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मप्र सरकार ‘सिंहस्थ मेले’ के दौरान प्रयागराज और हरिद्वार में कुंभ की तर्ज पर सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को अपनाएगी: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि 2028 में उज्जैन में होने वाले ‘सिंहस्थ मेले’ के दौरान मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और हरिद्वार में कुंभ की तर्ज पर सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को अपनाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा कि प्रयागराज में आगामी कुंभ के समापन के बाद, भीड़ प्रबंधन, ड्रोन सर्वेक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और अन्य गतिविधियों में लगी कंपनियों एवं स्टार्टअप्स का एक सम्मेलन उज्जैन में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने ‘सिंहस्थ मेले’ के लिए बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्यों सहित तैयारियों की समीक्षा की। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। इससे पहले, 2021 में उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में कुंभ मेला आयोजित किया गया था। यादव ने कहा कि ‘सिंहस्थ-2028’ की व्यवस्थाओं को सर्वोत्तम रूप देने के लिए प्रयागराज और हरिद्वार में कुंभ के मॉडल का भी अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘सिंहस्थ-2028 में दोनों कुंभों की तर्ज पर सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को लागू करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।’’ यादव ने अधिकारियों को सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे के साथ समन्वय के उद्देश्य से एक विशेष प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के घाटों तक सुगम आवागमन के लिए उपयुक्त पहुंच मार्ग विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन, इंदौर और देवास में किए जा रहे निर्माण कार्यों में सीवरेज, स्वच्छता और हरियाली पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा के लिए धर्मशालाओं के उन्नयन के लिए भी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। यादव ने कहा कि ‘सिंहस्थ-2028’ के मद्देनजर विभागों में प्रशासनिक ढांचे का आवश्यकतानुसार तत्काल विस्तार किया जाए।  

महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन का संचालन किया जाएगा, जो कि भोपाल मंडल के बीना, रानी कमलापति और इटारसी स्टेशनों से गुजरेगी

भोपाल यात्रियों की यात्रा को सुगम, सुरक्षित और आरामदायक बनाने के उद्देश्य से रेलवे प्रशासन द्वारा विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। इस कड़ी में लालकुआ – क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना (बेंगलुरु) – लालकुआ विशेष ट्रेन और मौला अलि – वाराणसी – मौला अलि महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन का संचालन किया जाएगा। यह रहेगा ट्रेन का टाइम टेबल 05074 लालकुआ – क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना (बेंगलुरु) विशेष ट्रेन यह ट्रेन 11 जनवरी से प्रत्येक शनिवार को चलाई जाएगी। ट्रेन लालकुआ स्टेशन से शाम 5:55 बजे प्रस्थान करेगी। यह अगले दिन सुबह 06 बजे बीना, 7:50 बजे रानी कमलापति, 9:30 बजे इटारसी और अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन दोपहर 3:25 बजे क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना (बेंगलुरु) स्टेशन पहुंचेगी। 05073 क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना (बेंगलुरु)- लालकुआ विशेष ट्रेन यह ट्रेन 14 जनवरी से प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। ट्रेन क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना (बेंगलुरु) स्टेशन से सुबह 7:15 बजे प्रस्थान करेगी। यह अगले दिन दोपहर 12:05 बजे इटारसी, 1:40 बजे रानी कमलापति, 15:45 बजे बीना और अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन सुबह 9:05 बजे लालकुआ स्टेशन पहुंचेगी। 07087 मौला अलि – वाराणसी महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन ट्रेन 07087 मौला अलि – वाराणसी महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन 17 फरवरी को रात 11.55 बजे मौला अलि स्टेशन से प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन अगले दिन शाम 5:40 बजे इटारसी स्टेशन एवं मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन सुबह 11:10 बजे वाराणसी स्टेशन पहुंचेगी। 07088 वाराणसी – मौला अलि महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन ट्रेन 07088 वाराणसी – मौला अलि महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन 19 फरवरी को शाम 7.15 बजे वाराणसी स्टेशन से प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन अगले दिन दोपर 2:40 बजे इटारसी स्टेशन एवं मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन सुबह 07 बजे मौला अलि स्टेशन पहुंचेगी। इंदौर-लखनऊ बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन यात्रियों की मांग और सुविधा को ध्यान में रखते इंदौर से लखनऊ के लिए एक फेरा स्पेशल ट्रेन का परिचालन स्पेशल किराया के साथ किया जाएगा। इंदौर-लखनऊ स्पेशल ट्रेन(09335) 9 जनवरी को रात 10 बजे इंदौर रेलवे स्टेशन से रवाना होगी। 10 जनवरी को दोपहर 5 बजे लखनऊ पहुंचेगी। इस दौरान ट्रेन का ठहराव देवास, उज्जैन, शुजालपुर, सीहोर, संत हिरदारामनगर, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल और उन्नाव रेलवे स्टेशन पर रहेगा। ट्रेन 20 स्लीपर कोच के साथ चलेगी।  

महाकुंभ: प्रयागराज रेल मंडल ने जरूरी कदम उठाया, श्रद्धालुओं के लिए रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए

प्रयागराज प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यहां आने वाले भक्तों के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। महाकुंभ 2025 में लाखों लोगों के आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को देखते हुए प्रयागराज रेल मंडल ने जरूरी कदम उठाया है। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की सेहत को ध्यान में रखकर रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए गए हैं। प्रयागराज रेल मंडल के सीनियर पीआरओ डॉ. अमित मालवीय ने बताया कि महाकुंभ 2025 में आने वाले भक्तों के लिए रेलवे अधिकारी तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। इसके तहत प्रयागराज जंक्शन और अन्य रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए गए हैं। ये कमरे डॉक्टरों, चिकित्सा सुविधाओं और मिनी आईसीयू समेत उन्नत उपकरणों से सुसज्जित होंगे। तीर्थयात्रियों के लिए उचित चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उनमें कार्डियक मॉनिटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, डिफाइब्रिलेटर और डीसी बिजली की आपूर्ति होगी। सभी मेडिकल सुविधाएं होंगी। 24 घंटे इसे ऑपरेट किया जाएगा। 2019 में एक लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा दी गई थी, इस बार उससे ज्यादा की उम्मीद है। प्रयागराज जंक्शन पर 10 बेड व्यवस्था रहेगी। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जाएगी। रेलवे चेकिंग स्टाफ, मेडिकल की टीम के अलावा अन्य वॉलिंटियर्स को श्रद्धालुओं की मदद के लिए ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2019 में कई हजार लोगों को स्वास्थ्य सेवा देकर उनकी जान बचाई गई थी। रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम होने से डायबिटीज के पेशेंट, अधिक पैदल चलने से थकान से बेहोशी सहित अन्य मेडिकल समस्या से जूझ रहे लोगों का इलाज किया जाएगा। मेडिकल अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने शहर के सभी प्रमुख और रेलवे के अस्पताल से समन्वय स्थापित किया है। प्रयागराज रेल मंडल महाकुंभ 2025 में आने श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य की जरूरी सुविधाएं प्रदान करने के सभी जरूरी प्रयास किए गए हैं।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- भारत की सनातन धर्म की जो मान्यता है यह दुनिया के सबसे प्राचीन संस्कृति है

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सनातन धर्म की जो मान्यता है यह दुनिया के सबसे प्राचीन संस्कृति है। इसकी तुलना किसी मत मजहब और संप्रदाय से नहीं हो सकती। हजारों वर्षों की विरासत मेरे पास है। इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन भी उतनी ही प्रचीन है। आकाश के भी ऊंचा है सनातन की परंपरा, इसकी तुलना नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक निजी समाचार चैनल द्वारा आयोजित ‘महाकुम्भ महासम्मलेन’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। महाकुम्भ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीएम योगी ने कहा कि देवासुर संग्राम के बाद अमृत की बूंदें चार पवित्र स्थलों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन स्थानों पर महाकुम्भ के आयोजन भारत के ज्ञान, चिंतन और सामाजिक दिशा तय करने का अवसर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ के आयोजन के दौरान भारत के ऋषि-मुनि एकत्र होकर उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंतन करते थे। यह आयोजन न केवल परंपरा का सम्मान है, बल्कि इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना भी आवश्यक है। विरासत और विकास का संगम है महाकुम्भ 2025 : योगी सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि महाकुम्भ का आयोजन भारत में विरासत और विकास के अद्भुत संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2019 के प्रयागराज कुम्भ में यह देखा गया कि कैसे आधुनिक तकनीक, प्रबंधन और संस्कृति का सामंजस्य किया गया। यही प्रयास आने वाले महाकुम्भ में भी होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर महाकुम्भ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस आयोजन से न केवल देश के नागरिक, बल्कि दुनियाभर के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर है। महाकुम्भ राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण है सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण है। यह आयोजन जाति, पंथ और लिंग भेदभाव को समाप्त करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 10 वर्षों में जो प्रगति की है, महाकुम्भ इसका सशक्त माध्यम बनेगा। यह भारत की समृद्धि, विरासत और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रमाण है। सीएम योगी ने कहा कि विदेशी जूठन खाने वाले लोग हमें बदनाम करने में लगे हैं। देश में जातिवाद का जहर घोलकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है। सनातन धर्म हमेशा शिखर पर रहा है राष्ट्रीय एकता और हिंदू एकता पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म हमेशा शिखर पर रहा है। हिंदू एकता और राष्ट्रीय एकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इतिहास गवाह है कि जब हम बंटे हैं, तो कमजोर हुए हैं, और जब एकजुट हुए हैं, तो अजेय बने हैं। इसीलिए मैंने पहले कहा था कि बंटोगे तो कटोगे और एक रहोगे तो नेक रहोगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जाति और मजहब के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। ये वही शक्तियां हैं जो भारत को कमजोर करने का षड्यंत्र रचती हैं। लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। आज यूपी का नागरिक पलायन नहीं कर रहा, माफिया और अपराधी कर रहे हैं। वक्फ के नाम पर जमीन कब्जाने वालों से वापस लेंगे एक-एक इंच जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीन कब्जे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह समझना मुश्किल है कि वक्फ बोर्ड है या भू-माफियाओं का बोर्ड। हमारी सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन किया है और एक-एक इंच जमीन की जांच करवा रही है। जिन लोगों ने वक्फ के नाम पर जमीन कब्जाई है, उनसे जमीन वापस ली जाएगी और गरीबों के लिए आवास, शिक्षण संस्थान और अस्पताल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुम्भ की परंपरा वक्फ से कहीं पुरानी है। सनातन धर्म की ऊंचाई आकाश से भी ऊंची और गहराई समुद्र से भी गहरी है। इसकी तुलना किसी मत या मजहब से नहीं की जा सकती। सीएम योगी ने विपक्ष पर किया तीखा प्रहार सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि अगर भारत को समझना है, तो राम, कृष्ण और शिव की परंपरा को पढ़ो। जो नेता लोहिया जी के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने इनकी बातों को कभी नहीं समझा। उन्होंने अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि हमने अयोध्या को विकास और विरासत का केंद्र बनाया। जो लोग अयोध्या के विकास का विरोध कर रहे थे, उन्हें वहां जाने का नैतिक अधिकार नहीं है। संभल में धार्मिक स्थलों को तोड़कर कब्जा करने का प्रयास हुआ संभल में धार्मिक स्थलों पर विवाद का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल में श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार कल्कि का उल्लेख पुराणों में मिलता है। वहां धार्मिक स्थलों को तोड़कर कब्जा करने का प्रयास हुआ। हमारी सरकार ने न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्रवाई की और दंगाइयों को सख्त संदेश दिया। धर्म परिवर्तन और घर वापसी के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि अगर कोई अंतर्मन से अपने धर्म में लौटना चाहता है, तो उसका स्वागत होना चाहिए। यह धर्म और परंपरा के प्रति जागरूकता का संकेत है।  

भोपाल के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश: मंत्री करण सिंह वर्मा

Instructions to Tehsildars and Naib Tehsildars of Bhopal for timely action: Minister Karan Singh Verma भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्व प्रकरणों के शीघ्र और समयबद्ध निराकरण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। राजस्व मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की चेतावनी देते हुए राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अपने कार्यों में तत्परता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। समयबद्धता पर जोर मंत्री करण सिंह वर्मा ने स्पष्ट किया कि लंबित राजस्व प्रकरणों के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने की प्रक्रिया अपनाएं।उन्होंने कहा, “राजस्व प्रकरणों का समयबद्ध समाधान जनता के प्रति हमारी जवाबदेही को दर्शाता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।” अनावश्यक विलंब नहीं होगा स्वीकार वर्मा ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से न रोका जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। कठोर कार्यवाही की चेतावनी कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मंत्री ने कठोर कार्यवाही की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी जो अपने कर्तव्यों में चूक करेंगे या जानबूझकर प्रकरणों को लंबित रखेंगे, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। जनता का विश्वास बढ़ाने की पहल इस निर्देश का उद्देश्य राजस्व विभाग में जनता का विश्वास बढ़ाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। मंत्री वर्मा ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जनता को उनके प्रकरणों का शीघ्र समाधान मिले और उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समर्पित अधिकारी बने मिसाल मंत्री ने अच्छे प्रदर्शन वाले अधिकारियों की सराहना की और सभी अधिकारियों को उनके उदाहरण का अनुसरण करने की सलाह दी। यह पहल प्रदेश में राजस्व मामलों में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि इन निर्देशों से भोपाल के राजस्व विभाग में सुधार और जनता के लिए सुविधाजनक सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

Delhi: ‘दिल्ली के जाटों को OBC सूची में करें शामिल’, जाट समाज को लेकर अरविंद केजरीवाल ने PM मोदी को लिखा पत्र

arvind kejriwal writes to pm modi to include the jat community of delhi in the center s obc list आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा। केजरीवाल ने लिखा कि केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार जाट समाज के साथ धोखा कर रही है। केंद्र सरकार की वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। केजरीवाल ने पत्र में लिखा, ‘एक महत्वपूर्ण विषय पर 10 साल पहले आपका किया वादा आपको याद दिलाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। दिल्ली के जाट समाज के कई प्रतिनिधियों से पिछले कुछ दिनों में मुलाकात हुई। इन सभी ने केंद्र की ओबीसी लिस्ट में दिल्ली के जाट समाज की अनदेखी किये जाने पर चिंता जाहिर की। जाट समाज के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया कि आपने 26 मार्च 2015 को दिल्ली के जाट समाज के प्रतिनिधियों को अपने घर बुलाकर ये वादा किया था कि जाट समाज, जो दिल्ली की ओबीसी लिस्ट में है, उसे केंद्र की ओबीसी लिस्ट में भी जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें दिल्ली में मौजूद केंद्र सरकार के कॉलेजों और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके।’ केजरीवाल ने आगे लिखा, ‘फिर 8 फरवरी 2017 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी चुनाव से पहले चौधरी बीरेंद्र सिंह के घर पर दिल्ली और देश के जाट नेताओं की मीटिंग बुलाई और उनसे वादा किया कि स्टेट लिस्ट में जो ओबीसी जातियां हैं उनको केंद्र की लिस्ट में जोड़ा जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में फिर भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर अमित शाह जाट नेताओं से मिले और उन्होंने फिर वादा किया कि दिल्ली के जाट समाज को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा लेकिन चुनाव के बाद इस पर कोई काम नहीं हुआ।’केजरीवाल ने लिखा, ‘ओबीसी आरक्षण को लेकर केंद्र की नीतियों में कई विसंगतियां हैं जिनकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। जैसे कि मुझे पता चला कि केंद्र की ओबीसी लिस्ट में होने की वजह से राजस्थान से आने वाले जाट समाज के युवाओं को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली के ही जाट समाज को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि आपकी सरकार ने दिल्ली में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण होने के बावजूद उन्हें केंद्रीय ओबीसी लिस्ट में शामिल नहीं किया है। ये तो दिल्ली के जाट समाज के साथ धोखा है। और भाजपा की केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार ये धोखा कर रही है। सिर्फ जाट समाज ही नहीं रावत, रौनियार, राय तंवर, चारण व ओड, इन सभी जातियों को दिल्ली सरकार ने ओबीसी दर्जा दिया हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार इन जातियों को दिल्ली में मौजूद अपने संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दे रही है।’उन्होंने आगे लिखा, ‘दिल्ली में केंद्र सरकार की सात यूनिवर्सिटी हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के दर्जनों कॉलेज हैं। दिल्ली पुलिस, एनडीएमसी, डीडीए, एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे केंद्र सरकार के कई संस्थानों में नौकरियां हैं जिनमें केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की इस वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। दिल्ली में जाट समाज व ओबीसी की 5 अन्य जातियों के साथ केंद्र सरकार का ये पक्षपातपूर्ण रवैया इन जातियों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर हासिल नहीं होने दे रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत केंद्रीय ओबीसी सूची की विसंगतियों में सुधार कर दिल्ली में ओबीसी दर्जा प्राप्त सभी जातियों को केंद्र सरकार के संस्थानों में भी आरक्षण का लाभ देना चाहिये।

स्मार्ट मीटर से की छेड़छाड़ तो अफसर के पास पहुंचा मैसेज, टीम ने 27 हजार का ठोका जुर्माना

damoh when smart meter was tampered with message reached the officer team caught electricity theft imposed fine of 27 thousand शहर में स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी बिजली चोरी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। बुधवार शाम टंडन बगीचा क्षेत्र में एक स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ का संदेश बिजली अधिकारियों को मिला। तुरंत कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग की टीम उपभोक्ता के घर पहुंची और मामला दर्ज कर 27,242 रुपये का जुर्माना लगाया। बिजली कंपनी के अधीक्षण अभियंता एमएल साहू ने बताया कि टंडन बगीचा क्षेत्र में प्रदीप कुमार जैन के परिसर में लगे स्मार्ट मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चोरी की सूचना प्राप्त हुई। कनिष्ठ अभियंता प्रदीप परिहार और लाइनमैन ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया, जहां पाया गया कि स्मार्ट मीटर में अलग से लूप लगाकर बिजली चोरी की जा रही थी। मौके पर विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया और बिजली आपूर्ति काट दी गई। साथ ही उपभोक्ता पर जुर्माना लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना दमोह में आवेदन दिया गया।अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर की तकनीक से छेड़छाड़ की घटनाओं का तुरंत पता चलता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होती है। हालांकि, यह घटनाएं अभी भी बिजली चोरी की समस्या को पूरी तरह खत्म करने में विफल रही हैं।

उमरिया में फिर हुई बाघ की मौत, जिम्मेदारों का हर बार की तरह जवाब- आपसी संघर्ष में गई होगी जान

Tiger died again in Umaria उमरिया जिले में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर के खितौली बीट (कक्ष क्रमांक RF 501) में एक मादा बाघ का शव मिला। मृत बाघिन की उम्र लगभग 1 वर्ष बताई गई है। यह घटना 8 जनवरी की है, जब वन विभाग की गश्ती टीम को एक सावक की मौत की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण दो बाघों के बीच आपसी संघर्ष बताया गया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघों की मौत के मामलों में प्रशासन लापरवाही बरतते हुए इन्हें आपसी द्वंद्व बताकर मामले को खत्म कर देता है। सूचना मिलने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी ने मौके पर टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। वन विभाग, राजस्व विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघिन का पोस्टमार्टम किया गया। घटना स्थल से नमूने एकत्र कर 8 जनवरी को प्रयोगशाला भेजे गए। पोस्टमार्टम के बाद बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और बाघों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमित गश्ती और प्रभावी जांच के अभाव में बाघों की मौत के असली कारणों का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। बाघों की संख्या घटने के पीछे के वास्तविक कारणों की गहन जांच और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

कांग्रेस से आए नेताओं ने भी बिगाड़ा भाजपा जिलाध्यक्षों के चयन का समीकरण, अब फैसला दिल्ली से

District presidents of BJP in Madhya Pradesh भोपाल (District presidents of BJP in Madhya Pradesh)। मध्य प्रदेश में जिलाध्यक्षों के चयन का राजनीतिक समीकरण बिगाड़ने के पीछे भाजपा के दिग्गज नेता तो हैं हीं, कांग्रेस से आए नेताओं के कारण भी यह चुनाव प्रभावित हुआ है। ग्वालियर-चंबल में जिलाध्यक्ष के चयन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का हस्तक्षेप रहा है, तो सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पारुल साहू की वजह से राजनीतिक समीकरण बिगड़े हैं। इंदौर में मंत्री तुलसी सिलावट और संजय शुक्ला का दबाव रहा, तो गुना, नीमच, मंदसौर भी यही हाल है। यहां यह सभी नेता कांग्रेस से भाजपा में आए हैं, जिन्हें मूल भाजपाई आज भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में मूल भाजपाई और आयातित नेताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। संघ से प्रस्तावित नाम भी दरकिनार संघ ने जो नाम प्रस्तावित किए थे, उनको भी दरकिनार किया गया और दिग्गज नेताओं के दबाव में सूची तैयार कर ली गई। इन सब के बीच अब केंद्रीय नेतृत्व ने कमान अपने हाथ में ले ली है।दिल्ली में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संगठन पर्व की केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडेय के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने दिल्ली में जिलाध्यक्षों के नामों पर विचार विमर्श किया।बताया जा रहा है कि नामों पर सहमति बन गई है। जल्द ही जिलाध्यक्षों की सूची जारी की जा सकती है। हालांकि नामों सूची में बड़े शहरी जिले अभी रोके जाएंगे। जहां विवाद स्थिति नहीं है, उन जिलों के अध्यक्षों की ही घोषणा की जाएगी।इधर, यह भी बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश का नया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे न बढ़े, इस हिसाब से जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी जाएगी। पहली सूची 35 से 40 नामों की आ सकती है। दो जनवरी से चल रहा है मंथन, फिर भी जिलाध्यक्ष नहीं चुन पाई भाजपादो जनवरी से लगातार जिलाध्यक्षों के नामों पर मंथन किया जा रहा है। पार्टी प्रदेश के 60 संगठनात्मक जिलों में से 35 से 40 जिलों के अध्यक्षों के नामों पांच जनवरी को घोषित करने वाली थी, लेकिन छह जनवरी को पुन: सूची पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विष्णुदत्त शर्मा, हितानंद ने दो घंटे तक मंथन किया था और पार्टी पदाधिकारियों द्वारा मंगलवार तक सूची जारी करने की बात कही जा रही थी। इन पांच दिनों में प्रदेश नेतृत्व ने बैठक कर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बैठाते हुए सूची तैयार की। लेकिन कुछ नामों पर सहमति नहीं बनने से यह जारी नहीं हो सकी।

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