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स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए गए ईवीएम मशीन में नमी ना आए स्ट्रांग रूम की छत को किया क्वार्ड ।

Security arrangements of the strong room were increased. The roof of the strong room was quarantined to prevent moisture from entering the EVM machines. हरिप्रसाद गोहे  आमला । बैतूल हरदा हरसूद लोकसभा संसदीय क्षेत्र 29 के चुनाव आगामी 7 में को संपन्न किए जाने को लेकर प्रशासनिक हल्को में तैयारियां बड़े जोरों से की जा रही है। आने वाली 7 में को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा।स्ट्रांग रूम के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे है। स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीन में नमी ना आए इसके लिए स्ट्रांग रूम की छत को तिरपाल से क्वार्ड किया गया है। खासबात है कि अभी हल्की हल्की बारिश  होने के कारण ईवीएम मशीन में नमी ना आए इसको देखते हुए निर्वाचन के निर्देश पर स्ट्रांग रूम के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे है। आमला विधानसभा 130 के सहायक रिटर्निंग अधिकारी शलेन्द्र बड़ोनिया ने बताया कि मौसम का मिजाज बदल रहा है। समय-समय पर हल्की बारिश हो रही है। बारिश को देखते हुए निर्वाचन के निर्देश पर स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीन में नमी ना आए एवं किसी प्रकार की ईवीएम मशीन में तकनीकी खराबी ना आए इसको देखते हुए स्ट्रांग रूम की छत को तिरपाल से क्वार्ड किया गया है। मौसम के बदलाव को देखते हुए स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है। अधिसूचना को पर्दशित करने के निर्देश..…… जिसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना भी जारी की गई है, अधिसूचना प्रारूप (1) का प्रकाशन भी किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। आमला विधानसभा 130 के सहायक रिटर्निंग अधिकारी शलेन्द्र बड़ोनिया ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशन में अधिसूचना प्रारूप(1) को पर्दशित किए जाने के निर्देश प्राप्त हुए है  निर्वाचन का संचालन नियम, 1961 के नियम 3 के साथ पठित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 31 के तहत, निर्वाचन के लिए सार्वजनिक नोटिस प्ररूप-1 (हिन्दी एवं अंग्रेजी) कार्यालय के नोटिस बोर्ड, जनपद पंचायत, नगरपालिका, नगरपंचायत एवं सार्वजनिक स्थलो के नोटिस बोर्ड में प्रकाशित कर पंचनामा कराया जाकर प्रति उपलब्ध करना सुनिश्चित करें। अधिसूचना प्रारूप (1) के निर्देश…… 29-बैतूल (अ.ज.जा.) संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में लोकसभा के सदस्य का निर्वाचन होना है, नाम निर्देशन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर को या श्री राजीव कहार सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को बहुजन समाज पार्टी द्वारा प्रायोजित अभ्यर्थी या उसके किसी प्रस्थापक द्वारा 19 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) से अपश्चात (लोक अवकाश दिन से भिन्न) किसी दिन 11 बजे पूर्वान्ह और 3 बजे अपरान्ह के बीच न्यायालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कक्ष बैतूल में परिदत्त किये जा सकेंगे,नाम निर्देशन पत्र के प्ररूप पूर्वोक्त स्थान और समय पर अभिप्राप्त किये जा सकेंगे,नाम निर्देशन-पत्र संवीक्षा के लिये न्यायालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कक्ष बैतूल में 20 अप्रैल 2024 (शनिवार) को पूर्वान्ह 11:00 बजे लिये जायेंगे,अभ्यर्थिता वापस लेने की सूचना या तो बहुजन समाज पार्टी द्वारा प्रायोजित अभ्यर्थी द्वारा या उसके किसी प्रस्थापक द्वारा या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा जो अभ्यर्थी द्वारा उसे परिदत्त करने के लिये लिखित में प्राधिकृत किया गया हो, ऊपर पैरा (2) में विनिर्दिष्ट ऑफिसरों में से किसी को उसके कार्यालय में 22 अप्रैल 2024 (सोमवार) को 3 बजे अपरान्ह के पूर्व परिदत्त की जा सकेगी, निर्वाचन लड़े जाने की दशा में 07 मई 2024 (मंगलवार) को 7:00 बजे पूर्वान्ह और अपरान्ह 6:00 बजे के बीच मतदान होगा।

छिंदवाड़ा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जन सभा

Public meeting of BJP National President JP Nadda in Chhindwara लोकसभा चुनाव 2024 : छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है। छिंदवाड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार को सीधी व छिंदवाड़ा में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा करेंगे। छिंदवाड़ा के दशहरा मैदान में संबोधित कर रहे हैं। छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है।

राजपूत करणी सेवा ने मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला का पुतला दहन किया ,एवं आक्रोश देखने को मिला

Rajput Karni Seva burnt the effigy of Minister Purushottam Rupala जबलपुर ! भाजपा सरकार में गुजरात के मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला जी ने छात्राणियों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है नारी किसी भी समाज की हो नारी का सम्मान हमेशा होना चाहिए ऐसे मंत्रियों की कोई जरूरत नहीं है जो नारियों का सम्मान नहीं करते हैं एक तरफ मोदी जी नारी सम्मान की बात करते हैं और दूसरी तरफ उनके मंत्री अपशब्द भाषा छात्राणियों के खिलाफ करते हैं ऐसे मंत्री पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए लोक सभा सीट कटी जानी चाहिए गुजरात से मोदी जी से यही आग्रह है कि ऐसे सांसद की टिकट काट देनी चाहिए ऐसी जानकारी जो के नारी सम्मान के जगह उनके बारे में आप शब्द बातें करते है सहारा समाचार जबलपुर से जीतेन्द्र सिंह श्रीवास्तव की प्रदेश अध्यक्ष से वार्तालाप , जबलपुर जिला अध्यक्ष संजू सिंह राजपूत. प्रदेश अध्यक्ष सहेंद्र सिंह. संभाग अध्यक्ष विशाल सिंह सोलंकी मीडिया से वार्ता करते हुए

परिषद के 66वें स्थापना दिवस की अनंत बधाइयाँ प्रिय आत्मीय जन

Heartfelt congratulations on the 66th Foundation Day of the Council, dear dear people. अखिल भारतीय पंचायत पंचायत परिषद { All India Panchayat Parishad} का 66वाँ स्थापना दिवस है।12अप्रैल 1958 में परिषद की स्थापना देव घर जसीडीह में तत्कालीन बिहार सम्प्रति झारखंड में हुई थी।आज परिषद के 66 बसंत पूर्ण हुए। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के स्वप्नों को साकार करने के लिए अखिल भारतीय पंचायत परिषद ने 7.5लाख गाँवों के गण राज्य की स्थापना के लिए अनवरत संघर्ष किया और सफलताएँ प्राप्त की हैं। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक अधिकार तो मिले लेकिन अभी वह अधिकार आधे -अधूरे हैं।अभी संघर्ष शेष है।अमर शहीद बलवंत राय मेहता ,लोकनायक जय प्रकाश नारायण के द्वारा स्थापित परंपराओं एवं मापदंडों ,पदचिन्हों पर चलने के लिए हम लोग संकल्प बद्ध हैं। देश के 22 प्रदेशों में परिषद से सम्बद्ध प्रदेश / राज्य पंचायत परिषदें , त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाएँ देश में तीसरी सरकार पंचायती राज की स्थापना करने के लिए प्रयत्न शील हैं।इस अवसर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं एवं पंचायती राज प्रेमियों तथा परिषद कार्य समिति , महा समिति के मा० सदस्यों , मा०पदाधिकारियों एवं कर्तव्य निष्ठ कर्मचारियों को परिषद एवं बलवंत राय मेहता पंचायती राज फ़ाउंडेशन की ओर से अनंत हार्दिक बधाई देता हूँ।वर्तमान में अखिल भारतीयपंचायत परिषद की स्थिति पर मात्र इतना ही कहूँगा-बहुत कुछ किया है और बहुत कुछ करना बाक़ी है।पंचायती राज क़ायम हो , यही अरमान बाक़ी है।चलो इस बे वफ़ा दुनिया में फिर से वफ़ा ढूँढें।ज़माना ढूँढ न पाया जिसे हम वो ख़ुदा ढूँढें॥मंज़िल मिले न मिले इसका ग़म नहीं।मंज़िल की जुस्तजू में मेरा कारवाँ तो है। जयपंचायती राजशीतला शंकर विजय मिश्रमुख्य महामंत्रीअखिल भारतीय पंचायत परिषदएवंन्यासी सचिवबलवंत राय मेहता पंचायती राज फ़ाउंडेशन

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये किलो में खरीदा, 30 लाख से अधिक का गड़बड़झाला

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया का संरक्षण होने की बदौलत ही लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर भी एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला को नहीं रोक पा रहे हैं। ताजा मामला गुग्गल खरीदी का प्रकाश में आया है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ने टेंडर की दर से न खरीदकर आर्यन फार्मेसी से ₹1700 किलो की दर से खरीदी की है। सूत्रों ने बताया कि एमएसपी पार्क के प्रबंधक ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी ना करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के सीईओ प्रसन्ना फुलझले हटने के बाद से प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार मनमानी बढ़ गई है। यहां तक कि फुलझले की जगह प्रमोट आईएफएस अर्चना पटेल को डमी के रूप में सीईओ बनाया गया है। पार्क के अधिकारी और कर्मचारी इसकी मुख्य वजह भी एसीएस से मिल रहे हैं संरक्षण को बताया जा रहा है। एमडी के आदेश का ही नहीं हो रहा पालन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु 15 दिन से अधिक का समय बीत गया, अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। मिश्रा को भंडारण से संबंधित दस्तावेज उत्पादन प्रबंधन द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं। दस्तावेज मांगने के लिए अभी तक मिश्रा ने करीब चार रिमाइंडर सुनीता अहिरवार को भेज चुके हैं। इसकी जानकारी भी एमडी को भेजी गई है किंतु वहां से भी किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। यही नहीं विद्या निनारे को भंडार में रा मटेरियल जाँच करने के मौखिक निर्देश प्रबंध संचालक और सीईओ ने मीटिंग में सबके सामने दिये थे। उस मीटिंग में सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी फिर भी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जानपहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है। नरेंद्र नागर पर क्यों मेहरबान है केंद्र के अफसर एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी के सीईओ से लेकर प्रबंधक तक उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। पिछले एक दशक से एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी में कंस्ट्रक्शन, फेब्रिकेशन, पुताई कार्य से लेकर दवाइयां के रॉ मैटेरियल प्रदाय करने का ठेका तक के वर्क आर्डर नरेंद्र नागर को दिया जाता है। जबकि उनका मूल काम कंस्ट्रक्शन का है। नियमों की अनदेखी कर नरेंद्र नागर के कंस्ट्रक्शन फर्म को बिना टेंडर कोटेशनों के आधार पर लाखों रुपए के कार्य दिए जा रहे हैं। वर्तमान में उनके द्वारा मेंटेनेंस का कार्य किया गया है, जो कि लगभग 30 से 35 लाख रुपए की बिलिंग हो चुकी है। चर्चा है कि अधिक कमीशन पर उन्हें काम दिए जा रहे हैं। हद तो तब है जब विंध्या हर्बल में कंस्ट्रक्शन वर्क हो या पुताई का कार्य या फिर फेब्रिकेशन के कार्य कोई भी अन्य एजेंसी ही क्यों न करें लेकिन बिल नागर के फर्मो के नाम पर ही बनता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कैलाश रघुवंशी की होती है। आर्यन फार्मेसी का एकाधिकार पिछले एक दशक में एमएसपी पार्क में आर्यन फार्मेसी अथवा सिस्टर कंसर्न का एकाधिकार रहा है। दवाइयां को बनाने के लिए जो भी संबंधित रॉ मटेरियल खरीदे जाते हैं, उसमें 70 से 80% रॉ मैटेरियल आर्यन फार्मेसी के ही होते हैं। हालांकि फेडरेशन के एमडी ठाकुर दावा कर रहे हैं कि वह व्यवस्था को बदलने में जुटे हैं। यानी उनके अनुसार अब भविष्य में गड़बड़ियों की गुंजाइश बहुत कम रहेगी। बावजूद इसके, जांच के नाम पर फेडरेशन के एमडी को सिर्फ खाली गुमराह किया जा रहा है।

लोकसभा चुनाव 2024 : ग्राउंड रिपोर्ट: राजगढ़ लोकसभा

Lok Sabha Elections 2024 : Ground Report : Rajgarh Lok Sabha भोपाल। भाजपा के रोडमल नागर ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उस स्थिति में सवा 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जब 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 2 विधानसभा सीटें मिली थी। चार माह पहले 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 8 में से 6 विधानसभा सीटें जीती हैं फिर भी रोडमल पिछली जैसी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। जबकि पिछली बार की तुलना में भाजपा के पक्ष में ज्यादा माहौल है। वजह कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह का मैदान में होना है। राजगढ़ दिग्विजय का गृह क्षेत्र है। वे यहां से 1991 में भाजपा के स्व प्यारेलाल खंडेलवाल को हराकर सांसद बने थे। इसके बाद लगातार 10 साल तक वे प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। दिग्विजय को अच्छा राजनीतिक प्रबंधक माना जाता है। पुराने संबंधों को ताजा करने के लिए उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा की। इस दौरान वे हर दिन 20 किमी चले और जिस गांव में रात हो गई, वहीं डेरा डाल दिया। अपने पुराने मित्रों, परिचितों के परिजनों से संबंध ताजा किए। गांव के लोगों ने सामूहिक कलेक्शन कर भोजन की व्यवस्था की। दिग्विजय और उनकी पत्नी अमृता राय ने आईटी सेल को एक्टिव कर दिया है। एक अभियान ज्यादा नामांकन भराने का भी चल रहा है ताकि ईवीएम की बजाय मत पत्रों के जरिए मतदान हो। विधायक बेटे जयवर्धन सिंह ने राघौगढ़ और चाचौड़ा में डेरा डाल रखा है। दिग्विजय के समर्थन में समूची कांग्रेस एकजुट है, बस उनके अनुज लक्ष्मण सिंह प्रचार अभियान से दूरी बनाए दिख रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा भी शांत नहीं है। उसका फोकस विधानसभा सम्मेलनों और बूथ मैनेजमेंट में ज्यादा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित कई नेता इनमें हिस्सा ले चुके हैं। भाजपा की ओर से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे रोडमल के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी देखने को मिल रही है। पार्टी के अंदर और बाहर उनसे नाराजगी भी है। इसके लिए वे कई बार माफी मांग चुके हैं। चूंकि दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए भाजपा के साथ संघ, बजरंग दल और विहिप सहित सभी संगठन उनके खिलाफ एकजुट हैं। राजगढ़ में दिग्विजय का चुनाव लड़ना ही मुद्दाराजगढ़ लोकसभा सीट में दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए भाजपा और कांग्रेस के लिए वे खुद मुद्दा हैं। उनकी वजह से ही कांग्रेस एकजुट है। दूसरी तरफ समूचा संघ अपने अनुषांगिक संगठनों के साथ मैदान में उतर गया है। दिग्विजय के कारण राजगढ़ में राम मंदिर, हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद के मुद्दे को सबसे ज्यादा हवा दी जा रही है। आखिर, दिग्वजय को कहना पड़ा कि राम मंदिर के लिए उन्होंने शिवराज सिंह चौहान से भी ज्यादा चंदा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की प्रतिक्रिया थी कि वे अपना चंदा वापस ले लें। इसके अलावा भाजपा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराए गए काम गिना रही है तो दिग्विजय अपने कार्यकाल में कराए काम बता रहे हैं। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बना रहे हैं। यह भी बता रहे हैं कि देश में तानाशाही है और जांच एजेंसिया भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रही हैं। 8 में से 6 विधानसभा सीटों में भाजपा का कब्जाविधानसभा में ताकत के लिहाज से भाजपा को अच्छी बढ़त है। पार्टी का क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों में से 6 पर कब्जा है। ये विधानसभा सीटें चाचौड़ा, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर और सारंगपुर हैं। कांग्रेस सिर्फ दो विधानसभा सीटों राघौगढ़ और सुसनेर में ही जीत दर्ज कर सकी थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थिति इसके उलट थी। तब कांग्रेस ने 5 और भाजपा ने 2 सीटें जीती थीं। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इसके बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 4 लाख 31 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीता था। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 6 सीटें 1 लाख 78 हजार 967 वोटों के अंतर से जीती हैं जबकि कांग्रेेस का दो सीटों में जीत का अंतर महज 17 हजार 150 है। इस लिहाज से इस बार भी भाजपा की जीत बड़ी होना चाहिए लेकिन मुकाबला देखकर ऐसा लगता नहीं है। दिग्विजय द्वारा भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। तीन जिलों को मिलाकर बना गुना लोकसभा क्षेत्रप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट का भौगोलिक एरिया तीन जिलों तक फैला है। इसके तहत तीन अंचल भी आ आते हैं। इसमें गुना जिले की दो विधानसभा सीटें चाचौड़ा और राघौगढ़ हैं। गुना को ग्वालियर अंचल का हिस्सा माना जाता है। राजगढ़ जिले की 5 विधानसभा सीटें नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर और सारंगपुर हैं। यह मध्य भारत अंचल का हिस्सा है। सातवीं विधानसभा सीट सुसनेर आगर मालवा जिले की है जो मालवा अंचल के तहत आती है। राजगढ़ में विधानसभा में ताकत के लिहाज से भले भाजपा बढ़त में है। पिछले दो लोकसभा चुनाव भाजपा के रोडमल नागर ने जीते भी हैं, लेकिन इस सीट का मिजाज भाजपाई नहीं है। 1991 में यहां कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जीते तो 1996, 1998 और 1999 में लगातार दिग्विजय के अनुज लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद लक्ष्मण भाजपा में शामिल हो गए और 2004 का लोकसभा चुनाव भाजपा के  टिकट पर जीते। लेकिन 2009 में कांग्रेस के नारायण सिंह अमलावे ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद भाजपा ने लक्ष्मण सिंह का टिकट काट दिया तो वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। समाजों को देखकर तैनात किए जा रहे नेतालोकसभा चुनाव में आमतौर पर राजगढ़ क्षेत्र में जातिगत आधार पर मतदान नहीं होता। बावजूद इसके भाजपा और कांग्रेस द्वारा समाजों की बहुलता को देखकर नेताओं को प्रचार के लिए तैनात किया जा रहा है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता सोंधिया, दांगी और गुर्जर समाज के हैं। इसके बाद ब्राह्मण, यादव और मीना समाज आते हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के मतदाताओं की तादाद भी कम नहीं है। भाजपा के पास हर प्रमुख जाति के विधायक जीत कर आए हैं। उन्होंने मोर्चा संभाल रखा है। कांग्रेस के नेता भले विधायक नहीं हैं लेकिन जातिगत आधार पर उन्हें भी मैदान में उतार रखा गया है। ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर है और अजा-जजा वर्ग का कांग्रेस की ओर। शेष सभी जातियां भाजपा- कांग्रेस के … Read more

सांसद विवेक तन्खा ने कहा, देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है, यह तानाशाही है, मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता

MP Vivek Tankha said, human rights are being violated in the country, this is a dictatorship, I do not want to live in such a democracy. भोपाल। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है। यह तानाशाही है। मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा कि संवैधानिक न्याय को लेकर मैं खुद पीड़ित हूं। संसद में जिस प्रकार से कानून बना रहे हैं, वह प्रजातांत्रिक नहीं है। छोटी-छोटी बातों को लेकर (संभवत: राज्यसभा के सभापति) खफा हो जाते हैं। संसद नियम से नहीं चलता है। यह बात वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर भी कहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जगह नहीं दिया जाता है, न हीं बोलने का मौका दिया जाता है, न ही विरोध करने का मौका दिया जाता है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आज मंगलवार को राज्यसभा सांसद समेत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत अन्य नेताओं ने एक साथ प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान सांसद तन्खा ने भी यह बातें कही। उन्होंने कहा कि 100 दिन सदन चलाने का नियम है, लेकिन विपक्ष को मौका रखने का नहीं ही मिलता। विपक्ष के बोलने पर सांसदों को निलंबित किया जाता है। वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया को पत्र लिखा था। उसके सुझाव कांग्रेस पार्टी ने अपने न्याय पत्र में रखे हैं। हफ्ते में एक दिन विपक्ष को बोलने का मौका लोकसभा या सदन में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की बात कि जाए तो 3 करोड़ केस पेंडिंग हैं। गरीबों को न्याय नहीं मिल पाता जजों की कमी है। भाजपा इसलिए खुश है कि न्यायपालिका में न्याय की जगह बेल ना मिले। स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट में बेल के केस जाने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह को बेल दी थी अब अरविंद केजरीवाल भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। सांसद तन्खा ने कहा कि देश में ऐसे लोगों को जज बनना चाहिए, जो निष्पक्ष होना चाहिए। ईमानदार और निष्पक्ष जज का नाम भेज दो तो उसका नाम रोक दिया जाता है। इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई के लाॅ में संशोधन करने की जरूरत है। कांग्रेस के साथ भी यही हुआ। कांग्रेस पार्टी को अपील के लिए जाने पर पूरा पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है, जबकि 20 से 30 % जमा कर खाते को फ्रिज से हटाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद इनकम टैक्स 3,560 करोड़ के टैक्स के मामले को रिलैक्सेशन देती है। उन्होनंे कहा कि टैक्स भरने के लिए एनजीओ और अन्य लोगों को समय दिया, लेकिन कांग्रेस को समय नहीं दिया गया। जबकि 31 मार्च तक रिटर्न भरने का समय था। तन्खा ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को डरा धमका की कॉलर पकड़ के बाहर निकाला जा रहा हैं। लोकतात्रिक संस्थान को बचाने के लिए संस्थाओं को भी क्योर करना पड़ेगा।

लोकसभा चुनाव 2024: ग्राउंड रिपोर्ट ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से, सहारा समाचार टीम

Lok Sabha Elections 2024: Ground report from Gwalior parliamentary constituency, Sahara News Team ग्वालियर। ग्वालियर की लोकसभा सीट शुरू से ही काफी अहम रही है, क्योंकि विजयाराजे सिंधिया सहित राजघराने का हर सदस्य राजनीति से जुड़ा रहा। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से की थी। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा अभी हाल ही में की है, जबकि भाजपा पहले ही कर चुकी थी, लेकिन खास बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं। भाजपा ने भारत सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें विवेक नारायण शेजवलकर के स्थान पर मैदान में उतारा गया है। भारत सिंह कुशवाहा अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ग्वालियर ग्रामीण से चुनाव हारे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में ग्वालियर दक्षिण से पराजित हुए थे। दोनों उम्मीदवार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की कुशवाह समाज के साढ़े तीन लाख वोटरों पर नजर है। वहीं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी होने का भी लाभ भारत सिंह कुशवाहा को मिला है। जबकि कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाकर शहर के वोटरों को साधने की कोशिश की है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस को विश्वास है कि विधानसभा चुनाव जीत दिलाने वाले लोकसभा में भी सहयोग करेंगे। इसलिए भाजपा को है जीत की उम्मीदग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार के अलावा ठाकुर क्षत्रिय वोटर की अहम भूमिका रही है और 19 लोकसभा चुनाव में से सिंधिया परिवार के सदस्यों ने 8 बार जीत दर्ज की है। जबकि इसमें भी ठाकुर क्षत्रिय वोटर ने सहयोग किया है। इस बार भी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं और नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक को ही उम्मीदवार बनाया गया हैं। यहां से माधवराव सिंधिया कांग्रेस और मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पांच बार निर्वाचित हुए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर यशोधरा राजे सिंधिया दो बार यहां से निर्वाचित हुईं। इसके अलावा विजयाराजे सिंधिया भी एक बार यहां से चुनाव जीती हैं। कांग्रेस ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। जब रामसेवक सिंह निर्वाचित हुए थे। यह बात अलग है कि सवाल पूछने के बदले पैसे लेने के आरोप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था लोकसभा चुनाव में दोनों नए चहरेलोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखा जाए तो इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों ने ही नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। दोनों के समीकरण भी एक समान हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद ही दोनों अपने लिए लोकसभा के लिए वोट मांग रहे हैं। भारत सिंह कुशवाहा राममंदिर और हमारा परिवार मोदी परिवार को लेकर आगे चल रहे हैं। वहीं प्रवीण पाठक लोकतंत्र बचाओ के साथ ही राहुल गांधी की यात्राओं में उठाए गए मुद्दों का वोटर के सामने रख रहे हैं। जातीय समीकरणभाजपा ने ग्वालियर में अपनी जीत के लिए जातिगत समीकरण पर दांव खेला है। इस संसदीय क्षेत्र से पूर्व मंत्री भारत सिंह कुशवाह को अपना उम्मीद्वार बनाया है। तकरीबन साढ़े तीन लाख कुशवाह वोटर के सहारे भाजपा जनाधार मजबूत करेगी। जबकि कांग्रेस ब्राह्मण व क्षत्रिय के गणित लेकर चल रही है। प्रवीण पाठक का मानना है कि 19.59 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 5.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं, जिनका कांग्रेस पर पूरा भरोसा है। जबकि ब्राह्मण समाज के 18 प्रतिशत से ज्यादा वोटर पर भी उन्हें पूरा विश्वास है। वहीं 25 प्रतिशत से ज्यादा पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस का समर्थन देगा। क्योंकि इसका प्रभाव विधानसभा चुनावो में देखने को मिला है। इस जातीय समीकरण के कारण ही भाजपा के द्वारा पूरी ताकत लगाने के बाद भी आधी सीटें विधानसभा की तीने में सफलता मिली थी। ग्वालियर संसदीय सीट में 8 विधानसभाग्वालियर संसदीय क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभाओं में से कांग्रेस व भाजपा के पास चार-चार विधायक हैं। यदि विधानसभा चुनाव का ट्रेंड रहता है तो भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी कड़ा होगा और हार जीत का अंतर बड़ा नहीं होगा। इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6 लाख 96 हजार 246 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 6 लाख 82 हजार 233 वोट मिले हैं। इस हिसाब से मुकाबला कड़ा है। इसके अनुसार भाजपा को 14 हजार 13 वोट ही अधिक मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं, जबकि भाजपा के पास दो सीट हैं। कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत है। वोट भी अधिक मिला है, लेकिन शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा मजबूत है। शहर में तीन सीटे हैं, जिनमें कांग्रेस के पास एक सीट है। पोहरी विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी ने 49 हजार 481 वोट से भाजपा के मंत्री को हराया था। जबकि भाजपा भितरवार और ग्वालियर विधानसभा में मजबूत है। इन विधानसभा को भाजपा ने बड़े अंतर से जीता था। डबरा, ग्वालियर दक्षिण व करैरा में मुकाबले करीबी रहे हैं। ग्वालियर संसदीय चुनाव में मुद्देइस संसदीय सीट की खास बात यह रही है कि यहां विकास के कोई मुद्दे नहीं रहे हैं। चाहे माधव राव सिंधिया ने विकास के नाम पर वोट मांगे हों। उस समय व्यक्ति के चेहरे पर लोगों ने वोट दिया था। क्योंकि मुद्दे विधानसभा चुनावो में ही इतने उठ जाते हैं कि लोकसभा में लोग सिर्फ चेहरे देखते हैं। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के मुद्दे को लेकर ही वोटिंग होती रही है। इस बार प्रवीण पाठक शहर से और भारत सिंह कुशवाह ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। भाजपा हमेशा शहरी क्षेत्र से उम्मीदवार बनाती रही है और लगातार जीतती रही है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र से भाजपा ने और शहरी क्षेत्र से कांग्रेस ने टिकिट दिया। यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा, लेकिन यह मुद्दा कितना कारगर रहेगा यह तो चुनाव बाद ही मालुम होगा। क्योंकि माहौल इस समय भाजपा के पक्ष में है।

लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदना चाह रहे नकुलनाथ : विजयवर्गीय

Nakulnath wants to buy democracy through demonetization: Vijayvargiya भोपाल। कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का चरित्र ही रहा है कि वह जनमत पर भरोसा नहीं करते। यही कार्य छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस और कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी नकुलनाथ कर रहे हैं। कांग्रेस छिंदवाड़ा में लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस सोचती है अब भी बांटो और राज करो चलेगा। कांग्रेस ने पहले देश बांटकर राज किया, अब छिंदवाड़ा को अपना गढ़ समझने वाले नकुलनाथ पैसा बांटकर राज करना चाहते हैं। मतदाता भगवान है और भगवान को खरीदने की सोचने वाली कांग्रेस रंगे हाथ पकड़ी गई है। यह बात प्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने छिंदवाड़ा में जिला कांग्रेस महामंत्री गिरीश साहू के बिसापुर गांव में रूपए बांटते पकड़े जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। विजयवर्गीय ने कहा कि न्याय-पत्र के झूठे वादे चले नहीं तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेता पैसों से बोली लगाकर लोकतंत्र के भगवान को खरीदने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज करायेगी और कांग्रेस और नकुलनाथ के ठिकानों की जांच करने की मांग करेगी। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं: मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी धनबल के आधार पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। नोट बांटने का खुलासा होने से यह सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और वह लोगों को पैसों का लालच देकर खरीदने में जुटी है। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं है। कांग्रेस पार्टी पहले नोट देकर वोट खरीदने का प्रयास करती है, जब चुनाव हार जाती है तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ती है।

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