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जबलपुर : बोल बम के जय करो से गुजा शहर

Jabalpur: City passes through Bol Bam Ke Jai Karo

Jabalpur: City passes through Bol Bam Ke Jai Karo जीतेन्द्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता ) जबलपुर ! समाज सेवक श्री रतन यादव ओर सभी बम बम बोले के भक्त गण विगत 30 सालों से नाग पंचमी के दिन यह पताका आज गोरखपुर से गुप्तेश्वर महादेव के मन्दिर में जाकर चढ़ाया जाता है बोल-बम के उद्घोष से शहर गूंज उठा। शिवभक्त बोल-बम, बम-बम के जयकारे लगाते हुए गंतव्य की ओर रवाना होते गए। भगवान शिव की भक्ति को समर्पित श्रावण मास में पूरा शहर शिवमय होने लगा है। ज्यों-ज्यों शिवरात्रि के आगमन की तिथि निकट आ रही है त्यों-त्यों शहर में भक्ति की लहरें उफान पर पहुंच रही हैं।

खूबसूरत पहाड़ियों और मंदिरों से घिरा हुआ मध्यप्रदेश का अमरकंटक, जानिये यहां के बारे में सबकुछ

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples, know everything about it अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. Amarkantak Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश स्थित अमरकंटक हिंदुओं का प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है जो अनूपपुर और शहडोल के तहसील पुष्पराजगढ़ में मेकल की पहाड़ियों के बीच बसा हुआ शहर है. यहां सुप्रसिद्ध अमरकंटक मंदिर है जो 1065 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. पहाड़ों और घने जंगलों मे बीच इस मंदिर की खूबसूरती अलग ही प्रतीत होती है. यह छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा है. यह जगह विंध्य, सतपुड़ा और मैदार की पहाड़ियों का मिलन स्थल है, जिसका दृश्य मन मोह लेने वाला होता है. अमरकंटक तीर्थराज के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है. यही वजह है कि इस मंदिर को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं. अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव ने आग से त्रिपुरा को नष्ट कर दिया तो तीन में से एक राख अमरकंटक पर गिर गई, जो हजारों शिवलिंगों में बदल गई. ऐसा ही एक लिंग ज्वलेश्वर में आज भी पूजा जाता है. संस्कृत में अमरकंटक का अर्थ है अनंत स्त्रोत, जो भारत कि सबसे पवित्र नदी नर्मदा नदी से जुड़ा हुआ है. यहां कई सारे मंदिर हैं जो कि विभिन्न शासकों के युग का वर्णन करते हैं. अमरकंटक में प्रमुख आकर्षण नर्मदाकुंड और कलचुरी काल के प्राचीन मंदिर हैं. नर्मदाकुंड के मंदिर परिसर के भीतर 16 छोटे मंदिर हैं, जो शहर के मध्य में स्थित हैं. अमरकंटक के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलअमरकंटक में कई प्रसिद्ध पर्यटक स्थल हैं. यहां टूरिस्ट नर्मदा नदी का उद्गम स्थल देख सकते हैं. कलचुरी का प्राचीन कालीन मंदिर देख सकते हैं. इसके अलावा, कर्ण मंदिर, पातालेश्वर मंदिर,सोनमुडा अमरकंटक, दूधधारा प्रपात अमरकंटक, कपिल धारा प्रपात अमरकंटक इत्यादि जगहों पर पर्यटक घूम सकते हैं. नर्मदा नदी का उद्गम स्थलअमरकंटक में नर्मदा नदी और सोनभद्रा नदियों का उद्गम स्थल है. यह आदिकाल से ही ऋषि और मुनियों की तपोभूमि रही है. नर्मदा का उद्गम यहां के एक कुंड से और सोनभद्रा के पर्वत शिखर से हुआ है. नर्मदा नदी यहां पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है. इस नदी को “मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवनदायनी नदी” भी कहा जाता है. ऐसे में आप यहां नर्मदा नदी का उद्गम स्थल घूम सकते हैं.

ट्रेन ,ट्रैक और स्टेशन पर रील बनाने वाले हो जाओ सावधान, अब जाना होगा जेल , आरपीएफ की नजर

Those who make reels on trains, tracks and stations, be careful

Those who make reels on trains, tracks and stations, be careful, now they will have to go to jail, RPF is keeping an eye on them. जबलपुर। रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेन और ट्रैक की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए रील (शाॅर्ट वीडियो) बनाने वालों पर रेलवे अब सख्त कार्रवाई करेगी। आरपीएफ ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर उन्हें जेल भी भेजेगी। हाल ही में रेलवे की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए कई रील इंटरनेट मीडिया में वायरल हुए हैं, जिसने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे की सुरक्षा से खिलवाड़ यह वीडियो रेलवे ट्रैक ही नहीं बल्कि ट्रेन और रेल परिसर पर सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले हैं। इसके बाद आरपीएफ के महानिदेशक ने इन शाॅर्ट वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद जबलपुर समेत भोपाल और कोटा मंडल में ऐसे लोगों की तलाश शुरू कर दी है। आरपीएफ महानिदेशक के निर्देश के बाद जबलपुर मंडल की सीमा में आने वाले सभी रेलवे स्टेशन, ट्रैक और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में रेल संरक्षा से खिलवाड़ करते हुए वीडियो बनाने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाड़ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।- मो. मुनव्वर खान, सीनियर डीएससी, जबलपुर रेल मंडल कैमरे से नजर, आरपीएफ रख रही खबर ट्रेनों की बढ़ती दुर्घटनाओं को राेकने के लिए अब रेलवे ट्रैक पर पहले से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है।रेलवे ट्रैक के सुरक्षा से खिलवाड़ करने के वीडियो सामने आने के बाद अधि‍कारियों की चिंता बढ़ गई है।आरपीएफ ने ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए स्टेशन के साथ रेलवे फाटक पर कैमरों से निगरानी बढ़ा दी है।ऐसे लोगों पर कार्रवाई के निर्देश आरपीएफ के महानिदेशक के आदेश के बाद पश्चिम मध्य रेलवे के आरपीएफ आईजी, जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल के सीनियर डीएससी ने सभी स्टेशन में बनी आरपीएफ थाना, चौकी पर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इधर आरपीएफ के साथ रेलवे अधिकारी और कर्मचारियों को भी रेल संरक्षा से खिलवाड़ करने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह न करें

मनीष सिसोदिया को मिली जमानत, 17 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे

Manish Sisodia gets bail, will come out of jail after 17 months

Manish Sisodia gets bail, will come out of jail after 17 months सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शुक्रवार (9 अगस्त 2024) को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया की जमानत दे दी. न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया. इससे पहले अदालत ने 6 अगस्त को सिसोदिया की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मनीष सिसोदिया को रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के निर्माण व कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं में संलिप्तता के लिए 26 फरवरी, 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. जांच एसेंसी को बताया देरी के लिए जिम्मेदार सुनवाई के दौरान मनीष सिदोतिया के वकील ने कहा कि अक्टूबर में हमें बताया गया था कि 6-8 महीने में मुकदमा पूरा हो सकता है. हमने कहा था कि अगर ऐसा न हुआ तो आरोपी दोबारा ज़मानत की मांग कर सकता है. आरोपी लंबे समय से जेल में है. ऐसे में इन्हें PMLA सेक्शन 45 में दी गई ज़मानत की कड़ी शर्तों से रियायत की मांग की गई. वहीं जांच एजेंसी ने आरोपी को मुकदमे में देरी के लिए जिम्मेदार बताया. ED ने कहा कि आरोपी गैरजरूरी दस्तावेज मांग रहे हैं. सैकड़ों आवेदन दाखिल किए, लेकिन कोई भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं दिखाते. ED और CBI दोनों मामलों में बहुत अधिक आवेदन दाखिल नहीं हुए, इसलिए मुकदमे में देरी के लिए आरोपी को ज़िम्मेदार मानने के निचली अदालत और हाई कोर्ट के निष्कर्ष से हम सहमत नहीं हैं. ‘आरोपी को दस्तावेज देखने का अधिकार है’ सिसोदिया के वकील ने आग कहा, ED के वकील ने 3 जुलाई तक जांच पूरी करने की बात कही गई थी. यह अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट को बताए गई 6-8 महीने की सीमा के परे है. इस देरी के चलते निचली अदालत में मुकदमा शुरू हो पाने का सवाल ही नहीं था. व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है. इसका बिना उचित वजह के हनन नहीं हो सकता है. डेढ़ साल से जेल में बंद हैं मनीष सिसोदिया सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति के निर्माण एवं कार्यान्वयन में अनियमितताओं में कथित संलिप्तता को लेकर सिसोदिया को 26 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया था. ईडी ने उन्हें नौ मार्च 2023 को सीबीआई की प्राथमिकी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था. सिसोदिया ने 28 फरवरी, 2023 को दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

केंद्रीय जेल जबलपुर में बंदियों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन उन्हें स्वरोजगार हेतु प्रेरित किया गया

10-day training was organized for the prisoners in Central Jail Jabalpur and they were motivated for self-employment.

10-day training was organized for the prisoners in Central Jail Jabalpur and they were motivated for self-employment. जीतेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता)जबलपुर ! केन्द्रीय जेल जबलपुर में जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर के मार्गदर्शन एवं जेल उप अधीक्षक श्री मदन कमलेश, श्रीमती रूपाली मिश्रा के पर्यवेक्षण में दिनांक 30.07.2024 से 08.08.2024 तक 10 दिवसीय एनवलेप एवं फाईल मेकिंग कोर्स का संचालन सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया के सहयोग से ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (सेन्ट-आरसेटी) द्वारा कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार हेतु निर्भर बनाना था ताकि वे जेल से रिहा होकर समाज की मुख्यधारा में जुड सकें। जिसमें कुल 25 बंदियों द्वारा भाग लिया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षक श्री सुभाष पिल्लई एवं श्री अभिषेक तिवारी द्वारा बंदियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन कार्यक्रम में जेल उप अधीक्षक श्री मदन कमलेश, श्रीमती रूपाली मिश्रा, श्रीमती अंजू मिश्रा, सहायक जेल अधीक्षक, सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया की ओर से रीजनल हेड श्री अविनाश कुमार (एल.डी.एम.) दिवाकर ठाकुर, आर.से.टी. डायरेक्टर कल्पा राजपूत, आनंद सिंह एवं गौरव नामदेव उपस्थित रहे।

जमीन बेचना …. ‘अखिलेश यादव ने बीजेपी का किया नामकरण ? जाने नाम

Selling land…'Akhilesh Yadav named BJP? know name

Selling land…’Akhilesh Yadav named BJP? know name समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वक्फ बोर्ड संशोधक बिल को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला किया है. सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा इस वक्फ बोर्ड संशोधन के बहाने जमीन को हथियाना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एक रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. इस दौरान उन्होंने नजूल संपत्ति और अन्य जमीनों को लेकर भी हमला किया. अखिलेश यादव ने वक्फ बिल का विरोध करते हुए एक्स पर लिखा- ‘वक्फ बोर्ड’ का ये सब संशोधन भी बस एक बहाना है. रक्षा, रेल, नज़ूल लैंड की तरह जमीन बेचना निशाना है. वक्फ बोर्ड की जमीनें, डिफेंस लैंड, रेल लैंड, नज़ूल लैंड के बाद ‘भाजपाइयों के लाभार्थ योजना’ की शृंखला की एक और कड़ी मात्र हैं. भाजपा क्यों नहीं खुलकर लिख देती:‘भाजपाई-हित में जारी’ सपा अध्यक्ष ने कहा कि, ‘इस बात की लिखकर गारंटी दी जाए कि वक्फ बोर्ड की जमीनें बेची नहीं जाएंगी. भाजपा रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. उसे अपने नाम में ‘जनता’ के स्थान पर ‘जमीन’ लिखकर नया नामकरण कर देना चाहिए: भारतीय जमीन पार्टी. #नहींचाहिएभाजपा.’ बता दें कि आज केंद्र सरकार लोकसभा में वक्फ बोर्ड में बदलाव के लिए संशोधन बिल पेश करेगी. इस विधेयक को लेकर आज सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है. किरण रिजिजु इस बिल को सदन में पेश कर सकते हैं. सरकार का कहना है कि विधेयक वक्फ की संपत्तियों की देखरेख के लिए लाया जा रहा है. वहीं विपक्षी दलों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन ने वक्फ बोर्ड बिल का विरोध करने का फैसला किया है. जिसके बाद इस बिल को लेकर आज भी सदन में हंगामा देखने को मिल सकता है. विपक्षी दलों ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की अपील की. वहीं मुस्लिम संगठनों में इसका विरोध देखने को मिल रहा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि वक्फ बोर्डों की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

‘लड़ते-लड़ते…’, विनेश फोगाट के संन्यास पर शशि थरूर की पोस्ट ने जीता दिल, जानें

'Fighting-fighting…', Shashi Tharoor's post on Vinesh Phogat's retirement won hearts, know

‘Fighting-fighting…’, Shashi Tharoor’s post on Vinesh Phogat’s retirement won hearts, know Shashi Tharoor reaction on Vinesh Phogat retirement: भारत की स्टार पहलवान विनेश फोगाट ने संन्यास का ऐलान कर दिया है. उनके रिटायरमेंट पर अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सिस्टम से पक गई लड़की’. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विनेश फोगाट की फोटो को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है. बता दें कि पेरिस ओलंपिक में फाइनल मुकाबले से कुछ घंटे पहले विनेश फोगाट को वजन ज्यादा होने के चलते अयोग्य घोषित कर दिया था. शशि थरूर ने कही ये बात विनेश फोगाट ने संन्यास लेने के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘इस सिस्टम से पक गई है ये लड़की लड़ते-लड़ते थक गई है ये लड़की.’

गृह जिले के बाहर रहने वाले युवाओं को ऑनलाइन वोटिंग का अधिकार हो : गणेश सिंह

Youth living outside their home district should have the right to vote online: Ganesh Singh

Youth living outside their home district should have the right to vote online: Ganesh Singh भोपाल। सतना सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा में सरकार से आग्रह किया है कि गृह जिले से बाहर रह रहे युवाओं को बैलेट पेपर या ऑनलाइन वोटिंग करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। बीजेपी सांसद सिंह ने लोकसभा में कहा कि वोटिंग प्रतिशत गिरने के कारणों में एक वजह यह भी है कि अधिकांश युवा पढ़ने अथवा जॉब करने के सिलसिले में बाहर रहते है। वे वोटिंग नहीं कर पाते है। सतना सांसद गणेश सिंह ने गुरुवार को लोकसभा में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवा वर्ग जो नव मतदाता 18 से 25 साल तक के हैं, वे अपने गृह जिले से बाहर कोचिंग करने या पढ़ाई के लिये बड़े महाविद्यालयों में पढ़ने तथा निजी कम्पनियों में नौकरी करते हैं, जो घर से दूर रहने के कारण वोट करने नही आ पाते हैं। वोटिंग प्रतिशत कम होने का एक बड़ा कारण यह भी है। सिंह ने कहा कि ऐसे युवाओ को चुनाव के समय वापस घर आने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे कि तत्काल टिकट न मिल पाना, पढ़ाई के कारण समय का अभाव, छुट्टी न मिल पाना तथा आवागमन में आर्थिक व्यय की क्षति होती है। इसलिये वे अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाते है। सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि जिस प्रकार केन्द्रीय कर्मचारियों को गृह जिले से बाहर अन्यत्र स्थानों से वोटिंग के लिये बैलट पेपर की व्यवस्था की जाती है, उसी प्रकार यदि इन युवाओं के लिये उसी स्थान में बैलेट पेपर या ऑनलाइन वोटिंग अथवा अन्य उपयुक्त माध्यम से वोटिंग का अधिकार दिलाने की व्यवस्था की जाय। इससे निश्चित ही वोट प्रतिषत बढ़ेगा और युवाओं में चुनाव प्रति उत्साह भी बढ़ेगा।

साइबर ठगों के निशाने पर प्रदेश के IAS अफसर: जबलपुर कलेक्टर हुए साइबर फ्राड के शिकार

State's IAS officers on target of cyber thugs: Jabalpur Collector becomes victim of cyber fraud

State’s IAS officers on target of cyber thugs: Jabalpur Collector becomes victim of cyber fraud जबलपुर । मध्य प्रदेश के कलेक्टर (आईएएस अफसर) साइबर ठगों के निशाने पर हैं। ताजा मामला जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने साइबर सेल से मामले की शिकायत की है। जबलपुर कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि ऐसे फर्जी संदेशों को नजरअंदाज करें और तत्काल ब्लॉक कर दें। जबलपुर कलेक्टर का पहले भी फैसबुक अकाउंट हैक हो चुका है। जालसाजों ने कलेक्टर दीपक सक्सेना के नाम से उनके रिश्तेदार से 25 हजार की ठगी की है। ठग ने साइबर फ्रॉड करते हुए वाट्सऐप पर कलेक्टर दीपक की फोटो लगाई। फिर कई रिश्तेदारों को मैसेज किया। झांसे में आकर एक रिश्तेदार ने 25 हजार ट्रांसफर भी कर दिए गए। दीपक सक्सेना को ठगी का पता चला तो हैरान हो गए। ठगी का पता चलते ही जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने फर्जी फेसबुक आईडी ब्लॉक कर आरोपी की तलाश के निर्देश साइबर सेल को दिए हैं। कलेक्टर ने अपनी फेसबुक आईडी पर फेक लिखते हुए कहा है कि अज्ञात नंबर से उनकी प्रोफाइल फोटो लगाकर लोगों से संपर्क किया जा रहा है। जिससे लोगों को धोखा हो रहा है। उन्होंने कहा है कि इन नंबरों का कलेक्टर जबलपुर से कोई संबंध नहीं है। नंबर फर्जी हैं। ऐसी ठगी को दिया अंजाम

सीएफ-डीएफओ सप्लायर्स के लिए नहीं जोड़ पाएंगे औचित्यहीन टेंडर की शर्ते

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers उदित नारायणभोपाल। हर वित्तीय वर्ष में 70 से 80 करोड रुपए की चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर खाद वगैरह की खरीदी में डीएफओ और सीएफ टेंडर की शर्तों में मनमानी नहीं कर सकेंगे। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने पूरे प्रदेश में एक समान शर्तें लागू करवाने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को 7 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास को सौंपने के निर्देश दिए हैं। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने शर्तें बनाने के लिए 10 सदस्य कमेटी गठित की है। दिलचस्प पहलू यह है कि कमेटी में डीएफओ विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल को शामिल किया गया है, जिन्होंने भी अपने वन मंडल के लिए जारी निविदा में अनावश्यक शर्तें जोड़ी हैं। इस कमेटी में उत्तम शर्मा एपीसीसीएफ सिंह परियोजना को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। शर्मा के अलावा राखी नंदा सीएफ सामाजिक वानिकी, राजेश राय सीएफ रीवा, कमल अरोरा सीएफ जबलपुर, आलोक पाठक सीएफ वन मंडल भोपाल, बृजेंद्र श्रीवास्तव सीएफ वन मंडल पूर्व छिंदवाड़ा, प्रदीप मिश्रा डीएफओ देवास, विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल और नीथ्यानंतम डीएफओ पश्चिम मंडला को बतौर सदस्य शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि वन बल प्रमुख और पीसीसीएफ को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि फील्ड में पदस्थ डीएफओ और सीएफ चहेते सप्लायर्स को वर्क आर्डर देने के लिए उनके मुताबिक निविदा में शर्तें जोड़ रहे हैं। इनमें ऐसी भी शर्तें जोड़ी गई, जो अनावश्यक होती है। मसलन, 10 प्रकार के आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र। आईएसओ की शर्तों को लेकर जब पीसीसीएफ विकास यूके सुबुद्धी ने कतिपय डीएफओ जब आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र के औचित्य पर सवाल किए तब टेंडर निरस्त कर दिए गए। इनमें से कुछ डीएफओ तो अभी भी अपनी मनमानी पर अड़े हुए हैं। सरकार के निर्देशों की अवहेलना राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ दी जाने वाली शर्तें हॉफ के आदेश का हवा में उड़ा रहे हैं डीएफओ वन मंडलों द्वारा ई-टेंडर अथवा जेएम (GeM) के लिए वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने नया आदेश जारी किया है। वन बल प्रमुख श्रीवास्तव के इस आदेश का अधिकांश डीएफओ पालन नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में आईटी शाखा ने एक पत्र लिखकर हॉफ को अवगत भी कराया है। आईटी शाखा ऐसे डीएफओ की सूची भी बना रहा है, वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। क्या है हॉफ के आदेश? हॉफ श्रीवास्तव ने इस आदेश कहा है कि प्रति वर्ष विभाग के विभिन्न कार्यों हेतु सामग्री का क्रय जेम के माध्यम से किया जाता है। जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री की जानकारी से मुख्यालय अनभिज्ञ रहता है एवं इस कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तत्समय यदि टेंडर में कोई त्रुटि होती है, वनमंडलाधिकारियों को उचित निर्देश नही दिये जा पाते। अतः भविष्य में जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री का टेंडर की जानकारी/विज्ञापन विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाना सुनिश्चित करें। दर्शन इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है, जिसके कारण डीएफओ अभी भी मनमानी कर रहे हैं। 18 से 20% धनराशि बंटते है कमीशन में चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 60 से 70 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।

राज्यसभा की 12 सीटों पर चुनाव, INDIA या NDA, किसका पलड़ा भारी?

Review of 12 mainstream elections, India or NDA, who has the upper hand?

Review of 12 mainstream elections, India or NDA, who has the upper hand? Rajya Sabha Election 2024: राज्यसभा की 12 सीटों के लिए 3 सितंबर को उपचुनाव होगा. 9 राज्यों की इन 12 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए चुनाव आयोग ने बुधवार को कार्यक्रम का एलान किया. तारीखों की घोषणा के साथ ही अब राजनीतिक दल जीत का फॉर्म्युला निकालने में जुट गए हैं. इन 12 सीटों पर जीत किसकी होगी, ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस बार इन 12 सीटों में से करीब 10 पर कड़े मुकाबले की बात कही जा रही है. हालांकि कुछ सीटों पर कांग्रेस का तो कुछ पर बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. आइए जानते हैं कि इस चुनाव के बाद कैसे बदलेगा राज्यसभा का गणित. पहले जानिए कहां-कहां खाली हैं ये सीटें महाराष्ट्र में राज्यसभा की 2 सीटें, बिहार में 2 सीटें, असम में 2 सीटें, त्रिपुरा में 1, हरियाणा में 1, राजस्थान में 1 और मध्य प्रदेश में 1, ओडिशा में 1 और तेलंगाना में 1 सीट खाली है. क्यों खाली हुईं ये सीटें? इन 12 खाली सीटों में 10 ऐसी हैं जो उच्च सदन के सदस्यों के लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद खाली हुईं, जबकि तेलंगाना और ओडिशा से एक-एक राज्यसभा सदस्य ने अपनी पार्टी से इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी जॉइन की इसलिए राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया. पहले इन 12 सीटों में क्या थी स्थिति? अगर इन 12 सीटों पर पहले की स्थिति की बात करें तो बीजेपी सबसे आगे थी. उसके सात साज्यसभा सांसद थे. महाराष्ट्र की दोनों सीटों पर बीजेपी का कब्जा था. बिहार में एक सीट पर बीजेपी तो एक सीट पर आरजेडी का कब्जा था. असम की दोनों ही सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. मध्य प्रदेश की 1 सीट पर बीजेपी, त्रिपुरा की एक सीट पर बीजेपी, हरियाणा की एक सीट पर कांग्रेस और राजस्थान की एक सीट पर भी कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की थी. इसके अलावा तेलंगाना में हाल में के. केशव राव ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) छोड़कर कांग्रेस जॉइन किया था, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया, जबकि ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) की सांसद ममता मोहंता ने बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद राज्यसभा सीट छोड़ दी थी. मध्य प्रदेश और त्रिपुरा में बीजेपी मजबूत राजनीतिक एक्सपर्ट बताते हैं कि बात लोकसभा चुनाव की हो या विधानसभा चुनाव की हो, जिस तरह से मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अब तक प्रदर्शन किया है, उससे साफ है कि यहां भी बीजेपी एकतरफा जीत दर्ज करते हुए एक सीट फिर से जीत दर्ज कर लेगी. इसके अलावा त्रिपुरा में भी बीजेपी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. असम में भी एकतरफा मुकाबले की बात राजनीतिक एक्सपर्ट कहते हैं कि बीजेपी असम में अभी काफी मजबूत स्थिति में नजर आती है. इसके अलावा पिछली बार भी दोनों सीटों पर उसी का कब्जा था. ऐसे में एक्सपर्ट कह रहे हैं कि इस बार भी असम की दोनों सीटों पर बीजेपी जीत दर्ज कर सकती है. राजस्थान में बीजेपी आगे राजस्थान की एक सीट पर राज्यसभा के उपचुनाव होने हैं. इस सीट पर बीजेपी मजबूत बताई जा रही है. एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी ने जिस तरह राजस्थान में प्रदर्शन किया है उससे बीजेपी एक बार फिर यहां जीत दर्ज कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार में कड़ी टक्कर महाराष्ट्र और बिहार की बात करें तो यहां कड़े मुकाबले की उम्मीद है. पिछली बार बिहार में एक सीट पर आरजेडी और एक पर बीजेपी को जीत मिली थी. इस बार भी काफी कड़ा मुकालब हो सकता है. वजह है विपक्षी दलों के पास भी पर्याप्त सीट होना. ओडिशा में बीजेपी तो तेलंगाना में कांग्रेस को बढ़त राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी ने इस बार ओडिशा में बीजेडी को विधानसभा चुनाव में सत्ता से उखाड़ फेंका है. इस बार उसके पास नंबर ज्यादा हैं इसलिए ओडिशा में बीजेपी का पलड़ा भारी है. वहीं तेलंगाना की बात करें तो यहां रेवंत रेड्डी की अगुवाई में कांग्रेस ने सरकार बनाई थी. पार्टी के पास विधायकों की अच्छी संख्या है. एक्सपर्ट कहते हैं कि तेलंगाना में कांग्रेस बाजी मार सकती है. हरियाणा में इसलिए सबसे कठिन मुकाबला सभी राज्यों में से हरियाणा में ही सबसे कठि मुकाबला माना जा रहा है. दरअसल, 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में अब 87 सदस्य हैं. पार्टी के हिसाब से देखें तो भाजपा के पास 41 विधायक हैं. इनके अलावा दो विधायकों -निर्दलीय नयन पाल रावत और हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) के गोपाल कांडा का भी भाजपा को समर्थन है. बीजेपी के पास कुल 44 विधायकों का समर्थन है. वहीं विपक्ष पर नजर डालें तो उनके पास 43 विधायक हैं. इनमें कांग्रेस के पास 28 विधायक, जननायक जनता पार्टी (जजपा) के पास 10 और तीन निर्दलीय (रणधीर गोलान, धर्म पाल गोंदर और सोमवीर सांगवान), चौथे निर्दलीय बलराज कुंडू और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अभय चौटाला शामिल हैं. तीन निर्दलीय रणधीर गोलान, धर्म पाल गोंदर और सोमवीर सांगवान ने पहले सरकार को समर्थन दिया था लेकिन हाल ही में उन्होंने कांग्रेस का समर्थन कर दिया.

भोपाल एम्स में रोबोट करेंगे मरीजों का ऑपरेशन? एम्स प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

Will robots operate on patients in Bhopal AIIMS

Will robots operate on patients in Bhopal AIIMS? AIIMS administration released helpline number राजधानी भोपाल में मौजूद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स अब और भी हाईटेक होने जा रहा है. एम्स प्रबंधन 60 करोड़ की लागत से दो रोबोट खरीदने जा रहा है. ये रोबोट अकेले आने वाले मरीजों, ऑर्थोपेडिक और यूरोलोजी विभाग से जुड़े मरीजों के जटिल ऑपरेशन में मदद करेंगे. भोपाल ! संस्थान के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यूरोलॉजी और ऑर्थोपेडिक मरीजों के जटिल ऑपरेशनों के लिए 60 करोड़ रुपये के दो नए रोबोट लाए जा रहे हैं, इससे इन दोनों विभागों की चिकित्सा की गुणवत्ता और बढ़ जाएगी. उन्होंने बताया कि एम्स, भोपाल में मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिले, इसके लिए अस्पताल को लगातार उन्नत किया जा रहा है, वहीं नई तकनीक की मदद से सतना और विदिशा मेडिकल कॉलेज के मरीजों का इलाज भी एम्स भोपाल से ही किया जा रहा है. रोबोट की मदद से ऑर्थोपेडिक और यूरोलोजी के जटिल ऑपरेशन किए जाएंगे. एक साल में साढ़े 10 लाख ओपीडी एम्स निदेशक डॉ. अजय सिंह के अनुसार एम्स में बढ़ी सुविधाओं का ही नतीजा है कि एक साल में 10 लाख 50 हजार मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आए हैं. वहीं एम्स भोपाल, ई.कंसलटेंसी की मदद से प्रदेश के 50 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जुड़ गया है. इसके तहत मरीज के इलाज के लिए एम्स और संबंधित सेंटर के डॉक्टर एक दूसरे से बात कर सकते हैं. यही नहीं, टेली आईसीयू के जरिए सतना और विदिशा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों का एम्स के डॉक्टर इलाज मुहैया करा रहे हैं. 200 वर्चुअल बेड का हो रहा संचालन अभी एम्स भोपाल 200 वर्चुअल बेड का संचालन कर रहा है. अब इससे जुडने के लिए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के अस्पताल भी तैयार हैं. एम्स भोपाल की ओर से मरीजों की सुविधा के लिए मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं. किसी भी मरीज को इलाज में परेशानी होने पर वह 7773010099 और 9582559721 पर कॉल या व्हाट्सएप कर शिकायत कर सकते हैं.

इंदिरा सागर डैम के 12 और ओम्कारेश्वर बांध के खुले 9 गेट, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

12 gates of Indira Sagar Dam and 9 gates of Omkareshwar Dam opened, administration issued alert

12 gates of Indira Sagar Dam and 9 gates of Omkareshwar Dam opened, administration issued alert नर्मदा नदी के ऊपरी कछार में लगातार बारिश की वजह से अपस्ट्रीम के बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है. पानी छोड़े जाने के कारण इंदिरा सागर बांध का जलस्तर भी बढ़ने लगा है. बांध का लेबल बनाए रखने के लिए इंदिरा सागर डैम के 12 गेट खोले गए हैं. इंदिरा सागर जलाशय में कुल 3994 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज किया जाएगा. इंदिरा सागर के साथ ही ओंकारेश्वर डैम के भी 9 गेट खोलकर 2000 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है. एनएचडीसी के अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए आज लगभग 4 बजे इंदिरा सागर बांध के लगभग 12 गेट खोले गए हैं. इनमें 6 गेट 1 मीटर और 6 गेट आधा मीटर खोल कर 2154 क्यूमेक्स और विद्युतगृह से 1840 क्यूमेक्स यानी कुल 3994 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है. इसी तरह ओंकारेश्वर डैम से भी 9 गेट खोलकर 2000 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है. इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम के खुले गेट इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम के गेट खोलने से नर्मदा नदी के डाउनस्ट्रीम में पानी तेजी से बढ़ेगा. खंडवा जिला प्रशासन ने निचली इलाकों में अलर्ट जारी किया है. नाविकों और श्रद्धालुओं को भी नर्मदा घाटों से दूर रहने की चेतावनी जारी की गयी है. खरगोन, बड़वानी, धार ओर देवास के क्षेत्रों में बारिश होने से प्रशासन भी स्थिति पर नजरें बनाये हुए है. आसपास के इलाकों में जारी किया गया अलर्ट खंडवा के एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर ने बताया कि बांध से पानी छोड़ जाने के पहले सायरन बजाकर अलर्ट जारी किया जाता है. उसके पहले पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों को भी इत्तेला दी जाती है. उन्होंने कहा कि जैसे ही पानी बढ़ता है प्रशासन की टीम भी अलर्ट मोड में आ जाती है. वर्तमान में गेट खोले जा रहे हैं. हम ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर लिए हैं.

लेखपाल और उसका सहायक रिश्वत लेते हुए पकड़े गए, लोकायुक्त की टीम ने की कार्रवाई

Accountant and his assistant caught taking bribe, Lokayukta team took action

Accountant and his assistant caught taking bribe, Lokayukta team took action जबलपुर ! डिंडौरी के मेंहदवानी बीईओ कार्यालय में पदस्थ लेखपाल अपने सहायक के माध्यम से रिश्वत की रकम ले रहा था। इस दौरान लोकायुक्त की टीम ने सहायक को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त की टीम ने लेखपाल और उसके सहायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक संजय साहू के अनुसार, लेखपाल मदन कुमार नामदेव 30 मई को सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा पुस्तिका की जांच के एवज में लेखपाल राजेन्द्र कुमार मार्को ने 40 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इस मामले की शिकायत मदन कुमार के पुत्र दीपक ने लोकायुक्त में की थी। शिकायतकर्ता लेखपाल राजेन्द्र कुमार मार्को के शासकीय आवास में रिश्वत की रकम लेकर पहुंचा। जैसे ही लेखपाल के सहायक राजेश उईके ने रिश्वत की रकम ली, लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपी राजेश उईके किसी शासकीय पद पर नहीं है और वह लेखपाल राजेन्द्र कुमार मार्को के व्यक्तिगत सहायक के रूप में कार्य करता है।

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