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जय शिवाजी जय भवानी जय घोष से गुंजायमान हुआ अमला शहर

Amla city echoed with Jai Shivaji Jai Bhavani Jai Ghosh. हरिप्रसाद गोहे आमला । जय शिवाजी जय भवानी जय घोष से आज आमला शहर गुंजायमान रहा । सोमवार शिवाजी महाराज की जन्म जयंती के मौके पर क्षत्रिय लोनारी कुनबी समाज संगठन आमला के बैनर तले सामाजिक लोगों द्वार धूमधाम से शिवाजी जयंती मनाकर सामुहिक खुशी का इजहार किया गया । इस मौके सामाजिक संगठन द्वार महिला, पुरूष, बच्चो बुजर्गो की गरिमामय उपस्थिति में मगर के गोविंद कालोनी क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर से भव्य चल समरोह नगर के मुख्य मार्ग से निकाला । चल समरोह में सामाजिक संगठन से जुडे लोग आकर्षक वेशभूषा एवं परिधान धारण कर पहुंचे थे । इस मौके पर महिलाएं अपने हाथो में ध्वज लेकर चल रही थीं । साथ ही अपने अपने हाथों को उठाकर जय शिवाजी जय भवानी के जय घोष लगा रही थीं । वहीं युवा, बच्चें बाजे की धुन पर जमकर थिरक रहे थे । चल समरोह के दौरान सामाजिक बुजुर्गो द्वारा सामाजिक परंपरा का निर्वाहन करते हुऐ अपने हाथों में प्राचीन वाद्य यंत्रों को लेकर गीत,संगीत , भजन, कीर्तन करते पैदल चल रहे थे । चल समरोह में शिवाजी महाराज एवं भवानी की वेश भूषा में सजाई गई शानदार झाकी आयोजित चल समरोह में मुख्य आकर्षण का केंद्र रही । मिली जानकारी अनुसार चल समरोह का समापन बोडखी स्थित माथ नकर मैरिज लान में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सह भोज के साथ किया गया ।

एकता वेयरहाउस में 4 करोड रुपए की मूंग हुई बर्बाद विभाग की लापरवाही की वजह से मामले को दबाने को लेकर हो रहा गड़बड़ झाला  

Moong worth Rs 4 crore was wasted in Ekta Warehouse. Due to the negligence of the department, there is a mess in suppressing the case. विशेष संवाददाता  कटनी। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से अन्नदाता की कमाई किस तरह बर्बाद होती है यह बात किसी से किसी नहीं है खून-पसीना बहाकर लोगों के निवाले के लिए अन्नदाता फसल पैदा करता है, लेकिन अफसरों की बेपरवाही व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हर साल करोड़ों रुपए का अनाज बर्बाद हो जा रहा है। एक बार फिर जिले में मूंग की सुरक्षा में भारी चूक सामने आई है। स्लीमनाबाद क्षेत्र अंतर्गत एकता वेयरहाउस में भंडारित लगभग 4 करोड़ रुपए की मूंग बर्बाद हो गई है। इस पूरे मामले को विभागीय अफसर दबाने में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार एकता वेयर हाउस में सन 2021-22 में कृषि विभाग के माध्यम से किसानों से समर्थन मूल्य 7 हजार 275 रुपए प्रतिक्विंटल के दर से मूंग खरीदी गई थी। मूंग खरीदी की नोडल एजेंसी विपणन विभाग रहा है। विभाग द्वारा मध्यप्रदेश वेयर हाउस प्रबंधन के माध्यम से गोदामों में मूंग का भंडारण कराया गया था।  स्लीमनाबाद स्थित एकता वेयर हाउस में 23 हजार क्विंटल मूंग का भंडारण कराया गया था, जिसमें लगभग 6 हजार क्विंटल से अधिक मूंग खराब हो गई है।   निगरानी में लापरवाही बरती गई गोदाम स्तरीय से लेकर विभागीय अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही के चलते बड़ी मात्रा में मंूग खराब हुई है। विभाग प्रमुखों द्वारा खासकर वेयर हाउस प्रबंधन स्लीमनाबाद ब्रांच व विपणन विभाग द्वारा ध्यान न दिए जाने से यह स्थिति बनी है। इस समिति ने की है जांच बड़ी मात्रा में मूंग खराब होने पर इसकी जांच कमेटी द्वारा कराई गई है। इस कमेटी में जिला आपूर्ति अधिकारी बालेंद्र शुक्ला, उपसंचालक कृषि मनीष मिश्रा, सहायक आयुक्त सहकारिता राजयशवर्धन कुरील, जिला विपणन अधिकारी अमित तिवारी, जिला प्रबंधक वेयर हाउस वायएस सेंगर की टीम ने जांच की है। यह राग अलाप रहे अधिकारी बड़ी मात्रा में मूंग खराब होने के बाद विपणन विभाग के अधिकारी मामले को दबाने में जुटे हैं। कहा जा रहा है कि 3 माह व अधिकतम छह माह में मूंग का उठाव हो जाना था, लेकिन नहीं किया गया, अधिक समय मूंग रखने के कारण यह हालात बने हैं। सूत्रों की मानें तो सुरक्षा में चूक के कारण उपज बर्बाद हुई है। अब निलामी प्रक्रिया अपनाकर मामले को रफा-दफा करने खेल चल रहा है। इस मामले में वेयर हाउस के प्रबंधक चंद्रशेखर नरवरे द्वारा कुछ भी बताने से इन्कार किया जा रहा है। क्या कहते हैं अधिकारी हमारे वेयर हाउस में रखी मूंग विपणन विभाग की है। जो मूंग खराब हुई है उसकी जानकारी हम नहीं देंगे, डीएमओ ही देंगे। चंद्रशेखर नरवरे, प्रबंधक, वेयर हाउस। वेयर हाउस में 23 हजार क्विंटल मूंग का भंडारण हुआ था, जिसमें काफी मूंग खराब हुई है। वास्तव में मूंग कितनी मात्रा खराब हुई है इसकी जानकारी नहीं दे पाएंगे। जांच रिपोर्ट में ही खुलासा होगा। अमित तिवारी, जिला प्रबंधक विपणन। इनका कहना है मामले की जांच कलेक्टर द्वारा कराई गई है। मूंग के भंडारण, सुरक्षित रख-रखाव में लापरवाही पाई गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई प्रस्तावित कर पत्र शासन को भेजा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस पर क्या कार्यवाही होती है साधना परस्ते, एडीएम।

आईपीएस अजय शर्मा हर महीने किराए से कमा रहे 2.50 लाख रुपए  

IPS Ajay Sharma is earning Rs 2.50 lakh every month from rent. भोपाल। मध्य प्रदेश के आईपीएस अफसर ने संपत्ति का बुरा पेश किया है। मध्य प्रदेश कैडर के स्पेशल डीजी शैलेश सिंह के पास सबसे ज्यादा पुश्तैनी जमीन है। वहीं ईओडब्ल्यू में पदस्थ डीजी अजय शर्मा को हर महीने ढाई लाख रुपए की आय किराए से होती है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के 246 अफसर ने ही संपत्ति की जानकारी दी है, जबकि 23 आईपीएस में कोई भी रिकॉर्ड संपत्ति के बारे में नहीं जमा किया है। स्पेशल डीजे गोविंद प्रताप सिंह के पास भी उत्तर प्रदेश में पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने अपने आईपीआर में बताया है कि उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश में कई संपत्तियां हैं। इसके अलावा कुछ जमीनों को बेचकर उन्होंने प्रापर्टी भी खरीदी है। ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा ने बताया है कि दिल्ली के फ्लैट से 2 लाख से अधिक किराया मिलता है। भोपाल के एक मकान से 66 हजार से अधिक किराया मिलता है। दीपक हाउसिंग सोसाइटी में बने प्लॉट से 1 लाख 10 हजार की आय होती है। वही चंदनपुर परिवार की जमीन से डेढ़ लाख रुपए का रेंट उन्हें हर महीने मिलता है। डेढ़ लाख की जमीन की कीमत 29 साल में 51 लाख पहुंची आईपीएस और स्पेशल डीजी सुषमा सिंह ने हुजूर इलाके में आधा एकड़ जमीन 1995 में खरीदी थी। उसे वक्त डेढ़ लाख रुपए देकर अपने नाम जमीन कराई थी। जिसकी मौजूदा कीमत 51 लाख के पार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जमीन पर मकान बनाया गया है। इसके लिए पति और जीपीएफ की सेविंग से कंस्ट्रक्शन किया गया है। झील किनारे आईपीएस का एक करोड़ का बंगला आईपीएस राजेश चावला ने संपत्ति का ब्यौरा देते हुए कहा कि उनके नाम पर कोई संपत्ति नहीं है। पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदी गई है। उन्होंने बताया कि शाहपुरा स्थित इस सेक्टर में साल 2021 में एक करोड़ से अधिक में संपत्ति खरीदी गई। चावला जमीन पर बंगला बनवा रहे हैं। इसके अलावा उनके पास 55 ला ख रुपए का बागसेवनिया इलाके में फ्लैट भी है। जिसे उन्होंने साल 2017 में खरीदा था।  श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किया निवेश साल 1992 बैच के आईपीएस पंकज कुमार श्रीवास्तव ने मध्य प्रदेश में अपनी कोई संपत्ति नहीं खरीदी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फ्लैट और मकान खरीदा है। श्रीवास्तव ने अपनी संपत्ति की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 40 लाख रुपए का फ्लैट 2012 में खरीदा था। जिसकी मौजूदा कीमत 1 करोड़ 25 लाख है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा में साल 2009 में 5 लाख की जमीन खरीदी गई थी। जिसकी मौजूदा कीमत 15 लाख है। वही 25 लाख रुपए का मकान भी खरीदा था। जिसकी मौजूदा कीमत 50 लाख रुपए है।  इन आईपीएस की संपत्ति का रिकॉर्ड  -साल 1990 बैच के आईपीएस अशोक अवस्थी के पास पिता का मकान है। जिसे उन्होंने रिकंस्ट्रक्शन कर बनाया है। उन्होंने160 लाख रुपए मकान की कीमत बताई है।- साल 1995 बैच की एडीजी योगेश देशमुख के पास पांच संपत्ति है। उन्होंने संपत्ति का ब्यौरा देते हुए यह नहीं बताया है कि मौजूदा संपत्ति की कीमत कितनी है। देशमुख के पास बैतूल, दिल्ली और भोपाल सहित महाराष्ट्र में संपत्ति है।

डीजीपी बनने की रेस में कैलाश मकवाना, प्रशासनिक टिप्पणी और अनुशंसा से हो जाएंगे बाहर

Kailash Makwana in the race to become DGP, will be out of administrative comment and recommendation भोपाल। मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन में विशेष स्थापना पुलिस के पूर्व प्रमुख रहे कैलाश मकवाना की लोकायुक्त द्वारा लिखी गई खराब सीआर के मामले में जब मकवाना ने राज्य शासन को रिव्यू के लिए लिखा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आईपीएस अधिकारी की सीआर में सुधार किया। हालांकि सिर्फ नंबर ही पूर्व सीएम बढ़ा सके। अब यह मामला इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि मकवाना डीजीपी की रेस में हैं। ऐसे में उनकी सीआर में कम नंबर रेस से बाहर होने की आसार बना रही है। वहीं जानकारों का कहना है कि एक बार सीएम ने सीआर में सुधार किया है तो फिर दुबारा बदलाव की गुंजाइश नहीं होती है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी 1988 बैच के कैलाश मकवाना की लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना में पोस्टिंग और लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता से उनके मतभेदों के बाद सवा साल पहले स्थानांतरण के बावजूद मकवाना-गुप्ता विवाद खत्म नहीं हुआ है। जस्टिस गुप्ता ने मकवाना की लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना में करीब छह महीने की पदस्थापना के दौरान उनके कामकाज को लेकर सीआर लिखी तो तबादले के बाद शांत पड़ा दोनों के बीच का विवाद फिर सुर्खियों में आ गया।  सीआर में नंबर देने में कंजूसी  सूत्रों के मुताबिक मकवाना के तबादले के कुछ महीने बाद लोकायुक्त ने सीआर लिखी तो उसमें उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और नंबर देने में कंजूसी की। सीआर में दस में से पांच नंबर दिए गए। मकवाना को अपनी सीआर खराब किए जाने पर नाराजगी हुई और उन्होंने सलाह मशविरे के बाद सीआर के रिव्यू के लिए राज्य शासन को पत्र लिखा जिसमें जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर को दुर्भावनापूर्ण बताया।  यह भी सही है कि लोकायुक्त ने सीआर में कम नंबर की वजह भी बताई। मकवाना ने एक पूर्व डीजी की आय से अधिक संपत्ति पर कार्रवाई नहीं करने की वजह भी दी। फिर लोकायुक्त से मकवाना हटे तो पूर्व डीजी के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ।  सीआर की समीक्षा के बाद सुधार  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मकवाना ने राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग को लोकायुक्त जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर के रिव्यू के लिए लिखा तो मामला तत्कालीन सीएम के पास पहुंचा। उन्होंने मामले में सीआर का परीक्षण किया और सीआर में मकवाना को दिए गए नंबर पांच से बढ़ाकर छह कर दिए।

पार्टी पलायन: 5 साल में कांग्रेस से भाजपा पहुंचे 62 नेता, 7 का भविष्य हुआ उज्जवल, बांकी मुंह ताक रहे

Party exodus: 62 leaders moved from Congress to BJP in 5 years, 7 have a bright future, the rest are staring at them भोपाल। पिछले पांच साल में कांग्रेस से भाजपा में 62 नेता पलायन कर गए। इसमें दावा किया है कि भाजपा में शामिल सिर्फ 7 नेताओं की ही किस्मत चमकी है। शेष पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष राजनीति में हाशिये पर हैं। भाजपा ने भले ही टिकट दिया लेकिन चुनाव नहीं जीत सके हैं। अब भाजपा में भी उनकी पूछ परख नहीं हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की अटकलें हैं। दोनों नेता दिल्ली में हैं। रविवार को दिनभर अटकलें लगती रहीं कि कमलनाथ और नकुलनाथ रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा में शामिल होंगे, लेकिन देररात तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस में खलबली मच गई है। अब पिछले 5 साल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के करियर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पिछले पांच साल में जिन 62 कांग्रेस नेताओं ने पार्टी छोड़ी। इनमें सिर्फ 7 नेता ही चांदी काट रहे है, बाकी पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष अब तक बैकबेंचर्स ही बने हुए हैं।  इनकी चमकी किस्मत   मध्य प्रदेश में 2018 में कमलनाथ ने भाजपा के विजय रथ को रोक कर कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई थी। हालांकि, 15 माह की सरकार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इससे कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा में भेजा और उनके साथ आए समर्थक विधायकों को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया। सिंधिया केंद्र सरकार में उड्डयन मंत्री है। उनका कद भाजपा में लगातार बढ़ रहा है। उनके समर्थक विधायक तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्घुमन सिंह तोमर समेत अन्य नेता भाजपा सरकार में मजबूत हुए।  55 नेताओं का भविष्य भाजपा में खत्म   कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 62 में से 55 नेताओं का भविष्य खत्म हो गया या राजनीति के हाशिये पर चले गए। अब वह भाजपा में बैकबैंचर्स की भूमिका में हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि भाजपा उनका उपयोग करने के बाद उनकी राजनीति ही खत्म कर देगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अब अपने विधायक और बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। इन नेताओं का संकट में राजनैतिक भविष्य – पूर्व विधायक रघुराज सिंह कंसाना, गिर्राज डंडोतिया, कमलेश जाटव, राकेश मावई, उम्मेद सिंह बना, ओपीएस भदौरिया, रणवीर सिंह जाटव, मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी, रामवरण सिंह गुर्जर, प्रदीप जायसवाल, अजय चौरे, सविता दीवान, लोकसभा प्रत्याशी मोना सुस्तानी, विजय सिंह सोलंकी सहित कई और भी नेता हैं। जिनके राजनैतिक भविष्य पर संकट आ गया है।

जेपी अस्पताल: आज जांच कमेटी के सामने बयान दर्ज कराएंगे कर्मचारी

J.p Hospital: Employees will record statement in front of inquiry committee today भोपाल। जेपी अस्पताल में सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव के खिलाफ शिकायत करने वाले कर्मचारियों के सोमवार को बयान दर्ज होंगे। अधीक्षक राकेश श्रीवास्तव द्वारा गठित की गई जांच कमेटी ने कर्मचारियों को सोमवार को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है। बतादें कि आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव पर नियमित कर्मचारियों ने मारपीट, मेडिकल प्रणाम पत्र और सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगाए है। कर्मचारियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, सीएमएचओ और अधीक्षक से की थी। इसके बाद धर्मेश कौरव के खिलाफ जांच करने के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। सोमवार को जांच कमेटी कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट अधीक्षक को सौंपेंगी।  कर्मचारी संगठन हुआ लामबंद लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रातांध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया कि जेपी अस्पताल की कोई सुध लेना वाला नहीं है। पार्किंग ठेकेदार डॉक्टरों पर हमला कर रहे है, आए-दिन अस्पताल में चोरी की घटनाएं हो रही है। हद तो यह है कि आउटसोर्स कर्मचारी खुलेआम सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने के साथ नियमित कर्मचारियों को धमका रहे है। इतना सब अस्पताल में हो रहा है। बावजूद इसके सीएमएचओ हो या फिर अस्पताल अधीक्षक ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया। शर्मा ने कहा कि अगर जल्द ही आउटसोर्स कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई तो डिप्टी सीएम से शिकायत कर अस्पताल में धरना दिया जाएगा।

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