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शीतकाल में मकर संक्रांति पर्व से पहले तिल की गजक व लड्डू से बाजार महकने लगे, बाजार में बिक रही 15 से अधिक प्रकार की गजक

जबलपुर शीतकाल में मकर संक्रांति पर्व से पहले तिल की गजक व लड्डू से बाजार महकने लगे हैं। गजक, लड्डू, काजू पट्टी, काजू रोल, तिल की वर्फी के साथ विभिन्न प्रकार की गजक रोजाना तैयार की जा रही है। एक दुकान पर पचास से साठ किलो माल रोज तैयार हो रहा है। सर्दी के चलते बाजारों में गजक व तिल के मिष्ठानों की दुकानें सज चुकी हैं, जिनसे लोग जमकर खरीद कर रहे हैं। हालांकि बीते कुछ वर्षों के दौरान तिल, गुड़ की मिठाईयां, गजक महंगी हुई है। इसके बावजूद गजक और तिल-गुड़ के लड्डुओं की महक लोगों को पूर्ववत दुकानों की ओर आकर्षित कर रही है। इस मकर संक्रांति पर बाजार में 15 से अधिक तरह की गजक लोगों के लिए उपलब्ध हैं। सादा गजक, तिल के लड्डू की डिमांड-मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बनी मिठाई का विशेष महत्व होता है।   सादा गजक और तिल के लड्डू की डिमांड सबसे ज्यादा यही वजह है कि बाजारों में बड़ी तादाद में गुड़ और तिल से बनी मिठाई लोगों के लिए उपलब्ध है। मकर संक्रांति पर पूजा में इस्तेमाल के अलावा लोग इसका उपयोग दान-पुण्य में भी करते हैं। इस बार सबसे ज्यादा सादा गजक और तिल के लड्डू की डिमांड है। गजक व्यवसायी बताते हैं कि सर्दी ज्यादा पड़ने के कारण इस साल बाजार में रौनक अच्छी है। इस मकर संक्रांति पर अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। शुक्ला नगर निवासी वृद्धा चंद्रकला देवी कहती हैं, ‘एक समय था जब पौष शुरू होते ही बाजार से सफेद व काला तिल खरीदकर ले आते थे। तिल को धोकर उसे सुखाया जाता था फिर उसे चुना जाता था।’ ‘इसके बाद कड़ाही में सेंककर उसमें गुड़ की चाशनी मिलाकर लड्डू बनाए जाते थे। भगवान को भोग लगाकर पूरे माह लड्डू खाते थे, खासकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से डिब्बा भरकर लड्डू बनते थे।’ ‘अब इतनी मेहनत करने की हमारी उम्र नहीं रही और वर्तमान पीढ़ी की बहूओं को लड्डू बनाने में कोई रुचि नहीं रह गई है। इसलिए बाजार से लड्डू खरीदकर लाते हैं और पूजन की परंपरा निभाते हैं।’ मकर संक्रांति पर तिल का है विशेष महत्व मकर संक्रांति पर तिल खाने और दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग स्नान इत्यादि करने के बाद काले और सफेद तिल से बनीं वस्तुओं का दान करते हैं।

आखिर संतों के आश्रमों को अखाड़ा क्यों कहा जाने लगा, इस बारे में जानकार मानते हैं कि यहां अखाड़ा का भाव अखंड से है

प्रयागराज अखाड़ा शब्द सुनते ही हमारे जेहन में पहलवानों और उनके मल्ल युद्ध करने की तस्वीरें उभरने लगती हैं। लेकिन आध्यात्मिक क्षेत्र में अखाड़े संतों के होते हैं। निर्मोही अखाड़ा, जूना अखाड़ा, शंभू पंच दशनाम अखाड़ा समेत संतों के कई अखाड़े हैं, जो चर्चा में रहते हैं। फिलहाल सभी अखाड़ों के संत महाकुंभ 2025 में पहुंचे हुए हैं और उनके अस्थायी आश्रम ही बन गए हैं। करोड़ों की संख्या में महाकुंभ पहुंचने वाले लोग भी अलग-अलग अखाड़ों में जाकर संतों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। लेकिन यह सवाल भी बनता है कि आखिर संतों के आश्रमों को अखाड़ा क्यों कहा जाने लगा। इस बारे में जानकार मानते हैं कि यहां अखाड़ा का भाव अखंड से है। दरअसल अखण्ड शब्द ही अपभ्रंश होते-होते अखाड़ा बन गया। यहां अखंड से आध्यात्मिक भाव यह है कि जिसका विभाजन न हो सकता हो। आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा हेतु साधुओं के संघों को मिलाने का प्रयास किया था। उसी प्रयास के तहत सनातन धर्म की रक्षा एवं मजबूती बनाए रखने एवं विभिन्न परम्पराओं व विश्वासों का अभ्यास करने वालों को एकजुट करने तथा धार्मिक परम्पराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए विभिन्न अखाड़ों की स्थापना हुई। अखाड़ों से सम्बन्धित साधु-सन्तों की विशेषता यह होती है कि इनके सदस्य शास्त्र और शस्त्र दोनों में पारंगत होते हैं। अखाड़ा सामाजिक-व्यवस्था, एकता, संस्कृति तथा नैतिकता का प्रतीक है। समाज में आध्यात्मिक मूल्यों की स्थापना करना ही अखाड़ों का मुख्य उद्देश्य है। अखाड़ा मठों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। इसीलिए धर्म गुरुओं के चयन के समय यह ध्यान रखा जाता है कि उनका जीवन सदाचार, संयम, परोपकार, कर्मठता, दूरदर्शिता तथा धर्ममय हो। भारतीय संस्कृति एवं एकता इन अखाड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अलग-अलग संगठनों में विभक्त होते हुए भी अखाडे़ एकता के प्रतीक हैं। नागा संन्यासी अखाड़ा मठों का एक विशिष्ट प्रकार है। प्रत्येक नागा संन्यासी किसी न किसी अखाड़े से सम्बन्धित रहते हैं। ये संन्यासी जहाँ एक ओर शास्त्र पारंगत होते हैं वहीं दूसरी ओर शस्त्र चलाने का भी इन्हें अनुभव होता है। वर्तमान में अखाड़ों को उनके इष्ट-देव के आधार पर निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। तीन प्रकार के होते हैं अखाड़े- शैव अखाड़े: इस श्रेणी के इष्ट भगवान शिव हैं। ये शिव के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं। वैष्णव अखाड़े: इनके इष्ट भगवान विष्णु हैं। ये विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं। उदासीन अखाड़ा: सिक्ख सम्प्रदाय के आदि गुरु श्री नानकदेव के पुत्र श्री चंद्रदेव जी को उदासीन मत का प्रवर्तक माना जाता है। इस पन्थ के अनुयाई मुख्यतः प्रणव अथवा ‘ॐ’ की उपासना करते हैं।

टीम स्मृति मंधाना की कप्तानी में आयरलैंड के खिलाफ आज शुरू हो रही वनडे श्रृंखला में इस लय को कायम रखना चाहेगी भारत

राजकोट वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय टीम स्मृति मंधाना की कप्तानी में आयरलैंड के खिलाफ आज शुरू हो रही पहली महिला द्विपक्षीय वनडे श्रृंखला में इस लय को कायम रखना चाहेगी। भारत ने वेस्टइंडीज को वनडे श्रृंखला में 3.0 से और टी20 में 2.1 से हराया। मंधाना ने दोनों प्रारूपों में सर्वाधिक रन बनाये जिसमें वनडे श्रृंखला में 148 और टी20 में 193 रन शामिल है। मंधाना उसी फॉर्म को आयरलैंड के खिलाफ श्रृंखला में जारी रखना चाहेंगी। नियमित कप्तान हरमनप्रीत कौर की गैर मौजूदगी में वह कप्तानी की भी जिम्मेदारी संभालेंगी। हरमनप्रीत और तेज गेंदबाज रेणुका सिंह को आराम दिया गया है। हरमनप्रीत और रेणुका की गैर मौजूदगी में हरलीन देयोल, प्रतीका रावल और जेमिमा रौड्रिग्स पर रन बनाने की जिम्मेदारी होगी। देयोल ने वनडे श्रृंखला में 160 रन बनाये जबकि रावल ने 134 और जेमिमा ने 112 रन का योगदान दिया। गेंदबाजी में रेणुका की कमी खलेगी जिन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ दस विकेट लिये थे। अब नई गेंदबाज टिटास साधू और साइमा ठाकोर पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। वनडे में तीन और टी20 में 13 विकेट ले चुकी साधू पर शुरूआती विकेट लेने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी रफ्तार और स्विंग से प्रभावित किया है। वहीं साइमा ने अब तक आठ वनडे में सात विकेट लिये हैं। आफ स्पिनर और उपकप्तान दीप्ति शर्मा की भूमिका भी अहम होगी जिसने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में 31 रन देकर छह विकेट लिये। उनका साथ देने के लिये प्रिया मिश्रा और तनुजा कंवर होंगी। हरफनमौला राघवी बिष्ट और सयाली सतघारे को भी टीम में जगह दी गई है जो इस मौके को भुनाना चाहेंगी। दूसरी ओर गैरी लुईस की कप्तानी वाली आयरलैंड टीम के लिये भारत की चुनौती कठिन होगी। आयरलैंड टीम ने अब तक 12 वनडे में एक भी बार भारत को नहीं हराया है। आखिरी बार दोनों टीमों का सामना 2023 टी20 विश्व कप में हुआ था जब भारत ने पांच रन से जीत दर्ज की थी। टीमें : भारत : स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा, प्रतीका रावल, हरलीन देयोल, जेमिमा रौड्रिग्स, उमा छेत्री, रिचा घोष, तेजल हसंबिस, राघवी बिष्ट, मिन्नू मनी, प्रिया मिश्रा, तनुजा कंवर, टिटास साधू, साइमा ठाकोर, सयाली सतघारे। आयरलैंड : गैबी लुईस (कप्तान), एवा केनिंग, क्रिस्टिना रीली, अलाना डालजेल, लौरा डेलानी, जॉर्जिना डेंपसे, सारा फोर्ब्स, अर्लेने केली, जोआना लोगरान, एमी मागिरे, लीह पॉल, ओर्ला प्रेंडेरगास्ट, उना रेमंड होए, फ्रेया सार्जंट, रेबेका स्टोकेल।  

आज वानिकी सम्मेलन एवं आईएफएस मीट का शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में पं. खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय सभागृह नेहरू नगर भोपाल में 10 जनवरी को प्रात: 11 बजे वानिकी सम्मेलन एवं आईएफएस मीट का शुभारंभ होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार करेंगे1 कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव और आईएफएस अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो दिनों तक घने से बहुत घना कोहरा जारी रहने वाला है, इस दिन होगी बारिश

लखनऊ यूपी समेत उत्तर भारत में सर्दी का सितम जारी है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो दिनों तक घने से बहुत घना कोहरा जारी रहने वाला है। साथ ही, तेज हवाओं की जवह से उत्तर पश्चिम भारत में 10-12 जनवरी के बीच वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर देखा जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में 11 जनवरी को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप में भारी से बहुत भारी बरसात हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोल्ड से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति रही। पंजाब में शीतलहर चली। पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मेघालय में बहुत घना कोहरा रहा, जिससे विजिबिलिटी कम होकर 50 मीटर से भी कम हो गई। मौसम विभाग ने बताया है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 11 और 12 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश होगी। साथ ही, उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत में 10-12 जनवरी के बीच बरसात होने जा रही है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश में 11 जनवरी को बारिश होगी। आंधी तूफान का भी अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, दक्षिणी हरियाणा और राजस्थान में 11 जनवरी को ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के तापमान की बात करें तो जम्मू कश्मीर, लद्दाख में इस समय शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे मिनिमम टेम्प्रेचर चल रहा है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में एक से चार डिग्री के बीच चल रहा है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान 5-10 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले चार दिनों में उत्तर पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस बढ़ने वाला है। हालांकि, उसके बाद फिर से दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। मध्य भारत में अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी और फिर दो डिग्री तक तापमान कम हो जाएगा। पूर्वी भारत में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। महाराष्ट्र और गुजरात में अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने वाली है। यूपी में घने कोहरे का अलर्ट यूपी के लिए मौसम विभाग का अलर्ट है कि दस जनवरी तक सुबह और शाम के समय घना कोहरा देखने को मिलेगा। साथ ही, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 10 जनवरी तक घना कोहरा रहेगा। राजस्थान में 12 जनवरी तक बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।

साय मंत्रिमंडल का विस्तार 15 जनवरी तक, छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं, प्रदेश में तीन नए मंत्री शपथ ले सकते

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 15 जनवरी तक हो सकता है। चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार की घोषणा 12 या 13 जनवरी को हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। हरियाणा की तर्ज पर 90 सीट वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश में तीन नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद प्रदेश भाजपा का समीकरण भी बदलेगा। चर्चा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव भी मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में भाजपा संगठन में भी बदलाव देखन को मिल सकता है। मीडिया से चर्चा करते हुए विष्णु देव साय ने कहा कि बहुत जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। रायपुर पहुंचे भाजपा प्रभारी ने कहा- जल्द होगा विस्तार वहीं रायपुर पहुंचे भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन से मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण की तैयारी को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि जब भी तैयारी होगी, इसकी सूचना आपको पहले होगी और जल्द होगी। 10 जनवरी तक होना है भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव प्रदेश भाजपा ने मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर ली है। अब 10 जनवरी तक प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त होना है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को मंत्री बनाया गया तो उनकी जगह भाजपा को नया अध्यक्ष मिलेगा। महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावडे को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं। इसमें विधायक धरमलाल कौशिक, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, दुर्ग के पूर्व सांसद विजय बघेल का नाम चर्चा में है। इसके अलावा पूर्व मंत्री विक्रम उसेंडी और पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा के नाम की भी चर्चा है। पार्टी नेताओं के अनुसार सिंहदेव यदि मंत्री बनाए जाते हैं तो उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना होगा। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज को साय सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। यह दर्जा उन्हें शिष्टाचार के लिए प्रदान किया गया है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी किया है। ये प्रमुख मंत्री पद के दावेदार अमर अग्रवाल: बिलासपुर विधानसभा से विधायक हैं। सामान्य वर्ग से आने वाले अग्रवाल पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं। विभाग को संभालने का उनके पास बखूबी अनुभव है। किरण सिंह देव: जगदलपुर के विधायक किरण सिंह देव प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं। इनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर जीत मिली है। बस्तर से बड़ा चेहरा हैं इसलिए उन्हें मौका मिल सकता है। गजेंद्र यादव: दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से है। वह छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संघ चालक रहे बिसराराम यादव के बेटे हैं। रायपुर में कई दावेदार: रायपुर में पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा और विधायक गुरु खुशवंत साहेब का नाम भी मंत्री पद के लिए चर्चा में है।

शंकराचार्य ने कहा- आज हमारे प्राचीन स्थल अगर हमको वापस मिल रहे हैं, इसमें कोई गलत नहीं है यह हमारा अधिकार है.

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने बड़ा बयान दिया है. सदानंद सरस्वती का कहना है कि महाकुंभ में हम गंगा स्नान करते हैं, हनुमान जी की पूजा करते हैं, देवताओं का आह्वान करते हैं तो ऐसी जगह पर गैर-हिंदुओं का जाने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि वह तो न गंगा स्नान करते हैं न हमारे देवी देवताओं का सम्मान करते हैं. ऐसे में महाकुंभ में गैर-हिंदुओं के जाने से कोई मतलब का नहीं है. इसके साथ-साथ शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मुगलों ने देश में राज किया और केवल हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों पर ही अपनी मस्जिद बनाई, जबकि उस जमाने में तो मंदिरों के अलावा भी बहुत सारी भूमि उनके कब्जे में थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर मंदिरों को ही तोड़कर मस्जिद बनाई है. उन्होंने कहा कि अगर आज खुदाई हो रही है तो कोई गलत बात नहीं है क्योंकि हमारी परंपरा और संस्कृति उन्होंने मिटाने का काम किया. द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य ने कहा कि आज हमारे प्राचीन स्थल अगर हमको वापस मिल रहे हैं, इसमें कोई गलत नहीं है यह हमारा अधिकार है. मुसलमानों के दुकान लगाने को लेकर क्या बोले महंत रवींद्र पुरी? इससे पहले महाकुंभ में मुसलमानों के दुकान लगाने को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों से कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन वे प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान दुकानें नहीं लगानी चाहिए क्योंकि वे हमारे धर्म को भ्रष्ट कर देंगे. वे किराने, जूस की दुकानें, खाने के स्टॉल और चाय की दुकानें नहीं लगा सकते हैं क्योंकि वे जानबूझकर भोजन पर थूकते हैं.

हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा, भगवान राम से मर्यादा सीखेगा चीन!

नई दिल्ली, बीजिंग भारत और चीन भले ही पड़ोसी मुल्क हैं, लेकिन दोनों के बीच सांस्कृतिक अंतर काफी गहरे हैं। इस बीच चीन ने एक बड़ी पहल की है। इसके तहत हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा। यह कार्यक्रम 25 जनवरी को बीजिंग के शुनयी ग्रैंड थिएटर में शाम को 7 बजे होगा। भारत में स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यु जिंग ने इस बारे में जानकारी दी है। यु जिंग ने एक्स अकाउंट पर इसके बारे में जानकारी दी है, जिस पर लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह चीन की रिश्तों को सुधारने के लिए एक अच्छी पहल है, जिसका स्वागत होना चाहिए। यही नहीं कई यूजर्स ने लिखा है कि सनातन धर्म के मूल्य ही ऐसे हैं कि 21वीं सदी में पूरी दुनिया को उनसे सीख मिलती है। चीन में रामायण पर होने वाली यह प्रस्तुति प्रोफेसर जि शियानलिन के संस्कृत से मंदारिन में किए गए अनुवाद पर आधारित होगी। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन भारतनाट्यम एक्सपोनेंट से जुड़े जिन शानशान करने वाले हैं। यह कार्यक्रम बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से किया जा रहा है। चीन में रामायण के मंचन को लेकर शीर्ष सरकारी सूत्रों की ओर से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन साफ है कि भारत के साथ शी जिनपिंग सरकार रिश्ते सुधारना चाहती है। 2020 में लद्दाख में सीमा पर दोनों सैनिकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी। इसके बाद कई सालों तक दोनों देशों के रिश्तों में बर्फ जमी रही, लेकिन बीते कुछ महीनों में रिश्ते सहज होते दिखे हैं।एक तरफ सीमा विवादों को निपटाने के लिए दोनों देश आगे आए हैं तो वहीं लद्दाख में सैनिकों को भी थोड़ा पीछे हटाया गया है। इस तरह सीमा पर रिश्तों में पिघली बर्फ का असर अब सांस्कृतिक और राजनयिक रिश्तों में भी दिख रहा है।

जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था, वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2,400 करोड़ रुपये की लागत से सुरंग का उद्घाटन करेंगे

गांदरबल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी को श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 2,400 करोड़ रुपये की लागत से बनी रणनीतिक जेड-मोड़ सुरंग (Z-Morh tunnel) का उद्घाटन कर सकते हैं। यह 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग लद्दाख क्षेत्र को पूरे साल सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह वही सुरंग है जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था। यह सुरंग गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में आती है। गगनगीर में हुए हमले में एक स्थानीय डॉक्टर और बिहार के दो मजदूरों सहित सात लोगों की जान चली गई थी। जेड-मोड़ सुरंग निर्माण स्थल पर हुए इस हमले में दो आतंकवादी शामिल थे। रक्षा जरूरतों और लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिहाज से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो प्रधानमंत्री खुद वहां मौजूद रहकर सुरंग का उद्घाटन करेंगे। लेकिन अगर खराब मौसम रहा तो इस स्थिति में सुरंग का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस सुरंग परियोजना का नाम लिए बिना सोशल मीडिया पर इसे पर्यटन के विस्तार के लिए एक “गेम चेंजर” बताया। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से मध्य कश्मीर, आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है। यह परियोजना घाटी में सर्दी के पर्यटन के विस्तार के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगी।” गौरतलब है कि कंगन के गंड क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-सोनमर्ग सड़क सर्दियों के महीनों में बंद रहती है। जेड-मोड़ सुरंग के खुलने से यह सड़क सालभर खुली रहेगी, जिससे सोनमर्ग क्षेत्र में सर्दी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रीनगर-लेह सड़क को सालभर चालू रखने के लिए जोजिला सुरंग पर भी काम जारी है। जेड-मोड़ सुरंग परियोजना का काम मई 2015 में शुरू हुआ था और इसे पिछले साल पूरा कर लिया गया। फरवरी 2024 में सुरंग का सॉफ्ट ओपनिंग किया गया था। सुरंग के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह बर्फीले इलाकों में खतरनाक और हिमस्खलन-प्रवण मार्ग का विकल्प भी प्रदान करेगी।

नहीं आएगी जिला अध्यक्षों की सूची, भाजपा में घमासान के चलते बदला नियुक्ति का फार्मुला

bjp sangathan election bjp sangathan election list of district president will not be released due to tussle in mp bjp BJP Sangathan Election: भाजपा में जिला अध्यक्षों की सूची की राह देख रहे पार्टी कार्यकर्ताओं का इंतजार अब खत्म हो गया है। क्योंकि दिल्ली में दो दिन तक चली मंत्रणा के बाद अब नया फॉर्मूले पर सहमति बनी है। दरअसल, भाजपा नेताओं के बीच आपसी विवाद इतना गहराया कि संगठन ने घोषणा का तरीका ही बदल दिया। सूत्रों के मुताबिक संगठन सूची जारी कर विवाद से बचना चाह रहा है। इसलिए चुनाव अधिकारियों को जिला अध्यक्षों के घोषणा की जिम्मेदारी दे गई है। अब जिला निर्वाचन अधिकारी ऊपर से बताए गए नाम पर सभी की सहमति बनाकर जिला अध्यक्षों की घोषणा करेंगे और वहां उपजे विवाद को भी संभालेंगे।विवाद के बीच संगठन की नसीहतसूची के इंतजार के बीच गुरुवार सुबह प्रदेश संगठन के नेताओं की वर्चुअल बैठक बुलाई गई। जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दो टूक नसीहत देते हुए कहा है कि जिला अध्यक्ष बनने के बाद उनके चहेते नेता के घर के बजाय पार्टी कार्यालय में स्वागत सत्कार का कार्यक्रम होना चाहिए।वहीं बैठक में जुड़े प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने सभी नेताओं को नए जिला अध्यक्ष मिलने से पहले बधाई दी। कहा कि सभी को साथ मिलकर संगठन के कार्यों को धरातल पर उतारना है। बता दें बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ सभी जिला निर्वाचन अधिकारी भी मौजूद रहे।पर्यवेक्षक बताएंगे जिलाध्यक्षों के नामसंगठन ने इतने विवाद के बाद भी लोकतांत्रित व्यवस्था का फॉर्मूला बरकरार रखा है। राष्ट्रीय संगठन की ओर से तय की गई अंतिम सूची के नामों को प्रदेश संगठन द्वारा पर्यवेक्षकों को बताया जाएगा। फिर पर्यवेक्षक जिला निर्वाचन अधिकारी को उन नामों के बारे में बताएंगे। जहां से घोषणा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक तय होने वाले नाम को सीधे मैसेज कर पार्टी कार्यालय बुलाया जाएगा। इस दौरान वर्तमान जिला अध्यक्ष और निवर्तमान जिला अध्यक्ष को भी पूरी जानकारी दी जाएगी।

Mahakumbh 2025: सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है, कुंभ मेला का होते हैं मुख्य आकर्षण

mahakumbh 2025 biggest juna akhara in india kumbh mela akhadas history Mahakumbh 2025: महाकुंभ सनातन धर्म का सबसे बड़ा मेला है. इस मेले में देश-दुनिया से लाखों-करोड़ों लोग आते हैं. महाकुंभ में अखाड़े आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं. इस दौरान अखाड़ों का पेशवाई और नगरप्रवेश होता है. सभी अखाड़ों की अपनी भूमिका होती है. महाकुंभ 2025 प्रयागराज में साधु-संतों के अखाड़े प्रवेश कर रहे हैं. आइए जानते हैं महाकुंभ का सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है. महाकुंभ शुरू – 13 जनवरी 2025महाकुंभ समाप्त – 26 फरवरी 2025अखाड़ा क्या है ? (What is Akhara) अखाड़ा नाम सुनते ही मन में कुश्ती की तस्वीर आती है लेकिन साधु-संतों के संदर्भ में अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के मठ कहे जा सकते हैं. अखाड़ा साधुओं का वह दल होता है जो शस्त्र विद्या में निपुण होता है. किसने की अखाड़े की शुरुआत अखाड़ों की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र विद्या में निपुण साधुओं के संगठन बनाए थे. अभी कुल 13 अखाड़े हैं, जिन्हें 3 कैटेगरी शैव, वैष्णव और उदासीन में बांटा गया है. कितने अखाड़े हैं शैव अखाड़े- शैव संप्रदाय के कुल सात अखाड़े हैं। इनके अनुयायी भगवान शिव की पूजा करते हैं.वैष्णव अखाड़े – वैष्णव संप्रदाय के तीन अखाड़े हैं, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा करते हैं.उदासीन अखाड़े – उदासीन संप्रदाय के भी तीन अखाड़े हैं, इस अखाड़े की अनुयायी ‘ॐ’ की पूजा करते हैं.महाकुंभ में सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है ? श्री पंचदशनाम जूना आखाड़ा को शैव संप्रदाय का सबसे बड़ा अखाड़ा माना गया है. महा इसकी स्थापना उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 1145 में हुई.इस अखाड़े के इष्ट देव शिव और रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं. इसका मुख्यालय वाराणसी में हैं.यह अखाड़ा नागा साधुओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है.नागा साधुओं की सर्वाधिक संख्या इसी अखाड़े में पाई जाती है. इसमें लगभग 5 लाख नागा साधु और महामंडलेश्वर संन्यासी हैं.इस अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज हैं और अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी हैं.जूना अखाड़े की पेशवाई महाराजाओं की शान-ओ-शौकत जैसी होती है. इसमें स्वर्ण रथ समेत कई तरह के वैभव नजर आते हैं. इस अखाड़े की पेशवाई में हाथी भी शामिल होता है.

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की एक और गारंटी, RWA के तहत होगी सिक्योरिटी गार्ड की नियुक्ति

arvind kejriwal one more guarantee to delhite security guards appointed through rwa Delhi Vidhan sabha Chunav 2025: दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आमदी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार को लेकर मचे घमासान के बीच दिल्ली वालों को एक और गारंटी देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती आरडब्लूए के जरिए होगी. उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली में लोग डरे हुए हैं. बीजेपी दिल्ली वालों से नफरत करती है. ‘दिल्ली को बना दिया क्राइम कैपिटल’ आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली को बीजेपी खासकर अमित शाह ने क्राइम कैपिटल बना दिया है. बीजेपी को दिल्लीवालों से कुछ लेना देना नहीं है, लेकिन हम दिल्लीवासियों के लिए काम कर रहे हैं.

World Hindi Day 2025 : वैश्विक पटल पर हिन्दी की बढ़ती प्रतिष्ठा

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हिन्दी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना और इसकी महत्ता को उजागर करना है। World Hindi Day 2025 की थीम “हिन्दी: वैश्विक संवाद का सेतु” है, जो हिन्दी को एक अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में एक और कदम है। इतिहास और महत्व: World Hindi Day 2025 की शुरुआत 10 जनवरी 2006 में हुई थी। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन, दुनिया भर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। 50 से अधिक देशों में इसे पढ़ाया जाता है और लगभग 60 करोड़ लोग इसे अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2025 में हिन्दी की भूमिका: इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर तकनीक, शिक्षा, और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में हिन्दी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल युग में हिन्दी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, और कंटेंट क्रिएशन में हिन्दी की प्रमुखता ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वैश्विक मंच पर हिन्दी:-संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी:** संयुक्त राष्ट्र के कई मंचों पर हिन्दी में वक्तव्य दिए जा रहे हैं, जिससे इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है।-शिक्षा और तकनीक:** दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा को प्रमुख विषय के रूप में अपनाया जा रहा है।-सिनेमा और साहित्य:** हिन्दी सिनेमा और साहित्य ने वैश्विक दर्शकों को प्रभावित किया है। हिन्दी में अनुवादित साहित्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहा है। भारत सरकार और हिन्दी का प्रचार-प्रसार: भारत सरकार ने हिन्दी के प्रचार के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ई-हिन्दी पोर्टल, विश्व हिन्दी सम्मेलन, और विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी के शिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। विश्व हिन्दी दिवस के कार्यक्रम: 2025 में इस दिन को विशेष बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं: विश्व हिन्दी दिवस हमें हमारी मातृभाषा की शक्ति और महत्ता का एहसास कराता है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और विश्व से जुड़ने का माध्यम है। 2025 में, हमें हिन्दी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। आइए, इस दिन संकल्प लें कि हिन्दी को हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे। “हिन्दी है हमारी पहचान, इसे बनाएं विश्व की शान!”

राशिफल, शुक्रवार 10 जनवरी 2025, जानिए क्या कहती है आपकी राशि

मेष राशि- आपको किसी भी काम का ज्यादा प्रेशर लेने की जरूरत नहीं है। आज आपको बीच का रास्ता अपनाने की सलह दी जाती है। संतुलन बनाना जरूरी है। व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह एक अच्छा दिन है। वृषभ राशि- जिस व्यक्ति से आप प्यार करते हैं, उसे यह बताने के लिए बहुत साहस की आवश्यकता होती है कि आपके रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को उधार दिया हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद कर सकते हैं। मिथुन राशि- पारिवारिक विवाद को सुलझाने का आपका प्रयास सफल होने की संभावना है। अपने नियमित व्यायाम से ब्रेक लेने से आपको लाभ होगा। आपने व्यवसाय में पैसा खो दिया है, तो आप इसे फिर से कमाने के लिए तैयार रहें। कर्क राशि- सफलतापूर्वक पूरा हुआ कोई प्रोजेक्ट आपको प्रतिष्ठा के पद पर पहुंचा सकता है। हो सकता है किसी मुद्दे पर परिवार आपके साथ न हो। कुछ स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई के मामले में सुधार होने की संभावना है। सिंह राशि- आज का दिन आपको रोमांटिक शाम बिताने का मौका दे सकता है। ऑफिस में आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकता है, जो थोड़ा दबंग है। कभी-कभी आपको लोगों को उनकी इच्छाओं के अनुसार चलने देना चाहिए। कन्या राशि- आज आप दूसरों को अपनी खुशी में इनवॉल्व करना चाहेंगे, लेकिन हो सकता है कि वे तैयार न हों। अपना समय लें लेकिन यह ध्यान रखें कि आपको अपनी यात्रा अकेले ही पूरी करनी होगी। तुला राशि- लोगों को खुश करने की कोशिश में खुद पर तनाव नहीं डालना चाहिए। स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन कोई गंभीर बात नहीं होगी। आप अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वृश्चिक राशि- किसी मुद्दे पर चिंता आपको परेशान कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक नहीं। वित्तीय मोर्चे पर स्थिरता कुछ लोगों के लिए राहत बनकर आएगी। कुछ लोगों को कमाई बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। धनु राशि- अपनी क्षमता के अनुसार काम करने से इनाम मिलता है, जो आपको प्रमोशन और तारीफ के रूप में मिल सकता है। आपने जो कमाया है, उसका पूरा लाभ उठाएं। यह तो बस आपकी यात्रा की शुरुआत है। मकर राशि- संपत्ति का कोई मसला सही ढंग से सुलझने की संभावना है। स्टूडेंट्स के लिए शिक्षा के मामलें में अतिरिक्त प्रयास करने का समय है। दोस्तों के साथ बाहर जाने से आपका ध्यान कुछ जरूरी मामलों से हट जाएगा। कुंभ राशि- आप दुनिया को दूसरों से अलग रूप में देखते हैं। आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप कोई दरवाजा खुलता हुआ देखें तो मौके को हाथ से न जाने दें। खर्च कम करें। मीन राशि- आपने जो सोच रखा है, उसे हासिल करने से आपको कोई नहीं रोक सकता। किसी मेहमान के घर में आने से काफी उत्साह भरने की संभावना है। सुस्ती के कारण आपकी फिटनेस दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव में अवैध जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले की एसआईटी जांच के निर्देश दिए

नासिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले की एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं। मालेगांव के बाद अब अमरावती में भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घाटले की बात सामने आई है। इस पर पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने प्रतिक्रिया दी है। किरीट सोमैया ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, “मालेगांव के बाद अमरावती के अंजनगांव में बांग्लादेशी रोहिंग्या जन्म प्रमाण पत्र घोटाला सामने आया है।” उन्होंने कहा कि अंजनगांव के तहसीलदार सुरजी ने मुझे बताया है कि पिछले 6 महीनों में बांग्लादेशी रोहिंग्याओं को 1100 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेज दिए गए हैं। यह सब बिना उचित जांच के प्रमाण पत्र जारी किए गए। बता दें कि इससे पहले दो जनवरी को किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा था कि मुझे पता चला है कि एक घोटाला किया गया है, जिमसें मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया, तहसीलदार से मुलाकात की और जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त किया। अब नाशिक कलेक्टर और नासिक नगर निगम इस मामले की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र एटीएस ने पूरे राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पिछले एक महीने में अवैध रूप से रह रहे 60 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में सबसे ज्यादा बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया। पूरे महाराष्ट्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ एटीएस द्वारा ऑपरेशन चला कर कार्रवाई की जा रही है।  

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