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एमपी में निजी स्कूलों के लिए बदले फीस के नियम, फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों में बस किराया और ट्यूशन फीस को लेकर बड़ा अपडेट है। अब निजी स्कूल अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे और इसे भी वार्षिक का ही भाग माना जाएगा। मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुहर लगा दी है। नए नियम के तहक बिना अनुमति अब 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ₹25000 से ज्यादा सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी। इसी फीस में बस का शुल्क भी शामिल होगा। नई कानून पर राज्यपाल ने मुहर लगाई है। मध्यप्रदेश के 18000 स्कूल इसके दायरे में आएंगे। इस नए नियम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। फीस नियंत्रण पर अभिभावकों को राहत यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा में समानता और सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो छात्रों और अभिभावकों के हित में साबित हो सकते हैं। यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में 16 हजार स्कूल ऐसे आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे स्कूल हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। नए प्रवाधानों में क्या नए प्रावधानों के अनुसार 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना जरूरी होगा। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। आपको बता दें कि यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। समिति के अध्यक्ष होंगे शिक्षा मंत्री नए नियमों के अनुसार फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे। समिति को यह अधिकार रहेगा कि वह विभागीय समिति द्वारा किसी स्कूल पर लगाए गए अर्थदंड को घटा या बढ़ा सकेगी। अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश सरकार ने  मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पेश किया। इसमें ये प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा बस फीस अलग से वसूली नहीं जा सकेगी और बस फीस को स्कूल की वार्षिक फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलते ही प्रभावी हो जाएगा।

राजधानी रायपुर से एक बड़ी खुशखबरी आई, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज को M.Ch. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कोर्स को मिलीं 3 सीटें

रायपुर  राजधानी रायपुर से एक बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य द्वारा संचालित पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (पं. जेएनएम) मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को M.Ch. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सुपर-स्पेशलाइजेशन कोर्स की तीन सीटें मिली हैं। ऐसा करने वाला मध्य भारत का पहला मेडिकल इंस्टीट्यूट इसके साथ ही, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज मध्य भारत का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान बन गया है जहाँ यह विशेष कोर्स शुरू किया जा रहा है। यह मध्य भारत के लोगों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से एक पत्र मिला है। इस पत्र में लिखा है, ‘केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को निर्देश दिया है कि वह मेडिकल कॉलेज रायपुर के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के अंतर्गत M.Ch. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सुपर-स्पेशलाइजेशन कोर्स की तीन सीटों के लिए अनुमति पत्र (LoP) जारी करे।’ इसी सत्र से शुरू होगा कोर्स यह महत्वपूर्ण कोर्स इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो जाएगा। यह ध्यान देने योग्य है कि कैंसर विभाग में पहले से ही स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम M.D. (रेडियोथेरेपी) की 6 मान्यता प्राप्त सीटें चल रही हैं। अब M.Ch. कोर्स के जुड़ने से कैंसर के इलाज में और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। पिछले साल किया था आवेदन NMC सेल के अध्यक्ष डॉ. अरविंद नेरल ने बताया कि इस सुपर-स्पेशलाइजेशन कोर्स को शुरू करने के लिए पिछले साल की शुरुआत में आवेदन किया गया था। कुछ कमियों का हवाला देते हुए NMC ने LoP जारी नहीं किया था। कॉलेज ने कमियों को दूर करते हुए दो बार पूर्ण समीक्षा की अपील की। पिछले हफ्ते सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष गुप्ता को NMC के निर्देशानुसार अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत रूप से NMC नई दिल्ली भेजा गया था। कैंसर रोगियों को मिलेगी सुविधाएं डॉ. गुप्ता ने कहा कि यह मध्य भारत का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान है जहां यह विशेष कोर्स शुरू किया जा रहा है। इस कोर्स के शुरू होने से सर्जरी की आवश्यकता वाले कैंसर रोगियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। राज्य को सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में सुपर-स्पेशलिस्ट मिलेंगे। मेडिकल स्नातकोत्तर छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए नए अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। यह कोर्स युवा डॉक्टरों के लिए एक सुनहरा अवसर है।

प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि, ‘आज महिलाएं अपने पति के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही

 शिवपुरी ‘पहले मुझे कुछ महिलाओं के चेहरों पर डर और दुख दिखाई देता था, लेकिन आज मैं देख रही हूं कि, महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से छोटे-बड़े काम कर आत्मनिर्भर हो रही हैं, उससे महिलाओं की स्थिति सुधरी है। आज कई महिलाएं अपने घर का पूरा खर्च खुद ही चला रही है।’ ये बात केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे ने शिवपुरी जिले के बदरवास में चल रहे मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन कार्यक्रम में महिलाओं से संवाद के दौरान कही। कार्यक्रम में  शामिल हुईं प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि, ‘आज महिलाएं अपने पति के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।’ प्रियदर्शनी ने महिलाओं से कहा कि ‘आप सभी के पास मोबाइल है, लेकिन आप लोग इसका इस्तेमाल कम से कम करें और अपना ध्यान काम पर रखे। आप सभी को हमेशा अपने लक्ष्य की तरफ चलना चाहिए। साथ ही कुछ समय खुद के और परिवार के लिए भी निकालना चाहिए।’ आखिर में उन्होंने महिलाओं से कहा- अगली बार जब वो यहां आएगी तो आप उन्हें कुछ नया करके दिखाना, इससे सिर्फ बदरवास ही नहीं, बल्कि शिवपुरी का नाम देशभर में विख्यात होता है। 800 रुपए देकर खरीदी बदरवास की जैकेट बदरवास भ्रमण के दौरान प्रियदर्शनी राजे ने खुद के लिए एक जैकेट 800 रुपए देकर खरीदी और फिर जैकेट बनाने वाली महिलाओं से बात करते हुए सवाल किया कि, ये जैकेट वो कैसे बनाती हैं और इनमें कैसे बटन लगता है। चूंकि बदरवास की जैकेट पूरे देश भर में प्रसिद्ध है और गत दौरे पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी यहां से एक जैकेट खरीदी थी। इसलिए प्रियदर्शनी राजे ने भी यहां से जैकेट खरीदने की इच्छा व्यक्त करते हुए खरीदारी की। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाया। पत्रिका के सवालों के दिए जवाब बदरवास में आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान पत्रिका प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, उन्हें कार्यक्रम में शामिल होकर काफी अच्छा लगा। उन्होंने संदेश दिया है कि जो भी अच्छे काम बदरवास और अन्य जगह हो रहे हैं, उनका हर जगह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। ये आप सभी का काम है। ऐसे प्रचार जरूर करें। एक सवाल के जबाब में उन्होने कहा कि, यहां से उन्होने जैकेट के साथ अन्य सामान की खरीदारी करने में भी काफी अच्छा लगा। हर व्यक्ति को शॉपिंग करने में मजा आता है। हमें भी काफी आनंद आया। विजय राजे के साथ कार्यक्रम में ये लोग भी रहे शामिल कार्यक्रम में प्रियदर्शनी राजे के साथ कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव, जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा अमित यादव, भाजपा मंडल अध्यक्ष कल्याण सिंह यादव, नगर पालिक उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह यादव, सांसद प्रतिनिधि उधम सिंह धाकड़, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रविंद्र शिवहरे और पूर्व जिला पंचायत सदस्य बंटी रघुवंशी आदि मौजूद रहे।

पुलिस मुख्यालय में तैनात तीन पुलिसकर्मियों पर 76 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल बिल भुगतान का आरोप लगाया

भोपाल पुलिस मुख्यालय में तैनात तीन पुलिसकर्मियों पर 76 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल बिल भुगतान का आरोप लगा है। ये तीनों में एक सूबेदार, एक सब-इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर है। सभी लेखा शाखा में काम करते थे। इन्होंने वित्तीय वर्ष 2022, 2023 और 2024 में खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को बीमार बताकर यह धोखाधड़ी की। संचालक ट्रेजरी की ओर से भेजे गए एक पत्र के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें इनके खातों में असामान्य रूप से उच्च भुगतान की ओर इशारा किया गया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। ऐसे हुआ खुलासा यह मामला तब सामने आया जब संचालक ट्रेजरी ने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र भेजा। इस पत्र में बताया गया कि तीन पुलिसकर्मियों के खातों में मेडिकल बिल के मद में काफी ज्यादा रकम ट्रांसफर हुई है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच के दौरान पाया गया कि सूबेदार नीरज कुमार, सब-इंस्पेक्टर हरिहर सोनी और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हर्ष वानखेड़े ने फर्जी मेडिकल बिल बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है। अलग-अलग बीमारियों के नाम पर मेडिकल बिल लगाए तीनों आरोपियों ने खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को अलग-अलग बीमारियां बताकर मेडिकल बिल जमा किए थे। यह बिल असामान्य रूप से ज्यादा थे, जिससे शक पैदा हुआ। जांच में पता चला कि इन्होंने ‘प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट’ का भी गलत इस्तेमाल किया। यह सर्टिफिकेट गंभीर बीमारियों के लिए सिविल सर्जन द्वारा जारी किया जाता है। लेकिन जांच दल ने जब सिविल सर्जन से पुष्टि की, तो पता चला कि उन्होंने इन तीनों को केवल दो ही सर्टिफिकेट जारी किए थे। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि बाकी सभी सर्टिफिकेट फर्जी हैं। एडीजी अनिल कुमार ने बताया कि संचालक ट्रेजरी से पत्र मिलने के बाद गोपनीय जांच शुरू की गई थी। जांच शुरू होने से पहले ही तीनों आरोपियों को लेखा शाखा से हटा दिया गया था। जांच में आरोप सही पाए जाने पर 8 जनवरी को तीनों को निलंबित कर दिया गया। तीनों के खिलाफ जहांगीराबाद थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 318, 319, 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है। वानखेड़े ने किए 35 लाख गबन जांच में यह भी पता चला है कि तीनों आरोपियों ने अलग-अलग रकम का गबन किया है। हर्ष वानखेड़े के खाते में लगभग 35 लाख रुपए, हरिहर सोनी के खाते में लगभग 24 लाख रुपए और नीरज कुमार के खाते में लगभग 17 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। यह कुल मिलाकर लगभग 76 लाख रुपए होता है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया है। एसीपी जहांगीराबाद सुरभि मीणा ने बताया कि लेखा शाखा की रिपोर्ट के आधार पर तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस घोटाले में और लोग भी शामिल हैं। इस मामले में सिविल सर्जन से भी पूछताछ की जा सकती है।

सुकमा विस्फोटक के साथ एक इनामी सहित दो नक्सलियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल

सुकमा  केरलापाल थाना क्षेत्रान्तर्गत 1 इनामी नक्सली सहित 2 नक्सलियों को विस्फोटक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार नक्सली पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित है। जिले में चलाया जा रहे नक्सली उन्मूलन अभियान के तहत थाना केरलापाल से जिलाबल एवं कैंप परिया से छत्तीसगढ़ सुरक्षा बल की संयुक्त पार्टी एरिया डोमिनेशन, नक्सलियों की गिरफ्तारी के लिए ग्राम सिरसेट्टी, गड़गड़पारा व आसपास क्षेत्र की ओर रवाना हुए थे। पुलिस ने घेराबंदी कर नक्सलियों को पकड़ा सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि फोर्स एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए सिरसेट्टी में गई। जवान जब सर्च ऑपरेशन के दौरान सिरसेट्टी और गड़गड़पारा इलाके में पहुंचे तो उनको दो लोग संदिग्ध हालत में मिले। छत्तीसगढ़ पुलिस बल और केरलापाल थाना पुलिस की टीम ने ललकारा। पुलिस को देखते ही दोनों भागने लगे। फोर्स ने दोनों को दौड़ाकर पकड़ लिया। तलाशी के दौरान दोनों के पास से बम मिला। पकड़े गये नक्सलियो से 1 नग टिफिन आईईडी बम वजनी 3 किग्रा., 2 नग डेटोनेटर, 10 मीटर कोर्डेक्स वायर बरामद किया गया। बम प्लांट करने की थी साजिश  पुलिस की पूछताछ में दोनों माओवादियों ने ये स्वीकार किया कि वो नक्सली संगठन से जुड़े हुए हैं। गश्त पर निकली पुलिस पार्टी को निशाना बनाने के लिए बम लगाने की उनकी योजना थी। पकड़े गए दोनों नक्सलियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पूरे बस्तर में माओवादियों के खात्मे के लिए एंटी नक्सल ऑपरेशन जोर शोर से चलाया जा रहा है। फोर्स के बढ़ते दबाव के चलते बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर भी कर रहे हैं।  

भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों के अभियोजन स्वीकृति प्रकरणों में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस नीति है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति के लंबित पुराने प्रकरणों का निस्तारण प्राथमिकता से किया जाएगा। साथ ही इन प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण भी सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2022 से 31 दिसम्बर 2024 के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा राज्य सरकार व संबंधित विभागाध्यक्ष को 1 हजार 592 अभियोजन स्वीकृति प्रस्तााव भिजवाए गए। इनमें से 1 हजार 189 अभियोजन स्वीकृति प्रस्ताअवों में निर्णय प्राप्त‍ हुए तथा 403 अभियोजन स्वीकृति प्रस्तांव प्रक्रियाधीन हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गुरुवार को विधानसभा में प्रश्नकाल में इस संबंध में सदस्य द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्नों का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मंत्री की ओर से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 403 अभियोजन स्वीकृति प्रस्ताीव प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि भ्रष्ट कार्मिकों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन स्वीकृति के लंबित प्रकरणों की मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुख्य सचिव स्तर पर इस प्रक्रिया को और अधिक सशक्त किया जाएगा, जिससे प्रक्रियाधीन प्रस्तावों पर समयबद्ध रुप से त्वरित कार्यवाही सनिश्चित हो सकेगी। इससे पहले विधायक श्री कालीचरण सराफ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में श्री सिंह ने बताया कि एसीबी द्वारा जांच उपरांत दोषी पाए गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध प्रेषित अभियोजन स्वीकृति प्रस्तातव संबंधित विभागाध्यक्षों और राज्यब सरकार के स्तर पर परिक्षणाधीन होते है। संबंधित विभागाध्यक्षों और राज्यत सरकार द्वारा एसीबी के अनुसंधान अधिकारी को अभियोजन स्वीकृति के संबंध में विचार विमर्श हेतु बुलाया जाता है। उन्होंने बताया कि एसीबी के अनुसंधान से संतुष्ट नहीं होने एवं अन्य कुछ विषयों पर सहमत नहीं होने पर अभियोजन स्वीकृति में विलम्ब होता है। इसके अतिरिक्त आरोपी अधिकारी और कर्मचारी द्वारा अपनी अभियोजन स्वीकृति पर माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया जाता है, अभियोजन स्वीकृति प्रस्ताव विभागीय स्तटर पर परीक्षण एवं प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण लंबित रहते हैं। श्री सिंह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अभियोजन स्वीकृति के लम्बित प्रकरणों के शीघ्र निस्ताारण हेतु संबंधित विभागाध्यक्षों को समय-समय पर आवश्यसक दिशा निर्देश जारी किये जाते हैं, जिससे प्रकरणो में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने 7 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को स्कूटी खरीदने राशि भेजी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रावीण्य सूची के बच्चों को स्कूटी का वितरण किया जा चुका है। अब बच्चे अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल या इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीद सकते हैं। इसके लिए सभी जिलों को राशि पहुंचा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आधुनिक समय में बच्चों के बौद्धिक विकास में लैपटॉप सहायक है, जल्द ही कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए राशि अंतरित की जाएगी। विद्यार्थियों को जो अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन के बल पर उपलब्धि अर्जित कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करना राज्य शासन का दायित्व है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से जो विद्यार्थी प्रावीण्य सूची में आ रहे हैं उन्हें राज्य सरकार द्वारा स्कूटी और लैपटॉप प्रदान किए जा रहे हैं।  

भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया : डॉ. जितेंद्र सिंह

नईदिल्ली भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता वर्तमान में 8,180 मेगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना है। गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में दस रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 10 और रिएक्टरों की योजना प्रगति पर है, जिसमें कोव्वाडा, आंध्र प्रदेश में संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से एक प्रमुख 6 x 1208 मेगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कल बुधवार को एक खास मीडिया साक्षात्कार के दौरान दी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस घोषणा की सराहना की कि एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने इस कदम को “क्रांतिकारी” बताया। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार के भविष्यवादी रोडमैप पर जोर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित “परमाणु मिशन” भारत के ऊर्जा परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी बदलाव लाएगा और परमाणु ऊर्जा को भारत में ऊर्जा के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरने में सक्षम बनाएगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार के भविष्यवादी रोडमैप पर जोर दिया, जो ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस घोषणा की सराहना की कि एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। इस कदम को “क्रांतिकारी” बताते हुए उन्होंने कहा कि 60-70 वर्षों से यह क्षेत्र गोपनीयता के तहत काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब अधिक खुलेपन और सहयोग के साथ भारत आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप परमाणु ऊर्जा में विकास और नवाचार को गति दे सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद किया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के फैसले ने उद्योग को बदल दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि परमाणु क्षेत्र इसी तरह के विकास और नवाचार का अनुभव करेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव आएगा। परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्रोत होगी पेट्रोलियम आयात पर भारत की निर्भरता पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्रोत होगी। ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा को एक आधारशिला के रूप में मानते हुए सरकार ने विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य घरेलू परमाणु क्षमताओं को बढ़ाना, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों को तैनात करना है। केंद्रीय बजट 2025-26 ने आर एंड डी के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए केंद्रीय बजट 2025-26 ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में आर एंड डी के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए हैं, जिसका लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए, चालू एसआरएम स्थापित करना है। यह 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सस्टेनिबिलिटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता, जो वर्तमान में 8,180 मेगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना है। गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में 10 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, दस और रिएक्टरों की योजना प्रगति पर है, जिसमें कोव्वाडा, आंध्र प्रदेश में संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से एक प्रमुख 6 x 1208 मेगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल है। उन्होंने साझा किया कि 19 सितंबर, 2024 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया, जब राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की इकाई-7 (आरएपीपी-7) क्रिटिकैलिटी तक पहुँच गई, जो एक नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत का प्रतीक है – यह उपलब्धि भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता को उजागर करती है। डॉ. सिंह ने पुष्टि की कि विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन, परमाणु ऊर्जा विकास को गति देने और 2047 तक भारत को उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी में वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार है।  

राज्यपाल बागडे विश्व पुस्तक मेले पहुंचे, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पुस्तक—पाठक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों की सराहना की

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे आज नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में पहुंचे। उन्होंने वहां देशभर के प्रकाशकों की प्रदर्शित पुस्तकों के स्टॉलों का अवलोकन किया और अपनी पसंद की पुस्तकें भी खरीदी। उन्होंने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा मेले में आयोजित विभिन्न गतिविधियों को देखकर मुक्त कंठ से उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि पुस्तक पाठक सरोकारों की दृष्टि से विश्व पुस्तक मेले का आयोजन महती पहल है। विश्व पुस्तक मेले में पहुंचने पर राज्यपाल श्री बागडे का राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे और निदेशक कर्नल युवराज मलिक ने अभिनंदन किया। राज्यपाल को एनबीटी की ओर से भारतीय संविधान की मूल प्रति पर उकेरे चित्रों और उनके वर्णन संबंधित स्मृति चिन्ह भी प्रदान किया गया। राज्यपाल ने विश्व पुस्तक मेले में ‘भारत: गणतंत्र @75’ की थीम पर आधारित मंडप, भारतीय ज्ञान परम्परा और नई शिक्षा नीति, अंतरराष्ट्रीय मंडप में फोकस देश ‘रूसी संघ’ के मंडप ‘रूस से आई पुस्तकें’  भी देखी और भारतीय ज्ञान के आलोक में पुस्तक मेले के विस्तार के लिए एनबीटी के किए प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक श्री युवराज मलिक ने राज्यपाल को विश्व पुस्तक मेले में लेखकों से संवाद और बच्चों को पुस्तकों से जोड़ने के प्रयासों के साथ पुस्तक संस्कृति के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों और न्यास द्वारा प्रकाशित सद्य पुस्तकों के बारे में जानकारी दी। निदेशक श्री मलिक ने राज्यपाल को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पुस्तकों का सेट भी भेंट किया।

तप, त्याग, सेवा, संयम, समर्पण जैसे शब्द विद्यासागर जी के व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे लगते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की स्मृति में भोपाल में स्मृति स्थल विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर विधानसभा परिसर में आयोजित गुरु गुणानुवाद सभा में गुरु वंदना कर अतिशय पुण्य अर्जित करने पधारे समर्पित भक्तों का राज्य शासन की ओर से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपने जीवन में सभी आवश्यक नियमों का पालन किया। संत परंपरा का अनुसरण करते हुए उनके प्रकृति के साथ संबंध, जीवन शैली, मानव सेवा और समाज को मार्गदर्शन के माध्यम से वे अपने जीवन काल में ही देवता के रूप में स्वीकारे जाने लगे। व्यक्तिगत जीवन में तप, संयम, त्याग, सेवा, समर्पण जैसे शब्द उनके व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे पड़ जाते हैं। कार्यक्रम में सांसद भोपाल आलोक शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह, जनप्रतिनिधि राहुल कोठारी तथा जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का मुकुट और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट द्वारा कार्यक्रम में आयोजनकर्ताओं ने मुकुट तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिवादन किया। उनको शॉल भी सम्मानपूर्वक भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत शिरोमणि 108 विद्यासागर जी महाराज जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित किया तथा मुनि108 प्रमाण सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन और कृतित्व पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें नेमावर में संत-के सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। साक्षात देवता के दर्शन के समान प्रतीत होता संत-का अलौकिक व्यक्तित्व जीवन को धन्य करने वाला था। जैन और सनातन दर्शन में आत्मा की भूमिका आवागमन की बताई गई है। यह माना जाता है कि वस्त्र बदलने के समान ही पवित्र आत्मा शरीर बदलती है। इस दृष्टि से यह मानना कि महाराज जी हमारे बीच नहीं है, व्यर्थ है। वास्तविकता यह है कि उन्हें स्मरण करने और मन की आंखों से देखने के क्षणिक प्रयास मात्र से ही आचार्य विद्यासागर जी के आस-पास होने की सहज अनुभूति होती है। उनके व्यवहार, स्वरूप और विचार के प्रभाव के परिणाम स्वरूप सभी व्यक्ति उन्हें अपना मानते थे। प्रदेशवासियों में संत-के प्रति इतने अपनत्व और आदर का भाव था कि यह किसी को अनुभूति ही नहीं होती थी कि वे कर्नाटक से हैं। संत-ने जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपनी इच्छा शक्ति से जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी। स्वरोजगार के क्षेत्र में जेल से लेकर समाज में महिलाओं को रोजगार देने का मार्ग प्रशस्त किया। गौ-माता की भी उन्होंने चिंता की तथा गौ-माता के माध्यम से लोगों के जीवन और प्रकृति में बदलाव के लिए गतिविधियों को प्रोत्साहित किया। इसी प्रकार किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में की गई उनकी पहल अनुकरणीय है। आचार्यने अपने विचार, भाव और कर्म से समाज को प्रकृति व परमात्मा के समान पुष्पित-पल्लवित, प्रेरित करने का कार्य किया। भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत-का विचार था कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा सभी के लिए सुलभ होना चाहिए। वे भाषाओं की समृद्धि पर विशेष ध्यान देते थे, उनका विचार था कि भाषाओं की विविधता की जानकारी से भारत की आंतरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है और ज्ञान के लिए भाषाओं की समृद्धि आवश्यक है। गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास जारी हैं, इस क्रम में 55 एक्सीलेंस कॉलेज आरंभ किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है। इसी का परिणाम है की नई शिक्षा नीति में जैन दर्शन सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के सभी विचारों को शामिल किया गया है। प्रदेश में खुले में मांस की दुकानों को भी बंद किया गया। तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार संवदेनशील है। प्रदेश में शराब बंदी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की गई। समाज में इस दिशा में सुधार की आवश्यकता है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर हों मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय संस्कृति में तिथियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय काल गणना देश के प्राचीन ज्ञान, कौशल के बल पर स्थानीय ऋतुओं और परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई, जिस पर सभी को गर्व है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज संत नहीं जीवित देवता हैं, उनका स्नेह, प्रेम, दुलार और आशीर्वाद सब पर बना रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मृति दिवस पर पधारे मुनि-के विचारों का श्रवण भी किया।  

औद्योगिक विकास के नये युग की ओर अग्रसर MP : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अधिक प्रभावी अवसर देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। देश का आकर्षक डेस्टिनेशन बनता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश न केवल देश का पहला डायमंड प्रोड्यूसिंग स्टेट है, बल्कि ग्रीन एनर्जी हब, विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और उभरते हुए टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इन विभागीय समिट से सरकार निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता और औद्योगिक ईको सिस्टम की मजबूती से अवगत कराएगी। इससे जीआईएस में होने वाली चर्चाएं वास्तविक निवेश प्रस्तावों में तब्दील हो सकेंगी। शहरी विकास समिट मध्यप्रदेश का शहरी बुनियादी ढांचा तेजी से सुदृढ़ हो रहा है। राज्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स हब इसे एक आदर्श रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डेस्टिनेशन बना रहे हैं। जीआईएस में शहरी विकास समिट के माध्यम से स्मार्ट और सतत् शहरों के निर्माण पर केंद्रित चर्चा होगी, जिससे नवाचार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन समिट मध्यप्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौन्दर्य से पूर्ण पर्यटन क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। खजुराहो, उज्जैन, साँची, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने के लिये तैयार हैं। पर्यटन समिट में हॉस्पिटैलिटी, थीम-बेस्ड डेस्टिनेशन और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गहन चर्चा होगी।  माइनिंग समिट मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी समिट मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रीवा सोलर प्लांट, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन में हो रहे विकास इसे नवकरणीय ऊर्जा निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जीआईएस में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तुत की जाएंगी। आईटी एंड टेक्नोलॉजी समिट मध्यप्रदेश अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का केंद्र बन रहा है। इंदौर आईटी हब, डेटा सेंटर पॉलिसी, स्टार्ट-अप ईको सिस्टम और उभरते एआई और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्रों में तेजी से निवेश आ रहा है। जीआईएस में आईटी समिट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी पार्क और नई टेक्नोलॉजीज पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया जाएगा। एमएसएमई समिट मध्यप्रदेश का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी समिट मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है।

सीएम प्रमोद सावंत ने गोवा-प्रयागराज महाकुंभ स्पेशल ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

पणजी मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने गोवा से प्रयागराज के लिए चलने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने गुरुवार सुबह करमाली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, “मैंने गोवा सरकार की ओर से प्रयागराज के लिए एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। मैं सभी श्रद्धालुओं को बधाई देता हूं। 13 और 21 फरवरी को दो और ट्रेनें जाएंगी। अगर और लोग जाएंगे तो हम उनके लिए भी व्यवस्था करेंगे। मैं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को महाकुंभ मेला 2025 में किए गए इंतजामों के लिए बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने भी बुधवार को संगम में पवित्र डुबकी लगाई, मैं इसके लिए भी उन्हें बधाई देता हूं।” बता दें कि महाकुंभ में बसंत पंचमी के दिव्य, भव्य अमृत स्नान को लेकर प्रयागराज रेलवे ने 300 से अधिक ट्रेनों का सफल संचालन किया था। मेला प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक, बसंत पंचमी पर्व पर 2.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया था। प्रयागराज रेल मंडल ने तीर्थ यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए बसंत पंचमी पर्व के दिन 106 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। इसके साथ ही लगभग 200 नियमित ट्रेनें भी शहर के सभी स्टेशनों से चलाई गईं, जिससे लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य स्टेशनों तक पहुंचाया गया। 13 जनवरी से प्रारंभ हुए महाकुंभ में अब तक वीवीआईपी मूवमेंट के बावजूद श्रद्धालुओं को संगम स्नान में कहीं कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसी का नतीजा है कि मात्र 24 दिनों में अब तक 39 करोड़ श्रद्धालु संगम में पावन डुबकी लगा चुके हैं। बता दें कि इस बार का महाकुंभ इसलिए भी खास है, क्योंकि यह 144 साल बाद आया है। इसी के चलते लाखों श्रद्धालु रोजाना संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।  

बस्सी विधानसभा क्षेत्र में गारण्टी अवधि की सभी 111 सड़कों की मरम्मत संवेदकों द्वारा करवाई गई है: सार्वजनिक निर्माण मंत्री

जयपुर सार्वजनिक निर्माण मंत्री दिया कुमारी ने गुरूवार को विधानसभा में कहा कि विधानसभा क्षेत्र बस्सी में गारण्टी अवधि की 111 सड़कों की मरम्मत संवेदकों द्वारा करवाई जा चुकी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सड़कों की मरम्मत संबंधित कोई शिकायत आने पर पुनःपरीक्षण कर उचित कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक निर्माण मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थीं। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र बस्सी में 111 सड़कें गारण्टी अवधि में हैं। इनमें से 63 सड़कों की मरम्मत संवेदक द्वारा बिना नोटिस दिये ही कर दी गई है। शेष 126.92 किलोमीटर की 48 सड़कों की मरम्मत के लिए संवेदकों को नोटिस जारी करने के बाद उनके द्वारा सड़कों को ठीक करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि संवेदकों द्वारा सड़कों की मरम्मत का कार्य करवा करवा दिये जाने के कारण उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा सड़कों के ऑनलाइन निरीक्षण एवं शिकायत प्रबंधन के लिए ‘सेवा’ एप शुरू किया गया है। एप के माध्यम से अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) की सड़कों की फोटो डाली जाती है और समयबद्ध रिपेयरिंग सुनिश्चित की जाती है। इससे पहले विधायक श्री लक्ष्मण के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने विधानसभा क्षेत्र बस्सी में गारण्टी अवधि की सड़कों एवं वर्तमान स्थिति का विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने जानकारी दी कि संवेदकों की गारण्टी अवधि में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत करवाने हेतु समय-समय पर कार्यालय द्वारा नोटिस जारी किये गये हैं। उन्होंने इनका विवरण भी सदन के पटल पर रखा। दिया कुमारी ने कहा कि गारण्टी अवधि में सड़क मरम्मत कार्य संवेदक द्वारा स्वयं के खर्चे पर पूर्ण करवाये जाते हैं।

राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा- दिल्ली में केजरीवाल से लोग नाराज, 8 फरवरी को बनेगी भाजपा की सरकार

नई दिल्ली दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर बुधवार को चुनाव खत्म होने के साथ ही कई एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आ गए हैं। अधिकतर एग्जिट पोल में दावा किया गया है कि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो सकता है और अरविंद केजरीवाल सरकार बनाने से चूक सकते हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने एग्जिट पोल पर कहा, “एग्जिट पोल में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, वह बिल्कुल सच के करीब है। जमीनी सच्चाई ये है कि केजरीवाल के खिलाफ लोगों में नाराजगी है। दिल्ली में लोग उनसे नाराज हैं और कई मुद्दे ऐसे भी थे, जिस पर केजरीवाल लोगों को समझा नहीं पाए। इसी के अनुकूल ही एग्जिट पोल भी है। मुझे लगता है कि रिजल्ट आम आदमी पार्टी के खिलाफ ही आएगा। 8 फरवरी के बाद दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी।” उन्होंने लालू प्रसाद के बयान पर कहा, “वह जितनी बार भी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कहेंगे, उनकी पार्टी उतनी ही कमजोर होगी और लोग भी उनसे दूर होते जाएंगे। अब लालू यादव कुछ भी कहते रहें, ये उनका मामला है।” उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लोगों को दलित से कोई लेना-देना नहीं है। वह सिर्फ दिखावे के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं और भाषण देते हैं कि हम दलितों के साथ हैं।” वहीं, एग्जिट पोल को लेकर शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा, “एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक दिल्ली में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है और कांग्रेस-आम आदमी पार्टी का सफाया होने वाला है। कांग्रेस को तो दो सीट मिलने का अनुमान है और ये स्वाभाविक था कि लोकसभा चुनाव के दौरान सभी अवसरवादी पार्टियां एकजुट हुई थीं। बाद में अलग-अलग होकर चुनाव लड़ने लगीं। इन लोगों में एकजुटता नहीं है, ये साफ हो गया है।”  

मनोहरथाना स्थित प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के भवनों का परीक्षण करवाकर मरम्मत की कार्रवाई की जाएगी: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह ने आज विधानसभा में कहा कि मनोहरथाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कामखेड़ा तथा रवासिया स्वयं के भवन में संचालित हैं। इसलिए उनके भवन निर्माण हेतु राशि स्‍वीकृत करवाया जाना विचाराधीन नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि इन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, तो जिला कलक्टर की अध्यक्षता में समिति के माध्यम से परीक्षण कराकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2009 में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कामखेड़ा तथा रवासिया के भवनों का निर्माण किया गया था। इससे पहले विधायक श्री गोविन्द प्रसाद के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र मनोहरथाना जिला झालावाड़ के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र कामखेडा व रवासिया के भवन नॉर्म्स के अनुसार ही निर्मित किये गए हैं।

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