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मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में असमर्थ, नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता, तेजी से काम करना होगा

इंदौर  मास्टर प्लान के तहत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का खामियाजा लंबे समय तक शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। 17 पहले बनी योजना के तहत बन रही ये सड़कें भी अब शहर का यातायात संभालने में सक्षम नहीं होंगी। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना होगा। इधर मास्टर प्लान के तहत सड़कों का निर्माण अधूरा होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खोदी गई सड़कें यातायात को कर रही बाधित सड़कों का काम समय पर पूर्ण नहीं होने से लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात को बाधित कर रही हैं। इनकी वजह से रोज हादसे हो रहे हैं। जिन सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है, उनका काम भी धीमी गति से जारी है। ऐसे में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर काम हुआ, वह भी टुकड़ों-टुकड़ों में बनी हैं और आधी-अधूरी हालत में छोड़ दी गई हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है। देरी से बढ़ गई निर्माण लागत मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कें दशकों तक नहीं बनने के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है। कई लोगों को अन्य स्थानों पर विस्थापित करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत शुरुआत में 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार पहुंच गई है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एमआर-11 को बनाने में 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। एमआर-12 को बनाने में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है। अन्य शहरों को जाने वाले वाहन शहर में करते हैं प्रवेश एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण पूरा नहीं होने से भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड जाने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सर्वाधिक दबाव एमआर-10 पर है। यदि एमआर-11 बन गया होता तो बायपास से वाहन एबी रोड पहुंच सकते थे। एमआर-12 के बनने से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने से अभी विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का खासा दबाव देखा जाता है। इनका निर्माण हुआ शुरू, लेकिन कई बाधाएं -एमआर-4 : रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण सड़क पर आ रहे हैं। – एमआर-5 : इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर भी लक्ष्मीबाई मंडी के आगे सुपर कारिडोर की तरफ कई अतिक्रमण हैं। – एमआर-11 : बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर कई अतिक्रमण हैं। इस सड़क का समय पर निर्माण नहीं होने से कई विकास अनुमतियां जारी हो गईं। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट तय किया जा सकता है। – एमआर-12 : बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएं हैं। गत दो साल से टुकड़ों में इसका निर्माण किया जा रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से ज्यादा घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। टुकड़ों- टुकड़ों में बनाया     मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 को बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एमआर-12 का चार किमी हिस्सा टुकड़ों-टुकड़ों में बनाया जा चुका है। शेष सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का काम शुरू किया जाएगा। सिंहस्थ तक इस सड़क को बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए सड़कों के लिए राशि आवंटित हुई     मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का काम शुरू हो गया है और कुछ का काम जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करने का है। हमें पूरा विश्वास है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है। कार्यादेश भी जारी हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर    

संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी जल्द !क्यों चर्चा में हैं आए पुराने ‘साथी’, जानिए संयोग

मुंबई/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे और संसद सत्र के खत्म होने के बाद बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बेंगलुरु में हाेने की संभावना है। यह बैठक अप्रैल के तीसरी हफ्ते में प्रस्तावित है। इस बैठक में बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पहले अप्रैल बीजेपी का इस हफ्ते 6 अप्रैल को स्थापना दिवस है। बीजेपी के स्थापना दिवस के दिन ही रामनवमी का पर्व है। बीजेपी द्वारा इस मौके को बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट किए जाने की उम्मीद है, तो वहीं दूसरी तरफ कभी बीजेपी के कद्दावर संगठन मंत्री रह चुके संजय जोशी का जन्मदिन भी 6 अप्रैल को है। 6 अप्रैल से है अनूठा संयोग पीएम मोदी के नागपुर दौरे के बाद संजय जोशी के नाम की चर्चा एक बार फिर हो रही है। उनके करीबियों को भरोसा है कि ऐसे में जब इसी साल अक्तूबर को संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो रहे हैं। उससे पहले संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी हो सकती है। कुछ स्थानों पर संजय जोशी के जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर भी सामने आए हैं। संजय जोशी की उम्र अभी 62 साल है। ऐसे में 75 साल उम्र सीमा को देखते हुए उनके पास अभी वापसी का समय बचा हुआ है। यही वजह है कि संजय जोशी को पसंद करने वालों ने पीएम मोदी की नागपुर यात्रा के बाद नई उम्मीदें बांध ली है। जोशी के करीबियों का कहना है कि भले ही संजय जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष न बने लेकिन उनकी सक्रियता बढ़ेगी। सात सालों तक साथ किया काम 6 अप्रैल, 1962 को जन्में संजय जोशी लंबे समय से एक सीमित भूमिका में सक्रिय हैं। वह भी पीएम मोदी की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रह चुके हैं। जोशी 2001 से लेकर 2005 तक बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। नागपुर में जन्मे और वहां कुल साल तक प्रोफेसर रहे जोशी गुजरात में भी काम कर चुके हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बीजेपी में 1987 में आए थे। इसके एक साल बाद जोशी को संघ ने बीजेपी गुजरात में भेजा था। इसके बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ 1988 से 1995 तक लगातार काम किया था। 1995 में पहली बार बीजेपी को गुजरात में सत्ता का स्वाद चखने को मिला था। तब देना पड़ा था इस्तीफा संजय जोशी को आखिरी बार नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते हुए 2011 में जोशी को विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी सौंपीं थी लेकिन तब उनकी वापसी को बीजेपी में स्वीकार नहीं किया था। चुनावों के बाद उन्हें मई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से और एक महीने बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में जोशी जोशी पिछले 12 सालों से अज्ञातवास में हैं। ऐसे में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 27 सितंबर, 2025 को 100 पूरे होंगे और इसी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल की आयु पूरी करेंगे, क्या उसके पहले संजय जोशी की वापसी हो पाएगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पीएम मोदी की बेहद अच्छे माहौल में संघ मुख्यालय की यात्रा के बाद समर्थकों को उम्मीद है कि नई शुरुआत हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने की समय-सीमा निर्धारित

भोपाल एमपी सरकार अगले तीन साल में प्रदेश की सभी बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करें।  सभी जिलों में सड़कों की आवश्यकता का वैज्ञानिक आधार पर सर्वे कर कार्य-योजना बनाई जाए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की बैठक में पीएम ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में मंत्री प्रहलाद पटेल, सीएस अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। एआइ का करें उपयोग सीएम ने कहा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्त, उन्नयन के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। सड़कों के रखरखाव, निरीक्षण में ऐप, जियो टैगिंग और एआइ का उपयोग कर और प्रभावी बनाया जाए। बैठक में बताया गया कि 89 हजार बसाहटों में से 50,658 बसाहटें सड़क मार्ग से जुड़ चुकी हैं। ग्राम सड़क योजना-4 के तहत बनने वाली 11,544 बसाहटों के लिए सर्वे कर लिया गया है। शेष 26,798 बसाहटों की कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार द्वारा पहल की जा रही है। 89 हजार में से 50 हजार बसाहटों में सड़कें अधिकारियों ने सीएम को बताया कि जनमन योजना के अंतर्गत पाण्डाटोला से बीजाटोला तक देश की पहली सड़क का निर्माण बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र में किया गया है। मेंटेनेंस और उन्नयन के लिए भारत सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। मार्गों के संधारण के लिए 2015-16 से लागू ई-मार्ग पोर्टल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई तथा केंद्र द्वारा इसे पूरे देश में नेशनल ई-मार्ग के रूप में लागू किया गया है। सीएम ने कहा कि सड़कों पर वर्तमान यातायात का सर्वे कर उन्नयन और लेन विस्तारीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए।

Ladli Laxmi Yojana: मध्य प्रदेश के कई जिलों में लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए बजट ही नहीं

Ladli Laxmi Yojana

Ladli Laxmi Yojana: There is no budget for Ladli Laxmi Yojana in many districts of Madhya Pradesh ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार ने कई जिलों की पात्र बालिकाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना की पिछली वित्तीय वर्ष की राशि अभी तक आवंटित नहीं की है। इसके पीछे सरकार के पास बजट की कमी बताई जा रही है। असल में, लाड़ली लक्ष्मी योजना के बजट का मद अलग है, शासन स्तर पर इसका एक पूल बना हुआ है, जिसमें जिलों को राशि का आवंटन हर वर्ष शासन से किया जाता है। आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 20 से 31 मार्च के बीच इसका बजट शासन से पूल में जारी कर दिया जाता रहा है लेकिन अप्रैल माह का प्रथम सप्ताह आ जाने के बावजूद ग्वालियर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ सहित कई जिले बजट आवंटित होने से वंचित रह गए हैं। 36 हजार से ज्यादा बालिकाओं को नहीं मिली किश्तग्वालियर में 36 हजार से ज्यादा पात्र बालिकाओं को बीते वित्तीय वर्ष की किश्त नहीं मिल पाई है। यहां योजना के मद में 22 करोड़ से ज्यादा का भुगतान होना है। ग्वालियर के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएस जादौन का कहना है कि शासन स्तर से बताया गया है कि जल्द ही धनराशि जारी कर दी जाएगी। बता दें कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत की थी। बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर व स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार तथा उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले अभिभावक को बच्ची के जन्म के समय पंजीकरण कराना होता है। पात्र बच्चियों के खाते में प्रतिवर्ष छह हजार रुपये लगातार पांच वर्ष तक जमा किए जाते हैं। 21 वर्ष की आयु होने पर ब्याज की राशि मिलाकर प्रत्येक बालिका को कुल एक लाख 43 हजार रुपए मिलते हैं। संबल में भी ली गई थी लाड़ली योजना की राशिपूर्व में जब प्रदेश में संबल योजना शुरू की गई थी तो इसके लिए लाडली लक्ष्मी योजना के मद से राशि ली गई थी, यह राशि इसके बाद वापस नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि लाडली लक्ष्मी योजना के मद से इसलिए भी राशि लिया जाना संभव हो जाता है, क्योंकि इसमें बड़ी राशि पूल में होती है।

Ghibli ट्रेंड सिर्फ मजेदार फोटो नहीं, यह आपकी प्राइवेसी के लिए है खतरा?

Ghibli trend is not just a fun photo, is it a threat to your privacy? Ghibli AI ट्रेंड सिर्फ मजेदार इमेजेस नहीं, बल्कि आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा भी बन सकता है। जानें कि AI-Generated Ghibli पोर्ट्रेट्स कैसे आपकी डिजिटल सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं… Ghibli AI Trend: जब से ओपनएआइ ने चैटजीपीटी के घिबली-स्टाइल एआइ इमेज जनरेटर को लॉन्च किया है, तब से इसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। राजनेता हों या मशहूर हस्तियां, हर कोई घिबली के दिग्गज हयाओ मियाज़ाकी की खास शैली में अपने एआइ-जनरेटेड पोर्ट्रेट शेयर करता दिखाई देता है। एक ओर यह ट्रेंड हावी है तो दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स लोगों को इसके जोखिमों से रूबरू कर रहे हैं। उनका दावा है कि ओपनएआइ इस ट्रेंड का उपयोग एआइ प्रशिक्षण के लिए लाखों व्यक्तिगत छवियों को इकट्ठा करने के तरीके के रूप में कर सकता है। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि वे अनजाने में ओपनएआइ को नया फेशियल डेटा सौंप रहे हैं जिससे प्राइवेसी संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं। AI टूल्स के लिए जरूरी सुरक्षा उपायजनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) के तहत, ओपनएआइ को ‘वैध हित’ के कानूनी आधार के तहत इंटरनेट से इमेज-हार्वेस्टिंग (स्क्रेपिंग) का औचित्य सिद्ध करना चाहिए, जिसका अर्थ है कि उन्हें उपयोगकर्ता की गोपनीयता की रक्षा करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। डिजिटल प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स के अनुसार ओपनएआइ या अन्य टूल्स यह प्रदर्शित करें कि डेटा संग्रह आवश्यक है, यह व्यक्तियों के अधिकारों का हनन नहीं करता है, और सख्त पारदर्शिता और जवाबदेही उपायों का पालन किया जाता है। सहमति और स्वतंत्रताएआई, टेक एंड प्राइवेसी एकेडमी की सह-संस्थापक लुइजा जारोव्स्की के अनुसार, जब लोग स्वेच्छा से इन छवियों को अपलोड करते हैं, तो वे ओपनएआइ को उन्हें संसाधित करने के लिए अपनी सहमति देते हैं (जीडीपीआर का अनुच्छेद 6.1.ए)। यह एक अलग कानूनी आधार है जो ओपनएआइ को अधिक स्वतंत्रता देता है, और इस तरह वैध हित संतुलन परीक्षण लागू नहीं होता है। कैसे सुरक्षित रखें अपना बायोमेट्रिक डेटाएआइ द्वारा जनरेट की गई छवियों के लिए व्यक्तिगत फोटो अपलोड करने से पहले दो बार सोचें।ऐसे कर सकते हैं अपनी गोपनीयता की सुरक्षासोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन वाली छवियों को साझा करने से बचें, एआइ प्रशिक्षण, डेटा वर्गीकरण और अन्य अनुप्रयोगों के लिए डेटा हार्वेस्टिंग की तकनीक इमेज-स्क्रेपिंग में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।डिवाइस को अनलॉक करने के लिए चेहरे की पहचान के बजाय पिन या पासवर्ड का उपयोग करें। ऐप्स की कैमरे तक एक्सेस को सीमित करें। समय-समय पर सेटिंग्स में एक्सेस को जांचते रहें।

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