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SSC GD परीक्षा 4 फरवरी से शुरू, एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड, देखें लिंक और स्टेप्स

एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (SSC GD Exam 2025) की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। कर्मचारी चयन आयोग ने एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। कैंडीडेट्स ऑफिशियल वेबसाइट https://ssc.gov.in/ पर जाकर हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। आयोग ने उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र की अतिरिक्त कॉपी प्रिन्ट करके रखने की सलाह दी है। एडमिट कार्ड में उम्मीदवार का नाम, अभिभावकों का नाम, कैरेगरी, फोटोग्राफ, एप्लीकेशन नंबर, विषय और बारकोड जैसी जानकारी उपलब्ध होती है। इसके अलावा एग्जाम से संबंधित गाइडलाइंस भी मौजूद होती है। परीक्षा केंद्र पर दिशानिर्देशों का अनुपालन जरूरी होता है। कब होगी परीक्षा? एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा 4, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13, 17, 18, 19, 21 और 25 फरवरी को देशभर के विभिन्न शहरों में आयोजित होगी। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक एग्जाम से 4 दिन पहले प्रवेश पत्र जारी होंगे। वहीं सिटी स्लिप 10 दिन पहले जारी होंगे। कुल 39,481 पदों पर भर्ती होगी।  परीक्षा का पैटर्न एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रत्येक सही उत्तर पर 2 अंक मिलते हैं। इसमें 4 सेक्शन शामिल होंगे हैं। 0.25 अंक की कटौती होगी। एग्जाम कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित होगा। ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://ssc.gov.in/ पर जाएं।     होमपेज पर Log in/Register के टैब पर क्लिक करें।     लॉग इन मॉड्यूल खुलेगा। रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें।     होमपेज पर एडमिट कार्ड दिखेगा। इसे अच्छे से चेक करें और डाउनलोड करें।     भविष्य के संदर्भ में उम्मीदवार एडमिट कार्ड का प्रिन्ट आउट निकाल कर अपने पास रख लें।

प्रदेश में अब कड़ाके की ठंड के आसार नहीं, हो सकती है बूंदाबांदी, दिन-रात का तापमान बढ़ेगा

भोपाल फरवरी का महीना लगते ही ठंड का असर कम हो गया है, इस पूरे हफ्ते मध्य प्रदेश में बादल बारिश की स्थिति बनने वाली है। हवाओं का रूख बदलने और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 2 से 4 फरवरी तक पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में बादल छाएंगे और बारिश होगी। 2 दिन बाद तापमान में 1 से 2 डिग्री तक वृद्धि और फिर 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखने को मिलेगी। एमपी मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम विक्षोभ के एक्टिव होने से 2 से 4 फरवरी तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल छाने के साथ गरज चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना है। बारिश के शुरू होते ही सर्द हवाएं चलेंगी और तापमान में एक बार फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी। क्या कहता है एमपी मौसम विभाग का पूर्वानुमान वर्तमान में नया पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के पास द्रोणिका के रूप , पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप और हरियाणा एवं उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में प्रेरित चक्रवात मौजूद है। उत्तर भारत के ऊपर जेट स्ट्रीम बना हुआ है। इसके अतिरिक्त एक प्रति चक्रवात तेलंगाना पर बना हुआ है। हवाओं का रुख भी दक्षिणी एवं दक्षिण-पश्चिमी हो गया है। अभी दो दिन तक रात के तापमान में वृद्धि की संभावना कम है लेकिन दो तीन फरवरी को एक प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने पर बादल छाने के आसार हैं।  4 फरवरी तक बादल बारिश     फरवरी के पहले सप्ताह में रीवा, शहडोल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम में बादल छाने के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन इंदौर, भोपाल और उज्जैन संभाग में मौसम साफ रहेगा।     2 फरवरी को शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, देवास और आगरमालवा में बारिश के आसार है।     2 फरवरी से ठंड का असर बढ़ेगा, तापमान 2 से 3 डिग्री तक नीचे जा सकता है।     3 फरवरी को कई जिलों बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं।कहीं कहीं घना कोहरा छाए रहने का अनुमान है। इस दौरान कई शहरों का तापमान 7 डिग्री से नीचे जा सकता है। 10 साल का ट्रेंड…दिन गर्म, रातें ठंडी और बारिश भी प्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो फरवरी महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। इस दौरान बारिश का ट्रेंड भी देखा गया है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार रहेगा। जबकि रात का तापमान 10 से 14 डिग्री के बीच रह सकता है।

महाकालेश्वर मंदिर में मोबाइल पर प्रतिबंध के बावजूद लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल का इस्तेमाल खुलेआम

उज्जैन  उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मोबाइल पर प्रतिबंध है. इसे लेकर पूरे परिसर में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं की जानकारी के लिए सूचनाओं के बोर्ड भी लगाए गए हैं. बावजूद इसके लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल का इस्तेमाल खुलेआम करते हैं. मंदिर समिति रोको टोको अभियान के तहत श्रद्धालुओं को नियमों की जानकारी लगातार देती आ रही है. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में फोटोग्राफी और मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसे लेकर मंदिर समिति समय-समय पर श्रद्धालुओं को जानकारी भी देती रहती है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन के कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने फोटोग्राफी और मोबाइल के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है. खासतौर पर पूरे परिसर में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है. मंदिर समिति द्वारा परिसर के बाहर मोबाइल काउंटर भी लगाए गए हैं. मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल काउंटर पर जमा करना चाहिए. कुछ श्रद्धालु नियमों का जरूर उल्लंघन करते हैं. इसे लेकर मंदिर समिति और भी सख्त कदम भविष्य में उठाने वाली है. कैमरे पर भी प्रतिबंध महाकालेश्वर मंदिर परिसर में मोबाइल से फोटोग्राफी के साथ-साथ कैमरे पर भी प्रतिबंध है. कैमरे का इस्तेमाल करने से पहले महाकालेश्वर मंदिर समिति से विधिवत नियम अनुसार अनुमति लेने की आवश्यकता होती है. यह नियम काफी लंबे समय से प्रभावशील है. मंदिर में जमकर की जाती है फोटोग्राफी महाकालेश्वर मंदिर परिसर के साथ-साथ मंदिर के मुख्य दर्शन स्थल पर भी श्रद्धालुओं द्वारा खुलेआम फोटोग्राफी की जाती है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के निजी सुरक्षा कर्मी श्रद्धालुओं को रोकने की कोशिश भी करते हैं, मगर श्रद्धालु नियम का उल्लंघन करने में पीछे नहीं हटते हैं. मुंबई से आई श्रद्धा सिंह ने चर्चा के दौरान बताया कि भगवान के दरबार में फोटो के साथ यादें हमेशा ताजा रहती है, इसलिए श्रद्धालु फोटोग्राफी करते हैं. एक अन्य श्रद्धालु राजेश सिंह ने बताया कि वह भोपाल से आए हैं. उन्हें फोटोग्राफी पर प्रतिबंध की जानकारी नहीं थी.

सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी: एक्सपर्ट

शहडोल खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में जहां धान की खेती सबसे बड़े रकबे में की जाती है, तो वहीं रबी सीजन में गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में उगाया जाता है. दरअसल, साल भर गेहूं की खूब डिमांड रहती है. इन दिनों गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जो आम आदमी के पर्स पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. लेकिन किसानों के नजरिए से देखें तो ये उनके लिए आने वाले समय के लिए राहत की खबर है. करीब 2 महीने बाद नया गेहूं आ जाएगा. इससे किसानों को मुनाफा होगा. गेहूं के दाम छू रहे आसमान वर्तमान में गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम आदमी परेशान है, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है. कारोबारी ने बताते हैं कि “गेहूं अलग-अलग क्वालिटी में 30 रुपए से लेकर के 38 रुपए किलो तक मिल रहा है. मार्केट में नया गेहूं आने से पहले इसका दाम कम नहीं होगा. अगर गेहूं के दाम बढ़े हुए हैं, तो यह तय बात है कि आटे के दाम भी बढ़ेंगे.इस समय नॉर्मल आटे का खुदरा मूल्य 40 रुपए प्रति किलो है. वहीं, किसी ब्रांड का आटा 45 रुपए से लेकर 50 रुपए प्रति किलो मिल रहा है. सरकार को बढ़ाना पड़ सकती है MSP जानकारों के मुताबिक, गेहूं के बढ़े हुए दाम सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं. क्योंकि अगर सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी. अगर गेहूं का बाजार भाव यही रहा और सरकार ने एमएसपी नहीं बढ़ाई तो कोई भी किसान घाटा सहकर सरकार को अपनी उपज नहीं बेचेगा. पिछली बार सरकार ने 2275 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी की दर से गेहूं की खरीद की थी. प्रदेश सरकार ने इस बार 125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को बोनस देने की बात भी कही है. गेहूं का यही रेट रहा तो किसानों को होगा फायदा अगर पिछले साल के रेट और बोनस को मिलाकर देखे तो गेहूं का मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल होता है. ऐसे में अगर वर्तमान बाजार मूल्य थोड़ी बहुत टूट के साथ भी बरकरार रहा तो सरकार को गेहूं खरीद के लिए एमएसपी बढ़ानी होगी. बशर्ते गेहूं का बाजार मूल्य यही बना रहे. लेकिन सामान्यतः नई उपज आने के बाद गेहूं का मूल्य धड़ाम हो जाता है.

मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सरकार Time Scale Pay Grade का फार्मूला लागू कर सकती

भोपाल हाई कोई कोर्ट के पदोन्नति में आरक्षण नियम को निरस्त करने के आदेश के बाद से मध्य प्रदेश में नौ वर्ष से पदोन्नतियां बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने की व्यवस्था दी है। कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने नए नियम का प्रारूप भी बनवाया और मंत्री समूह का गठन भी किया पर अब तक कोई रास्ता नहीं निकला है। अब सरकार नए विकल्प पर विचार कर रही है। इसमें समयमान वेतनमान को आधार बनाया जा सकता है। समयमान वेतनमान की यह योजना 2008 में इसलिए बनाई गई थी ताकि जिन पात्र अधिकारियों को पदोन्नति नहीं मिल पाती है, उन्हें कम से कम उच्च पद का वेतनमान मिल जाए। 60 हजार कर्मचारी बिना पदोन्नत हुए रिटायर हो गए इसमें आरक्षण व्यवस्था नहीं रहती है। इसे ही पदोन्नति के लिए भी लागू किया जा सकता है। इससे किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। पदोन्नति नियम नहीं होने के कारण बीते आठ वर्ष में 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत हुए बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हाईकोर्ट में नियम को चुनौती दी थी निर्माण विभागों के सामान्य श्रेणी के इंजीनियरों ने पदोन्नति नहीं मिलने के कारण हाई कोर्ट में दिग्विजय सरकार के समय बने मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2002 को चुनौती दी थी। लंबी सुनवाई के बाद मई 2016 में ये नियम निरस्त करते हुए पदोन्नति में आरक्षण के प्रविधान समाप्त कर दिए गए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, जहां याचिका अभी भी विचाराधीन है। इस बीच कर्मचारी आंदोलन हुए तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोरकेला को नए नियम का प्रारूप बनाने का दायित्व दिया। उन्होंने सभी पहलुओं पर विचार कर प्रारूप भी दे दिया लेकिन सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। अनुशंसा पर कोई निर्णय नहीं हुआ पदोन्नति के विकल्प के रूप में उच्च पद का प्रभार देने की व्यवस्था बना दी पर यह अभी तक सभी विभागों में लागू ही नहीं हो पाई। विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्री समूह का गठन किया था, उसने भी सभी पक्षों से चर्चा के बाद अपनी अनुशंसा भी दे दी पर कोई निर्णय नहीं हुआ। पात्रता में आने पर दिया जाता है अब सरकार ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने के लिए विकल्प पर काम प्रारंभ कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि अभी समयमान वेतनमान योजना को पदोन्नति का आधार बनाने पर विचार किया जा रहा है। सेवा की एक निश्चित अवधि पूरी होने और पदोन्नति की पात्रता में आने पर समयमान वेतनमान दे दिया जाता है। सभी पक्षों से चर्चा होगी विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सेवा में आने के समय और गोपनीय चरित्रावली के आधार पर समयमान मिलता जाता है। इस व्यवस्था को पदोन्नति के विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है पर इसके लिए पहले सभी पक्षों से चर्चा होगी। कानूनी पहलुओं का अध्ययन करके सरकार के स्तर से नीतिगत निर्णय होगा। चार बार मिलता है समयमान वेतनमान प्रदेश में जो समयमान वेतनमान योजना लागू है, उसमें चार बार वेतनमान दिए जाते हैं। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को आठ, 16, 24 और 34 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयमान वेतनमान मिल जाता है। इसी तरह तृतीय और चर्तुथ श्रेणी के कर्मचारियों को 10, 20, 30 और 35 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयमान वेतनमान दिया जाता है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पुलिस ने गश्त बढ़ाई, जल्द ही ड्रोन से निगरानी होगी शुरू, पुलिस कानवाय से वाहनों को छोड़ रही

रतलाम  दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के रतलाम जिले की सीमा में रावटी व शिवगढ़ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में आए दिन वाहनों पर पथराव व लूट की वारदातें होती रहती है। दो दिन पहले भी लुटेरों ने एक वाहन में सवार लोगों को लूटने का प्रयास किया था। वाहन एक्सप्रेस-वे के गश्ती दल का होने से लुटेरे वारदात नहीं कर पाए। इसके पहले कई बार वाहनों पर पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस ने हाईवे पर गश्त बढ़ा दी है। वहीं पथराव व लूट की वारदातों पर अंकुश लगाने तथा बदमाशों को पकड़ने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। नाइट विजन के हाई क्वालिटी ड्रोन से होगी निगरानी नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने दो ड्रोन खरीदने की स्वीकृत दी है। पुलिस एक-दो सप्ताह में नाइट विजन के हाई क्वालिटी के ड्रोन खरीदकर उनसे निगरानी शुरू करेगी। मंदसौर के बाद रतलाम होकर झाबुआ होते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे मुंबई की तरफ जाता है। 15 किमी क्षेत्र में होती हैं पथराव और लूट की वारदातें रतलाम जिले का करीब 90 किलोमीटर का एरिया आता है। मंदसौर व रतलाम एरिया का काम लगभग पूरा होने के साथ ही करीब डेढ़ वर्ष पहले इस पर आवागमन भी शुरू कर दिया गया है। जिले में रावटी व शिवगढ़ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर के एरिया में बदमाश पथराव व लूट की वारदातों को अंजाम देते हैं। पुलिस की गश्त का नहीं दिखता असर हाईवे पर कई बार वाहनों पर पथराव व लूट की वारदातें हो चुकी है। यात्रियों के सुरक्षा देने के लिए एनएचएआई के दल गश्त करते हैं। वहीं पुलिस भी गश्त करती हैं। गश्ती दल के आने के पहले या गश्त कर जाने के बाद बदमाश वाहनों पर पथराव कर वारदातें करते हैं। सात लाख रुपये से खरीदे जाएंगे ड्रोन रात के अंधेरे में वारदात कर बदमाश भाग जाते हैं। हर जगह सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से कई बार बदमाशों की पहचान भी नहीं हो पाती है। इसलिए अब बदमाशों की पहचान करने के लिए ड्रोन की मदद ली जाएगी। जानकारी के अनुसार पुलिस करीब सात लाख रुपये की लागत से हाई क्वालिटी के दो ड्रोन खरीदेगी। मोबाइल फोन पर भी देखे जा सकेंगे ड्रोन उच्च क्वालिटी के होंगे तथा उनमें वीडियो-फोटो एचडी में ही बनेंगे। फोटो की क्वालिटी ऐसी होगी कि उनमें जमीन पर दिखने वाले व्यक्ति को नाइट विजन कैमरा झूम करके रात में भी स्पष्ट रूप से देखकर पहचाना जा सकेगा। कैमरों की उच्च गुणवत्ता होने से उन्हें वाईफाई से जोड़कर अधिकारियों के मोबाइल फोन से कनेक्ट किया जाएगा तथा वे गतिविधियों को दो किलोमीटर तक की रेंज में देख सकेंगे। ड्रोन पुलिस कंट्रोल रूम से भी जोड़ा जाएगा। नाइट विजन कैमरों से निगरानी के लिए एक्सपर्ट को बुलाया जाएगा। वे स्थानीय पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे तथा कुछ समय उनके साथ रहेंगे। नाइट विजन कैमरे से लैस होंगे ड्रोन नाइट विजन कैमरे से लैस होंगे। वे ऊपर उड़ने के बावजूद जमीन पर होने वाली पत्थरबाजी के बदमाशों की गतिविधियों को थर्मल इमेज के जरिये कैप्चर कर लेंगे। वैसे ज्यादातर घटनाएं रावटी व शिवगढ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में होती हैं। वहीं नामली व सैलाना थाना क्षेत्र के भी कुछ स्थानों पर लूट व मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस ने नामली के पास से लेकर झाबुआ जिले की सीमा तक सात स्थानों को चिह्नित किया है, जहां विशेष निगरानी की जाएगी। पुलिस ने कानवाय शुरू किया     कानवाय शुरू की, शीघ्र ड्रोन शुरू करेंगे एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक छोड़ने के लिए कानवाय शुरू कर दी गई है। गश्त बढ़ाई गई है। जल्द ही ड्रोन से निगरानी भी शुरू की जाएगी। – राकेश खाखा, एएसपी  

फाइटर विमान उड़ाने में मास्टर… शुभांशु शुक्ला जो स्पेस में रचने जा रहे इतिहास, मिशन कमांडर के रूप में काम करेंगे

 नई दिल्ली Indian Air Force के अनुभवी टेस्ट पायलट और ISRO के गगनयान मिशन के चुने हुए एस्ट्रोनॉट्स ग्रुप कैप्टन शुंभाशु शुक्ला Axiom Mission-4 प्रमुख मिशन पायलट होंगे. यह मिशन SpaceX के फॉल्कन-9 रॉकेट और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए पूरा होगा. इनकी लॉन्चिंग फ्लोरिडा से होगी. शुभांशु शुक्ला को हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान मिशन के लिए ‘प्राइम’ अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था. वह 1984 के बाद से अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री होंगे. उनकी यात्रा जून 2006 में लड़ाकू विंग में कमीशन के साथ शुरू हुई. एक अनुभवी परीक्षण पायलट के रूप में उन्होंने विभिन्न विमानों में 2000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव प्राप्त किया है. ग्रुप कैप्टन शुक्ला के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में तीन लोग और जा रहे हैं. ये हैं- अमेरिका से कमांडर पेगी व्हिटसन, पोलैंड से ESA की तरफ से मिशन स्पेशलिस्ट स्लावोश उजानस्की और हंगरी से मिशन स्पेशलिस्ट तिबोर कापू. शुक्ला इनके साथ प्राइम मिशन पायलट होंगे. कई विमान उड़ाने का अनुभव 10 अक्टूबर 1085 में लखनऊ में जन्मे शुभांशु की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में उन्हें 17 जून 2006 में शामिल किया गया. वो एक फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं. साथ ही टेस्ट पायलट भी. उनके पास 2000 घंटे के उड़ान का अनुभव है. उन्होंने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं. शुभांशु शुक्ला कौन हैं? 10 अक्टूबर 1985 को शुभांशु का जन्म लखनऊ में हुआ. जून 2006 में लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना (IAF) में कमीशन प्राप्त किया. इसके बाद मार्च 2024 में ग्रुप कैप्टन का बने. शुभांशु Su-30 MKI, MIG-21, MiG-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और An-32 सहित विभिन्न विमानों पर 2,000 से अधिक उड़ान की है. 2019 में रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण लिया. भारत के गगनयान मिशन के लिए इसरो द्वारा चुने गए. ये देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है. नासा-एक्सिओम स्पेस सहयोग के तहत आईएसएस की यात्रा करने वाले पहले इसरो अंतरिक्ष यात्री. घर वापस लोगों के लिए फ़ोटो और वीडियो के माध्यम से अपने अंतरिक्ष अनुभव को कैद करने की योजना बना रहे हैं. जब शुक्ला को इसरो से फोन आया एक्स-4 मिशन का नेतृत्व पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन करेंगी, जो Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान की निदेशक हैं. 2019 में शुक्ला को इसरो से एक ऐतिहासिक फोन आया. उन्होंने मॉस्को, रूस में यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठोर प्रशिक्षण पर काम करना शुरू किया. 27 फरवरी 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्ला को गगनयान के लिए अंतरिक्षयात्री घोषित किया.  अगस्त 2024 में, शुक्ला को आगामी इंडो-यूएस मिशन के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए ‘प्राइम’ अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था. मिशन में भारत के अलावा पोलैंड-हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स भी कमांडर पैगी व्हिटसन- पैगी ने Ax-2 मिशन की कमांडर के रूप में काम किया है। पैगी ने नासा के एक मिशन में 675 दिन काम किया हैं। वे अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। पायलट शुभांशु शुक्ला- शुभांशु भारतीय वायुसेना में पायलट हैं। उन्हें इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुना गया है। यह भारत का अंतरिक्ष में पहला मैन्ड मिशन है। मिशन स्पेशलिस्ट स्लावोज उज्नान्सकी-विज्निएव्स्की- पोलैंड के स्लावोज CERN के इंजीनियर रह चुके हैं। स्लावोज यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट रिजर्व क्लास ऑफ 2022 के सदस्य हैं। मिशन स्पेशलिस्ट तिबोर कापू- कापू हंगरी के एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जो स्पेस रेडिएशन प्रोटेक्शन में महारत रखते हैं। 2023 में वे HUNOR (हंगेरियन-टु-ऑर्बिट) के लिए चुने गए थे। शुभांशु बोले- अंतरिक्ष में योग करूंगा, तस्वीरें लाऊंगा नाम के ऐलान के साथ ही एग्जियम मिशन 4 पर नासा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें पायलट शुभांशु ने कहा कि जो मिशन आ रहा है उसमें मैं अपने साथ कुछ इंडियन फूड लेकर जाऊंगा, जो अपने साथियों को भी खिलाऊंगा। अंतरिक्ष में योग भी करूंगा। वहां की तस्वीरें लाऊंगा, ताकि भारतवासियों को गर्व का मौका मिले। 14 दिन ISS पर रिसर्च करेगा AXM-4 ISS का पहला प्राइवेट अंतरिक्ष यात्री मिशन, एग्जियम मिशन 1 अप्रैल 2022 में लॉन्च किया गया था, जो ऑर्बिटिंग लैब में 17 दिनों तक रहा। दूसरा एग्जियम मिशन 2, मई 2023 में भेजा गया था। इस मिशन ने ISS पर आठ दिन बिताए। एग्जियम मिशन 3, जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था। इसने स्टेशन पर 18 दिन बिताए। एग्जियम मिशन 4 के लिए 14 दिन का समय तय किया गया है। अब जानिए पायलट शुभांशु के बारे में… शुभांशु का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। उनकी उम्र 38 साल है। वे एक फाइटर पायलट और कॉम्बेट लीडर हैं।

मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की बोतल पर लगे बार कोड से पता चल जाएगा कि शराब नकली है या असली

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने शराब की कालाबाजारी रोकने के लिए नई व्यवस्था की है। नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की बोतल पर लगे बार कोड से पता चल जाएगा कि शराब नकली है या असली। कागज की सील यानी एक्साइज लेबल (ईएल) पर बार कोड होगा, जिसे स्केन करते ही शराब की शुद्धता भी पता चलेगी। इतना ही नहीं शराब की बोतल किस गोदाम की है और किस दुकान से बेची गई है, यह जानकारी भी मिल जाएगी। नकली शराब की मिलावट को रोका जा सकेगा इससे मप्र के बाहर से आने वाली शराब की खपत और खाली बोतल में नकली शराब की मिलावट को रोका जा सकेगा। इसके अलावा शराब की दुकानों को कैशलेस भी किया जाएगा। केवल पीओएस मशीन से ही बिलिंग की जाएगी। वेयरहाउस भी स्मार्ट बनाए जाएंगे। वन क्षेत्रों के रिजार्ट में भी बार का मिल सकेगा लाइसेंस पहले व्यवस्था थी कि वन क्षेत्र के रिजार्ट में बार का लाइसेंस नगर से 30 किलोमीटर दूर और वन क्षेत्र से 20 किलोमीटर के अंदर सीमा में निर्धारित किया गया था, लेकिन इससे व्यावहारिक कठिनाई आ रही थी। कई क्षेत्रों में बार के लाइसेंस नहीं दिए जा सकते थे। ऐसे में यह दूरी भी घटाई जा रही है। अब शहर से सटे जंगलों में भी रिजार्ट में बार के लाइसेंस दिए जा सकेंगे। दरअसल, जंगल के रिजार्ट की लाइसेंस फीस कम होती है और इसके दुरुपयोग की संभावना बनी हुई थी, नई व्यवस्था इसका भी ध्यान रखा गया है। 16 हजार करोड़ का लक्ष्य, 13941 हजार करोड़ का मिला राजस्व प्रदेश में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही सरकार की राजस्व अय भी बढ़ रही है। साल 2024-25 में 16 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा गया है। इसके विरुद्ध शराब दुकानों के नवीनीकरण और नीलामी से अब तक 13941 हजार करोड़ रुपये राजस्व मिलना सुनिश्चित हुआ है। इसके अलावा अन्य शुल्कों से भी राजस्व आय होनी है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अभी कुछ महीने बाकी हैं। इससे साफ है कि शराब बिक्री से सरकार को अच्छा खासा मुनाफा होगा।

पम्प पर नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल और फास्टैग, अगर नहीं करवाया Insurance, आने वाला है नया नियम

भोपाल देश में पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए पंप संचालक आपसे कोई दस्तावेज नहीं मांगता है. आप जितनी मात्रा में ईंधन खरीदते हैं, उसका मूल्य लेकर पंप के कर्मचारी आपको पेट्रोल-डीजल दे देते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मोटर वाहन बीमा से संबंधित नियमों में बदलाव करने की सिफारिश की है. जिससे थर्ड पार्टी बीमा को प्रोत्साहित किया जा सके. ईंधन खरीदने के लिए जरूरी होगा थर्ड पार्टी बीमा वित्त मंत्रालय की सिफारिशें यदि लागू होती हैं, तो बिना थर्ड पार्टी के कोई भी वाहन सड़क पर दौड़ता हुआ दिखाई नहीं देगा. इसके तहत उन्हीं वाहन चालकों को पेट्रोल-डीजल या सीएनजी दी जाएगी, जिसके पास उसके वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होगा. यानि यदि आपके वाहन का थर्ड पार्टी बीमा नहीं है, तो आपको उस वाहन के लिए ईंधन भी नहीं मिलेगा. इसके लिए वाहन संबंधी सेवाओं को इंश्योरेंस कवर भी जोड़ा जा रहा है. वहीं पेट्रोल पंप व अन्य सेवाओं को इस प्रकार जोड़ा जाएगा, जिससे केवल वैध बीमा वाले वाहनों को ही सुविधाएं दी जाएंगी. फास्टैग के लिए भी जरुरी होगा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पेट्रोल-डीजल की तरह ही बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को फास्टैग की सुविधा भी नहीं मिलेगी. केवल उन्हीं वाहनों को फास्टैग की सुविधा मिलेगी, जिनका थर्ड पार्टी बीमा होगा. बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना अपराध है. पहली बार पकड़े जाने पर 2 हजार रुपये जुर्माना या जेल की सजा है. विशेष परिस्थियों में जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान रहेगा. इसी प्रकार दूसरी बार पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि 4 हजार रुपये तक बढ़ाई जा सकती है. बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस दौड़ रहे 7 करोड़ वाहन बता दें कि देश में आधे से अधिक वाहन बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के दौड़ रहे हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार साल 2022-23 में देश में करीब 34 करोड़ वाहन पंजीकृत थे. जिनमें से 50 से 55 प्रतिशत वाहनों का थर्ड बीमा नहीं था. वहीं साल 2020 में जारी किए गए आंकड़े के अनुसार देश में करीब 6 करोड़ वाहन बिना थर्ड बीमा के पाए गए थे. जिनकी संख्या साल 2025 में 7 करोड़ के करीब पहुंच गई है. इसीलिए संसद की एक कमेटी ने इसे लागू करने की सिफारिश की है. थर्ड पार्टी बीमा के ये हैं फायदे थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी के फायदे की बात करें तो, मोटर वाहन एक्ट के मुताबिक अगर किसी वाहन का एक्सीडेंट हो जाता है और उसमें किसी की शारीरिक या संपत्ति का नुकसान होता है, तो वाहन मालिक को उसके नुकसान की भरपाई करने होती है. जिसके भुगतान की जिम्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी की हो जाती है. थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में विभिन्न प्रकार के मुआवजे शामिल हैं. जैसे-किसी अन्य की मृत्यु या शारीरिक क्षति पर मुआवजा, किसी अन्य व्यक्ति के वाहन व संपत्ति की क्षति पर मुआवजा, कानूनी और अस्पताल संबंधी खर्चों का भुगतान आदि शामिल है.

हेल्थ टिप्स – क्या ज्यादा फायदेमंद? आलू या शकरकंद, एक्सपर्ट से जानें बेनिफिट्स, ज्यादा खाने के नुकसान, किसे नहीं खाना चाहिए

Which is more beneficial? Potato or sweet potato

Which is more beneficial? Potato or sweet potato हर भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद की खास जगह है। ये दोनों ही फूड हमारी थाली में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों में कई सारी समानताएं हैं, जो उन्हें एक जैसा बनाती हैं। अंग्रेजी भाषा में दोनों के नाम भी मिलते-जुलते हैं। आलू को ‘पोटैटो’ और शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो’ के नाम से जाना जाता है।आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और हर भारतीय रसोई में हमेशा इसकी मौजूदगी होती है। वहीं शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से अलग पहचान रखता है।शकरकंद को कई डिश में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी के मौसम में शकरकंद खूब खाया जाता है। हालांकि, जब बात सेहत की आती है, तो यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से क्या अधिक फायदेमंद है? ऐसे में आज हम सेहतनामा में जानेंगे कि- आलू और शकरकंद में क्या ज्यादा सेहतमंद है?इन दोनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? आलू के फायदे आलू के कई सारे चाहने वाले हैं। लोग इसे अलग-अलग रूपों में पसंद करते हैं। हालांकि इसके स्वाद के साथ हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। विटामिन C: एक मध्यम आकार का यानी तकरीबन 115 ग्राम का एक आलू खाने से विटामिन C की दैनिक जरूरत की 11% पूरा हो जाता है।विटामिन C कोलेजन बनाने में मदद करता है। यह आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अलावा आलू में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है।विटामिन B6: आलू में विटामिन B6 भी होता है, जो हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% पूरा करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मददगार है।यह ऊर्जा के रूपांतरण और ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और नींद को नियंत्रित करते हैं। फाइबर: आलू में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।पोटेशियम: इसमें पोटेशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। स्टार्च: आलू में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे स्टार्च कहा जाता है। यह छोटी आंत में नहीं टूटता, बल्कि सीधे बड़ी आंत में जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। हालांकि, पेट की समस्या हो तो आलू खाने से बचना चाहिए। शकरकंद के फायदे शकरकंद अपने लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर के कारण डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने में मददगार है। शकरकंद फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है। इसके छिलके में पाया जाने वाला फाइबर प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाता है। विटामिन A: नारंगी शकरकंद में बीटा-कैरोटीन और प्रोविटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। एक मध्यम आकार का शकरकंद (114 ग्राम) खाने से रोज की विटामिन A की जरूरत का 122% मिल जाता है। यह सेल्स के विकास, इम्यून सिस्टम, प्रजनन और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। पॉलीफेनोल्स: शकरकंद में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बैंगनी शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसाइनिन सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक होता है। विटामिन C और विटामिन B6: शकरकंद विटामिन C और विटामिन B6 का भी अच्छा स्रोत है। इसमें भी आलू की तरह प्रतिरोधी स्टार्च पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इससे पेट भरे होने का एहसास होता है, जो वजन घटाने में मददगार हो सकता है।तो, क्या आपने यह सोच लिया है कि आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर है– आलू या शकरकंद? आइए ग्राफिक के जरिए दोनों में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स और डेली वैल्यू के बीच के अंतर को समझते हैं। क्या आलू और शकरकंद का कुछ नुकसान भी है? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही एलर्जी की समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को शकरकंद खाने से बचना चाहिए।शकरकंद में विटामिन A की अधिकता होती है। इससे शरीर में पॉइजनिंग हो सकती है। वहीं अधिक मात्रा में आलू खाने से कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए जानते हैं। आपके लिए कौन सा बेहतर? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शकरकंद में विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो आंखों की सेहत और इम्यून फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है।अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार, आलू और शकरकंद दोनों को हम अपनी डाइट में संतुलित मात्रा में शामिल कर सकते हैं। अगर इनके साथ प्रोटीन रिच फूड, कई सारी हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स हो, तो ये हमारी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद साबित होते हैं। किसे आलू या शकरकंद नहीं खाना चाहिए क्रॉनिक डायबिटीज के मरीजों को आलू खाने से बचना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।आलू में स्टार्च की अधिक मात्रा होती है। ऐसे में गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू से परहेज करना चाहिए।आलू में एक ऐसा केमिकल होता है, जो एनेस्थीसिया के असर को कम कर सकता है। साथ ही सर्जरी से रिकवरी में देरी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी सर्जरी के बाद इसे खाने से बचना चाहिए।आलू में ऑक्सलिक एसिड पाया जाता है, जो ब्लैडर सर्जरी के बाद दर्द पैदा कर सकता है। इसलिए ब्लैडर सर्जरी से पहले आलू नहीं खाना चाहिए।क्रॉनिक डायबिटीज हो तो शकरकंद नहीं खाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।लिवर की बीमारी से जूझ लोगों को भी शकरकंद नहीं खाना चाहिए। शकरकंद में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

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