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इंदौर में ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण होगा

इंदौर   इंदौर में कलेक्टर गाइडलाइन लगभग तैयार हो चुकी है। इस पर पंजीयन विभाग ने दावे-आपत्तियों को मंगाया था। डेढ़ सौ से अधिक आपत्तियां  आई है। जिसका निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद गाइडलाइन का प्रारुप राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 1 अप्रैल ले नई कलेक्टर गाइड लाइन तैयार हो जाएगी। इंदौर में 3200 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है, जबकि 240 नई काॅलोनियों को गाइडलाइन के दायरे में लिया गया है। इस बदलाव से प्राॅपर्टी के कीमतों में भी वृद्धि होगी। सालभर हुए सौदों के आधार पर गाइडलाइन में बदलाव किया गया। इंदौर में सबसे ज्यादा तेजी खंडवा रोड़ और उज्जैन रोड़ पर देखने को मिली है। खंडवा रोड पर फोरलेन निर्माण हो रहा है, जबकि इंदौर उज्जैन रोड पर छह लेन बन रहा है। इंदौर में बड़े ग्रुप भी रियल इस्टेट सेक्टर में आ चुके है। 32 लोकेशनों के ज्यादातर इलाके शहरी सीमा से सटे है। इनमे बाइपास, सुपर काॅरिडोर, गांधी नगर जैसे क्षेत्र शामिल है। ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण पंजीयन विभाग के पास अलग-अलग तरह की आपत्तियां आई है। कुछ आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को लेकर भी है। जिसमें कहा गया है कि ग्रीन बेल्ट की जमीनों के ज्यादा सौंदे नहीं होते है। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीदी बिक्री में छूट को बहाल करने की मांग भी की गई है। मास्टर प्लान में 89 गांवों को जोड़ा गया है। वहां भी प्राॅपर्टी गाइडलाइन में बदलाव हुए है। इंदौर में कुछ लोकेशनों पर 30 से लेकर 40 प्रतिशत तक गाइड लाइन बढ़ाई गई है। इंदौर एक में 531,इंदौर दो में 596, इंदौर तीन में 658, इंदौर चार में 425, महू में 429, सांवेर में 348,देपालपुर में 329 लोकेशनो पर गाइडलाइन बदली है। अब समिति के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल से नई गाइडलाइन के हिसाब से पंजीयन विभाग में रजिस्ट्रियां होगी।

Ladli Behna Yojana की अप्रैल में आएगी 23वीं किस्त, फिर खाते में आएंगे 1250 रुपए, क्या बढ़ेगी राशि?

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के लिए अपडेट है। योजना के लिए नए पंजीयन कब से शुरू होंगे? कब राशि बढ़ाई जाएगी? विधानसभा में विपक्ष द्वारा पूछे गए इस सवाल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने और नई लाडली बहनों के नाम जोड़ने का विभाग स्तर पर कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने आगे कहा कि अब तक 15,748 महिलाओं के नाम उनकी मृत्यु के बाद हटाए गए हैं, जबकि 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाली 3,19,991 महिलाओं के नाम स्वतः पोर्टल से हट गए हैं। हालांकि राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक करने को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव कई बार ऐलान कर चुके हैं। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल किया था कि क्या सरकार दोबारा से नए पंजीयन शुरू करेगी और ₹3,000 की राशि देने का वादा कब पूरा होगा?इस पर मंत्री ने यह जवाब दिया है। 8 मार्च शनिवार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सीएम मोहन यादव ने 1.27 करोड़ बहनों के खाते में 22वीं किस्त के 1552.73 करोड़ की राशि और 26 लाख बहनों के खाते में सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 55.95 करोड़ की राशि अंतरित कर दी है।अब अप्रैल में 23वीं किस्त जारी की जाएगी।इसके तहत फिर 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे।चुंकी आमतौर पर हर माह की 10 तारीख को योजना की राशि जारी होती है हालांकि कई बार त्यौहार और विशेष अवसर पर समय से पहले भी पैसे भेजे जाते है।अब देखना है कि इस बार अगली राशि कब आएगी। लाड़ली बहना योजना में हर माह मिलते है 1250 रु     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मार्च 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 22 किश्तों का अंतरण किया गया है।     जनवरी 2024 से फरवरी 2025 तक लाड़ली बहनों के खाते में 22 हजार 227.89 करोड़ की राशि जारी की गई है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। इन लाड़ली बहनों को मिलता है योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं।जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद, विधायक हो या फिर किसी सरकारी पद का लाभ ले रहा है, उस परिवार की महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।     यदि महिला के पति के पास सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता नहीं है। ऐसे करें चेक अबतक की अपडेट     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

मोहन यादव आज 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे, शहर में आयोजित होंगे कई कार्यक्रम

उज्जैन  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज 25 मार्च को जन्मदिन है. मुख्यमंत्री के शहर उज्जैन में सड़के पोस्टर से पट गई है. यह भी संभावना जताई जा रही है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए मुख्यमंत्री आज मंगलवार को उज्जैन आ सकते हैं. जिला प्रशासन द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे। वे कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित विक्रमोत्सव के पौराणिक फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में कई विदेशी राजनयिक शिरकत करेंगे। इनमें वेनेजुएला के एच.ई. कैपाया रोड्रिग्ज गोंजालेज, राजदूत अल्फ्रेडो जीसस काल्डेरा गुज़मैन और क्यूबा की काउन्सलर मैलेना रोजास मदीना शामिल हैं। समारोह में मुंबई की सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूं गुजरी है अब तलक’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर उनके स्वागत और सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मोहन यादव का आज मंगलवार (25 मार्च) को जन्मदिन है. उनके जन्मदिन के पहले ही उज्जैन में बीजेपी नेताओं ने बधाई और स्वागत के पोस्टर से सड़कों को भर दिया है. मुख्यमंत्री भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंगलवार को उज्जैन भी आ सकते हैं. हालांकि, अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह प्रयास लगाए जा रहे हैं कि वे अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आने के लिए निकाल सकते हैं. सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन रहती है तैयारी उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक अभी आज मंगलवार (25 मार्च) के दौरे के संबंध में औपचारिक जानकारी नहीं आई है, मगर जिला प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी रहती है. मुख्यमंत्री का उज्जैन गृह नगर है. ऐसे में कभी भी आ सकते हैं. पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव के डर आने वाले दिनों में भी प्रस्तावित है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन तैयारी रहती है. पूरा परिवार साथ मनाता है जन्मदिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का परिवार हर साल उनके जन्मदिन एक साथ एकत्रित होकर मानता है, क्योंकि वे भोपाल के सीएम हाउस में अकेले रहते हैं. उनका पूरा परिवार उज्जैन में रहता है, इसलिए परिवार के साथ भी वे समय व्यतीत करने के लिए उज्जैन आ सकते हैं. उज्जैन की सड़कों पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने पोस्टर लगा दिए हैं. इससे भी यह संभावना है कि वे उज्जैन आ सकते हैं.

मध्य प्रदेश सरकार अंगदान करने वालों के स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही, मिलेगा इस योजना का लाभ

भोपाल अंगदानियों को अंतिम संस्कार के समय ‘गार्ड आफ आनर’ देने का निर्णय लेने के बाद मध्य प्रदेश सरकार उनके स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही है। उन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा, जिसमें प्रति परिवार वर्ष में पांच लाख रुपये तक निश्शुल्क उपचार की सुविधा रहेगी। इसमें आय सीमा का कोई बंधन नहीं रहेगा। इसके प्रचार-प्रसार व जागरूकता के लिए 18 लाख रुपये से डाक्यूमेंट्री बनवाई जा रही है। ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए स्वजन को प्रोत्साहित करने को प्रदेश सरकार यह कदम उठाने जा रही है। इसके अलावा स्टेट आर्गन एवं टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन एक पोर्टल भी तैयार कर रहा है, जिसमें अंगदान करने वाले और जरूरतमंद दोनों पंजीयन करा सकेंगे। पोर्टल में अंगदान के नियम प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाएगी। तमिलनाडु अंगदान में सबसे आगे बता दें कि नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की वर्ष 2023 में अंगदान की रिपोर्ट के अनुसार अंगदान के मामले में तमिलनाडु देश में अव्वल है। जहां वर्ष 2023 में 500 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात का नंबर है। एमपी में 2016 से अब तक 243 अंगदान हुए मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से अब तक करीब 65 ब्रेन डेड लोगों के 243 अंगदान हुए हैं। इस लिहाज से यहां जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश के कुछ बड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में हार्ट सहित सभी अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा है। दरअसल, ‘आयुष्मान भारत’ केंद्र की योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों मिलकर प्रीमियम देते हैं, पर राज्य आवश्यकता के अनुसार कुछ समूहों को अलग से जोड़ सकते हैं। इनका प्रीमियम राज्य सरकार चुकाती है। ब्रेन डेड के अंगदान जब किसी व्यक्ति का ब्रेन(दिमाग) काम करना बंद कर देता है, पर दिल काम करता रहता है, तो इसे ब्रेन डेड की अवस्था कहा जाता है। ऐसे रोगियों का कुछ घंटे बाद दिल भी काम करना बंद कर देता है। उसके पहले उसके अंग निकाले जाते हैं। फेफड़ा, हार्ट, दो किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, कार्निया दान की जा सकती है। डाक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जा रही     अंगदान करने वालों के स्वजन को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा। शीघ्र ही इस संबंध में शासन स्तर पर निर्णय हो जाएगा। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। डाक्यूमेंट्री तैयार कराई जा रही है। – डॉ. एके श्रीवास्तव, संचालक चिकित्सा शिक्षा मप्र।  

IMF के अनुसार पिछले दशक में भारत की GDP दोगुनी हुई, 2025 में अर्थव्यवस्था $4.3 ट्रिलियन होगी, जापान और जर्मनी से आगे निकल जाएगी.

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दोगुनी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास से सम्भव हुई तेज आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत 2025 में जापान और 2027 में जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। IMF ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहसिक आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर फोकस के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार को यह सफलता हासिल नहीं हुई थी। 2025 तक जर्मनी, 2027 तक जापान को छोड़ देगी पीछे बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया कि विकास की यह गति भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है, जो 2025 तक जापान और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगी. मालवीय ने आगे कहा कि यह असाधारण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी सरकार के अथक प्रयासों का प्रमाण है. सक्रिय आर्थिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर निरंतर फोकस के माध्यम से मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है. शानदार वृद्धि के पीछे कई अन्य कारक मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत स्टार्टअप तंत्र और आईटी क्षेत्र की निरंतर प्रगति ने भी आर्थिक विकास को गति दी है। 10 साल में कोई और देश भी आसपास नहीं देश 2015 में जीडीपी 2025 में जीडीपी वृद्धि दर जर्मनी 3.4 4.9 44% जापान 4.4 4.4 0% यूके 2.9 3.7 28% फ्रांस 2.4 3.3 38% इटली 1.8 2.5 39% कनाडा 1.6 2.3 44% ब्राजील 1.8 2.3 28% रूस 1.4 2.2 57% द. कोरिया 1.5 1.9 27% ऑस्ट्रेलिया 1.2 1.9 58% स्पेन 1.2 1.8 50%   महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में करता है मदद   अमित मालवीय ने साथ ही कहा कि यह एक ऐसी उपलब्धि जो आजादी के बाद से किसी भी पिछली सरकार को हासिल नहीं हुई थी. इस महीने की शुरुआत में, भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है.आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. इस महीने की शुरुआत में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने भी भारत की आर्थिक नीतियों की तारीफ की। बोर्ड ने कहा कि भारत का मजबूत प्रदर्शन उसे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर सकता है। IMF ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को लेबर मार्केट में सुधार करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन हो सके।  

इंदौर में 200 स्कूल 31 मार्च से बंद होंगे, हजारों विद्यार्थी प्रभावित

इंदौर इंदौर में लगभग 200 स्कूल बंद होने वाले हैं। यह स्कूल नए नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस कारण 2025-26 के सत्र से इन्हें बंद किया जा रहा है। इससे हजारों छात्र प्रभावित होंगे। छात्रों और अभिभावकों को स्कूल बंद होने की जानकारी नहीं दी गई है। प्रशासन ने इन छात्रों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को दिक्कत आएगी। ये 200 स्कूल 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने मान्यता के नए नियमों का पालन नहीं किया। राज्य सरकार ने कहा था कि 2025-26 सत्र के लिए मान्यता नवीनीकरण 20 मार्च तक कराना होगा। जिले के 1684 स्कूलों में से केवल 1478 ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। अब उनका निरीक्षण चल रहा है। 1 अप्रैल से बंद हो जाएंगे ये स्कूल जिन 206 स्कूलों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, वे 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। इससे हजारों छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। कई छात्र परीक्षा दे चुके हैं और अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनका स्कूल 1 अप्रैल से बंद हो जाएगा। एडमिशन के लिए बच्चे होंगे परेशान स्कूल बंद होने की वजह से अभिभावकों ने दूसरे स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे स्थिति और भी मुश्किल हो गई है। सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में ‘एडमिशन फेस्टिवल’ शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन बंद हो रहे स्कूलों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। गरीब बच्चों के लिए खासी परेशानी अधिकारियों का कहना है कि छात्र अपनी पसंद के किसी भी स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। लेकिन गरीब परिवारों के छात्रों के लिए यह आसान नहीं होगा। कई स्कूल जो बंद होने वाले हैं, वे पिछड़े इलाकों में हैं। वहां प्राइवेट स्कूल कम हैं या छात्रों के घरों से बहुत दूर हैं। प्राइवेट स्कूलों में सीटें भी कम हैं। इसलिए सभी छात्रों को दाखिला मिलना मुश्किल है। ऐसे में सरकारी स्कूल ही एकमात्र विकल्प हैं। अधिकारी का कहना जिला परियोजना समन्वयक संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रभावित छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए 25 अप्रैल के बाद एक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिन स्कूलों को मान्यता नहीं मिली है, उन्हें भी कहा गया है कि वे अभिभावकों को दूसरे स्कूल चुनने के लिए कहें। प्रशासन ने अधिकारियों को 25 मार्च तक 100% नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी और सीनियर छात्र उनका स्वागत करेंगे।  

आटा गूंथने के बाद उस पर क्यों बनाते हैं उंगलियों के निशान? क्या है इसके पीछे की वजह? कैसे शुरू हुई परंपरा?

 घर के बड़े बुजुर्गों की बताई हुई बातें अक्सर हमारे लिए समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, खासकर जब हम इन्हें सिर्फ एक पुरानी परंपरा या मान्यता के रूप में देखते हैं. लेकिन जब हम इनकी गहराई में जाकर समझते हैं, तो पाते हैं कि इन बातों में कुछ खास वजहें और तर्क छिपे होते हैं. एक ऐसी ही बात जो अक्सर हमारे घर के बड़े बुजुर्ग हमें बताते हैं, वह है – “आटा गूंथने के बाद उसमें उंगलियों के निशान जरूर बनाओ.” क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का कारण क्या है और शास्त्रों में इसके बारे में क्या कहा गया है? आइए, जानते हैं आटा गूंथने का महत्व हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में आटा गूंथना एक सामान्य काम लगता है, लेकिन इस सामान्य से काम का भी कुछ खास महत्व है. विशेष रूप से घर की महिलाएं दिन में कई बार आटा गूंथती हैं, जिससे रोटियां, परांठे और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार होते हैं. लेकिन शास्त्रों में इस कार्य को लेकर कुछ खास निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि ये कार्य न सिर्फ भोजन तैयार करने से जुड़ा है, बल्कि हमारी मानसिकता और भक्ति से भी संबंधित है. हिंदू धर्म में भोजन को सिर्फ एक आहार नहीं, बल्कि एक प्रकार का प्रसाद माना जाता है, और इसी कारण रसोई में हर कदम को ध्यान से उठाना जरूरी होता है. उंगलियों के निशान बनाने की परंपरा अब हम आते हैं उस खास परंपरा पर, जिसमें दादी-नानी हमें आटा गूंथने के बाद उंगलियों के निशान बनाने की सलाह देती हैं. क्या यह सिर्फ एक रिवाज है या इसके पीछे कोई गहरी वजह है? दरअसल, इसका कारण शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं में छिपा हुआ है. हमारे पूर्वजों के अनुसार, पिंडदान का कार्य पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है. पिंड को चावल के आटे से बनाया जाता है, और वह गोल आकार में होता है. आटा गूंथने के बाद जो गोल आकार बनता है, उसे पिंड से जोड़कर देखा जाता है. इस वजह से आटे को पितरों का भोजन माना जाता है. लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आटे के गोले से रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता. इसे पितरों का आहार मानते हुए, यह आवश्यक है कि आटे में उंगलियों के निशान लगाए जाएं, ताकि वह पिंड के रूप में न लगे. यही कारण है कि दादी-नानी हमसे यह कहती हैं कि आटा गूंथते समय उंगलियों के निशान जरूर बनाएं. यह एक प्रकार से आटे को खाने योग्य और शुभ बनाता है. गोल आकार वाले अन्य पकवानों में भी यह परंपरा है आटे के अलावा, कई अन्य पकवानों जैसे बाटी, बाफले, वड़ा आदि में भी गोल आकार बनाए जाते हैं. इन पकवानों में भी उंगलियों के निशान लगाकर गड्ढे बनाए जाते हैं. इसका उद्देश्य यह होता है कि ये पकवान पिंड के आकार से भिन्न दिखें और शास्त्रों के अनुसार शुभ माने जाएं.  

HAPPY birthday cm : ‘जल पुरुष’ डॉ. मोहन यादव का संकल्प हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना, सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां

Happy birthday mohan yadav: ‘Water Man’ Dr. Mohan Yadav’s resolve to deliver water to every farmer’s field, achieved unprecedented achievements in the field of irrigation भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। Happy birthday mohan yadav पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। दो बड़ी परियोजनाओं में मिली सफलतामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया। Happy birthday mohan yadav मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड वाटर रिचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना “ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना” का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।” जानिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के बारे मेंकेन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।रुपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी।साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे।सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजनासंशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केंद्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केंद्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्य प्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है। क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान होगीमुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान बने और सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रुपये की लागत की “कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना” के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। Happy birthday mohan yadav क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आरंभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जाएगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। Read more: Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने बुन्देलखण्ड में दूर होगा जलसंकटमध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “अटल भू-जल योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में “डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल” गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत … Read more

Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने

When the leopards caught the cow, the villagers threw stones at it, they did not listen even after the forest department’s warning Kuno National Park sheopur श्योपुर ! Kuno National Park sheopur से बाहर निकले पांच चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की बात कहती रही, लेकिन वे नहीं माने, घटना सोमवार की है। दरअसल, एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। चीते रविवार दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। Kuno National Park sheopur वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। घटना के बाद करीब 10 बजे चीता दल, कूनो पुल क्षेत्र से निकलकर वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र पहुंचा है। Read more: डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरुक किया। उन्होंने बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की।

25 मार्च 2025, मंगलवार: सूर्य की तरह चमकेगा इन राशियों का भाग्य

मेष राशि- मेष राशि वालों को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखें। लव लाइफ में भी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। करियर में नए मुकाम हासिल कर सकते हैं। आज के दिन धन का खर्च भी सोच-समझकर ही करें। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। बच्चों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन सुखमय रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। नए स्तोत्रों से धन का आगमन होगा। आज के दिन आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। मिथुन राशि- मिथुन राशि वाले आज के दिन थोड़ा सावधान रहें। मानसिक तनाव की वजह से स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय धन की बचत करें। भविष्य में अच्छे परिणाम मिलें, इसके लिए मेहनत करें। कर्क राशि– कर्क राशि वाले आज वाद-विवाद से दूर रहें। पारिवारिक जीवन में कलह से बचें। स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का सामान करना पड़ सकता है। इस समय नया व्यापार शुरू न करें। निवेश करना भी इस समय अच्छा नहीं रहेगा। नुकसान हो सकता है। सिंह राशि– सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहने वाला है। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार के सदस्यों का भरपूर सहयोग मिलेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। प्रेम जीवन सुखद रहेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन कुछ नया करने के लिए अच्छा है। जीवन में बड़े बदलाव हो सकते हैं। रुके हुए कार्य आज बन सकते हैं। आप आज दोस्तों या परिवार के सदस्यों की मदद के लिए भी तैयार रहेंगे। प्रेम जीवन और स्वास्थ्य भी आज अच्छा है। तुला राशि– तुला राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा कहा जा सकता है। कार्यों को पूरी जिम्मेदारी से पूरा करें। आपको ऑफिस में नए कार्य सौपें जा सकते हैं। जीवनसाथी के साथ डिनर का प्रोग्राम बना सकते हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। वृश्चिक राशि– वृश्चिवृश्चिक राशि वालों को आज के दिन सुखद परिणाम मिलेंगे। जीवनसाथी का सानिध्य मिलेगा। पुराने निवेश से लाभ होगा। काम का दबाव रहेगा। हर कार्य को मेहनत से करें। नौकरी और व्यापार में सफलता के योग बन रहे हैं। प्रेम जीवन सुखमय रहेगा। संतान की तरफ से शुभ फल की प्राप्ति होगी। धनु राशि- धनु राशि वालों को आज व्यापार में लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। परिवार के सदस्यों का सहयोग रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आज के दिन वाद-विवाद से दूर रहें। संतान पक्ष से खुशखबरी मिल सकती है। वाहन के प्रयोग में सावधान बरतें। मकर राशि– मकर राशि के लिए आज दोपहर के बाद का समय अच्छा रहेगा। दोपहर तक थोड़ा सावधान रहें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाहन का प्रयोग सावधानी से करें। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करें। प्रेमी की तरफ से आपको आज कोई सरप्राइज मिल सकता है। संतान सुख का अनुभव करेंगे। कुंभ राशि– कुंभ राशि वालों के लिए मिलाजुला दिन रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। इस समय धन का उपयोग सोच-समझकर ही करें। माता-पिता का सहयोग मिलेगा। व्यापार में सफलता के योग बन रहे हैं। नौकरी में बदलाव हो सकता है। मीन राशि– मीन राशि वालों को आज सावधानी से चलने की आवश्यकता है। मानसिक तनाव हो सकता है। आर्थिक कष्ट भी संभव है। अपना और अपनों का विशेष ध्यान रखें। लव लाइफ में भी उथल-पुथल हो सकती है। आज के दिन वाद-विवाद से दूर रहें और धैर्य बनाए रखें।

मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की

 मेरठ मेरठ में क्रूरता से सौरभ राजपूत की हत्‍या करने वाली उसकी पत्‍नी मुस्‍कान और उसका प्रेमी साहिल शुक्‍ला जेल में हैं। मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की है। इस सनसनीखेज हत्‍याकांड के सामने आने के दोनों के परिवारों ने उनसे पल्‍ला झाड़ लिया है। मुस्‍कान के पिता प्रमोद रस्‍तोगी ने तो यहां तक कहा है कि वह अपनी बेटी से मिलने कभी नहीं जाएंगे। उसके लिए कभी वकील नहीं करेंगे। इतना ही नहीं अपने दामाद को इंसाफ दिलाने के लिए कोर्ट में बेटी के खिलाफ गवाही भी देंगे। अपने माता-पिता के गुस्‍से से वाकिफ मुस्‍कान रस्‍तोगी ने जेल अधीक्षक से मिलकर सरकारी वकील दिलाने की मांग की थी। अब साहिल ने भी ऐसा ही किया है क्‍योंकि उसे भी लग गया है कि परिवार से उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आएगा। सौरभ राजपूत हत्‍याकांड के बाद मुस्‍कान के माता-पिता ने खुलकर अपनी बेटी के खिलाफ बयान दिए थे। उनका दावा है कि मुस्‍कान ने 18 मार्च को जब उन्‍हें अपने गुनाहों की जानकारी दी तो वे ही उसे लेकर थाने गए और पुलिस के हवाले कर दिया। मुस्‍कान के माता-पिता उसके लिए फांसी की मांग कर रहे हैं। वे मुस्‍कान-साहिल के हाथों बेरहमी से कत्‍ल किए गए अपने दामाद सौरभ राजपूत को अपने बेटे की तरह बता रहे हैं। उधर, साहिल के पिता नीरज शुक्ला का भी ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। नीरज शुक्ला भी अपने बेटे साहिल शुक्ला से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। मुस्‍कान या साहिल से जेल में अब तक कोई मिलने भी नहीं आया है। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने मुस्‍कान के लिए सरकारी वकील की व्‍यवस्‍था कराने की बात पहले ही बताई थी। अब साहिल की मांग सामने आने के बाद माना जा रहा है कि जेल प्रशासन दोनों प्रार्थना पत्र जल्‍द ही कोर्ट को भेजेगा। जेल अधिकारियों के अनुसार यदि कोई बंदी सरकारी वकील की मांग करता है तो यह जेल प्रशासन का कर्तव्‍य है कि वह न्‍यायालय के माध्‍यम से उसे सरकारी वकील उपलब्‍ध कराए। जाहिर है मुस्‍कान-साहिल की मांग पर उन्‍हें भी जल्‍द ही सरकारी वकील मुहैया करा दिया जाएगा। एक गलती से खुला सौरभ मर्डर का ड्रम वाला राज मेरठ के खौफनाक सौरभ हत्याकांड केस में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच एक जानकारी यह भी सामने आई है कि मुस्कान और साहिल ने उस ड्रम को हिमाचल से लौटने के बाद फेंकने का प्लान बनाया था, जिसमें उन्होंने शव के 15 टुकड़ों को सीमेंट के साथ मिलाकर भरा था। लेकिन यहीं पर उनसे चूक हो गई। दरअसल जिस नीले ड्रम में सीमेंट के साथ मिलाकर वे सौरभ के शव के टुकड़ों को रख गए थे, वह बहुत भारी हो गया था। मुस्कान और साहिल को इस चीज का शव को छिपाते वक्त अंदाजा नहीं था, लेकिन पूरा ड्रम ही जब सीमेंट से भर गया और उसमें शव के टुकड़े भी थे तो उसका वजन बहुत ज्यादा बढ़ गया। पुलिस की जांच के अनुसार मुस्कान और साहिल ने 3 मार्च की रात को सौरभ को मार डाला था। फिर उसके शव के 15 टुकड़े कर डाले। इन टुकड़ों को गीले सीमेंट में मिला गया और उसे ड्रम में भर दिया गया। मुस्कान और साहिल इसके बाद दो सप्ताह की हिमाचल ट्रिप पर निकल गए। उनका प्लान था कि लौटने के बाद ड्रम को कहीं फेंक देंगे। दोनों इसी इरादे के साथ 17 मार्च को छुट्टियां मनाकर वापस लौटे। इसके लिए उन्होंने अगले कुछ मजदूरों को बुलाया और कहा कि वे ड्रम को उठाकर कहीं फेंक आएं। उन मजदूरों ने ऐसा करने की कोशिश भी की, लेकिन वजन बहुत ज्यादा होने के चलते उठा नहीं सके। ऐसा करने के दौरान ड्रम का ढक्कर जरूर एक तरफ से खुलने लगा। इसके चलते अंदर बंद शव के सड़े हुए टुकड़ों से बदबू बाहर आने लगी। इस पर मजदूरों को भी संदेह हुआ और वे वहां से चले गए। अब उस ड्रम को साहिल और मुस्कान के बस का उठाना नहीं था। अंत में मुस्कान अपने मायके चली गई और साहिल अपने कमरे पर निकल गया। मां-बाप के यहां पहुंची मुस्कान ने शुरुआत में सौरभ के मर्डर का जिम्मा उसकी बहन और बहनोई पर डालने की कोशिश की। लेकिन पूरी कहानी में मुस्कान की मां और पिता को झोल नजर आया। उन्होंने उसे खूब झकझोरा तो उसने बता दिया कि साहिल के साथ मिलकर मैंने ही सौरभ को मार डाला है। एक पड़ोसी ने बताया कि साहिल अकसर मुस्कान के यहां आता था। लेकिन उनका यह भी कहना था कि दोनों मिलकर ऐसा कोई कांड करेंगे। इस बात का दूर-दूर तक कोई अंदेशा नहीं था। उन्होंने कहा कि मुस्कान का व्यवहार काफी सही थी। उसके बर्ताव से किसी तरह का कभी संदेह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को मुस्कान को शांत अकेले ही बैठा देखा था। वह कहते हैं कि अब हमें लगता है कि शायद वह सोच रही थी कि कैसे ड्रम को ठिकाने लगाया जाए। मुझे भी किसी ने बताया कि इसके लिए मजदूर बुलाए थे, लेकिन वे ड्रम को उठा ही नहीं पाए। बता दें कि सौरभ और मुस्कान की 2016 में लव मैरिज हुई थी। मुस्कान ने 2019 में एक बेटी पीहू को जन्म दिया था, लेकिन उसके ठीक बाद से ही दोनों के रिश्ते बिगड़ते गए। इसकी वजह साहिल की मुस्कान की जिंदगी में एंट्री थी। फिर यहीं से सौरभ की जिंदगी की मुस्कान छिनती चली गई।

चीतों की निगरानी के लिए वन विभाग की टीम लगातार काम कर रही, वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लोगों को चीतों से दूर रहने के लिए कहा

ग्वालियर  कूनो नेशनल पार्क के जंगल की सीमा से निकलकर श्योपुर की विजयपुर तहसील के भैरोपुरा गांव में मादा चीता ज्वाला व चार शावकों का ग्रामीणों से आमना-सामना हो गया। यहां एक बछड़े पर मादा चीता ज्वाला ने हमला कर दिया, तो शावकों ने भी घेराबंदी शुरू कर दी। बछ़ड़े पर हमला होते देख उसके मालिक व ग्रामीणों ने चीतों पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। लाठी से भी भगाने का प्रयास किया। पास खड़ी कूनो की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि बछड़े का मुआवजा मिल जाता है, चीतों पर हमला न किया जाए। इस पर बछड़े के मालिक ने कहा कि हमारे सामने हमारे मवेशियों को मरता हुआ नहीं देख सकते हैं, ऐसा होगा तो हम तो हमला करेंगे। पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे बता दें कि एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। ये चीते रविवार को दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। सामने बछड़ा आ गया था रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम भैरोपुरा के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्राडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह मादा चीता ज्वाला के सामने बछड़ा आ गया, तो उसने शिकार की नीयत से हमला कर दिया। लेकिन ग्रामीणों के पत्थर मारने से चीते पीछे हट गए। लाठी डंडे लेकर चिल्लाते हुए ग्रामीणों को देख चीते डर गए। मादा चीता काफी देर तक बछड़े का गला पकड़े रही, लेकिन फिर छोड़ दिया। 15 लोगों का दल कर रहा ज्वाला व शावकों की निगरानी मादा चीता ज्वाला व शावकों की निगरानी में 15 लोगों का दल निगरानी कर रहा है, जब सोमवार सुबह यह घटना हुई तो एक दल पीछे रह गया था और एक वहीं चीतों के आसपास ही मौजूद था। ग्रामीणों से दल ने बात की और समझाने का प्रयास किया कि आगे से ऐसा न करें।

राजस्थान में गर्मी दिखा रही तीखे तेवर, बाड़मेर में तापमान पहुंचा 40 डिग्री सेल्सियस के पार

जयपुर राजस्थान में अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि, 25-26 मार्च के दौरान एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 20-30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और आंशिक बादल छाने की संभावना है। राजस्थान के तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट संभव मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 48 घंटों में तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होगा। हालांकि, इसके बाद उत्तरी हवाओं के प्रभाव से तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। प्रदेश में फिर लौटी हीटवेव, 40 के पार पहुंचा तापमान राजस्थान में हीटवेव का असर एक बार फिर से नजर आने लगा है। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में बाड़मेर के साथ जोधपुर, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ जिलों शामिल हैं। यहां गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। राजस्थान के प्रमुख शहरों का तापमान बाड़मेर – 40.6°C जैसलमेर – 39.8°C डूंगरपुर – 37.9°C नागौर – 36.3°C सिरोही – 36.8°C जोधपुर – 38.1°C चित्तौड़गढ़ – 37.9°C कोटा – 36.1°C जयपुर – 35.1°C अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम? मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, अगले दो दिन उत्तर-पूर्वी हवा के प्रभाव से तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव होगा और आसमान साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 34 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना हैं जबकि रात के तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि 26 मार्च को राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। इससे न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने के आसार हैं। 26 मार्च से मौसम में बदलाव की संभावना मौसम विभाग ने 26 मार्च से मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। इस दौरान एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। इससे प्रदेशवासियों को गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। 23 मार्च को तापमान में 3.6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी रविवार, 23 मार्च को प्रदेश के अधिकतम तापमान में 1 से 3.6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद बाड़मेर का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों तक प्रदेश का मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

नक्सल प्रभावित बेडमाकोटी नया कैंप स्थापित, जवानों की जान को हर कदम पर खतरा

जगदलपुर भारत सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प को साकार करने की दिशा में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बेडमाकोटी में एक नया कैंप स्थापित किया है। यह कैंप कुतुल से लगभग 5 किमी आगे स्थित है और इसे सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कोण्डागांव स्थित 41वीं वाहिनी, आईटीबीपी ने डीआईजी राणा युद्धवीर सिंह (सामरिक क्षेत्रीय मुख्यालय, भुवनेश्वर) के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बेडमाकोटी नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, जहां सुरक्षा बलों के लिए चुनौतियां लगातार बनी रहेंगी। इसके बावजूद, यह कैंप न केवल नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने में भी सहायक सिद्ध होगा, आईटीबीपी भारत सरकार के नक्सल उन्मूलन मिशन के तहत, अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। नए कैंपों की स्थापना से न केवल सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो रही है, बल्कि यहां के ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। आईटीबीपी के हिमवीर न केवल क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय जनता को भारत सरकार और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान कर रहे हैं। इस निरंतर उपस्थिति से नक्सलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है, जिससे आम जनता अब खुद को पहले से अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस कर रही है। डीआईजी राणा युद्धवीर सिंह ने कहा कि आईजी ओपी यादव (सेंट्रल फ्रंटियर, आईटीबीपी) के निरंतर मार्गदर्शन के कारण यह अभियान सफल रहा। उन्होंने 41वीं वाहिनी के सेनानी नरेंद्र सिंह और उनके हिमवीरों को बेडमाकोटी कैंप की सफल स्थापना पर बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, कांकेर रेंज डीआईजी अमित कामले, नारायणपुर पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीमों को इस अभियान में उनके सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर 53वीं वाहिनी के सेनानी अमित भाटी और 45वीं वाहिनी के सेनानी राजीव गुप्ता भी उपस्थित रहे।

परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंची महिला कैंडिडेट के पास मिले दो आधार कार्ड

कोटा राजस्थान लोक सेवा आयोग की रेवेन्यू ऑफिसर ग्रेट 2 और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर क्लास 4 की पुनर्परीक्षा रविवार को कोटा में कई केंद्रों पर आयोजित हुई। जिसमें हाडोती के अलावा अन्य जिलों के भी परीक्षार्थी परीक्षा देने के लिए कोटा पहुंचे। इस बीच शहर के गुमानपुरा मल्टीपरपज स्कूल कैंपस में बनाए गए परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंची महिला कैंडिडेट पर परीक्षा आयोजित करवा रहे आयोजकों को शक हुआ। जांच में महिला कैंडिडेट के पास दो आधार कार्ड मिले, जिनमें आधार नंबर और जन्मतिथि अलग-अलग थी। केंद्र प्रभारी ने संदिग्ध गतिविधि की जानकारी परीक्षा समन्वयक और कोटा के एटीएम प्रशासन मुकेश चौधरी को दी। एडीएम मुकेश चौधरी ने बताया कि महिला कैंडिडेट को पहले परीक्षा देने दी गई। लेकिन बाद में उसके दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए और मुकदमा भी दर्ज करवाया है। प्रारंभिक जांच में पता लगा है कि महिला का नाम अंजली सिंह है, जो की राजस्थान पुलिस में महिला कांस्टेबल के रूप में कोटा पुलिस लाइन में तैनात है। महिला के पास मिले दोनों आधार कार्ड मिले। हालांकि ये असली है या डुप्लीकेट इसकी जांच करवाई जा रही है। आमतौर पर आधार पर एक यूनिक आईडी होती है और एक व्यक्ति को सिर्फ एक ही आधार कार्ड जारी किया जाता है, लेकिन अंजली सिंह के पास 2 आधार नंबर के कार्ड मिले हैं। ऐसे में पूरी गतिविधि संदिग्ध सामने आई है। वहीं डीएसपी योगेश शर्मा ने बताया कि इस मामले में गुमानपुरा थाने में प्रकरण दर्ज करवाया गया है और जांच के बाद ही सारी स्थिति साफ हो पाएगी। बता दें कि आरपीएससी की आरओ-ईओ परीक्षा कोटा शहर में 70 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। जिसमें 6183 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। यानी 28.12% अभ्यर्थी उपस्थित रहे। वहीं प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर 4 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। जो केंद्र पर अभ्यर्थियों की कड़ी चेकिंग करने के बाद ही उनको अंदर भेज रहे थे। प्रशासन के मुताबिक सभी परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा संपन्न हुई है।  

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