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फोटोनिक्स भी हैं फिजिक्स पसंद करने वालों के लिए अच्छा विकल्प

सभी करियर कोर्सेस में सफलता के अवसर उपलब्ध होते हैं। पर कुछ ऐसे कोर्सेस भी होते हैं जिनके बारे में अधिक जानकारी नही होती हैं। ऐसे ही कोर्सेस में से 1 कोर्स हैं फोटॉनिक्स। इस फील्ड में स्पेशलाइज्ड कैंडिडेट्स की कमी हैं। यह आज के समय की हाई टेक इंडस्ट्रीज में से एक हैं। यह उन युवाओ के लिए सफल करियर साबित हो सकती हैं जिनकी रूचि फिजिक्स विषय में हैं। फोटॉनिक्स:- फिजिक्स का ही एक पार्ट होता है फोटॉनिक्स जिसके तहत फोटॉन्स की स्टडी, प्राइमरी पार्टिकल ऑफ लाइट, इंफॉर्मेशन को कन्वे और ऑब्टेन करने के प्रॉसेस की स्टडी की जाती हैं। वैसे तो फोटोनिक्स साइंस की ही टेक्नीक है जिससे आप लाइट के एमिशन, डिटेक्श्न, ट्रांसमिशन और मॉड्यूलेशन की टेक्नीक्स को मास्टर करने का तरीका सीखते हैं। करियर:- इस फील्ड में ग्रेजुएशन करने के लिए आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमैटिक्स विषयो के साथ 12वीं 55 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी हैं। इस फील्ड में क्वॉलिफाइड प्रोफेशनल्स की मांग दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं जिसकी वजह से इस क्षेत्र में करियर के अपर अवसर उपलब्ध हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज:- ऐसे स्टूडेंट्स जो की फोटॉनिक्स, अप्लाइड फिजिक्स और मैथमैटिक्स या अप्लाइड फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन कर चुके हैं उनके लिए फोटॉनिक्स या ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी के लिए इलिजिबल होंगे। इसके अलावा फोटॉनिक्स में एमटेक कोर्स भी उपलब्ध होता हैं। जॉब:- इस फील्ड में करियर के कई अवसर हैं। इसमें आप एनर्जी जनरेशन, मैन्यूफैक्चरिंग, हेल्थ केयर और इंफॉर्मेशन प्रॉसेसिंग, टेलीकम्यूनिकेशन कंपनीज, रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनीज में भी जॉब पा सकते हैं। फोटॉनिक्स में करियर बनाने के लिए जरूरी स्किल्स -साइंस से रिलेटेड नई चीजे सर्च करने में इन्ट्रेस्ट -किसी भी डीटेल को स्टडी कर पाने की एबिलिटी -साइंस-सेंटर्ड क्वेश्चंस को सॉल्व करने में एबल -फिजिक्स और मैथमैटिक्स का अच्छा नॉलेज -ब्रॉड थिंकिंग  

जिले, प्रदेश आत्मनिर्भर बनेंगे तो देश भी आत्मनिर्भर बनेगा: मुख्यमंत्री योगी

बस्ती  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकास कर रहा है और 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बन जाएगा।कर्मा देवी शिक्षण संस्थान समूह के 15वां स्थापना दिवस के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए श्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकास की ओर निरंतर अग्रसर है भारत को विकसित देश बनाने के लिए हमें आत्मनिर्भर होना पड़ेगा और इसके लिए पहले हमें आधुनिक शिक्षा ग्रहण करनी होगी। जब हमारा गांव ,नगर, जिला,प्रदेश आत्म निर्भर बनेगा तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। भारत पूरी दुनिया में प्रत्येक क्षेत्र में अपना झंडा बुलंद कर रहा है। कोरोना काल में जिस तरीके से चीन ने भारत को दवा देने से मना कर दिया था और धोखा दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फार्मेसी उद्योग ने दवा बनाकर पूरे विश्व को एक नया संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 1947 से 2014 तक भारत आर्थिक व्यवस्था से ऊपर-नीचे उठकर 11 वे पायदान पर था लेकिन 2014 के बाद से भारत देश की पांचवी अर्थव्यवस्था बन गई। सकारात्मक सोच हमें बहुत आगे ले जा सकती है सकारात्मक सोच से ही भारत बहुत तेजी से विकासशील हो रहा है। नकारात्मक सोच हमें गड्ढे में गिरा सकती है इसलिए हमें हमेशा सकारात्मक सोच से आगे बढ़ना चाहिए। भारत की भाषाएं भारत की एकता का प्रतीक है हमें सभी भाषाओं का अध्ययन करना चाहिए। एक भारत नेक भारत के लिए हमें सदैव कार्य करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के लोग 50 साल इसलिए पीछे हो गए हैं क्योंकि पिछली सरकारों ने आधुनिकता, शिक्षा, संसाधन पर ध्यान नहीं दिया था पिछली सरकारों ने समस्या को समस्या समझा उसको निस्तारण करने से पीछे भागते रहे। इसी कारण से यहां के युवा पलायन करने लगे। अगर उस समय फार्मेसी कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,ला कॉलेज होते तो आज यहां के युवा प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अलग छाप छोड़ रहे होते। फार्मेसी क्षेत्र बहुत बड़ा क्षेत्र है। बुंदेलखंड में फार्मेसी को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग स्थापित किया गया है। पूरी दुनिया आपका इंतजार कर रही है आप एक सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हुए सही दिशा में सही काम करे। पूरी दुनिया में जो सबसे अच्छी 100 कंपनियां है उनमें से 20 कंपनियों के सीईओ भारत के हैं जो बेहद ही गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज जब मिलकर काम करेगी तभी हमारा गांव ,नगर, जिला , प्रदेश विकास की ओर आगे बढ़ेगा। बस्ती में एक कवि आए थे उन्होंने बहुत पहले कहा था बस्ती को ‘बस्ती को बस्ती कहूं , काके कहूं उजाड़’ लेकिन अब बस्ती एक विकसित नगर बन गया है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है। यहां की भूमि भगवान श्री राम के जन्म के लिए महाराज दशरथ जी ने पुत्रेष्टि यज्ञ के लिए चुना था। बस्ती की भूमि वंदनीय है। पूर्वी उत्तर प्रदेश संसाधनों के मामले में हमेशा उपेक्षित रहा है लेकिन प्रदेश सरकार ने बस्ती, सिद्धार्थनगर, देवरिया, महाराजगंज में मेडिकल कॉलेज स्थापित करके स्वास्थ्य क्षेत्र को एक नई दिशा प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन मुंडेरवा चीनी मिल में अन्नदाता किसान प्रदर्शन कर रहे थे उस दौरान गोली चलने से तीन किसान शहीद हो गए थे और पिछली सरकार ने मुंडेरवा चीनी मिल को बेच दिया था यहां के जनप्रतिनिधि ने जब मुझे अवगत कराया तो मेरे द्वारा पुनः चीनी मिल का शुभारंभ कराया गया। केंद्र तथा प्रदेश सरकार किसानों की आय दुगनी करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश से एक टीम मास्को गई थी जहां पर आम के बाजार में उन्होंने 8 सौ से लेकर 1 हजार रुपया किलो तक के आम बिकने का अध्ययन किया। बस्ती जनपद की भूमि आम्रपाली आम की जननी है अगर यहां बाजार में 60 -70 रुपए किलो आम बिक रहे है और हम मास्को में आम बेचने के लिए अगर 2 सौ रुपया खर्च करके बेचे तो हमारे अन्नदाता को कई गुना मुनाफा होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है गोबर के खाद से हम एक अच्छी , निरोगित फसल को पैदा कर सकते है। जो हम फसल में कीटनाशक दवाएं डाल रहे हैं उससे बचने के लिए देशी खाद का उपयोग बहुत ही जरूरी है। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें देश हित में कार्य करना चाहिए। मनुष्य को चाहे जितनी बड़ी यश प्राप्ति हो जाए अगर वह अपनी मां के प्रति, पिता के प्रति,मातृ भूमि के प्रति, गुरु के प्रति,देव के प्रति लगाव नहीं है तो जीवन सफल नहीं है। कर्मा देवी शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष ओम नारायण सिंह से प्रेरणा लेकर अपने पूर्वजों को जीवंत रखने के लिए उनके स्मृति में हमें बहुत कुछ करना चाहिए। श्री योगी ने स्थापना दिवस के अवसर पर शिक्षण संस्थान के पूरे परिवार को बधाई देते हुए यहां के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अलग से क्लास संचालित करने का अनुरोध किया है। इस मौके पर ओम नारायण सिंह, विधायक अजय सिंह, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, अध्यक्ष जिला पंचायत संजय चौधरी, पूर्व विधायक रवि सोनकर , अंकुर वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

वैक्यूम ट्यूब और प्रेशराइज्ड व्हीकल तकनीक से न्यूयॉर्क-लंदन का सफर मात्र 54 मिनट में होगा पूरा, 19 ट्रिलियन डॉलर का सपना होगा पूरा?

वॉशिंगटन अमेरिका और यूके के बीच हवाई यात्रा करने में 8 घंटे का समय लगता है। लेकिन कल्पना कीजिए यह यात्रा आप एक ही घंटे में पूरी कर सकें। एक प्रस्तावित ट्रांसअटलांटिक टनल न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ेगी और यह भविष्य की एक शानदार योजना हो सकती है। 4828 किमी लंबी ट्रांस-अटलांटिक ट्रेन सुरंग बनाने का कॉन्सेप्ट सामने आया है। संभव है कि किसी दिन टेक्नोलॉजी इतनी आगे पहुंच जाए कि यह कॉन्सेप्ट सच हो जाए। यह प्रस्ताव नया नहीं है, लेकिन इसके निर्माण की लंबाई और आवश्यक धनराशि के कारण इसे एक बार असंभव माना गया था। वैक्यूम ट्यूब टेक्नोलॉजी से लेकर प्रेशर व्हीकल का विकास हुआ है। ऐसे में एक बड़ी कीमत के साथ यह कॉन्सेप्ट सच साबित हो सकता है। हवाई यात्रा से दोनों शहरो के बीच 8 घंटे के सफर की तुलना में सिर्फ 54 मिनट का सफर पूरा करना बेहद आकर्षक लग सकता है। लेकिन इसकी लागत ही सुरंग बनने के रास्ते का रोड़ा है। बनाने में कितना आएगा खर्च इस सुरंग की अनुमानित लागत 19.8 ट्रिलियन डॉलर है। फ्रांस और इंग्लैंड को जोड़ने वाली चैनल टनल 37.8 किमी लंबी है, जो छह साल में बनकर तैयार हुई। लेकिन न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ने वाली इस सुरंग को बनाने में बहुत अधिक समय और धन लगेगा। यह पर्यावरण के अनुकूल भी हो सकता है और हवाई यात्रा से होने वाले भारी वायु प्रदूषण में कटौती कर सकता है। वहीं जिस तरह की ट्रेनों का कॉन्सेप्ट दिया गया है उसके रास्ते में हवा प्रतिरोध नहीं होगा, जिस कारण इसकी गति 4828 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। वैक्यूम के कारण तेज चलेगी ट्रेन? यह टेक्नोलॉजी सुपरलूप ट्रेनों की तरह है, जिसका स्विस इंजीनियरों ने परीक्षण किया और दावा किया कि यह यात्रा का भविष्य बदल सकता है। वर्षों से कई और लोगों ने हाइपरलूप ट्रेन विकसित करने की कोशिश की है, जिसमें नाकामयाबी मिली है। सबसे बड़ी बाधा वैक्यूम सिस्टम, कैप्सूल प्रोपल्शन सिस्टम, स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और आर्थिक व्यवहार्यता को बनाए रखना शामिल है।

टीएमसी संसद का बड़ा बयान, सिंधिया हैं लेडी किलर, संसद में हंगामा

TMC’s big statement in Parliament, Scindia is a lady killer, uproar in Parliament नई दिल्ली ! टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेडी किलर कहा, इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित कर दी गई। भाजपा ने बनर्जी को सस्पेंड करने की मांग की है। दरअसल बनर्जी सदन में डिजास्टर मैनेजमेंट पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और सिंधिया ने टोकना शुरू कर दिया। बात कोविड तक पहुंच गई। इसे लेकर दोनों सांसदों में तीखी बहस हुई। उस वक्त पीठासीन अधीकारी ए. राजा ने दोनों को टोकने की कोशिश की लेकिन कल्याण बनर्जी नहीं रूके।सिंधिया ने कहा कि किसके चेहरे पर खलबली है और किसके चेहरे पर मुस्कुराहट है आप खुद समझ सकते है। इस पर कल्याण बनर्जी बोले सिंधिया जी आप बहुत सुंदर दिखते है तो ये नहीं है कि आप सुंदर आदमी है, आप विलेन भी हो सकते है। सिंधिया ने कहा कि आप निजी टिप्पणी कर रहे है। मेरा नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया है। अगर मेरे परिवार के बारे में गलत बोलेंगे तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। सदन में इन दिनों सासंदों का जमावड़ा लगा हुआ है। सदन की कार्यवाही के दौरान कई प्रस्तावों और मुद्दों पर चर्चा हो रही है। बीते बुधवार को आपदा प्रबंधन ​अधिनियम में संशोधन को लेकर भी चर्चा की गई। इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ की भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भड़क गए और तृणमूल के एक सांसद को करारा जबाव दे डाला। दरसअल, सदन की कार्यवाही के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया को तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने लेडी किलर बता दिया। जिसके बाद सदन में हंगामा हो गया। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही स्थिगित करनी पड़ी और सांसद कल्याण बनर्जी को महाराज सिंधिया से माफी मांगनी पड़ी। सासंद कल्याण बनर्जी ने सदन में कहा की कोरोना महामारी के दौरान केन्द्र की मोदी सरकार का सहयोग नहीं मिला, तो महाराज सिंधिया ने इसका विरोध कर दिया। इसके बाद सदन में हंगामा हो गया जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। क्या बोले सांसद बनर्जी लोकसभा की कार्यवाही के दौरान महाराज सिंधिया ने कहा की किसके चेहरे पर मुस्कुराहट है और किसके चेहरे पर खलबली है देख लीजिए। सिंधिया के इतना कहते ही कल्याण बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि आप जीतने सुंदर दिखाई देते है, उनते सुंदर आदमी नही है। आप विलेन भी हो सकते है। कल्याण बनर्जी ने इतना कहने के बाद सिंधिया को लेडी किलर कह दिया। बनर्जी के इतना कहते ही महाराज भड़क गए और दोंनो के बीच जमकर बहस शुरू हो गई। क्या बोले महाराज? सांसद कल्याण बजर्नी के इस बयान को लेकर महाराज सिंधिया ने कहा है कि कल्याण बनर्जी ने अपने बयान को लेकर मुझ से माफी मांगी। कोई भी इंसान अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं करेगा। सिंधिया ने आगे कहा की कोई भी हो नीतियों, विचारों पर हमला करे, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर नहीं। अगर कोई करेगा तो उसे जवाब भी मिलेगा। भले ही कल्याण बनर्जी ने माफी मांगी, लेकिन देश की महिलाएंओं पर यह व्यक्तिगत हमला है, जिसके कारण में उनकी माफी स्वीकार नहीं करूंगा। वही महिला सासंदों ने कल्याण बनर्जी के निलंबन की मांग की है।

इंदौर-खंडवा हाईवे 70% बन चुका, 30 फीसद निर्माण बाकी, एनएचएआइ डेडलाइन बढ़ाने की तैयारी की तैयारी में

 इंदौर  इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण पूरी होने की मियाद जनवरी में खत्म होगी, लेकिन अभी तक सुरंग और सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है। लगभग तीस फीसद काम होना बाकी है। अब इसके लिए प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार होने लगा है। निर्माण एजेंसी की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फाइल को मुख्यालय भेजा है। अधिकारियों के मुताबिक तीन से छह महीने की अवधि बढ़ाई जाएगी। वैसे काम तेज करने के लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश जारी कर दिए है। जनवरी 2025 तक इसे पूरा किया जाना था 216 किमी लंबे राजमार्ग का काम अगस्त 2022 में शुरू किया गया। प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। जमीन अधिग्रहण, सुरंग व अप्रोच रोड निर्माण के दौरान ग्रामीणों से विवाद, दो से तीन बार प्रोजेक्ट में बदलाव ने निर्माण कार्यों गति धीमी कर दी। इधर भवरकुआं से लेकर तेजाजी के बीच सड़क का हिस्सा बन चुका है। इन दिनों तेजाजी से सिमरोल के बीच सड़क, अंडरपास, फ्लाइओवर का काम किया जा रहा है। भेरूघाट के पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बाकी उमरीखेडा वनक्षेत्र से 0.80 हेक्टेयर जमीन की प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी हुई है। इतने हिस्से में सड़क अधूरी हो, जो नवंबर से बनाना शुरू की है। इसके अलावा भेरूघाट के पास 800 मीटर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होना बाकी है। जमीन के बदले किसानों को मुआवजा दिया जाना है। यह काम जनवरी तक होगा। सिमरोल से चोरल के बीच भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है। जबकि चोरल और बड़वाह के बीच भी कुछ हिस्सों में काम रुका है। फिलहाल मेघा इंजीनियरिंग की तरफ से मियाद बढ़ाने पर जोर दिया है। सुरंग फरवरी तक होगी पूरी राजमार्ग पर तीन सुरंग बनाई जाएगी, जो तलाई-भेरुघाट और चोरल में 1300 मीटर की रखी है। सुरंग की अप्रोच फरवरी तक पूरी होगी। साथ ही सुरंग के भीतर भी काफी काम बचा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रोच रोड के लिए ब्लास्टिंग करने पर विवाद हुआ था। उसके बाद महीनेभर सुरंग के आसपास का काम बंद था। इसका असर प्रोजेक्ट की अवधि पर पड़ा है। वैसे अप्रोच के लिए माउंट ड्रील मशीन बुलवाई है। इससे खोदाई करने पर एजेंसी को तीन से चार महीने का अतिरिक्त समय लग रहा है। मार्च तक देंगे मोहलत     इंदौर-खंडवा राजमार्ग की डेडलाइन नजदीक आ चुकी है। निश्चित ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अवधि बढ़ाना पड़ेगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। –     सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

इन पांच प्राणियों को खिलाएं खाना, रहेगी स्थिर लक्ष्मी

हमारें जीवन में कई उतार चढ़ाव आते है जिससे की लोग बहुत दुखी होते है और कुछ लोग उस समस्या का निजात निकाल कर उससे निकल जाते है। इस दुनिया में बहुत कम लोग है जो अपने जीवन से खुशी है। किसी न किसी को की न कोई समस्या है। अमीर के पास धन होते हुए भी और धन की ललसा और एक गरीब के पास धन न होते हुए सिर्फ पेट की भुख मिटाने तकी ललसा। हम माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए क्या नही करते है। तरह-तरह के उपाय अपनाते है जिससे कि माता लक्ष्मी हमारे घर से कभी न जाएं। हिंदू धर्म के शास्त्रों में कई ऐसे उपाय बताए गें है जिनका आमरण करे तो हम सफलता ही हर ऊचांई को छूते चले जाएगे। शास्त्रों में दी गई बातें हमें कभी निराश नही कर सकती है। इसी प्रकार शास्त्रों में भोजन के बारें में की बातें बताई गई है। इसके अनुसार जब भोजन करते है तो उससे पहले हमें इन लोगों के लिए भोजन जरूर निकालना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से माता लक्ष्मी हमारें घर से कभी नही जाएगा। एक उपाय तो ये है कि हम अपनी मेहनत से और स्वयं की समझदारी से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें और दूसरा उपाय यह है कि हम धार्मिक कर्म करें। शास्त्रों में पांच लोग ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें खाना खिलाने से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जानिए वह कौन पांच लोग है। जिससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी। गाय को खिलाएं रोटी हिंदू धर्म में गाय को माता समान माना जाता है। यह पुज्नीय भी है। हमारें शास्त्रों में कहा गया है कि जब भी हम खाना बनाएं उसके बाद सबसे पहले एक रोटी गाय को खिलाएं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गाय को रोटी या हरी घास रोज खिलाता है तो उसे जल्द ही कोई अच्छा फल मिलता है साथ ही कई गुना पुण्य भी मिलता है। साथ ही कुंडली में लगे कई दोष ही शांत हो जाते है। और घर में माता लक्ष्मी का वास हो जाता है। इसलिए एक रोटी जरुर खिलाना चाहिए। कुत्तें को खिलाएं रोटी अगर आपको अपने शत्रु का भय सता रहा हो जिसके कारण आप उससे डर कर रह रहे है। तो रोज एक रोटी कुत्ते को खिलाएं। इससे आपका शत्रु का भय खत्म हो जाएगा। और आप निडर हो कर रह सकेगे। साथ ही अगरा पकी कुंडली में शनि का दोष है तो शिवार के दिन काले रंग के कुत्तें को रोटी खिलाएं। इससे आपको जल्द फायदा मिलेगा। और शनि दोष शांत होगा। माता लक्ष्मी आपके घर हमेशा के लिए आ जाएगी। मछली को खिलाएं आटे की गोली शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि अगर आपकी पुरानी संपत्ति हाथ से निकल गई हो या फिर कोई मुल्यवान चीज खो गई हो तो रोज तालाब या नदी में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। ऐसा करने से आपकी पुरानी संपत्ति वापस मिल जाएगी। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। जिसके कारण आपके घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। साथ ही आपको अक्षय पुण्य की प्राप्त होगा। चीटियों को डालें आटा अगर आप बहुत ज्यादा परेशान है। आपको हर काम में असफलता मिल रही है जिसके कारण आप कर्ज में डूबते चले जा रहे है। जिसके कारण आप तनाव में चले जाते है। शास्त्रों में माना जाता है कि अगर आप अपने घर में निकलने वाली चीटियों को आटा या चीनी डालेगे। जो इससे आपको अधिक फायदा होगा। इससे हमें सभी कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। पक्षियों को खिलाएं अनाज शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि अगर आपके घर में आर्थिक लाभ न हो रहा हो। हर काम में असफलता प्राप्त हो रही हो तो इस समस्या से निजात आपको पक्षी दिला सकते है। इसके लिए रोज पक्षियों को दाना डालें जिससे महालक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। और काम में आपको सफलता प्राप्त होगी।  

पीएम जन-मन में पीवीटीजी बहुल 360 गांवों की 432 बसाहटों में नल से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की तैयारी – मंत्री शाह

भोपाल प्राणवायु के बाद स्वच्छ जल सबकी बुनियादी जरूरत है। राज्य सरकार ‘हर घर नल से जल’ योजना में सबको स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिये प्रयासरत है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की बसाहटों में भी विशेष प्राथमिकता से ‘नल से स्वच्छ पेयजल’ आपूर्ति की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रदेश में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजातियों (पीवीटीजी) की बहुलता वाले 11 जिलों के 360 गांवों की 432 प्रबल पीवीटीजी बसाहटों में यह काम तेजी से जारी है। राज्य सरकार इन बसाहटों में रहने वाले 5 हजार 783 पीवीटीजी परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन देकर सामुदायिक रूप से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था कर रही है। इन सभी बसाहटों में फिल्हाल तेजी से काम जारी है, जिसे 31 दिसम्बर 2024 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। इस पूरे काम में 60 करोड़ 19 लाख 95 हजार रूपये व्यय किये जा रहे हैं। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं को ‘नल से जल’ उपलब्ध कराने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। सबको स्वच्छ जल प्रदान करने के लिये लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग योजनाबद्ध रूप से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन योजना में उमरिया जिले के सर्वाधिक 91 गांवों की 102 पीवीटीजी बसाहटों, मंडला जिले के 61 गांवों की 61 बसाहटों, अनूपपुर जिले के 55 गांवों की 57 बसाहटों, छिंदवाड़ा जिले के 41 गांवों की 73 बसाहटों, शहडोल जिले के 38 गांवों की 39 बसाहटों, विदिशा जिले के 26 गांवों की 50 बसाहटों, डिंडोरी जिले के 22 गांवों की 24 बसाहटों, सीधी जिले के 13 गांवों की 13 बसाहटों, बालाघाट जिले के 8 गांवों की 8 बसाहटों, छिंदवाड़ा जिले के 4 गांवों की 4 बसाहटों तथा नरसिंहपुर जिले के 1 गांव की 1 पीवीटीजी बसाहट में हर घर नल से स्वच्छ जल आपूर्ति के लिये तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन में पीएचई ने 3 हजार 928 पीवीटीजी बहुल गांवों की 5 हजार 161 बसाहटों में हर घर नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त पीएचई द्वारा अन्य योजना से 3 लाख 15 हजार 82 परिवारों को नल से स्वच्छ जल प्रदान कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इनमें से एक लाख 56 हजार 600 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दे दिये गये हैं। शेष 1 लाख 58 हजार 391 परिवारों को नल से जल प्रदाय के लिये मैदानी अमला मिशन मोड पर काम कर रहा है।  

भुराडाबरा, पालेड़ी और भंवरपिपलिया में आठ किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए, किसानों ने एक नई दिशा में कदम रखा

भोपाल मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में जब पारम्परिक खेती से आगे बढ़ने की बात आई, तो जनजातीय किसानों ने एक नई दिशा में कदम रखा। जिले के प्रगतिशील किसान रमेश परमार और साथी अन्य किसानों ने अपनी हिम्मत, मेहनत और नवाचार से असंभव को संभव बना दिया है। पारम्परिक खेती से उद्यानिकी की ओर जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्र में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग शुरू हुआ। परम्परागत रूप से ज्वार, मक्का और अन्य सामान्य फसलों के लिए जाने जाने वाले इस इलाके में अब किसानों ने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया है। जिले के रामा ब्लॉक के तीन गांवों भुराडाबरा, पालेड़ी और भंवरपिपलिया में आठ किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए। झाबुआ में, स्ट्रॉबेरी सामान्यतः ठंडे इलाकों की फसल है, को यहां अनुकूलित परिस्थितियों में उगाने का प्रयोग किया गया। महाराष्ट्र के सतारा जिले से 5000 पौधे मंगवाकर हर किसान के खेत में 500 से 1000 पौधे लगाए गए। हर पौधे की कीमत मात्र 7 रुपये थी, लेकिन इसे उगाने की प्रक्रिया ने किसानों को बागवानी की उन्नत और आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया। रोटला गांव के रमेश परमार ने अपने खेत में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर 1000 स्ट्रॉबेरी पौधे लगाए। वे बताते हैं कि “पहले बाजार में इन फलों को देखा था, लेकिन खरीदने की हिम्मत कभी नहीं हुई। अब जब खुद के खेत में उगाए, तो इसका स्वाद भी चखा और इसकी उच्च कीमत का महत्व भी समझा।” रमेश ने 8 अक्टूबर 24 को पौधों की बुवाई की थी और केवल तीन महीनों में फलों की पैदावार शुरू हो गई। वर्तमान में बाजार में स्ट्रॉबेरी की कीमत 300 रुपये प्रति किलो है। फिलहाल उन्होंने अपनी पहली फसल घर के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ बांटी है। समूह की सफलता रमेश अकेले नहीं हैं। उनके साथ अन्य किसान भंवरपिपलिया के लक्ष्मण, भुराडाबरा के दीवान, और पालेड़ी के हरिराम ने भी अपनी जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगाई है। सभी किसानों के पौधों में फल लगने शुरू हो गए हैं। ये किसान अपनी उपज को लोकल हाट-बाजार और हाईवे के किनारे बेचने की योजना बना रहे हैं। नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक झाबुआ जिले की यह पहल न केवल कृषि नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की ओर एक ठोस कदम भी है। यह झाबुआ जिले के जनजातीय किसानों ने साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, तकनीक और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में अपार संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। आर्थिक और सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ रहे जनजातीय किसान स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल इन किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। यह पहल झाबुआ जिले के लिए उद्यानिकी खेती का एक नया अध्याय खोलेगी। झाबुआ के जनजातीय किसान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े बदलाव की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।  

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। साय ने उनकी रचनाओं के आम जीवन पर प्रभाव को याद करते हुए कहा कि मैथिलीशरण गुप्त जी की राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत खड़ी बोली की रचनाओं ने भारतीय समाज के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी रचनाओं के प्रभाव को देखते हुए  उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि प्रदान की गई थी। उन्होंने खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नये कवियों को काव्यलेखन के लिए प्रेरित किया। गुप्त जी को उनके कालजयी साहित्य के लिए पद्मभूषण सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुप्त जी की रचनाएं भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं जो नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेगी।

मध्य प्रदेश वालों कड़ाके की ठंड के लिए हो जाओ तैयार, अब शीत लहर से होगा सामना; येलो अलर्ट जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों का मौसम देखें तो प्रदेश के सभी संभागों के जिले का मौसम शुष्क रहा। रायसेन, राजगढ़, धार, जबलपुर, सिवनी, सागर, पचमढ़ी (नर्मदापुरम), नीमच, में शीत लहर का प्रभाव रहा। वहीं शाजापुर में तीव्र शीत लहर का प्रभाव रहा। भोपाल, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, बैतूल, रायसेन और नीमच जिलों का दिन ठंडा रहा। मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमोत्तर भारत के ऊपर मध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर 240 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सब- ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ पवनों के मध्य एक ट्रफ के रूप में मध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई 70 डिग्री पूर्वी देशांतर व 33 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर में अवस्थित है। प्रदेश के जिलों का तापमान प्रदेश में नर्मदापुरम, जबलपुर, शहडोल संभागों के जिलों में विशेष रूप से गिरा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रीवा, सागर संभागों के जिलों का तापमान ज्यादा गिरा। शेष सभी संभागों के जिलों के तापमानों विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। पचमढ़ी का तापमान 3.5, रायसेन 3.6, शाजापुर 4.1, राजगढ़ 5.0, शिवपुरी 5.3, सीधी 12.6, खरगोन, देवास 12.0, सिंगरौली, छिंदवाड़ा 10.9, उज्जैन, सिवनी 10.0 रहा। इन जिलों में शीतलहर का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर जिलों में शीत लहर और ठंड दिन का अलर्ट जारी किया है। वहीं विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, धार, आगर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, दमोह, और सागर जिले में शीत लहर का अलर्ट जारी किया है। बृहस्पतिवार को भी दिल्ली एनसीआर में रहेगी शील लहर जैसी स्थिति मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर में शीत लहर की स्थिति रह सकती है। इसलिए मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार सुबह दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस हुआ दर्ज, जो सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम है। कैसे आंकी जाती है शीत लहर? आया नगर में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस कम है। इस वजह से आया नगर में ठंड ज्यादा रही। दिल्ली में अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि न्यूनतम तापमान सामान्य से साढ़े चार डिग्री सेल्सियस कम हो तो शीत लहर माना जाता है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम रहा है। इस वजह से दिल्ली के कई इलाकों शीत लहर रही। दूसरी ओर दिल्ली के एयर इंडेक्स में पिछले दिन के मुकाबले आंशिक सुधार हुआ है। फिर भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रही। दिल्ली का AQI 207 दर्ज केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण (सीपीसीबी) के अनुसार बुधवार सुबह दिल्ली का एयर इंडेक्स 207 दर्ज किया गया। स्विस कंपनी के एप आइक्यूएयर ने सुबह में दिल्ली का एयर इंडेक्स 203 बताया। हवा चलने और आसमान साफ होने के कारण दोपहर में एयर इंडेक्स में सुधार होने की संभावना है।

मध्य प्रदेश भाजपा ने जारी की अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी की सूची ,देखे लिस्ट

Madhya Pradesh BJP released the list of president and other officials, see the list भोपाल ! भाजपा ने 19 मंडल अध्यक्षों की घोषणा की, जिला प्रतिनिधियों के नामों पर भी मुहर, लग गई है देखें सूची कई दिनों की मंत्रणा के बाद मध्यप्रदेश प्रदेश के देवास जिले में भाजपा मंडल अध्यक्षों का चुनाव संपन्न हो गया है। इसकी प्रक्रिया अलग-अलग मापदंडों के आधार पर पूरी की गई। जिसके बाद देवास जिले के 5 विधानसभा क्षेत्रों के 19 मंडलों की सूची जारी कर दी गई है। भाजपा के संगठनात्मक चुनाव में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद चुनाव प्रक्रिया रोचक होगी। जल्द ही एमपी के अन्य जिलों में भी मंडल अध्यक्ष सहित जिला अध्यछ देखने को मिलेंगे । देखे लिस्ट इन्हें मिली नई जिम्मेदारी

CM यादव 14 दिसंबर को करेंगे सरसी आइलैंड रिसोर्ट का उद्घाटन

शहडोल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 दिसंबर को पर्यटन विभाग द्वारा नवनिर्मित सरसी आइलैंड रिसॉर्ट का उद्घाटन करेंगे। शहडोल जिले में बाणसागर डैम के बैकवाटर पर निर्मित यह रिसॉर्ट प्रमुख पर्यटन स्थल बांधवगढ़ नेशनल पार्क और मैहर के समीप स्थित है। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह एक अनूठा अनुभव होगा। इको-सर्किट परियोजना के तहत विकसित यह स्थल क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पर्यटकों के ठहरने के लिए 10 इको हट्स तैयार प्रमुख सचिव, पर्यटन और संस्कृति विभाग एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि, सरसी आइलैंड रिसॉर्ट में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। यहां तीन बोट क्लब बनाए गए हैं, जो वाटर स्पोर्ट्स के रोमांचक अनुभव का अवसर देंगे। पर्यटकों के ठहरने के लिए 10 इको हट्स तैयार किए गए हैं, जहां से प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है। खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक आकर्षक रेस्टोरेंट की व्यवस्था की गई है। 14 दिसंबर को होने वाले इस भव्य उद्घाटन के साथ शहडोल और इसके आसपास का क्षेत्र देशभर के पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन जाएगा।  

मध्य प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़ी, प्रशासनिक इकाई सुधार आयोग का भी गठन किया गया, पहली बार बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हुई

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुशासन का मंत्र है- आम आदमी के काम सरलता से हो। पात्रों को योजनाओं का लाभ मिले। मोहन यादव सरकार ने कई नवाचार किए। यही वजह है कि वर्ष में सुशासन के प्रयासों से जनविश्वास जागा है। मुख्यमंत्री ने स्वयं संभागीय मुख्यालयों पर जाकर विकास योजनाओं की समीक्षा की। पहली बार अपर मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को संभागीय प्रभारी बनाकर भेजा तो वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई कर यह संकेत भी दिए कि सुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों को मैदान में उतारा तो नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित राजस्व से जुड़े मामलों का निराकरण कराने महाअभियान चलाया। 80 लाख मामलों का हुआ निराकरण ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व से जुड़े प्रकरण बड़ी संख्या में सामने आते हैं। लाखों प्रकरण लंबित थे। इसके निराकरण के लिए पहला महाअभियान 15 जनवरी से 15 मार्च तक चलाया, जिसमें 30 लाख राजस्व मामलों का निपटारा हुआ। दूसरा महाअभियान 18 जुलाई से 31 अगस्त तक चला, जिसमें 50 लाख राजस्व मामलों का निपटारा हुआ। इनमें 18 लाख 95 हजार 239 नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया। सीमाओं का होगा पुनर्निधारण प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है। नए जिलों की मांग भी है। तहसील के पुनर्गठन के प्रस्ताव भी मिल रहे हैं। कई कस्बे अव्यावहारिक रूप से उन जिलों में शामिल हैं, जिनका मुख्यालय दूर है। इससे जहां आमजन को परेशानी होती है, वहीं, प्रशासनिक नियंत्रण में परेशानी आती है। प्रशासनिक इकाई सुधार आयोग का भी गठन किया गया। अधिकारियों को दिया कड़ा संदेश सामान्यत: जब भी कोई दुर्घटना होती है तो छोटे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर कार्रवाई कर दी जाती है। प्रदेश की मोहन सरकार में पहली बार छोटे नहीं बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी। मुख्यमंत्री ने गुना बस हादसे में 13 लोगों के निधन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए परिवहन आयुक्त, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाया। इसी तरह ट्रांसपोर्टर की देशव्यापी हड़ताल के दौरान शाजापुर में ट्रक ड्रायवर को औकात दिखाने की बात कहने वाले कलेक्टर को भी हटाया गया। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाना ना पड़े     आमजन को सुविधा देने के लिए जो नवाचार किए गए हैं, वे तो अच्छे हैं पर प्रक्रियाओं का सरलीकरण आवश्यक है। जब तक यह नहीं होगा, आमजन परेशान होते रहेंगे। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को अपना काम कराने के लिए ऑफिसों के चक्कर ही न लगाने पड़ें। संभागों में कमिश्नर तैनात हैं तो उन्हें सशक्त बनाना चाहिए ताकि छोटे-मोटे कामों के लिए मंत्रालय तक प्रकरण ही न पहुंचें। अधिकारों का विकेंद्रीकरण हो और अधिकारी संवेदनशील रहें। – शरद चंद्र बेहार, पूर्व मुख्य सचिव  

राज्य सरकार प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत सुधारने बड़ा कदम उठाने जा रही, देंगी अंशपूंजी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत बिजली कंपनियों को राज्यांश 40 प्रतिशत राशि लगभग 6 हजार करोड़ रुपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में देने की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जाएगी। योजनांतर्गत बिजली कंपनियों को अद्यतन ऋण के रूप में दिए गए राज्यांश को भी अंश पूंजी में परिवर्तित किया जाएगा। योजनांतर्गत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि भी राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे प्रदेश में स्थापित होने वाले स्मार्ट मीटर के कार्य में तेजी आएगी। यह राशि 6 हजार करोड़ से अधिक होती है। योजना में 60% राशि केंद्र सरकार देती है। इस फैसले से बिजली कंपनियों को कर्ज और उसके ब्याज का बोझ कम होगा। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार शाम को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।  धान की मिलिंग करने वाले धान मिल मालिकों को राहत देते हुए वर्ष 2023-24 खरीफ में की बकाया प्रोत्साहन राशि और अपग्रेडेशन राशि के भुगतान को मंजूरी दे दी। प्रोत्साहन राशि 300 करोड़ और अपग्रेडेशन राशि 238 करोड़ है। यह भुगतान पिछले एक साल से अटका था। फायदा 1050 धान मिलर्स को मिलेगा। फैसले के मुताबिक, धान मिलर्स को मिलिंग राशि 10 रु./प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रु. की दर से दी जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद डिपटी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि सेंट्रल पूल में एफसीआई को 20 फीसदी धान की आपूर्ति पर 40 रुपए और सेंट्रल पूल में 40 फीसदी धान देने पर 120 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अपग्रेडेशन राशि राज्य सरकार मिलर्स को देगी। सरकार के इस फैसले से किसानों से खरीदी जा रही धान की मिलिंग में तेजी आएगी साथ ही पीडीसी के तहत गरीबों को बांटे जाने वाले चावल की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। गौरतलब है कि पीडीसी के तहत मप्र अपनी जरूरत का चावल राज्य पूल में रख लेगा, इसके अतिरिक्त जितना अतिरिक्त चावल होगा, उसे केंद्र सरकार के फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) को भेज देगा। पीएम ऊषा और रूसा के लिए दी सैद्धांतिक मंजूरी केबिनेट ने केन्द्र सरकार की दो योजनाओं पीएम ऊषा (उच्चतर शिक्षा अभियान) और रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के प्रदेश में स‌ंचालन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को अपग्रेडेशन, रिसर्च, जेंडर इक्वेलिटी और सभी को समान अवसर देने वाले काम करने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय मदद मिल सकेगी। जन विश्वास विधेयक और सप्लीमेंट्री बजट प्रस्ताव को भी मंजूरी केबिनेट ने मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र में पेश किए जाने वाले राज्य सरकार के सप्लीमेंट्री (अनुपूरक) बजट को भी मंजूरी दे दी है। यह लगभग 15 हजार करोड़ के आसपास हो सकता है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग के तहत जन विश्वास विधेयक, नगर पालिक व नगर पालिका संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दे दी गई। अब नगर निगमों में अध्यक्ष और नगर पालिका व नगर परिषदों में अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की जाएगी। इसके साथ ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए तीन चौथाई बहुमत की जरूरत होगी।  

देश में तेजी से बंद कर रहे हैं ATM? अब UPI बन गई ऑलटाइम टेलर मशीन

मुंबई देश में पिछलेबैंकरों ने कहा कि पेमेंट टूल के रूप में यूपीआई और कार्ड के उभरने से नकदी का यूज कम हो गया है। इस कारण एटीएम अव्यावहारिक हो गए हैं। पांच साल में पहली बार एटीएम की संख्या में गिरावट आई है। बैंकों में नकदी निकालने के लिए लगने वाली लंबी कतार से मुक्ति दिलाने वाली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) अब कम होती जा रही है। 2020 में बैंकों के विलय होने से जहां एटीएम की संख्या घट गई। वहीं, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद लोगों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) को हाथों-हाथ लिया।  इसकी बढ़ती लोकप्रियता से भी एटीएम तक लोगों की पहुंच घटने लगी। आलम यह है कि महज 9 साल में प्रदेश में 274 एटीएम कम हो गए। सब्जी, फल, किराना, बिजली व गैस बिल समेत बड़े-छोटे शोरूम में भी यूपीआइ से पेमेंट करने की सुविधा मिली तो लोग ने एटीएम से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे एटीएम पर ट्रांजेक्शन घटे तो बैंकों का मुनाफा कम हुआ और मशीन के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया। बैंकों ने बंद करना शुरू किए ATM नतीजा, बैंकों ने एटीएम बंद करना शुरू कर दिया। यूपीआइ के बढ़ते चलन से जहां नकदी की सुरक्षा संबंधी चिंता बैंकों की कम हो गई, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नकदी लेन-देन के दौरान करेंसी के खराब होने पर दोबारा छापने का खर्च भी कम हो गया। हालांकि कोरोनाकाल में एटीएम की संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन 2019 से इसके कम होने का दौर जारी है। बैंकों का कहना है, एटीएम बंद नहीं कर रहे, नई तकनीक आने पर इसकी शिफ्टिंग कर रहे हैं। हर एटीएम पर इतना खर्च एक एटीएम लगाने में करीब 6-9 लाख रुपए का खर्च आता है। एक मशीन की कीमत 4-8 लाख रुपए और कुछ आंतरिक सज्जा पर खर्च होते हैं। साथ ही हर एटीएम के मेंटेनेंस पर हर माह बैंक को 50 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसमें साफ-सफाई, बिजली, एसी और सुरक्षा गार्ड का खर्च शामिल है। बताते हैं, एक लेनदेन पर करीब 18 से 20 रुपए खर्च होता है। इसलिए घटे एटीएम बैंकों के विलय होने के कारण उनके एटीएम एक हो गए। कम्प्यूटरीकृत सिस्टम में किसी भी बैंक के एटीएम से रुपए निकालने की सुविधा। जिन मशीनों से ट्रांजेक्शन घटे, उन्हें बंद या शिफ्ट कर दिया। यूपीआइ के इस्तेमाल से लोगों की पहुंच एटीएम तक कम हो गई। देश में इस तरह बढ़ रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन 2022-23 में 83,453.79 मिलियन ट्रांजेक्शन 2023-24 में 130831.45 मिलियन ट्रांजेक्शन 2024-25 में 117507.31 मिलियन ट्रांजेक्शन (नवंबर तक) यूपीआई का जलवा चौधरी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में भारत ने फाइनेंशियल इनक्लूजन और डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। जन धन योजना, यूपीआई के प्रसार और मोबाइल इंटरनेट को व्यापक रूप से अपनाने से ऐसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 535 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 13,113 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 (सितंबर तक) में 122 लाख करोड़ रुपये के 8,566 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड किए गए हैं। इतिहास के झरोखे से पहले रुपए निकालने वालों की बैंकों में लंबी कतार लगती थी। इससे छुटकारा दिलाने के लिए एचएसबीसी बैंक ने 1987 में पहली बार मुंबई में एटीएम लगाई तो बैंकिंग में बड़ी क्रांति आई। महज 10 साल में देश में 1500 एटीएम हो गए। अभी देश में 2.50 लाख एटीएम हैं। राजधानी का दायरा बढ़ा, बढ़े एटीएम मध्यप्रदेश में इकलौते भोपाल जिले में एटीएम की संख्या बढ़ी है। राजधानी का दायरा बढऩे से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े और एटीएम की संख्या बढ़ गई। अभी भोपाल जिले में 1079 एटीएम हैं। इनमें 42 ग्रामीण, 15 कस्बों और 1022 एटीएम शहरों में हैं। प्रदेश में एटीएम साल – संख्या 2016 – 9266 2017 – 9263 2018- 9579 2019 – 9345 2020 – 9201 2021 – 9322 2022 – 8812 2023 – 9328 2024 – 8992 (सितंबर तक)

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