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होलिका दहन आज, होली पर्व का उत्साह होलिका दहन के साथ होगा शुरू, कल रंगों का पर्व मनाया जाएगा

जबलपुर होली पर्व का उत्साह आज रात होलिका दहन के साथ शुरू हो जाएगा, कल शुक्रवार को रंगों का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ दुबे के अनुसार, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त गुरुवार की रात्रि 11,30 बजे के उपरांत रहेगा। गुरुवार के दिन भद्रा दोपहर 11 बजकर सात मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। अतः होलिका दहन भद्रा उपरांत ही करना चाहिए। चंद्रमा का संचरण कन्या राशि मे रहेगा। जिसके कारण भद्रा का निवास पाताल लोक में रहता है। पाताल की भद्रा अनिष्टकारी मानी जाती है। इस कारण भद्रा समाप्त होने के उपरांत होलिका दहन शुभ रहेगा।   राशि अनुसार दें आहुति     मेष राशि : होलिका दहन में गुड़ की आहुति चढ़ाएं।     वृषभ राशि : होलिका दहन में मिश्री एवं नारियल गिर की आहुति चढ़ाएं।     मिथुन राशि : होलिका दहन में कपूर एवं इलायची की आहुति चढ़ाएं।     कर्क राशि : होलिका दहन में कच्चा चावल, सफ़ेद तिल की आहुति दें।     सिंह राशि : होलिका दहन में गूगल एवं गुड की आहुति चढ़ाएं।     कन्या राशि : होलिका दहन में पान और हरी इलायची की आहुति दें।     तुला राशि : होलिका दहन में कपूर एवं सफेद तिल की आहुति चढ़ाएं।     वृश्चिक राशि : होलिका दहन में गुड़ की आहुति चढ़ाए।     धनु राशि : होलिका दहन में हल्दी की गांठ व पीली सरसों की आहुति दें।     मकर राशि : होलिका दहन में काले तिल व लौंग की आहुति चढ़ाएं।     कुंभ राशि : होलिका दहन में काली सरसों, लौंग व गूगल की आहुति दें।     मीन राशि : होलिका दहन में पीली सरसों व गुड की आहुति चढ़ाएं।  

होली पर अचानक बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सभी चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया

मथुरा होली के दौरान किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर चला गया है। जिला अस्पताल मथुरा, जिला संयुक्त अस्पताल वृंदावन, महिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) 24 घंटे खुले रहेंगे। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने, कैमिकल युक्त रंगों से बचने और स्वच्छ खानपान की सलाह दी है। होली पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट होली पर अचानक बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सभी चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपातकालीन सेवाओं के लिए सभी अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी तय की गई है। आइवी फ्लूड्स, एंटीबायोटिक्स, आईड्राप्स, जलने के उपचार की दवाएं और एंटी-एलर्जिक मेडिसिन का पर्याप्त स्टाक उपलब्ध कराया गया है। जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ, नेत्र सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ विशेष रूप से उपलब्ध रहेंगे। एंबुलेंस सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके। बदलते मौसम और गर्मी को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा प्रबंध भी किए गए हैं। डॉक्टरों की छुट्टियां रद कर दी गईं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार होली के दौरान उपयोग किए जाने वाले कई रंग हानिकारक रसायनों से बने होते हैं। जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इनमें मौजूद हानिकारक तत्व त्वचा में जलन, खुजली और एलर्जी पैदा कर सकते हैं। बाजार में मिलने वाले कुछ गुलाल में पत्थर के महीन कण मिलाए जाते हैं। जिससे त्वचा रोग और आंखों की जलन हो सकती है। जबकि भीगने के बाद मौसम में बदलाव के कारण कई लोगों को सर्दी-जुकाम और बुखार की समस्या हो सकती है। होली के दौरान लापरवाही से खानपान संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन ग्रहण करने की सलाह दी है। होली को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियां पूरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि होली को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। तीनों अस्पतालों के साथ सभी सीएचसी व पीएचसी पर आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध रहेगी। सभी जरूरत वाली दवाओं का स्टॉक उपलब्ध करवा दिया गया है। लोगों से अपील है कि वह सुरक्षित तरीके से होली खेलें। बेवजह भीगने से बचें। केमिकल वाले रंगों से बचें और अच्छे से हाथों को धोकर ही भोजन पकवान का सेवन करें। क्योंकि जरा सी लापरवाही से स्वास्थ्य को परेशानी हो सकती है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी

रायपुर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज रायपुर में मुख्यमंत्री निवास में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने उप मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।

उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  जल की बूंद-बूंद बचायें, जल से ही सुरक्षित होगा हमारा कल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च को गुड़ी पड़वा से होगा 90 दिवसीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभाग करेंगे सहभागिता अभियान में होगा 50 हजार नए खेत-तालाबों का निर्माण वर्षा जल भंडारण के लिए सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर दें विशेष ध्यान जल स्त्रोतों का रख-रखाव अब पंचायतें एवं स्थानीय जन करेंगे अभियान में प्रदेशभर में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत अभियान के क्रियान्वयन संबंधी बैठक में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण में तेजी लाने के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पानी से ही जिंदगानी है। हम सभी को जल की बूंद-बूंद बचाने की जरूरत है। जल से ही हम सबका आने वाला कल सुरक्षित है। जल गंगा जल संवर्धन अभियान में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक गतिविधियां चलाई जाएं। जन सामान्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की भागीदारी से जल संरक्षण गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगी। अभियान में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई ‘जल गंगा जल संवर्धन अभियान’ की बैठक ये निर्देश दिए। जल गंगा संवर्धन अभियान गुड़ी पड़वा 30 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून 2025 तक तीन माह लगातार चलेगा। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, अभियान से जुड़े अन्य विभागों के प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान से प्रदेश में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जल संरक्षण के लिए उठाए जाएं ठोस कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत जल संचय की विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि पौधरोपण एवं जल स्रोतों का पुनर्जीवन, गांव-गांव में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यों के अलावा सामुदायिक सहभागिता के जरिए जल संरक्षण के प्रयास किए जाएं। अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सकारात्मक अभियान की शुरुआत की जाए। ग्रीष्मकाल में शासकीय स्कूलों में जल संरक्षण की गतिविधियां आयोजित की जाएं। बच्चों के लिए पीने के पानी की टंकी की साफ-सफाई कराई जाए, जिससे विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए है। राज्य स्तरीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ आगामी 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के दिन से उज्जैन की क्षिप्रा नदी के तट से किया जाएगा। लगभग 90 दिन चलने वाले ‘जल गंगा जल संवर्धन अभियान’ का समापन 30 जून 2025 को होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेश व्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण एक साथ मिलकर कार्य करेंगे। अभियान की थीम ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण’ रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब बना जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण आबादी को पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध कराने के लिए पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव में लोगों को पेयजल एवं किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। साथ ही गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को भी कोई परेशानी न हो और उन्हें पानी मिले, इसके लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं को पुनर्विकसित किया जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार भी ‘खेत का पानी खेत में – गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश की ऐसी सभी नदियों का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए, जहां जल धाराओं में मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ समेत अन्य जलीय जीवों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि नर्मदा में डॉल्फिन मछली को छोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। इन सभी प्रयासों से नदियों और जलीय जीवों दोनों का संरक्षण होगा। 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे। मंदिरों के निकट जल स्त्रोतों की सफाई में संतों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय एवं प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। विक्रम संवत् के पहले दिन वरुण पूजन और जलाभिषेक के साथ अभियान की विधिवत शुरुआत की जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अमृत सरोवर … Read more

1 साल में नहीं हुआ कोई भी विकास का कार्य ,पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं करा पाई सरकार : पंकज उपाध्याय 

No development work was done in 1 year, government could not even provide drinking water: Pankaj Upadhyay जौरा | विधानसभा में जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने राज्यपाल की अभिभाषण में कहा कि , कल राज्यपाल जी का भाषण सुना आज बड़े ही दुखी मन से यहां अपनी बात रख रहा हूं . मैं पहली बार का विधायक हूं और बड़ी उम्मीद लेकर आया था . आपको देखा , प्रहलाद जी को देखा , कैलाश जी को देखा और बरिष्ठ लोगों को देखा तो लगा कि बिजली , पानी , सड़क सभी काम बड़ी आसानी से हो जाएंगे , मैं जो यहाँ पर बोलूंगा वह होगा , लेकिन मैं जहां एक साल पहले खड़ा था आज भी वहीं पर खड़ा हूं . पानी की समस्या की बात करें तो हमने लगातार नलजल योजना की यहां बात की है कैलाश विजयवर्गीय जी ने पिछली बार आश्वासन दिया कि जिले की एक समिति बनाएंगे जिन विधायकों को रखेंगे और वह गांव – गांव जाकर देखेंगे कि क्या स्थिति है . एक साल में कोई भी ऐसी कार्यवाही नहीं हुई ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करे जा रहे हैं . पूरे विभाग का हर कर्मचारी अपनी मर्जी से काम किये जा रहा है . एक भी नल की टोंटी में से पानी नहीं निकल रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है . एक साल से हम प्रत्येक विधान सभा में इस प्रश्न को लगाते हैं और उत्तर मिल जाता है कार्यवाही जारी है , हो रहा है , होगा लेकिन काम कब होगा यह आज तक पता नहीं चल पाया है . ऐसे ही विकलांग हैं जिनके दोनों पैर खराब होते हैं उनको साठ प्रतिशत का प्रमाणपत्र पकड़ा दिया है और जो विकलांग नही थे , बहरे , अंधे नहीं थे उन लोगो को आपने फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरियां दे दी हैं . आपने 100-100 प्रतिशत के प्रमाण पत्र दे दिये हैं लेकिन जिनके दोनों पैर नहीं हैं आज तक हम उन लोगों को सायकिल नहीं दे पाए . बहुत ही शर्म आती है जब वह लोग हमारे पास में आते हैं कि आप विधायक हो हमको सायिकल तो दिला दो . इस पर मेरा सदन से अनुरोध है कि यह बड़ी ही संवेदनशील बात है कि जिन लोगों के दोनों पैर नहीं हैं और हमें आंखों से दिख रहा है लेकिन हम उन्हें सायकिल नहीं दिला पा रहे हैं . इस पर आप कुछ कार्यवाही करें . खाद मांगने जाते हैं तो डंडे पड़ रहे हैं . किसान अपनी फसल बेचने जाता है तो वह लाईन में लगा रहता है . मेरा आपसे अनुरोध है कि जो खरीदी केन्द्र हैं उनकी संख्या बढ़ाई जाए .अध्यक्ष महोदय , राज्यपाल जी ने जो भाषण दिया पेज नम्बर 9 पर हमने अस्पतालों की बातें सुनीं हमारे जौरा में अस्पताल बने हैं लेकिन उनमें डॉक्टर नहीं हैं . स्टॉफ नहीं है , दवाईयां नहीं है . अभी आपने नये अस्पताल का उद्घाटन किया लेकिन 50 प्रतिशत डॉक्टर भी वहां पर उपलब्ध नहीं हैं . वहां पर तीन माह से महिलाओं की डॉक्टर नहीं हैं . जब डिलेवरी होने आती है तो वह पहले वहां पर आती हैं और फिर मुरैना पहुंचाई जाती हैं . आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गंभीर बात है . अगर तीन माह से वहां पर डॉक्टर नहीं हैं तो कैसे क्या व्यवस्था हो रही होगी यह बहुत ही गंभीर विषय है , लेकिन सरकार लगातार अपनी पीठ थपथपा रही थी और मैं सोच रहा था कि मेरे क्षेत्र का तो कुछ काम ही नहीं हुआ भवन बन गए हैं लेकिन डॉक्टर नहीं हैं . यहां पर अटल एक्सप्रेस वे की घोषणा हुई माननीय अध्यक्ष जी पहले आपने घोषणा की थी कि आप बीहड़ में से इस सड़क को निकालेंगे हमने बहुत स्वागत किया कई उत्साह मने कि बहुत ही बढ़िया काम हो रहा है लेकिन आप उपजाऊ भूमि में से अगर सड़क को निकालेंगे तो यह किसान कहां जाएंगे , जो सीमान्त किसान हैं वह कहां जाएंगे . मेरा आपने अनुरोध है कि हमें इस पर गंभीरता से विचार करना होगा यदि हमने इन लोगों को आज बेरोजगार कर दिया तो आने वाले समय में हमें कोई माफ नहीं करेगा . वह जो हजारों एकड़ का बिहड़ पड़ा है आप उस बिहड़ पर सड़क निकालिए आपका स्वागत है . ऐसे ही आपने सोलर प्लांट की योजना ला दी सबने तारीफ की कि बहुत बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . जो पशुवन यहां वहां घूम रहा है वह कहां जाएगा , आपने यदि हमारी पच्चीस हजार बीघा जमीन ले ली और जहां जमीन पर सोलर प्लांट लग जाएगा तो जमीन में से पानी कम जो जाएगा . वहां के किसान कहां जाएंगे इस बारे में किसी ने कोई चर्चा नहीं की है . मैं फिर कहना चाहता हूं कि जो हमारा बिहड़ का इलाका है । चंबल के पास का वहां लाखों एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई है वह आप इन उद्योगपतियों को दीजिए , अडानी , अम्बानी को हमारी उपजाऊ जमीन देने की पंकज उपाध्याय ने कहा कि लोगों को बिजली नहीं मिल रही हैं , लोग घंटों – दिनों तक खड़े रहते हैं . डीपी जल जाती है तो दो – दो माह तक बिजली नहीं आती है , जब तक रिश्वत नहीं दी जाती है , तब तक डीपी नहीं बदली जाती है , मेरा अनुरोध है कि ये बहुत ही गंभीर विषय है इस पर आपको चिंतन करना होगा .  यहां से सबसे ज्यादा लोग सेना में जाते हैं . इतने लोग शहीद हो जाते हैं . उसके बाद भी हम मुरैना जिले एक ट्रेनिंग सेंटर आज तक नहीं बना पाये कि जहां हमारे नए युवा ट्रेनिंग कर सकें , मैं , विगत एक वर्ष में 5 बार इस सदन में , इसकी मांग कर चुका हूं लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है . शहीदों की केवल एक बार तारीफ कर दो , फिर उन्हें भूल जाओ . वहां स्कूल नहीं हैं । हमारे युवाओं के साथ भेदभाव हो रहा है , वे सेना में भर्ती होने के … Read more

मध्यप्रदेश का बजट जल जीवन मिशन को देगा नई गति: मंत्री श्रीमती उइके

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत वर्ष 2025-26 का बजट प्रदेश के समग्र विकास का प्रतिबिंब है। हर वर्ग की उन्नति को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस बजट में जल जीवन मिशन के तहत 17,136 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश के प्रत्येक ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। यह कदम न केवल जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जल संरक्षण और अधोसंरचना विकास को भी नया आयाम देगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि यह बजट महिलाओं, किसानों, युवाओं और समाज के वंचित वर्गों के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रदेश में जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर होगा, बल्कि महिलाओं और बच्चों को होने वाली असुविधा से भी राहत मिलेगी। स्वच्छ जल की सहज उपलब्धता से ग्रामीण जीवनस्तर में व्यापक सुधार आएगा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों में कमी आएगी। प्रदेश के जल संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जल आपूर्ति से जुड़ी अधोसंरचनाओं को और मजबूत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में घर-घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इस बजट से और अधिक गति मिलेगी। इस वर्ष जल संरक्षण और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए किए गए प्रावधान राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संसाधनों के संवर्धन और स्वच्छता के क्षेत्र में प्रभावी कार्य कर रही है। जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने का जो संकल्प लिया गया है, वह इस बजट से और मजबूत हुआ है। प्रदेश के हर गांव-हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में यह बजट एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करेगा।  

छत्तीसगढ़ वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को ने टेंटेटिव वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में जोड़ा

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी नेशनल पार्क को यूनेस्को ने 2025 की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की तदर्थ (टेंटेटिव) सूची में शामिल कर लिया है। यह प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार किसी स्थल को इस सूची में स्थान मिला है। अब छत्तीसगढ़ सरकार को एक साल के भीतर पूरी तथ्यात्मक जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश करना होगा, ताकि इसे पूर्ण रूप से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिल सके। पहली बार छत्तीसगढ़ की किसी साइट को यह सम्मान कांगेर घाटी नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र 200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहां की भौगोलिक संरचना, गुफाएं, वनस्पतियां, दुर्लभ पक्षी एवं जनजातीय संस्कृति इसे अनोखा बनाती हैं। वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए भेजा गया प्रस्ताव यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने की प्रक्रिया यूनेस्को किसी स्थल को तीन श्रेणियों में वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देता है— प्राकृतिक धरोहर सांस्कृतिक धरोहर मिश्रित धरोहर छत्तीसगढ़ सरकार ने कांगेर घाटी के लिए प्राकृतिक धरोहर श्रेणी में आवेदन किया था, जिसे यूनेस्को ने प्राथमिकता सूची में शामिल कर लिया है। अब सरकार को अगले एक साल में सभी जरूरी तथ्यों और शोध के साथ विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी। कैसे हुआ चयन? करीब दो साल पहले कांगेर घाटी नेशनल पार्क के तत्कालीन डायरेक्टर गणवीर धम्मशील ने इस दिशा में काम शुरू किया था। उन्होंने पुरातत्व विभाग और अन्य विशेषज्ञों की मदद से करीब एक साल तक शोध किया और यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा। इसके बाद यूनेस्को ने इसे प्राथमिक सूची में शामिल कर लिया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की विशेषताएँ अद्वितीय जैव विविधता: यहां दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनमें विशेष रूप से पहाड़ी मैना शामिल है, जो इंसानों की तरह बोलने की क्षमता रखती है। प्राकृतिक गुफाएं: इस उद्यान में कोटमसर गुफा समेत 16 लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की गुफाएं हैं, जो लाखों साल पुरानी हैं। खास बात यह है कि ये गुफाएं अभी भी “जिंदा” हैं यानी इनमें प्राकृतिक रूप से चूना पत्थर की संरचनाओं का निर्माण जारी है। अंधी मछलियां और दुर्लभ जीव: इन गुफाओं में रहने वाले कुछ जीव-जंतु जैसे अंधी मछलियां और विशेष प्रकार के चमगादड़ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। धुरवा जनजाति का योगदान: इस क्षेत्र में रहने वाली धुरवा जनजाति हजारों साल पुरानी परंपराओं और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। ये जनजातियां जंगल के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आगे की प्रक्रिया अब छत्तीसगढ़ सरकार को एक साल के भीतर वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने के लिए पूरी रिपोर्ट और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो कांगेर घाटी नेशनल पार्क न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में स्थापित होगा और यह पर्यटन व संरक्षण की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह गौरव का क्षण है, क्योंकि पहली बार प्रदेश की कोई प्राकृतिक धरोहर यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुई है।

राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट

मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करना हमारा मुख्य लक्ष्य राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट वर्ष 2003-04 की तुलना में 21 गुना बड़ा है वर्ष 2025-26 का बजट बजट में कोई टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही की गई है कोई कटौती वर्ष-2029 तक बजट के आकार एवं प्रदेश की जीएसडीपी को दो गुना करने का है लक्ष्य जेण्डर बजट, बाल बजट और कृषि संबंद्ध क्षेत्र में, विगत 6 वर्षों में हुई दोगुना से अधिक की वृद्धि सिंहस्थ-2028 के लिए 2 हजार 5 करोड़, गीता भवन और वृंदावन ग्राम योजना के लिये 100-100 करोड़ रूपये और श्रीकृष्ण पाथेय के लिए 10 करोड़ रूपये का प्रावधान प्रदेश में बेहतर आवागमन के लिए मजरा-टोला सड़क योजना के अंतर्गत 100 करोड़ और सुगम परिवहन सेवा के लिए 80 करोड़ रुपए का प्रावधान मुख्यमंत्री ने सर्व-व्यापक, सर्व-स्पर्शी, सर्व-समावेशी बजट के लिए वित्त एवं उप मुख्य मंत्री देवड़ा का किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गांव, गरीब सहित सभी वर्गों के लिए व्यवस्थित योजना से मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। राज्य का बजट 2025-26 इसी संकल्प की प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। बुधवार (12 मार्च) को राज्य सरकार ने पहली बार 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया। यह बजट प्रावधान विगत वर्ष 2024-25 की अपेक्षाकृत 15 प्रतिशत अधिक है। इतने बड़े बजट के बाद भी कोई टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही कोई कटौती की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा में प्रस्तुत प्रदेश के वर्ष 2025-26 के बजट के संबंध में विधान सभा परिसर में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई सरकार बनते ही अगले 5 साल में बजट को दोगुना करने का लक्ष्य तय कर लिया गया था। वर्ष 2025-26 का बजट इसी दिशा में अनुकरणीय प्रयास है। इस बजट में राज्य के गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी (ज्ञान) सहित सभी वर्गों की बेहतरी के संकल्प को पूरा किया गया है। सभी क्षेत्रों में विकास के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष- 1956 में मध्यप्रदेश का गठन हुआ, लेकिन वर्ष 2003-04 तक मात्र 20 हजार करोड़ रूपये का बजट था, अब हम इसे 21 गुना बढ़ाते हुए 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए तक पहुंचे हैं। यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश, भारत के सभी राज्यों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त एवं उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का सर्व-व्यापक, सर्व-स्पर्शी, सर्व-समावेशी बजट प्रस्तुत कने के लिए अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्ष 2025 का यह बजट मध्यप्रदेश की आशाओं, आकांक्षाओं का बजट है। राज्य सरकार अपने सभी संकल्पों को पूरा करने की ओर निरंतर आगे बढ़ रही है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष@2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 250 लाख करोड़) बनाना है। यह केवल संख्यात्मक दस्तावेज नहीं, अपितु प्रदेश की जनता की जिंदगी बदलने वाला बजट है। प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों के आधार पर राज्य सरकार का यह दूरदर्शी बजट सशक्त-समृद्ध-शक्तिशाली और खुशहाल मध्यप्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट जनकल्याण और सुशासन के साथ प्रदेश के विकास को गति प्रदान करेगा। गरीबों को सशक्त बनाएगा और प्रदेश के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का सृजन करेगा। बजट में महिलाओं, गरीब, किसान, अनुसूचित जाति और वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए विशेष कदम उठाए गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोककल्याणकारी बजट के लिए प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बजट में प्रमुख बिंदुओं के संबंध में जानकारी दी:-     यह बजट अनुमानित राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4 प्रतिशत अनुमानित रखते हुए वर्ष 2029-30 तक बजट के आकार एव प्रदेश की जीएसडीपी को दो गुना करने के लक्ष्य पर केन्द्रित है।     कुल विनियोग की राशि 4,21,032 करोड़ रुपए है, जो विगत वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है।     अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 2,90,879 करोड़ रुपए है, जिसमें राज्य के स्वयं के कर की राशि 1,09,157 करोड़ रुपए, केन्द्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा 1,11,662 करोड़ , करेत्तर राजस्व 21,399 करोड़ रुपए और केन्द्र से प्राप्त सहायता अनुदान 48,661 करोड़ रुपए शामिल हैं ।     वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान की तुलना में राज्य के कर राजस्व में 7 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।     वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान की तुलना में पूंजीगत परिव्यय में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। राज्य की उपलब्धियां     नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक प्रतिवेदन में राज्य को व्यय की गुणवत्ता में प्रथम स्थान दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में राज्य की इस उपलब्धि का उल्लेख किया है।     वर्ष 2025-26 के बजट में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले व्यय के प्रतिशत में सर्वाधिक 17 प्रतिशत अधोसंरचना क्षेत्र के लिए प्रावधान है। अधोसंरचना क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में विगत वर्ष 2024-25 की तुलना में 31 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। राज्य की क्षेत्रवार उपलब्धियां     राज्य शासन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रतिबद्ध है, 6 वर्षों में जेण्डर बजट का आकार दोगुना हुआ है।     कृषि और संबद्ध क्षेत्र में, विगत 6 वर्षों में दोगुना से अधिक की वृद्धि हुई है।     विगत 6 वर्षों में बाल-बजट का प्रावधान दोगुना से अधिक हुआ। नारी सशक्तिकरण     मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 18,669 करोड़ रुपए का प्रावधान है ।     लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत 1,183 करोड़ रुपए का प्रावधान है।     मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता के अंतर्गत 720 करोड़ रुपए का प्रावधान है।     जल जीवन मिशन नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वॉटर मिशन में 17,136 करोड़ रुपए का प्रावधान है। अन्नदाता (किसान) के लिए … Read more

रांग साइड से आ रहे टैंकर ने दो वाहनों को मारी टक्कर, हादसा इतना जोरदार था की कार चकनाचूर हो गई, 7 लोगों की मौत

धार, बदनावर निर्माणाधीन उज्जैन-बड़नगर फोरलेन पर ग्राम बामनसुता के पास एलपीजी टैंकर ने कार और पिकअप वाहन को टक्कर मार दी। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, तथा तीन लोग गंभीर घायल हो गए। हादसे में वाहनों से घायलों और मृतकों को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद कार चकनाचूर हो गई तथा 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक घायल ने रतलाम ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।   घायलों को रतलाम रेफर किया गया दुर्घटना के शिकार हुए लोग मंदसौर और रतलाम जिले के बताए जा रहे हैं। तीन गंभीर घायलों को रतलाम रेफर किया गया। इसमें एक की रास्ते में मौत हो गई, जिसे वापस यहां सिविल हॉस्पिटल लाया गया। मृतकों की शुरुआत में शिनाख्त नहीं हो पाई थी, इसलिए उनके फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए। रांग साइड से जा रहा था टैंकर सूचना मिलने पर एसडीएम दीपक चौहान, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सोमानी, नप अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव समेत बड़ी संख्या लोग पहुंच गए थे। जानकारी के मुताबिक एलपीजी टैंकर (जीजे 12 एवाय 8769) रांग साइड से जा रहा था, जिससे एक पिकअप और कार (एमपी 14 सीडी 2552 ) की भिंडत हो गई। आज शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इनकी चली गई जान कार में बैठे गिरधारी माखीजा निवासी मंदसौर, अनिल व्यास निवासी रतलाम, विरभ धनगर निवासी सीमामऊ मंदसौर, चेतन बाघरवाल निवासी मंदसौर की मौत हो गई। वहीं पिकअप वाहन में सवार बना उर्फ लालसिंह, अनूप पूनिया निवासी जोधपुर राजस्थान, जितेंद्र बडलिया निवासी जोधपुर की मौत हो गई। ये हो गए घायल जगदीश बैरागी निवासी जोधपुर लिखमाराम निवासी जोधपुर दीपक दुर्गाराम निवासी पुनिया जाट, जोधपुर  

मध्यप्रदेश बजट 2025-26 ज्ञान मंत्र के साथ आत्मनिर्भर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम : मंत्री टेटवाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत बजट 2025-26 प्रदेश के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास का संकल्प है। वित्त एवं उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत इस बजट को “ज्ञान मंत्र” की अवधारणा पर तैयार किया गया है, जिसमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के उत्थान को प्राथमिकता दी गई है। पहली बार जीरो-बेस्ड बजट के रूप में तैयार इस बजट में 1500 से अधिक सुझावों को शामिल किया गया है, जिससे सभी वर्गों की आकांक्षाओं के अनुरूप योजनाएं बनाई गई हैं। कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा है कि यह बजट प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कौशल विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है। प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। आई.टी.आई. विहीन 22 विकासखंडों में नवीन आई.टी.आई. स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिससे प्रदेश में आई.टी.आई. की कुल संख्या बढ़कर 958 हो जाएगी और प्रशिक्षण क्षमता 1.21 लाख सीटों तक विस्तारित होगी। उन्होंने बताया कि शासकीय आई.टी.आई. देवास, छिंदवाड़ा और धार में ग्रीन स्किलिंग के तहत सोलर टेक्नीशियन और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश के युवा भविष्य की तकनीकों में दक्ष हो सकेंगे। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई कौशल विकास कार्यक्रम के तहत युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षित करने के लिए एक समग्र योजना बनाई गई है। यह कार्यक्रम प्रदेश स्तर पर एक सशक्त मंच के रूप में कार्य करेगा, जो युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। यह बजट प्रदेश के युवाओं को न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगा, बल्कि उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराएगा। प्रदेश की शासकीय आई.टी.आई. में आधुनिक तकनीकों पर आधारित नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। प्रदेश में प्रत्येक जिले में जिला विकास सलाहकार समिति का गठन होगा, जो जिले की विकास योजना का रोडमैप तैयार करेगी। जनजातीय विकास के लिए 200 करोड़ रु. का प्रस्ताव किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 4066 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री समग्र परिवार योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को लाभ मिलेगा। प्रदेश की शालाओं के उन्नयन के लिए 228 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में नौ अंतर्राष्ट्रीय हॉकी टर्फ और 25 करोड़ की लागत से एक सर्व-सुविधायुक्त स्टेडियम बनाया जाएगा। 22 नए छात्रावासों का निर्माण होगा। जनजातीय इलाकों में सीएम राइज स्कूल के लिए 1017 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के 50 विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेजा जाएगा। मंत्री टेटवाल ने कहा कि यह बजट प्रदेश के हर वर्ग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से अग्रसर हो रहा है।  

होली के लिए वक्फ बोर्ड ने सभी मस्जिदों के पदाधिकारी को पत्र भेज जुम्मे की नमाज का बदला समय

रायपुर  होली के दिन शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की मस्जिदों में नमाज के वक्त में बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया, सामाजिक समरसता बनी रहे, इस वजह से यह फैसला लिया गया है। ज्यादातर मस्जिदों में दोपहर एक बजे होने वाली नमाज अब 2 से 3 बजे के बीच होगी। शुक्रवार को होली है, इस वजह से यह बदलाव किया गया है। सभी मस्जिदों के पदाधिकारी को इस संबंध में वक्फ बोर्ड की ओर से पत्र भेज दिया गया है। इस बार शुक्रवार को होली है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग जुम्मे की नमाज पढ़ते हैं। दोपहर 12 बजे जोहर की नमाज होती है। इस नमाज को पढ़ने के लिए नमाजी मस्जिद के लिए निकलेंगे तो विवाद की आशंका है इसलिए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ये निर्णय लिया है और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है. छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष द्वारा लिए गए निर्णय का बीजेपी ने स्वागत किया है।

बस्तर में 45 हजार निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का अभियान शुरू, कराया जाएगा 200 घंटे का कोर्स

बस्तर छत्तीसगढ़ के बस्तर में 45 हजार निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए एक नया अभियान शुरू किया गया है. इस पहल के तहत, 200 घंटे का विशेष कोर्स आयोजित किया जाएगा, जिसमें निरक्षर लोगों को पढ़ाई के माध्यम से साक्षर बनाया जाएगा. अब तक 36,000 लोगों ने अपना कोर्स पूरा कर लिया है. यह अभियान बस्तर के गांवों और पंचायतों में विशेष रूप से चलाया जा रहा है. इन सभी लोगों को राष्ट्रव्यापी महा परीक्षा के माध्यम से साक्षरता प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा. 23 मार्च 2025 को, 200 घंटे का पाठ्यक्रम पूरा करने वाले सभी अभ्यर्थी परीक्षा देंगे. परीक्षा में 3 घंटे का प्रश्न पत्र होगा, जिसमें पढ़ाई, लेखन और गणित की परीक्षा शामिल होगी. इस परीक्षा का उद्देश्य केवल सामान्य साक्षरता नहीं, बल्कि गणित में भी दक्षता प्राप्त करना है. यह कार्यक्रम 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं की या जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी थी. अब इन्हें फिर से शिक्षित किया जाएगा और सफल होने पर साक्षरता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा. इस पहल से बस्तर में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और निरक्षरता की समस्या में महत्वपूर्ण सुधार होगा.

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक मल्हार महोत्सव इस बार भी संकट में, 6 साल से ठप आयोजन

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक मल्हार महोत्सव को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का प्रमुख उत्सव माना जाता है। मगर, यह बीते छह साल से ठप पड़ा है। प्रशासनिक अड़चनों और वित्तीय अनिश्चितताओं के चलते इस वर्ष भी आयोजन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मल्हार, बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील का एक ऐतिहासिक नगर है, जो प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। मल्हार महोत्सव का उद्देश्य इस गौरवशाली विरासत को संरक्षित रखना और लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना है। हर साल यहां पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, नाटक, हस्तशिल्प प्रदर्शन, व्यंजन मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, जो आकर्षण का केंद्र रहे हैं। साल 2019 से 2023 तक महोत्सव का आयोजन कोविड-19 के बहाने बाधित रहा। 2024 में सरकार द्वारा आयोजन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण स्वीकृत राशि समिति तक नहीं पहुंच पाई। राशि जारी होने के बाद अधर में आयोजन बिलासपुर लोकहित सांस्कृतिक सेवा समिति ने 24 फरवरी 2025 को कलेक्टर को पत्र सौंपकर 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 23 नवंबर 2024 को बिलासपुर प्रवास के दौरान महोत्सव के लिए राशि को 5 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करने की घोषणा की थी। स्थानीय कलाकारों और जनता में रोष स्थानीय कलाकारों और नागरिकों में प्रशासनिक देरी को लेकर गहरा असंतोष है। समिति के सचिव रविशंकर केवट, कोषाध्यक्ष कृष्णकुमार साहू और उपाध्यक्ष राजेश पाटले ने कई बार प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। लोक कलाकारों का कहना है कि इस आयोजन के रुकने से उनकी आजीविका संकट में आ गई है। हस्तशिल्पी, पारंपरिक कलाकार और स्थानीय व्यापारी इससे आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। सभी ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द राशि को हस्तांतरित करके आयोजन को कराया जाए।  

मध्य प्रदेश में मेडिकल की सीटों में बढ़ोतरी, खुलेंगे 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी सीटें बढ़ाई जाएंगी, जिससे छात्रों को ज्यादा अवसर मिलेंगे। प्रदेश में नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने की बात भी की गई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य बजट को 23,535 करोड़ रुपए तक बढ़ाया गया है। नई योजनाओं के जरिए आयुष, सिकल सेल उन्मूलन और एम्बुलेंस सेवाओं को भी विस्तार दिया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी सीटें राज्य के 17 मेडिकल कॉलेजों में वर्तमान में एमबीबीएस के लिए 2575 सीटें और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम के लिए 1337 सीटें उपलब्ध हैं। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने नीमच, मंदसौर और सिवनी में नए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके चलते 400 नई एमबीबीएस और 252 नई पीजी सीटें बढ़ाई जा रही हैं। सरकार जन-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत भी नए मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया में है। 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज सह चिकित्सालय खोले जाएंगे। साथ ही, पन्ना, गुना, भिंड, श्योपुर और शुजालपुर में 50 बिस्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल बनाए जाएंगे। वहीं, बालाघाट, शहडोल, सागर, नर्मदापुरम और मुरैना में आयुष महाविद्यालय भी स्थापित किए जाएंगे। बढ़ा स्वास्थ्य बजट प्रदेश में स्वास्थ्य बजट को 23,535 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2992 करोड़ रूपए अधिक है। इससे सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में नई भर्तियां भी संभव होंगी। इस बजट में मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं, सरकारी वाहनों को 15 साल की उम्र पूरी होने पर स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत हटाया जाएगा ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।

होली के दिन चंद्र ग्रहण से पहले कर लें ये उपाय बन जाएंगे काम

होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है. इस दिन चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ विशेष उपाय करके इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. भोलेनाथ की पूजा करने से राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है. पंचांग के अनुसार, साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च दिन शुक्रवार को लगेगा. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 14 मार्च को सुबह 9 बजकर 27 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस चंद्र ग्रहण की अवधि 6 घंटे 3 मिनट की होगी. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अधिकांश अफ्रीका, अटलांटिक आर्कटिक महासागर, पूर्वी एशिया आदि में देखा जा सकेगा. चंद्र ग्रहण से पहले कर लें ये काम     चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. भगवान शिव को चंद्रमा का स्वामी माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा करने से चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है.     चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र मंत्र का जाप करना भी बहुत ही लाभदायक होता है. आप “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं.     चंद्र ग्रहण के दौरान दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है. आप गरीबों और जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, चावल, दूध या चांदी का दान कर सकते हैं.     चंद्र ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें और ग्रहण के समय उन्हें भोजन और पानी में डालकर प्रयोग करें.     ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान अवश्य करें और घर की साफ सफाई करें तो ग्रहों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है. इन राशि वालों के बन जाएंगे बिगड़े काम चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन कुछ राशियां ऐसी हैं जिन पर इसका प्रभाव अधिक होता है. इन राशियों के जातकों को चंद्र ग्रहण से पहले विशेष उपाय करने चाहिए.     वृषभ राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और चंद्र मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे उनके बिगड़े हुए काम जल्दी बनने लगेंगे और जीवन में हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी.     कर्क राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान दान करना चाहिए और तुलसी के पत्तों का प्रयोग करना चाहिए. ऐसा करने से लोगों पर ग्रहण का प्रभाव कम होता है.     वृश्चिक राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और गरीबों को भोजन कराना चाहिए. इससे लोगों के संकट जल्द ही दूर होने लगेंगे.     मीन राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और पीले वस्त्रों का दान करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा से लोगों के जीवन में कभी परेशानियां नहीं आएंगी और हर कष्ट दूर होगा. इन बातों का रखें खास ध्यान चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन नहीं करना चाहिए और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. लोगों को यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, और इसका प्रभाव सभी लोगों पर अलग-अलग होता है. यदि आपको कोई चिंता है, तो आप किसी ज्योतिषी से सलाह ले सकते हैं.

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