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अमेरिका-भारत संबंध 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण संबंध हैं, यह साझेदारी निर्धारित करेगी कि प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी

वाशिंटन अमेरिका के अगले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार माइक वाल्ट्ज ने इस बात पर बल दिया है कि अमेरिका-भारत संबंध 21वीं सदी के “सबसे महत्वपूर्ण” संबंध हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह साझेदारी निर्धारित करेगी कि यह प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी। वाल्ट्ज को निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नामित किया गया है। वाल्ट्ज ने ये टिप्पणियां सितंबर में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम’ (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की थीं। उन्होंने कहा, “मेरे विचार से यह (अमेरिका-भारत) 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण संबंध है। इससे यह तय होगा कि यह प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी।” वह चुनाव संबंधी व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे और उन्होंने सम्मेलन को वीडियो संदेश भेजा था। वाल्ट्ज, जो एक युद्ध अनुभवी और सांसद हैं, साथ ही भारत कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं, ने अमेरिका और भारत के बीच एक औपचारिक गठबंधन का प्रस्ताव भी रखा है। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी टीम में फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो को विदेश मंत्री और साउथ डकोटा की गवर्नर क्रिस्टी नोएम को गृह सुरक्षा मंत्री बनाने का निर्णय लिया है। इससे स्पष्ट है कि ट्रम्प अपनी नीतियों को लागू करने के लिए अपने वफादारों पर भरोसा करेंगे, बजाय तथाकथित “डीप स्टेट” पर जो MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों के बीच अलोकप्रिय है।हालांकि ट्रम्प ने औपचारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की है, उन्होंने यह संकेत दिया है कि एलिस स्टेफानिक को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित करेंगे। राष्ट्रपति-चुनाव की टीम से लीक हुई इन खबरों के बाद “MAGA” समर्थकों में इस फैसले को लेकर काफी उत्साह है, क्योंकि इसमें हार्डलाइनर नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, बजाय उन मुख्यधारा के रिपब्लिकन नेताओं के जिन्होंने वॉशिंगटन डीसी में लंबे समय तक नीति निर्धारण पर दबदबा बनाए रखा था। कौन हैं  माइक वाल्ट्ज  ? माइक वाल्ट्ज, 50 वर्ष के, एक पूर्व ग्रीन बेरेट अधिकारी हैं जिन्होंने अफगानिस्तान में कई युद्ध अभियानों में सेवा दी है। वाल्ट्ज, जो एक युद्ध अनुभवी और सांसद हैं, साथ ही भारत कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं। वह चीन और ईरान के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं और आतंकवाद विरोधी नीति पर भी उनकी मजबूत राय है। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी के लिए आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया था। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी पर ट्रम्प की इच्छा के बावजूद, वाल्ट्ज ने बिना कठोर शर्तों के सैनिकों की वापसी का विरोध किया था, जिसमें एक शर्त यह थी कि राष्ट्रीय खुफिया निदेशक द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि तालिबान अल कायदा के साथ संबंध नहीं रखेगा। वाल्ट्ज अमेरिकी अंतरिक्ष बल कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं, और उनके इस नेतृत्व से भारत-अमेरिका के अंतरिक्ष सहयोग में भी नए आयाम देखने को मिल सकते हैं। भारत के प्रति दृष्टिकोण भारत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बात यह है कि वाल्ट्ज अमेरिका-भारत के औपचारिक गठबंधन के प्रबल समर्थक हैं, जबकि भारत इस पर थोड़ी सावधानी बरतता रहा है। उन्होंने 2021 में निक्की हेली के साथ एक लेख में लिखा कि “दुनिया में अमेरिका की स्थिति मजबूत करने के लिए हमें भारत से शुरुआत करनी चाहिए।” वाल्ट्ज और हेली ने इसे एक “समय की जरूरत” बताया। उन्होंने कहा, “भारत एक परमाणु शक्ति है, जिसके पास 10 लाख से अधिक सैनिक, एक मजबूत नौसेना, एक शीर्ष-स्तरीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, और अमेरिका के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग का इतिहास है। ऐसे में, भारत एक मजबूत सहयोगी बन सकता है।” जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत-अमेरिका के इस गठबंधन से आतंकवाद के खतरे को रोका जा सकेगा और चीन के खिलाफ मजबूती से खड़ा हुआ जा सकेगा।

पिछले कुछ वर्षों में स्टीव स्मिथ के खिलाफ़ अच्छी खेल योजनाओं को तोड़ने के तरीके खोज लिए: रविचंद्रन अश्विन

नई दिल्ली अनुभवी भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में स्टीव स्मिथ के खिलाफ़ कई मुकाबलों में उनकी “अच्छी खेल योजनाओं” को तोड़ने के तरीके खोज लिए हैं। उन्होंने कहा कि आईपीएल में उनके समय के दौरान नेट सेशन ने उन्हें ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ के खिलाफ़ तैयारी करने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। 22 नवंबर से पर्थ में शुरू होने वाली आगामी बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ में दोनों दिग्गज अपनी प्रतिद्वंद्विता को फिर से जगाने के लिए तैयार हैं। यह जोड़ी 2013 से टेस्ट क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी रही है, जिसमें संघर्षरत स्मिथ को 2020-21 सीरीज़ की शुरुआत में अश्विन ने दो बार आउट किया था। जब ऑस्ट्रेलिया ने 2023 में भारत का दौरा किया, तो स्मिथ दो बार अश्विन और तीन बार रवींद्र जडेजा के हाथों आउट हुए। अश्विन ने 7क्रिकेट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “स्टीव स्मिथ स्पिन के खिलाफ़ एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उनके पास अपनी अनूठी तकनीक है, यहां तक कि तेज़ गेंदबाज़ी के खिलाफ़ भी। लेकिन स्पिन के साथ, मुझे लगता है कि वह बेहतरीन गेम प्लान, बेहतरीन तैयारी के साथ आए थे और हाँ, वह इसे अंजाम देते थे। और पिछले कुछ सालों में मैंने इसे तोड़ने के तरीके और साधन खोज लिए हैं।” दिल्ली कैपिटल्स में उनका समय, राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स में उनका समय, ये सभी नेट सेशन जो मैंने उन्हें अपने काम के बारे में करते हुए देखे हैं, उनसे मुझे वास्तव में यह समझ में आया कि वह कैसे तैयारी करते हैं और उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं। अश्विन ने कहा,”वह बहुत ही सोच-समझकर खेलने वाले क्रिकेटर हैं। वह हर समय आप पर हावी होना चाहते हैं। लेकिन उनके पास अभ्यास करने के बहुत ही अनोखे तरीके हैं और बीच में आपके साथ लड़ने के अनोखे तरीके हैं। और कभी-कभी, एक गेंदबाज़ के तौर पर, जब आप बल्लेबाज़ को उसकी प्रक्रिया से गुजरते हुए देखते हैं तो आप पहचान जाते हैं कि वह आपके पास है या नहीं।” स्मिथ बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में मध्य क्रम में वापसी कर रहे हैं, जहां उन्होंने थोड़े समय तक ओपनर के तौर पर खेलने के बाद नंबर 4 पर वापसी की है। डेविड वॉर्नर के रिटायरमेंट के बाद 35 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज ने चौथे नंबर से टेस्ट में ओपनिंग की, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली और उन्होंने 28.50 की औसत से 171 रन बनाए। 105 टेस्ट मैचों में 536 टेस्ट विकेट लेने वाले अश्विन न्यूजीलैंड के स्पिनरों के सामने भारतीय धरती पर मात खाने के बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं। इस बीच, भारतीय दिग्गज खिलाड़ी 2019-2024 के बीच 40 मैचों में 194 विकेट लेकर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं ”और स्टीव स्मिथ के साथ खेलने के इन वर्षों में कई बार मुझे लगा कि वह मुझ पर हावी हो गए हैं। लेकिन कई बार बहुत बाद में जब मुझे लगा कि मैं समझ गया हूं कि वह क्या करते हैं या कैसे बल्लेबाजी करते हैं, तो मैं उनसे आगे निकल गया। अश्विन ने कहा, “मैंने उनसे बेहतर प्रदर्शन किया है।” कुल मिलाकर, अश्विन ने अब तक 105 मैचों में 24 से कम की औसत से 536 विकेट लिए हैं, जो उन्हें भारत की सर्वकालिक टेस्ट विकेट लेने वाली सूची में दूसरे स्थान पर रखता है, केवल दिग्गज अनिल कुंबले से पीछे, जिन्होंने 619 विकेट लिए हैं।  

नवाज शरीफ ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपनी क्रिकेट टीम पाकिस्तान भेजें

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक बार फिर भारत से रिश्ते सुधारने की अपील की है। नवाज शरीफ ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपनी क्रिकेट टीम पाकिस्तान भेजें। एक्सप्रेस न्यूज की रिपोर्ट में  कहा गया कि शरीफ ने कहा कि अगर तनाव जारी रहता है तो इस तरह की पहल द्विपक्षी संबंधों को बेहतर बनाने में मदद दे सकती है। नवाज शरीफ लंदन में बोल रहे थे। उनके साथ उनकी बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी थीं। दरअसल ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान के पास है। भारत ने सुरक्षा कारणों से अपनी टीम को पाकिस्तान न भेजने का फैसला लिया है। नवाज शरीफ ने भारत के इसी फैसले जिक्र करते हुए कहा कि भारत को मैचों के लिए पाकिस्तान का दौरा करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर रिश्ते तनावपूर्ण हैं तो उन्हें सुधारने की जरूरत है। लोग भारतीय क्रिकेट टीम को पाकिस्तान में खेलते हुए देखना चाहते हैं।’ अमेरिका से संबंधों पर दिया जोर नवाज शरीफ ने आगे अन्य पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने पर भी जोर दिया। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। अतीत में हमारे संबंध मजबूत थे, लेकिन इसमें और सुधार की जरूरत है।’ बम धमाके ने उठाए सुरक्षा पर सवाल भारतीय टीम ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान में न जाने का फैसला किया है। पिछले सप्ताह एक बम धमाके ने पाकिस्तान के सुरक्षा की पोल खोल दी और भारतीय क्रिकेट टीम के फैसले को सही साबित कर दिया। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक रेलवे स्टेशन पर शनिवार को धमाका हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए। इन धमाकों में सैनिक और रेलवे कर्मी भी मारे गए। पाकिस्तानी रेलवे ने एक बयान जारी कर सुरक्षा कारणों से चार दिनों के लिए रेल सेवा स्थगित कर दी है।

समाज सेवा के साथ बनाएं बेहतरीन करियर

अगर आप 9 से 5 का जॉब नही करके कुछ अलग करना चाहते है तो आपके लिए एनजीओ की फील्ड एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आज एनजीओ की फील्ड समाज सेवा के साथ ही एक बेहतरीन करियर की ग्यारंटी भी देता है। अगर आपको लगता है कि समाज सेवा कोई फुल टाइम जॉब नही है तो आपको बता दें कि समय के साथ समाज सेवा एक उभरता हुआ करियर विकल्प बन गया है। आज सोशल वर्क का मतलब सिर्फ गरीबों और जरूरमंदों की मदद करना ही नही रह गया है बल्कि यह एक बेहतरीन करियर ऑप्शन के रूप में उभर कर हमारे सामने आया है। अगर आप एनजीओ की फील्ड में करियर बनाना चाहते है तो आज हम आपके लिए एनजीओ और समाज सेवा में करियर कैसे बनाएं से संबंधित जानकारी लेकर आए है। तो आइये जानते है कैसे बनाएं एनजीओ की फील्ड में करियर। ऐसे बनाएं एनजीओ की फील्ड में करियर… भारत में एनजीओ की संख्या : एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरे भारत में 33 लाख के आसपास एनजीओ विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे है। इस फील्ड में पैसों की कमी भी नही है कई फंडिंग एजेंसियों के जरिए हर साल एनजीओ सेक्टर में अरबों रूपये आते है। इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े दान दाताओं ने भी भारत में समाज सेवा के लिए हजारों करोड़ रूपये का डोनेशन दिया है। देश के सबसे बड़े आईटी कारोबारी अजीम प्रेमजी ने 9000 करोड़ रूपये समाज सेवा के लिए देने की बात कही है जो अब तक का दुनिया का सबसे बड़ा डोनेशन बताया गया है। अगर आपको लगता है कि इस सेक्टर में पैसों की कमी है तो ये आंकड़े आपको हैरान कर सकते है। सोशल वर्क से जुड़े कोर्स : आज एनजीओ के क्षेत्र में कई अवसरों के चलते सोशल वर्क के कई कोर्स करवाए जा रहे है। देश में ऐसे कई संस्थान और विश्वविद्यालय है जो एनजीओ प्रबंधन और सोशल वर्क से जुड़े डिग्री और डिप्लोमा कोर्स करवाते है। सोशल वर्क में बैचलर डिग्री, मास्टर्स डिग्री और डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध है। यहां मिलेगी नौकरी : एनजीओ की फील्ड में नौकरियों की कमी नही है। अगर आपने कहीं से एनजीओ या समाज से में प्रोफेशन कोर्स किया है तो आपको जॉब देने के लिए कई एनजीओ उपलब्ध है। एनजीओ की फील्ड में आपको एनजीओ मैनेजर, कम्युनिटी सर्विस प्रोवाइडर, एनजीओ प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, एनजीओ ह्यूमन रिसोर्स और फाइनेंस मैनेजर के रूप में काम मिल सकता है। कुछ सरकारी संस्थान भी समाज सेवा में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट को जॉब देते है जैसे- मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर, फिक्की, एसओएस विलेज, एफएआरएम, अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट और प्रयास आदि में आपको शुरूआती पैकेज पर आसानी से जॉब मिल सकता है। इसके अलावा मौजूदा समय में एड्स अवेयरनेस प्रोजेक्ट, ग्रामिण स्वास्थय कार्यक्रम, चाइल्ड एब्यूज प्रिवेंशन कमेटी स्ट्रीट चिल्ड्रन एजुकेशन, ड्रग रिहेबिलिटेशन सेंटर, सेक्स वर्कर फोरम जैसी फील्ड में जॉब के कई अवसर उपलब्ध है। इतनी मिलेगी सैलरी : एनजीओ और सोशल वर्क के क्षेत्र में सैलरी के अच्छे मौके है। एक अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ आपको बढ़िया सैलरी दे सकता है। इसके अलावा शुरूआती तौर पर आप 10 से 15 हजार रूपये महीना कमा सकते है। कुछ सालों का अनुभव होने के बाद आप एक लाख रूपये से ज्यादा की सैलरी पा सकते है। इसके अलावा एक सोशल वर्कर को रिसर्च, राइटिंग, फील्ड वर्क आदि से भी पैसे कमाने के मौके मिलते है।  

जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर पोड़ी में 16 नवंबर को

कोरिया जिला प्रशासन ने बचरा पोड़ी तहसील के पोड़ी में 16 नवंबर 2024 को जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने जिला अधिकारियों से कहा है कि उक्त शिविर में पहुंचकर महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में आम लोगों को अवगत करांए। श्रीमती त्रिपाठी ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा है कि इस शिविर में बड़ी संख्या में आए और अपनी समस्याओं को दर्ज कराएं। बता दें जनसमस्या निवारण शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना और जनहित के मुद्दों पर तत्परता से कार्यवाही करना है। इन शिविरों में जिला प्रशासन व विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। शिविर के दौरान नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकेंगे और तुरंत आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। प्रशासन ने आम जनता से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्याएं प्रस्तुत करने का आग्रह किया है, ताकि समय पर उनका निवारण हो सकें।

बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना

जगदलपुर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोडने सहित उनकी खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना, खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर उनके विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। गांव-गांव से सीधे विकाखण्ड स्तर पर खेलने आये लोगों में उल्लास और जोश का संचार कर रहा है, जिसमें बच्चे, बड़े, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बड़े उत्साह के साथ हिस्सा ले रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में कबड्डी, ऊंची कूद, लंबी कूद, रस्साकसी, खो-खो, फुटबाल, व्हालीबॉल और तीरंदाजी जैसे खेल विधा शामिल किए गए हैं। इन खेलों का आयोजन न केवल बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है बल्कि महिलाओं और बुजुर्गों में भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। वर्तमान में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में बस्तर ओलम्पिक 2024 का आयोजन से बड़ी संख्या में युवाओं के साथ ही आम नागरिक उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रहे हैं। जिसमें करीब एक लाख 70 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। बस्तर ओलंपिक में स्थानीय खेलों को विशेष महत्व दिया गया है। इनमें कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, और विभिन्न ग्रामीण खेल शामिल हैं, जो स्थानीय युवाओं की संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। इन खेलों में भाग लेकर युवा अपनी परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं और अपनी जड़ों से जुड़े रह रहे हैं। बस्तर जिले के दरभा विकासखण्ड अंतर्गत चिंगपाल में आयोजित खण्ड स्तरीय बस्तर ओलम्पिक स्पर्धा में अंदरूनी दूरस्थ क्षेत्र मुण्डागढ़ निवासी युवक शोभाराम नाग ने सीनियर वर्ग तीरंदाजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम स्थान हासिल किया और अब जिला स्तरीय बस्तर ओलम्पिक में अपनी श्रेष्ठतम प्रदर्शन करने संकल्प व्यक्त करते बताया कि खेती-किसानी से जुड़े परिवार का होने के कारण स्वयं गांव में ही अभ्यास जारी रखा है। अब पहली बार पुरस्कार मिलने से वह उत्साहित है और निरंतर अभ्यास के द्वारा खुद के क्षमता में सुधार करने के साथ बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करेगा। इसी तरह सुदूर ईलाके पखनार की ग्रामीण महिला कमली ने सीनियर वर्ग 100 मीटर दौड़ में पहला स्थान अर्जित करने पर कहा कि अब अभ्यास के लिए और ज्यादा ध्यान देंगी। वहीं पखनार के ही मनीराम ने सीनियर वर्ग लम्बी कूद में प्रथम स्थान हासिल करने पर खुशी जताते कहा कि अब जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। इन खिलाड़ियों के साथ ही उक्त क्षेत्र के अन्य युवाओं ने भी विभिन्न खेल विधा में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर अपनी श्रेष्ठता साबित की। ज्ञात हो कि बस्तर जिले के दरभा विकासखण्ड अंतर्गत उक्त दूरस्थ ईलाके पहले धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र थे लेकिन अब सुरक्षा बलों के कैम्प खुलने से सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन क्षेत्रों में बदलाव की बयार बह रही है और लोग समाज की मुख्यधारा में जुड़कर प्रदेश की विकास में सहभागिता निभा रहे हैं।

दिल्ली में बढ़ेगा ट्रैफिक जाम, ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को कुछ विशेष मार्गों से परहेज करने की सलाह दी

नई दिल्ली दिल्ली के प्रगति मैदान में 14 से 27 नवंबर तक इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर आयोजित होने जा रहा है। इस दौरान प्रगति मैदान और उसके आस-पास के मार्गों पर भारी ट्रैफिक हो सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को कुछ विशेष मार्गों से परहेज करने की सलाह दी है और साथ ही कुछ प्रमुख मार्गों को डायवर्ट भी किया है।   ट्रेड फेयर का समय और यातायात व्यवस्था ट्रेड फेयर का समय सुबह 9:30 बजे से लेकर शाम 7:30 बजे तक रहेगा। पुलिस ने सलाह दी है कि प्रगति मैदान के आसपास के मार्गों से वाहन चालकों को सुबह 8 बजे से लेकर रात 9 बजे तक परहेज करना चाहिए।      ट्रेड फेयर में रोजाना करीब 60,000 लोग आने का अनुमान है, और वीकेंड या छुट्टी वाले दिन ये संख्या बढ़कर 1.5 लाख तक पहुंच सकती है। कौन से मार्ग रहेंगे बंद? मथुरा रोड और भैरों मार्ग: यहां पर किसी भी वाहन को रुकने या पार्क करने की अनुमति नहीं होगी। शेरशाह रोड, पुराना किला रोड, भगवान दास रोड, तिलक मार्ग: इन रास्तों पर भी किसी भी वाहन को पार्क करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अवैध पार्किंग: इन रास्तों पर अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

प्रदेश में सड़कों के व्यापक विस्तार और विकास को नया आयाम मिल रहा

भोपाल मध्यप्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की अभूतपूर्व गति से राज्य एक नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की डबल इंजन सरकार से प्रदेश में सड़कों के व्यापक विस्तार और विकास को नया आयाम मिल रहा है। वृहद स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाना है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी। मध्यप्रदेश को इस वर्ष जनवरी माह में 10 हजार 405 करोड़ रुपये लागत की 24 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात मिली। भोपाल और जबलपुर में आयोजित कार्यक्रमों में इन परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया गया। भोपाल में 8,038 करोड़ रुपये की लागत से 498 किलोमीटर लंबी 15 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और जबलपुर में 2,367 करोड़ रुपये की लागत से 226 किलोमीटर लंबी 9 परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इन परियोजनाओं में एनएच-46 का छह-लेन विस्तार, एनएच-146बी का चार-लेन विस्तार और कई दो-लेन सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। नवीन स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से न केवल प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के कृषि व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कटनी के कोयला उद्योग, बुधनी के टेक्सटाइल और वुड क्राफ्ट उद्योगों को भी लाभ होगा। इसके साथ ही खजुराहो, ओरछा जैसे पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी आसान होगी और पेंच टाइगर कॉरिडोर तक पहुँचने में सहूलियत मिलेगी। मध्यप्रदेश के इन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ व्यावसायिक और नागरिक यातायात में भी सुगमता आएगी, जिससे प्रदेश के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में भी योगदान मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने 6-लेन आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी। इसमें 4,613 करोड़ रुपये की लागत से 88 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मोड पर विकसित किया जाएगा, जो आगरा और ग्वालियर के बीच यात्रा के समय को लगभग 50% तक कम कर देगा। यह परियोजना न केवल मौजूदा 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग की यातायात क्षमता को दोगुना करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच कनेक्टिविटी को भी बढ़ाएगी, जिससे पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजना का लाभ मध्य प्रदेश को व्यापक स्तर पर मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मंजूर की गई इस परियोजना से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार, भीड़भाड़ में कमी और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। यह 6-लेन ग्रीनफील्ड हाई-वे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ते हुए, आगरा जिले के गांव देवरी से शुरू होकर ग्वालियर जिले के गांव सुसरा तक जाएगा। इस परियोजना में NH – 44 के मौजूदा आगरा-ग्वालियर खंड पर ओवरले और अन्य सड़क सुधार कार्य भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 50,655 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से 936 किलोमीटर की लंबाई में फैली 8 राष्ट्रीय हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर परियोजनाओं में यह कॉरिडोर भी शामिल है, जो देश के परिवहन ढांचे को सुदृढ़ और सक्षम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मध्यप्रदेश को सड़क विकास की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है, जिसमें भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को 4-लेन में अपग्रेड करने के लिए 3589.4 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में भोपाल से विदिशा, विदिशा से ग्यारसपुर, सताईघाट से चौका और चौका से कैमाहा तक के मार्ग को चौड़ा और सुदृढ़ किया जाएगा। इस परियोजना से यातायात सुगमता में सुधार होगा, यात्रा के समय में कमी आएगी, सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। इससे अपग्रेडेशन से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मंडला से नैनपुर के बीच 46 किलोमीटर लंबे मार्ग को भी 592 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड करने की स्वीकृति भी दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से मंडला और नैनपुर के बीच यातायात अधिक सुरक्षित और कुशल बनेगा, जिससे स्थानीय जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा। प्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजनाएं एक महत्वपूर्ण कदम हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र के तहत बुंदेलखंड विकास पथ की घोषणा की थी, जो राज्य की राजधानी भोपाल को बुंदेलखंड के सागर और छतरपुर जिलों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण 4-लेन सड़क परियोजना है। इस परियोजना को केंद्र सरकार की भी स्वीकृति मिल गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा पहले से इस मार्ग को 4-लेन में विस्तारित करने का काम चल रहा था। अब भोपाल से सागर होते हुए छतरपुर और उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक इसे 4-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। इस परियोजना से बुंदेलखंड के क्षेत्रों में व्यापार और कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और मध्यप्रदेश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।  

मंत्री श्यामबिहारी ने BJP की जीत का किया दावा, बोले – डबल इंजन की सरकार में हो रहा विकास, भाजपा के साथ है जनता

रायपुर रायपुर दक्षिण उपचुनाव के लिए आज वोटिंग जारी है. मतदान के बीच भाजपा दक्षिण प्रभारी और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जीत का दावा किया है. उन्होंने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में कहा, भारी मतों से उपचुनाव जीत रहे हैं. जीत का रिकॉर्ड भी टूटेगा. शांतिपूर्ण ढंग से मतदान जारी है. मंत्री श्यामबिहारी ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की है. मंत्री श्यामबिहारी ने कहा, मतदाताओं के बीच जो रुझान है वो BJP के पक्ष में है. प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है. विकास की गति भी डबल है. यही कारण है कि जनता BJP के साथ है. कांग्रेस पर तंज कसते हुए मंत्री श्याम बिहारी जारी जायसवाल ने कहा, कांग्रेस को जनता जानती है इसलिए कांग्रेस के पक्ष में मतदान नहीं हो रहा है. असफल प्रयास कर रहे हैं और जनता सब समझती है. कांग्रेस के प्रत्याशी के नाम दक्षिण के जनता तक को पता नहीं है. जनता को लुभाने के लिए तमाम कोशिश कर रहे हैं. उन्हाेंने कहा, खाने का डिब्बा बांटकर जनता को अपनी ओर नहीं खींच सकते. जब पता है कि सौ मीटर के दायरे में राजनीतिक गतिविधियां नहीं करनी है तो कांग्रेस कर रही है, अब समझ सकते हैं. जो मतदान प्रतिशत है वो BJP की ओर इशारा कर रही है. यह प्रचंड जीत का इशारा है. बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर आंखों पर है. पहले भी सरकार उनके फैसले का पालन करती रही है और अभी भी होगी. छत्तीसगढ़ में ऐसी कोई भी स्थिति नहीं है जो कोर्ट के फैसले का अवहेलना करें. दिल्ली से ऑपरेट होते थे भूपेश बघेल : श्यामबिहारी जनजाति महोत्सव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. इस पर पलटवार करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, हाथ के बारे में भूपेश बघेल क्या बताएंगे. उनका हाथ तो 5 साल तक दिल्ली में गिरवी था. पूरे 5 साल दिल्ली से ऑपरेट होते थे.

स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सरकार 50 ऐतिहासिक स्थलों को चिह्नित करेगा जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो

भोपाल  देशी-विदेशी पर्यटकों को देश के हृदय मध्य प्रदेश में कुछ अनदेखा दिखाने की तैयारी हो रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने 50 ऐसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को चिह्नित किया है जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो सकते हैं। इन स्थलों को अब विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो अपारंपरिक पर्यटन स्थल विकसित किए जाने हैं, उनमें से अधिकतर प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास ही हैं। हालांकि सुविधाओं की कमी और जानकारी नहीं होने के कारण पर्यटक उस ओर नहीं जाते। जिन नए स्थलों को चिह्नित किया गया है, उनमें खजुराहो के पास रनेह वाटरफाल, भोजपुर के पास आशापुरी मंदिर समूह, पचमढ़ी के पास तामिया और देवगढ़, गांधी सागर के पास चतुर्भुज नाला प्रमुख हैं। घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद पर्यटकों को कुछ नया अनुभव देने के लिए प्रदेश के बड़े शहरों के आसपास भी ऐसे स्थलों का चयन किया गया है। भोपाल में खारीगांव, केकड़िया, जगदीशपुर, जबलपुर में मदन महल और नर्मदा के किनारे के स्थलों, ग्वालियर में मितावली- पड़ावली के मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर और दमोह में सिंग्रामपुर (रानी दुर्गावती व गोंड राजाओं का शासन केंद्र) में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जानी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में हर वर्ष ढाई से तीन करोड़ पर्यटक आते हैं। नया आकर्षण जुड़ जाने से घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ये स्थल भी किए जा रहे विकसित लांझी का किला- बालाघाट, सिंधिया की छतरियां- शिवपुरी, काला ताजमहल, असीरगढ़ का किला और बुरहानपुर का किला- बुरहानपुर, मितावली, पड़ावली, तेली का मंदिर, सहस्त्रबाहु मंदिर- ग्वालियर, ककनमठ मंदिर- मुरैना, पशुपतिनाथ व धर्मराजेश्वर मंदिर- मंदसौर, पातालकोट और तामिया (प्राकृतिक स्थल)- छिंदवाड़ा, सोनागिरी जैन मंदिर और दतिया का किला- दतिया, मोतीमहल- मंडला, मदन महल- जबलपुर, बहुति झरना, क्योटी जलप्रपात, भीमकुंड- रीवा, जटाशंकर, नजारा व्यू प्लाइंट, निदान कुंड और सद्भावना शिखर- दमोह। होम स्टे बनाए जा रहे हैं     50 अपारंपरिक पर्यटन स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अपनी गतिविधियां चला रहा है। महिला पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण होम स्टे बनाए जा रहे हैं। हेरिटेज वाक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। जल्द ही ये स्थल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की श्रेणी में आ जाएंगे। – बिदिशा मुखर्जी, अतिरिक्त प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड  

ICMR ने कहा है भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान

नई दिल्ली भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है. 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में कहा गया था कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के मामले तेजी बढ़ रहे हैं. कुछ दिन पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान है. ब्रिक्स देश यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामले, उनसे होने वाली मौतों और उनका रोजमर्रा की लाइफ पर प्रभाव दिखाने वाली स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने का जोखिम है. आईसीएमआर-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए. क्या कहती है रिसर्च कैंसर एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत मौतें ब्रिक्स देशों में होती हैं. स्टडी के राइटर्स का कहना है, ‘हमारा विश्लेषण भारत और दक्षिण अफ्रीका में 2022 और 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी. स्टडी के राइटर सतीशकुमार ने बताया कि 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कैंसर की घटनाओं में तेजी लगातार जारी रहेगी.’ निष्कर्ष क्या निकला स्टडी के निष्कर्ष में इस बारे में जानकारी दी गई है कि कैंसर कितना कॉमन है, इससे कितनी मौतें होती हैं और इससे आम इंसान की लाइफ पर कितना प्रभाव होता है. रिसर्च के मुताबिक, रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामलों की दर सबसे अधिक थी. रूस में पुरुषों में सबसे आम प्रकार का कैंसर प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल थे. अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था. हालांकि, भारत में होंठ और मुंह के कैंसर का ट्रीटमेंट पुरुषों में सबसे अधिक बार किया गया. दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी. अगर रूस में सिर्फ पुरुषों की मौत सबसे अधिक कैंसर से हुई ती और महिलाओं की दक्षिण अफ्रीका में कैंसर से मौत सबसे अधिक हुई थी. स्टडी में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर मौतों का सबसे बढ़ा कारण था. भारत में बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा रिसर्चर्स के अनुसार, आने वाले सालों में दक्षिण अफ्रीका और भारत में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को कंट्रोल करने के तरीके हैं लेकिन फिर भी कैंसर के जोखिम और कैंसर की घटनाओं को प्रभावित करने वाले हेल्थ सिस्टम की जांच करनी काफी जरूरी है.  

प्रदेश में अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही : मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के संतुलित विकास के लिये निरंतर सभी अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं। अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही है। नर्मदापुरम् क्षेत्र में मुख्य रूप से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बहुतायत में हैं। नर्मदापुरम्, हरदा, और होशंगाबाद में पहले से स्थापित उद्योगों के साथ-साथ कृषि प्र-संस्करण, सोयाबीन तेल, मसाला उत्पादन और दुग्ध प्र-संस्करण जैसे उद्योग यहाँ की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की खनिज संपदा का उपयोग कर निर्माण और अन्य उद्योगों से भी स्थानीय विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। छठवीं आईआईसी का आयोजन 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम् के डिवीजनल आईटीआई में किया जाएगा। पिछली पांच रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस कॉन्क्लेव का नर्मदापुरम् क्षेत्र में आयोजन उद्योगों की वृद्धि, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। नर्मदापुरम आरआईसी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, MSME और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में एक उद्योग-हितैषी वातावरण बना है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। नर्मदापुरम् और इसके आसपास के क्षेत्र जैसे होशंगाबाद, हरदा में एमएसएमई, कृषि आधारित उद्योग, और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित और समन्वित आर्थिक विकास करना है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम् और इसके आस-पास के क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह आरआईसी नर्मदापुरम् और आसपास के क्षेत्रों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। पचमढ़ी, जो न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है बल्कि यहाँ की अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन, अब निवेशकों के लिये नया आकर्षण बनेंगा। साथ ही नर्मदा नदी तट पर औद्योगिक और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस कॉन्क्लेव में कृषि, MSME, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और खनिज जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। नर्मदापुरम् और पचमढ़ी, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हैं, अब औद्योगिक दृष्टिकोण से भी नई ऊँचाइयों को छुएंगे। इस कॉन्क्लेव से औद्योगिक, पर्यटन और सामाजिक विकास के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित होगा।  

क्लाइमेट चेंज का असर खस के तेल की कीमतें बढ़कर 80,000 रुपये प्रति किलो पहुंची

कानपुर  क्लाइमेट चेंज का असर सिर्फ आम लोगों की सेहत या अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। जबर्दस्त गर्मी और अनिश्चित मौसम ने खस को भी झटका दिया है। खस की घास से असेंशियल ऑइल का उत्पादन घटने लगा है। 2023 में हाथरस बेल्ट खस के तेल के उत्पादन में 20% तक गिरावट दर्ज हुई है। कन्नौज में तो खस की घास से निकलने वाले तेल की मात्रा में एक तिहाई तक कम हो गई। कन्नौज के सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के डायरेक्टर शक्ति विनय शुक्ला का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण खस और पचौली के पौधों से निकलने वाला तेल कम हुआ। इस वजह से इनसे बनने वाले इत्र, परफ्यूम व अन्य उत्पादों की कीमत बढ़ने लगी है। देश में खस घास की 4-5 किस्में मिलती हैं। यूं तो खस जंगलों और नदी के किनारे उगती है, पर खस की खास प्रजातियों की खेती भी की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली के बाद से मार्च तक खस की घास से तेल निकाला जाता है। 2022 तक तो खस के तेल का उत्पादन ठीक था, लेकिन 2023 में झटका लगा। हाथरस के इत्र कारोबारी लव शर्मा के अनुसार, 2022 में एक क्विंटल घास से 100 ग्राम तेल निकलता था, 2023 में यह घटकर 80 ग्राम रह गया। इस बार भी गर्मी का असर देखने लायक होगा। हाथरस में 2-3 दिन में खस का डिस्टिलेशन शुरू हो जाएगा। ज्यादा फसल लेने की चाह भी है वजह कन्नौज के इत्र एक्सपोर्टर प्रांजुल कपूर ने बताया कि मौसम ने निश्चित तौर पर इत्र/परफ्यूम के कारोबार पर असर डाला है। उत्पादकता घटी है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी हैं। पहले माना जाता था कि खस की बढ़िया उपज लेने के लिए घास की जड़ एक बार तोड़ने के बाद तीन साल तक उसे नहीं तोड़ना चाहिए। इस अंतराल में जड़ ज्यादा परिपक्व होती है और डिस्टिलेशन में तेल भी बढ़िया निकलता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण अब कोई रुकने को तैयार नहीं है। कन्नौज में पैदा होने वाला गुलाब और बेला के फूलों से भी कम तेल निकल रहा है। रु. 28 हजार तक बढ़ गए दाम प्रांजुल बताते है कि पहले दुनिया में खस के तेल का बड़ा स्रोत हैती और डॉमिनिकन रिपब्लिक था, लेकिन वहां से इसकी सप्लाई बंद हो चुकी है। इस वजह से दुनिया अब खस की आपूर्ति के लिए भारत की तरफ देख रही है। एक साल पहले तक 62 हजार रुपये/किलो बिकने वाली ‘रूह खस’ ऑइल अब 80 हजार रुपये/किलो बिक रहा है। साधारण खस का ऑइल 14-15 हजार रुपये/किलो से बढ़कर 23 हजार रुपये तक पहुंच गया है। खस के दाम पर उसकी किस्म, डिस्टिलेशन और जगह का भी असर होता है। पचौली की फसल खराब, कीमत बढ़ी भारत में पचौली के तेल का भी इत्र और परफ्यूम में खूब इस्तेमाल होता है। पचौली के फूल और पत्तियां इंडोनेशिया से आते हैं। क्लाइमेट चेंज के कारण वहां भी फसल खराब हुई है। पचौली ऑइल के बढ़कर 16-19 हजार रुपये/किलो तक चल रहे हैं, जबकि 2 साल पहले दाम 3500-4000 रुपये/किलो की रेंज में होते थे। भारत में पूर्वोत्तर में पचौली का थोड़ा उत्पादन होता है।

2000 के करीब 2% नोट अभी भी रिजर्व बैंक को वापस नहीं आए, 7000 करोड़ रुपये की वैल्यू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए थे। उनकी जगह ₹2000 का नोट लाया गया था। 19 मई 2023 को RBI ने पहली बार ₹2000 के नोट वापस लेने की घोषणा की। उस समय चलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के ₹2000 के नोट थे। RBI ने इन्हें बैंकों और डाकघरों में बदलने की सलाह दी। RBI की घोषणा के बाद लोग अपने ₹2000 के नोट बदलने लगे। अब तक लगभग 98.04% ₹2000 के नोट वापस आ चुके हैं। ₹2000 के नोट वापस लेने पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग ₹6,970 करोड़ मूल्य के नोट चलन में हैं। इन्हें भी वापस लेने के लिए RBI ने एक और मौका दिया है। जिन लोगों के पास अभी भी ₹2000 के नोट हैं, वे उन्हें RBI कार्यालयों में बदल सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें डाकघर के माध्यम से RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजकर भी बदला जा सकता है।  साल 2016 में नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। लेकिन पिछले साल रिजर्व बैंक ने इस नोट को चलन से बाहर कर दिया था। बैंक ने कहा था कि जिनके भी पास ये नोट हैं, उन्हें बदल लें। रिजर्व बैंक ने  इन नोटों को लेकर डेटा जारी किया। इस डेटा के मुताबिक 19 मई 2023 तक प्रचलन में रहे 2000 रुपये के नोटों में से करीब 98 फीसदी नोट अब वापस आ चुके हैं। वहीं करीब 2 फीसदी नोट अब भी प्रचलन में हैं। 19 मई 2023 को कारोबार बंद होने पर जब 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब प्रचलन में इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। करीब जो दो फीसदी नोट अभी भी प्रचलन में हैं, उनकी वैल्यू करीब 7 हजार करोड़ रुपये है। यानी से नोट अभी भी लोगों के पास हो सकते हैं।बैंकों के मर्जर की तैयारी, 43 से घटकर रह जाएंगे 28, जानिए क्या है सरकार का प्लान क्या बेकार हो गए हैं 2000 के नोट? रिजर्व बैंक अब 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर कर चुका है। रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को घोषणा की थी कि 2000 रुपये के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। लेकिन जिनके पास भी ये नोट हैं, वे 7 अक्टूबर 2023 तक किसी भी बैंक में जाकर अपने अकाउंट में जमा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के दिमाग में सवाल है कि जिनके पास अभी भी ये नोट हैं, क्या वे अब बेकार हो गए हैं। दरअसल, ये नोट अब बाजार में चलन में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी ये नोट बचे हैं, वे रिजर्व बैंक जाकर अपने बैंक अकाउंट में जमा करवा सकते हैं। नोटबंदी के समय हुई थी शुरुआत 2000 के नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय शुरू किए थे। दरअसल, नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया गया था। ऐसे में लोगों की पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट जारी किए थे। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 में इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। बाद में इनकाे प्रचलन से बाहर कर दिया। कैसे बदलें 2000 के नोट? अगर अभी भी आपके पास 2000 के नोट हैं तो उन्हें दिल्ली स्थित रिजर्व बैंक में जाकर बदला जा सकता है। इस दौरान ओरिजिनल आधार कार्ड और इसकी फोटो कॉपी ले जाना न भूलें। वहीं अगर कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो ओरिजिनल पैन कार्ड और इसकी फोटो कॉपी भी जरूर लेकर जाएं।

राशिफल गुरुवार14 नवंबर 2024

मेष राशि के जातकों आज के दिन आप कॉन्फिडेंस से भरपूर रहेंगे। पैसों से जुड़े सौदे आज बेहद सावधानी के साथ करें। छोटी मोटी सेहत से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज करना आपके लिए बेहतर रहेगा। वृषभ राशि के जातकों आज का दिन क्रिएटिव रहने वाला है। करियर के मामले में कुछ लोगों को अपनी मेहनत का फल मिल सकता है। लव लाइफ में पार्टनर के साथ बहस करने से बचें। कोई नई डील मिल सकती है। मिथुन राशि के जातकों आज अपनी स्किल्स का अच्छे से इस्तेमाल करें। कुछ जातकों को काम के सिलसिले में काफी भाग दौड़ करनी पड़ सकती है। लाइफ में बैलेंस मेंटेन करके आगे बढ़ें। पॉजिटिव सोच रखें। कर्क राशि के जातकों आज का आपका दिन उतार-चढ़ाव से भरपूर रहेगा। अपने खर्चों पर पकड़ बनाकर रखें। आपको सलाह दी जाती है की जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों को पॉजिटिव सोच के साथ अपनाएं। सिंह राशि के जातकों आज का आपका दिन बदलावों भरा साबित हो सकता है। आज अपने पार्टनर के साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें। पैसों के मामले में आपको सेविंग्स पर ध्यान देना चाहिए। कन्या राशि के जातकों आज का आपका दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। अपनी सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां शामिल करें। परिवार के साथ कुछ वक्त बिताएं। तुला राशि के जातकों मेंटल हेल्थ का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा तनाव लेने से शारीरिक व मानसिक सेहत पर भी प्रभाव पड़ता है। पुराने निवेश से कुछ लोगों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है। वृश्चिक राशि के जातकों आज का दिन शुभ साबित हो सकता है। अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। करियर के मामले में आज आपको अपने दोस्तों का भरपूर सपोर्ट मिलेगा। आज आप कॉन्फिडेंट फील करेंगे। धनु राशि के जातकों आज का दिन काफी प्रोडक्टिव रहने वाला है। काम पर आपका पूरा फोकस रहेगा। अपनी बॉडी को हाइड्रेटेड रखें। डेडलाइन पर सभी जरूरी टास्क पूरे करने में सक्षम रहेंगे। मकर राशि के जातकों आज का आपका का दिन नॉर्मल रहने वाला है। सेहत को दुरुस्त रखने के लिए समय-समय पर ब्रेक लेते रहें। नया फिटनेस रूटीन शुरू करने या अपने लक्ष्यों पर फोकस करने का एक शानदार समय है। कुंभ राशि के जातकों आज के दिन बिजी शेड्यूल के चलते आप थोड़ा प्रेशर महसूस कर सकते हैं। सावधानी के साथ योजना बनाकर, आप आज के दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं। बाहर के खाने से परहेज करें। मीन राशि के जातकों अपनी कड़ी मेहनत या स्किल्स दिखाने का मौका मिल सकता है। रोमांटिक शाम बिताने का प्लान बनाएं या अपने साथी के साथ अपने दिल की बातें शेयर करें। पैसों के सभी मामलों पर ध्यान दें।

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