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जावरा-उज्जैन क्षेत्र में सड़क के डिजाइन पर आपत्ति, पैदल यात्रा से पहले कांग्रेस नेता गिरफ्तार

रतलाम उज्जैन से जावरा तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे (फोरलेन) के निर्माण के खिलाफ दुकानदारों और किसानों का आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है। जन संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले तीन महीनों से चल रहे इस आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। शनिवार को जावरा से उज्जैन तक पैदल यात्रा निकालने की कोशिश के दौरान 29 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वहीं, रविवार को यात्रा फिर से शुरू करने की योजना बनाते ही जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस नेता डीपी धाकड़ और राजेश भरावा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह हाईवे मध्य प्रदेश के जावरा-उज्जैन क्षेत्र में महू-नीमच हाईवे से सटे सात किलोमीटर के हिस्से में बनाया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग जमकर विरोध कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत और मांगें जन संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन 12 फरवरी 2025 से शुरू हुआ, जब दुकानदारों और किसानों ने जावरा के बायपास चौराहे पर धरना शुरू किया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित हाईवे जावरा शहर के सात किलोमीटर के सघन आबादी और रोजगार वाले क्षेत्र से होकर गुजरेगा। उनकी मुख्य आपत्ति यह है कि सड़क और ब्रिज जमीन से 24 फीट ऊंचे बनाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक नुकसान होगा। उनका कहना है, “हम विकास के लिए जमीन देने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऊंचे ब्रिज और फोरलेन इंटरचेंज से हमारा रोजगार और आवागमन प्रभावित होगा।” वे मांग कर रहे हैं कि जमीन के स्तर पर फोरलेन बनाया जाए और चौराहों पर रोटरी का निर्माण हो। पैदल यात्रा और पुलिस की कार्रवाई अपनी मांगों को लेकर जावरा से उज्जैन तक पैदल यात्रा का आयोजन किया गया था। शनिवार को यात्रा शुरू होते ही पुलिस ने भारी बल के साथ इसे रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी असलम मेव ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे रोक लिया और पेट्रोल की केन छीन ली। इसके बाद 29 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें दोपहर में रिहा कर दिया गया। लेकिन रविवार सुबह, जब प्रदर्शनकारी उज्जैन कमिश्नर को ज्ञापन देने के लिए फिर से यात्रा की तैयारी कर रहे थे, पुलिस ने सक्रियता दिखाई। कांग्रेस नेता डीपी धाकड़ और राजेश भरावा को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। दोनों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद सक्रिल जेल भेज दिया गया। नेताओं का बयान: “अंत तक लड़ेंगे” जेल ले जाए जाते समय राजेश भरावा ने कहा, “हम उज्जैन कमिश्नर को यह बताने जा रहे थे कि ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण से किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। इसके बावजूद हमें दबाया जा रहा है, लेकिन हम अंत तक लड़ेंगे।” डीपी धाकड़ ने नारेबाजी करते हुए कहा, “हर ब्लॉक में किसान पहले से आंदोलनरत हैं। यह हक की लड़ाई है।” इस बीच, खाचरौद-नागदा के पूर्व विधायक दिलीप गुर्जर और अन्य कांग्रेस नेता बड़ावदा थाने पहुंचे और एएसी राकेश खाखा से मामले पर चर्चा की। विरोध के कारण प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऊंचे ब्रिज और एक्सेस कंट्रोल्ड डिजाइन से दुकानदारों का व्यवसाय ठप हो जाएगा और किसानों की जमीन तक पहुंच मुश्किल होगी। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे और योजना में बदलाव करे। आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस भी खुलकर सामने आई है। आने वाले दिनों में यह विरोध और तेज होने की संभावना है, क्योंकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।  

दुकान बंद होने के कारण नहीं मिली शराब तो बाप और बेटी को सिरफिरे ने गोली मारी थी: पीड़ित परिवार

वाशिंगटन वर्जीनिया में एक डिपार्टमेंटल स्टोर के बाहर गुजराती पिता-पुत्री की हत्या ने अमेरिका में भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है. अब गुजरात में पीड़ित परिवार ने खुलासा किया है कि बाप और बेटी को एक अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्ति ने सिर्फ इसलिए गोली मारी थी, क्योंकि उसे शराब चाहिए था और दुकान बंद हो गई थी. उसे इसके लिए दुकान खुलने का रात भर इंतजार करना पड़ा, जिस कारण वह गुस्से में था. प्रदीपभाई पटेल (56) जब 21 मार्च की सुबह करीब 5:30 बजे अपनी बेटी उर्मी के साथ डिपार्टमेंटल स्टोर खोल रहे थे, तभी उस व्यक्ति ने दोनों को गोली मार दी. प्रदीपभाई पटेल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी 26 वर्षीय बेटी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. प्रदीप के परिवार ने कहा कि आरोपी की पहचान जॉर्ज फ्रेजियर डेवोन व्हार्टन के रूप में हुई है, जो पूरी रात शराब खरीदने के लिए उनके डिपार्टमेंटल स्टोर के आसपास मंडराता रहा.   शराब के लिए करना पड़ा इंतजार तो मारी गोली जब प्रदीप और उर्मी वहां पहुंचे तो उसने उनसे पूछा कि दुकान क्यों बंद है? आरोपी ने इस बात के लिए दोनों पर गुस्सा जताया कि उसे रातभर इंतजार करना पड़ा. गुस्से और आवेश में जॉर्ज ने दोनों पर गोलियां चला दीं. प्रदीप को दो गोलियां लगीं, जबकि एक गोली उर्मी को लगी. घटना के दो घंटे के भीतर अमेरिकी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. छह साल पहले प्रदीपभाई और उनकी पत्नी हंसाबेन अपनी सबसे छोटी बेटी उर्मी के साथ विजिटर वीजा पर अमेरिका गए थे. कुछ समय बाद इस गुजराती परिवार ने वर्जीनिया के एकोमैक काउंटी में डिपार्टमेंटल स्टोर खोला. प्रदीपभाई पटेल की एक बेटी कनाडा में रहती है, जबकि दूसरी शादीशुदा है और अहमदाबाद में रहती है. घटना के बाद प्रदीप की बेटी और दामाद अहमदाबाद से अमेरिका पहुंचे. जॉर्ज पर मर्डर, अटेम्प्ट टू मर्डर प्रयास, अवैध बंदूक रखने और अपराध में घातक हथियार के उपयोग की धाराओं में आरोपी बनाया गया है. शेरिफ ऑफिस के बयान में कहा गया है कि जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, तो एक व्यक्ति को शॉपिंग सेंटर में फर्श पर पड़ा पाया गया, उसके शरीर पर गोली के घावों के निशान थे और उसकी मृत्यु हो चुकी थी. गोलीबारी की घटना में एक संदिग्ध गिरफ्तार शॉपिंग सेंटर की तलाशी के दौरान, पुलिसकर्मियों को गोली से घायल एक महिला भी मिली. व्यक्ति को घटना स्थल पर मृत घोषित कर दिया गया. वहीं महिला को सेंटारा नॉरफॉक जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया. एकोमैक काउंटी शेरिफ ऑफिस के अधिकारी डब्ल्यू टॉड वेसेल्स के अनुसार, वर्जीनिया के शॉपिंग सेंटर में हुई गोलीबारी के सिलसिले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. उसकी पहचान ओनानकॉक निवासी 44 वर्षीय जॉर्ज फ्रेजियर डेवोन व्हार्टन के रूप में हुई है और उसे वर्तमान में बिना बांड के एकोमैक जेल में रखा गया है.   घटना से सदमे में हैं US में रहने वाले भारतीय वर्जीनिया के एक टेलीविजन स्टेशन WAVY-TV ने बताया कि परेश पटेल ने खुद को उस स्टोर का मालिक बताया है, जिसमें यह घटना हुई. उन्होंने यह भी पुष्टि की कि दोनों मृतक उनके परिवार के सदस्य थे. परेश ने कहा, ‘मेरे चचेरे भाई की पत्नी और उसके पिता आज सुबह जब स्टोर में काम कर रहे थे, तो कुछ लोग यहां आए और उन्होंने दोनों को गोली मार दी. मुझे समझ नहीं आ रहा अब मैं क्या करूं.’ इस घटना ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों को सदमे में डाल दिया है.  

आधी कीमत में मिल रहा Samsung Galaxy F16 5G फोन

नई दिल्ली Samsung की तरफ से शानदार डिस्काउंट ऑफर दिया जा रहा है, जिससे आप बेहद कम कीमत में 5G स्मार्टफोन खरीद सकते हैं। दरअसल अगर आप नया 5G स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो Samsung Galaxy F16 5G एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, जिसे आप एक्सचेंज ऑफर के साथ आधी कीमत में खरीद पाएंगे। मतलब 16,499 रुपये कीमत वाले फोन पर 9,500 रुपये का एक्सचेंज ऑफर दिया जा रहा है। ऐसे में आपके फोन की वास्तविक कीमत काफी कम हो जाती है। कीमत और डिस्काउंट ऑफर Samsung Galaxy F16 5G स्मार्टफोन की कीमत MRP 18,999 रुपये है, जिसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट पर 18 फीसद डिस्काउंट के साथ 15,499 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। फोन की खरीद पर 9,500 रुपये का एक्सचेंज ऑफर दिया जा रहा है। अगर आप फुल एक्सचेंज ऑफर का लुत्फ उठा लेते हैं, तो आपके फोन की कीमत 5,499 रुपये रह जाती है। इसके बावजूद आप 5 फीसद अनलिमिटेड कैशबैक का लुत्फ उठा सकते हैं। साथ ही एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड पर 1000 रुपये की अतिरिक्त छूट हासिल कर सकते हैं। SBI डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर 1000 रुपये की छूट दी जा रही है। इसके अलावा फोन को 2,584 रुपये मंथली ईएमआई ऑप्शन में खरीद पाएंगे। Samsung Galaxy F16 5G के स्पेसिफिकेशन्स फोन को तीन स्टोरेज वेरिएंट 4जीबी, 6 जीबी और 8 जीबी रैम ऑप्शन में पेश किया जाता है। फोन में 6.65 इंच फुल एचडी प्लस सुपर एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो कि 90Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आता है। फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसका मेन कैमरा 50MP सेंसर के साथ आता है। इसके अलावा 5MP सेकेंड्री कैमरा दिया गया है। इसके अलावा 2MP कैमरा सेंसर दिया गया है। फोन में 13MP फ्रंट कैमरा मिलता है। अगर बैटरी की बात करें, तो फोन में 5000 mAh की बैटरी दी गई है। वही प्रोसेसर सपोर्ट के तौर पर Dimensity 6300 सपोर्ट दिया गया है। फोन एंड्रॉइड 14 सपोर्ट के साथ आता है। क्या होता है एक्सचेंज ऑफर Samsung Galaxy F16 5G स्मार्टफोन की खरीद पर एक्सचेंज ऑफर दिया जा रहा हैं, तो सबसे पहले समझ लेते हैं कि आखिर एक्सचेंज ऑफर क्या होता है? तो बता दें कि एक्सचेंज ऑफर पुराने फोन के बदले नए फोन पर छूट हासिल करने को एक्सचेंज ऑफर कहते हैं। एक्सचेंज ऑफर की कीमत पुराने फोन की मौजूदा कंडीशन पर निर्भर कती है। मतलब अगर पुराने फोन की कंडीशन ठीक हैं, तो आपको ज्यादा पैसे एक्सचेंज ऑफर के तौर पर मिलेंगे।

महासमुंद में वाटरफॉल में मिली युवती की सड़ी-गली लाश

महासमुंद  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 1200 फीट ऊंचाई पर स्थित शिशुपाल पर्वत के वाटरफॉल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां एक अज्ञात युवती की सड़ी-गली लाश मिली है. घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है. मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पहुंची और मर्ग कायम कर जांच में जुट गई है. यह मामला बलौदा थाना क्षेत्र का है. शव करीब 15 दिन पुराना बताया जा रहा है और शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है. मृतिका की पहचान अब तक नहीं हो पाई है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आसपास के इलाकों में गुमशुदा लोगों की जानकारी जुटा रही है. फिलहाल, मामले में पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है.

संभल में अब जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली को पूछताछ के बाद किया गिरफ्तार

संभल पिछले साल 24 नवंबर को संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा मामले में एसआईटी ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस द्वारा पहले नोटिस जारी किए जाने के बाद अब जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। जफर अली एडवोकेट को हिरासत में लेकर पहले कोतवाली लाकर पूछताछ की गई। यहीं पर इनकी गिरफ्तारी हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर कोतवाली में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। एसआईटी मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। एएसपी श्रीश्चन्द्र ने बताया कि एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है। सदर से पूछताछ अभी जारी है। माना जा रहा है कि पूछताछ के बाद जामा मस्जिद के सदर की गिरफ्तारी हो सकती है। सदर के भाई बोले, पुलिस नहीं चाहती कि शहर में शांति रहे जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफ़र अली एडवोकेट के बड़े भाई ताहिर अली एडवोकेट कोतवाली में जफ़र अली से मिलने पहुंचे। सदर से मिलने के बाद उन्होंने बताया कि न्यायिक आयोग में सोमवार को जफ़र अली को अपना बयान देना था, पुलिस चाहती है कि ब्यान नहीं दें, लेकिन वह वही बयान देंगे जो उन्होंने दिया था कि हिंसा के दौरान पुलिस ने ही गोली चलाई थी। जफ़र अली चाहते हैं कि संभल में शांति रहे लेकिन पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि शांति रहे। पुलिस उन्हें जेल भेजने की तैयारी कर रही है। उन्होंने एएसपी से कहा कि आप शहर में तनाव बढ़ाना चाहते हैं। एएसपी श्रीश्चन्द्र ने बताया कि शहर में पूरी तरह शांति है। बुलाने के बाद भी लखनऊ में हाजिर नहीं हुए थे जामा मस्जिद के सदर शाही जामा मस्जिद में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच कर रहे त्रि-सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट, मसूद अली फारूकी एडवोकेट और कासिम जलाल एडवोकेट को 11 मार्च 2025 को लखनऊ में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। इस पर आयोग ने फिर से समन जारी कर 20 मार्च को उपस्थित होकर साक्ष्य अंकित कराने के निर्देश दिए थे। अब तक आयोग ने संभल में चार दौरे पूरे कर 160 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। चौथे दौरे में डीएम, एसडीएम समेत 45 अधिकारियों और लोगों के बयान दर्ज हुए थे। बचे हुए गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए अब लखनऊ में उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। ये है पूरा मामला 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद में दूसरे दौर के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात को काबू में करने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व डीजीपी ए.के. जैन और रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव अमित मोहन सदस्य हैं। आयोग ने अब तक कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं और जल्द ही इस घटना की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है। अब तक की जांच में क्या हुआ? 1 दिसंबर: आयोग ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी ली। 21 जनवरी: टीम ने मस्जिद क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां विदेशी कारतूस भी मिले। इस दौरान 21 पुलिसकर्मियों समेत 60 लोगों के बयान दर्ज किए गए। 30 जनवरी: तीसरी बार आई टीम ने स्वास्थ्य, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज किए, जिनमें एएसपी श्रीशचंद्र और डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू शामिल रहे। 2 मार्च: चौथी बार दो दिवसीय दौरे में आयोग ने डीएम, एसडीएम समेत 45 के बयान दर्ज किए थे। 77 लोगों के वीसी से बयान दर्ज किए।

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने दावा किया कि नागपुर में हाल में हुई हिंसा में बांग्लादेश से जुड़े लोगों का हाथ

मुंबई नागपुर में आयत लिखी चादर जलाने की अफवाह और दक्षिणपंथी संगठनों के प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस मामले में दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है। रविवार को शिवसेना नेता संजय निरुपम ने  दावा किया कि नागपुर में हाल में हुई हिंसा में बांग्लादेश से जुड़े लोगों का हाथ है। निरुपम ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी दावा किया कि हिंसा पूर्व नियोजित थी और यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। महाराष्ट्र के नागपुर शहर में 17 मार्च को छत्रपति संभाजीनगर में मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन के दौरान आयतें लिखी ‘चादर’ जलाए जाने की अफवाह के बाद हिंसा भड़क उठी थी। झड़पों के परिणामस्वरूप शहर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर पथराव और आगजनी हुई, जिसमें पुलिस उपायुक्त स्तर के तीन अधिकारियों सहित 33 पुलिसकर्मी घायल हो गए। निरुपम ने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से एक ‘मुजाहिदीन गतिविधियों’ के लिए धन जुटाने के वास्ते सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था। निरुपम ने ऐसे समूहों के साथ शिवसेना (UBT) के कथित गठबंधन की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘क्या शिवसेना (UBT) मुजाहिद्दीन के साथ जुड़ रही है? क्या ठाकरे और (संजय) राउत उनका समर्थन कर रहे हैं?’ शिवसेना के नेता ने कहा कि इसे महाराष्ट्र में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्षी दल शिवसेना (UBT) के वर्तमान नेतृत्व और पार्टी की राजनीतिक रणनीतियों को नकारते हुए कहा, ‘मातोश्री (मुंबई में उद्धव ठाकरे का निवास) में जल्द ही (शिवसेना संस्थापक) बालासाहेब ठाकरे और शिवाजी महाराज की तस्वीर के पास औरंगजेब की तस्वीर होगी।’ इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा था कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि नागपुर हिंसा का विदेश या बांग्लादेश से कोई संबंध है।

ChatGPT की एक हरकत आई सामने, शख्‍स को बता दिया बच्‍चों की हत्‍या का आरोपी

एलन मस्‍क के ग्रोकआई के कारनामे सुर्खियों में हैं, इस बीच ओपनएआई के ChatGPT की एक हरकत सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्वे के एक व्‍यक्ति ने चैटजीपीटी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शख्‍स का आरोप है कि एआई ने उसे उसके दो बच्‍चों की हत्‍या का आरोपी बता दिया। यह भी कहा कि उसने अपने तीसरे बच्‍चे को मारने की कोशिश की। चैटजीपीटी पर आरोप लगाया गया है कि उसने यूरोप के नियमों का उल्‍लंघन किया है। नियमों के अनुसार, पर्सनल डेटा सही होना चाहिए। क्‍या है मामला शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम अर्वे हल्मार होलमेन है। वह हमारी-आपकी तरह ही नॉर्वे के एक आम नागरिक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन उन्‍होंने चैट जीपीटी से अपने बारे में जानकारी मांगी। लिखा कि अर्वे हल्मार होलमेन कौन है? इस पर जवाब मिला- ”अर्वे हल्मार होलमेन नॉर्वे के रहने वाले हैं। एक घटना के बाद उन्‍होंने सबका ध्‍यान खींचा। उनके दो बेटे थे। एक दस साल और दूसरा सात। दोनों बच्चे दिसंबर 2020 में अपने घर के पास एक तालाब में मृत मिला। चैटजीपीटी ने आगे लिखा कि घटना ने पूरे देश को चौंका दिया। होलमेन को उनके बच्‍चों की हत्‍या के लिए 21 साल की सजा सुनाई गई।” चिंता, लोग झूठ को सच मान सकते हैं अपने बारे में यह सुनकर अर्वे हल्मार होलमेन को झटका लगा। इसके बाद Noyb नाम के डिजिटल राइट्स ग्रुप ने ओपनएआई की शिकायत की है। इसमें ओपनएआई पर जुर्माना लगाने की मांग की गई है। होल्‍मेन की चिंता इस बात को लेकर है कि लोग इस झूठ को सच मान सकते हैं। चैटजीपीटी के पुराने वर्जन की शिकायत डिजिटल राइट्स ग्रुप के वकील का कहना है कि कोई भी झूठी जानकारी नहीं फैला सकता। इस मामले में ओपनएआई ने कहा है कि शिकायत चैटजीपीटी के पुराने वर्जन के बारे में है। कंपनी के मुताबिक वह अपने मॉडल्‍स को बेहतर बनाने और गलतियों को कम करने के तरीके खोज रही है। डिजिटल राइट्स ग्रुप का कहना है कि चैटजीपीटी को लोगों के बारे में गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए। ग्रोकएआई भी विवादों में चैटजीपीटी के अलावा एलन मस्‍क का ग्रोकएआई भी विवादों में है। भारत में इसने कई यूजर्स को गाली दी है। उनके अपमाजनक भाषा में बात की है। ग्रोकएआई ने कई बड़े नेताओं को भी अपशब्‍द कहे हैं। यही नहीं, दिल्‍ली पुलिस को भी सख्‍त लहजे में जवाब दिया है, जिससे कई यूजर्स नाराज दिख रहे हैं। ग्रोक एआई के मामले में सरकार ने अपने स्‍तर पर जांच की बात कही है। इन घटनाक्रमों ने सवाल उठाया है कि एआई टूल्‍स को किस स्‍तर तक इस्‍तेमाल किया जाना चाहिए। ओपनएआई और एलन मस्‍क के टूल्‍स क्‍या इतने भरोसेमंद हैं कि उन पर विश्‍वास किया जाए। चैटजीपीटी और ग्रोक एआई की तरह ही गूगल का जेमिनीएआई भी विवादों में आ चुका है।

दक्षिणी गाजा पट्टी में बमबारी में हमास का बड़ा नेता समेत 19 मारे गए, इजरायल ने डरावनी बना दीं गाजा की रातें

इजरायल दक्षिणी गाजा पट्टी में रविवार को रातभर हुए इजराइली हमलों में हमास के एक बड़े नेता समेत कम से कम 19 फलस्तीनी मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस बीच, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर एक और मिसाइल दागी, जिससे हवाई हमले के सायरन बजने लगे। इजराइली सेना ने कहा कि मिसाइल को बीच में ही मार गिराया गया और इससे जान-माल का किसी प्रकार का नुकसान होने की जानकारी नहीं है। दक्षिणी गाजा के दो अस्पतालों ने बताया कि रातभर हुए हमलों में मारे गए बच्चों एवं महिलाओं समेत 17 लोगों के शव अस्पताल लाए गए हैं। हमास ने बताया कि खान यूनिस के पास हुए हमले में उसके राजनीतिक ब्यूरो और फलस्तीनी संसद के सदस्य सलाह बर्दाविल और उसकी पत्नी की मौत हो गई। बर्दाविल हमास की राजनीतिक शाखा का जाना-माना सदस्य था। अस्पतालों द्वारा बताई गई मृतकों की संख्या में हमास के नेता और उसकी पत्नी का नाम शामिल नहीं है। इजरायल ने लेबनान में भी कई ठिकानों को निशाना बनाया है जिसमें कम से कम 6 लोगों की मारे जाने की खबर है। पूर्वी और दक्षिणी लेबनान को निशाना बनाकर शनिवार को किए गए इज़रायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोग घायल भी हो गए। लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में, टायर शहर के साथ-साथ कई घाटियों और गांवों को निशाना बनाकर इज़रायली हवाई हमले में छह लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हो गए। साथ ही पूर्वी लेबनान में हुए हमलों में छह लोग घायल हो गए। इस बीच, लेबनान के एक सुरक्षा सूत्र ने बताया कि इज़रायल ने शनिवार शाम तक 15 हवाई हमले किए हैं।

नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में बड़ी सफलता, 22 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

बीजापुर छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में पुलिस को आज एक और बड़ी सफलता मिली है. कोर नक्सल क्षेत्र बीजापुर में 22 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर दिया है. सरेंडर करने वाले नक्सली में तेलंगाना स्टेट कमेटी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर के सदस्य हैं. इनमें से 6 लोगों पर कुल 11 लाख रुपये का ईनाम घोषित था. सभी 22 नक्सली फायरिंग, आईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसे अन्य अपराधों में शामिल रहे हैं. बता दें, प्रदेशभर में नक्सलियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. बीजापुर जिले में वर्ष 2025 में अब तक कुल 107 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 143 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा, 82 माओवादियों को सुरक्षाबलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया है. पुलिस लगातार उनके हथियार, कैश और दैनिक जीवन से संबंधित सामाग्रियों को खोजकर जब्त कर रही है. साथ ही सप्लायरों को भी दबोचा गया है. इससे माओवादी संगठन में काफी दबाव बना है. वहीं सरकार ने नक्सलियों को समाज में वापिस लौटने और एक सामान्य जीवन जीने के लिए भी रास्ता दिया है. सरकार की नियद नेल्लानार और पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. इसी प्रकार आज इन 22 नक्सलियों ने भी सरेंडर कर मुख्यधारा से जुड़ने और प्रदेश के विकास में सहियोग देने के लिए सरेंडर कर दिया है. सभी नक्सलियों ने बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल और उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू सहित अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया. आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को 25-25 हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई है. नक्सलियों के सरेंडर को लेकर पुलिस ने कहा कि “यह आत्मसमर्पण सरकारी पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास को दर्शाता है. यह सफलता सुरक्षा बलों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है.”

मुस्कान का परिवार केस लड़ने को तैयार नहीं है ऐसे में सरकारी वकील के लिए न्यायालय को लिखा पत्र, जेलर से लगाई गुहार

नई दिल्ली दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद आरोपी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी के दिन अब जेल में कट रहे हैं। बताया गया कि जेल में भी वे नशे के लिए तड़पते रहे। वे खाना भी नहीं खा रहे हैं। वहीं जेल प्रशासन ने नशा छुड़वाने के लिए दवाइयों और काउंसलिंग का सहारा लिया है। सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट वीरेश राज शर्मा ने बताया कि उन्हें अलग-अलग बैरक में रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुस्कान का परिवार केस लड़ने को तैयार नहीं है ऐसे में सरकारी वकील के लिए न्यायालय को पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया, तीन दिन पहले मुस्कान और साहिल को जेल में लाया गया था।आते ही वे कहने लगे कि उन्हें पास की बैरक में रखा जाए। हालांकि साफ तौर पर बता दिया गया था कि जेल में जो व्यवस्था है उसके मुताबिक पुरुष और महिला बैरक का कोई कॉन्टैक्ट नहीं होता है। ऐसे में दोनों को अलग-अलग रखा गया है। जब भी कोई बंदी आता है तो उसका स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाता है। पाया गया कि वे नशे के आदी हैं। कारागर मे नशा नहीं मिल सकता। उन्हें दवाई दी जा रही है। नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से उनकी काउंसलिंग हो रही है और योग, मेडिटेशन में लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि आम कैदी उनसे दूर रहें और बार-बार उनके केस के बारे में ना पूछें। उन्होंने बताया, मुस्कान ने मिलने की इच्छा जाहिर की थी। मैंने उसे बुलाया तो उसने कहा कि घर वाले उससे नाराज हैं। वे केस नहीं लड़ेंगे। ऐसे में उसे सरकारी वकील दिलाया जाए। इसको लेकर एक पत्र न्यायालय को भेजा जा रहा है। कैदी का अधिकार है कि उसे वकील मिले और इसके लिए कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा, उन लोगों को जेल का सिस्टम पता नहीं था। महिला और पुरुष के बैरक आधा किलोमीटर दूर हैं। उन्हें समझा दिया गया तो वे मान गए। उन्होंने कहा, वे ड्रग्स की डिमांड तो नहीं कर रहे थे। हालांकि डॉक्टरों ने जानकारी दी कि वे नशा करते हैं। जो लोग ज्यादा समय से नशा ले रहे होते हैं उन्हें दवाई दी जाती है। धीरे-धीरे उनमें सुधार हो रहा है। 10 से 15 दिन में उनकी नशे की आदत छूट जाएगी। उन्होंने कहा कि साहिल ने अभी सरकारी वकील को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। उनका कहा था कि घर वाले केस लड़ेंगे और अगर नहीं लड़ेंगे तो बताया जाएगा। जेल की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा, न्यायालय की प्रक्रिया और हाई प्रोफाइल केस के बारे में ज्यादा कुछ तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सीसीटीवी, जेलरों ओर मैं खुद सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रहे हैं। आम कैदियों से कहा गया है कि केस के बारे में उन्हें बार-बार याद ना दिलवाएं। वे अन्य कैदियों के साथ हैं लेकिन ज्यादा बातचीत ना करने के निर्देश दिया गया है। बता दें कि मुस्कान के माता-पिता ने पहले ही कहा था कि सौरभ अच्छा पति था लेकिन उनकी बेटी ही गलत थी। सौरभ मर्चेंट नेवी में अधिकारी थे। पिछले दो साल से वह लंदन में थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक लंदन से वापस आने के बाद उन्हें मुस्कान और साहिल के अफेयर के बारे में पता चल गया था। इसके बाद मुस्कान और साहिल ने मिलकर उनकी हत्या का प्लान बना डाला। मुस्कान ने सौरभ की हत्या कर शव के टुकड़े ड्रम में छिपा दिए और खुद साहिल के साथ घूमने शिमला चली गई। लगभग 13 दिन बाद पता चला कि ड्रम में सौरभ की लाश है। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया है।

ईशान किशन के शतक से हैदराबाद ने राजस्थान रॉयल्स को दिया 287 का टारगेट, टूर्नामेंट का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर

हैदराबाद हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में एक हाई-स्कोरिंग गेम की उम्मीद है। इस मैच में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। ईशान किशन ने नाबाद 106 रन की पारी खेली। ट्रेविस हेड ने 67 रन की पारी खेली। राजस्थान की तरफ से तीन गेंदबाजों ने 50 या उससे ज्यादा रन दिये। हैदराबाद ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 286 रन बना दिए हैं। राजस्थान को जीत के लिए 287 रन बनाने हैं। ईशान किशन का शतक ईशान किशन ने 45 गेंद पर 10 चौके और 6 छक्कों की मदद से अपना शतक पूरा किया। हैदराबाद ने टूर्नामेंट का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बना दिया है। हैदराबाद ने 279 रन बना दिए हैं। किशन 100 रन बनाकर नाबाद हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर के पास से जले हुए नोटों के नए सबूत मिले, नए वीडियो में मिला सबूत

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर 15 करोड़ की भारी भरकम रकम मिलने से सनसनी मची हुई है। उनके खिलाफ कई वकील कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं तो वहीं जस्टिस यशवंत वर्मा इसे साजिश बता रहे हैं। इस बीच उनके घर के पास से एक नया वीडियो सामने आया है। वीडियो में उनके घर के पास से जले हुए नोटों के नए सबूत मिले हैं। नोटों के इस नए सबूत ने फिर एक बार शक की सुई जस्टिस यशवंत वर्मा की तरफ मोड़ दी है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर के पास से आए इस नए वीडियो में जले हुए नोट देखे जा सकते हैं। देखने पर तो यह 500 के नोट लग रहे हैं जो आधे-अधूरे और फटी हालत में हैं। बता दें कि यशवंत वर्मा के घर आग लगने के बाद मिले 15 करोड़ कैश पर सब हैरत में हैं। इससे पहले हाई कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के कॉल रेकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है। एक सफाई कर्मचारी,इंदरजीत ने बताया कि हम इस इलाके में काम करते हैं। हम सड़कों से कचरा इकट्ठा करते हैं। हम 4-5 दिन पहले यहाँ सफाई कर रहे थे और कचरा इकट्ठा कर रहे थे,तभी हमें जले हुए 500 रुपये के नोटों के कुछ छोटे टुकड़े मिले। हमें वह उस दिन मिला था। अब,हमें 1-2 टुकड़े मिले हैं। हमें नहीं पता कि आग कहां लगी। हम सिर्फ कचरा इकट्ठा करते हैं। शनिवार देर रात सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास पर मिली बेहिसाब नकदी के आरोपों से संबंधित रिपोर्ट,फोटो और वीडियो अपलोड किए। कोर्ट की वेबसाइट पर अब उपलब्ध सामग्री में एक आंतरिक जांच के निष्कर्ष और जस्टिस वर्मा द्वारा आरोपों से इनकार करते हुए दिए गए विस्तृत जवाब का खुलासा किया गया है। 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था।

भाजपा विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, सुशांत सिंह राजपूत को नहीं मिला न्याय

मुंबई बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की 2020 में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इसके बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा विधायक राम कदम ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राम कदम ने कहा कि ठाकरे सरकार ने सुशांत के मामले में जानबूझकर लापरवाही बरती और बिहार पुलिस को मुंबई में जांच करने से रोका था। राम कदम ने एक वीडियो संदेश में कहा, “जब पूरे देश ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की, तब उद्धव ठाकरे सरकार ने जानबूझकर लापरवाही दिखाई। जब बिहार पुलिस मुंबई में जांच करने आई तो उन्हें रोका गया। ऐसा क्यों किया गया? उद्धव ठाकरे सरकार के लोगों को बचाने के लिए सभी सबूत नष्ट कर दिए गए। सुशांत के घर का फर्नीचर हटा लिया गया। उसे पेंट किया गया और फिर वापस उसके असली मालिक को लौटा दिया गया।” इसके साथ ही राम कदम ने यह भी आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे की सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को न्याय दिलाने में अड़चन डाली। उन्होंने कहा, “अगर उद्धव ठाकरे ने सही समय पर इस मामले को सीबीआई के हवाले किया होता तो सुशांत के परिवार को निश्चित रूप से न्याय मिलता। अगर आज उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है तो इसके लिए उद्धव ठाकरे सरकार जिम्मेदार है।” सीबीआई ने शनिवार को मुंबई कोर्ट में सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। यह रिपोर्ट सुशांत की मौत के लगभग पांच साल बाद दाखिल की गई है। सीबीआई की रिपोर्ट में यह कहा गया कि सुशांत की मौत आत्महत्या के रूप में दर्ज की गई थी और इसमें किसी भी तरह की साजिश या हत्या का आरोप नहीं पाया गया है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का शव 14 जून, 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट से बरामद हुआ था। उनकी मौत के बाद पूरे देश में उथल-पुथल मच गई थी और मामले की जांच के लिए सीबीआई को सौंपने की मांग उठने लगी थी। सुशांत के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण “आस्फीक्सिया” बताया गया था, जो कि सांस न लेने के कारण होता है। दिशा सालियान की मौत का मामला भी गरमाया इस बीच, सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में भी हलचल तेज हो गई है। दिशा की मृत्यु 8 जून, 2020 को हुई थी, यानी सुशांत की मौत से छह दिन पहले। दिशा के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की मौत की पुनः जांच की मांग की है और आदित्य ठाकरे सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी अपील की है। दिशा की मौत की परिस्थितियां भी संदिग्ध बताई जाती रही हैं और इसे सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जोड़ा गया है। अब सतीश सालियान की याचिका के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

फगान तालिबान ने दो सालों से कैद में बैठे अमेरिकी शख्स को पिछले हफ्ते किया रिहा, हक्कानी के ऊपर से हटाया इनाम

वाशिंगटन संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगान तालिबान के साथ अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अफगान तालिबान ने दो सालों से कैद में बैठे अमेरिकी शख्स को पिछले हफ्ते रिहा कर दिया था। इसके बाद अब अमेरिकी सरकार ने भी तालिबान के तीन प्रमुख नेताओं सिराजुद्दीन हक्कानी, अब्दुल अजीज हक्कानी, याह्या हक्कानी पर से कई मिलियन डॉलर के भारी भरकम इनाम हटा लिया है। अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि तीन लोगों पर से अमेरिका इनाम को हटाया गया है इनमें से दो सगे भाई हैं, जबकि तीसरा उनका ही चचेरा भाई है। अमेरिका ने इनकी सूचना देने पर यह इनाम रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, हक्कानी के ऊपर रखे गए इनाम को हटाने की घोषणा शनिवार को ही कर दी गई थी। लेकिन इसके बाद भी अभी तक एफबीआई की वेबसाइट से इनाम की सूची में से हक्कानी का नाम नहीं हटाया गया है। इस सूची में कहा गया है कि हक्कानी के ऊपर अफगानिस्तान में संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटो के सैनिकों के खिलाफ सीमा पार हमलों की व्यवस्था करने और उनमें भाग लेने का आरोप है। हक्कानी के ऊपर से इनाम हटाने का निर्णय गुरुवार को तालिबान द्वारा अमेरिकी नागरिक को रिहा करने के बाद लिया गया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसके बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में लिखा कि जॉर्ज ग्लीजमैन, जिन्हें ढाई साल से अफगानिस्तान में गलत तरीके से गिरफ्तार करके रखा गया था उन्हें रिहा कर दिया गया है। 65 साल के ग्लीजमैन को ढाई साल पहले उस वक्त तालिबान द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, जब वह अफगानिस्तान की यात्रा पर गए हुए थे। न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ट्रम्प के विशेष बंधक दूत एडम बोहलर, तालिबान अधिकारियों और कतर के अधिकारियों द्वारा मध्यस्थता की गई बातचीत के बाद उन्हें रिहा किया। अमेरिका द्वारा तालिबानी नेताओं के ऊपर से इनाम हटाने के इस घटनाक्रम को तालिबान द्वारा एक जीत के रूप में देखा जा रहा है। एक अधिकारी शफी आजम ने इस पूरे घटनाक्रम को 2025 में दोनों देशों के बीच में संबंधों के सामान्यीकरण की शुरुआत बताते हुए कहा कि इस के बाद दोनों देशों के संबंधों में सामान्य होने की शुरुआत मान सकते हैं। इससे पहले तालिबान ने घोषणा की थी कि वह नॉर्वे में अफगानिस्तान के दूतावास पर नियंत्रण कर रहा है। 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से चीन अफगान राजनयिकों को स्वीकार करने वाला पहला देश रहा। कई अन्य देशों ने भी तालिबान के प्रतिनिधियों को स्वीकार किया है।

भारतीय संविधान में धर्म आधारित आरक्षण को स्वीकार नहीं किया गया था: आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसाबले

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मुस्लिमों को ठेकेदारी में 4 प्रतिशत आरक्षण देने के कर्नाटक सरकार के फैसले का विरोध किया है। आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसाबले ने कहा कि भारतीय संविधान में धर्म आधारित आरक्षण को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने तैयार किया था। इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने शनिवार को अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा में संगठनात्मक कार्यों का विश्लेषण, विकास, प्रभाव और समाज परिवर्तन पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि संघ ने गत 100 वर्षों में कार्य के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित किया है। संघ की यात्रा के बारे में जानकारी दी और एक शाखा से लेकर पूरे देश में क्रमिक विस्तार की जानकारी रखी। उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य ‘सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी’ होना है, जो समाज और राष्ट्र के सभी पहलुओं को स्पर्श करे। संघ आज देश के 134 प्रमुख संस्थानों (premiere institutions) में मौजूद है और आने वाले वर्षों में सभी संस्थानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। बांग्लादेश में हिन्दुओं के उत्पीड़न पर प्रस्ताव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित ‘बांग्लादेश के हिन्दू समाज के साथ एकजुटता से खड़े होने का आह्वान’ शीर्षक वाले प्रस्ताव पर कहा कि संघ बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों के हाथों हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हो रही हिंसा, उत्पीड़न और लक्षित उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। बांग्लादेश की स्थिति पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि धार्मिक संस्थानों पर व्यवस्थित हमलों, क्रूर हत्याओं, जबरन धर्मांतरण और हिन्दुओं की संपत्तियों को नष्ट करने के चक्र ने बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। प्रस्ताव में धार्मिक असहिष्णुता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के इन कृत्यों की कड़ी निंदा की गई है और वैश्विक समुदाय से निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार अरुण कुमार ने कहा कि मठों, मंदिरों पर हमले, देवी-देवताओं की अपवित्रता, संपत्तियों की लूट और जबरन धर्म परिवर्तन निंदनीय है, लेकिन संस्थागत उदासीनता और सरकारी निष्क्रियता के कारण अपराधियों का हौसला बढ़ गया है। बांग्लादेश में हिन्दू आबादी में लगातार गिरावट पर अरुण जी ने कहा कि 1951 में 22% से घटकर आज केवल 7.95% रह गई है, यह संकट की गंभीरता को दर्शाता है। हिन्दुओं का ऐतिहासिक उत्पीड़न, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बीच, एक सतत मुद्दा बना हुआ है। हालांकि, पिछले साल संगठित हिंसा का स्तर और सरकार की निष्क्रियता चिंताजनक है।

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