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दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविर का हुआ आयोजन।

A free camp for distribution of assistive devices was organized for the disabled.

A free camp for distribution of assistive devices was organized for the disabled. हरिप्रसाद गोहे  आमला । सोमवार सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग मध्यप्रदेश शासन एवं एलिम्को के सहयोग से निर्मित दिव्यांगजनों को निशुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन जनपद पंचायत आमला में आयोजित किया गया । आयोजित शिविर में क्षेत्रीय विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे,जनपद पंचायत आमला अध्यक्ष  गणेश यादव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संजीत श्रीवास्तव, सुश्री रोशनी वर्मा, उप संचालक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग बैतूल ब्लाक प्रभारी अधिकारी उमेश मासोदकर, एलिम्को जबलपुर प्रभारी, डॉ कमल नयन, विवके गुप्ता आदि की उपस्थिति में जनपद पंचायत क्षेत्र में कुल मोटराईज ट्राईसाईकिल -05, सामान्य ट्राईसाईकिल -17, कान की मशीन-13, सुगम्य केन- 01 (लाभार्थी – आशाराम रहड़वे), अस्थिबाधित- 12 वालकिन स्ट्रीक, बैसाखी-07, व्हीलचेयर-09 का वितरण किया गया । इस मौके पर अंराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस भी मनाया गया । इस दौरान माननीय विधायक पंडाग्रे  ने सभी लाभार्थीयों दिव्यांगजनों को उपकरण देते हुये पुष्पहार से स्वागत किया और बधाईया प्रेषित की साथ ही डॉ पंडाग्रे जी द्वारा मोटाराईज्ड ट्राईसाईकिल के लाभर्थी दिव्यांगजनों को हेलमेट भी पहनाया गया और समझाईश दी गई की सभी समय-समय पर आवश्यकता अनुसार बैटरी को चार्ज कर चलाकर आपकी गाडी को आराम से चलाने हेतू समझाईश दी। कार्यक्रम का आभार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला द्वारा प्रकट किया गया है ।

उमस भरी गर्मी से जल्द मिलेगी राहत, कल से प्रदेश में होगी झमाझम बारिश

There will be relief from the humid heat soon, there will be heavy rain in the state from tomorrow

There will be relief from the humid heat soon, there will be heavy rain in the state from tomorrow प्रदेश में इस सीजन झमाझम बारिश हुई है, फिलहाल प्रदेश में बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है. मौसम विभाग के अनुसार, 24 सितंबर से एक बार फिर स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होगा और बारिश का दौर शुरू होगा. बीते कुछ दिनों से बारिश पर ब्रेक की वजह से गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है. आज सोमवार (23 सितंबर) को सुबह 9 बजे ही अधिकतम पारा 33 डिग्री दर्ज किया गया है. घरों में एक बार फिर से एसी- कूलर चलने लगे हैं. गर्मी की वजह से सड़कों पर आवाजाही कम दिखाई दी. 38 जिलों में बारिश का कोटा पूराबता दें, इस बार मानसून की दस्तक के साथ ही अच्छी बारिश का दौर शुरू हो गया था. अब तक प्रदेश के 38 जिलों में पूरे सीजन के बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश के अधिकांश डैम लबालब हो चुके हैं. कुछ ही डैम ऐसे हैं जो थोड़े बहुत खाली रह गए हों. इस बार मानसून सीजन में सबसे ज्यादा बारिश मंडला में 57.25 इंच दर्ज की गई है, जबकि सिवनी में 54.21 इंच, श्योपुर में 51.98 इंच, निवाड़ी में 50.76 इंच, सागर में 50.48 इंच, सीधी में 49.96 इंच, राजगढ़ में 48.69 इंच, डिंडौरी में 48.43 इंच, रायसेन में 48.01 इंच और छिंदवाड़ा में 47.94 इंच बारिश रिकार्ड की गई है. दो दिन बाद बारिश का अनुमानमौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ जिलों में 2 दिन बाद बारिश का अनुमान जताया है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 25 से 26 सितंबर तक बारिश होगी. इस दौरान सागर, रायसेन, मंडला, सिवनी, बालाघाट, धार, बड़वानी, खरगोन और बालाघाट में तेज बारिश हो सकती है. इसके अलावा इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, कटनी, दमोह, छतरपुर टीकमगढ़, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, विदिशा सहित प्रदेश के बाकी जिलों में हल्की बारिश का अनुमान है. आज भी जारी रहेगी गर्मी की मारप्रदेश में आज सोमवार (23 सितंबर) को भी कई जिलों में गर्मी का असर देखने को मिलेगा. इस दौरान तेज धूप भी खिलेगी. मौसम विभाग के अनुसार शिवपुरी, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, रीवा, मऊगंज, मैहर, नीमच, मंदसौर, आगर मालवा, सीहोर सहित अन्य जिलों में चिलचिलाती धूप के आसार हैं.

मंदिर-मस्जिद में जाकर पूजा या इबादत करना आध्यात्म नहीं: राजनाथ सिंह

Going to temple-mosque to worship or worship is not spirituality: Rajnath Singh

Going to temple-mosque to worship or worship is not spirituality: Rajnath Singh जयपुर ! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर-मस्जिद में जाकर पूजा या इबादत करना आध्यात्म नहीं है. उन्होंने कहा कि मन जितना बड़ा होगा, जीवन में कष्ट उतना ही कम होगा. राजनाथ ने कहा कि हम हमेशा से नॉलेज बेस्ट सोसायटी हैं और आज भी हमारा भारत नॉलेज बेस्ड सोसायटी है. रक्षा मंत्री ने कहा कि दर्शनशास्त्र हो, गणित हो, मेडिकल साइंस हो, आर्किटेक्चर हो, नृत्य संगीत हो, मार्शल आर्ट हो या फिर अन्य कोई विधा हो, उन सब पर हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणालियों में विशेष ध्यान दिया गया है. ये और बात है कि किसी कारणवश या फिर मैकाले द्वारा निर्देशित शिक्षा पद्धतियों या फिर अन्य कारणों से ये बात दुनिया के सामने नहीं लाई गई कि हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली का ध्यान मैथ्स और साइंस पर भी उतना ही था. उन्होंने कहा कि एक कारण यह हो सकता है कि उनको अपनी शिक्षा प्रणाली को बेहतर दिखाना था और हमारी शिक्षा व्यवस्था को कमतर. दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजस्थान के जयपुर में एक सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया. इसी के मौके पर उन्होंने ये बातें कहीं. इस मौके पर डिप्टी सीएम दीया कुमारी भी मौजूद रहीं. राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि यह बिल्कुल भी नहीं था कि हमारा ध्यान केवल दर्शनशास्त्र और आध्यात्म पर था. हमारा ध्यान गणित और विज्ञान पर था. हमारा ध्यान खगोल और ज्योतिषशास्त्र पर भी था. रक्षा मंत्री ने कहा कि राजस्थान ऐतिहासिक रूप से भारत के इतिहास का एक केंद्र रहा है. यह धरती सिर्फ वीरता के लिए ही नहीं बल्कि अनोखी संस्कृति के लिए भी जानी जाती है.

तीन वित्तीय वर्षों के भीतर 17 वन मंडलों में कैंपा फंड में 364 करोड़ का गड़बड़झाला

Misappropriation of Rs 364 crore in CAMPA fund in 17 forest divisions within three financial years

Misappropriation of Rs 364 crore in CAMPA fund in 17 forest divisions within three financial years गणेश पाण्डेयभोपाल। कैग ने जंगल महकमे में पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग के 17 वन मंडलों में 364 करोड़ से अधिक गड़बड़झाला होने की पुष्टि की है। यह गड़बड़ी 63 वनमंडलों में से केवल 17 वन मंडलों में हुई ऑडिट रिपोर्ट से उजागर हुई है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैंपा फंड से कितने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो सकती है ? यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मौजूदा पीसीसीएफ कैंपा ने संरक्षण शाखा के हिस्से के वित्तीय अधिकार पर बलात कब्जा कर लिया है। जबकि परंपरा यह रही है कि फॉरेस्ट प्रोटक्शन से संबंधित व्यय करने वाली राशि का फंड संरक्षण शाखा द्वारा किया जाता रहा है।भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में कैंपा फंड की राशि में हुई गड़बड़ियों को लेकर विस्तार से ब्यूरोक्रेट का ध्यान आकर्षित कराया गया है। कैग ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट तौर से उल्लेख किया है कि क्षतिपूर्ति वनीकरण के क्रियान्वयन में अनियमितता की गई है। कैग ने वित्तीय वर्ष 2017 से लेकर 2019-20 में 17 वनमंडल अनूपपुर, पूर्वी छिंदवाड़ा, खरगोन, खंडवा, इंदौर, रतलाम, भोपाल, सिंगरौली, दक्षिण शहडोल, उत्तर सागर दक्षिण सागर, नौरादेही होशंगाबाद, ग्वालियर, छतरपुर उत्तर बैतूल और वन विकास निगम में क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए कैंपा फंड से 839.88 करोड़ के लगभग खर्च किए गए। कैंपा फंड से खर्च किए गए राशि का विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट केवल 17 वन मंडलों में की। यानी कैग ने कुल 63 वन मंडलों में से केवल 17 वन मण्डलों में किए गए ऑडिट में 364.83 करोड़ रुपए की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए हैं। गंभीर जनक पहलू यह है कि वनीकरण क्षतिपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद वर्ष 2017 और 2019 के बीच प्रदेश में वन घनत्व घटा और खुले वन आवरण क्षेत्र में 1.3% की वृद्धि हुई है। क्षतिपूर्ति वनीकरण के नाम पर हुए पौधारोपण के लिए स्थल के चयन से लेकर वृक्षारोपण तक में गड़बड़ी की गई। रोपित किए गए पौधों की जीवितता का प्रतिशत 75% होना चाहिए था। जबकि कैग ने अपने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि वनीकरण क्षतिपूर्ति के नाम पर हुए पौधारोपण की जीवतता का प्रतिशत 6 से 60 फीसदी से भी कम पाए गए हैं।वनीकरण के लिए त्रुटिपूर्ण स्थल का चयनप्रतिपूरक वनीकरण के लिए अधिकारियों ने त्रुटिपूर्ण स्थल का चयन किया गया। प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए अनूपपुर, सिंगरौली, होशंगाबाद और दक्षिण शहडोल मैं 18 विभिन्न स्थलों की 875 हेक्टेयर वन भूमि का चयन किया गया। प्रतिवेदन के अनुसार चयनित स्थलों में कैनोपी का घनत्व 40% से अधिक था। जबकि चयनित वृक्षारोपण स्थल की कैनोपी घनत्व 0.1 से 0.4 होनी चाहिए थी। अपने प्रतिवेदन में कैग ने यह भी उल्लेख किया है कि सिंगरौली वन मंडल में 16.40 करोड़ की लागत से आठ स्थानों पर वृक्षारोपण के लिए स्वीकृति दी गई थी। चयनित स्थान में या तो घने जंगल थे या अन्य योजनाओं के तहत वृक्षारोपण किया गया था। यानी 17 करोड़ से अधिक राशि का निष्फल व्यय किए गए। यानी राजस्व हानि हुई है।लक्ष्य के विरुद्ध वृक्षारोपण में कमीप्रतिवेदन में यह अभी कहा है कि ऑडिट टीम ने पाया कि तीन मंडलों में 5 का परियोजनाओं में 201.08 हेक्टयर के क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए डीपीआर तैयार किए गए थे। मानकों के अनुसार न्यूनतम 3,02,363 रुपए जाने थे जबकि वन मंडलों ने केवल 2 लाख 31 हजार 90 पौधे रोपे। यानी 71273 पौधों कम रोपे गए। यह महज एक उदाहरण है। लेखा परीक्षा ने पाया कि अनूपपुर उत्तर सागर और ग्वालियर वन मंडलों में प्रतिपूरक वनीकरण की पांच वृक्षारोपण स्थलों का 2010 11 से 2014-15 के बीच शुरू किया गया था। रोपे गए 2,79, 790 में से केवल 1 लाख 2 हजार 320 ही बच पाए।कैम्पा के तहत अपात्र गतिविधियों पर व्ययलेखा परीक्षा ने कैंपा के अभिलेखों में पाया कि 163.83 करोड़ की धनराशि विभिन्न गतिविधियों के लिए स्वीकृत की गई थी, जिसमें से 53.29 करोड़ की राशि अप्रैल 17 से मार्च 2020 की अवधि में अपात्र गतिविधियों पर खर्च कर दी गई। जबकि इस पर खर्च नहीं किया जाना था। कैग ने सरकार की उत्तर को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह कैंपा फंड के संबंध में जारी किए गए दिशा- निर्देशों की अवहेलना है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में अनुभूति कार्यक्रम पर 5.88 करोड़, वन भवन निर्माण के लिए 20 करोड़, कृषि समृद्धि योजना पर 20 करोड़, रेंजर और राज्य वन सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण पर 5.94 करोड़, वन स्टाफ के प्रशिक्षण पर 4.87 करोड़, और एस एफआरआई के अनुसंधान गतिविधि पर खर्च किए गए 4 करोड़ 59 लख रुपए को अनियमित बताया। यानी कैम्पा फंड में पदस्थ रहे पीसीसीएफ एमके सपरा और एबी गुप्ता ने अंधा बांटे रेवड़ी चिन्ह -चिन्ह कर देत,की तर्ज पर फंड वितरित किए। मौजूदा पीसीसीएफ कैम्पा महेंद्र सिंह धाकड़ भी इसी तर्ज पर फंड रिलीज करते आ रहे हैं।

नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये मध्यप्रदेश ने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को देश भर में व्यापक आंदोलन शुरू कर स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकार करने के जो लक्ष्य निर्धारित किये उन्हें प्राप्त करने में मध्यप्रदेश ने देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। स्वच्छता को सर्वोपरि मानते हुए इंदौर ने सफाई की जो अलख जगाई है, वह पूरे देश में उदाहरण बन चुकी है। इंदौर के नाम लगातार 7 बार देश को स्वच्छतम शहर बने रहने का रिकार्ड है। इंदौर ही देश का पहला वाटर प्लस शहर भी बना है और भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव का प्रदेशवासियों से आहवान मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रदेशवासियों से आहवान किया है कि सभी नागरिक संकल्प लें की न तो वे गंदगी फैलाएंगे और न किसी को फैलाने देंगे। अपने आसपास सफाई रखेंगे और लोगों को भी सफाई के लिए प्रेरित करेंगे, तभी सच्चे अर्थों में स्वच्छता ही सेवा अभियान सफल होगा। उन्होंने कहा कि हम सबको सफाई मित्र बनकर अभियान को सफल बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिन 17 सितम्बर से प्रांरभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में एक बार फिर मध्यप्रदेश पूरे जुनून के साथ जूट गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति मंत्रीगण, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, समाजसेवी और सामाजिक संगठनों के साथ नागरिक भी सजग होकर महती भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेशवासियों और हमारे सफाई मित्रों के मनोबल बढ़ाने के लिये राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भी अपने उज्जैन प्रवास के दौरान सफाई मित्रों से संवाद कर उन्हें सम्मानित किया और श्री महाकाल लोक परिसर में झाडू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। यह मध्यप्रदेश के लिये गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि स्वच्छता के सभी आयामों पर मध्यप्रदेश खरा उतर रहा है। राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक एवं खुले में मांस-मछली के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश में जीरो वेस्ट को प्रोत्साहन देने के लिये नगरीय निकायों में जीरो वेस्ट इवेंट भी जारी किये जा रहे हैं। प्रदेश में 401 नगरीय निकायों में सूखे एवं गीले कचरे के प्र-संस्करण के लिये सेंट्रल कम्पोस्टिंग और मटेरियल रिकवरी के लिये इकाइयों की स्थापना की गयी है, जिनसे कम्पोस्ट खाद बनायी जा रही है। प्रदेश में 324 शहरों को सफाई मित्र सुरक्षित शहर घोषित किया गया है। साथ ही सफाई मित्रों की कार्यक्षमता संवर्धन के लिये समय-समय प्रशिक्षण भी आयोजित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि हाल ही में रीवा नगरपालिका निगम में 158 करोड़ 67 लाख रूपये की लागत से वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट से प्रतिदिन 340 टन कचरे का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। साथ एक दिन में 6 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न की जा रही है। सात हजार से अधिक कचरा संग्रहण वाहन प्रतिदिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहित कर रहे हैं। प्रदेश के सभी गांव ओडीएफ हैं और अब तक 78 लाख 31 हजार व्यक्तिगत शौचालय और 16 हजार 900 से अधिक सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया जा चुका है। प्रदेश के 44 हजार से अधिक गांवों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, 48 हजार से अधिक ग्रामों को लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट और 41 हजार से अधिक ग्रामों को आडीएफ प्लस मॉडल बनाया गया है। स्वच्छता अभियान में हो रहे हैं अभिनव नवाचार प्रदेश में 17 सितम्बर से प्रारंभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की अलख जगाई जा रही है। हर स्तर पर नागरिकों को स्वच्छता संबंधी शपथ दिलाने के साथ प्रेरित भी किया जा रहा है। स्वच्छता-मित्रों को सम्मानित कर उनके हौंसले को बढ़ाना और उनके साथ सफाई कार्य करने के लिये मंत्रीगण और जन-प्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई कार्य में जुटे हुए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा नगर निगम क्षेत्र में सैनिक कैंटीन से नीम चौराहा तक बोडाबाग रोड पर श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया और सफाई-मित्रों को सम्मानित किया। रीवा के शासकीय एवं निजी शालाओं में स्वच्छता व्यवहार पर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन कर नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता लाई गई। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर नगर के लक्ष्मण तलैया क्षेत्र और मोनी बाबा आश्रम में झाडू लगाकर साफ-सफाई की और सफाई मित्रों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में बीएसएनएल कार्यालय परिसर में अधिकारी-कर्मचारी और नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलवाई। ग्वालियर सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ने जन-प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ जिला चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने अधिकारी कर्मचारियों के साथ कलेक्ट्रेट एवं अन्य कार्यालयों में झाडू लगाकर साफ-सफाई की। सागर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने स्वच्छता पखवाड़े अंतर्गत सभी को स्वच्छता के लिये प्रेरित किया और जीरो वेस्ट थीम पर अभियान में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को वर्ष में 100 घंटे स्वच्छता के कार्य करने की शपथ भी दिलवाई। जबलपुर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सरपंचों के साथ स्वच्छता संवाद कर ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने में सक्रिय रूप से कार्य करने की शपथ दिलाई। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों का सम्मान कर उन्हें सेफ्टी किट प्रदान की। जबलपुर शहर में मोहल्ला सभाओं का आयोजन कर स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसी प्रकार प्रदेश के सभी जिलों में जन-भागीदारी के साथ स्वच्छता पखवाड़ा निरंतर जारी है। स्थानीय नागरिकों को अभियान से जोड़ने के लिये जन-प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर अनेक नवाचार भी कर रहे हैं, जिसके सफल परिणाम मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। साथ ही स्वच्छता के प्रति जागी अलख से प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण-24 में बेहतर उपलब्धियां हासिल करेंगे।

मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav

रीवा सौर परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में किया शामिल Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में जहाँ एक ओर विश्व की सबसे बड़ी रीवा सौर परियोजना स्थापित होकर शुरू हो चुकी है। इस परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में शामिल किया है। वहीं दूसरी ओर ओंकारेश्वर में प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी 600 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी विकसित की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न अंचलों में भी सौर ऊर्जा की कई छोटी-बड़ी परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में गुजरात के गांधी नगर में नवकरणीय ऊर्जा को लेकर हुई राष्ट्रीय समिट में अनेक उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश में सोलर प्लांट लगाने की इच्छा जाहिर की है। राजधानी भोपाल में सरकारी भवनों और नागरिकों को अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिये अभियान चलाया जायेगा। इन सभी प्रयासों से मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की अग्रसर हो गया है। आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दुनिया की सबसे प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मध्यप्रदेश स्थित विश्व के सबसे बड़े रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर पार्क और प्लांट के उत्कृष्ट प्रबंधन, संचालन और सौर ऊर्जा उत्पादन को आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्लांट न सिर्फ़ विश्व का सबसे बड़ा प्लांट है, बल्कि विश्व में सबसे सस्ती दर पर व्यावसायिक उर्जा उत्पादन करने वाला प्लांट भी है। यहां से 3 रूपये 30 पैसे प्रति यूनिट बिजली अगले 25 सालों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। मध्यप्रदेश में भरपूर सौर ऊर्जा है। यहां 300 से ज्यादा दिनों तक सूर्य का प्रकाश रहता है। विश्व बैंक के क्लीन टेक्नालॉजी फंड के माध्यम से वित्त पोषित देश की पहली सौर परियोजना है। आज विश्व के 10 सर्वाधिक बड़ी सोलर परियोजनाओं में से आधी भारत में है। रीवा सोलर पॉवर प्लांट इनमें से एक है। कैसे हुई शुरूआत भारत सरकार ने वर्ष 2014 में सोलर पार्क योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सोलर पॉवर को बढ़ावा देना था। इस योजना में 500 मेगावाट क्षमता से ज्यादा की सोलर परियोजनाओं को सोलर पार्क में शामिल किया गया और उन्हें अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क कहा गया। केस स्टडी में बताया गया कि भारत में 4 लाख 67 हजार वर्ग मीटर बंजर भूमि आंकी गई है। इसका उपयोग सोलर प्लांट लगाने में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में 1579 हेक्टेयर जमीन का आंकलन किया गया, जिसमें 1255 हेक्टेयर बंजर जमीन सरकारी और 384 हेक्टेयर प्राइवेट जमीन शामिल है। इस प्रकार रीवा सोलर अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट बनने की शुरुआत हुई। रीवा सोलर पॉवर प्लांट की यात्रा दिलचस्प है। इसकी शुरुआत जून 2014 में बड़वार गांव में 275 हेक्टेयर जमीन आवंटन के साथ शुरू हुई। राज्य सरकार ने अप्रैल 2015 में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट की स्थापना का अनुमोदन किया। दो महीने बाद रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड की स्थापना हुई, जिसमें म.प्र. ऊर्जा विकास निगम और एसईसीआई के साथ 50 -50 प्रतिशत का जॉइंट वेंचर स्थापित हुआ। इसके बाद बड़वार, बरसेटा देश, बरसेटा पहाड़, इतर पहाड़, रामनगर पहाड़ गांवों में 981 हेक्टेयर जमीन का आवंटन हुआ। वर्ष 2018-19 तक और भी गांव में उपलब्ध बंजर जमीन को परियोजना के लिए आवंटित किया गया। अप्रैल 2019 में दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन को पॉवर सप्लाई देना शुरू हुआ। जनवरी 2020 से पूरी तरह से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया।

मैहर स्टेशन पर होगा इन ट्रेनों का ठहराव, नवरात्रि मेला पर तीर्थयात्रियों को मिलेगी राहत

These trains will stop at Maihar station, pilgrims will get relief during Navratri fair.

These trains will stop at Maihar station, pilgrims will get relief during Navratri fair. रेलवे प्रशासन द्वारा नवरात्रि मेला के दौरान तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु निम्नलिखित गाड़ियों का विभिन्न तिथियों में 05 मिनट का अस्थाई ठहराव मैहर स्टेशन पर निम्नवत दिया जायेगा। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 02 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11055 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 03.15 बजे पहुँचकर 03.20 बजे छूटेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 03 से 15 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11059 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-छपरा एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 03.15 बजे पहुँचकर 03.20 बजे छूटेगी। डॉ. एम.जी.आर. चेन्नई सेन्ट्रल से 05 से 14 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 12669 डॉ. एम.जी.आर. चेन्नई सेन्ट्रल-छपरा एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 20.45 बजे पहुँचकर 20.50 बजे छूटेगी। वलसाड से 05 से 12 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 19051 वलसाड-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 15.25 बजे पहुँचकर 15.30 बजे छूटेगी। दुर्ग से 02 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 18201 दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 06.00 बजे पहुँचकर 06.05 बजे छूटेगी। – पुणे से 03 से 10 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11037 पुणे-गोरखपुर एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 11.00 बजे पहुँचकर 11.05 बजे छूटेगी। – लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 04 से 11 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 18610 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-राँची एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 10.50 बजे पहुँचकर 10.55 बजे छूटेगी। – पुणे से 07 से 14 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 22131 पुणे-बनारस एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 11.00 बजे पहुँचकर 11.05 बजे छूटेगी। – सूरत से 02 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 19045 सूरत-छपरा एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 02.30 बजे पहुँचकर 02.35 बजे छूटेगी। गोरखपुर से 04 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11056 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 20.45 बजे पहुँचकर 20.50 बजे छूटेगी। – छपरा से 03 से 17 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11060 छपरा-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 20.45 बजे पहुँचकर 20.50 बजे छूटेगी। – छपरा से 02 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 12670 छपरा-डॉ. एम.जी.आर. चेन्नई सेन्ट्रल एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 07.40 बजे पहुँचकर 07.45 बजे छूटेगी। – मुजफ्फरपुर से 07 से 14 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 19052 मुजफ्फरपुर-वलसाड एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 12.00 बजे पहुँचकर 12.05 बजे छूटेगी। – नौतनवा से 04 से 13 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 18202 नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 02.00 बजे पहुँचकर 02.05 बजे छूटेगी। गोरखपुर से 05 से 12 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 11038 गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 04.25 बजे पहुँचकर 04.30 बजे छूटेगी। – राँची से 02 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 18609 राँची-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 13.55 बजे पहुँचकर 14.00 बजे छूटेगी। – बनारस से 09 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 22132 बनारस-पुणे एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 11.40 बजे पहुँचकर 11.45 बजे छूटेगी। – छपरा से 04 से 16 अक्टूबर, 2024 तक चलने वाली 19046 छपरा-सूरत एक्सप्रेस मैहर स्टेशन पर 22.50 बजे पहुँचकर 22.55 बजे छूटेगी।

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