुद्दा उठाया। ये भी कहा, ‘मैं यहां विश्वासघात का बदला लेने आई हूं।’ रामसिया भारती के राजनीतिक कौशल का ही कमाल था कि मतदान से एक दिन पहले बसपा प्रत्याशी लखन अहिरवार ने अपना समर्थन उन्हें दे दिया। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद रामसिया भारती ये चुनाव जीतने में सफल रहीं। मध्यप्रदेश की राजनीति में रामसिया भारती तीसरी साध्वी 12वीं पास 36 वर्षीय रामसिया भारती मध्यप्रदेश की राजनीति की तीसरी साध्वी हैं। प्रदेश की राजनीति में 20 साल पहले उमा भारती के रूप में साध्वी की एंट्री हुई थी। 2003 में उमा भारती इस सीट से चुनाव जीत गई थीं लेकिन 2008 के चुनाव में मलहरा की जनता ने उन्हें हरा दिया। दरअसल, उमा ने भाजपा छोड़कर भारतीय जनशक्ति पार्टी बना ली थी और वे इसी पार्टी से चुनाव लड़ी थीं। उमा भारती की बीजेपी में वापसी हुई मगर वे उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहीं। मध्यप्रदेश की सियासत में दूसरी साध्वी के तौर पर प्रज्ञा ठाकुर की एंट्री हुई। मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी बनाई गईं प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा ने भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया। उन्होंने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मात दी। अब रामसिया भारती के तौर पर तीसरी साध्वी राजनीति में आई हैं।

विष्णु देव साय होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री, विधायक दल की बैठक में लगी मुहर

Vishnu Dev will be the new Chief Minister of Chhattisgarh, the seal was set in the legislative party meeting. आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय और रेणुका सिंह के नाम पर मुहर लग गई है। रायपुर! छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के पद को लेकर बना संशय रविवार को खत्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित विधायकों की बैठक में विष्णु देव साय को नया मुख्‍यमंत्री चुना गया। हालांकि इसकी औप‍चारिक घोषणा होना बाकी है। रायपुर: छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल की बैठक पर भाजपा नेता नारायण चंदेल ने कहा, “वे(विष्णुदेव साय) बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष हैं। बहुत सहज हैं, सरल हैं, विनम्र हैं और एक ऐसा चेहरा हैं जिसका कोई विरोध नहीं कर पाया..नव निर्वाचित विधायकों की बैठक रविवार को हुई। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में इस बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता का चयन किया गया। बैठक के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व सर्वानंद सोनोवाल और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम रायपुर के बीजेपी कार्यालय पहुंचे। बैठक में नवनिर्वाचित प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री व चुनाव सह प्रभारी डा. मनसुख मांडविया, भाजपा संगठन सह प्रभारी नितिन नबीन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह भी उपस्थित रहे। इस बीच पर्यवेक्षक अर्जुन मुंडा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा था शाम तक छत्तीसगढ़ को मिल जाएगा नया मुख्यमंत्री। ओबीसी या आदिवासी का फार्मूला इससे पहले पार्टी सूत्रों ने कहा था कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में अगर पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के चेहरे पर सहमति नहीं बनी तो पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आदिवासी मुख्यमंत्री के फार्मूले पर विचार कर सकती है। ओबीसी वर्ग से अरुण साव व ओपी चौधरी और आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय और रेणुका सिंह के नाम पर मुहर लगने की संभावना थी। बता दें कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 54 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बहुमत प्राप्त किया है। कांग्रेस 34 सीटों पर सिमट गई है। वहीं, एक सीट गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के खाते में पहुंची है।

मध्य प्रदेश को नया आयम देने मोदी की गारंटी”

Modi’s guarantee to give Madhya Pradesh a new dimension. संपादकीय, उदित नारायण, Sahara Samachaarभोपाल। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस का अहम मुद्दा भ्रष्ट सरकार ,भाजपा की छवि को सुधारने हेतु प्रधानमंत्री और अमित शाह ने मिलकर जो रणनीति बनाई उससे कांग्रेस के पास आती प्रतीत हो रही सत्ता हाथ से फिसल गई और आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्य प्रदेश मे केंद्रीय नेतृत्व ने एक साफ सुथरी छवि का मुख्य मंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है, कल विधायक दल की बैठक के बाद निर्णय हो जायेगा कि जाएगा कि मोदी के विकसित भारत बनाने की गारंटी का जिम्मा मध्य प्रदेश मे किसके हाथ होगा, राजनैतिक विश्लेषकों की राय में तो मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद मुख्य मंत्री तय करना कठिन हो गया है। लेकिन प्रधानमंत्री, अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष ने शायद अपना निर्णय मध्य प्रदेश इकाई को बता दिया है अब कुछ औपचारिकता ही शेष बची है !शिवराज और उनकी “मैनेजमैंट पॉलिटिक्स” लाख इस तथ्य को छुपाने ,दबाने का प्रयास करती रही पर इस कटु सत्य को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से छुपने का कोई प्रश्न ही नही था ,और इसलिए मध्य प्रदेश का चुनाव “मोदी“ के चेहरे पर लड़े जाने का निर्णय लिया गया और तभी यह तय हो गया था कि मध्य प्रदेश में “शिवराज सरकार “का अंत समीप है ! शिवराज सिंह चौहान और उनके चाटुकार नौकरशाह और मीडिया मैनेजर गर्व से “लाड़ली बहना” का नाम लेते है ! सब जानते है यदि मोदी का चेहरा और “ ब्रॉड मोदी “की गॉरंटी नही होती तो मध्य प्रदेश की “लाडली बहनाये ““कमलनाथ से इस योजना का लाभ लेना पसंद करती ! महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. यथार्थ यह है कि 18 साल में मध्य प्रदेश गरीबी के उस पड़ाव पर पहुंच गया जहाँ महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. ! यदि मोदी की गॉरंटी नही होती तो शिवराज सिंह की भाजपा मध्य प्रदेश मे 80 सीटों पर सिमट जाती !मध्यप्रदेश के जानकार जानते है “लाडली बहना “ शिवराज की “मनी मैनेजमैंट “का उदाहरण है ! मध्य प्रदेश 3.85 लाख करोड के कर्जे मे है ! अपने भृष्टाचार और घोटालो को दबाने के लिए कर्जे उठाकर चुनाव के पहले गरीब लाचार बेरोजगार महिलाओ को 1200 रूपये प्रतिमाह की रिश्वत दी गई है ! नोट के बदले लाचार बेरोजगार कराह रही “बहनाओ “के वोट खरीदने के लिए यह योजना लाई गई थी ! यदि मोदी ने गॉरंटी न दी होती तो बहनाये सरकार के बहकावे में आने वाली नही थी ! देखा जाए तो भाजपा की नई सरकार को मध्यप्रदेश के कर्ज चुकाने हेतु 3.85 लाख करोड़ के “ मोदी पैकेज “की जरूरत पडेगी नही तो प्रदेश के दीवालिया होने का खतरा है !मजे की बात यह है शिवराज सिंह अभी भी खुद को “हीरो “बताकर मुख्य मंत्री बनने के सपने देख रहे थे ! वे चाहते थे कि लोग उन्हे मध्यप्रदेश की जीत का श्रेय दें। इसीलिए वो दिल्ली ना आकर मध्य प्रदेश से भावनात्मक बयान दे जनता और प्रधानमंत्री को सन्देश दे रहे है, बेशक संघ और संगठन के कृपापात्र शिवराज अब भी संगठन पर निगाहें जमाये है लेकिन भ्रष्टाचार और भावना मे चुनावी नुकसान मोल लेने मे संगठन भी साथ नहीं आएगा!तीन राज्यो की “जीत के शिल्पकार “अमित शाह को हर अंधकार को समाप्त करने की मोदी की गॉरंटी याद है इसलिए शिवराज का पुनःमुख्यमंत्री बनना सिर्फ उनकी खुली ऑखो का सपना है क्योकि अमित शाह इतने भोले नही हैं कि शिवराज सिंह पुनः मुख्य मंत्री बनाए। मध्यप्रदेश के 3.85 लाख करोड़ के शिवराज काल के कर्जो को चुकाने केन्द्र से पैकेज देते रहें और शिवराज सिंह को बीजेपी का राजनीतिक शिखर सौप दें ! इसलिए शिवराज सिंह को जाना होगा ! यकीन मानिए जो भी मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री होगा उसका कद और किरदार इतना ऊंचा और उज्जवल होगा मध्य प्रदेश मोदी की पसंद पर नाज कर सकेगा ! सोमवार को 18 साल के तिमिर के छंटने और नए सूर्योदय का इंतजार कीजिए !

INDIA गठबंधन’ का अहम मुद्दा बनेगा चुनावी पारदर्शिता.

The formation of the ‘INDIA Alliance’ will become a crucial issue for electoral transparency. जबलपुर में राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा का बड़ा बयान Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpur. भोपाल। जबलपुर पहुचे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा चुनाव में पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर संसद, कोर्ट, चुनाव और जनता के बीच जाने का रास्ता खुला है। चुनाव में जो पारदर्शिता होनी चाहिए वह इस चुनाव में नहीं दिखी , चुनाव के पहले ग्राउंड में बदलाव का माहौल दिख रहा था । चुनावी नतीजों के बाद लोगों में आक्रोश दिख रहा है। विवेक तंखा ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था हो जिससे चुनाव निष्पक्ष रूप से हो संपन्न सकें, चुनाव में पारदर्शिता का मुद्दा INDIA गठबंधन का अहम विषय होगा । विपक्ष के अस्तित्व के लिए जरूरी है कि सब मिलकर लड़ाई लड़ें। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे की अटकलों को बताया कमलनाथ और हाई कमान के बीच का मामला है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला न होने को लेकर विवेक तन्खा का कहना है कि मुख्यमंत्री के चयन को भाजपा की आंतरिक रणनीति का हिस्सा बतया है।

आंखों में आए आंसू… बोले- सिर कटा सकता हूं लेकिन झुका नहीं सकता.

Tears welled up in the eyes… He said, “I can lose my head, but I cannot bow down. हार के बाद छलका चंदेरी के कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान का दर्द Special Correspondent, Sahara Samachaar, Ashoknagar. अशोकनगर। मध्यप्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है वहीं, कांग्रेस पार्टी को निराशा हाथ लगी है। ऐसे में जिले की तीन विधानसभा सीटों पर जहां मुंगावली और चंदेरी में बीजेपी तो अशोकनगर में कांग्रेस को जीत मिली है। ऐसे में कांग्रेस के विधायक हरी बाबू राय की धन्यवाद सभा में चंदेरी के कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान अपनी चुनाव में हार के दर्द को छुपा नहीं पाए। मंच से भावुक होते हुए कहा कि सिर कटा सकता हूं लेकिन सिर झुका नहीं सकता।दरअसल, मामला मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले का है। यहां रसीला चौराहे पर कांग्रेस के जीते हुए कैंडिडेट के समर्थन में धन्यवाद सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान मुंगावली के कांग्रेस प्रत्याशी तो शामिल ही नहीं हुए। वहीं, चंदेरी से कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान मंच पर भाषण देते हुए भावुक हो गए। नहीं छुपा पाए हार का दर्दचंदेरी के हारे विधायक ने अशोकनगर की जनता से कहा कि उन्होंने बहुत सही निर्णय लिया है। लोग कहते थे 40 हजार और 50 हजार से कांग्रेस की जीत होगी। लेकिन कहीं न कहीं जो भी खेल है कुछ तो खेल है। इस शंका से मना नही किया जा सकता। 2003 में जब पूरे प्रदेश में 38 विधायक चुने गए थे उस समय मुंगावली की जनता ने विपरीत परिस्थिति में मुझे चुनाव जिताया था। टीवी चैनलों पर आपने देखा होगा ईवीएम का नाटक। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा कि में चुनाव हार गया। मुझे हारने जीतने की कोई तमन्ना नहीं है। मैं किसी के सामने सिर झुक नहीं सकता सिर कटा सकता हूं जीवन में मृत्यु कटु सत्य है जो आएगी। किसी के सामने झुक जाना जीते जी मर जाने से भी बेकार है। हार जीत होती है संघर्ष करूंगा लेकिन झुकूंगा नहीं। महाराणा प्रताप का वंशज हूं। उन्होंने घास की रोटी खाई लेकिन किसी के सामने झुके नहीं। मुझे मौत से डर नहीं लगता और जिसे मौत से डर नहीं लगता उसे व्यक्ति से क्या डर लगेगा।

सीएम पद पाने दावेदार टस से मस नहीं, एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में फंसा पेंच.

The aspirant claiming the Chief Minister position is not making headway despite efforts; caught in a deadlock between Tussle in Madhya Pradesh, Rajasthan, and Chhattisgarh. भाजपा को सीएम चुनने में जब भी 5 दिन से ज्यादा वक्त लगा, हो गया यह खेला, भाजपा को सीएम चुनने में आ रहा पसीना उदित नारायणभोपाल। विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई है। बड़े से लेकर छोटे नेता तक एक ही बात कह रहे हैं- सबकुछ हाईकमान तय करेंगे। हाईकमान मतलब नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा। हालांकि, मुख्यमंत्री चुनने में हो रही देरी के गणित ने बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी है। बीजेपी ने जब भी मुख्यमंत्री चुनने में 5 दिन से ज्यादा का वक्त लगाया, तब पार्टी ने पुराने के बदले नए चेहरे को तरजीह दी।मसलन, 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी ने 9 दिन का समय लगाया था। उस वक्त राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे बड़े नेता मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे, लेकिन बीजेपी ने नए चेहरे महंथ योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी सौंपी।उसी साल उत्तराखंड के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी। पार्टी को यहां भी मुख्यमंत्री चुनने में 8 दिन का वक्त लग गया था। पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि बीएस खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पुराने नेता यहां मजबूत दावेदार थे।इसी तरह सीएम सिलेक्शन के लिए हिमाचल (2017) और महाराष्ट्र (2014) में पार्टी को 7 दिन का वक्त लगा था। दोनों जगहों पर बीजेपी ने पुराने चेहरे को नकार कर नए चेहरे को कमान सौंपी थी।हिमाचल में धूमल और महाराष्ट्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे। हरियाणा (2014) में भी बीजेपी को मुख्यमंत्री चुनने में 6 दिन का वक्त लगा था। यहां पार्टी ने नए चेहरे मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया था। 2013 में लगे थे 3 दिन का वक्त2013 में भी भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बंपर जीत मिली थी। उस समय राजनाथ सिंह बीजेपी के अध्यक्ष थे। 2013 में पार्टी को मुख्यमंत्री चुनने में 3 दिन का वक्त लगा था। 8 दिसंबर को चुनावी नतीजे आए थे और 11 दिसंबर को पार्टी ने मध्य प्रदेश में शिवराज और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को कमान देने की घोषणा कर दी थी। 12 दिसंबर को वसुंधरा राजे के नाम का ऐलान किया गया था। 2013 में चुनाव परिणाम आते ही बीजेपी ने इन राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था। उस वक्त मध्य प्रदेश के लिए सुषमा स्वराज, राजीव प्रताप रूडी और अनंत कुमार को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। वेंकैया नायडू, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक थे, जबकि अरुण जेटली, अमित शाह और कप्तान सोलंकी बतौर पर्यवेक्षक बनकर राजस्थान गए थे। 5 दिन से कम का वक्त लगा यानी चेहरा रिपीट2019 में हरियाणा चुनाव के रिजल्ट के 3 दिन बाद ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने मनोहर लाल खट्टर को ही दूसरी बार राज्य की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी सौंपी।गुजरात में भी 8 दिसंबर 2022 को चुनाव परिणाम आया, जिसमें बीजेपी को एकतरफा जीत मिली। पार्टी ने 3 दिन के भीतर ही मुख्यमंत्री का नाम ऐलान कर दिया। भूपेंद्र पटेल को ही पार्टी ने सीएम की जिम्मेदारी सौंपी। 2019 में महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के 5 दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया था। हालांकि, शिवसेना की वजह से फडणवीस उस वक्त सरकार नहीं बना पाए थे। शिवसेना ने पावर शेयरिंग के मुद्दे पर बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था। सीएम हर बार रिपीट, एक अपवाद शिवराज के लिए खतरा2014 के बाद सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने जिस भी राज्य में चुनाव जीती है, वहां के मुख्यमंत्री नहीं बदला है। हालांकि, 2021 का असम चुनाव इसका अपवाद है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यही डर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सता रहा है। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद विजय रुपाणी को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया था। 2019 में हरियाणा में भी यही हुआा। जीत के बाद पार्टी ने खट्टर पर ही भरोसा जताया। 2022 में यूपी, गोवा और उत्तराखंड में भी जीत के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री नहीं बदला। उत्तराखंड में तो मुख्यमंत्री धामी विधानसभा का चुनाव भी हार गए थे। इसी तरह अरुणाचल में जीत के बाद पेमा खांडू और त्रिपुरा में जीत के बाद माणिक साहा की सत्ता बरकरार रही। दोनों चुनाव से पहले भी राज्य के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री को लेकर क्यों फंसा है पेंच?पहला- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री चेहरे के बिना बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी थी। तीनों ही राज्य में बीजेपी का यह प्लान काम कर गया है। इसी वजह से मुख्यमंत्री तय करने में पार्टी को मशक्कत करनी पड़ रही है।दूसरा- पिछले 2 दशक राजस्थान में वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द बीजेपी की राजनीति घूम रही है। कहा जा रहा है कि हाईकमान अब इसे खत्म करना चाहती है।तीसरा- राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान काफी मजबूत स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव के नजदीक होने की वजह से बीजेपी कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहती है। कहां कितने दावेदार, एक नजर इस पर भी बीजेपी कैसे चुनती है राज्यों में मुख्यमंत्री?भारतीय जनता पार्टी में भी मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया कांग्रेस की तरह ही है। चुनाव में जीत के बाद दिल्ली से पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं। पर्यवेक्षक सभी विधायकों से राय लेते हैं और आलाकमान को बताते हैं। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना फैसला सुनाते हैं, जो विधायक दल की मीटिंग में बताया जाता है। कई बार पेंच फंसने पर सभी बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया जाता है और उसके बाद फैसला सुनाया जाता है। इस बार बीजेपी ने राजस्थान के लिए राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े, मध्य प्रदेश के लिए मनोहर लाल खट्टर, के लक्ष्मण और आशा लकड़ा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री चयन के लिए बीजेपी ने अर्जुन … Read more

फर्जी दस्तावेज लगाकर 16 साल से नौकरी कर रहे 8 शिक्षक, 15 साल चली जांच.

Eight teachers have been working for 16 years using fake documents; investigation has been ongoing for the past 15 years. मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर Special Correspondent, Sahara Samachaar, Gwalior भोपाल। ग्वालियर में शिक्षक भर्ती परीक्षा के जरिये टीचर के रूप सोलह साल से नौकरी कर रहे, आठ शिक्षकों की जांच मे बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि इन टीचरों ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के समय फर्जी मार्कशीट और फर्जी दस्तावेज लगाए थे। पुलिस ने ऐसे आठ शिक्षकों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर ली है। इसकी खबर फैलने के बाद न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। 2007-08 में बने थे शिक्षक2007-08 में मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा को पास करने के बाद कुछ शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी पाने का आरोप लगा था। ग्वालियर के भितरवार इलाके में फरियादी गौरी शंकर राजपूत ने इसकी शिकायत थाने में की थी। जिसमें बताया गया था कि जनपद पंचायत भितरवार में पदस्थ शिक्षा कर्मियों ने फर्जी और कूटरचित अंकसूचियों की संरचना करके शासकीय सेवा प्राप्त कर अनाधिकृत रूप से शासकीय सेवा का लाभ उठाया है। उन्होंने इस मामले में धर्मेंद्र सिंह यादव, भगवत शर्मा, कृष्णा ,पान सिंह यादव, अनिल पाठक, बृजेंद्र सिंह रावत, अरविंद सिंह राणा, सतीश कुमार रजक, केशव सिंह पर फर्जी दस्तावेज लगाकर शासकीय नौकरी पाने का आरोप लगाया था। 2008 से चल रही थी जांच, 15 साल बाद हुई एफआईआरएडिशनल एसपी ग्वालियर निरंजन शर्मा ने बताया कि इस मामले पर विभिन्न बिन्दुओं पर बारीकी से जांच पड़ताल और साक्ष्य संकलन किया गया और फरियादी द्वारा प्रस्तुत आरोप के दस्तावेज सही पाए जाने पर आठ आरोपियों के खिलाफ थाना भितरवार में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना करके शासकीय नौकरी पाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच का दायरा बढ़ने पर बढ़ सकती है आरोपियों की संख्याअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अभी जांच जारी है और इस मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इस एफआईआर की सूचना से पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग में भूचाल मच गया है। क्योंकि जांच का दायरा बढ़ा तो प्रदेश भर में ऐसे सैकड़ों मामले उजागर हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

उत्तरप्रदेश जा रहा ट्रक रीवा से गायब, ड्राइवर मलिक के साथ मिलकर 25 लाख रुपए की लहसुन कर दिया पार.

A truck, heading to Uttar Pradesh from Rewa, has gone missing. The driver, along with the owner, reportedly vanished after collectively embezzling 25 lakh rupees. भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा से एक हैरान कर देने वाली करना सामने आई है। यहां बदमाशों ने एक व्यापारी को सुनसान स्थान पर छोड़कर एक ट्रक 25 लख रुपए की लहसुन गायब कर दी है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने वाहन मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक सहित चोरी गया लहसुन बरामद का लिया गया है। जानकारी अनुसार शमशाद अहमद निवासी गाजीपुर उत्तर प्रदेश ने शाजापुर से एक ट्रक लहसुन 25 लाख में खरीदा था। लहसुन को नूर मोहम्मद ट्रांसपोर्ट शुजालपुर से वाहन (एमएच 18 बीजी 5235) में लोड कर ड्राइवर और कालिंजर के साथ लेकर गाज़ीपुर जा रहे थे। 4 दिसंबर को क्योंटी पुलिया के पास सुबह 10 बजे पहुंचे तो ड्राइवर ने नहाने व खाना खाने के नाम पर ट्रक को रोक दिया। दोपहर 2:30 बजे उन लोगों ने निकलने का प्रयास किया, तो ट्रक चालू नहीं हुआ। ड्राइवर ने इसकी जानकारी वाहन मालिक विजय पटेल निवासी जमुई को दी तो वह गढ़ पहुंच गया। ऊपर ट्रक मिस्त्री को ढूंढ़ने के बहाने ड्राइवर अवधेश कुमार साकेत और व्यापारी को अपने साथ लेकर चला गया। व्यापारी को उन्होंने कुछ दूर एक सुनसान स्थान पर उतार दिया और चुपके से वहां से निकलकर लहसुन लोड ट्रक को लेकर फरार हो गए। पीड़ित व्यापारी किसी तरह क्योंटी पुलिया पर पहुंचा तो वहां ट्रक नहीं था। देर समय तक ट्रक को ढूंढता रहा। इसके बाद थाना पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। वाहन को ट्रेस कर पुलिस ने विजय पटेल को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर ट्रक बरामद हो गया। आरोपियों ने मऊगंज में किराए का एक कमरा लेकर वहां लहसुन अनलोड किया था, जहां से मंडी में बेचने वाले थे। घटना में ट्रक मालिक व ड्राइवर सहित जीप में सवार आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। रीवा पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्रक में लहसुन लोड कर आरोपी गाजीपुर जा रहे थे। बीच रास्ते में व्यापारी को उतार कर लहसुन लेकर गोल हो गए। शिकायत मिलने पर केस दर्ज कर ट्रक सहित लहसुन को बरामद कर लिया है। ट्रक मालिक से पूछताछ की जारी है।

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