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रक्तदान शिविर में 152 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर परोपकार का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया

152 blood donors presented a great example of charity by donating blood in the blood donation camp हरिप्रसाद गोहे आमला । मानव जन्म दुर्लभ है,इसकी सार्थकता साबित करना आसान नहीं पर इतना भी मुश्किल नहीं, जरूरी नहीं कि मानव जीवन की सार्थकता सिद्ध करने के लिए आप कलेक्टर, डॉक्टर ही बनें,बंगलो के मालिक हो या बहुत बड़े बिजनेस टायकून बने या रसूखदार बने, अगर आप अपना थोड़ा सा समय देकर भी किसी के जीवन को बचाने के प्रयास में भागीदार बनते हैं तो आपकी मनुष्यता सिद्ध होती है, ऐसा ही एक श्रेष्ठ उदाहरण बचपन प्ले स्कूल आमला में देखने को मिला, जहां जनसेवा कल्याण समिति एवं बचपन प्ले स्कूल ,ए एच पी एस के सयुक्त तत्वाधान में आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं द्वारा जबरदस्त जज्बा दिखाते हुए आयोजन को सफल बनाया और मानव जीवन की सार्थकता साबित की ।स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्वर्गीय शशि टिकारे जी की स्मृति में रविवार बचपन ए प्ले स्कूल में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया । आयोजन समिति के नीरज बारस्कर ,राहुल धेण्डे ,हर्षित ठाकरे ने बताया कि स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्वर्गीय शशि टिकारे की स्मृति में आयोजित होने वाला ये रक्तदान शिविर विगत सात वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है, तीव्र गर्मी के बावजूद इस आयोजन का सफल होना रक्तदाताओं की जिंदादिली का द्योतक है । कुल 152 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर इस शिविर को सफल बनाया। शिविर में आधे से ज्यादा नए रक्तदाताओं ने एवं महिला शक्ति ने भी आगे आकर पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया ।बैतूल से आए शैलेंद्र बिहारिया , दीप मालवीय एवं सागर सिंह चौहान द्वारा रक्तदान का महत्व बताया गया , अमित यादव ,कैलाश ठाकरे ,चंद्रकिशोर टिकारे बताते है कि रक्तदान शिविर का जनसेवा कल्याण समिति एवं बचपन ए प्ले स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन किया गया, जिसे सफल बनाने में शहर की सभी रक्तदान समितियों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले रक्तदान के मामले में आमला थोड़ा उदासीन सा था,परन्तु रक्तदाता समितियों के प्रयासों एवं जागरूकता के चलते आज आमला को रक्त राजधानी का तमगा प्राप्त हो चुका है। आयोजन समिति द्वारा रक्तदान करने आये बड़े दिल वाले दानदाताओं को प्रमाणपत्र के साथ सम्मानस्वरूप शील्ड प्रदान की गई ।

जनरल,ऑब्जर्वर पहुंचे अमला, स्ट्रांग रूम एवं एस एस टी चेक पॉइंट का किया निरीक्षण

General, Observer arrived and inspected the staff, strong room and SST check point. हरिप्रसाद गोहे आमला। जनरल ,ऑब्जर्वर सर प्रदीप कुमार ठाकुर आज आमला पहुंचे थे । जिन्होंने सयुक्त दल के साथ लोकसभा निर्वाचन 2024 के लिए हसलपुर स्थित डाक्टर भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय आमला में बनाए गए स्ट्रांग रूम पहुंच निरीक्षण किया । बाद हसलपुर में बनाए गए एस एस टी चेक प्वाइंट का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए । इस दौरान प्रमुख रूप से सहायक रिटर्निग अधिकारी सर शैलेंद्र बड़ोनिया, तहसीलदार पूनम साहू, नायब तहसीलदार श्याम बिहारी समेले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला संजीत श्रीवास्तव, मुख्य नगर पालिका अधिकारी विरेंद्र तिवारी, नगर निरीक्षक आमला सत्य प्रकाश सक्सेना, बोडखी चौकी प्रभारी नितिन पटेल मौजूद रहे ।

लोकसभा चुनाव के लिए बने चेक पोस्ट का , सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने किया निरीक्षण , दिए आवश्यक दिशा निर्देश, गहनता से करे वाहनों की जांच

the Assistant Returning Officer inspected the check post set up for the Lok Sabha elections, gave necessary guidelines to check the vehicles thoroughly. हरिप्रसाद गोहे आमला । लोकसभा चुनाव वर्ष 2024 चलते तैयारियां तेज हो गई हैं । अधिकारी लगातार बैठकें लेकर व्यवस्था बना रहे हैं । सुरक्षा और सुविधा पर फोकस किया जा रहा है । बैतुल हरदा संसदीय क्षेत्र क्रमांक 29 के जिला रिटर्निंग अधिकारी एवं जिला कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में चुनाव की व्यापक रूप से तैयारी की जा रही है । लोकसभा निर्वाचन 2024 के मद्देनजर सुरक्षा को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाने के लिए कड़े प्रबंध किए जा रहे हैं । इस क्रम में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध करने, तकनीकी तौर पर भी दक्ष रहने, वोटरों का किसी तरह से भयादोहन न हो यह सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिए जा रहे है । लोकसभा चुनाव के लिए बनाई गई शहर के ग्राम हसलपुर में चेकपोस्ट का सहायक रिटर्निंग अधिकारी शैलेंद्र बड़ोनिया ने निरीक्षण किया चेक पोस्ट के सभी अधिकारियों को सहायक रिटर्निंग अधिकारी शैलेन्द्र बड़ोनिया ने दिशा निर्देश दिए है । चेक पोस्ट पर एसएसटी एवं एफएसटी टीम द्वारा लोकसभा आम चुनाव में प्रतिबंधात्मक सामग्री की रोकथाम के लिए की जा रही जांच का आकस्मिक निरीक्षण कर अधिकारियों को सक्रियता के साथ प्रभावी कार्यवाही करने के आवश्यक दिशा – निर्देश दिए गए । ‘लोडिंग वाहनों का गहनता से निरीक्षण किया जाये’ सहायक रिटर्निंग अधिकारी शैलेन्द्र बड़ोनिया ने निरीक्षण के दौरान वाहनों में प्रतिबंधात्मक सामग्री के परिवहन को रोकने के लिए गहनता से निरीक्षण करने एवं यात्री वाहनों में जांच के समय यात्रियों से शालीनता से व्यवहार करते हुए बैग एवं अन्य सामग्री की जांच करने के निर्देश दिएउन्होंने कहा कि लोडिंग वाहनों का गहनता से निरीक्षण किया जाए माल लदान,वस्तु,सामग्री,का जीएसटी बिल एवं गंतव्य स्थान के बारे में संतोष जनक जवाब मिलने के बाद ही वहां से आगे जाने दें । गहनता से की जाए वहानो कि जांच सहायक रिटर्निंग अधिकारी शैलेन्द्र बड़ोनिया ने अवैध शराब, अवैध हथियार या नकदी मिलने पर संबंधित विभागों को भी सूचित करने के निर्देश देते हुए चेक पोस्ट पर सभी वाहनों को आदर्श आचार संहिता की गाइड लाइन के अनुसार जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए,एसएसटी टीम से जांच के दौरान जब्ती के विषय में विस्तार से जानकारी ली एवं मौके पर मौजूद वीडियो ग्राफर से उनके द्वारा बनाए गए वीडियो चेक किया सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने चेक पोस्ट पर सभी वाहनों की रजिस्टर में एंट्री करने के लिए कहा गया वही चेक पोस्ट में कार्यरत अधिकारीयो को निर्वचन आयोग के सभी नियमो का पालन करने के निर्देश दिए है ।

1479 करोड़ के बजट के बंटवारे का अधिकार हाथ से छीनने के भय से ठेके पर देने में वन विभाग कर रहा है ना-नुकुर

The Forest Department is reluctant to give the right to distribute the budget of Rs 1479 crore on contract due to the fear of snatching it away. भोपाल। राज्य शासन को अपने एक आदेश का पालन कराने के लिए अब तक एक के बाद एक, चार आदेश जारी करना पड़े। इसके बाद भी उस पर क्रियान्वयन होने में 6 महीने का समय और लग सकता है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वन विभाग के कैंपा शाखा और विकास शाखा में पदस्थ पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि रिटायरमेंट के पहले ही बजट बांटने का अधिकार उनके हाथ से निकल जाए। यही वजह है कि मैन्युअल और शर्तों के निर्धारण की आड़ में पीसीसीएफ द्वय टेंडर प्रक्रिया से वानिकी कार्य कराने संबंधित आदेश का क्रियान्वयन अक्टूबर-नवंबर तक टालने की उधेड़बुन में लगे हैं। अक्टूबर में पीसीसीएफ महेंद्र सिंह धाकड़ (कैम्पा) और नवंबर में पीसीसीएफ (विकास) उत्तम कुमार सुबुद्धि सेवानिवृत होने जा रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अंधा बांटे रेवड़ी….की तर्ज पर कैंपा शाखा 959 करोड़ और विकास शाखा 520 करोड रुपए का बंदरबांट किया जाता है। प्रदेश में वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ जंगलों की सुरक्षा और बढ़ते अपराध पर रोकने की दिशा में पूरा अमला मुस्तैद रहे। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन ने वन विभाग में अधोसंरचना निर्माण कार्य, पशु अवरोधक दीवार से लेकर वारवेड वायर एवं चैनलिंक फेंसिंग और पॉलीहाउस आदि के कार्य निविदा बुलाकर कराने का पहला आदेश 29 मई 23 को प्रसारित किया था। जबकि इसकी स्क्रिप्ट 29 अप्रैल 22 को लिखी गई थी। तत्कालीन वन मंत्री डॉ विजय शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभाग के सभी अधिकारियों को निविदा बुलाकर वानिकी कार्य करने के निर्देश दिए थे। यहीं नहीं, शाह ने विकास शाखा के तत्कालीन प्रमुख चितरंजन त्यागी को इसके लिए नियम और शर्तें बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। चूंकि त्यागी अक्टूबर 22 में रिटायर होने वाले थे, इसलिए नियम बनाने में टालमटोल करते रहे। उनके सेवानिवृत्ति के बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। जब एसीएस जेएन कंसोटिया ने वन विभाग का दायित्व संभाला तब फिर से निविदा बुलाकर कार्य करने संबंधित फाइल मंत्रालय में मूव होने लगी। 29 मई 23 को शासन ने पहला आदेश जारी किया कि 2 लाख के कार्य विभागीय रूप से किया जाएगा। विभागीय अधोसंरचना निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग के निर्माण कार्यों की दरों के आधार पर वन विभाग अपने मैन्युअल के आधार पर कराए। 31 दिसंबर तक निविदा प्रक्रिया के स्थान पर विभाग में पुरानी व्यवस्था अनुसार निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाती है। 1 जनवरी 24 से जो भी कार्य प्रारंभ हो, उन्हें निविदा प्रक्रिया के उपरांत कराए जाएं। विभागीय अफसरों ने नहीं दिखाई रुचि वन बल प्रमुख से लेकर कैंपा शाखा और विकास शाखा के प्रमुख तक शासन के आदेश के क्रियान्वयन में कोई रुचि नहीं दिखाई। 31 दिसंबर 23 तक पूर्व वन बल प्रमुख आरके गुप्ता चाहते थे कि उनके सेवानिवृत होने के बाद इस पर क्रियान्वयन हो। यही वजह रही कि शासन के 29 में 23, 17 अगस्त 23 और 19 अक्टूबर 23 को जारी आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो पाया। इस बीच सभी पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों ने एक प्रेजेंटेशन बनाकर अपर मुख्य सचिव कंसोटिया को सौपा। इसमें निविदा से कार्य करने की तमाम सारी विसंगतियां बताई गई थी। बताते हैं कि कंसोटिया भी विभाग के शीर्ष अधिकारियों के तर्क पर सहमत हो गए थे। निविदा से कार्य करने का मामला ठंडा पड़ चुका था। अचानक 7 मार्च 24 को कंसोटिया ने फिर से आदेश जारी करने का हुक्म अपने मातहत को दिया। आदेश जारी होते वन भवन से फील्ड तक में हड़कंप मच गया। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और उनके सिपहसालार पीसीसीएफ सक्रिय हुए। वन बल प्रमुख ने आनन-फानन में पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इसके लिए वन विभाग एक मैन्युअल और शर्ते बनाए। ऐसा करने में 6 महीने का समय निकल जाएगा और तब तक 1479 करोड़ रुपए का 30% बजट पहले त्रेमासिक के लिए पुरानी व्यवस्था के आधार पर चहेते डीएफओ को अपने मन माफिक बजट आवंटित कर दिया जाएगा। बैठक में ही उपस्थित एक सीनियर आईएफएस अधिकारी का कहना है कि मैन्युअल और शर्ते बनाने में अधिक से अधिक 1 महीने का समय लग सकता है। प्रदेश में आचार संहिता लागू है। ऐसे में अफसर चाहे तो 15-20 दिन में ही मैन्युअल और निविदा की शर्ते से बना सकते है। चर्चा है कि कैंपा और विकास शाखा में पदस्थ से पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि उनके रिटायरमेंट के पहले शासन के आदेश पर क्रियान्वयन हो।

ग्राउंड रिपोर्ट: जबलपुर में भाजपा के आशीष लैंड लार्ड, कांग्रेस के दिनेश मांग रहे ‘एक नोट-एक वोट’

Ground report: BJP’s Ashish Land Lord, Congress’s Dinesh are demanding ‘one note-one vote’ in Jabalpur भोपाल। जबलपुर लोकसभा सीट में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला तो है लेकिन पलड़ा भाजपा का भारी है। ऐसा पहली बार नहीं है, भाजपा यहां लगातार जीत भी दर्ज करती आ रही है। 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के श्रवण पटेल पहली बार मामूली अंतर 6 हजार 722 वोटों के अंतर से भाजपा के बापूराव परांजपे को हरा कर चुनाव जीते थे। इसके बाद से सीट पर भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस एक अदद जीत के लिए तरस रही है। 1996 और 1998 के दो चुनाव बापूराव परांजपे ने जीते और 1999 में जयश्री बनर्जी ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2004, 2009, 2014 और 2019 में भाजपा की ओर से लगातार राकेश सिंह ने कमल खिलाया। राकेश सिंह ने पिछला चुनाव साढ़े 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीता। मौजूदा माहौल देखकर कहा जा रहा है कि जीत का यह आंकड़ा और बढ़ने वाला है। लगातार चार जीत दर्ज करने वाले राकेश सिंह इस बार जबलपुर से मैदान में नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वे विधानसभा का चुनाव लड़े थे और इस समय राज्य सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं। उनके स्थान पर भाजपा ने बिल्कुल नए चेहरे आशीष दुबे को प्रत्याशी बनाया है। वे तीन बार से विधानसभा का टिकट मांग रहे थे लेकिन मिला नहीं। उन्होंने ज्यादा संगठन में काम किया है और अब लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अपनी छवि के कारण आशीष भाजपा की पसंद बने हैं। वे कभी विवादों में नहीं रहे। उनकी बेदाग और निर्विवाद छवि है। आशीष की पारिवारिक पृष्ठभूमि भाजपाई है। उनकी गिनती जबलपुर के लैंड लार्ड के तौर पर होती है। कांग्रेस के दिनेश यादव भी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वे प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री हैं। इससे पहले वे पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। कांग्रेस की ओर से वे महापौर का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी छवि भी अच्छी है लेकिन वे भाजपा के आशीष से काफी पिछड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। जबलपुर में भाजपा जैसी जीत दर्ज करती है, उसे देखकर स्पष्ट है कि यहां जातीय और सामाजिक गणित फेल हो जाते हैं। बावजूद इसके कांग्रेस को जातीय आधार पर ही वोट मिलने की संभावना है। भाजपा द्वारा कराए गए काम बने चुनाव का मुद्दाजबलपुर प्रदेश का महानगर है, इसलिए यहां राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दो ंका खासा असर है। इसके साथ यहां सरकार द्वारा कराए गए काम भी मुद्दा बने हुए हैं। गांव-गांव तक सड़कों की कनेक्टिविटी अच्छी हुई है। सड़कों का जाल बिछा है। 4-5 फ्लाई ओवर बन कर तैयार हुए हैं। एक बड़ा फ्लाई ओवर बन रहा है। अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र और राज्य सरकार ने काफी काम किए है। भाजपा मोदी और राम लहर के साथ इन कामों को मुद्दा बना रही है। भाजपा के आशीष पारिवारिक संबंधों का हवाला देकर भी समर्थन मांग रहे हैं। कांग्रेस अपनी 19 माह की सरकार के कार्यों को गिना रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस किस तरह सभी किसानों का कर्ज माफ करने जा रही थी लेकिन भाजपा ने इसे रोक दिया। केंद्र एवं राज्य सरकार की महंगाई और रोजगार को लेकर नाकामिंया भी बताई जा रही है। कांग्रेस के 5 न्याय और 24 गारंटियों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कांग्रेस के दिनेश को यादव समाज से भी काफी उम्मीद है। विधानसभा में भाजपा को हासिल है बड़ी बढ़तप्रदेश की कई अन्य सीटों की तरह जबलपुर में भी भाजपा को विधानसभा में बड़ी बढ़त हासिल है। लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 7 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट है। 4 माह पहले हुए चुनाव में भाजपा ने पाटन, बरगी, जबलपुर उत्तर, जबलपुर कैंट, जबलपुर पश्चिम, पनागर और सिहोरा विधानसभा क्षेत्रों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस सिर्फ जबलपुर पूर्व सीट ही जीत सकी है। जबलपुर पूर्व में कांग्रेस के लखन घनघोरिया 27 हजार 741 वोटों के अंतर से जीते हैं जबकि सातों सीटों में भाजपा की जीत का अंतर 2 लाख 36 हजार 359 वोट है। साफ है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव से ही 2 लाख से ज्यादा वोटों की बढ़त हासिल है। कांग्रेस के लिए इस अंतर को पाटना बड़ी चुनौती है। जबलपुर जिले को मिलाकर बनी लोकसभा सीटजबलपुर लोकसभा सीट का भाैगोलिक एरिया बाहर नहीं गया। इसके तहत आने वाली सभी 8 विधानसभा सीटें जबलपुर जिले की ही हैं। जातीय आधार पर जरूर हर विधानसभा सीट की अलग-अलग स्थिति है। किसी सीट में दलित और आदिवासी ज्यादा हैं तो किसी में पिछड़े और ब्राह्मण। कुल मिलाकर दबदबा भाजपा का ही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था। तब भाजपा और कांग्रेस को बराबर 4-4 सीटें मिली थीं। बावजूद इसके 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के राकेश सिंह 4 लाख 54 हजार 744 वोटों के बड़े अंतर से जीते थे। अब तो विधानसभा में भी भाजपा का पलड़ा भारी है। माहौल भी भाजपा का है। ऐसे में यदि भाजपा के जीत का अंतर और बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है तो गलत नहीं है। वैसे भी जबलपुर में भाजपा की जीत का अंतर हर चुनाव में बढ़ता ही गया है। क्षेत्र में ब्राह्मण, दलित, पिछड़े वर्ग का दबदबाजबलपुर लोकसभा सीट में आमतौर पर जातीय आधार पर मतदान नहीं होता। सामाजिक समीकरण फेल होने की वजह से यहां हार-जीत का अंतर ज्यादा होता है। लोकसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग और दलित वर्ग के मतदाताओं का दबदबा है। ब्राह्मण एकमुश्त भाजपा के खाते में जा सकते हैं जबकि पिछड़े वर्ग का एक हिस्सा कांग्रेस को मिल सकता है। भाजपा प्रत्याशी ब्राह्मण और कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से हैं। क्षेत्र में मुस्लिम और आदिवासी वर्ग के मतदाताओं की तादाद भी काफी है। इनमें मुस्लिम का अधिकांश वोट कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है जबकि दलित और आदिवासी मतों में बंटवारा होगा। हालांकि इनका ज्यादा हिस्सा भी भाजपा के पक्ष में ज्यादा जाने की संभावना है। क्षेत्र के वैश्य, क्षत्रिय एवं अन्य जाितयों में भाजपा का दबदबा देखने को मिल रहा है।

भाजयुमो ने प्रदेश के सभी मंडलों पर मनाया भाजपा स्थापना दिवस

BJYM celebrated BJP Foundation Day in all the divisions of the state भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार ने भोपाल में वार्ड क्रमांक 50 के बूथ क्रमांक 202 पर महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई व कार्यकर्ताओं के यहां घर-घर पार्टी का झंडा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं के साथ संगठन के माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता कर नमो ऐप के माध्यम से डोनेशन किया।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सेवा ही संगठन के भाव को समर्पित संगठन है। राष्ट्र सेवा और जन सेवा ही हमारे मूल सिद्धांत हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि 5 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक यथा संभव माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागी बनकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रदेशभर में स्थापना दिवस मनाया है और माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह स्थापना दिवस हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा को निरंतर मिल रहे अपार जनसमर्थन के साथ हम सभी को मिलकर मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए अपनी भूमिका निभाना है। प्रदेश अध्यक्ष ने इंदौर संभाग में की बैठक मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार शनिवार को इंदौर पहुंचे और उन्होंने इंदौर संभाग के युवा मोर्चा पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने बैठक में कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने बीते चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसका उल्लेख हमारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी पूरे मन से किया था। हमें इस बार भी लोकसभा चुनाव में दोगुनी ताकत के साथ संगठन कार्यों को सिद्धि तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि हम सभी कार्यकर्ताओं को इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक सशक्त नेतृत्व मिला है। आज विदेशों में भी भारत का डंका बज रहा है। उन्होंने कहा कि जिस अंत्योदय की बात हमारे महापुरुषों ने सोची थी आज उसे मोदी जी के नेतृत्व में हम पूरा होते देख रहे हैं। इसलिए हम सभी मोर्चा कार्यकर्ताओं का भी ये दायित्व बनता है कि हम लाभार्थियों से संपर्क करें उन तक मोदी जी की राम राम भी पहुंचाएं और बदलते भारत की चर्चा युवाओं के साथ करें। उन्होंने कहा कि नवमतदाताओं को इस बात से जरूर अवगत कराएं कि कांग्रेस शासन में देभ की स्थिति क्या थी और मोदी जी के नेतृत्व में आज स्थिति कितनी बदल गयी है।

ग्वालियर : किला गेट थाने की पुलिस कर्मियों का तानाशाही रवैया

Gwalior: Dictatorial attitude of police personnel of Kila Gate police station ग्वालियर । 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए आचार संहिता लगी हुई है वही पुलिसकर्मी भी तानाशाही और पुलिस की वर्दी का भोली वाली जनता को रोब दिखाने से पीछे नहीं हट रहे हैं । ऐसा ही एक मामला ग्वालियर के किला गेट थाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है किला गेट पुलिस कर्मियों द्वारा बिना महिला पुलिस के घर में जबरन घुस रहे हैं! फरियादी महिला श्रीमती सुषमा यादव का कहना है की रात के तक़रीबन 1 बजे कुछ पुलिस वाले बिना महिला फोर्स के मेरे मकान पर आए मैंने उनसे अंदर से कहा की कोई महिला पुलिस बुला लो मैं गेट खोल दूंगी लेकिन उन्होंने एक न सुनी और गैस कटर से गेट को काटकर अंदर कूद आए और मेरे साथ गाली गलौज कर धक्का मुक्की कर एक तरफ बिठा दिया जब मैं इनका मोबाइल में वीडियो बनाना चाहा तो उन्होंने मोबाइल छीन कर डिलीट कर मोबाइल एक तरफ फेंक दिया और मुझे किचन की तरफ ले जाकर बिठाल दिया और मेरी बेडरुम में जाकर पूरा सामान फैला दिया मैं घर में अपने बच्चों के साथ अकेली थी मुझे इतना डर लग रहा था ऐसा लग रहा था की है यह सब पुलिस वाले नशे में थी मैंने बार-बार पूछा कि मामला क्या है आप इस तरह से मेरे घर में क्यों घुस आऐ हो लेकिन मुझे कोई जानकारी नहीं दी और कहा की ज्यादा मुंह मत चला तेरा पति आ जाए तो उसे थाने भेज देना। जब मैं अपने बेडरूम में गई तो अलमारी सूट केस पूरा खुला डाला था मेरा कुछ सामान भी नहीं मिल रहा था इस तरह से घर में घुसे थे जैसे कोई आतंकवादी घर में छुपा हो जहां एक ओर सरकार महिला की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे करती है वही जब हमारे शहर की पुलिस ही ऐसा करने लगी तो महिला कहां सुरक्षित होगी। फरियादी श्रीमती सुषमा यादव

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