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राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन डॉ. कुसमरिया ने संभाला कामकाज, अक्टूबर में हुई थी नियुक्ति.

Dr. Kusmariya assumed office as the Chairman of the State Backward Classes Commission, appointed in October. डॉ. कुसमरिया को राज्य शासन ने मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने आयोग की गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्त की. आयोग मुख्य रूप से प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लिये हितप्रहरी के रूप में कार्य करता है! मध्य प्रदेश में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने आज भोपाल के श्यामलाहिल्स हिल्स मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचकर अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया. इस मौके पर पिछड़ा वर्ग से जुड़े जन-प्रतिनिधि भी मौजूद थे डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया (जन्म 30 जुलाई 1942) उनका जन्म सकोर में एक किसान परिवार में हुआ था। वह 8 फरवरी 2019 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए, फिर भारतीय जनता पार्टी10वीं, 11वीं के सदस्य थे। , 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा भारत की। 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में उन्होंने दमोह निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 14वीं लोकसभा में उन्होंने खजुराहो निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य का। 2008 में, वह मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। के अध्यक्ष भी हैं।। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री बने। वर्तमान में उन्हें वर्ष 2023 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है!

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

राइस मिल में सत्यापन और चैक पोस्ट की निगरानी जैसे कार्यो में जुटा अमला.

Implementation of processes such as verification at the rice mill and monitoring of check posts. Special Correspondent Sahara Samachaar, Balaghat. बालाघाट। इन दिनों जिला प्रशासन द्वारा समर्थन मूल्य पर उपार्जन कार्यो को लेकर संजीदगी से कार्य किये जा रहे है। कलेक्टर ड़ॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा लगातार समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों का असर फील्ड में भी दिखाई देने लगा है। राजस्व अधिकारियों के अलावा सम्बंधित विभागों का अमला खरीदी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में सक्रिय है। मंगलवार को कटंगी अनुभाग अंतर्गत सावंगी, नांदलेसरा, टेकारी, बोथवा, चिकमारा, मानेगांव, कटंगी केंद्रों में धान खरीदी कार्य तहसीलदार छवि पंत की निगरानी में प्रारम्भ कराया गया। वही उपार्जन के लिए दिए अन्य निर्देशों के पालन संलग्न है। कई खरीदी केंद्रों पर बड़ी संख्या में किसानों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में श्रीगणेश किया गया। वारासिवनी एसडीएम कामिनी ठाकुर ने अश्विन राइस मिल खैरलांजी में धान का भौतिक सत्यापन जैसी गतिविधियों के द्वारा निरीक्षण किया। वही तहसीलदार वंदना कुशराम ने धान के एफएक्यू की जानकारी प्राप्त करते हुए निरीक्षण किया। इस तरह राजस्व विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी कर्मचारी उपार्जन कार्यो की निगरानी में सक्रिय है।

कैमोर पुलिस की ओवरलोडिंग वाहनों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही।

Camore police take action against overloaded vehicles with fines. कटनी, थाना कैमोर के द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान 05 ओवरलोड वाहनों पर चालानी कार्यवाही कर 74,000/- रुपये समन शुल्क वसूल किया। श्री अभिजीत कुमार रंजन पुलिस अधीक्षक कटनी के निर्देशन व श्री मनोज केडिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, श्री के.पी. सिंह अनुविभागीय अधिकारी महोदय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कैमोर सुदेश कुमार समन द्वारा अपने थाना स्टाफ के साथ वाहन चेकिंग के दौरान 05 वाहनों पर चालानी कार्यवाही कर 74,000/- रुपये समन शुल्क वसूल किया । कार्यवाही का विवरण – दिनांक 12/12/2023 मेहगाँव रोड पर वाहन चेकिंग के दौरान बॉक्साइट, डस्ट व गिट्टी की ओवरलोडिंग करते 05 अलग अलग डंपरों पर ओवरलोडिंग की चालानी कार्यवाही कर कुल 74000/- रू समान शुल्क वसूल किया गया । उक्त कार्यवाही में – सुदेश कुमार निरीक्षक थाना प्रभारी कैमोर, स उ नि हुकुम सिंह, प्र.आर 206 चंद्रभान विश्वकर्मा, आर 739 विनोद, आर 740 सौरभ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शासकीय ज़िला चिकित्सालय के सभी डॉक्टर्स एवं नसों का स्वागत सम्मान किया गया.

All doctors and staff of the government district hospital were welcomed and honored. बुरहानपुर! जिला अस्पताल के सभी 40 डॉक्टर्स एवं 90 नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ एवं सभी डिपार्टमेंट के पदाधिकारियों का असहाबे सुफफ़ा एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक सेवको के हाथ से सर्टिफिकेट एवं पौधा और फूल माला से उनका सम्मान किया गया। सोसाइटी के अध्यक्ष एवं युवा समाज सेवी हाजी अब्दुल बासित ने बताया के इस आयोजन का मक़सद सभी डॉक्टर एवं मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की हौसला अफजाई करना है। इस सम्मान समारोह की आयोजन से हमारी टीम को बहुत गर्व महसूस हुआ है। तिलावत ए कुरान ए पाक से प्रारंभ हुए इस प्रोग्राम की अध्यक्षता निगम अध्यक्ष श्रीमती अनीता अमर यादव ने की एवं पूर्व प्रदेश महासचिव श्री अजय सिंह रघुवंशी, नेता प्रतिपक्ष श्री अकील औलिया, उप नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उबेद शेख, पार्षद फहीम हाशमी, पार्षद आसिफ खान, समाजसेवी मुशर्रफ़ खान, समाजसेवी शेख अजगर, एवं असहाबे सुफ्फा एजुकेशनल सोसाइटी के सभी पद अधिकारी मौजूद थे।

संसद की सुरक्षा में भारी चूक : दो घटनाएं, 4 गिरफ्तार, लोकसभा में धुआं ही धुआं.

Serious lapses in Parliament security: Two incidents, 4 arrested, chaos in the Lok Sabha दिल्ली: संसद पर हमले की बरसी के दिन ही संसद की सुरक्षा में बड़ी चूक देखने को मिली है. दरअसल, बुधवार दोपहर करीब एक बजे दो लोग लोकसभा में दर्शक दीर्घा से सदन के भीतर कूद पड़े और पीली गैस का स्प्रे करने लगे. इसके बाद इनमें से एक शख्स लोकसभा स्पीकर की कुर्सी की तरफ दौड़ने लगा. इन आरोपियों के सदन में कूदने के बाद वहां मौजूद सांसदों ने हिम्मत दिखाते हुए दोनों आरोपियों को सदन के अंदर ही पकड़ लिया. इस घटना को लेकर अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि घटना की जांच हो रही है. दोनों आरोपी पकड़े गए हैं और इनके पास से सभी तरह की सामग्री को जब्त कर लिया गया है. वहीं, संसद के बाहर नारेबाजी कर रही एक महिला और शख्स को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. हालांकि, बाद में इन सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. दर्शक दीर्घा अगले आदेश तक के लिए बंद इस घटना के बाद दर्शक दीर्घा को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है. दरअसल, दोनों युवकों ने दर्शक दीर्घा के जरिए ही घटना को अंजाम दिया. दो गुट में आए थे आरोपी बता दें कि आरोपी शख्स ने सदन के अंदर फ्लोरोसेंट गैस का छिड़काव भी किया. खास बात ये है कि हमला करने वाले लोग दो अलग-अलग ग्रुप में आए थे. एक ग्रुप संसद के अंदर गया जबकि दूसरा ग्रुप संसद भवन की इमारत के बाहर ही रुका रहा. दिल्ली पुलिस ने बाहर मौजूद आरोपियों को पकड़ा लिया है जबकि अंदर घुसे शख्स को संसद भवन के अंदर ही पकड़ लिया गया है. संसद के अंदर जो 2 लोग पकड़े हैं ,उनमें एक नाम सागर शर्मा है और दूसरे का नाम मनोरंजन डी है. ये दोनों कर्नाटक के हैं. बीजेपी सांसद ने कही ये बात बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह ने एनडीटीवी से कहा कि लोकसभा में शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान अचानक दो लड़के विजिटर्स गैलरी से नीचे कूद गए, उन्होंने पीले रंग की गैस भी छोड़ी. यह सिक्योरिटी लैप्स का मामला है. लोकसभा की सिक्योरिटी ब्रीच हुई है. हालांकि सांसदों ने तुरंत उन लड़कों को पकड़ लिया. “20 साल के थे दो युवक” वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि अचानक करीब 20 साल के दो युवक दर्शक दीर्घा से सदन में कूद पड़े और उनके हाथ में टिन के डिब्बे थे, जिनसे पीला धुआं निकल रहा था. उनमें से एक अध्यक्ष की कुर्सी की ओर भागने की कोशिश कर रहा था. उन्होंने नारे लगाए. यह धुआं जहरीला हो सकता था.संसद हमले की बरसी के दिन यह सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है !

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Jagdish Devda, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव लेंगे शपथ, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Chief Minister of the state, Mohan Yadav, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal.

नव नियुक्त मुख्यमंत्री मोहन यादव , क्या रहा अभी तक का उनका सफर.

Newly appointed Chief Minister Mohan Yadav Political journey. आइये जानते हैं मध्यप्रदेश के नव नियुक्त मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में , क्या रहा यहां तक का उनका सफर जीवन परिचयनाम – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मप्र शासनजन्म – 25 मार्च 1965 उज्जैनशिक्षा – बीएससी, एलएलबी, एमबीए, पीएचडी (राजनीति शास्त्र))तीसरी बार उज्जैन दक्षिण विधान सभा से लगातार निर्वाचित,पूर्व दायित्व: केबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, जुलाई 2020 सेउच्च शिक्षा मंत्री के रूप में देश में पहली बार मप्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन, 54 नए महाविद्यालय खोलेसन् 2004-2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा)।सन् 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा)।भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य. सन् 2013-2016 में भा.ज.पा. के अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक। उज्जैन के समग्र विकास हेतु अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार और इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित। मध्यप्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास हेतु सन् 2011-2012 एवं 2012-2013 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत. सन् 2013 में चौदहवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित। सन् 2018 में दूसरी बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित. दिनांक 2 जुलाई,. 2020 को मंत्री बने। 2023 में तीसरी बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित और मुख्यमंत्री बने। छात्र राजनीति – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश के विभिन्न पदों पर रहे, राष्ट्र्रीय महामंत्री के पद के दायित्वों का निर्वाहन, माधव विज्ञान महाविद्यालय में 1982 में छात्र संघ के संयुक्त सचिव तथा 1984 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित। सामाजिक क्षेत्र- 2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष, वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य,वर्ष 2000-2003 तक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद (सिंडीकेट) सदस्य के दायित्व का निर्वाहन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकलांग पुर्नवास केन्द्रों में सक्रिय भागीदारी।राजनैतिक क्षेत्र – सन् 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में अध्यक्ष. सन् 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख। सन् 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री तथा सन् 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री. सन् 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्ड कार्यवाह। सायं भाग नगर कार्यवाह एवं 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह। सन् 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य। सन् 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य. सन् 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी, सन् 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री एवं सन् 2004 में भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य। सन् 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य। सन् 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष। धार्मिक क्षेत्र – विक्रमोत्सव-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आरंभ विक्रम संवत पर प्रारंभ होने वाले भारतीय नववर्ष मनाने की परंपरा, विगत 11 वर्षों से प्रतिवर्ष भव्य उत्सव शिप्रा तट पर आयोजित किया जाता है, धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति, तीज, त्यौहार, रीति-रिवाज के पारंपरिक आयोजनों में शामिल होकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला, विज्ञान, पुरातत्व, वेद ज्योतिष से जुडने हेतु जनमानस को अभिप्रेरित किया।साहित्य: विक्रमाँदित्य शोधपीठ का गठन,लेखन: उज्जैयनी का पर्यटन, विश्वकाल गणना के केंद्र डोंगलाप्रकाशन: संकल्प शुभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव आदि पुस्तकों का प्रकाशनविदेश यात्रा: अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, बैंकाक, थाईलैंड, चीन, नेपाल, बर्मा, भूटान, म्यांमार, अरब देशों की यात्रा।इतना ही तलवारबाजी इनके शौक में शुमार है, दोनो हाथों से एक साथ तलवार भांजने में महारथ हासिल है।

रिंकू-सूर्या के विस्फोटक खेल पर फिरा पानी, भारत 5 विकेट से हारा.

Rinku-Surya’s explosive play turned the tide, and India lost by five wickets. साउथ अफ्रीका ने भारत को बारिश से प्रभावित दूसरे टी20 मुकाबले में पांच विकेट से हरा दिया. गबेख़ा में खेले गए मैच में मेजबान टीम को डकवर्थ लुईस स्टर्न सिस्टम से 152 रन का लक्ष्य मिला जो उसने सात गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. उसकी ओर से ओपनर रीजा हेंड्रिक्स ने सबसे ज्यादा 49 रन की पारी खेली. कप्तान एडन मार्करम ने 30 रन बनाए. भारत की ओर से मुकेश कुमार को दो कामयाबी मिली. भारत ने रिंकू सिंह और कप्तान सूर्यकुमार यादव की अर्धशतकीय पारियों 19.3 ओवर में सात विकेट पर 180 रन बनाए. इन दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 48 गेंद में 70 रन की साझेदारी हुई. रिंकू ने 39 गेंद में नाबाद 68 पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए तो सूर्या ने 35 गेंद की पारी में पांच चौके और तीन छक्के लगाए. भारतीय पारी के आखिरी ओवर में बारिश ने खलल डाला और टीम की पारी यही खत्म हो गयी. दक्षिण अफ्रीका के लिए गेराल्ड कोएत्जिया ने 3.3 ओवर में 32 रन पर तीन विकेट लिए. दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए डकवर्थ लुईस पद्धति से 15 ओवर में 152 रन का लक्ष्य मिला. सीरीज का पहला मैच भी बारिश की भेंट चढ़ा था.लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका ने ताबड़तोड़ अंदाज में बैटिंग का आगाज किया. रीजा ने पारी की पहली ही गेंद पर चौका बटोरा. फिर मोहम्मद सिराज को लगातार दो चौके और मारे. इस दौरान वे एक बार बाल-बाल बचे. मैथ्यू ब्रेत्जके ने अगले ओवर में अर्शदीप सिंह को चौका और छक्का लगाया. इसी ओवर की आखिरी गेंद पर रीजा ने ऐसा सिक्स लगाया तो मैदान के बाहर जाकर गिरा. इससे मेजबान टीम ने दो ओवर में ही 38 रन बना लिए. सूर्या ने तीसरे ओवर में जडेजा को बॉल थमाई. इससे केवल पांच रन गए और ब्रेत्जके का विकेट भी मिला जो रन आउट हो गया.

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