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छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल

रायपुर छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। आगामी 11 दिसंबर को नगरीय निकाय चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। चुनाव एक साथ कराने की योजना अगले वर्ष जनवरी या फरवरी में विधानसभा बजट सत्र से पहले की जा रही है। इसके बाद, दिसंबर में चुनावों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी, और जैसे ही घोषणा होगी, आचार संहिता लागू हो जाएगी। अलग-अलग तारीखों पर होगा चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की तारीखें थोड़ी अलग-अलग होंगी, क्योंकि एक ही दिन दोनों चुनाव कराना संभव नहीं है। आगामी फरवरी में विधानसभा बजट सत्र से पहले दोनों चुनाव कराने की योजना है। हालांकि, दोनों चुनावों की अधिसूचनाएं अलग-अलग जारी की जाएंगी। पंचायत चुनाव के नतीजे मतदान के दिन ही घोषित कर दिए जाते हैं, जबकि नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे कई चरणों में होने के बाद तय तारीख को घोषित किए जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने तेज़ी से चलने वाली प्रक्रिया का किया ऐलान नगरीय निकाय चुनाव का कार्यकाल समाप्त होने को है, और इसके चलते निर्वाचन आयोग ने सभी प्रक्रियाओं को तेज़ी से पूरा करने की योजना बनाई है। दिसंबर में होने वाले विधानसभा सत्र से पहले अधिकांश काम पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नियमों में बदलाव की आवश्यकता इन चुनावों को एक साथ कराने से पहले राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण काम करने होंगे। नगर पालिका अधिनियम, नगर निगम अधिनियम और पंचायत अधिनियम में संशोधन की जरूरत होगी। इसके लिए कैबिनेट, राज्यपाल और विधानसभा की मंजूरी की आवश्यकता होगी। विधानसभा सत्र 16 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, और इसी दौरान ये संशोधन किए जा सकते हैं। चुनाव की घोषणा के बाद बनेगा कार्यक्रम अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने ओबीसी सर्वे रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, और इस रिपोर्ट को सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। नगर पालिका निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत के अध्यक्षों के चुनाव को लेकर कैबिनेट जल्द ही फैसला करेगी कि ये चुनाव सीधे प्रणाली से होंगे या नहीं। इसके बाद राज्यपाल से अध्यादेश की मंजूरी प्राप्त होगी, और राज्य निर्वाचन आयोग इसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। ऐसे में, सरकार की अगली कैबिनेट बैठक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नए एलान ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी, आवाज से भी तेज स्पीड, 5000 किमी की रेंज

रूस रूस-यूक्रेन युद्ध में हाल के दिनों में काफी तेजी आई है। अमेरिका की ओर से यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल की मंजूरी दिए जाने के बाद रूस ने भी खतरनाक मिसाइलों से जवाबी हमला किया है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नए एलान ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। उन्होंने कहा है कि रूस ने अमेरिकी और ब्रिटिश मिसाइलों के इस्तेमाल के जवाब में यूक्रेन पर एक नई हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। ‘ओरेशनिक’ मिसाइल से हमला समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पुतिन ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध वैश्विक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि अमेरिका और ब्रिटेन ने यूक्रेन को अपनी मिसाइलों से रूस में और भी गहराई तक हमला करने की अनुमति दी है। साथ ही पुतिन ने पश्चिम को चेतावनी दी है कि मॉस्को जवाबी हमला कर सकता है। पुतिन ने कहा कि रूस ने यूक्रेनी शहर द्निप्रो में अपनी लेटेस्ट मध्यम दूरी मिसाइलों में से एक “ओरेशनिक” लॉन्च की है। यूक्रेन का यह शहर मिसाइल और अंतरिक्ष रॉकेट कंपनी पिवडेनमाश का केंद्र है, जिसे रूसियों के लिए युजमाश के रूप में जाना जाता है। क्या है ओरेशनिक मिसाइल? पुतिन ने इस नई मिसाइल की विशेषता बताते हुए कहा कि “ओरेशनिक” एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल थी। उन्होंने कहा कि यह आवाज की गति से 10 गुना अधिक गति से यात्रा करती है और इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता। रॉयटर्स ने रूसी सूत्रों के हवाले से बताया कि इसकी सीमा 5,000 किमी (3,100 मील) थी, जिससे रूस यूरोप के अधिकांश हिस्सों और संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर हमला कर सकता था। यूक्रेन में जन्मे एक प्रमुख रूसी समर्थक और सैन्य ब्लॉगर यूरी पोडोल्याका ने रॉयटर्स को बताया कि बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें कई स्वतंत्र रूप से लक्षित करने योग्य पुनः प्रवेश वाहन हैं: अलग-अलग वारहेड, अलग-अलग लक्ष्यों को मारने में सक्षम हैं। रूसी सैन्य विशेषज्ञ अनातोली मतविचुक ने एजेंसी से कहा कि यह छह से आठ पारंपरिक या परमाणु वॉरहेड ले जा सकता है और संभवतः पहले से ही सेवा में था। इससे पहले पेंटागन ने कहा था कि रूस द्वारा दागी गई मिसाइल “RS-26 रुबेज़” अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) पर आधारित थी।

समस्तीपुर में आयोजित सोनपुर पशु मेला में उत्तर प्रदेश से लाई गई नागफनी नस्ल की एक बकरी ने सबका ध्यान खींचा

समस्तीपुर उत्तर प्रदेश के समस्तीपुर में आयोजित सोनपुर पशु मेले में 55 हजार की खास बकरी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। समस्तीपुर में आयोजित सोनपुर पशु मेला जो एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, इस बार चर्चा में है। मेले में उत्तर प्रदेश से लाई गई नागफनी नस्ल की एक बकरी ने सबका ध्यान खींचा है। यह बकरी अपने विशेष दूध उत्पादन और खानपान की वजह से सुर्खियों में है। इसकी कीमत 55,000 रुपए रखी गई है, जो आम तौर पर एक गाय की कीमत के बराबर है। नागफनी नस्ल की बकरी की खासियत उत्तर प्रदेश के मोहम्मद अब्दुल रज्जाक, जो इस बकरी के मालिक हैं, इसे लेकर सोनपुर मेला पहुंचे हैं। दूध उत्पादन: – यह बकरी प्रतिदिन लगभग 3 लीटर दूध देती है। – इसका दूध सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। प्रजनन क्षमता: यह बकरी साल में दो बार बच्चे देती है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। खास आहार: – बकरी को सेब, केला, मौसमी फल, चोकर और भूसा खिलाया जाता है। – इसकी विशेष देखभाल की जाती है, जिससे यह स्वस्थ और अधिक दूध देने वाली बनी रहती है।  

संसदीय कार्य विभाग ने विभागाध्यक्ष और कलेक्टर्स को जारी किया पत्र, प्रदेश में चलेगा जन-जागरूकता अभियान

भोपाल देश में 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद तैयार किया गया संविधान 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया था। इसके बाद देश में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे होने पर संविधान की जानकारी के प्रति जन-जागरूकता के लिये 26 नवम्बर 2024 से वर्ष भर चलने वाला “हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान” अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में संसदीय कार्य विभाग ने शासन के समस्त विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को पत्र जारी कर निर्देश जारी किये हैं। अभियान के दौरान जन-सामान्य को संविधान की प्रस्तावना, संविधान का निर्माण और देश के संविधान पर गर्व करने जैसे बिन्दुओं पर मुख्य रूप से जानकारी दी जायेगी। इसी दौरान जन-समुदाय के बीच में संविधान पर केन्द्रित कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे। वर्ष भर की गतिविधियों को एक डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिये वेबसाइट constitution75.com भी तैयार की गई है। वेबसाइट में गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड किये जा सकेंगे। इस अभियान में युवाओं और स्कूल के बच्चों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिये एक अन्य वेबसाइट https://www.mygov.in: पर संविधान विषय पर निबंध, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर प्रतियोगिता की तस्वीरें साझा की जा सकती हैं। स्थापना दिवस पर आयोजन संविधान के स्थापना दिवस 26 नवम्बर 2024 को मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। इस कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधि नागरिकों के बीच संविधान की प्रस्तावना को पढ़ेंगे। इसी दिन प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में भी सामुहिक रूप से संविधान प्रस्तावना का वाचन किया जायेगा। ग्राम पंचायतों को बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान का प्रचार करने के लिये मायभारत स्वयं सेवकों के माध्यम से संविधान स्वाभिमान यात्राएं आयोजित किये जाने के लिये भी कहा गया है। यह यात्राएं अनुसूचित जाति -अनुसूचित जनजाति घनत्व वाली आबादी में विशेष रूप से हो। यात्रा के दौरान बाबा साहेब की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की जायेगी। ग्राम सभाओं में संविधान के अनुच्छेद-51(ए) में नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों को पढ़कर सुनाया जायेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बरखेड़ी डोब, भोपाल में 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन आज प्रात: 10 बजे करेंगे। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्तमान वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल के बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गौ-शाला के निर्माण की योजना है। गौ-शाला लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में बनाई जा रही है। इसमें गायों के आधुनिक तरीके से रख-रखाव के साथ ही उनके उपचार के लिए सभी संसाधनों से युक्त चिकित्सा वार्ड का भी निर्माण किया जाएगा। गौ-शाला में सीसी टीवी के माध्यम से निरंतर मॉनीटरिंग की व्यवस्था रहेगी। लगभग 15 करोड रुपए की लागत की गौ-शाला का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जाएगा, वहीं नगर निगम एवं पशुपालन विभाग नोडल एजेंसी होंगे। गौ-शाला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जिला पंचायत द्वारा वित्तपोषण किया जाएगा। गौ-शाला का संचालन नगर निगम द्वारा किया जाएगा। गौ-शाला का निर्माण तीन चरणों में होगा, जिसमें प्रथम चरण में लगभग 2000 पशु क्षमता का निर्माण किया जाएगा। इस अत्याधुनिक गौ-शाला में गायों को भूसा, हरा घास, पशु आहार आदि कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। गौ-शाला में गायों के गोबर एवं मूत्र आदि से विभिन्न सामग्री तैयार की जाएगी और जैविक खाद निर्माण के लिए संयंत्र भी लगाया जाएगा। गौ-शाला में रहने वाले पशुओं एवं सड़कों पर घायल एवं बीमार होने वाले पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सा वार्ड भी बनाया जा रहा है।

14 मार्च से आईपीएल 2025 का होगा आगाज, 25 मई को खेला जायेगा

मुंबई इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) अगला सत्र 14 मार्च 2025 से शुरु होगा और फाइनल मुकाबला 25 मई को खेला जायेगा। फ्रेंचाइजी को भेजे गए ईमेल में आईपीएल के तीन सत्रों के लिए घोषित तारीखों के बारे में बताया गया है। घोषणा के अनुसार टूर्नामेंट का अगला सत्र 14 मार्च 2025 से शुरू होगा और फाइनल मुकाबला 25 मई को खेला जाएगा। वहीं 2026 का सत्र 15 मार्च से 31 मई तक चलेगा। जबकि 2027 का सत्र 14 मार्च से 30 मई तक होगा। घोषणा के अनुसार पिछले सत्र की तरह 2025 सत्र में 74 मैच होंगे। हालांकि यह संख्या आईपीएल द्वारा 2022 में सूचीबद्ध 84 मैचों से दस कम है। नए चक्र के लिए टेंडर दस्तावेज में आईपीएल ने हर सत्र में मैचों की अलग अलग संख्या का वर्णन किया है। 2023 और 2024 में 74 मैच जबकि 2025 और 2026 में 84 और इस अनुबंध के अंतिम वर्ष यानी 2027 में 94 मैच खेले जाने का जिक्र था। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने अपने सभी खिलाड़ियों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों को 2025 सत्र में खेलने की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा अधिकतर पूर्ण सदस्य देश इंग्लैंड, श्रीलंका बंगलादेश, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, अफगानिस्तान, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के क्रिकेट बोर्डो ने अपने खिलाड़ियों को अगले तीन सत्र के लिए आईपीएल में खेलने की अनुमति दे दी है। इसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है, जिनके खिलाड़ियों को 2011 के बाद से ही आईपीएल में खेलने का मौका नहीं मिला है।  

वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है, जो सबसे ज्यादा फिक्र अपने अन्नदाता की करती है। सरकार निरंतर हर खेत तक पानी पहुंचाने के कार्य कर रही है। जल संसाधन विभाग की विभिन्न वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाने से अब किसान 2 फसलों के स्थान पर 3 फसल लेने लगे है। इससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है और किसान समृद्ध भी हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में जहां प्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 3 लाख हेक्टेयर था, आज बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश की निर्मित और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रदेश में वर्ष 2025-26 तक सिंचाई का रकबा लगभग 65 लाख हेक्टेयर होने की संभावना है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की सिंचाई क्षमता 1 करोड़ हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेश में तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। सरकार ने विभाग के लिए बजट में भी पर्याप्त राशि का प्रावधान किया है। वर्ष 2024-25 के बजट में सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण एवं संधारण के लिए 13 हजार 596 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं में केन-बेतवा लिंक परियोजना एक महत्वाकांक्षी नदी जोड़ों राष्ट्रीय परियोजना है। इसमें केन नदी पर दौधन बांध, आनुषंगिक कार्य एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के अंतर्गत बेतवा कछार में बीना काम्पलेक्स, कोटा बैराज तथा लोअरओर परियोजनाओं का निर्माण किया जाना सम्मिलित है। परियोजना से मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी एवं दमोह जिलों में माइक्रो इरिगेशन से केन कछार में 4.5 लाख हेक्टेयर, बेतवा कछार के विदिशा, रायसेन, सागर, शिवपुरी एवं दतिया जिलों में 2.06 लाख हेक्टेयर तथा उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा, महोबा और झांसी जिलों में 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना से उत्पन्न होने वाली 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पर पूरा अधिकार मध्यप्रदेश का होगा। परियोजना के द्वितीय चरण की डीपीआर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा वर्ष 2014 में तैयार की गई। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा बेतवा कछार में अंतिम रूप से प्रस्तावित 3 परियोजनाएं: बीना परिसर से 96 हजार हेक्टेयर, कोटा बैराज से 20 हजार हेक्टेयर तथा लोअर ओर परियोजना से 90 हजार हैक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है। साथ ही परियोजनाओं से 66.7 मिलियन घन मीटर पेयजल एवं मांग आधार पर उद्योगों हेतु जल का प्रावधान रखा गया है। परियोजना की सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश में द्वितीय चरण की परियोजना का कार्य प्रगति पर है। परियोजना के कार्यान्वयन के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा 44 करोड़ 605 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना को 8 वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पार्वती-काली-सिंध-चंबल लिंक परियोजना एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस परियोजना से प्रदेश के 10 जिलों को लाभ मिलेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध परियोजना और नर्मदा घाटी की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से प्रदेश में 19 लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। प्रदेश में “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के उद्देश्य की पूर्ति के लिए 133 वृहद् एवं मध्यम प्रेशराइज्ड सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आधारित परियोजना निर्माणाधीन है। प्रदेश में 1320 करोड़ रुपए की लागत वाली चितरंगी दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना स्वीकृत हुई है। इस परियोजना से सिंगरौली जिले में 32 हजार 125 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा। इसी प्रकार 4197 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को भी स्वीकृत किया गया है। नीमच जिले में इस परियोजना से 18 हजार 600 हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा।  

टीकमगढ़ प्रशासन ने ग्रामीणों की पीड़ा जानने ‘प्रशासन गांव की ओर’ नवाचार आरंभ किया

टीकमगढ़   ग्रामीण जिला मुख्यालय तक आकर परेशान न हों, इसलिए टीकमगढ़ प्रशासन ने उनकी पीड़ा जानने के लिए जनसुनवाई जैसे मंच को उनके द्वार तक पहुंचाने का नवाचार आरंभ किया। इसे नाम दिया ‘प्रशासन गांव की ओर’। नतीजा यह हुआ कि जिला मुख्यालय पर प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में शिकायती आवेदन 90 प्रतिशत तक कम हो गए। दिसंबर 2023 में शुरू किए इस नवाचार में कलेक्टर अवधेश शर्मा ने इसके लिए मातहत 324 अधिकारियों को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया है। कलेक्टर करते हैं औचक निरीक्षण यह प्रतिनिधि जनसुनवाई करते हैं और शिकायतों को गूगल फॉर्म पर भरकर कलेक्टर के समक्ष पेश करते हैं। इतना ही नहीं इनकी समीक्षा साप्ताहिक टीएल बैठक में सबसे पहले की जाती है। मंगलवार को कभी भी कलेक्टर बिना बताए किन्हीं पांच गांव पहुंच जाते हैं। औचक निरीक्षण के भय से सभी अफसर हर जनसुनवाई में मौजूद रहते हैं। दरअसल कलेक्टर ने देखा कि गांव स्तर से लोग जिला मुख्यालय आते हैं और फिर आवदेन टाइप कराना सहित उनके कई खर्चे होते थे। इसके पूर्व भी ग्राम पंचायत स्तर पर कर्मचारियों से अपेक्षा थी कि निचले स्तर पर ही समस्याओं का निराकरण हो जाए, लेकिन मॉनीटरिंग की बेहतर व्यवस्था न होने से समस्याओं का निराकरण तेजी व गारंटी के साथ नहीं हो पाता था और लोगों को एक ही प्रकार की शिकायत के लिए ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक कई आवेदन देने पड़ जाते थे। जब तक ग्रामीण स्वयं कलेक्टर के हाथ में आवेदन नहीं थमा देते थे, तब तक उन्हें निराकरण होने का भरोसा नहीं रहता था। ऐसे में कलेक्टर ने इस नवाचार को शुरू किया। अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि बने सहभागी अभियान में पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत सरपंच भी सक्रिय भूमिका में है। सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य आदि को भी इस प्रक्रिया के बारे में अवगत कराते हुए इसमें सहभागी बनाया है, जो अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर अपनी ड्यूटी के लिए जाते हैं। शासन की उनसे स्वयं क्षेत्र भ्रमण की अपेक्षा रहती है, जिसे मंगलवार की जनसुनवाई से जोड़कर इसका भी समाधान किया गया। साथ ही कार्यालय का संचालन विधिवत होता है, जिसमें कोई व्यवधान नहीं आता। पेपरलैस है पूरा सिस्टम सुनवाई का यह पूरा सिस्टम पेपरलैस है। इसमें क्विक रिस्पॉन्स मैकेनिज्म भी तैयार किया गया है, जिसमें एक सरल गूगल फॉर्म विकसित किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण मु्द्दे जैसे पीडीएस, पेयजल की समस्या, मध्याह्न भोजन, राजस्व, आवास, स्वच्छता की शिकायतों का फीडबैक लिया जाता है, जिसमें स्वयं कलेक्टर लाइव देखते हैं और संबंधित जिला अधिकारी के माध्यम से शिकायत का निराकरण कराते हैं। इसमें कलेक्टर समस्याओं की रिपोर्ट लेकर मौके पर निराकरण कराते हैं। क्विक रिस्पांस मैकेनिज्म के तहत खाद्य विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट मोड पर रहती है, जिससे जनहित से जुड़ी मुख्य समस्याओं जैसे खाद्यान वितरण न होना, पेयजल की गंभीर समस्या होना या किसी संक्रामक बीमारी का उजागर होने पर उनका तत्काल निराकरण संभव हो पाता है। मंगलवार की शाम को किसी एक ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों के नोडल अधिकारियों और जिला अधिकारियों की बैठक लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत की समस्याओं का निराकरण और फालोअप कराते हैं। बिना मजदूरी छोड़े समस्या का हल, अब भरोसा भी मिला टीकमगढ़ जिले के सबसे दूरस्थ गांव जिला मुख्यालय से 90 से 100 किलोमीटर तक स्थित हैं। कलेक्टर की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए कारगर सिद्ध हुई है, क्योंकि वाहनों की उपयोग घटा है। लेकिन इससे भी बढ़कर यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी सुविधा लेकर आई है, जो स्वयं के वाहन न होने के कारण अपना पैसा और समय खर्च कर जिला मुख्यालय तक जाते थे। इससे उनका दिनभर की मजदूरी का भी नुकसान होता था। जिसकी अब बचत हुई। इन समस्याओं का हुआ निराकरण     जर्जर भवनों का चिन्हांकन करते हुए लोगों की सुरक्षा निर्धारित की। नदनवारा, गनेशगंज, पनियाराखेरा, चंद्रपुरा जैसे गांवों में भवनों में सुधार हुआ।     पलेरा के टपरियन चौहान में मध्यान्ह भोजन वितरण न होने की शिकायत पर तत्काल ही एक्शन लिया और फिर शाम को विशेष भोज कराया गया।     बनगाय, अहार, डूडाखेरा, बरमे, खरीला गांव में खाद्यान वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर यहां अन्न उत्सव मनाते हुए खाद्यान वितरण कराया और फिर दुकान खुलने की मुनादी हुई।     वीरुऊ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के नहीं पहुंचने की शिकायत मिली, तो कार्रवाई हुई और फिर तैनाती की गई।     जल स्त्रोत से गंदा पानी आने की शिकायत के बाद एक साथ 261 गांवों से पानी की जांच के लिए नमूने लिए गए।     जनसुनवाई खानापूर्ति न रह जाए और कलेक्टर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोगों को टीकमगढ़ जिला मुख्यालय तक न आना पड़े। इसलिए कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में नोडल अधिकारियों को नियुक्त कर दिया, जो प्रतिनिधि मुझे रिपोर्ट करते हैं और उन आवेदनों को देखने के बाद उन पर कार्रवाई होती है। इसकी समीक्षा भी हर दिन एक घंटे की जाती है। इसके बेहतर परिणाम भी आ रहे हैं।     – अवधेश शर्मा, कलेक्टर टीकमगढ़  

उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश की धरती उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है। महाभारत जैसे भीषण युद्ध के बीच शास्त्र सम्मत मार्ग दिखाते हुए कर्मवाद की शिक्षा देने का उनका प्रयास और विश्व को श्रीमद् भगवद गीता की देन अद्वितीय है। शास्त्र के रूप में स्थापित भगवद गीता विद्वतजन, ऋषि मुनि से लेकर जन-सामान्य तक के मन में जिज्ञासा भी उत्पन्न करती है और समाधान भी प्रदान करती है। गीता को आचरण और व्यवहार में धारण कर मानव, अपने जीवन को कर्मवाद से जोड़कर सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए सफलताएं प्राप्त कर सकता है। इस वर्ष गीता जयंती पर इस्कॉन के साथ मिलकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भगवद गीता पर केंद्रित प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया है। गीता के श्लोकों का वाचन, अध्ययन-मनन और भगवद गीता में लोगों की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से यह अकादमिक अभियान चलाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की। स्कूल शिक्षा विभाग और विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से होगी प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि भगवद गीता आधारित मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता, स्कूल शिक्षा विभाग और संस्कृति विभाग के विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों में स्थायी नैतिक मूल्यों का संचार करना, चरित्र निर्माण को प्रेरित करना और आज के युवाओं में व्याप्त विभिन्न व्यसनों के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना है। जिला स्तर पर 26 से 29 नवंबर तक होंगी प्रतियोगिताएं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा-9 से 12 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्विज-प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रत्येक कक्षा की प्रतियोगिता के लिये पृथक-पृथक दिवस निर्धारित किये गये हैं, जिसमें 26 नवंबर को कक्षा -9वीं, 27 नवंबर को कक्षा-10वीं, 28 नवंबर को कक्षा-11वीं और 29 नवंबर को कक्षा-12वीं के छात्रों के लिये क्विज प्रतियोगिता होगी। सभी परीक्षाएं स्कूल में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित की जाएंगी। भागीदारी के लिये लिंक 19 नवंबर तक उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रत्येक जिले में कक्षा के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 10 दिसंबर 2024 को उज्जैन में गीता महोत्सव के दौरान शामिल होंगे। राज्य स्तरीय विजेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। यह मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता छात्रों के शैक्षिक पाठ्यक्रम को आवश्यक नैतिक मूल्यों जैसे सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, सम्मान और उत्तरदायित्व से समृद्ध बनाने के लिए डिजाइन की गई है। साथ ही उन्हें व्यसनों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार एवं नैतिक रूप से जागरूक भविष्य के नागरिकों के रूप में उनके व्यक्तित्व के विकास का प्रयास भी इस पहल का लक्ष्य है।  

विजयपुर में मुरझाया कमल, मंत्री रामनिवास रावत को मिली करारी हार, कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा जीते

Lotus withered in Vijaypur, Minister Ramniwas Rawat got a crushing defeat, Congress’s Mukesh Malhotra won. श्योपुर। Vijaypur By-Election Result 2024: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की विजयपुर (Vijaypur) विधानसभा सीट पर कांग्रेस (Congress) ने कब्जा कर लिया है। भाजपा प्रत्याशी (BJP candidate) और सरकार में वनमंत्री (Forest Minister) रामनिवास रावत (Ramniwas Rawat) की बड़ी हार हुई है। मुकेश मल्होत्रा (Mukesh Malhotra) ने रावत को 7 हजार 228 वोटों से हरा दिया।

रिश्वतखोर ड्रग इंस्पेक्टर लोकायुक्त टीम के हफ्ते चढ़ा , मेडिकल स्टोर लाइसेंस के मांगे 26000

Bribery drug inspector attacks Lokayukta team, demands Rs 26,000 for medical store license मंदसौर ! मध्‍यप्रदेश के सरकारी विभागों में रिश्वत लेने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बिना पैसे खिलाए कोई काम नहीं होता है। हालांकि ऐसे मामलों की शिकायत मिलते ही लोकायुक्त भी गंभीरता से एक्शन लेती है। ताजा मामला एमपी के मंदसौर जिले में का है, जहां शुक्रवार को उज्‍जैन लोकायुक्‍त ने बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त ने ड्रग इंस्‍पेक्‍टर को 26 हजार रुपए की रिश्‍वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ड्रग इंस्‍पेक्‍टर ने मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनाने के बदले रिश्वत मांगी थी। उज्जैन लोकायुक्त डीएसपी राजेश पाठक ने बताया कि फरियादी लखन पिता कृष्ण कुमार पाटीदार निवासी नारायणगढ़ रोड हरसोल ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया कि उसे मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनवाना था। इसके बदले ड्रग इंस्पेक्टर जयप्रकाश कुम्हार 26 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। जांच में शिकायत सही पाई जाने पर उज्जैन लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष को रिश्वत के 26 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ा है। साथ ही उसने ड्रग इस्पेक्टर के लिए रुपए लिए थे। इसलिए उनको भी अरेस्ट किया गया है। दलाल को रुपए लेने भेजा ड्रग इंस्पेक्टर जय प्रकाश ने फरियादी लखन को रुपए लेकर मंदसौर एसपी कार्यालय के सामने बुलाया। रुपए मनीष चौधरी को देने की बोला। इसके बाद फरियादी 26 हजार रुपए लेकर एसपी कार्यालय के सामने पहुंचा। यहां फरियादी को दलाल के रूप में मेडिकल एसोसिएशन का जिलाध्यक्ष मनीष चौधरी मिला। उसने जैसे ही ड्रग इंस्पेक्टर के नाम के रुपए लिए वैसे ही लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। भ्रष्‍टाचार में मामला दर्ज मामले में डीएसपी पाठक ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर जयप्रकाश कुम्हार और उसके साथी मनीष चौधरी के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही मामले में विभिन्‍न स्‍तर पर जांच जारी है।

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