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पूनावाला ने कहा,

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में एक और लड़की की पिटाई का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने साझा कर ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने उनकी पार्टी टीएमसी का मतलब ‘ तालिबानी मुझे चाहिए’ बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक और तालिबानी वीडियो सामने आया है। चोपड़ा के बाद यह एक और वीडियो। जिसमें यह दिखाई दे रहा है कि एक महिला को तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का करीबी बेरहमी से पीट रहा है। इस प्रकार की घटनाएं लगातार हो रही है उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी का मतलब अब ‘तालिबानी मुझे चाहिए’ बन चुका है। हालत यह हो गई है कि टीएमसी के विधायक और नेता इस तरह की घटनाओं को डिफेंड भी करते हैं। इससे पहले वे संदेशखाली और चोपड़ा जैसी घटनाओं को भी डिफेंड कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखाली पर ममता बनर्जी सरकार को फटकार भी लगाई है। पूनावाला ने कहा, “आज ममता दीदी की सरकार मां-माटी-मानुष नहीं केवल बलात्कारी,भ्रष्टाचारी और बम धमाके करने वालों को बचाओ सरकार बन गई है। इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी खेमे की चुप्पी पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, ” दुख की बात यह है कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले नेता इस पर चुप है। क्या मणिपुर जाने वाले राहुल गांधी बंगाल जाकर इस महिला से मिलेंगे, ममता सरकार के खिलाफ बोलेंगे? प्रियंका गांधी वाड्रा, प्रियंका चतुर्वेदी और आम आदमी पार्टी इस पर बोलेंगे। इनमें से कोई नहीं बोलेगा। ये सब स्वाति मालीवाल, संदेशखाली , चोपड़ा और इस बार की तालिबानी घटना पर भी कुछ नहीं बोलेंगे।” ममता बनर्जी ने बंगाल को तालिबानी व्यवस्था के सहारे छोड़ दिया : तरुण चुघ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और जम्मू कश्मीर के प्रभारी तरुण चुघ ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल को ममता बनर्जी ने तालिबानी व्यवस्था के सहारे छोड़ दिया है। बंगाल के अंदर लगातार टीएमसी के नेता और गुर्गे देश की न्याय व्यवस्था को धता बता कर वहां कंगारू कोर्ट चला रहे हैं। तरुण चुघ ने कहा कि बंगाल के अंदर चाहे वह नॉर्थ 24 परगना की कामरावती की घटना हो या फिर संदेशखाली की घटना हो, बंगाल के अंदर देखी जा रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि ममता बनर्जी ने बंगाल को तालिबानी शासन व्यवस्था के हाथ में छोड़ दिया है और तालिबानी कानूनों के तहत कंगारू कोर्ट लगाकर टीएमसी के नेता वहां पर अमानवीय अत्याचार, महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वहां तालिबान का शासन चल रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रायबरेली दौरे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी से निवेदन करता हूं कि वह कुछ दिन तमिलनाडु में भी गुजारें जहां जहरीली शराब पीकर दलित समाज के लोग लगातार मर रहे हैं। वहां आपकी गठबंधन की सरकार है। इस पर उनकी रहस्यमय चुप्पी है। राहुल गांधी को कुछ दिन बंगाल के संदेशखाली और नॉर्थ 24 परगना में गुजारने चाहिए। बंगाल में लगातार, हत्याएं, ब्लात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में झंडा देखकर घर को जलाया जा रहा है, बंगाल में तालिबानी शासन चल रहा है। राहुल गांधी के पास तमिलनाडु, बंगाल जाने के लिए बिलकुल भी समय नहीं है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। तरुण चुघ ने कहा कि जम्मू कश्मीर की घटनाएं दुखद हैं, घोर कष्टदायक है, आतंकी हमले की जितनी निंदा की जाए, कम है। शहादत देने वाले शहीदों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। आज जम्मू कश्मीर के अंदर जो शांति है, लोकतंत्र के प्रति वहां की जनता का अटूट विश्वास है। जहां पहले बहिष्कार की राजनीति होती थी, वहां लाखों लोग खड़े होकर वोट दे रहे हैं। इससे बौखलाकर आतंकी संगठन लोगों को निशाना बना रहे हैं। वह हारी हुई और आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे। लगातार सुरक्षा बल उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे भयभीत होकर आतंकी ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन भारत उन्हें नहीं बख्शेगा।        

तालिबान सरकार ने ओलंपिक में भाग ले रहीं 3 महिला एथलीट्स को मान्यता देने से इनकार किया

काबुल अफगानिस्तान में जबसे आतंकी संगठन तालिबान का राज शुरू हुआ है तभी से महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ होता रहा है. आगामी पेरिस ओलंपिक्स 2024 की शुरुआत 26 जुलाई से होगी, जिसमें अफगानिस्तान के 6 एथलीट भाग ले रहे होंगे, जिनमें 3 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं. अब तालिबान सरकार ने ओलंपिक में भाग ले रहीं 3 अफगानी महिला एथलीट्स को मान्यता देने से इनकार कर दिया है, जिसका कारण सुनकर कोई भी हैरत में पड़ जाएगा. अफगानिस्तान के खेल विभाग ने आधिकारिक स्टेटमेंट जारी करते हुए बताया – ओलंपिक में अफगानिस्तान के केवल 3 एथलीट भाग ले रहे होंगे. फिलहाल अफगानिस्तान में महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने पर पाबंदी है. जब लड़कियां खेल ही नहीं पा रहीं तो उन्हें नेशनल टीम में प्रवेश कैसे मिल सकता है. हम ओलंपिक्स में भाग ले रहे केवल 3 पुरुष एथलीट्स की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं, जिनकी ट्रेनिंग और स्कॉलरशिप का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. महिलाओं के लिए हालात अच्छे नहीं अफगानिस्तान में एथलीट्स के लिए हालात अच्छे नहीं हैं और विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति ज्यादा बदतर है. अफगानिस्तान के जो 6 एथलीट पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले हैं, जिनमें से तीनों महिलाएं और 2 पुरुष एथलीट अफगानिस्तान से बाहर रह रहे हैं. अकेला एथलीट जो अफगानिस्तान में रह रहा है, वह जूडो एथलीट है और बाकी 2 पुरुष एथलेटिक्स और स्विमिंग में भाग लेंगे. वहीं महिला खिलाड़ी एथलेटिक्स और साइकलिंग में भाग लेंगी. अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने तालिबान की इस हरकत पर बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने अफगानिस्तान के 6 एथलीट्स को न्योता देने से पहले ना तो किसी तालिबान के अधिकारी से सलाह ली थी और ना ही उन्हें ओलंपिक खेलों के लिए आमंत्रित किया था. तालिबान सरकार में महिलाओं को स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने की भी अनुमति नहीं है.

भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने उच्च स्तरीय राजनीतिक फोरम एचएलपीएफ के उद्घाटन के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। योजना पटेल ने कहा कि हम ऐसे समय में मिले रहे हैं, जब दुनिया इस दर्दनाक सच्चाई का सामना कर रही है कि एसडीजी लक्ष्यों में से केवल 12 प्रतिशत ही अभी ट्रैक पर है। इसलिए 2030 एजेंडा और इसके लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने की तत्काल जरूरत है। भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया है। एसडीजी यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय विकास संबंधित लक्ष्यों के सेट हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाया गया है और वैश्विक लक्ष्यों के समान प्रचारित किया गया है। राजदूत योजना पटेल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एसडीजी के समाधान के लिए कई केंद्रित हस्तक्षेप भी शुरू किए गए हैं। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय थिंक टैंक नीति आयोग एसडीजी को लागू करने में केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों दोनों का मार्गदर्शन कर रहा है। नीति आयोग ने एक गवर्निंग काउंसिल बनाई है, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। वह एसडीजी की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और इसकी समीक्षा राज्य सरकारों द्वारा भी की जाती है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग एसडीजी की प्रगति पर नजर रखने और महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने के लिए विभिन्न सूचकांकों का भी इस्तेमाल करता है। भारत को अपने एसडीजी स्थानीयकरण मॉडल पर गर्व है, जो चार स्तंभों, संस्थागत स्वामित्व, सहयोगात्मक प्रतिस्पर्धा, क्षमता निर्माण और पूरे समाज के दृष्टिकोण पर आधारित है। भारत के मजबूत आर्थिक विकास सूचकांक प्रणालीगत सुधारों, समावेशी नीतियों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लाभ से आते हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा शुरू किया गया आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) 112 पिछड़े जिलों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एडीपी की सफलता ने आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की शुरुआत की है। भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की इच्छा रखता है, जो हमारी स्वतंत्रता का 100वां वर्ष होगा। भारत सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और 2030 एजेंडा को साकार करने की वैश्विक प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा खड़ा है।  

बाढ़ से असम में मचा हाहाकार! 18.80 लाख लोग अब भी प्रभावित,अबतक 85 की मौत

गुवाहाटी  असम में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, हालांकि अब भी 27 जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या करीब 18.80 लाख है। अधिकारियों नेयह जानकारी दी।अधिकारियों ने बताया कि राज्य में छह और लोगों की मौत हो जाने से इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। ब्रह्मपुत्र सहित कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं तथा कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। अधिकारियों ने बताया कि अब 27 जिलों में 18,80,700 लोग प्रभावित हैं जबकि  करीब 22.75 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित थे। राज्य में धुबरी जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां करीब 4.75 लाख लोग बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद कछार में दो लाख से अधिक लोग और बारपेटा में करीब 1.36 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन 25 जिलों में 543 शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है तथा वर्तमान में 3,45,500 विस्थापित लोगों की देखभाल कर रहा है।राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ( एसडीआरएफ) सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहाटी स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने  बताया कि अगले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ बारिश हो सकती है।  असम के मौजूदा हालात पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, बाढ़ से प्रभावित 22.75 लोगों की तुलना में रविवार को 27 जिलों में 18.80 लाख प्रभावित थे। बाढ़ के कारण धुबरी बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 4.75 लाख लोग बाढ़ के पानी में रहने को मजबूर है। इसके अलावा कछार में 2.01 लाख लोग और बारपेटा में 1.36 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की तरफ से राहत शिविरों का आयोजन प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 25 जिलों में 543 राहत शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में 3,45,500 लोग रह रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एसडीआरएफ सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहटी में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि असम और आसपास के राज्यों में चक्रवात का खतरा बना हुआ है।   ब्रह्मपुत्र नदी निमती घाट, तेजपुर, गुवाहाटी और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अन्य प्रमुख नदियां सुबनसिरी ( बदाती घाट), बुरहिडीहिंग (चेनिमारी), दिखौ (शिवसागर), दिसांग ( नांगलमुराघाट), कोपिली (धरमतुल ), बराक (बी पी घाट), संकोश (गोलोकगंज) और कुशियारा ( करीमगंज) भी खतरे के निशान को पार कर गई हैं ।    

मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित

नई दिल्ली  पूर्वी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व में एक अकेली मादा घड़ियाल देखी गयी जो इस क्षेत्र में घडियालों की संख्या को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकती है। मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित है। वर्ष 1950 के दशक से इस नदी से घड़ियाल विलुप्त हो गये थे। सर्वेक्षण में मादा घड़ियाल अपनी प्रजाति की एकमात्र ऐसी घड़ियाल पाई गई जो “रेतीले तट” और “4.5 मीटर गहरे जल वाले रेतीले टीले” के बीच रहती है। इस मादा घड़ियाल को पहली बार 2021 में काजीरंगा के बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में देखा गया था। इस घड़ियाल की लंबाई 2.55 मीटर है। इसे जनवरी में ब्रह्मपुत्र पर जलीय सरीसृपों के 10 दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान चुनी गई तीन प्राथमिकता वाले ठिकानों में से एक में 500 मीटर की दूरी पर नदी के तट पर बालू पर दो बार धूप सेंकते हुये देखा गया था। जानकारों का मानना है कि घड़ियालों की आबादी बढ़ाने की स्वीकृति मिलने पर उत्तर प्रदेश के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से घड़ियाल यहां लाये जा सकते है। इसका उद्देश्य घड़ियालों को उनके ऐतिहासिक क्षेत्र में वापस लाना और इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के अस्तित्व को बचाना है। वन्यजीव अधिकारियों और विशेषज्ञों को अभी यह पता नहीं चला कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के भीतर ब्रह्मपुत्र नदी के एक हिस्से में यह घड़ियाल कैसे आ गया, लेकिन उन्हें यकीन है कि यह सरीसृप नदी को घड़ियालों से फिर से आबाद करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अपनी लम्बी थूथन के कारण अन्य मगरमच्छों से बिल्कुल भिन्न इस घड़ियाल ( गेवियलिस गैंगेटिकस ) के बारे में माना जाता है कि यह 1950 के दशक में ब्रह्मपुत्र नदी से विलुप्त हो गये थे, हालांकि 1990 के दशक में इसे देखने के दावे भी किये गये थे। सरीसृपों में विशेषज्ञता रखने वाली गैर सरकारी संस्था टर्टल सर्वाइवल अलायंस फाउंडेशन इंडिया (टीएसएएफआई) और असम वन विभाग की टीमों ने पश्चिम में कलियाभोमोरा पुल से लेकर बिश्वनाथ डिवीजन के पूर्वी छोर से आगे माजुली के कमलाबाड़ी घाट तक 160 किलोमीटर के क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र का सर्वेक्षण किया। टीएसएएफआई की परियोजना निदेशक सुष्मिता कार ने कहा, “हम इस उपयुक्त आवास में घड़ियालों को पुनः स्थापित करने के लिए प्रस्ताव करते हैं।” काजीरंगा की निदेशक सोनाली घोष ने घड़ियाल प्रजनन कार्यक्रम के लिए क्षेत्र की आदर्श स्थितियों पर प्रकाश डाला, जिसमें न्यूनतम मानवजनित व्यवधान और प्रचुर मछली आबादी का हवाला दिया गया।  

भारतीय सेना ने डीएमए को भेजी सिफारिशें, 50 पर्सेंट से ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट करनेका प्रस्ताव

नई दिल्ली भारतीय सेना ने सिफारिश की है कि अग्निवीर अगर वीरगति (killed in action) को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को जीवन निर्वहन के लिए पेंशन जैसी मदद दी जाए। साथ ही सेना ने यह भी सिफारिश की है कि 50 पर्सेंट या इससे ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट किया जाए। अभी अग्निपथ स्कीम के तहत अधिकतम 25 पर्सेंट अग्निवीरों को ही परमानेंट करने का प्रावधान है। सेना ने करीब चार महीने तक अपनी सभी यूनिट से अग्निपथ स्कीम और अग्निवीरों को लेकर फीडबैक लिया और सेना के भीतर ही पूरा सर्वे कराया। सेना ने कुछ दिनों पहले ही फीडबैक और सर्वे के आधार पर अपनी सिफारिशें डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स यानी डीएमए को भेजी हैं। डीएमए प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं। सूत्रों के मुताबिक सिफारिश में कहा गया है कि अगर अग्निवीर वीरगति को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को subsistence allowance (जीवन निर्वाह भत्ता) दिया जाना चाहिए। अभी नहीं है ऐसा कोई प्रावधान एक अधिकारी के मुताबिक यह एक तरह से पेंशन ही है। सिफारिश में यह भी कहा गया है कि अगर देश की रक्षा के लिए काम करते हुए अग्निवीर डिसएबल्ड (विकलांग) होते हैं तो उन्हें भी एक्स ग्रेशिया (आर्थिक मदद) दिया जाना चाहिए। अभी अग्निपथ स्कीम में अग्निवीर के लिए इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। सेना की सिफारिश है कि हर बैच में कम से कम 50 पर्सेंट अग्निवीरों को परमानेंट किया जाना चाहिए। इसके साथ ही टेक्निकल आर्म में अग्निवीरों की अधिकतम ऐज बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। सूत्रों के मुताबिक सेना की तरफ से अग्निवीर का कार्यकाल चार साल से बढ़ाने जैसी कोई सिफारिश नहीं की गई है। जून 2022 में लई गई थी स्कीम भारतीय सेना में अग्निपथ स्कीम जून 2022 में लागू की गई और इसके साथ ही पुराने भर्ती सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। सेना में जितनी भी भर्ती हो रही हैं वह सब अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की हो रही हैं। स्कीम लागू होने के साथ ही इसे लेकर सवाल भी उठने लगे और इसका विरोध भी होने लगा। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आने पर वे अग्निपथ स्कीम को खत्म कर पुराने भर्ती सिस्टम को लागू करेंगे। विपक्ष को नहीं पसंद सरकार की नई स्कीम पहले संसद सत्र में इंडिया गठबंधन ने अग्निपथ स्कीम का विरोध किया और अग्निवीर और रेगुलर सैनिकों के बीच भेदभाव का मसला उठाया। कई रिटायर्ड ऑफिसर कह चुके हैं कि अग्निपथ स्कीम सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध लड़ने की योग्यता को कम करेगी। पूर्व नेवी चीफ एडमिरल केबी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ‘अग्निपथ स्कीम लाने के पीछे मोटिव सिर्फ पेंशन बिल घटाना था। जबकि तथ्य यह है कि यह स्कीम कॉम्बेट इफेक्टिवनेस को कम करेगी और ये तथ्य नैशनल सिक्योरिटी को समझने वाले सभी लोग जानते हैं’।

जून 2024 वैश्विक स्तर पर इस बार सबसे ज्यादा गर्म रहा, लगातार 12वां महीना तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक दर्ज

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कहीं गर्मी तो कहीं बारिश का तांडव देखा जा सकता है। तापमान ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस गर्मी में पारा भारत में अब तक 50 डिग्री के पार जा चुका है। इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने बताया कि पिछले महीने पांच महाद्वीपों में लाखों लोगों को चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ा। साथ ही इस बात की पुष्टि की कि जून अब तक का सबसे गर्म महीना था। 1.5 डिग्री की लिमिट को पार करने के करीब दुनिया बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के संकट को टालने के लिए विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करने के कगार पर खड़ी है। जून इस तय सीमा के करीब पहुंचने का लगातार 12वां महीना है। सी3एस के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले साल जून के बाद से हर महीना रिकॉर्ड पर सबसे गर्म महीना रहा है। जनवरी भी अब तक की सबसे गर्म गौरतलब है, इस साल जनवरी में बढ़ता तापमान औद्योगिक काल (1850 से 1900) से पहले की तुलना में 1.66 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था, जो इसे अब तक की सबसे गर्म जनवरी बनाता है। बता दें कि कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस यूरोपियन यूनियन के अर्थ ऑब्जरवेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। जनवरी 2024 के दौरान सतह के पास हवा का औसत वैश्विक तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो 1991 से 2020 के दरमियान जनवरी माह में दर्ज औसत तापमान से करीब 0.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।  रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी सिर्फ़ ज़मीन तक ही सीमित नहीं है। जून 2024 में समुद्री सतह का तापमान भी अब तक का सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने बताया कि वैश्विक महासागर सतह तापमान विसंगति उनके जलवायु रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा थी, जिसने ध्रुवीय बर्फ़ पिघलने की ख़तरनाक दर में योगदान दिया। अंटार्कटिक समुद्री बर्फ़ कवरेज ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है, जो वैश्विक समुद्री स्तरों और पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए गंभीर निहितार्थ पैदा करने वाली प्रवृत्ति को जारी रखती है। समुद्री बर्फ़ में गिरावट, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का एक स्पष्ट संकेतक है। ग्लोबल वार्मिंगजिससे मौसम का मिजाज और समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। अभूतपूर्व तापमान ने वैश्विक नेताओं और पर्यावरण संगठनों के बीच कार्रवाई के लिए नए सिरे से आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगे के नुकसान को कम करने के लिए मजबूत जलवायु नीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की स्थिति के बने रहने से आने वाले महीनों में उच्च तापमान बना रह सकता है, जिससे संभवतः 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्षों में से एक बन सकता है। चल रहे गर्मी की लहर संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर दक्षिणी यूरोप और चीन तक महाद्वीपों में मौसम संबंधी गंभीर घटनाओं पर एक अध्ययन से यह पता चलता है कि किस प्रकार गंभीर मौसम संबंधी घटनाएं लगातार और तीव्र होती जा रही हैं तथा जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप अब उनकी संभावना 50 गुना अधिक हो गई है। कुल मिलाकर, जून का महीना इतिहास में सबसे गर्म महीना होने का रिकॉर्ड तोड़ता है, जो जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति और इसके व्यापक प्रभावों की एक स्पष्ट याद दिलाता है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ता जा रहा है, प्रभावी जलवायु समाधानों की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए ग्रह की सुरक्षा के लिए संधारणीय प्रथाओं को लागू करने के प्रयासों को तेज करना चाहिए।

भारत से सस्ती है कंगाल पाकिस्तान में मोबाइल सेवा, जानिए बाकी देशों में कितना है मिनिमम रिचार्ज

नई दिल्ली रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है। इससे महंगाई से जूझ रहे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इससे शहरी इलाकों में टेलिकॉम सर्विसेज पर खर्च वित्त वर्ष 2025 में कुल घरेलू खर्च का 2.8 फीसदी हो जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो जाएगा लेकिन सरकार और टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ फिक्स करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनका इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भारत में मोबाइल टैरिफ अब भी दुनिया के अधिकांश देशों से सस्ता है। दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। हालिया बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो का मिनिमम सर्विस चार्ज 139 रुपए से बढ़कर 189 रुपए हो गया है। इसमें 28 दिन की वैलिडिटी और दो जीबी डेटा शामिल है। इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का भी मिनिमम सर्विस चार्ज 179 रुपए से बढ़कर 199 रुपए हो गया है लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में महीनेभर के लिए अनलिमिटेड वॉयस और 18 जीबी डेटा के लिए आपको 1.89 डॉलर यानी करीब 157 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह रेट सरकारी कंपनी बीएसएनएल का है। बीएसएनएल पहले एक प्राइस रेगुलेटर की तरह काम करता था। इससे प्राइवेट कंपनियां टैरिफ बढ़ाने से बचती थीं। लेकिन कंपनी 4-जी और 5-जी सर्विसेज के मामले में निजी कंपनियों के साथ होड़ करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान में सस्ती है सेवा सरकार ने कई देशों में मोबाइल टैरिफ के बारे में डिटेल जानकारी देते हुए भारत से उनकी तुलना की है। इन आंकड़ों के मुताबिक चीन में मिनिमम सर्विस के लिए यूजर्स को 8.84 डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अफगानिस्तान में यह राशि 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर और नेपाल में 2.75 डॉलर है यानी इन देशों में मोबाइल टैरिफ भारत से महंगा है। वहीं पाकिस्तान में मोबाइल यूजर्स को अपनी सर्विस बनाए रखने के लिए मिनिमम 1.39 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं यानी पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। अमेरिका में मिनिमम मोबाइल रिचार्ज प्लान 49 डॉलर यानी करीब 4000 रुपए का है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए यूजर्स को 20.1 डॉलर, साउथ अफ्रीका में 15.8 डॉलर, यूके में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर, मिस्र में 2.55 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। भारत में टेलिकॉम कंपनियों ने प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की है। उन्होंने महंगे 5G स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाए हैं लेकिन अभी तक बहुत कम मोनेटाइजेशन हुआ है। यह नवंबर 2021 के बाद मोबाइल टैरिफ में पहली बड़ी बढ़ोतरी है। सरकार का दखल नहीं, बाजार के हिसाब से होती हैं तय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने इसे लेकर शुक्रवार को एक बयान जारी किया. बयान में दूरसंचार विभाग ने कहा कि अभी घरेलू बाजार में 1 सरकारी कंपनी और 3 प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. मोबाइल सेवाओं का बाजार अब डिमांड और सप्लाई के हिसाब से काम करता है. मोबाइल कंपनियां नियामक ट्राई द्वारा तय किए गए ढांचे के तहत दरें तय करती हैं. सरकार फ्री मार्केट के निर्णयों में दखल नहीं देती है. टैरिफ में बदलाव की ट्राई करता है निगरानी बयान के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों के द्वारा दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की ट्राई निगरानी करता है और देखता है कि ये बदलाव तय दायरे में रहें. दूरसंचार विभाग ने साथ ही ये भी जोड़ा कि बीते 2 सालों से देश में मोबाइल टैरिफ में कोई बदलाव नहीं हुआ था, जबकि उस दौरान टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने देश में 5जी सेवाएं शुरू करने पर भारी निवेश किया. उसी का परिणाम है कि आज देश में औसत मोबाइल स्पीड बढ़कर 100 एमबीपीएस के स्तर पर पहुंच गई है और मोबाइल स्पीड के मामले में देश की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग अक्टूबर 2022 के 111 से छलांग लगाकर 15 पर पहुंच गई है. टेलीकॉम कंपनियों ने इतना महंगा किया प्लान तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइिडया ने इस महीने से अपने प्लान को महंगा किया है. दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ में 11 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. सबसे पहले रिलायंस जियो ने टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था. उसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया. टैरिफ बढ़ने से मोबाइल उपभोक्ताओं पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ बढ़ने का अनुमान है. विपक्षी पार्टियां इस बात को मुद्दा बना रही हैं. वहीं सरकार ने ताजे बयान में सफाई देते हुए दोहराया है कि अभी भी भारत में मोबाइल सेवाओं की दरें दुनिया के प्रमुख देशों की तुलना में कम हैं. दूरसंचार विभाग ने अपनी बात रखने के लिए इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन के द्वारा जारी आंकड़ों को आधार बनाया है. आईटीयू के आंकड़ों में न्यूनतम मोबाइल, वॉयस और डेटा के बास्केट (140 मिनट, 70 एसएमएस और 2 जीबी डेटा) की दरें बताई गई हैं. डेटा पिछले साल यानी 2023 के हिसाब से है. प्रमुख देशों में मोबाइल सेवाओं की दरें आंकड़ों के अनुसार, मिनिमम सेवाओं के लिए चीन में उपभोक्ता 8.84 डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसी तरह अफगानिस्तान में 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर, नेपाल में 2.75 डॉलर और पाकिस्तान में 1.39 डॉलर खर्च करना पड़ रहा है. प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की दरों को देखें तो वे अमेरिका में 49 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया में 20.1 डॉलर, दक्षिण अफ्रीका में 15.8 डॉलर, ब्रिटेन में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर और मिस्र में 2.55 डॉलर हैं. भारत के मामले में यह दर 1.89 डॉलर है, जिसमें उपभोक्ताओं को अनलिमिटेड वॉयस कॉल के साथ 18 जीबी डेटा का लाभ मिल रहा है.

सऊदी प्रिंस के महल में पर्यटक रातें गुजार सकेंगे और शाही जिंदगी का अनुभव लेंगे

रियाद कच्चे तेल की सप्लाई से अर्थव्यवस्था को चलाने वाले सऊदी अरब के आगे संकट खड़ा है। दुनिया भर में जिस तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का विकल्प बढ़ रहा है, उससे कच्चे तेल की डिमांड में कमी आ सकती है। ऐसी स्थिति सऊदी अरब, कुवैत, कतर जैसे देशों के लिए चिंता की बात है। सऊदी अरब ने तो इसकी काट भी खोजना शुरू कर दिया है और उस पर तेजी से काम भी कर रहा है। इसके तहत उसने खेल के आयोजनों को बढ़ावा दिया है तो वहीं मनोरंजन के कार्यक्रम भी करा रहा है। यही नहीं पर्यटन को भी सऊदी अरब बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। अब पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सऊदी अरब अपने शासक रहे सऊद बिल अब्दुलअजीज के महल को भी किराये पर देगा। इस महल में पर्यटक रातें गुजार सकेंगे। 3 लाख 65 हजार वर्ग फुट का यह विशाल महल आधुनिक सऊदी अरब के दूसरे शासक सऊद बिन अब्दुलअजीज का घर हुआ करता था। रेड पैलेस के नाम से विख्यात इस महल को 1940 में तत्कालीन क्राउन प्रिंस के लिए तैयार किया गया था। अब इसे अल्ट्रा लग्जरी होटल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इस महल में ठहर कर लोगों को सऊदी अरब की शाही जिंदगी के अनुभव मिल सकेंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार महल को नया रूप बुटीक ग्रुप दे रहा है, जो एक बिल्डर कंपनी है। दशकों तक यह महल शासक का आवास होता था और फिर सरकार का इसे मुख्यालय बना दिया गया था। अब यह एक होटल के तौर पर विकसित होगा। इसके कुल 70 कमरों में पर्यटक रुकेंगे। इससे लोगों को न सिर्फ ठहरने का मौका मिलेगा बल्कि सऊदी अरब की शाही जिंदगी के भी दीदार हो सकेंगे। इसके अलावा इस होटल में सऊदी अरब के शाही परिवार के पसंदीदा व्यंजन परोसे जाएंगे। इस तरह रहने से लेकर खाने तक में लोगों को सऊदी अरब की शाही लाइफस्टाइल का अनुभव कराया जाएगा। इस महल में स्पा सेंटर भी खुलेंगे, जहां सऊदी की पारंपरिक थेरेपी मिलेंगी। सऊदी अरब के इतिहास और संस्कृति को भी बताएगा महल बुटीक ग्रुप का कहना है कि सऊदी अरब में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है। हालांकि इसमें रहने की कीमत काफी ज्यादा होगी। बुटीक ग्रुप के सीईओ मार्क डी. कॉसिनिस ने कहा, ‘यह रॉयल जिंदगी को जीने का एक अनुभव होगा। यहां आपको हर वह चीज मिलेगी, जो सऊदी अरब की शाही जिंदगी में रही है।’ इसके अलावा इस महल में रहकर लोगों को सऊदी अरब की इतिहास और संस्कृति को भी समझने में मदद मिलेगी।  

चीन, जापान और साउथ कोरिया 2028 तक बुक, 30 साल में 50,000 से अधिक जहाजों की जरूरत

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी (Gautam Adani) अब जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग में उतरने की योजना बना रहे हैं। गुजरात के मुंद्रा में अडानी ग्रुप (Adani Group) के फ्लैगशिप पोर्ट पर जहाज बनाने का काम शुरू हो सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में अधिकांश यार्ड कम से कम 2028 तक पूरी तरह बुक हैं। यही वजह है कि दुनिया में जहाज ऑपरेट करने वाली बड़ी कंपनियों को शिपबिल्डिंग के लिए वैकल्पिक जगहों की तलाश है। इनमें भारत भी शामिल है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए अडानी ग्रुप शिपबिल्डिंग में उतरने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में भारत को शीर्ष 10 शिपबिल्डर बनाने और मैरीटाइम अमृत काल विजन में 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। अडानी ग्रुप का प्लान देश की इस योजना में फिट बैठता है। दुनिया में कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी महज 0.05% है। दुनिया में कमर्शियल जहाज बनाने वाले देशों की लिस्ट में भारत 20वें स्थान पर है। देश की कुल विदेशी माल-ढुलाई आवश्यकताओं में भारतीय स्वामित्व वाले और भारतीय झंडे वाले जहाजों का हिस्सा लगभग 5% है। अडानी की जहाज निर्माण योजना को मुंद्रा बंदरगाह के लिए 45,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना में शामिल कर लिया गया है। इस योजना को हाल में पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली है। 62 अरब डॉलर का मार्केट अडानी ग्रुप ऐसे समय जहाज निर्माण में उतरने की तैयारी कर रहा है जब ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए धीरे-धीरे ग्रीन शिप की ओर बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा बेड़े को बदलने के लिए अगले 30 वर्षों में 50,000 से अधिक जहाजों का निर्माण किया जाना है। अडानी ग्रुप ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2047 तक भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट 62 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही इससे जुड़े सहायक उद्योग के 37 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे 1.2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद है। केपीएमजी के अनुसार मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए भारतीय शिपयार्ड्स के सालाना उत्पादन को 2030 तक 0.072 मिलियन ग्रॉस टन से बढ़ाकर 0.33 मिलियन ग्रॉस टन और 2047 तक 11.31 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने की आवश्यकता है। साल 2047 तक घरेलू कार्गो क्षमता में वृद्धि के अलावा भारतीय विदेशी कार्गो की न्यूनतम 5% ढुलाई प्राप्त करने के लिए, अतिरिक्त बेड़े की क्षमता की आवश्यकता है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू जहाज निर्माण की मांग अगले 23 वर्षों में 59.74 मिलियन ग्रॉस टन होने का अनुमान है। इनमें पुराने जहाजों का रिप्लेसमेंट भी शामिल है। क्या है एडवांटेज जानकारों का कहना है कि किसी नई कंपनी को इस सेक्टर में काफी समय लग सकता है लेकिन अडानी ग्रुप के लिए परिस्थितियां आसान हैं। उसके पास इसके लिए जमनी और और पर्यावरणीय मंजूरी है। हैवी इंजीनियरिंग में अडानी ग्रुप का यह पहला कदम होगा। एसईजेड का दर्जा मिलने से अडानी ग्रुप को अनेक वित्तीय और टैक्स चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन चुनौतियों के कारण स्थानीय कंपनियां चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों के साथ होड़ करने में असमर्थ है। भारत में आठ सरकारी यार्ड और करीब 20 निजी यार्ड हैं। लार्सन एंड टुब्रो चेन्नई के पास कट्टुपल्ली में एक यार्ड ऑपरेट करती है।  

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