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एक राष्ट्र एक चुनाव: एक नई दिशा की ओर: न्यायमूर्ति रोहित आर्य (सेवानिवृत)

भोपाल प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने एक बार कहा था, ‘कठिनाई नए विचारों को विकसित करने में नहीं, बल्कि पुराने विचारों से मुक्त होने में है।‘ संभवत: एक देश एक चुनाव का विरोध कर रहे राजनीतिक दल और नेता पुराने विचारों से मुक्‍त होने में ही कठिनाई महसूस कर रहे हैं, या सिर्फ विरोध की राजनीति के तकाजे उन्‍हें इस अभिनव प्रयास का समर्थन करने से रोक रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी नीव विविधता में एकता की अवधारणा पर टिकी हुई है। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” इसी विचारधारा को सशक्त बनाता है, जिससे संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जा सकें। यह विषय न केवल प्रशासनिक सुधार से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संगठित, कुशल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक एतिहासिक कदम भी है। यह प्रणाली चुनावी प्रक्रिया को सरल बनायेगी, शासन को स्थिरता प्रदान करेगी और अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करेगी। पहले भी होते रहे हैं एक साथ चुनाव हालांकि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में की गई पहल के बाद से चर्चा का विषय बना है, लेकिन यह कोई नया विचार नहीं है। भारत में 1952 के पहले आम चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाते थे, इसके बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव होते थे। उससे पहले यही प्रकिया ब्रिटिश सरकार द्वारा 1935 के भारत शासन अधिनियम में भी अपनाई गई थी। हालांकि, 1967 के बाद राजनैतिक और सामाजिक बदलावों के कारण यह व्यवस्था टूट गई। 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद को भंग कर समय से पहले चुनाव कराए, जिसके बाद यह प्रवृत्ति और मजबूत हो गई। नतीजा यह हुआ कि आज हम वर्षभर में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलग-अलग चुनाव होते हुए देखते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव शासन व्यवस्था, आर्थिक संसाधनों और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है। 1962 में भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि “अगर संभव हो तो प्रयास और खर्च की पुनरावृत्ति से बचना चाहिये “। 1983 की वार्षिक रिपोर्ट में भी संसदीय और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की आवश्यकता को दोहराया गया। 170वीं विधि आयोग की रिपोर्ट ने तो इसे और आगे बढ़ाते हुये अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को इसका प्रमुख कारण बताया। इस अनुच्छेद का अत्यधिक प्रयोग भारत के संघीय ढांचे के लिये चिन्ता का विषय बना रहा है। 2015 में 79वी स्थाई समिति की रिपोर्ट ने भी एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया। दूषित हो गई लोकतांत्रिक प्रणाली देश में होने वाले बहु-चरणीय चुनावों ने कई समस्याओं को जन्म दिया है और इनके कारण पैदा हुई बुराईयों ने हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही दूषित कर दिया है। चुनावों में बाहुबल का बढ़ता प्रयोग लोकतंत्र के लिये खतरा बन गया है। मतदान के दौरान होने वाली हिंसा जैसी घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को बाधित करती हैं। बहु-चरणीय चुनावों में कानून व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है। चुनावों में फर्जी समाचार, सोशल मीडिया में दुष्प्रचार और मतदाताओं को गुमराह करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। बार-बार होने वाले चुनावों के कारण ध्यान शासन से हटकर चुनाव प्रचार पर  चला जाता है, जिससे नीतियों के कियान्वयन में देरी होती है। इससे मुफ्तखोरी की राजनीति की शुरुआत हुई जो राज्‍य की वित्‍तीय स्थिति को नुकसान पहुंचाती है। बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता विकास कार्यक्रमों और प्रशासन को बाधित करती है, जिससे नीतिगत गतिरोध उत्पन्न होता है और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। हर बार के चुनावों में भारी सुरक्षा बल और कर्मचारियों की तैनाती होती है, जो न सिर्फ सरकारी संसाधनों पर दबाव डालती है, बल्कि‍ आवश्‍यक सेवाओं को भी बाधित करती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ही 70 लाख अधिकारियों की तैनाती हुई थी। बार-बार के चुनावों से मतदाताओं पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पडता है। वे उदासीनता और थकान महसूस करने लगते हैं। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी सीमित हो जाती है। देश के लिए हितकारी केन्द्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिये पूर्व राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्‍यक्षता में “कोविन्द समिति ” का गठन किया था। इस समिति के सुझावों के आधार पर 129वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव होने से खर्च और प्रशासनिक लागत की  बचत होगी। कम चुनाव निर्बाध शासन और नीतियों का क्रियान्‍वयन सुनिश्‍चित करेंगे। एक साथ होने वाले चुनाव केन्द्र और राज्य की नीतियों के बीच समन्वय में सुधार करेंगे। मतदान प्रतिशत बढेगा और एक साथ होने वाले चुनावों से राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास की राह प्रशस्‍त होगी, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देगी। समिति ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड बताया है। समिति के अनुसार एक देश, एक चुनाव से कम से कम 12000 करोड읧 की बचत तो होगी ही, काले धन और भ्रष्‍टाचार पर भी रोक लगेगी। समिति के अनुसार ‘एक देश, एक चुनाव’ देश के जीडीपी के 1.5 प्रतिशत की बचत कर सकता है। इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, अप्रत्याशित प्रचार खर्च कम होंगे और चुनाव के बाद मुद्रास्फीति में कमी होगी। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएँ, तो सरकार को पूरे पाँच साल तक निर्बाध रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विकास की गति तेज होगी, सामाजिक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा और जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा। सबका साथ, सबका विश्‍वास के साथ आगे बढ읧ी प्रक्रिया कोविंद समिति ने एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर व्‍यापक विचार विमर्श किया। समिति ने कुल 62 राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे। इनमें से 47 दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें से 32 दलों ने इसका समर्थन किया और 15 ने इसका विरोध किया। इसके अतिरिक्त, भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी अपनी राय दी और सभी ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं है। उच्च न्यायालयों के 9 पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकी 3 … Read more

पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा

जयपुर पशुपालन, डेयरी, गोपालन और मत्स्य विभाग के शासन सचिव  डॉ समित शर्मा ने कहा है कि पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बहुत आवश्यक है। यह देखा गया है कि इन परीक्षाओं में पर्यवेक्षक और निरीक्षक के रूप में सेवानिवृत अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है जिससे कई बार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं। शासन सचिव ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन भूमिकाओं में सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति की प्रथा को बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अब  प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम दो पर्यवेक्षक/ परीक्षक की नियुक्ति की जाए जिनमें से एक अधिकारी राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजूवास) से तथा दूसरा पशुपालन विभाग से नामित हो। अगर किसी कारणवश राजूवास के अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो पशुपालन विभाग के दो अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने परीक्षा के दौरान नैतिक मानकों को बनाए रखने और किसी भी प्रकार के कदाचार को रोकने के लिए सभी नामित पर्यवेक्षकों और निरीक्षकों को नकद उपहार, मुफ्त या किसी प्रकार के भौतिक लाभ सहित किसी भी प्रकार केे आतिथ्य को स्वीकार करने से बचने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों के लीक होने और परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए सभी स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संस्थान की संबद्धता और एनओसी निरस्त कर दी जाएगी। शासन सचिव ने बताया कि सभी परीक्षा केंद्र अधीक्षक, डीन और प्रिंसीपल को परीक्षा हॉल में रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश दिए गए हैं जिसकी अधिसूचना राजूवास, बीकानेर द्वारा जारी की जा चुकी है। उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षा हॉल में कैमरा इस तरह लगाया जाए  कि प्रश्न पत्र के लिफाफे खोलने से लेकर उत्तर पुस्तिका के लिफाफे सील करने तक की पूरी प्रक्रिया बिना किसी रूकावट के रेकार्ड हो सके। साथ ही परीक्षा कक्ष का प्रत्येक विद्यार्थी कैमरे की जद में रहे। सभी रिकॉर्डिंग को दैनिक आधार पर डीवीडी में स्थानांतरित करना भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा जिसकी एक प्रति संबंधित संस्थान अथवा कॉलेज के पास रहेगी तथा दूसरी प्रति राजूवास के परीक्षा नियंत्रक को भिजवाना होगा। किसी  भी प्रकार की अपूर्ण अथवा अनुचित रिकार्डिंग के लिए कोई बहाना स्वीकार्य नहीं होगा। डॉ शर्मा ने निष्पक्ष, पारदर्शी और नकल मुक्त परीक्षा आयोजित करने तथा परीक्षा की सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल और उचित कार्रवाई करते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देश दिए।

प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया : कृषि मंत्री श्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण मिशन अंतर्गत किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मिशन कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने का प्रमुख माध्यम बनेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा प्राकृतिक कृषि के प्रसार एवं किसानों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया गया है। प्राकृतिक खेती कर रहे एवं प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया है।पोर्टल पर प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक कुल 72 हजार 967 किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रत्येक पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 81 लाख से अधिक किसानों को गत वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का अंतरण किया गया है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष में किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया। देश में पहली बार राज्य सरकार ने सोयाबीन का 4 हजार 892 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर उपार्जन करने का निर्णय लिया। लगभग 2 लाख किसानों से प्रदेश में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन कर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का भुगतान किया गया। खरीफ-2024 में 1.23 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज का वितरण किया गया। किसानों को उर्वरक प्रदाय करने के लिए केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही अमानक उर्वरक बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने और उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोग शालाओं की भूमिका को सक्रिय बनाकर किसान हित सुनिश्चित किया गया। मध्यप्रदेश को कृषि उत्पादन में निरंतर अग्रणी स्थान मिला है। सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना अब प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के नाम से लागू है। कृषकों को सौर ऊर्जा के लाभ से लाभांवित करने के लिए प्रदेश में अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले लगभग सवा लाख किसानों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएँगे। अगले चार वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के सिंचित क्षेत्र का रकबा अगले पाँच वर्ष में 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 26 लाख हेक्टेयर से अधिक है। संतरा, टमाटर, धनिया, लहसुन और मसाला उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। प्रदेश में 50 हाइटेक नर्सरी बनाई जा रही हैं। नर्सरियों के कुशल प्रबंधन के लिए ई-नर्सरी पोर्टल भी तैयार किया गया है।  

चैम्पियंस ट्रॉफी में हार का मुद्दा पाकिस्तानी संसद में उठेगा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देंगे बयान

इस्लामाबाद ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम की बड़ी फजीहत हुई है. यह टूर्नामेंट पाकिस्तान की ही मेजबानी में खेला जा रहा है. मगर यह मेजबान टीम ग्रुप स्टेज से भी आगे नहीं बड़ सकी है. बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान टीम बगैर कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर हो गई है. ऐसे में अब बड़ी खबर सामने आ रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब अपनी टीम की हार का मुद्दा संसद में उठाएंगे. वो इस मामले को व्यक्तिगत तौर पर संसद में रखेंगे. पीएम शरीफ के राजनीतिक और सार्वजनिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक निजी चैनल पर यह जानकारी दी है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) के नेता राणा सनाउल्लाह ने कहा कि चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तानी टीम की अपमानजनक हार हुई और वो टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो गई. इस पर शरीफ सरकार संज्ञान लेगी. चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से हारते ही कटोरा थामने की नौबत चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर होती ही टीम के लिए स्पॉन्सर तलाशना भी असंभव नजर आ रहा है. कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत ने रविवार को दुबई में पाकिस्तान को छह विकेट से रौंदा था फिर न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश को हराकर खुद तो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया ही भारत भी टॉप-4 में पहुंच गया. इसी के साथ ग्रुप ए से पाकिस्तान और बांग्लादेश बाहर हो गए. टूर्नामेंट से बाहर हुआ पाकिस्तान भारत से हारने से एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच के लिए गद्दाफी स्टेडियम में लोगों की शानदार भीड़ को देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी आत्मविश्वास से भरे हुए थे. बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, ‘लोगों की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान से इतर मैच का आनंद लेते देखना एक उत्साहवर्धक अनुभव था.’ लोग स्टेडियम आएंगे या नहीं 1996 के विश्व कप के बाद पाकिस्तान पहली बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा था. फैंस को उम्मीद थी कि आठ टीमों की इस प्रतियोगिता में घरेलू टीम टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. अब पीसीबी के सामने एक समस्या ये भी है कि पाकिस्तान में बचे हुए मैच में दर्शकों की भीड़ स्टेडियम पहुंचती है या नहीं. ब्रांड वैल्यू पर पड़ेगा असर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वाणिज्यिक इकाई के एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा कि अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल में नहीं भी खेलता है तो भी पीसीबी को वित्तीय रूप से कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा क्योंकि केवल गेट पर्ची और मैदान की आय के अन्य स्रोत ही प्रभावित होंगे, लेकिन संकटग्रस्त टीम की ‘ब्रांड वैल्यू’ पर असर पड़ने वाला है. भारत ने मारी पेट पर लात पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी ने कहा,’हमें मेजबानी शुल्क, टिकट बिक्री सहित आईसीसी राजस्व में हमारा हिस्सा मिलने की गारंटी है, लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जैसे कि लोगों का इस बड़े टूर्नामेंट में रुचि खत्म होना और प्रसारणकर्ता द्वारा आधे भरे हुए स्टेडियम दिखाना आदि. और सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी के बावजूद भविष्य में पाकिस्तान क्रिकेट को एक ब्रांड के रूप में बेचना आसान नहीं होगा.

अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार पन्नू ने याचिका की प्रति अजीत डोभाल को सौंपी

अमेरिका सिख कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जुड़े मामले में एक नया खुलासा हुआ है। अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, पन्नू ने अपनी याचिका की प्रति भारत के शीर्ष खुफिया अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंप दी है। पन्नू की याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार, अजीत डोभाल और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या के लिए हायर किया था। यह साजिश उस वक्त विफल हो गई जब गुप्ता द्वारा हायर किया गया शूटर असल में एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट निकला। याचिका में यह भी कहा गया कि यह “मर्डर फॉर हायर” साजिश भारत सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा थी, जिसमें सिख कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इनमें वे लोग शामिल हैं जो पंजाब में सिखों के आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग कर रहे हैं, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित उत्पीड़न की आलोचना कर रहे हैं और भारत में मानवाधिकार हनन के मामलों को उजागर कर रहे हैं। डोभाल को समन देने के लिए निजी जांचकर्ताओं की मदद अदालत में पेश किए गए नए दस्तावेजों के मुताबिक, पन्नू ने दो कानूनी एजेंसियों और एक निजी जांचकर्ता की मदद से अमेरिका में डोभाल के दौरे के दौरान उन्हें समन सौंपने की व्यवस्था की। अमेरिकी अदालत में दायर घोषणाओं के अनुसार, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, हालांकि इसे उस स्थान पर भी भिजवाया गया जहां डोभाल ठहरे हुए थे। इसके बावजूद, अमेरिकी अदालत के 12 फरवरी 2025 के आदेश के तहत, डोभाल को वैकल्पिक माध्यमों से समन जारी किया गया। दस्तावेजों में कहा गया है, “पन्नू सम्मानपूर्वक अदालत को सूचित करते हैं कि प्रतिवादी (डोभाल) को समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।”   डोभाल को 21 दिनों के भीतर देना होगा जवाब अगर समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो अजीत डोभाल को 21 दिनों के भीतर अमेरिकी अदालत में पन्नू के मुकदमे का जवाब देना होगा। पन्नू ने आरोप लगाया, “प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर, डोभाल और उनके सहयोगियों ने अमेरिकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रची, सिर्फ इसलिए कि उसने अपने राजनीतिक विचार व्यक्त किए।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे अमेरिकी न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और मुझे यकीन है कि सीमा-पार दमन (ट्रांसनेशनल रेप्रेशन) में शामिल अपराधियों को आपराधिक और दीवानी अदालत में न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।” पन्नू के वकील का बयान पन्नू के वकील मैथ्यू बोर्डन (BraunHagey & Borden, LLP) ने कहा, “हमने अजीत डोभाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वह इस मामले में एक प्रमुख प्रतिवादी हैं और अब अपनी संलिप्तता को छिपा नहीं सकते। हम उनसे सबूत जुटाने और अपने मुवक्किल के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हैं।”  

पश्चिमी बांग्लादेश में विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द, ईद पर 2 दिनों की लीव; भड़की भाजपा

कोलकाता कोलकाता नगर निगम ने एक आदेश जारी कर विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी और ईद की एक दिन की छुट्टी बढ़ाकर दो दिन कर दी. निगर निगम के इस आदेश पर जमकर बवाल हुआ. कोलकाता नगर निगम का ये आदेश हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए था. बवाल इतना बढ़ा कि कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कोलकाता नगर निगम ने इस आदेश को जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि ये अनजाने में हुई टाइपिंग मिस्टेक (Typographical mistakes) थी. 25 फरवरी को जारी इस नोटिस पर केएमसी के शिक्षा विभाग के मुख्य प्रबंधक के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं. बता दें कि विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी 17 सितंबर को दी जाती है. कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी आदेश में साफ साफ लिखा गया था कि 17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं रहेगी क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश के अनुसार राज्य में ईद उल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को घोषित की गई थी. KMC का पुराना आदेश. छुट्टियों में बदलाव के पहले के ज्ञापन की आलोचना करते हुए विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया कि यह राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए तुष्टिकरण का एक उदाहरण है. मीडिया को दिए गए नोट में म्यूनिसिपल कमीश्नर ने कहा कि ये आदेश सक्षम प्राधिकारी की सहमति लिए बिना जारी किए गए थे. कोलकाता नगर निगम अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई कर रहा है. विवाद के बाद रद्द किया गया आदेश कोलकाता नगर निगम का कहना है कि चूंकि ये आदेश बिना परमिशन के जारी किए गए थे. इसलिए इस आदेश को रद्द कर दिया गया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि अब छुट्टियों की नई लिस्ट जारी की जाएगी. मीडिया नोट में कहा गया है, “राज्य सरकार की छुट्टियों की सूची को मौजूदा मानदंडों के अनुसार बनाए रखते हुए एक संशोधित और सटीक आदेश आने वाले समय में जारी करेगी.” बीजेपी का कहना है कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया तभी KMC को इस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा. बंगाल बीजेपी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों को कहा कि, “यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि नगर निगम अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रोकने और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय से अनभिज्ञ थे.” उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दक्षिण कोलकाता के एक कॉलेज में पुलिस सुरक्षा के साथ सरस्वती पूजा आयोजित की गई थी. कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम पर हमला बता दें कि TMC नेता फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम के मेयर हैं. बीजेपी इस मामले को इसलिए भी उठा रही है. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के चीफ मैनेजर को ऐसा आदेश जारी करने के लिए किससे हुकुम मिला, क्योंकि बंगाल का कोई भी अधिकारी अपने दम पर ऐसा आदेश नहीं जारी कर सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोलकाता नगर निगम का प्रशासन फिरहाद हकीम के हाथों में है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और आधुनिक सुहरावर्दी फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मिलने वाली छुट्टी को खत्म करने का आदेश दिया है – जो हिंदुओं, विशेष रूप से प्रमुख ओबीसी के लिए बहुत महत्व का अवसर है – और इसकी जगह इसे ईद-उल-फितर के लिए आवंटित कर दिया है, जिससे छुट्टी एक दिन से बढ़कर दो दिन हो गई है. महाकुंभ को ‘मत्युकुंभ’ कहने पर विवाद इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर एक विवाद पैदा कर दिया था. ‘मृत्युकुंभ’ से जुड़ा ये विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 18 फरवरी 2025 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर संबोधित किया था. ममता ने आरोप लगाया था कि आयोजन में वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि गरीब और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि महाकुंभ अब अपनी मूल भावना खो चुका है और ‘मृत्युकुंभ’ में बदल गया है.  

अपने साथियों के साथ रोहित का करीबी रिश्ता है टीम के लिए अच्छा, कप्तानी के इस अंदाज पर फिदा हैं शिखर धवन

नई दिल्ली पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन का मानना ​​है कि रोहित शर्मा पिछले कुछ वर्षों में कप्तान के रूप में परिपक्व हुए हैं। उन्होंने कहा कि अपने साथियों के साथ रोहित का करीबी रिश्ता है जो भारतीय टीम के लिए अच्छा है। काफी समय तक रोहित के सलामी जोड़ीदार रहे धवन ने कहा कि मुंबई का यह बल्लेबाज टीम को संभालने के लिए काफी अनुभवी है। धवन ने ‘स्टार स्पोर्ट्स’ और ‘जियोहॉटस्टार’ पर विशेष सीरीज ‘द शिखर धवन एक्सपीरियंस’ में कहाकि 2013 से 2025 तक, 12 साल का अनुभव बहुत है। रोहित ने बहुत कुछ देखा है। वह जानता है कि दबाव की स्थिति में कैसे काम करना है, लड़कों को कैसे एकजुट करना है। शिखर धवन ने कहाकि एक कप्तान के रूप में वह परिपक्व हो गया है। वह जानता है कि कब नरमी बरतनी है और कब पीछे हटना है। यह एक अच्छा संतुलन है और लड़कों के साथ रोहित का रिश्ता अद्भुत है। धोनी ने बनाई थी ओपनिंग जोड़ी धवन ने 2013 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी के अपने सफर के बारे में भी बात की और रोहित के साथ अपनी नौ साल की सलामी साझेदारी को याद किया जो उसी टूर्नामेंट में शुरू हुई थी। बाएं हाथ के इस 39 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज ने कहा कि रोहित को उनके साथ सलामी जोड़ीदार के रूप उतारने का विचार महेंद्र सिंह धोनी का था। धवन ने कहाकि उस सलामी जोड़ी पर फैसला उस मैच से आधे दिन पहले किया गया था। उस समय मैं भी नया था और मैं अपनी ही दुनिया में था। मैंने वापसी की थी और अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत थी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने यह फैसला किया और रोहित को पारी का आगाज करने का निर्देश दिया। तब सोचा नहीं था ऐसा होगा शिखर ने कहाकि मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा। मैंने सोचा कि अगर रोहित पारी का आगाज करते हैं तो हम साथ में बल्लेबाजी का आनंद लेंगे। हमें पहले मैच में बहुत अच्छी शुरुआत मिली। हमने बिना विकेट खोए 100 रन बनाए थे। धवन ने कहाकि हमने 10वें ओवर तक 30-35 रन ही बनाए क्योंकि विकेट से तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि हमारी जोड़ी इतनी बड़ी होगी और हम 10 साल तक साथ खेलेंगे। धवन ने रोहित के साथ अपनी दोस्ती के बारे में भी बात की और कहा कि उनकी दोस्ती जूनियर क्रिकेट के दिनों से है। उन्होंने कहाकि हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और हमारी आपसी समझ और संवाद का स्तर बहुत ऊंचा है। मैदान पर और मैदान के बाहर हमारा रिश्ता एक जैसा है। हमने साथ खेला है, हमने कई श्रृंखला जीतने के बाद साथ में पार्टी की है। हम एक टीम के रूप में खेले हैं।

कोलेस्ट्रॉल समेत कई समस्याओं का रामबाण इलाज, सुबह-सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाएं, मिलेंगे जबरदस्त फायदे

कच्चे लहसुन में विटामिन बी6, विटामिन सी, मैंगनीज और सेलेनियम समेत कई पोषक तत्वों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। कच्चे लहसुन के कुछ कमाल के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। महज एक महीने तक हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट कच्चे लहसुन का सेवन करें। यकीन मानिए आपको खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर दिखाई देने लगेगा। हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद कच्चे लहसुन की मदद से हाई ब्लड प्रेशर और बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। कच्चा लहसुन गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भी कारगर साबित हो सकता है। कच्चे लहसुन का सेवन कर आप अपनी हार्ट हेल्थ को मजबूत बनाकर दिल से जुड़ी गंभीर और जानलेवा बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मिलेंगे जबरदस्त फायदे कच्चे लहसुन को गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अपच या फिर एसिडिटी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी आप कच्चे लहसुन का सेवन कर सकते हैं। अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो रेगुलरली कच्चे लहसुन को कंज्यूम करना शुरू कर दीजिए। कच्चे लहसुन में पाए जाने वाले तत्व आपकी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने में भी असरदार साबित हो सकते हैं। गौर करने वाली बात बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए सही मात्रा में और सही तरीके से कच्चे लहसुन का सेवन करना बेहद जरूरी है। कच्चे लहसुन को भूनकर या फिर पानी में भिगोकर कंज्यूम किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक दिन में 2 से 3 कली लहसुन खाया जा सकता है। ज्यादा लहसुन की कली का सेवन करना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद की जगह नुकसानदायक भी हो सकता है।

अब हम हिंदी को तमिलनाडु पर थोपने का विरोध करेंगे, अवधी, बुंदेली और ब्रज समेत 25 भाषाओं को खत्म किया: स्टालिन

चेन्नै तमिलनाडु में हिंदी बनाम तमिल की जंग छेड़ने वाले सीएम एमके स्टालिन लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। अब उन्होंने फिर से दोहराया है कि हम हिंदी को तमिलनाडु पर थोपने का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी के चलते उत्तर भारत की 25 से ज्यादा भाषाओं को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु हिंदी भाषा को ‘थोपने’ की इजाजत नहीं देगा और उन्होंने तमिलों एवं इसकी संस्कृति की रक्षा करने का संकल्प जताया। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘हम हिंदी थोपने का विरोध करेंगे। हिंदी मुखौटा है, संस्कृत छिपा हुआ चेहरा है।’ डीएमके ने आरोप लगाया है कि केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में तीन-भाषा फार्मूले के माध्यम से हिंदी को थोपने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस आरोप का खंडन किया है। पत्र में स्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी जैसी कई उत्तर भारतीय भाषाओं को ‘आधिपत्यवादी हिंदी ने नष्ट कर दिया है।’ सत्तारूढ़ डीएमके के प्रमुख ने कहा, ‘आधिपत्यवादी हिंदी-संस्कृत भाषाओं के हस्तक्षेप से 25 से अधिक उत्तर भारतीय मूल भाषाएं नष्ट हो गई हैं। जागरुकता के कारण सदियों पुराने द्रविड़ आंदोलन और विभिन्न आंदोलनों ने तमिलों और उनकी संस्कृति की रक्षा की।’ उन्होंने कहा कि तमिलनाडु एनईपी का विरोध कर रहा है क्योंकि केंद्र शिक्षा नीति के माध्यम से हिंदी और संस्कृत को थोपने की कोशिश कर रहा है। एनईपी के अनुसार तीसरी भाषा विदेशी भी हो सकती है। भाजपा के इस दावे का जवाब देते हुए स्टालिन ने दावा किया कि त्रिभाषा नीति कार्यक्रम के अनुसार,‘‘कई राज्यों में केवल संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है।’ उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राजस्थान उर्दू प्रशिक्षकों के बजाय संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘अगर तमिलनाडु त्रिभाषा नीति को स्वीकार करता है, तो मातृभाषा को नजरअंदाज कर दिया जाएगा और भविष्य में संस्कृतीकरण होगा।’ उन्होंने दावा किया कि एनईपी प्रावधानों में कहा गया है कि ‘संस्कृत के अलावा’ अन्य भारतीय भाषाओं को स्कूलों में पढ़ाया जाएगा और तमिल जैसी अन्य भाषाओं को ऑनलाइन पढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र ने तमिल जैसी भाषाओं को खत्म करने और संस्कृत को थोपने की योजना बनाई है।’ स्टालिन ने कहा कि द्रविड़ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई ने दशकों पहले राज्य में द्विभाषा नीति लागू की थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ‘हिंदी-संस्कृत के माध्यम से आर्य संस्कृति को थोपने और तमिल संस्कृति को नष्ट करने के लिए कोई जगह नहीं है।’

फिल्में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल मीडिया और सिनेमा की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है। फिल्में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। हमारी फिल्में केवल कथा और कहानी नहीं होतीं, इनमें राष्ट्र और समाज को सशक्त करने का संदेश भी होता है। आज के डिजिटल युग में मीडिया और सिनेमा की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर सेज विश्वविद्यालय के सभागार में सतपुड़ा चलचित्र समिति के ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर विमोचन समारोह को संबोधित कर रही थी। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल में युवा भाग लेगें और अपनी रचानात्मक और सृजनात्मक क्षमता से नवाचार करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें युवा पीढ़ी पर गर्व है। युवा वर्ग देश में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि फिल्मों के माध्यम से सामाजिक मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति को संरक्षित करने के साथ ही समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण कार्य किया जा सकता है। सतपुड़ा चलचित्र समिति इस दिशा में बहुत अच्छा कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा ने हमारे राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा को समाज से जोड़ने का माध्यम बनाने की दिशा में समिति का प्रयास सराहनीय है। मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि आज के युग में कुछ डिजिटल प्लेटफार्म पर असामाजिक व्यक्ति परिवारिक मूल्यों को नष्ट करने का दुष्प्रयास कर रहे है। ऐसे समय में सतपुड़ा चलचित्र समिति जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक विचारधारा का विस्तार है। यह नवोदित फिल्मकारों के लिये एक मंच है। इस फेस्टिवल के माध्यम से हम ऐसे सिनेमा को प्रोत्साहित करेगें जो भारतीय मूल्यों को संरक्षित रखते हुए समाज के समक्ष सार्थक विषय प्रस्तुत कर रहे हैं। ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर विमोचन समारोह के प्रारंभ में सतपुडा़ चलचित्र समिति और विश्व संवाद केन्द्र मध्यप्रदेश के अध्यक्ष लाजपत आहूआ ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सेज विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव नीरज उपमन्यु ने अध्यक्षयीय उद्बोधन दिया। उन्होंने अतिथियों का आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।  

बदल जाएगी इंदौर की सड़कों की सूरत, 300 करोड़ की लागत से बना बीआरटीएस अब हटेगा

इंदौर 12 साल पहले तीन सौ करोड़ की लागत से बना इंदौर का बीआरटीएस हटेगा। इसे लेकर लगी याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे हटाने की मंजूरी दी है। अब एक दो दिन में नगर निगम बीआरटीएस की बस लेन हटाने का काम शुरू करेगा। तीन माह पहले इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीआरटीएस को हटाने की घोषणा कर कोर्ट में इस बारे में पक्ष रखने की बात कही थी। 11 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस पर आठ प्रमुख जंक्शनों पर नगर निगम ब्रिज बनाना चाहता है। इसके लिए बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया। हाईकोर्ट में बीआरटीएस हटाने के लिए याचिका लगी थी, लेकिन बीते कई वर्षों से नगर निगम बीआरटीएस की उपयोगिता बताते हुए अपना पक्ष रखता आ रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद नगर निगम ने खुद हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि सरकार बीआरटीएस हटाना चाहता है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने इस बारे में कहा कि याचिका में दोनो ही पक्ष बीआरटीएस हटाने पर सहमत थे, इसलिए कानूनी अड़चन नहीं आई। बीआरटीएस के हटने से शहर के ट्रैफिक में अलग सुगमता आएगी और ब्रिज भी बन सकेंगे। बीआरटीएस के हटने से सड़क की चौड़ी हो जाएगी। शुक्रवार से बस लेन हटाने का काम शुरू हो जाएगा।   70 हजार से ज्यादा यात्री करते है सफर इंदौर के निरंजपुर चौराहा से राजीव गांधी प्रतिमा चौराहा तक बने बीआररटीएस में आई बसों का संचालन एआईसीटीएसएल करता है। प्रतिदिन एक लाख से 70 हजार तक यात्री आई बस में सफर करते है। अब यह बसे मिक्स ट्रैफिक में चलेगी। ज्यादा छात्र और नौकरीपेशा इन बसों का उपयोग करते थे। देश का पहला प्रोजेक्ट था जवाहर लाल शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत इंदौर बीआरटीएस देश का पहला स्वीकृत प्रोजेक्ट था। इंदौर के बाद पुणे, दिल्ली, भोपाल, अहबादाबाद में भी बीआरटीएस प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे, हालांकि इंदौर से पहले अहमदाबाद का बीआरटीएस बनकर तैयार हो गया था। बीआरटीएस के जंक्शनों पर ब्रिज बनाने के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है।  

प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती शमी ने की समीक्षा

भोपाल प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने गुरूवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सागर एवं शहडोल संभाग के कमिश्नर एवं कलेक्टर्स से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों से अच्छी गुणवत्ता का गेहूं उपार्जित करें। साथ ही उपार्जित गेहूं का भुगतान समय पर करें। गौरतलब है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गत दिनों गेहूं उपार्जन की समीक्षा के दौरान जिलेवार उपार्जन तैयारियों की समीक्षा के निर्देश दिये थे। श्रीमती शमी ने कहा कि उपार्जन केन्द्रों में किसानों के लिये सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। किसानों को गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन कराने के लिये जागरूक करें। उन्होंने संभागायुक्त और जिलों के कलेक्टर्स से अलग-अलग बात कर गेहूं उपार्जन के लिये की गई तैयारियों की जानकारी ली। अभी तक 3 लाख से अधिक किसान गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन करा चुके हैं। श्रीमती शमी ने बताया कि वेयर हाउस के लंबित भुगतान भी जल्द किये जायेंगे। उन्होंने उचित मूल्य दुकानों से राशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों का ई-केवायसी कराने के निर्देश भी दिये। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिये किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं का उपार्जन 1 मार्च से 18 अप्रैल तक होगा। शेष संभागों में 17 मार्च से 5 मई तक गेहूं का उपार्जन किया जायेगा। संचालक खाद्य कर्मवीर शर्मा ने कहा कि उपार्जित गेहूं का परिवहन जल्द किया जाये। गेहूं के भंडारण की समुचित व्यवस्था करें। उपार्जन केन्द्रों की माइक्रो प्लानिंग करें। इस बात ध्यान रखें कि उपार्जन केन्द्रों में किसानों को कोई कठिनाई नहीं हो। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों का सत्यापन कराएं। उचित मूल्य दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन 7 दिन में करा लें। उपार्जन कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी लगाएं। उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त बारदानों की व्यवस्था करें। एमडी नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा ने किसानों के रजिस्ट्रेशन पर जोर दिया। उन्होंने धान मिलिंग की समीक्षा की तथा मिलिंग का कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिये। वर्मा ने परिवहन संबंधी लंबित बिलों को जल्द भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि भुगतान की कार्यवाही शीघ्र की जायेगी। जिला कलेक्टर्स ने गेहूं उपार्जन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी।  

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने दिये निर्देश अंडरग्राउंड केबिल बिछाने में खोदी गई सड़कों की तुरंत मरम्मत करें

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने एमपीईबी के अधिकारियों से कहा कि बिजली की अंडरग्राउंड केबिल बिछाने में खोदी गई सड़कों की तुरंत मरम्मत करें। श्रीमती गौर ने कल्पना नगर, शिव नगर फेस-1 और फेस-2 वार्ड 73 के पार्षद राजू राठौर की शिकायत पर निर्देश दिये। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि खोदी गई सड़कों की मरम्मत को एक सप्ताह में करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वह स्वयं क्षेत्र में भ्रमण कर दिये गये निर्देशों के अनुक्रम में की गई कार्यवाही का जायजा लेगी। श्रीमती गौर ने कहा कि भविष्य में सड़क निर्माण ऐजेंसी, नगर निगम और एमपीईबी के अधिकारी समन्वय बनाकर रखें जिससे ऐसी स्थिति नहीं बने। सड़क बनने के पहले केबिल बिछाने का कार्य किया जाये।  

एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कीर्तिमानों की सूची, जानें पहले नंबर पर कौन सा देश काबिज

मुंबई क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट का अपना-अपना अलग अंदाज है, लेकिन क्रिकेट प्रेमी तीनों ही फॉर्मेट को पसंद करते हैं। हालांकि, तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग टीमें टॉप स्थान पर हो सकती हैं। इस समय आईसीसी की टॉप टीमों में वनडे और टी20 में भारत का नाम शामिल है, जबकि टेस्ट में इस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम कब्जा जमाए हुए है। इस समय आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी खेली जा रही है, जो वनडे फॉर्मेट में आयोजित हो रही है। वनडे फॉर्मेट का हमेशा से ही अलग जलवा रहा है। वनडे वर्ल्ड कप का बेसब्री से फैंस इंतजार करते हैं। दरअसल, वनडे मैचों में कई ऐसे रिकॉर्ड बने हैं जो टूटे हैं। कई महान बल्लेबाज हुए हैं, जिन्होंने वनडे में शतकों का अंबार लगाया है। कई ऐसी टीमें भी हैं, जिन्होंने वनडे में शतकों के मामले में रिकॉर्ड बनाया है। पाकिस्तान की टीम ने लगाए कुल 229 शतक पाकिस्तान की टीम में कई बड़े खिलाड़ी रहे हैं। आज के समय में बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान जैसे खिलाड़ी हैं। एक समय पर शाहिद अफरीदी, मोहम्मद यूनुस और मिस्बाह-उल-हक जैसे खिलाड़ी भी इस टीम का हिस्सा थे। लेकिन पाकिस्तान में अब तक सईद अनवर का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ सका है। पाकिस्तान की पूरी टीम ने वनडे क्रिकेट में 229 शतक लगाए हैं। पाकिस्तान की ओर से सईद अनवर ने सबसे ज्यादा 20 शतक लगाए, जबकि बाबर आजम ने 19 शतक लगाए हैं। बाबर आजम जल्द ही सईद अनवर का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की टीम ने लगाए कुल 252 शतक वहीं, दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की टीम है, जिसने पाकिस्तान से ज्यादा शतक बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम ने वनडे क्रिकेट में 252 शतक लगाए हैं। ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट हमेशा से ही शानदार रहा है। सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफियां भी ऑस्ट्रेलिया के पास ही हैं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड रिकी पोंटिंग के नाम है, जिन्होंने 30 वनडे शतक बनाए। इसके बाद मैथ्यू हेडन का नाम आता है, जिन्होंने 18 शतक जोड़े हैं। भारत की टीम ने लगाए कुल 323 शतक दुनिया में वनडे क्रिकेट की सबसे सफल टीम भारतीय टीम रही है। भारतीय खिलाड़ियों ने वनडे क्रिकेट में कुल 323 शतक लगाए हैं। भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में सचिन तेंदुलकर का नाम हमेशा से लिया जाता है, लेकिन अब इस रिकॉर्ड को विराट कोहली ने तोड़ दिया है। भारत की ओर से सबसे ज्यादा वनडे शतक विराट कोहली ने लगाए हैं। विराट कोहली अब तक 51 शतक लगा चुके हैं, जबकि इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए 50 वनडे शतक लगाए थे। यानी कुल मिलाकर सचिन और विराट ने मिलकर ही 100 शतक जड़ दिए हैं।

Samsung ने लॉन्च किए दो कम कीमत के 5G फोन, 10 हजार से कम है शुरुआती कीमत

10 हजार रुपये से कम में सैमसंग का 5G स्मार्टफोन खरीदने की इच्छा रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। क्योंकि सैमसंग ने आज भारत में M सीरीज लेटेस्ट लो-बजट Samsung Galaxy M06 5G फोन को लॉन्च कर दिया है। इस फोन में यूजर्स को HD+ रेजोल्यूशन के साथ एक बड़ी स्क्रीन, अच्छी फोटो क्लिक करने के लिए 50MP कैमरा और दमदार बैटरी मिल जाएगी। चलिए आपको बताते हैं Samsung Galaxy M06 5G की कीमत, सेल ऑफर्स और सभी फीचर्स के बारे में: Samsung Galaxy M06 5G की कीमत और सेल डेट सैमसंग गैलेक्सी M06 5G को सिर्फ एक ही वैरिएंट में पेश किया गया है। फोन के 4GB रैम + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 9,499 रुपये रखी गई है। गैलेक्सी M06 5G की फर्स्ट सेल 7 मार्च को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। फोन को आप ई-कॉमर्स प्लेटफार्म अमेजन.इन, सैमसंग.कॉम, सिलेक्टेड रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध है। Galaxy M06 5G की कीमत Samsung Galaxy M06 5G के फीचर्स और स्पेक्स सैमसंग गैलेक्सी M06 5G में LCD तकनीक, HD+ रेजोल्यूशन, 90Hz रिफ्रेश रेट और 800 निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ 6.7-इंच डिस्प्ले है। सैमसंग ने इसे मीडियाटेक डाइमेंशन 6300 SoC के साथ पैक किया है और फोन को एंड्रॉयड 15-आधारित वन यूआई 7.0 के साथ फोन को पैक कर रहा है। फोन में 25W चार्जिंग स्पीड और माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट के साथ 5,000mAh की बैटरी है। कैमरा की बात करें तो गैलेक्सी M06 5G में पीछे की तरफ दो कैमरे हैं, एक 50MP प्राइमरी कैमरा और 2MP डेप्थ सेंसर। सेल्फी के लिए आपको 8MP का कैमरा मिलता है। कनेक्टिविटी ऑप्शन में 5जी, डुअल-बैंड वाई-फाई एसी, ब्लूटूथ 5.3, जीपीएस और एक 3.5 मिमी ऑडियो जैक शामिल हैं। इस लो-बजट फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर भी है। फोन का माप 167.4 x 77.4 x 8 मिमी और वजन 191 ग्राम है।

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