नरेंद्र मोदी पूरी तरह से असहाय’: राहुल गांधी ने NEET-PG को लेकर केंद्र पर किया हमला
Narendra Modi ‘completely helpless’: Rahul Gandhi attacks Center over NEET-PG
Narendra Modi ‘completely helpless’: Rahul Gandhi attacks Center over NEET-PG
BJP members elected the new state president of UP behind closed doors
Why are questions being raised on the role of Minister Sarang in the nursing scam
Farmers’ loan waived off in Telangana, Rahul Gandhi said – he did what he said
BJP Nagar Mandal Amla organized yoga camps on the 10th International Yoga Day.
Yoga brings peace, balance and health in our lives
On the occasion of International Yoga Day
Hearing the prices of tomatoes and onions, people said…so expensive.
A healthy mind resides only in a healthy body Madan Mohan Katiyar
Tejashwi Yadav said on NEET issue
India won the first Super 8 match by 47 runs: Bumrah and Arshdeep took 3-3 wickets
भोपाल कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा अब नए विवाद में घिर गए हैं। राधारानी का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके बाद संतों में आक्रोश है। पंडित प्रदीप मिश्रा ने गोस्वामी तुलसीदास को गंवार कहा है। हालांकि इस वीडियो की पुष्टि नहीं करते है। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया आने लगी है। इसे लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने क्या कहा दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पंडित प्रदीप मिश्रा कह रहे हैं कि हमें कुछ नहीं आता है, हम तो तुलसीदास जैसे गंवार हैं। केवल शिव का नाम ले लेते हैं और आपके सामने बैठ जाते हैं। हमको तो ये भी नहीं मालूम है, हमें कुछ नहीं आता है। 12 सेकंड का यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि ये वीडियो कब का है और कहां का है, यह साफ नहीं हो पाया है। पूरे प्रकरण पर पंडित प्रदीप मिश्रा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। संतों में आक्रोश वीडियो वायरल होने के बाद प्रदीप मिश्रा को लेकर संतों में आक्रोश है। देश भर के संतों ने इसे लेकर नाराजगी व्यक्त की है। टीवी चैनल पर एक संत कार्ष्णि नागेंद्र ने कहा कि सनातन धर्म को लेकर बहुत अनर्गल प्रलाप चल रहे हैं। यह कतई उचित नहीं है। व्यास पीठ सनातन धर्म की सर्वोच्च पीठ है, वहां से ऐसी बातें शोभा नहीं देती है। तुलसीदास जी महाराज परमज्ञानी हुए। वह महाविद्वान नहीं थे। ऐसे महापुरुषों को गंवार कहना अनुचित है। इसके साथ ही एक टीवी चैनल से बात करते हुए त्रिशुला बाबा ने कहा कि तुलसीदास को गंवार कहना अनुचित है। नाम शंकर का लेते हो और जहर उगलते हो। सनातन को स्थापित करने वालों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करते हो। त्रिशुला बाबा ने कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ बोलने वाले कथावाचक प्रदीप मिश्रा का बहिष्कार करो। उनके पैर के बराबर भी नहीं वहीं, एक संत ने और कहा कि खुद की तुलना गोस्वामी तुलसीदास से करने वाले पंडित प्रदीप मिश्रा उनके पैर के धुल के कण के बराबर नहीं हैं। तुलसीदास से तुलना पर इनको शर्म आनी चाहिए। प्रेमानंद महाराज भी लगा चुके हैं लताड़ गौरतलब है कि तुलसीदास से पंडित प्रदीप मिश्रा राधारानी पर भी टिप्पणी कर चुके हैं। राधारानी विवाद को लेकर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज जी ने भी प्रदीप मिश्रा को काफी लताड़ लगाई थी। इसके बाद उन्होंने माफी मांगी थी। बाद में एमपी सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दोनों के बीच सुलह कराई थी।
लखनऊ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और अभी तक कई परीक्षाओं में हुई धांधली का मुद्दा उठाते हुए कोर्ट द्वारा सख्ती से जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ये हमारे देश के लिए मानव संसाधन के खिलाफ साजिश भी हो सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि … और अब गड़बड़ी की ख़बर के बाद UGC- NET की परीक्षा भी रद्द कर दी गयी है। भाजपा के राज में पेपर माफ़िया एक के बाद एक, हर एग्ज़ाम में धांधली कर रहा है। ये देश के ख़िलाफ़ किसी की बड़ी साज़िश भी हो सकती है। – पुलिस भर्ती की परीक्षा का पेपर लीक होगा तो क़ानून-व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जिससे देश-प्रदेश में अशांति और अस्थिरता बनी रहेगी। – नीट की परीक्षा में घपला होगा तो ईमानदार लोग डॉक्टर नहीं बन पाएंगे और देश के लोगों के इलाज के लिए भविष्य में डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाएगी और बेईमान लोग, जनता के जीवन के लिए खतरा बन जाएंगे। – यूजीसी- नेट परीक्षा न होने से पहले से शिक्षकों की जो कमी चली आ रही है उसमें और भी ज्यादा इजाफा होगा। शिक्षकों की कमी से देश के मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न होगी, जो कालांतर में देश के लिए बेहद घातक साबित होगी। इन सबसे प्रशासन के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी। ये हमारे देश के शासन-प्रशासन व देश के मानव संसाधन के विरूद्ध कोई बहुत बड़ा षड्यंत्र भी हो सकता है जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम निकलेंगे। इसीलिए कोर्ट की निगरानी में इसकी कठोर जांच हो और दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए और कोई भी अपराधी छोड़ा न जाए, फिर वो चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो या फिर उसके सिर पर सत्ता का हाथ ही क्यों न हो। लोग कह रहे हैं जो भ्रष्ट लोग कोरोना के वैक्सीन में चुनावी चंदे के नाम पर पीछे से करोड़ों रूपये खा सकते हैं, वो भला परीक्षा-प्रणाली को क्या छोड़ेंगे।
लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सारस के संरक्षण के लिए पहल की, जिसके सुखद परिणाम दिखाई देने लगे हैं। इसी क्रम में प्रदेश में बृहस्पतिवार से राज्य पक्षी सारस की गणना की जाएगी। वर्ष में दो बार (ग्रीष्मकालीन-शीतकालीन) गणना होती है। वर्ष 2024 के लिए बृहस्पतिवार से दो दिन तक सारस गणना होगी। यह गणना सुबह-शाम दो बार की जाएगी। गणना में वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही विद्यार्थियों व प्रकृति प्रेमियों का भी सहयोग लिया जाएगा। वर्ष 2023 में हुई गणना में उत्तर प्रदेश में 19,522 सारस पाए गए थे। प्रभागीय वनाधिकारी अपने-अपने प्रभाग में पाये गये सारस की संख्या व फोटो पहली जुलाई तक मुख्य वन संरक्षक, ईको विकास, लखनऊ को उपलब्ध कराएंगे। सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, 20 व 21 जून 2024 को ग्रीष्मकालीन सारस गणना की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के समन्वयक होंगे। वन रक्षक गणना टीम का लीडर होगा। इनके कार्य क्षेत्र में कई वेटलैंड होने पर एक से अधिक टीम गठित की जाए। इसके लिए जनसामान्य को भी जागरूक किया जाएगा। गणना में स्कूल, कॉलेज के बच्चों, प्रकृति प्रेमियों व एनजीओ भी सारस गणना में प्रतिभाग कर सकते हैं। इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। वर्ष 2024 में प्रत्येक गणना स्थल पर सुबह छह से आठ और शाम चार से छह बजे तक गणना होगी। दोनों में जो भी संख्या अधिकतम होगी, उसे ही वास्तविक माना जाएगा। प्रत्येक गणना स्थल की जीपीएस रीडिंग भी होगी। वहीं साल दर साल सारस की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई। कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के बाद प्रदेश में 2021 में 17,329 सारस पाए गए। 2022 में यह बढ़कर 19,188 हो गए। 2023 में यह संख्या बढ़कर 19,522 हो गई।