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उप मुख्यमंत्री ने मल्हारगढ़ में रोजगार, स्वरोजगार एवं अप्रेन्टिसशिप मेला का किया शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में रोजगार, स्वरोजगार एवं अप्रेन्टिसशिप मेला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री ने सरस्वती पूजन एवं कन्या पूजन कर किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने रोजगार मेले में 15 संस्थाओं एवं आठ विभागों के स्टॉलों का अवलोकन किया। युवाओं को निराश और हताश कभी नहीं होना चाहिए। कभी हार नहीं माननी चाहिए, जो मेहनत करता है उसको सफलता जरूर मिलती है। पढ़ाई को पूरी गंभीरता के साथ लेना चाहिए। रोजगार मेले में उप मुख्यमंत्री ने युवाओं को जॉब ऑफर लेटर प्रदान किए। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र वितरित किए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत 25 स्व सहायता समूह की महिलाओं को 50 लाख का ऋण वितरण चेक प्रदान किया। विभिन्न विभागों के हितग्राहियों को योजनाओं का हित वितरण प्रदान किया। सामाजिक न्याय विभाग अंतर्गत दिव्यांगजनों को स्व चालित ट्राई साईकिल एवं हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल प्रदान की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार मेलों का लाभ उठाना चाहिए। रोजगार मेलों में जिन विभागों को इंस्टॉल लगे हैं, सरकार द्वारा कौन-कौन सी योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनसे युवाओं को क्या लाभ प्राप्त हो सकता है, उसके बारे में विस्तार से जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजगार मेले के साथ-साथ युवाओं को विभागों में जाकर भी अधिकारियों से योजनाओं के बारे में जानकारी लेना चाहिए। सभी युवा ध्यान से और मन लगाकर पढ़ाई करें। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत विकसित भारत होगा। विकसित देशों में भारत नंबर वन होगा, उसके लिए सरकार लगातार संकल्पित है और यह कार्य हम सबको मिलकर करना होगा। आज भारत विश्व की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। सरकार ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आयुष्मान कार्ड बनाया है, जिसमें प्रदेश के नागरिकों के इलाज के लिए प्रबंध किया है। अब तो 70 से अधिक उम्र वाले सभी व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड भी बन रहे हैं।

पीवीटीजी समुदाय के सभी बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार देने के लिये 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा

सबका पोषण-सबका कल्याण भोपाल केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) में आने वाले बैगा, भारिया एवं सहरिया समुदाय के सभी बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार देने के लिये 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी बहुल 20 जिलों में बनाये जा रहे इन 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों में से 108 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण पूर्णता की ओर हैं, शेष 109 आंगनवाड़ी भवन 31 मार्च 2025 तक पूर्ण कर लिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन के तहत ही पीवीटीजी परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में पोषण आहार अनुदान के रूप में राज्य सरकार द्वारा पहले 1000 रूपये प्रतिमाह दिये जाते थे। गत वर्ष अक्टूबर से यह राशि बढ़ाकर 1500 रूपये प्रतिमाह कर दी गई है। जारी वित्त वर्ष में सितम्बर 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 पीवीटीजी महिला मुखिया के बैंक खाते में 198 करोड़ रूपये से अधिक की आहार अनुदान राशि का वितरण किया जा चुका है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि इस महाअभियान में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 20 जिलों में 12 लाख रूपये प्रति आंगनवाड़ी केन्द्र भवन की दर से कुल 26 करोड़ 4 लाख रूपये लागत से 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा प्रदेश के शिवपुरी जिले में 39, श्योपुर में 37, शहडोल में 29, उमरिया में 23, गुना में 14, डिंडौरी में 12, अशोकनगर में 11, अनूपपुर में 7, मंडला एवं दतिया में 6-6, विदिशा, बालाघाट, ग्वालियर एवं सीधी में 5-5, जबलपुर एवं छिंदवाड़ा में 4-4, मुरैना में 2 तथा कटनी, भिंड एवं रायसेन जिले में 1-1 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इन आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिये जरूरी राशि सीधे संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आंवटित की गई है। उल्लेखनीय हैकि केन्द्र एवं राज्य सरकार जनजातीय वर्ग के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार एवं पोषण संवर्धन के प्रति बेहद गंभीर होकर प्रयासरत है। प्रदेश में नये आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन, पक्के आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण के साथ-साथ पोषण आहार के लिये विशेष अनुदान देकर सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाये हैं। राज्य सरकार द्वारा पीएम जन-मन के तहत केन्द्र सरकार को 529 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन तथा 1107 पुराने आंगनवाड़ी केन्द्रों के नवीन भवन के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 में 194 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन तथा 217 आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवन निर्माण की मंजूरी दी गई थी। नये 194 आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन जनवरी 2024 से प्रारंभ कर दिया गया है। 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से 108 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण 31 मार्च 2025 तक पूर्ण हो जायेगा। राज्य सरकार के पूर्व प्रस्ताव पर ही केन्द्र सरकार द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में 355 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन तथा 355 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों के निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है। जल्द ही इनपर भी काम प्रारंभ हो जायेगा।  

कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशानाः बोले- MP में निवेश तो दूर की बात, केंद्रीय योजनाओं की राशि भी आधी ही मिली

Kamal Nath targeted the government: Leave alone investment in MP, only half the amount of central schemes was received. भोपाल। कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आए दिन प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश के वादों की चर्चा करते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि निजी क्षेत्र से आने वाला यह निवेश तो दूर की बात है, केंद्र सरकार से प्रदेश में चल रही विभिन्न योजनाओं के लिए आने वाले पैसे को ही अब तक राज्य सरकार प्राप्त नहीं कर सकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश को चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से 37,652 करोड़ रुपया मिलने थे लेकिन अब तक सिर्फ़ 16,194 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- जिन महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिली है उनमें -आयुष्मान योजना, आदिवासी समुदाय के छात्रों की छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय सड़क निधि, PM श्री स्कूल और अदालत के भवन निर्माण की राशि भी अटकी हुई है।मुख्यमंत्री यह सारी रकम मध्य प्रदेश की जनता का अधिकार और केंद्र पैसा देकर कोई एहसान नहीं कर रहा है। प्रदेश की जनता अपनी गाढ़ी कमाई से केंद्र सरकार को जो टैक्स देती है, उसी का एक छोटा सा हिस्सा केंद्रीय मदद के रूप में प्रदेश को वापस मिलता है। इसलिए आप दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार पर प्रदेश को उसका अधिकार देने के लिए दबाव बनाएं।

प्रयागराज कुंभ में प्रदेश से भेजेंगे 3.50 लाख थाली-थैले,संघ-विहिप के कार्यकर्त्ता श्रद्धालुओं के थैले से निकालेंगे पॉलीथिन

प्रयागराज/ नीमच प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले महा कुंभ को इस बार ग्रीन महा कुंभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार महा कुंभ को स्वच्छ महा कुंभ, ग्रीन महा कुंभ बनाने के लिए मेला प्राधिकरण ने मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने के प्रयास शुरू कर दिए हैं वहीं नगर निगम प्रयागराज भी पूरे शहर को प्लास्टिक फ्री रखने को लेकर अभियान चला रहा है, इसमें अब मध्य प्रदेश भी भागीदार बन रहा है। प्रयागराज महा कुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के लिए मध्य प्रदेश का नीमच जिला भी सहभागी बन रहा है। जिले में सामाजिक संगठनों ने एक थाली, एक थैला अभियान चलाया। इसके अंतर्गत जिले से 4100 स्टील थाली व 4100 थैला संग्रहित किए। इनकी पूजा-अर्चना कर पैकिंग की गई। अब ट्रांसपोर्ट से प्रयागराज पहुंचाया जा रहा है। अभियान में सभी संगठनों का अमूल्य योगदान रहा है। इन सभी ने दिया अहम् योगदान   नीमच के सीए एसोसिएशन संगठन द्वारा 101, भारत विकास परिषद 251, नीमच सिटी जैन मंदिर समाज 50, जैन स्थानक समाज 50, भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा 89, मुक्तिधाम सर्वसमाज नीमच सिटी (रावण रूंडी), सीताराम जाजू कन्या महाविद्यालय 300, विवेकानंद बाल कल्याण समिति (शिशु मंदिर एसएसवीएम) 200 एवं नगर की व्यवसायी शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा 150 थाली और थैले जुटाने में अहम् योगदान दिया है। मालवा प्रांत केंद्र से प्रयागराज पहुंचाया जायेगा 4100 थाली 4100 थैले को राम मंदिर जाजू बिल्डिंग में पुजारी जीवन तिवारी ने विधि-विधान से भगवान की आरती कर इनकी पूजा-अर्चना की। इसके बाद नीमच से मालवा प्रांत के केंद्र इंदौर ट्रांसपोर्ट द्वारा पहुंचाई। मालवा प्रांत केंद्र से सभी को प्रयागराज पहुंचाया जायेगा। कार्यक्रम में कई समाजजन ने सहयोग किया। 40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने का अनुमान कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार प्रयागराज में जो महा कुंभ होने जा रहा है इसमें 45 दिनों में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने वाले हैं। हम कल्पना करें कि एक तीर्थ यात्री तीन दिन भी वहां रुकता है, तीन दिन में 6 बार भोजन, दो से तीन बार चाय नाश्ता करेगा। ऐसे में 40 करोड़ तीर्थ यात्रियों के भोजन आदि में कितना पॉलिथिन, डिस्पोजल, कागज लग जाएगा। जो कचरा बनकर तीर्थ नगरी प्रयागराज को प्रदूषित कर सकता है। महाकुंभ में 40 हजार टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था करेगा। इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए ये पहल की जा रही है। अब तक भेजे जा चुके हैं 40 हजार थैले     मध्यभारत प्रांत में शामिल जिले- मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर (डबरा), भिंड (लहार), शिवपुरी (पिछोर), गुना (राघौगढ़), अशोकनगर, विदिशा (बासौदा), रायसेन (भोजपुर), रायसेन (बरेली), नर्मदापुरम (पिपरिया), हरदा, बैतूल (मुल्ताई) (जिले के साथ लिखे कस्बे को भी संघ की संरचना में जिला माना गया है।     मध्यभारत प्रांत से करीब 1 लाख 25 हजार थैले और थाली एकत्रित कर प्रयागराज भेजने का लक्ष्य है। अब तक करीब 40 हजार भेजे जा चुके हैं।     महाकौशल प्रांत में शामिल जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना, कटनी, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, नरसिंहपुर।     महाकौशल प्रांत से करीब सवा लाख थैले और थाली भेजने का टारगेट रखा है।     मालवा प्रांत में शामिल जिले- नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, उज्जैन, शाजापुर, देवास, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर। मालवा प्रांत से करीब एक लाख थैले और थाली एकत्रित कर प्रयागराज कुंभ में भेजे जाएंगे। थाली और थैले का आकार     15 इंच लंबाई और 12 इंच चौड़ाई होना चाहिए, थैला कपड़े का ही होना चाहिए। थैले पर प्रायोजक, दानदाता, संस्था का नाम प्रिंट करवा सकते हैं।     थाली स्टील की होनी चाहिए। थाली का साइज लगभग 11 ⅹ 14 इंच चौकोर या गोल जैसी भी उपलब्ध हो, भेज सकते हैं। अब जानिए क्या है हरित कुंभ अभियान हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी ईकाईयों ने 45 दिन तक चलने वाले प्रयागराज महाकुंभ के लिए हरित कुंभ अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य महाकुंभ को पॉलीथिन मुक्त रखना है। इसी के तहत देशभर में संघ से जुड़े संगठन थाली और थैले एकत्रित कर रहे हैं। इन थाली और थैलों को महाकुंभ के दौरान वितरित किया जाएगा। 75 देशों से 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। 75 देशों से पहुंचने वाले लोगों के लिए यहां टेंट सिटी बनाई जा रही है। जिसमें 2 हजार से अधिक स्विस कॉटेज होंगे। इन कॉटेज में फाइव स्टार जैसी सुविधाएं मिलेंगी। टेंट सिटी 1 जनवरी 2025 से 5 मार्च 2025 तक संचालित होगी। प्रयागराज कुंभ में मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025, मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025, बसंत पंचमी 3 फरवरी 2025, माघी पूर्णिमा 12 फरवरी 2025, महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को शाही स्नान होंगे। प्रयागराज के बाद 2028 उज्जैन में सिंहस्थ कुम्भ होगा। इससे पहले 2016 में उज्जैन में कुंभ का आयोजन हुआ था। उज्जैन में 2016 में हुए सिंहस्थ कुम्भ में एक महीने के दौरान शहर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 5 करोड़ आंकी गई थी। सिंहस्थ 2016 के प्रतिवेदन की मानें तो सिंहस्थ 2028 में यह आंकड़ा बढ़कर 15 करोड़ होने की संभावना है।

महू से यह प्रति बुधवार और शनिवार को बांद्रा की ओर रवाना होगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर  शीतकालीन अवकाश के दौरान ट्रेनों में यात्री दबाव अत्यधिक होता है। इसके चलते लंबी वेटिंग शुरू हो जाती है। रतलाम मंडल द्वारा इंदौर-मुंबई के बीच चलने वाली ट्रेनों में वेटिंग कम करने के लिए 11 दिसंबर से स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। महू-बांद्रा के बीच चलने वाली यह ट्रेन 11 दिसंबर से दो जनवरी तक दोनों ओर से सात-सात फेरे लगाएगी। महू से यह प्रति बुधवार और शनिवार को संचालित होगी। ट्रेन की बुकिंग सोमवार से शुरू हो जाएगी। महू से बुधवार और शनिवार को चलेगी महू-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल (09302) ट्रेन बुधवार और शनिवार को रात नौ बजे महू से रवाना होकर 9.30 बजे इंदौर पहुंचेगी। यहां से देवास, उज्जैन, नागदा, रतलाम होकर अगले दिन दोपहर 12.30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन 11 दिसंबर से एक जनवरी तक संचालित होगी। बांद्रा से गुरुवार और रविवार को चलेगी इसी तरह बांद्रा टर्मिनस-महू स्पेशल (09301) ट्रेन प्रति गुरुवार और रविवार दोपहर 3.45 बजे रवाना होगी अगली सुबह 6.50 बजे इंदौर और 7.30 बजे महू पहुंचेगी। यह ट्रेन 12 दिसंबर से 2 जनवरी तक संचालित होगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इंदौर, देवास, उज्जैन, नागदा, रतलाम, वड़ोदरा, भरूच, उधना, वापी और बोरीवली में ठहरेगी। ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकंड क्लास कोच होंगे। फतेहाबाद स्टेशन पर तीन लिफ्ट शुरू रतलाम मंडल के फतेहाबाद-चंद्रावतीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए तीन लिफ्ट रविवार से शुरू हो गई। लिफ्ट का शुभारंभ सांसद शंकर लालवानी और अनिल फिरोजिया ने किया। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनी इन लिफ्ट में 20 यात्रियों को ढोने की क्षमता है। लिफ्ट शुरू होने से वरिष्ठ व बीमार यात्रियों को एक से दूसरे प्लेटफार्म पर आने-जाने में सुविधा होगी। वहीं आम यात्रियों को भी भारी सामान लेकर आने-जाने में सहूलियत होगी। कार्यक्रम में डीआरएम रजनीश कुमार सहित अन्य रेल अफसर मौजूद थे।

अब बार-बार नहीं किसानों को कराना होगा KYC, एक क्लिक में मिलेगा सभी स्कीम का लाभ, बस आज ही कर लें ये का

नई दिल्ली अगर आप एक किसान हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एग्री स्टैक योजना के तहत डिजिटल बेस किसान रजिस्ट्री तैयार की जा रही है. एग्री स्टैक योजना केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई है, जिसके तहत किसानों की भलाई और कृषि उद्योग की समग्र उन्नति के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सशक्त बनाना और किसानों को तकनीकी साधनों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि करना है. इस योजना के अंतर्गत किसानों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी, जिसमें उनके भूमि रिकॉर्ड, फसल के विवरण, और आर्थिक गतिविधियों सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी. इस रजिस्ट्री का उद्देश्य किसानों को फसली ऋण, पीएम किसान योजना, फसल बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है.  इसको लेकर  यूपी के कृषि निदेशक डॉ जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में किसान रजिस्ट्री का कार्यक्रम बहुत तेजी से चलाया जा रहा है. जिसमें किसानों के अभिलेखों जैसे खसरा, खतौनी को उनके आधार से लिंक किया जा रहा है. इसका फायदा यह होगा कि इसके बाद से किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बार-बार  KYC नहीं करानी पड़ेगी. किसानों को मिलेगा काफी फायदा     पीएम किसान योजना     फसली लोन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड     एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड एवं कृषि विकास     अन्य कोई भी लोन क्या काम करवाना है और कैसे करवाएं? इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री करवाना अनिवार्य है. जानकारी के मुताबिक, किसानों को 31 दिसंबर 2024 से पहले यह रजिस्ट्री का काम पूरा करवा लेना है. इसके लिए किसान अपने नजदीकी कैंप में जाकर रजिस्ट्री कराकर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं. इस पोर्टल पर जाकर कराएं रजिस्ट्रेशन फॉर्मर रजिस्ट्री करवाने के लिए आप विभाग की वेब पोर्टल https://upfr.agristack.gov.in पर जा सकते हैं. पोर्टल के अलावा आप अपने नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाकर या फिर सरकार द्वारा पंचायत भवन या गांव में अन्य जगहों पर लगाए गए कैंप से आप ये काम करवा सकते हैं. इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत     आधार कार्ड     योजना से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर     खतौनी  

क्रिकेट किंग बना बीसीसीआई, आईपीएल बनी पैसा लीग, पाक के डिफेंस बजट से अधिक आईपीएल 2024 का रेवेन्यू

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग के 2025 सीजन के लिए हुई नीलामी में कुछ ही घंटों में 639.15 करोड़ लुटाए गए। 10 टीमों ने दुनियाभर के क्रिकेटरों के बैंक अकाउंट को भरने में कोई कोताही नहीं की। पैसों की बरसात के बीच ऋषभ पंत सबसे महंगे 27 करोड़ रुपये में लखनऊ सुपरजायंट्स टीम में गए तो श्रेयस अय्यर 26.75 करोड़ रुपये के साथ पंजाब किंग्स टीम में शामिल हुए। दूसरी ओर, पाकिस्तान की क्रिकेट लीग पाकिस्तान सुपर लीग यानी पीएसएल का भी ऑक्शन होना है। माना जा रहा है कि जो आईपीएल ऑक्शन में नहीं बिके हैं उन बड़े नामों पर पीएसएल की टीमों की नजरें हैं। यानी आईपीएल से जो बचे हैं वह पीएसएल में अपनी किस्मत आजमाएंगे। खैर, ये तो वो बातें हैं, जो आप जानते हैं। जो नहीं जानते हैं वह यह है कि आईपीएल 2024 में सभी 10 टीमों का कुल रेवेन्यू पिछले सीजन यानी 2023 से डबल हो गया है। टॉफ्लर के अनुसार, आईपीएल 2024 का रेवेन्यू 6,797 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले सीजन 3,082 करोड़ से दोगुना है। इस राशि को अगर और भी आसान तरीके से समझना हो तो यूं समझें कि आईपीएल 2024 का रेवेन्यू पाकिस्तान के रक्षा बजट जितना रहा। यह वह रक्षा बजट है, जिसके दम पर वह उछलता-कूदता है। जी हां, हैरान होने की जरूरत नहीं है। एक पाकिस्तानी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का 2024 में रक्षा बजट 7.64 बिलियन यूएस डॉलर यानी 2,122 अरब पाकिस्तानी रुपये था। अगर इसे भारतीय रुपये में बदला जाए तो 6497 करोड़ रुपये होता है। यानी पाकिस्तान के रक्षा बजट से अधिक भारतीय क्रिकेट लीग की 10 टीमों का रेवेन्यू है, जिसकी कीमत में हर साल दोगुना बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इस तरह से क्रिकेट किंग बना बीसीसीआई, आईपीएल बनी पैसा लीग  रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस उछाल का श्रेय लीग की बढ़ती लोकप्रियता को दिया, जो स्मार्ट मीडिया डील और आकर्षक स्पॉन्सरशिप डील की वजह से हुई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), डिज्नी स्टार और वायकॉम 18 के बीच 2022 में रिकॉर्ड 48,390 करोड़ का मीडिया राइट्स की डील हुई थी, जो अब मिलकर JioStar बन गया है। प्रसारण राजस्व के अलावा BCCI ने टाटा समूह, My11Circle, Ceat और AngelOne सहित प्रमुख ब्रांडों के साथ बहु-वर्षीय स्पॉन्सरशिप डील से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की। ‘दिन दोगुना रात चौगुना’ बढ़ रही आईपीएल की कीमत ब्रांड फाइनेंस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आईपीएल का ब्रांड मूल्य 2023 की तुलना में 2024 में 13% बढ़कर 12 बिलियन डॉलर (7.64 बिलियन डॉलर पाकिस्तान का रक्षा बजट इसके आगे लड्डू है) तक पहुंच गया है, जो 2009 में इसके 2 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन से अधिक है। उल्लेखनीय रूप से चार फ्रेंचाइजी- चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके), मुंबई इंडियंस (एमआई), रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी), और कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) ने ब्रांड मूल्य में 100 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर आंख दिखा रहा है पाकिस्तान यहां बताना जरूरी है कि पाकिस्तान को होने वाली क्रिकेट से कमाई भारत पर ही निर्भर है। आईसीसी की कमाई का बड़ा हिस्सा भारत से जाता है। इसके बावजूद वह आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से भारत के इनकार करने के बावजूद तरह-तरह की शर्तें रखने की नाकाम कोशिशें और ड्रामे करने से बाज नहीं आ रहा है। हालांकि, रिपोर्ट की मानें तो आईसीसी इस बात पर फैसला कर चुका है कि टूर्नामेंट हाइब्रिड मॉडल से खेला जाएगा। भारत की एक लाइन में शर्त यह है कि सीमा पर अपने क्षेत्र से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर पाकिस्तान लगाए। इंडियन ‘पैसा’ लीग में टीमों का रेवेन्यू टीम रेवेन्यू प्रॉफिट/लॉस गुजरात टाइटंस 776 -57 मुंबई इंडियंस 737 109 कोलकाता नाइटराइडर्स 698 175 लखनऊ सुपरजायंट्स 695 59 चेन्नई सुपर किंग्स 676 229 पंजाब किंग्स 664 252 राजस्थान रॉयल्स 662 142 सनराइजर्स हैदराबाद 659 NA रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 650 221 दिल्ली कैपिटल्स 580* 195* नोट: फाइनेंशियल ईयर-2024, आंकड़े करोड़ में हैं, सोर्स: टॉफ्लर      

2029 के बाद की राजनीति पर फोकस, भाजपा में मोदी युग के बाद का नेतृत्व तैयार करने में जुटा संघ

नई दिल्ली. पहले हरियाणा में हार को जीत में बदल कर तीसरी बार सरकार बनाने और फिर महाराष्ट्र में आशा के विपरीत एकतरफा तूफानी बहुमत हासिल करके भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए ने लोकसभा चुनावों में मिले खासे झटके के सदमे को नए हौसले में बदल दिया है। हालांकि, इसी दौर में जम्मू कश्मीर और झारखंड में विपक्षी इंडिया गठबंधन की भी जीत हुई है, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र की जीत के जश्न और शोर में इन दोनों राज्यों में भाजपा की नाकामयाबी की चर्चा दब गई है। भाजपा की इस जीत का श्रेय यूं तो हर बार की तरह पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति को दे रही है, लेकिन दूसरी तरफ इन दोनों राज्यों की सफलता को भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने हजारों स्वयंसेवकों की मेहनत का नतीजा बताया है। आमतौर पर संघ पर्दे के पीछे रहकर ही काम करता है और चुनावी सफलता का श्रेय संघ कभी सीधे नहीं लेता है, लेकिन पहली बार उसने खुलकर इसका श्रेय अपने स्वयंसेवकों को दिया है। इसके साथ ही संघ अब मोदी युग के बाद भाजपा के नेतृत्व को गढ़ने में जुट गया है। संघ के इस रुख के कई संकेत हैं। पहला ये कि लोकसभा चुनावों में जब भाजपा के 370 और एनडीए के चार सौ पार के नारे की हवा निकली और भाजपा बमुश्किल 240 सीटें ही जीत पाई और तीसरी बार उसे अपनी सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर होना पड़ा है। तब संघ की तरफ से यह संदेश दिया गया कि ऐसा इसलिए हुआ कि लोकसभा चुनावों में आरएसएस के स्वयंसेवक उदासीन हो गए और संघ ने इन चुनावों को पूरी तरह मोदी शाह और भाजपा के भरोसे छोड़ दिया था।नतीजा ये कि भाजपा को अपने बलबूते बहुमत के आंकड़े के भी लाले पड़ गए।यह एक तरह से चुनावों के बीच में एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान कि भाजपा अब अपने पैरों पर खडी हो गई है और उसे अब संघ के सहारे की जरूरत नहीं है,का संघ की तरफ से दिया गया जवाब भी माना जा सकता है। लोकसभा चुनावों के झटके के बाद भाजपा ने हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावों के लिए संघ की तरफ देखा और संघ ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। संघ के हजारों स्वयंसेवक इन राज्यों में फैल गए। बताया जाता है कि अकेले हरियाणा में संघ ने छोटी बड़ी सब मिलाकर करीब बीस हजार बैठकें कीं। यह संख्या महाराष्ट्र में और भी ज्यादा थी। इन विधानसभा चुनावों के पूरे सियासी विमर्श को संघ ने ही गढ़ा। सबसे पहले उत्तर प्रदेश में संघ के चहेते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नया नारा दिया बटेंगे तो कटेंगे जो लोकसभा चुनावों में विपक्ष द्वारा सामाजिक न्याय के नाम पर किए गए जातीय ध्रुवीकरण की काट के तौर पर दिया गया था। योगी के इस नारे पर संघ प्रमुख सर संघ चालक मोहन भागवत ने मुहर लगाई और फिर नारा विधानसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी नारा बन गया। महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे थोड़ा परिष्कृत करके कहा एक हैं तो सेफ हैं। इन दोनों नारों का संदेश साफ था कि हिंदुओं जातियों में न बंट कर एकजुट होकर भाजपा के लिए मतदान करो। हरियाणा में जहां इस नारे के जरिए जाटों के वर्चस्व के जवाब में गैर जाटों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण किया गया वहीं महाराष्ट्र में विपक्ष के मुस्लिम और जातीय ध्रुवीकरण के जवाब में यह नारा हिंदू ध्रुवीकरण का मंत्र बन गया। कोशिश झारखंड में भी की गई लेकिन वहां हेमंत सोरेन के आदिवासी ध्रुवीकरण ने बटेंगे तो कटेंगे को बेअसर कर दिया। इस नारे से बने चुनावी विमर्श और उससे आए महाराष्ट्र के नतीजों ने भाजपा पर संघ की पकड़ को फिर से मजबूत कर दिया है, जो 2019 के बाद धीरे धीरे कमजोर हो चली थी। इसका सबसे बड़ा परीक्षण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के चयन सामने आया जब करीब दो सप्ताह तक चली भारी कशमकश के बाद आखिरकार देवेंद्र फडणनवीस के नाम पर ही पार्टी ने मुहर लगाई। हालांकि, लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपा को मिली करारी हार से देवेंद्र फडणनवीस के करिश्मे पर भी ग्रहण लग गया था और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी लेते हुए उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के पेशकश भी की थी, लेकिन उसे नामंजूर करते हुए पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनावों के लिए जुट जाने को कहा और देवेंद्र फडणनवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा नीत महायुति गठबंधन की जीत के लिए रणनीति बनाने से लेकर प्रत्याशी चयन,सीटों के बंटवारे और प्रचार अभियान का नेतृत्व करते हुए जी तोड़ मेहनत की और महायुति की महाजीत का श्रेय भी सबसे ज्यादा उन्हें ही मिला। इसलिए जब मुख्यमंत्री के नाम पर अटकलें लगीं तो सबसे ऊपर उनका ही नाम था। इसके बावजूद करीब 13 दिनों तक भाजपा उनके नाम की घोषणा इसलिए नहीं कर सकी, क्योंकि पार्टी में ही एक धड़ा उनका विरोध कर रहा था और फडणनवीस के विरोधियों ने निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तक को भी इसके लिए इस्तेमाल किया कि फडणनवीस का रास्ता रोका जा सके, लेकिन आखिरकार विरोधी नाकाम हुए और संघ के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन ने देवेंद्र फडणनवीस को फिर से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री पद सौंप दिया। लोकसभा चुनावों के बाद घटे इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने भाजपा की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को फिर सत्ता के एक निर्णायक केंद्र की भूमिका में ला दिया है। संघ का अगला मिशन भाजपा के संगठन को फिर अपने प्रभाव में लेने का है, जो पिछले कुछ वर्षों में उसके हाथ से काफी हद तक फिसल गया था। इसके लिए अब संघ भाजपा अध्यक्ष पद पर किसी ऐसे नेता को बिठाने की कवायद में है जो संघ निष्ठ होने के साथ साथ पार्टी संगठन को भी संघ के विचारों संस्कारों और कार्यशैली में ढाल सके। हालांकि, अपनी इस कवायद में संघ अपने परिवार के सबसे लोकप्रिय चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नाराज और अनदेखा नहीं कर सकता है, इसलिए उसकी कोशिश है कि अध्यक्ष पद पर किसी ऐसे नेता के … Read more

स्कूल शिक्षा विभाग की नई कवायद 2025-26 सत्र : स्टूडेंट को पढ़ाया जाएगा यातायात के नियमों का पाठ, शिक्षा मंत्री

New exercise of School Education Department 2025-26 session: Students will be taught traffic rules, Education Minister भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ रहे हैं सड़क दुर्घटना के मामलों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नई कवायद शुरू की है। जिसमें अब स्कूली छात्रों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। इस कवायद को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बड़े होने पर कोई चीज़ सीखने से अच्छा है, बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब स्कूली विद्यार्थियों को यातायात का पाठ पढ़ाएगी। इसकी शुरुआत आगामी शिक्षा सत्र 2025-26 से होगी। स्कूल शिक्षा विभाग की इस कवायद से बच्चों को यातायात के नियमों के बारे में सही से जानकारी मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि, बड़े होने पर कोई चीज सीखने से अच्छा है बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। बाल मन के समय से ही अगर कोई बात सिखाई जाए तो बेहतर रूप से वह समझ आती है। उन्होंने कब कि, यातायात के नियमों का पालन कैसे होता है और कैसे नियमों का उल्लंघन होता है,इन सभी बातों को बच्चों को सिखाना एक अच्छी बात है। नई शिक्षा नीति भी यही कहती है कि संस्कृति बाल मन में ही बच्चों को कुछ सिखाया जाए, तो वह बिना किसी दबाव के इन सब चीजों को सीख जाते हैं।

10 दिसम्बर मंगलवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ मुश्किलों का डटकर सामना करना, प्रॉब्लम्स को सफलता की सीढ़ी में बदल सकता है। भविष्य के खर्चों की योजना बनाने के लिए यह एक अच्छा दिन है। पार्टनर के साथ भावनाओं को शेयर करें। वृषभ राशि- रोमांटिक मामलों को सावधानी से निपटाना समय की मांग है। आपका शरीर आज आपके द्वारा दिए गए ध्यान और देखभाल के लिए आपको धन्यवाद देगा। वित्तीय डीसीजन में सावधानी बरतें। मिथुन राशि- बेहतर करियर विकास के लिए अवसरों का उपयोग करें। कोई बड़ी बीमारी आपको परेशान नहीं करेगी। प्रेम संबंध में आज उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। कुछ सिंगल्स प्यार में भी पड़ सकते है। कर्क राशि- आपको सेल्फ लव पर फोकस करने की सलह दी जाती है। अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने पर फोकस करें। फिटनेस पर गौर फरमाएं। किसी भी तरह की बहस में आज न उलझें। सिंह राशि- हेल्थ के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए परिवर्तन को खुली बांहों से स्वीकार करें। प्रेम, और करियर के मामले पर ध्यान देने की जरूरत है। कन्या राशि- दिन मिक्स्ड एनर्जी वाला रहेगा। व्यावसायिक सफलता मिलने के योग हैं। समझदारी से वित्तीय डीसीजन लें क्योंकि कुछ लोग आज पैसा खूब कमा सकते हैं। चुनौतियों को स्टेपिंग स्टोन में बदलना आप जानते हैं। तुला राशि- दिन सरप्राइज से भरपूर रहेगा। अप्रत्याशित बदलाव का अनुभव हो सकता है, जो समृद्धि और विकास का अवसर लाएगा। दूसरों की भावनाओं के प्रति आपको सेंसीटिव रहना चाहिए। भारी सामान उठाने से बचें। वृश्चिक राशि- लव के मामले में डेट पर जाना अच्छा रहेगा। इससे आपका बॉन्ड स्ट्रॉंग होगा। खुद को हेल्दी रखें। काम का प्रेशर ज्यादा न लें। आर्थिक रूप से भाग्यशाली होने के लिए हर विकल्प पर विचार करें। धनु राशि- करियर में ग्रोथ और बदलाव का एक महत्वपूर्ण समय है। आप चुनौतियों और रोमांचक अवसरों दोनों का सामना कर सकते हैं। आज आपकी लीडरशिप स्किल को भी परखा जाएगा। सेहत पर फोकस करें। मकर राशि- बदलावों भरे दिन के लिए रेडी रहें। अवसरों और व्यक्तिगत विकास पर अपना फोकस रखें। आज का दिन आपको पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लेवल पर सोच-विचार करने के लिए मोटिवेट कर रहा है। कुम्भ राशि- विकास के अवसर मिलेंगे, जिससे आपको काफी अच्छा लाभ होगा। आज मुश्किलों को मुस्कुराहट के साथ पार करें। प्यार का जश्न मनाएं और रोमांटिक संबंधों से अहंकार को दूर रखें। मीन राशि- आज उत्साह आपकी सबसे बड़ी संपत्ति रहेगी। प्रेम जीवन को बरकरार रखने के लिए सोल्यूशन पर फोकस करें। चुनौतियां आपको डराती नहीं हैं। ऑफिस में शांत रहें और सभी कार्य पूरे करें।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सारंग ने की वाटर स्पोर्ट्स अकादमी की समीक्षा

भोपाल. खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों के प्रति युवाओं और नागरिकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से सप्ताह में एक दिन लेक व्यू पर वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों का प्रदर्शन करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिये एक इवेंट प्रोग्राम भी बनाएं, जिसमें वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को पूरा शहर देखे। इसमें नगर निगम और पर्यटन विभाग सहित अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाये। मंत्री सारंग सोमवार को वाटर स्पोर्ट्स अकादमी में वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। खेल से मिलता है अनुशासन, संस्कार और कॅरियर मंत्री सारंग ने कहा ‍कि पालकों को भी खेल के प्रति जागरूक करने के प्रयास किया जाना चाहिए। खेल से युवाओं को अनुशासन, संस्कार और कॅरियर मिलता है। इवेन्ट प्रोग्राम से बच्चों और युवाओं को खेल की गतिविधियां देखकर उनके प्रति आकर्षण और खेल की भावना जागृत होगी। उन्होंने वाटर स्पोर्ट्स अकादमी में एलईडी के माध्यम से वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों की शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन करवाने को भी कहा। खिलाड़ियों की डाक्यूमेंट प्रोफाइल हो तैयार मंत्री सारंग ने कहा कि अकादमी के खिलाड़ियों की डायरी तैयार की जाये, इस डाक्यूमेंट प्रोफाइल में उसका विवरण सहित खेल में प्रदर्शन और अचीवमेंट दर्ज हो। साथ ही फिजीकल एक्टिविटी का समावेश भी हो। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से स्पोर्ट्स की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये अपेक्षाएं एवं अनुदान के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जाये। खिलाड़ियों की सफलता की कहानियां मंत्री सारंग ने कहा कि उत्कृष्ठ खिलाड़ियों की सफलता की कहानियां भी तैयार की जाये। उसका सोशल मीडिया, प्रिन्ट और इलेक्ट्रानिक मीडिया पर प्रदर्शन हो इससे युवा खेल के प्रति आकर्षित होंगे और टेलेंट सर्च करने में आसानी होगी। स्कूली बच्चों में अकादमी के प्रति आकर्षित करने के प्रयास हों मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स, शूटिंग और हॉकी में अपार संभावनाएं है। इस दिशा में भरकस प्रयास किये जाने चाहिए। स्कूली बच्चों को अकादमी में आकर्षित करने के लिये इसकी जानकारी उन तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिये विभिन्न तरह के प्रोग्राम के जरिए उन्हें अवगत करवाना होगा। वाटर स्पोर्ट्स के लिये उपकरणों की नहीं होगी कमी मंत्री सारंग ने कहा कि वाटर स्पोर्ट्स के लिये उपकरणों की कमी नहीं होना चाहिए। साथ ही कोच एवं ट्रेनर का आंकलन कर लिया जाये, उसी हिसाब से इसकी व्यवस्थाएं की जायेंगी। टेलेंट सर्च के जरिए जिनमें खेल के प्रति रूचि हो वहीं बच्चे चयनित किये जाये। इसके लिये “खेलो-बढ़ो” अभियान का समावेश किया जाये। खिलाड़ियों से किया संवाद मंत्री सारंग ने शुरूआत में अकादमी के बच्चों से भेंटकर उनकी समस्या और सुझाव जाने। साथ ही उनके खाने और ठहरने की व्यस्थाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। बैठक में संचालक रवि कुमार गुप्ता, संयुक्त संचालक बी.एल. यादव, सहायक संचालक क्षिप्रा श्रीवास्तव सहित वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के कोच और ट्रेनर्स उपस्थित थे।

स्वागतम पोर्टल: बिना लंबी प्रक्रिया के आगंतुकों को सुगम प्रवेश

रायपुर, मंत्रालय आने वाले आगंतुकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने स्वागतम पोर्टल का शुभारंभ किया गया है। रायपुर के श्री नितिन वाले  अपने निजी कार्य से सचिव से मिलने महानदी भवन मंत्रालय आए थे ।श्री वाले ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वागतम पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण, यात्रा का उद्देश्य, व्यक्तिगत जानकारी और मिलने का समय दर्ज करने पर उन्हें तुरंत पुष्टिकरण संदेश और प्रवेश पत्र प्राप्त हो गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आमजनता के मंत्रालय प्रवेश के लिए स्वागतम पोर्टल का शुभारंभ कर सुविधा प्रदान किए है। स्वागतम पोर्टल के माध्यम से आमजनता का मंत्रालय के अधिकारियों से मिलना आसान हो गया है। श्री नितिन ने बताया कि प्रवेश द्वार पर उनकी पहचान सत्यापित होने के बाद उन्हें सुगमता से मंत्रालय में प्रवेश मिल गया। उन्होंने इस पोर्टल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री वाले ने कहा कि स्वागतम पोर्टल न केवल समय की बचत करता है, बल्कि आगंतुकों से संबंधित विवरणों के संधारण से सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाता है। पोर्टल पर आगंतुकों के विवरण पहले से दर्ज होने के कारण प्रशासन का काम भी सरल हुआ है और आम नागरिकों के लिए सरकार से जुड़ने का रास्ता सुगम हुआ है। स्वागतम पोर्टल शासन की पारदर्शिता और तकनीकी सुगमता का प्रतीक बनकर शासन और जनता के बीच दूरी को कम करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने और शासकीय काम-काज में पारदर्शिता लाने के लिए तीन पोर्टलों ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल का शुभारंभ किया है। इस पहल से सुशासन के साथ शासकीय कामकाज में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

उज्जैन एवं खण्डवा में भी जनजातीय विद्यार्थियों को दी जायेगी फ्री-कोचिंग

भोपाल. जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि जनजातीय वर्ग के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर अपना भविष्य संवारें, इस उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने ‘आकांक्षा योजना’ प्रारंभ की है। इस योजना में JEE, NEET एवं CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये इंदौर, भोपाल एवं जबलपुर संभागीय मुख्यालय में जनजातीय विद्यार्थियों को फ्री-कोचिंग दी जाती है। प्रदेश के सभी जनजातीय विकासखडों के विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिलाने की मंशा से अब इस योजना का विस्तार किया जा रहा है। आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के लिये इस योजना के संदर्भ में तैयार की जा रही संशोधित कार्य योजना (डीपीआर) में इंदौर, भोपाल एवं जबलपुर संभागीय मुख्यालय के अलावा उज्जैन संभागीय मुख्यालय एवं खण्डवा जिला मुख्यालय में भी जनजातीय विद्यार्थियों को भी तीनों राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री कोचिंग दिलाई जायेगी। डॉ. शाह ने बताया कि आकांक्षा योजना में वर्तमान में कुल 800 जनजातीय विद्यार्थियों को तीन संभागीय मुख्यालय भोपाल, इन्दौर एवं जबलपुर में JEE, NEET एवं CLAT की कोचिंग दिलाई जाती है। वित्त वर्ष 2023-24 में 2 करोड़ 32 लाख 12 हजार रुपये व्यय कर 728 जनजातीय विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया। इसमें 209 विद्यार्थी JEE, 132 , विद्यार्थी NEET एवं 130 विद्यार्थी CLAT की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। इस योजना में वित्त वर्ष 2024-25 में JEE परीक्षा की तैयारी के लिए तय संभागीय मुख्यालय भोपाल में स्वीकृत 400 सीटों में 260 जनजातीय विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। NEET परीक्षा की तैयारी के लिए तय संभागीय मुख्यालय इंदौर में स्वीकृत 200 सीटों में फुल स्ट्रेंथ में 200 जनजातीय विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। CLAT परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर तय करने के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि आकांक्षा योजना की सफलता को देखते हुये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इन तीनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सीटों और कोचिंग के लिये सेंटर्स की संख्या में भी विस्तार किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिये आकांक्षा योजना की प्रस्तावित संशोधित कार्ययोजना में JEE परीक्षा की तैयारी के लिए इंदौर में 100, भोपाल में 400, जबलपुर में 100, उज्जैन में 100 एवं खंडवा में 100, कुल 800 विद्यार्थियों को कोचिंग दी जाएगी। NEET परीक्षा की तैयारी के लिए इंदौर में 200, भोपाल में 100, जबलपुर में 100, उज्जैन में 100 एवं खंडवा में 100, कुल 600 विद्यार्थियों को कोचिंग दी जाएगी। इसी प्रकार CLAT परीक्षा की तैयारी के लिए इंदौर में 50, जबलपुर में 200 एवं खंडवा में 50, कुल 300 विद्यार्थियों को कोचिंग दी जाएगी। संशोधित आकांक्षा योजना में विद्यार्थियों को पृथक छात्रावास भवन की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी है। इस संशोधित योजना की शासन से स्वीकृति ली जा रही है। अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षा की तैयारी कराने के लिये निजी कोचिंग संस्थाओं द्वारा विद्यार्थियों को कोचिंग दी जा रही है। अब सभी ट्राइबल ब्लॉकों में जनजातीय विद्यार्थियों को इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री कोचिंग का लाभ देने के लिये योजना की संशोधित डीपीआर तैयार कर ली गई है। जनजातीय वर्ग के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की ठोस चिंता करते हुए राज्य सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में सीएम राइज स्कूलों के निर्माण के लिये 667 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया है। इस वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के प्रति प्रोत्साहित करने के लिये सरकार ने 11वीं, 12वीं एवं महाविद्यालयीन छात्रवृत्ति के लिये 500 करोड़ रूपये प्रावधान किया हैं। नि:शुल्क कोचिंग के साथ सरकार जनजातीय विद्यार्थियों को टैबलेट भी देगी। टैबलेट के लिये डेटा प्लान भी सरकार नि:शुल्क उपलब्ध करायेगी। योजना के लिये सरकार ने बजट में 10.42 करोड़ रूपये आरक्षित किये हैं।

मुख्यमंत्री साय बोले- राज्य सरकार गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा प्रकाशित ”गाय – धर्म और विज्ञान” पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री साय को इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने बताया कि इस पुस्तक में गाय के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व को बताया गया है। पूरे देश में 4 जनवरी 2025 को गौ-विज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के लगभग सवा लाख स्कूली छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगे।     मुख्यमंत्री श्री साय ने गौमाता के महत्व से बच्चों को परिचित कराने के लिए आयोजित की जा रही इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए समिति के सदस्यों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने राज्य के 125 गौशालाओं को चारे के लिए दी जा रही अनुदान राशि प्रति गाय 25 रुपए से बढ़ाकर 35 रूपए करने की घोषणा की है। राज्य सरकार द्वारा गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए आयोग का गठन किया है। राज्य सरकार ने गौ धाम बनाने तथा गौमूत्र और गोबर के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि घर-घर इस पुस्तक के निःशुल्क वितरण से लोगों में गौ माता के प्रति जागरुकता आएगी। इस अवसर पर गाय धर्म और विज्ञान पुस्तक की संकलनकर्ता- संपादक श्रीमती शताब्दी सुबोध पाण्डे सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका बोले- आईआईटी भिलाई की यात्रा में सीसीएलटी मील का पत्थर साबित होगा

रायपुर, राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा है कि आईआईटी भिलाई की यात्रा में संस्कृति, भाषा और परम्परा केंद्र महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस केंद्र की स्थापना आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान, लुप्तप्राय भाषाओं और सतत विकास पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता के लिए एक अंतःविषय केंद्र के रूप में की गई है। केंद्र का मिशन छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों की भाषाई विविधता, सांस्कृतिक बहुलवाद, पारिस्थितिक ज्ञान और सामूहिक स्मृति को भारत में सामने लाना है।      राज्यपाल श्री डेका आज आईआईटी भिलाई में संस्कृति, भाषा और परम्परा केंद्र के शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री डेका ने आगे कहा कि यह केंद्र छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर एक नोडल ज्ञान केंद्र बनाने के लिए काम कर रहा है। इसमें आईआईटी भिलाई में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर एक पुस्तकालय और अत्याधुनिक संग्रहालय शामिल होगा। इस ज्ञान केंद्र को राज्य के आदिवासी समुदायों के मौखिक इतिहास और सामूहिक सांस्कृतिक यादों के भंडार के रूप में योजनाबद्ध किया गया है।        राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि विकसित भारत 2047 के हमारे सामाजिक और राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस तरह की पहल समय की मांग है। तेजी से हो रहे वैश्वीकरण के हमारे समकालीन युग में, एक जोखिम यह है कि अपने राष्ट्र के विकास में, हम अपने इतिहास, विरासत और विरासत से संपर्क खो सकते हैं। हमारी साझेदारी, सामूहिक एकता, अपने समाज को ऊपर उठाने और इसे दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शामिल करने की इच्छा कभी-कभी हमें यह भूलने पर मजबूर कर देती है कि हम कौन हैं और हम कहाँ से आए हैं। यह याद रखना और खुद को लगातार याद दिलाना महत्वपूर्ण है कि विकास का मतलब एकरूपता नहीं है, इसका मतलब हमारी सांस्कृतिक और जातीय पहचान का नुकसान नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि हम भारत के लोग दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक होने के लिए भाग्यशाली हैं। भारतीय दर्शन, कला और वास्तुकला की जड़ें हजारों साल पुरानी हैं और जाति, पंथ और समुदायों के विचारकों की अनगिनत पीढ़ियों के योगदान के माध्यम से परिष्कृत हुई हैं। राज्यपाल ने कहा कि आईआईटी हमारे भारतीय ज्ञान प्रणालियों की इस विरासत को पुनः प्राप्त करने के लिए शोध के विभिन्न तरीकों पर काम कर रहा है। हमारी खोई हुई ऐतिहासिक विरासत का दस्तावेजीकरण और उसकी गरिमा को बहाल कर रहा है और बिगड़े हुए पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में पारंपरिक कृषि तकनीकों के लाभों को सामने ला रहा है। यह ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल तकनीकों के साथ लचीली आजीविका हासिल करने में सक्षम बना रहा है। आज लॉन्च की गई रिपोर्ट हमारे राज्य की विरासत और इतिहास तथा आदिवासी समुदायों के गहन पारिस्थितिकी और कृषि ज्ञान को उजागर करती है।        राज्यपाल ने आईआईटी भिलाई के विद्यार्थीयों और कर्मचारियों को अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए बधाई दी। इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने  हेरिटेज एप्रीसिएशन ऑफ बारसुर-पर्सपेक्टिव्स ऑन हिस्ट्री, आर्किटेक्चर एण्ड टूरिज्म और ऑगमेंटिग लाइवलीहुड्स थ्रु जीआई-ए केस स्टडी ऑन छत्तीसगढ़ रिपोर्ट लॉन्च किया। राज्यपाल श्री डेका ने समारोह स्थल पर लगाए गए छत्तीसगढ़ जनजातीय हैन्डीक्राफ्ट्स स्टॉल का भी अवलोकन किया।       समारोह में सीसीएलटी (संस्कृति, भाषा और परम्परा) केंद्र के संयोजक डॉ. अनुभव प्रधान ने स्वागत भाषण दिया। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने आईआईटी की गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।       इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र शुक्ला  प्राध्यपक गण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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