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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व , गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला

Bandhavgarh Tiger Reserve skeleton of tiger cub found in deep ditch बाघ शावक का कंकाल मिला, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से प्रबंधन चिंता में उमरिया ! बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बुधवार को गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला है। उसकी संदिग्ध मौत को लेकर प्रबंधन में चिंता है। बताया जा रहा है कि करीब 25 दिन पहले ही शावक की मौत हो गई थी। उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फिर बाघ का कंकाल मिला है। संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ शावक की मौत से प्रबंधन चिंता में है। माना जा रहा है कि 25 दिन पहले शावक की मौत हुई है।उमरिया जिले के बांधवगढ़ में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है तो वहीं तेजी से कम भी होती हुई नजर आ रही है। प्रबंधन चाहे कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन वह ट्रैप कर पाने में नाकाम साबित होता नजर आ रहा है। पैदा होने से लेकर बड़े होने तक चारों तरफ कैमरे को लगाकर बाघ के बच्चों की निगरानी की जाती है, लेकिन फिर भी बाघ के बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जहां उसका अब कंकाल मिला है। बता दें कि बुधवार के दिन कैमरा ट्रैप को लगाते समय गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल देखा गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की पतौर परिक्षेत्र अंतर्गत चिल्हारी बीच के आर 421 के कुशवाहा नाला के समीप यह कंकाल मिला है। प्रबंधन की मानें तो यह कंकाल देखकर उन्हें लग रहा है कि यह लगभग 25 दिन पुराना कंकाल है। जहां किसी वजह से उसकी मौत हो गई है। हालांकि प्रबंधन अब पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहा है।

हिट एंड रन का नया कानून अभी लागू नहीं : किसी भी प्रकार के अफवाह में नहीं आने की अपील

The new law of hit and run is not yet implemented: Appeal not to fall into any kind of rumor वाहन चालकों को डरने की आवश्यकता नहीं रायपुर – हिट एंड रन मामले पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिट एंड रन मामलों के लिए लाए गए कानून को अभी लागू नहीं किया गया है। अभी पुराना कानून ही लागू है। कतिपय स्वार्थी तत्वों के द्वारा फेक लेटर्स के माध्यम से गलत जानकारी देकर ट्रांसपोर्ट संगठनों और वाहन चालकों को बहकाने की सूचना मिली है। वाहन चालकों को स्वार्थी तत्वों द्वारा गलत जानकारी देकर फैलाए जा रहे अफवाहों से डरने की आवश्यकता नहीं है।  केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि नए कानून को लागू करने से पहले अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। वाहन चालकों को किसी भी प्रकार के बहकावे में आने और भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में वाहन चालकों को किसी प्रकार के अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस को पत्र प्रेषित कर स्पष्ट किया है कि भारत सरकार का संबंधित विभाग इस कानून को लागू करने से पहले अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों से बातचीत करेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। केंद्रीय गृह सचिव श्री अजय भल्ला ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता 106(2) लागू करने से पहले हम ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे और उसके बाद ही हम कोई निर्णय लेंगे।

दो लाख बहनों के काटे नाम मोहन सरकार ने, नेता प्रतिपक्ष

Mohan government deleted names of two lakh sisters Leader of Opposition भोपाल ! नेता प्रतिपक्ष ने लगाया आरोप, कहा- सरकार ने घटाई लाडली बहना की संख्या, दो लाख बहनों के काटे नाम शिवराज सरकार के कार्यकाल की महत्वपूर्ण योजना लाडली बहना एक बार फिर सवालों के घेरों में है। कांग्रेस ने योजना को लेकर सूबे की नई नवेली मोहन सरकार पर निशाना साधा था। लाडली बहना योजना को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर लाडली बहना योजना में दो लाख नाम घटाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। इधर, मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन सरकार यादव ने बुधवार को लाडली बहना योजना के तहत सातवीं किस्त डाली। इसमें 1250 रुपए की धन राशि लाभार्थी बहनों के खाते में डाली गई। इसमें 1.29 करोड़ बहनों को 1576 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष का वार योजना को लेकर सोशल मीडिया साइट एक्स पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने लिखा कि नई सरकार ने घटाई 2 लाख लाडली बहना, झूठे विज्ञापनों की सच्चाई। कर्ज का बोझ नहीं ढो पा रही विज्ञापन से बनी भाजपा सरकार। प्रदेश की लाखों लाडली बहनों से झूठ बोल कर वोट ले लिए और अब उन्हीं में से 2 लाख बहनों की छंटनी कर दी। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि जब सितंबर में शिवराज सीएम थे, तब लाडली बहनों की संख्या 1.31 करोड़ थी, अब नए सीएम मोहन यादव जी ने इस संख्या को छांटकर 1.29 करोड़ कर दिया है यानी 2 लाख तो नई सरकार बनते ही घटा दी। सरकारी विज्ञापन इसका प्रमाण है, जनता खुद देखे लोकसभा चुनाव के बाद ये संख्या कितनी बचेगी, ये तो नए सीएम ही तय करेंगे।

दुनिया में धाक जमाती हिंदी

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष हिंदी महज एक भाषा नहीं बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की संस्कृति, सभ्यता, साहित्य और इतिहास को बयां करती है और उन्हें एकता के सूत्र में बांधती है। हिंदी भारतीयों के मान, सम्मान और स्वाभिमान की भाषा है। हिंदी भाषा ही नहीं यह भावों की अभिव्यक्ति है। हिंदी मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है। हिंदी हमारा ईमान है और हिंदी हमारी पहचान है। हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची परिचायक भी है। आइए जानते हैं विश्व हिंदी दिवस पर विश्व में हिंदी के बढ़ते प्रभाव और उसका महत्व। डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) 10 जनवरी को पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक भारतीय के लिए यह बेहद गर्व की बात है। बहुल सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवतः सबसे वैज्ञानिक भाषा है। जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हिंदी भाषा वक्ताओं की ताकत है, लेखकों का अभिमान है। करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बांधने के साथ ही हमारी आन-बान, शान और अभिमान है। हिंदी को राष्ट्र की अस्मिता और प्रणम्य का प्रतीक माना जाता है। इसके हर शब्द में गंगा जैसी पावनता और गगन सी व्यापकता है। समुद्र सी गहराई और हिमालय सी ऊंचाई है, जो इसे महान बनाती है। यही वजह है कि पूरी दुनिया विश्व हिंदी दिवस मना रही है।यदि हम हिंदी भाषा के विकास की बात करें तो यह कहना मुनासिब होगा कि पिछली शताब्दी मेंं हिंदी का तेजी से विकास हुआ है और दिनों-दिन इसका प्रभाव बढ़ रहा है। हिंदी का करीब एक हजार वर्ष पुराना इतिहास है। संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसे देवभाषा भी कहा जाता है। माना जाता है कि हिंदी का जन्म भी संस्कृत से हुआ है। ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। यह मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। इस कारण हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है।भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, बावजूद इसके हिंदी सबसे ज्यादा बोली, लिखी व पढ़ी जाती है। इसीलिए हिंदी भारत की सबसे प्रमुख भाषा है। 26 जनवरी 1950 को संसद के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को प्राथमिक भाषा माना गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर विदेशी धरती पर मातृभाषा का मान बढ़ाया। हिन्दी के जहां अंग्रेजी में मात्र 10 हजार मूल शब्द हैं। वहीं हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या 2 लाख 50 हजार से भी अधिक है। हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ हमारी राजभाषा भी है। हिन्दी ने भाषा, व्याकरण, साहित्य, कला, संगीत के सभी माध्यमों में अपनी उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं वर्चस्व कायम किया है। हिन्दी की यह स्थिति हिन्दी भाषियों और हिन्दी समाज की देन है, हमें अहसास होना चाहिये कि हिन्दी दुनिया की किसी भी भाषा से कमजोर नहीं है। हिंदी भाषा के इतिहास पर पुस्तक लिखने वाला कोई हिंदुस्तानी नहीं बल्कि फ्रांसीसी लेखक ग्रेसिम द टैसी था। हिंदी के बढ़ते प्रभाव के कारण ही ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में अच्छा और सूर्य नमस्कार जैसे कई हिंदी शब्दों को शामिल किया गया है।हिंदी का वर्चस्व बढ़ाने के लिए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से इसकी वर्षगांठ के उपलक्ष में हर साल मनाया जाता है। आज दुनियाभर में अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी तीसरे नंबर की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सर्वे एजेंसी स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में 43. 63 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा बोलते और समझते हैं।भारत के अलावा फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिनाद, टोबैगो, गुयाना, नेपाल, तिब्बत और पाकिस्तान में हिंदी बोली जाती है। इसके चलते इंटरनेट की दुनिया में अब हिंदी का वर्चस्व बढ़ रहा है।यही कारण है कि हिंदी आज दुनिया भर में इंटरनेट की पसंदीदा भाषा बन रही है। प्रति वर्ष 94 फीसदी हिंदी भाषी जुड़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी के महज 17 प्रतिशत हैं। गूगल-केपीएमजी रिसर्च, सेंसस इंडिया और आईआरएस की सर्वे रिपोर्ट को मानें तो आने वाले साल में हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वाले अंग्रेजी वालों से ज्यादा हो जाएंगे। एक अनुमान के मुताबिक 34 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे। हिंदी के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की मशहूर ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया ने अपना एप हिन्दी में लॉन्च किया। ओएलएक्स, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न कंपनियों के प्लेटफॉर्म पहले ही हिन्दी में उपलब्ध हैं। स्नैपडील भी हिन्दी में आ चुका है। 2023 तक 16.1 करोड़ लोगों ने डिजिटल पेमेंट के लिए हिन्दी का उपयोग किया। जबकि 2016 में यह संख्या 2.2 करोड़ थी। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी। जो 2023 में बढ़कर 24.4 करोड़ तक हो गई।इसी को दृष्टिगत रखते हुए इस बार हिंदी दिवस मनाने की थीम “ हिंदी पारंपरिक ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता“ रखी गई है।विदेशों में हिंदी जनमानस के दिलो दिमाग पर अपनी छाप छोड़ रही है। लंदन में हिंदी पढ़ाई जा रही है। जर्मन में ऐसे स्कूल और गुरुकुल हैं जहां बच्चों को हिंदी के साथ ही संस्कृत भी पढ़ाई जाती है। क्योंकि हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह दुनिया की प्राचीन समृद्ध और सबसे सरल भाषा है। वर्तमान में दुनियाभर के करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं और लिखते भी हैं। कह सकते हैं कि दुनिया के भाल पर चंदन की भांति चमकने वाली हिंदी अपनी धाक जमा रही है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को मिले तीन नए न्यायाधीश, नियुक्त की अनुशंसा

Madhya Pradesh High Court gets three new judges, recommendation for appointment मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी रामकुमार चौबे, एडवोकेट दीपक खोत और एडवोकेट पवन कुमार द्विवेदी के नामों की अनुशंसा। जबलपुर। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी रामकुमार चौबे के नाम की अनुशंसा केंद्र सरकार से की है। मप्र हाई कोर्ट में 40 न्यायाधीश नियुक्तवर्तमान में मप्र हाई कोर्ट में 40 न्यायाधीश नियुक्त हैं। जबकि कुल स्वीकृत पद 53 हैं। लिहाजा, तीन जज बढ़ने से कुल जज 43 हो जाएंगे। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट कालेजियम की अनुशंसा पर राष्ट्रपति की मुहर की प्रतीक्षा है।

पुलिस की जुआरियों पर बड़ी कार्रवाई जप्त किए एक लाख रुपए

Police took major action against gamblers seized one lakh rupees शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों सजते हैं जुआरियों के अड्डे कार्यवाही को लेकर थपथपाई जा रही पीठ बहोरीबंद क्षेत्र में हुई कार्यवाही 1लाख रुपए जप्त कटनी। जिले में जुआ फड़ संचालित होने की खबरें अब आम होती जा रही हैं। पूर्व में भी कटनी के एनकेजे क्षेत्र के अलावा स्लीमनाबाद, ढीमरखेड़ा, उमरियापान के बाद अब बहोरीबंद क्षेत्र में फड़ संचालित होने की खबरें सामने आई हैं। विगत दिवस बहोरीबंद थाना क्षेत्र के एक गांव में कार्यवाही को अंजाम देते हुए पुलिस ने स्थानीय जुआड़ियों के अलावा कटनी, जबलपुर, सिहोरा के साथ-साथ बूढ़ागर से आए लगभग एक दर्जन जुआडियो को पकड़ा। हैरत इस बात की है कि कड़कड़ाती ठंड में दूर-दूर से आए जुआ के इन शौकीनों से पुलिस ने केवल 1 लाख रुपए जप्त किए। बहोरीबंद क्षेत्र में गत दिवस की गई जुआ फड़ की रेट कार्यवाही को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। चर्चा तो इस बात की भी है कि उक्त जुआ फड़ से लाखों रुपए बरामद हुए हैं लेकिन उन रुपयों का क्या हुआ इसका पता नही चल सका।पुलिस के मुताबिक पुलिस अधीक्षक अभीजीत कुमार रंजन द्वारा अपराधियो के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत अति पुलिस अधीक्षक मनोज केडिया के मार्गदर्शन एवं एस डी ओ पी स्लीमनाबाद अखिलेश गौर के निर्देशन में 06 जनवरी 24 एवं 07 जनवरी 24 की दरमियानी रात को मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई थी कि पूर्णिमा गौतम के खेत भखरवारा रोड कुआ में बने मकान के पीछे बल्ब की रोशनी में बैठकर कुछ लोग ताश पत्तो पर रुपये पैसे का हार जीत दांव लगाकर जुआ मन्ना खेल रहे है। सूचना की तस्दीक पर पूर्णिमा गौतम के खेत के मकान के पीछे तरफ कई लोग बल्ब के उजाले मे बैठे दिखे। गाङी दूर खड़ी कर हमराह स्टाफ को साथ लेकर पैदल सावधानी पूर्वक जाकर रेड किया तो दो जगहो पर एक फड मे 6 व्यक्ति दूसरे फड मे 05 व्यक्ति जमीन मे बैठे ताश पत्तो से रुपये पैसे की हार जीत का दाव लगाकर जुआ खेलते मिले। जिन्हे स्टाफ के मदद से घेरकर पकङा गया। एक फङ मे 5 व्यक्ति, ताश के 52 पत्ते व नगदी 57500 रुपये दूसरे फङ मे 06 व्यक्ति, ताश के 52 पत्ते नगदी 49500 रुपये मिले। जुआङियो से ताश की दो गड्डी तथा नगदी 57500 एवं 49500 रुपये कुल 1 लाख 7000 रुपये जप्त किये गये। उक्त जुआ फड़ से आरोपियो गुलाम हुसैन नि मिशन चौक कटनी, रज्जू उर्फ राजेश गुप्ता नि सिहोरा, उमेश चौबे नि तेवरी, कुलदीप सिंह बैस नि पन्ना मोङ रोड कटनी, नीलेश सोनी नि गोसलपुर, अकबर खान मंसूरी नि खितौला सिहोरा, लकी असाटी नि बुढागर, हरजीत सिंह पंजाबी नि गोसलपुर, पराग असाटी नि बुढागर, प्रशांत चौरसिया नि बुढागर, राकेश गुप्ता नि ग्राम कुआं के विरूद्ध धारा 13 जुआ एक्ट के तहत अलग अलग 02 मामले पंजीबद्ध किये गये है। कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निरीक्षक सुरेन्द्र शर्मा थाना प्रभारी बहोरीबंद, सउनि अनुराग पाठक, आर. कोमल, विशाल, दयानंद, दीपक सिंह की रही।इनका कहना हैकार्यवाही को लेकर बातचीत करते हुए बहोरीबंद थाना प्रभारी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि पकड़े गए जुआड़ी जुआ के आदी हैं। यह लोग जगह बदल बदल कर जुआ फड़ जमाते हैं। 1 महीने से इन लोगों की लोकेशन तलाश की जा रही थी काफी मशक्कत के बाद गत रात्रि इन्हें पकड़ने में सफलता मिली।

नदी में पानी होने से नहीं हो सका सीमांकन,बैरंग लौटे अधिकारी सैकड़ों ग्रामीणों ने कि थी शिकायत।

Demarcation could not be done due to water in the river officials returned empty handed Hundreds of villagers had complained. मामला अवैध रेत खनन का स्वीकृत कहीं की और खनन कहीं पर लालबर्रा। नगर मुख्यालय से पांच किलोमीटर कि दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत ददिया अन्तर्गत आने वाले पोटिया पाट (वैनगंगा नदी)के नाम से स्वीकृत रेत घाट जो कि जानकारी अनुसार विगत कई महिनों से बंद है जिससे ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल पा रहा था जिसकी शिकायत सरपंच प्रतिनिधि रज्जू भलावी व जनपद सदस्य प्रतिनिधि मनीराम भोयर तथा सैकड़ों ग्रामीणों के द्वारा विगत तीन से चार माह पहले कलेक्टर कार्यालय में जाकर शिकायत कि गई थी तथा पुर्व में सरपंच प्रतिनिधि व जनपद सदस्य प्रतिनिधि तथा ग्रामीण जनों के द्वारा अवैध रूप से आ रहे डम्परो को रोककर स्थानीय प्रशासन को जगाने का प्रयास किया गया था और मौके स्थल से ही थाना प्रभारी व तहसीलदार को फोन पर जानकारी देकर अवगत कराया गया था तब जाकर वैनगंगा नदी के समीप पर ही स्थित किराना दुकान के समीप पर नायब तहसीलदार व थाना प्रभारी तथा खनिज अधिकारी पहुंचे थे जहां पर नव डम्परो के दस्तावेज कि मौखिक रूप से जांच कि गई थी तथा रेत के डम्परो को पुलिस अभिरक्षा में रखा गया था और आगामी कार्यवाही का आश्वासन अधिकारियों के द्वारा ग्रामीणजनों व पंचायत प्रतिनिधियों को दिया गया था लेकिन मामला राजनीतिक रसूख के चलते दब गया था लेकिन जैसे ही जिले में सत्ता का परिवर्तन हुआ है दबा मामला फिर से बाहर आ गया है तथा पुनः दबे मामले कि जांच प्रारंभ होने लगी वहीं जानकारी अनुसार 8 जनवरी को राजस्व निरीक्षक अशोक उईके अपने अधिनस्थ कर्मचारियों के साथ शिकायत कि जांच करने सीमांकन करने पहुंचे थे जहां पर रज्जू भलावी सरपंच प्रतिनिधि, मनीराम भोयर प्रतिनिधि जनपद सदस्य, सहित अन्य और ग्रामीण जन मौजूद थे लेकिन नदी में पानी अधिक होने से उक्त नदी घाट का सीमांकन कार्य नहीं किया जा सका वहीं चर्चा में राजस्व निरीक्षक अशोक उईके ने कहा कि ग्रामीणों व पंचायत प्रतिनिधियों ने घाट को लेकर शिकायत कलेक्टर कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज कराये थे उन्हीं के आदेश पर आज स्वीकृत घाट का सीमांकन करने अमलें के साथ पहुंचे थे साथ में ग्रामीण जन भी मौजूद रहे पानी होने से सीमांकन कार्य नहीं हो सका सभी लोगों के सामने पंचनामा तैयार किया गया है अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा वहीं इस दौरान रज्जू भलावी सरपंच प्रतिनिधि, मनीराम भोयर जनपद सदस्य प्रतिनिधि, प्रेमलाल राहंगडाले, विनोद बुराडें, प्रमोद हरिनखेडे, शंकर लुटे, अशोक बोपचे, आनंद बोपचे, तुलसीराम बोपचे, योगेश सोनबिरसे,साजन क्षीरसागर, जियालाल बोपचे,शिव ठाकरे, राहुल ठाकरे, राजकुमार मंडावी,किरण लांजेवार, बाबूलाल बिसेन, संतोष बिसेन, मनोज लुटे, कृष्ण कुमार देशकर, योगेश पंचेश्वर, मिथलेश ठाकरे, श्रीराम बुराडे, बाबा जी बाहेश्वर, सहित अन्य सभी ग्रामीण लोगों ने कार्यवाही कि मांग जिला प्रशासन से कि है।

उच्च शिक्षा विभाग ने बनाया सोशलॉजी से पीएचडी धारक को स्पोर्ट्स में अतिथि विद्वान

Higher Education Department appointed PhD holder from Sociology as guest scholar in sports भोपाल। शिक्षा विभाग में अतिथि विद्वान की नियुक्ति में बड़ी गड़बड़ी प्रकाश में आई हैं। ताज़ा मामला सागर के आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज का सामने आया है जिसमें सोशलॉजी से पीएचडी धारक आवेदक को स्पोर्ट्स में अतिथि विद्वान के रूप में नियुक्ति दे दी गई है। इस गड़बड़ी में महाविद्यालय प्रशासन से लेकर स्थानीय एडी कार्यालय और उच्च शिक्षा विभाग का भोपाल संचालनालय में पदस्थ शीर्ष अधिकारी की भी संलिप्तता नज़र आ रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि विभाग द्वारा अपने ही नियमों का पालन नहीं किया गया है। यानि अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में संबंधित विषय में पीएचडी/ नेट /स्लेट अथवा सेट को अनिवार्य योग्यता में शामिल किया गया है। लेकिन हाल ही में जारी की गई सूची में विभाग ने प्रमाणिक योग्यताओं को दरकिनार करते हुए अयोग्य को नियुक्ति दे दी। उच्च शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली से जहां अतिथि विद्वानों की नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ योग्य और जरूरतमंद आवेदकों का हक भी मारा जा रहा है।

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